Showing posts with label In News. Show all posts
Showing posts with label In News. Show all posts

क्यू से लेकर क्‍यूआर कोड तक: यूपीआई, आरटीजीएस, आईएमपीएस -जाने भारत की भुगतान क्रांति के बारे में

UPI Payment QR Code

2021 में 216 बैंकों से बढ़कर जनवरी 2026 तक 691 बैंकों तक पहुँचते हुए, यूनीफाइट पेमेन्‍ट्स इंटरफेस (यूपीआई)  एक एकीकृत भुगतान संरचना बन गई है, जहाँ उपयोगकर्ता अपने किसी भी बैंक या प्लेटफॉर्म से आसानी से लेन-देन कर सकते हैं। कुछ समय पहले तक, एक साधारण वित्तीय लेन-देन के लिए समय, मेहनत और धैर्य जरूरी होता था। बिलों का भुगतान करने के लिए लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता था। पैसे भेजने के लिए बैंक जाना, फॉर्म भरना और पुष्टि के लिए कई दिनों तक इंतज़ार करना पड़ता था। भारत में उन लाखों लोगों के लिए जिनके पास बैंकिंग सुविधा नहीं थी, इसका मतलब था वित्तीय प्रणाली से बाहर रहना। हालांकि, ऐसा भारत अब अतीत बन चुका है।

भारत की वित्तीय यात्रा सदियों में विकसित हुई है—वस्‍तु विनिमय प्रणाली और कौड़ी सीप से लेकर सिक्कों, कागज़ी मुद्रा और चेक तक। अपने आधुनिक इतिहास के अधिकांश समय, लेन-देन का प्रमुख माध्यम नकदी बना रहा। हालांकि चेक और डिमांड ड्राफ्ट ने भुगतान को औपचारिक रूप दिया, वे धीमे थे और केवल सीमित वर्ग तक ही सुलभ थे। बैंकिंग ढांचा मुख्यतः शहरी क्षेत्रों तक सीमित थी, जिससे ग्रामीण और दूरदराज़ की आबादी वंचित रह गई।

2000 के शुरुआती दशक ने भुगतान प्रणाली में डिजिटल परिवर्तन की शुरुआत की। भारतीय रिजर्व बैंक ने 2004 में रियल-टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (आरटीजीएस) और 2010 में इमीडिएट पेमेंट सर्विस (आईएमपीएस) जैसी प्रणालियाँ शुरू कीं, जिससे तेज़ और चौबीस घंटे धन का हस्तांतरण संभव हुआ। ये महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ थीं, लेकिन इनकी पहुँच मुख्यतः उन्हीं लोगों तक सीमित रही जो पहले से ही बैंकिंग प्रणाली का हिस्सा थे, और अभी भी अनेक लोगों के लिए औपचारिक वित्तीय सेवाओं की पहुंच सीमित रही।

भारत की एक बड़ी आबादी औपचारिक वित्तीय प्रणाली से बाहर रही—उनकी ऋण, बीमा या सुरक्षित बचत जैसी सुविधाओं तक पहुंच नहीं थी। एक स्केलेबल, समावेशी और रियल-टाइम डिजिटल ढांचे की कमी का मतलब था कि आर्थिक विकास के लाभ सभी तक पूरी तरह नहीं पहुंच पा रहे थे। एक परिवर्तनकारी बदलाव की आवश्यकता स्पष्ट थी, और इसी आवश्यकता ने भारत की डिजिटल भुगतान क्रांति की नींव रखी।

जेएएम ट्रिनिटी: डिजिटल बैंकिंग के लिए एक संरचनात्मक बदलाव

भारत की डिजिटल भुगतान क्रांति एक मजबूत आधारभूत संरचना पर टिकी है, जिसमें तीन प्रमुख स्तंभ शामिल हैं—प्रधान मंत्री जन-धन योजना (जन धन), आधार, और मोबाइल कनेक्टिविटी। इन्हें सामूहिक रूप से जेएएम ट्रिनिटी कहा जाता है। प्रत्येक स्तंभ का अपना अलग उद्देश्य है, लेकिन साथ मिलकर इन्होंने लीकेज को कम करके, औपचारिक बैंकिंग में भरोसा बढ़ाकर, और नागरिकों को डिजिटल सेवाओं से जुड़ने के लिए तैयार करके वित्तीय इकोसिस्‍टम को मजबूत किया है।

“जेएएम ट्रिनिटी ने हमारी बैंकिंग प्रणाली को पूरी तरह एक नए स्तर पर पहुँचा दिया है।”



वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण

प्रधान मंत्री जन-धन योजना ने बड़े पैमाने पर शून्य-बैलेंस खाते खुलवाने के माध्यम से लाखों लोगों को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा है, जिससे सबसे वंचित वर्ग भी वित्तीय रूप से जुड़ सका है। आधार ने एक विश्वसनीय डिजिटल पहचान प्रदान करके इस बुनियाद को और मजबूत किया है, जिससे बेरोकटोक सेवाएं प्रदान करने का सटीक लक्ष्य और निर्बाध वितरण संभव हुआ है। इन दोनों के पूरक के रूप में, मोबाइल कनेक्टिविटी और इंटरनेट पहुंच के तेज़ी से विस्तार ने नागरिकों को संचार, प्रमाणीकरण और लेन-देन के लिए एक सुविधाजनक और रियल-टाइम माध्यम प्रदान किया है।

इस एकीकृत ढांचे को प्रत्‍यक्ष लाभ हस्‍तांतरण (डीबीटी) प्रणाली के माध्यम से पूर्ण रूप मिला, जिसने सरकारी लाभों को सीधे बैंक खातों में पहुँचाने की प्रक्रिया को सरल बना दिया है। बिचौलियों को कम करके और पारदर्शिता बढ़ाकर, डीबीटी ने दक्षता में सुधार किया है और साथ ही डिजिटल प्रणालियों में विश्वास भी मजबूत किया है।

महत्वपूर्ण बात यह है कि यह परिवर्तन केवल पहुंच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने सहभागिता को भी सक्षम बनाया है। जैसे-जैसे नागरिक डीबीटी से जुड़े, वे डिजिटल वित्तीय लेन-देन के प्रति अधिक परिचित होते गए, जिससे यूनीफाइट पेमेन्‍ट्स इंटरफेस (यूपीआई) जैसे प्लेटफॉर्म व्यापक रूप से अपनाने का मार्ग प्रशस्त हुआ।

यूपीआई : एक क्रांतिकारी नवाचार

2016 में, भारतीय राष्‍ट्रीय भुगतान निगम ने यूनीफाइट पेमेन्‍ट्स इंटरफेस (यूपीआई) की शुरूआत की—एक ऐसी प्रणाली जिसने भारत में पैसे के लेन-देन के तरीके को मूल रूप से सरल बना दिया। अपने मूल में, यूपीआई किसी भी बैंक खाते को एक वर्चुअल पेमेंट एड्रेस के माध्यम से दूसरे खाते से जोड़ने की सुविधा देता है, जिससे विस्तृत बैंकिंग जानकारी साझा करने की आवश्यकता समाप्त हो जाती है।

यूपीआई का विचार अपनी विलक्षण था। अब न तो खाता नंबर याद रखने की जरूरत है और न ही जटिल विवरण भरने की। यह प्रणाली खाता संख्या और आईएफएससी कोड जैसे जटिल इनपुट को एक आसान इंटरफ़ेस से बदल देती है। उपयोगकर्ताओं को केवल एक मोबाइल नंबर, एक यूपीआई आईडी और सुरक्षित प्रमाणीकरण की आवश्यकता होती है, जिससे वे तुरंत धन हस्तांतरण कर सकते हैं। लेन-देन रियल-टाइम में होते हैं, 24×7 उपलब्ध रहते हैं, और विभिन्न बैंकों व ऐप्स के बीच सहज रूप से काम करते हैं।

यह पारस्‍परिकता ही यूपीआई के तेज़ विस्तार का मुख्य कारण रही है। 2021 में 216 बैंकों से बढ़कर जनवरी 2026 तक 691 बैंकों तक पहुँचते हुए, यह एक एकीकृत भुगतान संरचना बन गई है, जहाँ उपयोगकर्ता अपने किसी भी बैंक या प्लेटफॉर्म से आसानी से लेन-देन कर सकते हैं। इसके साथ ही, इसकी कम लागत वाली संरचना ने व्यक्तियों और व्यापारियों दोनों के लिए बाधाओं को कम किया है और बैंकों व फिनटेक कंपनियों के बीच नवाचार को बढ़ावा दिया है।

जैसे-जैसे यूपीआई का विस्तार हुआ, इसका प्रभाव केवल भुगतान की सुविधा तक सीमित नहीं रहा। इसने व्यक्तियों, छोटे व्यवसायों और असंगठित क्षेत्र के कामगारों की वित्तीय प्रणाली में भागीदारी के तरीके को बदलना शुरू कर दिया। डिजिटल लेन-देन अधिक सुलभ, विश्वसनीय और विभिन्न क्षेत्रों व आय वर्गों में व्यापक रूप से अपनाए जाने लगे।

यूपीआई के आँकड़े: पैमाना, गति और वैश्विक नेतृत्व

जनवरी 2026 में ही किए गए लेन-देन-21.70 बिलियन

जनवरी 2026 में संसाधित कुल मूल्य- 28.33 लाख करोड़ रुपये

भारत में सभी खुदरा डिजिटल लेन-देन में हिस्सा- 81 प्रतिशत

वैश्विक रियल-टाइम भुगतान लेन-देन में भारत की हिस्सेदारी- 49 प्रतिशत

यूपीआई: संख्या के आधार पर दुनिया की सबसे बड़ी रियल-टाइम भुगतान प्रणाली

दुनिया के अग्रणी भुगतान इकोसिस्‍टम को बनाने में लगा समय-10 वर्ष से कम समय में

सहूलियत के अलावा: वित्तीय पहुंच का विस्तार

यूपीआई केवल भुगतान को सरल बनाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने वित्तीय प्रणाली में भागीदारी के स्वरूप को भी बदल दिया है। त्वरित और कम लागत वाले लेन-देन को सक्षम बनाकर, इसने नकदी पर निर्भरता को कम किया है, दक्षता बढ़ाई है और लाखों लोगों के लिए औपचारिक वित्तीय सेवाओं तक पहुंच खोली है। छोटे व्यापारियों और असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए यह बदलाव विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे ऋण, बीमा और बचत के नए अवसर उत्पन्न हुए हैं।

इसकी असली कहानी लेन-देन की संख्या में नहीं, बल्कि यह है कि लेन-देन कौन कर रहा है। ऑटो-रिक्शा चालक अब क्‍यूआर कोड के माध्यम से भुगतान स्वीकार कर रहे हैं। गांवों की मंडियों में लेन-देन तुरंत निपटाए जा रहे हैं। सड़क किनारे विक्रेताओं को अब छुट्टे पैसों की चिंता नहीं करनी पड़ती। एक घरेलू कामगार भी एक साधारण स्मार्टफोन की मदद से कुछ ही सेकंड में राज्यों के बीच पैसे भेज सकता है। इस प्रणाली में शहरी और ग्रामीण, औपचारिक और अनौपचारिक के बीच की खाई धीरे-धीरे खत्म हो रही है—जो वित्तीय समावेशन की दिशा में एक निर्णायक बदलाव को दर्शाती है।

साथ ही यूपीआई अब एक व्यापक वित्तीय प्लेटफ़ॉर्म के रूप में विकसित हो रहा है। यूपीआई लाइट तेज़ और छोटे मूल्य के भुगतानों को आसान बनाता है, जबकि यूपीआई ऑटो पे उपयोगिता बिलों और सब्सक्रिप्शन जैसे आवर्ती खर्चों को सरल और स्वचालित करता है। यूपीआई पर क्रेडिट की सुविधा इसके दायरे को और आगे बढ़ाती है, जिससे पूर्व-स्वीकृत क्रेडिट लाइनों तक पहुंच संभव होती है। इस मजबूत अवसंरचना के आधार पर, एनबीएफसी और फिनटेक कंपनियाँ ऋण प्रदान कर रही हैं, पुनर्भुगतान को सक्षम बना रही हैं और जरूरतों के अनुरूप वित्तीय उत्पाद पेश कर रही हैं—जिससे पूरे देश में औपचारिक वित्तीय सेवाओं की पहुंच लगातार बढ़ रही है।

डिजिटल भुगतान: पहुंच, दक्षता, सुरक्षा और विश्वास बढ़ाना

इस विस्तारित इकोसिस्‍टम के आधार पर, यूपीआई अब देश की रोज़मर्रा की आर्थिक संरचना का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। जिसे कभी सिर्फ सहूलियत समझा जाता था, वह अब एक विश्वसनीय प्रणाली बन गया है, जो व्यक्तियों, व्यवसायों और वित्तीय संस्थानों—सभी की मदद करता है।

उपयोगकर्ताओं के लिए, इसका अनुभव सरलता और विश्वास से परिभाषित होता है। लेन-देन कभी भी, कहीं से भी, एक ही एप्लिकेशन के माध्यम से किए जा सकते हैं, जो कई बैंक खातों से जुड़ा होता है। संवेदनशील बैंकिंग जानकारी साझा करने की आवश्यकता नहीं होती, और अंतर्निहित सुरक्षा उपाय यह सुनिश्चित करते हैं कि भुगतान सुरक्षित रहें। ऐप्स के भीतर उपलब्ध सहायता सुविधाएँ शिकायत निवारण को भी आसान बनाती हैं, जिससे यह प्रणाली पहली बार उपयोग करने वालों के लिए भी सुलभ हो जाती है।

डिजिटल भुगतान में विश्वास को और मजबूत करते हुए, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने 1 अप्रैल 2026 से डिजिटल भुगतान लेन-देन के लिए उन्नत प्रमाणीकरण तंत्र लागू किए हैं। दो-स्तरीय प्रमाणीकरण का यह प्रावधान सुनिश्चित करता है कि हर लेन-देन कई स्तरों पर सत्यापित हो—जैसे पिन, बायोमेट्रिक्स या सुरक्षित टोकन के साथ ओटीपी। इससे धोखाधड़ी के जोखिम में उल्लेखनीय कमी आई है और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भरोसा और मजबूत हुआ है।

व्यापारियों के लिए, यह नकदी संभालने की आवश्यकता के बिना तेज़ और कुशल तरीके से भुगतान प्राप्त करने का माध्यम प्रदान करता है। इससे व्यवसायों को व्यापक ग्राहक आधार तक पहुंचने में मदद मिलती है, खासकर उन ग्राहकों तक जो कार्ड या नकद के बजाय मोबाइल-आधारित भुगतान को प्राथमिकता देते हैं। चाहे छोटे दुकानों में हो, सड़क बाज़ारों में या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर—लेन-देन तुरंत पूरे होते हैं, जिससे देरी और नकदी प्रबंधन या रिटर्न जैसी परिचालन चुनौतियाँ कम होती हैं।

बैंकों और वित्तीय संस्थानों के लिए, यह मौजूदा प्रणालियों का उपयोग करते हुए सुरक्षित और रियल-टाइम लेन-देन को सक्षम बनाकर सेवा वितरण को बेहतर बनाता है। यह बड़े पैमाने पर व्यक्ति-से-व्यक्ति और व्यापारी भुगतानों का समर्थन करता है, साथ ही मजबूत सुरक्षा उपायों को बनाए रखते हुए दक्षता में सुधार करता है और औपचारिक वित्तीय सेवाओं तक पहुंच का विस्तार करता है।

भारत का नवाचार: विश्‍व पर प्रभाव बनाता हुआ

भारत का डिजिटल भुगतान इकोसिस्‍टम न केवल घरेलू आवश्यकताओं को पूरा करने में सफल रहा है, बल्कि वैश्विक स्तर पर एक आदर्श मॉडल के रूप में भी उभरा है। अंतर्राष्‍ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्‍व बैंक जैसे संस्थानों ने इसकी व्यापकता, दक्षता और समावेशिता को सराहा है।

वैश्विक नेताओं, जैसे फ्रांस के राष्‍ट्रपति श्री इमैनुएल मैक्रों ने भी भारत की इस उपलब्धि पर गौर किया है कि यूपीआई के माध्यम से हर महीने 20 अरब से अधिक लेन-देन किए जाते हैं—जो किसी भी अन्य रियल-टाइम भुगतान प्रणाली के मुकाबले बेजोड़ है।

यूपीआई अब राष्ट्रीय सीमाओं से आगे बढ़ चुका है और संयुक्‍त अरब अमीरात, सिंगापुर, भुटान, नेपाल, श्रीलंका, फ्रांस, मॉरीशस और कतर सहित कई देशों में चल रहा है या उनकी भुगतान प्रणालियों से जुड़ा हुआ है। यह बढ़ता हुआ अंतरराष्ट्रीय विस्तार सीमा-पार लेन-देन को आसान बना रहा है, रकम भेजने में मदद कर रहा है और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देते हुए वैश्विक फिनटेक परिदृश्य में भारत की भूमिका को और मजबूत कर रहा है।

यूपीआई : भारत में वित्तीय लेन-देन के लिए एक वरदान

यूपीआई ने वित्तीय रूप से जुड़े और वंचित वर्गों के बीच की खाई को समाप्त कर दिया है। आज ग्रामीण और अर्ध-शहरी भारत भी महानगरों की तरह ही तेज़ी और सहजता से लेन-देन कर रहा है।

एक स्वदेशी प्रणाली, जिसे एक दशक से भी कम समय में विकसित किया गया, आज विश्व में अग्रणी बन चुकी है। जो पहल कभी बैंकिंग से वंचित लोगों को जोड़ने के लिए शुरू हुई थी, वह अब रियल-टाइम भुगतान के लिए वैश्विक मानक बन गई है। कतारों से क्‍यूआर कोड तक की यह यात्रा समावेशी नवाचार की शक्ति को दर्शाती है।

यूपीआई केवल एक भुगतान प्रणाली नहीं है; यह लोगों का मंच है। इसने वित्तीय लेन-देन को तेज़, सरल, पारदर्शी और वास्तव में समावेशी बना दिया है। ऐसा करते हुए, इसने न केवल यह बदला है कि भारत कैसे भुगतान कर रहा है, बल्कि यह भी कि भारत कैसे आगे बढ़ रहा है। (Source PIB)

दिल्ली: अनधिकृत कॉलोनियों का ‘जहां है, जैसा है’ के आधार पर नियमितीकरण, ऐसे करें ऑनलाइन आवेदन


केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री श्री मनोहर लाल ने नई दिल्ली में एक प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि आज दिल्लीवासियों के जीवन में एक ऐतिहासिक क्षण है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत सरकार ने दिल्लीवासियों को स्वामित्व अधिकार प्रदान करने के लिए 2019 में पीएम-उदय योजना लागू की थी। उन्होंने कहा कि कॉलोनियों को "जहां है, जैसा है" आधार पर नियमित करने के वर्तमान निर्णय से निवासियों को अपनी संपत्तियों के पंजीकरण के लिए आगे आने हेतु प्रोत्साहन मिलेगा।

उन्होंने कहा कि इससे न केवल कानूनी स्वामित्व प्राप्त होगा बल्कि नागरिकों को एमसीडी के मानदंडों के अनुसार अपने घरों का निर्माण या पुनर्निर्माण करने में भी मदद मिलेगी।

केंद्रीय मंत्री श्री मनोहर लाल ने यह भी कहा कि ये परिवर्तनकारी कदम प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और प्रेरणा से उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में दिल्ली सुनियोजित और समावेशी शहरी विकास के एक नए चरण में प्रवेश कर रही है, जिसका उद्देश्य भविष्य के लिए तैयार शहर का निर्माण करते हुए विरासत संबंधी मुद्दों का समाधान करना है।

दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि माननीय प्रधानमंत्री ने उन परिवारों की लंबे समय से चली आ रही चिंताओं को समझा है, जो अपने घरों में रहने के बावजूद कानूनी अधिकारों से वंचित हैं। इसी संवेदनशील और दूरदर्शी दृष्टिकोण ने पीएम-उदय योजना का मार्ग प्रशस्त किया और आज 1731 अनधिकृत कॉलोनियों में से 1511 का नियमितीकरण संभव हो पाया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में अनधिकृत कॉलोनियों का नियमितीकरण आज दिल्ली के 45 लाख लोगों के जीवन में राहत, सम्मान और अधिकारों का एक नया अध्याय जोड़ता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आवेदन प्रक्रिया 24 अप्रैल से शुरू होगी। इसके लिए एक सुनियोजित समय-सीमा निर्धारित की गई है। इसके तहत 7 दिनों के भीतर जीआईएस सर्वेक्षण, 15 दिनों के भीतर आवेदन में मौजूद कमियों का निवारण और 45 दिनों के भीतर हस्तांतरण विलेख जारी किया जाएगा।

अनधिकृत कॉलोनियां – पीएम-उदय

अक्टूबर 2019 में, केंद्र सरकार ने "दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (अवैध बस्तियों में रहने वालों के संपत्ति अधिकारों की मान्यता) विनियम, 2019" को अधिसूचित किया। इसके अनुसरण में, प्रधानमंत्री - दिल्ली में अनधिकृत बस्तियां आवास अधिकार योजना (पीएम-उदय) 29.10.2019 को शुरू की गई।

इन विनियमों के तहत, जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (जीपीए), बिक्री समझौता, भुगतान और कब्जा दस्तावेजों के आधार पर 1,731 अनधिकृत कॉलोनियों (जो 2019 के विनियमों के तहत बाहर नहीं हैं) के निवासियों को स्वामित्व/हस्तांतरण/गिरवी अधिकार प्रदान किए जा रहे हैं।

जिन कॉलोनियों को अपवादों के अंतर्गत रखा गया है—जहां कोई अधिकार प्रदान नहीं किए जाएंगे—उनमें आरक्षित/अधिसूचित वन, प्राचीन स्मारक और पुरातत्व स्थल एवं अवशेष अधिनियम, 1958 के अंतर्गत संरक्षित क्षेत्र, जोन-ओ (यमुना बाढ़ का मैदान), सड़कों का मार्ग, हाई टेंशन लाइनें, दिल्ली के पहाड़ी क्षेत्र, या किसी भी कानून के अंतर्गत संरक्षित भूमि पर स्थित कॉलोनियां शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, 69 समृद्ध अनधिकृत कॉलोनियां भी अपवादों के अंतर्गत आती हैं।

सरकारी भूमि पर निर्मित संपत्तियों के लिए हस्तांतरण विलेख (सीडी) जारी किए जाते हैं, और निजी भूमि पर संपत्तियों के लिए अधिकार पर्ची (एएस) जारी की जाती हैं।

पीएम-उदय कार्यक्रम वर्तमान में डीडीए द्वारा प्रबंधित एक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से लागू किया जा रहा है, जहां आवेदन जमा करने और उनकी प्रक्रिया करने की सुविधा उपलब्ध है।

31.03.2026 तक, पीएम-उदय के तहत लगभग 40,000 हस्तांतरण विलेख / अधिकार पर्ची जारी की जा चुकी हैं।

योजना के प्रति अपेक्षाकृत कम रूचि को लेकर की जांच की गई है। यह देखा गया है कि संपत्ति हस्तांतरण विलेख/अधिकार पर्ची जारी होने के बाद भी, अनुमोदित लेआउट योजनाओं के अभाव में निवासी भवन निर्माण योजनाओं को स्वीकृत कराने या मौजूदा संरचनाओं को नियमित करने में असमर्थ हैं। ये लेआउट योजनाएं आवासीय प्राधिकरणों द्वारा तैयार की जानी थीं और एमसीडी द्वारा अनुमोदित की जानी थीं।

इन अनधिकृत कॉलोनियों का नियमितीकरण

2019 के विनियमों में लेआउट योजनाओं की मंजूरी के बाद इन कॉलोनियों को "जहां है, जैसा है" आधार पर नियमित करने की परिकल्पना भी की गई है। हालांकि, अनुमोदित लेआउट योजनाओं का अभाव एक बड़ी बाधा बना हुआ है।

लेआउट योजनाओं और भवन योजनाओं की मंजूरी के बिना, अनधिकृत कॉलोनियों के निवासियों को शहरीकरण की मुख्यधारा में लाने का उद्देश्य पूरी तरह से प्राप्त नहीं किया जा सकता है। हालांकि पीएम-उदय योजना स्वामित्व अधिकार प्रदान करती है, लेकिन इससे निवासी स्वतः ही भवन योजना अनुमोदन के लिए पात्र नहीं हो जाते।

आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा लिए गए निर्णय

इन समस्याओं के समाधान के लिए निम्नलिखित निर्णय लिए गए हैं:

• 1511 अनधिकृत कॉलोनियों (1731 अनधिकृत कॉलोनियों में से) को अनुमोदित लेआउट योजनाओं की आवश्यकता के बिना "जहां है, जैसा है" के आधार पर नियमित किया जाएगा, जो अपवर्जन मानदंडों के अंतर्गत नहीं आती हैं।

• इन कॉलोनियों में सभी भूखंडों और भवनों का भूमि उपयोग आवासीय माना जाएगा।

• 20 वर्ग मीटर तक के सुविधा स्टोरों को नियमित किया जाएगा यदि उन्हें 6 मीटर का मार्ग उपलब्ध हो। 10 वर्ग मीटर तक के स्टोरों के लिए आवश्यक मार्ग की चौड़ाई 6 मीटर से कम हो सकती है।

• नियमितीकरण मौजूदा निर्मित संरचनाओं पर "जैसा है, जहां है" के आधार पर लागू होगा।

• अनुमोदित लेआउट योजनाओं का अभाव नियमितीकरण में बाधा नहीं बनेगा।

• एमसीडी/स्थानीय निकाय नियमितीकरण प्रमाणपत्र जारी करेंगे, खाली भूखंडों का सर्वेक्षण करेंगे और नागरिक इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में सहायता करेंगे।

• राष्ट्रीय राज्य राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (जीएनसीटीडी) का राजस्व विभाग पात्र निवासियों को हस्तांतरण विलेख/अधिकार पर्ची जारी करेगा।

ऑनलाइन आवेदन के लिए प्रक्रिया

  • आवेदक एमसीडी स्वगम पोर्टल ( https://mcdonline.nic.in/swagam ) पर लॉग इन करेंगे।
  • अनधिकृत कॉलोनी (पात्र 1511 कॉलोनियों में से) का नाम चुनें; वार्ड और जोन स्वतः भर जाएंगे।
  • चुनें कि क्या पीएम-यूडीएवाई केस आईडी मौजूद है (हां/नहीं)।
  • यदि नहीं → पीएम-उदय पोर्टल पर रिडायरेक्ट किया गया।
  • यदि हां → केस आईडी दर्ज करें:
  • यदि सीडी/एएस जारी किया गया है → आवेदन पत्र खुल जाएगा।
  • यदि जारी नहीं किया गया है → स्थिति जानने के लिए पीएम-उदय पोर्टल पर रिडायरेक्ट किया गया।
  • राजस्व विभाग/जीएनसीटीडी द्वारा डीडीए के सहयोग से आवेदनों की प्रक्रिया और सीडी/एएस जारी करना।
  • जारी की गई सीडी/एएस को स्वगम पोर्टल के माध्यम से एमसीडी को भेजा जाता है।

Amrit Udyan Winter Annuals Edition 2026: राष्ट्रपति भवन का अमृत उद्यान जनता के लिए खुला, जानें कैसे और कहाँ करें टिकट बुकिंग

राष्ट्रपति भवन का अमृत उद्यान 3 फरवरी से खुल चुका है और आप के लिए परिवार के साथ घूमने का सुनहरा अवसर है। ध्यान रहे कि राष्ट्रपति भवन का अमृत उद्यान 31 मार्च, 2026 तक आम जनता के लिए खुला रहेगा। इस साल दर्शक बाल वाटिका - पल्मेरिया गार्डन - बरगद गार्डन - बोन्साई गार्डन - कलकल बहती धारा - केंद्रीय लॉन - लंबा गार्डन - गोलाकार गार्डन का सुन्दर  और आकर्षक नज़ारे का दर्शन कर सकेंगे।

इसके अतिरिक्त इस वर्ष आगंतुक ट्यूलिप और विभिन्न प्रकार के गुलाबों के अलावा, कलकल बहती धारा - झरनों वाली जलधारा और रिफ्लेक्सोलॉजी पथों वाला बरगद उद्यान देख सकेंगे।

लोग सप्ताह में छह दिन सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक (अंतिम प्रवेश शाम 5 बजे) उद्यान का भ्रमण कर सकते हैं। उद्यान सोमवार को बंद रहेगा, क्योंकि यह रखरखाव का दिन है, और होली के कारण 4 मार्च को भी बंद रहेगा।

राष्ट्रपति भवन संग्रहालय: जानें खास बातें 

अमृत ​​उद्यान निम्नलिखित दिनों में विशेष श्रेणियों के लिए खुला रहेगा:

3 मार्च – रक्षा कर्मियों के लिए

5 मार्च – वरिष्ठ नागरिकों के लिए

10 मार्च – महिलाओं और आदिवासी महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए

13 मार्च – दिव्यांगजनों के लिए

जानें कैसे करें टिकट बुकिंग?

उद्यान में प्रवेश और बुकिंग निःशुल्क है। ऑनलाइन बुकिंग https://visit.rashtrapatibhavan.gov.in/ पर की जा सकती है। आगंतुकों के अनुभव को बेहतर बनाने के उद्देश्य से, इस वर्ष मौके पर बुकिंग की सुविधा उपलब्ध नहीं होगी। आगंतुक केवल ऑनलाइन माध्यम से ही टिकट बुक कर सकते हैं। इसलिए, आगंतुकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने स्लॉट पहले से ही ऑनलाइन बुक कर लें। उन्हें टिकट में उल्लिखित समय-सीमा और अन्य निर्देशों का पालन करने की भी सलाह दी जाती है। किसी विशेष दिन के लिए बुकिंग पिछले दिन सुबह 10:00 बजे बंद हो जाएगी।

जानें कैसे और कहाँ  से करें एंट्री?

सभी आगंतुकों के लिए प्रवेश और निकास राष्ट्रपति भवन परिसर के गेट नंबर 35 से होगा, जो नॉर्थ एवेन्यू और राष्ट्रपति भवन के चौराहे के पास स्थित है। आगंतुकों की सुविधा के लिए, केन्‍द्रीय सचिवालय मेट्रो स्टेशन से गेट नंबर 35 तक शटल बस सेवा सुबह 9:30 बजे से शाम 6:00 बजे के बीच हर 30 मिनट पर उपलब्ध रहेगी। केन्‍द्रीय सचिवालय मेट्रो स्टेशन से अंतिम शटल बस सेवा शाम 4:00 बजे होगी।

आगंतुकों के लिए मार्ग बाल वाटिका - पल्मेरिया गार्डन - बरगद गार्डन - बोन्साई गार्डन - कलकल बहती धारा - केंद्रीय लॉन - लंबा गार्डन - गोलाकार गार्डन होगा।

ट्यूलिप और विभिन्न प्रकार के गुलाबों के अलावा, इस वर्ष आगंतुक कलकल बहती धारा - झरनों वाली एक जलधारा और रिफ्लेक्सोलॉजी पथों वाला बरगद उद्यान देख सकेंगे।

क्या-क्या साथ लें जा सकते हैं दर्शक?

आगंतुक अपने साथ मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक चाबियां, पर्स/हैंडबैग, पानी की बोतलें और शिशुओं के लिए दूध की बोतलें ले जा सकते हैं। सार्वजनिक मार्ग पर विभिन्न स्थानों पर पीने का पानी, शौचालय और प्राथमिक चिकित्सा/चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

अमृत ​​उद्यान के अलावा, लोग सप्ताह में छह दिन (मंगलवार से रविवार) राष्ट्रपति भवन और राष्ट्रपति भवन का संग्रहालय भी जा सकते हैं। वे प्रत्येक शनिवार को राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में गार्ड परिवर्तन समारोह भी देख सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए https://visit.rashtrapatibhavan.gov.in/ पर जाएं।

राष्ट्रपति भवन संग्रहालय: इतिहास को कहानी के रूप में दर्शाने वाला संग्रहालय-जानें खास बातें

President Museum to open from January 05

राष्ट्रपति भवन में अमृत उद्यान (Amrit Udyan Opening Date)  एक बहुत ही अच्छा और खास डेस्टिनेशन हैं जहां आप पूर्ण रूप से एंजॉय कर सकते हैं. अगर आप फूलों को देखने में रोमांस अनुभव करते हैं तो आप यहां पर कई तरह के रंग-बिरंगे फूलों को देख सकते हैं. आपको बता दें कि अमृत उद्यान में ट्यूलिप और गुलाब के फूलों की कई वैरायटी हैं. अमृत उद्यान को पहले मुगल गार्डन (Mughal Garden) के नाम से जाना जाता था. जिसका नाम बदलकर अमृत उद्यान कर दिया गया है. आप भी यहां पर घूमने का प्लान बना सकते हैं. अमृत उद्यान (Amrit Udyan) जाने के लिए ऑनलाइन टिकट बुक कर सकते हैं.


राष्ट्रपति भवन संग्रहालय: खास बातें 

लगभग 10,000 वर्ग मीटर के क्षेत्र में फैला राष्ट्रपति भवन संग्रहालय परिसर (आरबीएमसी)  मुख्य तौर पर राष्ट्रपति भवन के विभिन्न पहलुओं को प्रदर्शित करने के लिए बेहतर तकनीक के साथ तैयार किया गया है जो अद्वितीय है. 


राष्ट्रपति भवन संग्रहालय परिसर (आरबीएमसी) भारतीय स्वतंत्रता, लोकतंत्र और एकता का प्रतीक है।वास्तव में आप  राष्ट्रपति भवन संग्रहालय में उन सभी उपहारों की झलक प्राप्त कर सकते हैं जो  भारत के राष्ट्रपतियों को वर्षों से मिले हैं तथा सभी इस संग्रहालय में संरक्षित है.  इन खूबसूरत  कलाकृतियों के अलावा अन्य भी कई महत्वपूर्ण वस्तुओं को इसमें संभालकर संगृहीत किया गया है जैसे हथियार, फर्नीचर, मूर्तियां, वस्त्र, तस्वीरें, अभिलेखीय सामग्री और भी बहुत कुछ.


मुगल गार्डन भी एक बहुत हीं सुन्दर स्थल है जो पर्यटकों को अपनी खूबसूरती के कारण आकर्षित करता रहा है. 15 एकड़ के विशाल विस्तार में फैले, मुगल गार्डन को अक्सर राष्ट्रपति के महल की आत्मा के रूप में चित्रित किया जाता है. 

मुगल गार्डन अब तक जनता के लिए फरवरी-मार्च के महीनों में आयोजित होने वाले वार्षिक उत्सव उद्यानोत्सव के दौरान ही खोला जाता था, लेकिन मुगल गार्डन, जो राष्ट्रपति भवन के दौरे का तीसरा सर्किट है, अब जनता के लिए खुला रहेगा। राष्ट्रपति भवन संग्रहालय परिसर इतिहास को कहानी के रूप में दर्शाने वाला एक संग्रहालय है जिसमें कला, संस्कृति, विरासत और इतिहास के उत्तम प्रतीकों और अमूल्य कलाकृतियों को प्रदर्शित किया गया है।

प्रत्येक साल फरवरी मार्च में राष्ट्रपति भवन में अमृत उद्यान (Amrit Udyan Opening Date) खुल जाता है. अमृत उद्यान में पर्यटक कई तरह के रंग-बिरंगे फूलों को देख सकते हैं. अमत उद्यान में ट्यूलिप और गुलाब के फूलों की कई वैरायटी हैं. अमृत उद्यान को पहले मुगल गार्डन (Mughal Garden) के नाम से जाना जाता था. जिसका नाम बदलकर अमृत उद्यान कर दिया गया है. आप भी यहां पर घूमने का प्लान बना सकते हैं. अमृत उद्यान (Amrit Udyan) जाने के लिए ऑनलाइन टिकट बुक कर सकते हैं. यह सभी दिन खुला रहेगा (सोमवार और सरकारी अवकाश को छोड़कर)। आगंतुक भ्रमण के लिए वेबसाइट्स- https://presidentofindia.nic.inया https://rashtrapatisachivalaya.gov.in/या https://rbmuseum.gov.in/पर जाकर ऑनलाइन बुकिंग कर सकते हैं।
राष्ट्रपति भवन संग्रहालय परिसर इतिहास को कहानी के रूप में दर्शाने वाला एक संग्रहालय है जिसमें कला, संस्कृति, विरासत और इतिहास के उत्तम प्रतीकों और अमूल्य कलाकृतियों को प्रदर्शित किया गया है।

Inspiring Thoughts: साहस को अपनाएँ... सफलता की कहानी खुद लिखें..

Inspiring  Thoughts: आपकी प्रसन्ता में छिपा  है जीवन की सफलता का रहस्य.... 

Valentine's Week List 2026: कब से शुरू हो रहा है वैलेंटाइन वीक? जानिए किस दिन मनाया जाएगा कौन सा डे


Valentine Week: Rose Day, Chocolate Day, Propose Day, Promise Day, teddy day, Hug Day and Kiss Day
Valentine's Week List 2026:
 अभिव्यक्ति के लिए प्यार और भावनाओं के अपने अलग-अलग पहलू हैं जिन्हें केवल लव बर्ड्स द्वारा ही समझा जा सकता है. Valentine’s Week सिर्फ कपल्स के लिए नहीं, बल्कि उन सभी के लिए है जो किसी से सच्चा प्यार करते हैं। इस पूरे हफ्ते में कुल 8 खास दिन मनाए जाते हैं, जो प्यार की अलग-अलग भावनाओं को दर्शाते हैं। यह सप्ताह हमें सिखाता है कि प्यार जताना, उसे समझना और निभाना कितना ज़रूरी है। फरवरी के महीने की शुरुआत में एक तरह का उत्साह होता है हवा में प्यार की भावना और विशेष रूप से लव बर्ड्स के दिलों में. 
वेलेंटाइन वीक मनाने का यही कारण है और इस प्रकार वेलेंटाइन वीक की पूरी डेट शीट को जानें जिसमें रोज़ डे, चॉकलेट डे, प्रपोज़ डे, प्रॉमिस डे, टेडी डे, हग डे और किस डे जैसे दिन शामिल हैं।

नजरिया जीने का: जाने किस दिन पैदा लोग होते हैं ज्यादा रोमांटिक और केयरिंग
 वेलेंटाइन डे 2025  डेट शीट के अनुसार, ये दिन 7 फरवरी से शुरू होते हैं और प्यार के दिन के साथ समाप्त होते हैं, जिसका बहुप्रतीक्षित. वेलेंटाइन डे 14 फरवरी को है। वेलेंटाइन डे 2026 की शुरुआत रोज डे, प्रपोज डे, चॉकलेट डे, टेडी डे, प्रॉमिस डे, हग डे, किस डे से होती है और अंत में वैलेंटाइन वीक लिस्ट 2026  का समापन अर्थात 14 फरवरी को वैलेंटाइन डे।

वैलेंटाइन डे डेट शीट

  1. रोज डे - 7 फरवरी
  2. प्रपोज डे - 8 फरवरी
  3. चॉकलेट डे - 9 फरवरी
  4. टेडी डे - 10 फरवरी
  5. प्रॉमिस डे - 11 फरवरी
  6. हग डे - 12 फरवरी
  7. किस डे - 13 फरवरी
  8. वेलेंटाइन डे - 14 फरवरी
  • 7 फरवरी 2026 – Rose Day: इस दिन गुलाब देकर अपने प्यार का इज़हार किया जाता है क्योंकि लाल गुलाब प्रेम का, गुलाबी अपनापन और पीला दोस्ती का प्रतीक होता है।
  • 8 फरवरी 2026 – Propose Day:  इस दिन लोग अपने दिल की बात सामने रखते हैं और प्यार का प्रस्ताव रखते हैं।
  • 9 फरवरी 2026 – Chocolate Day: सिर्फ  प्यार हीं काफी नहीं है बल्कि रिश्तो की जीवंतता और उन्हें खास बनाने की जरुरत होती है और इसलिए जरुरी है कि आप चॉकलेट देकर अपने प्यार की मिठास को बनाये रखें। 
  • 10 फरवरी 2026 – Teddy Day: प्यार को बनाएं रखने के लिए अपने पार्टनर को गिफ्ट भी देना जरुरी है क्योंकि आपका प्यार आपके गिफ्ट को देखकर हीं तो आपके अहसास को महसूस कर सकता है. इसके लिए जरुरी है कि आप अपने प्यार को टेडी बियर या कोई अन्य गिफ्ट देकर अपनापन जाता सकते हैं. 
  • 11 फरवरी 2026 – Promise Day: वो कहते हैं ना की विश्वास प्रेम की पहली सीढ़ी होती है,  तो इसलिए हीं तो अपने  प्यार के  इस दिन रिश्तों में भरोसे और वादों को मजबूत किया जाता है।
  • 12 फरवरी 2026 – Hug Day: गले लगकर अपने प्यार और सुरक्षा का एहसास कराया जाता है।
  • 13 फरवरी 2026 – Kiss Day:  प्यार को महसूस कराने का सबसे खूबसूरत दिन।
  • 14 फरवरी 2026 – Valentine’s Day: पूरे वैलेंटाइन वीक का सबसे खास दिन, जो प्यार के नाम होता है।

क्या आप जानते हैं, वैलेंटाइन वीक के हर दिन का अपना महत्व है.हर युवा के जीवन का सबसे रोमांचक और बहुप्रतीक्षित दिन एक दूसरे के प्रति प्यार, भावनाओं, सम्मान और समग्र देखभाल की भावना वैलेंटाइन डे की सबसे बड़ी खासियत है। लेकिन आपको पता होना चाहिए कि वैलेंटाइन डे से पहले पूरा वैलेंटाइन वीक होता है जो हम सभी के लिए बेहद अहम होता है।

वेलेंटाइन वीक की शुरुआत

वेलेंटाइन वीक की शुरुआत संत वेलेंटाइन के सम्मान में भव्य समारोहों के साथ होती है, लेकिन अब इन दिनों उत्सवों ने एक नया अर्थ ले लिया है। यहां वेलेंटाइन वीक के बारे में बताया गया है जिसे रोज, प्रपोज, चॉकलेट, प्रॉमिस, टेडी, हग और किस डे के रूप में मनाया जाता है।

जो लोग प्यार में हैं, उनके पास इस सप्ताह भर चलने वाले उत्सवों को मनाने  कारण है. हाँ, वे विशेष संदेशों और उपहारों के साथ चिह्नित करने के लिए वालवंटाइन सप्ताह के प्रत्येक दिन को मनाते हैं। क्या आपके पास वैलेंटाइन वीक 2019 की तारीखों की सूची है? यदि नहीं, तो चिंता न करें, हम आपके और आपके प्रिय के लिए पूरी तिथि सूची के साथ यहां मौजूद हैं.



Republic Day Parade : जब काशी विश्वनाथ धाम पर आधारित उत्तर प्रदेश की झांकी को किया गया सर्वश्रेष्ठ घोषित, जाने खासियत

Republic Day Parade 2022 : Uttar Pradesh Tableau Best in State Category
गणतंत्र दिवस परेड में भाग लेने वाले राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और अन्य संगठनों की झांकियो का मार्च हर साल होता है। गुणवत्ता और प्रस्तुति के आधार पर सर्वश्रेष्ठ झांकी को पुरस्कृत भी किया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि किस वर्ष में काशी विश्वनाथ धाम पर आधारित उत्तर प्रदेश की झांकी को सर्वश्रेष्ठ झांकी का अवॉर्ड दिया गया था। 
Republic Day Parade 2022 में सर्वश्रेष्ठ राज्य की झांकी के रूप में उत्तर प्रदेश का चयन, लोकप्रिय पसंद की श्रेणी में महाराष्ट्र की जीत घोषित की गई है. गणतंत्र दिवस परेड 2022 की सर्वश्रेष्ठ झांकी और सर्वश्रेष्ठ मार्चिंग टुकड़ियों के परिणाम घोषित किए गए हैं। 

 26 जनवरी, 2022 को गणतंत्र दिवस परेड में भाग लेने वाले 12 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में उत्तर प्रदेश की झांकी को सर्वश्रेष्ठ झांकी के रूप में चुना गया है। उत्तर प्रदेश की झांकी 'एक जिला एक उत्पाद और काशी विश्वनाथ धाम' विषय पर आधारित थी।

सेना के तीनों अंगों, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल ( सीएपीएफ)/अन्य सहायक बलों की मार्चिंग टुकड़ियों का प्रदर्शन, विभिन्न राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों (यूटी) केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों से झांकियों के प्रदर्शन का आकलन करने के लिए जजों के तीन पैनलों की नियुक्ति की गई थी।

दूसरा स्थान कर्नाटक को 'पारंपरिक हस्तकला का पालना' पर आधारित झांकी के लिए मिला। 'मेघालय राज्य के 50 साल पूरे और महिलाओं के नेतृत्व वाली सहकारी समितियों और स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को श्रद्धांजलि' पर झांकी निकालने के लिए मेघालय को तीसरा स्थान मिला।


गणतंत्र दिवस परेड परेड: 75वें वर्ष में भारत ने दुनिया को दिखाया विशेष प्रदर्शन

Republic Day 2022: Whats is Special for 75th Year of Independence
गणतंत्र दिवस परेड :  इस बार गणतंत्र दिवस स्वतंत्रता के 75वें वर्ष में संपन्न हो रहा है और इसे पूरे देश में 'आजादी का अमृत महोत्सव' के रूप में मनाया गया

 ग्रैंड फिनाले और परेड का सबसे उत्सुकता से प्रतीक्षित हिस्सा, फ्लाई पास्ट, पहली बार भारतीय वायु सेना के 75 विमानों / हेलीकॉप्टरों को 'आजादी का अमृत महोत्सव' के हिस्से के रूप में प्रदर्शित करेगा। राफेल, सुखोई, जगुआर, एमआई-17, सारंग, अपाचे और डकोटा जैसे पुराने और वर्तमान आधुनिक विमान/हेलीकॉप्टर राहत, मेघना, एकलव्य, त्रिशूल, तिरंगा, विजय और अमृत सहित विभिन्न संरचनाओं को प्रदर्शित करेंगे।

राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद 26 जनवरी, 2022 को 73वां गणतंत्र दिवस समारोह के आयोजन में राष्ट्र का नेतृत्व करेंगे। इस वर्ष के समारोह विशेष हैं, क्योंकि इस बार गणतंत्र दिवस स्वतंत्रता के 75वें वर्ष में संपन्न हो रहा है और इसे पूरे देश में 'आजादी का अमृत महोत्सव' के रूप में मनाया जा रहा है। इस अवसर को यादगार बनाने के लिए, रक्षा मंत्रालय ने 26 जनवरी को राजपथ पर मुख्य परेड और 29 जनवरी को विजय चौक पर 'बीटिंग द रिट्रीट' समारोह के दौरान नए कार्यक्रमों की एक श्रृंखला की अवधारणा तैयार की है

रक्षा मंत्रालय  द्वारा जारी सुचना के अनुसार मुख्य परेड के दौरान पहली बार आयोजित होने वाले कई कार्यक्रमों में राष्ट्रीय कैडेट कोर द्वारा 'शहीदों को शत शत नमन' कार्यक्रम का शुभारंभ, भारतीय वायु सेना के 75 विमानों/हेलीकॉप्टरों द्वारा भव्य फ्लाईपास्ट, राष्ट्रव्यापी वंदे भारतम नृत्य प्रतियोगिता के माध्यम से चुने गए 480 नर्तकियों द्वारा सांस्कृतिक प्रदर्शन, 'कला कुंभ' कार्यक्रम के दौरान तैयार किए गए प्रत्येक 75 मीटर के दस स्क्रॉल का प्रदर्शन और दर्शकों की बेहतर सुविधा के लिए 10 बड़ी एलईडी स्क्रीन की स्थापना करना शामिल है। प्रोजेक्शन मैपिंग के साथ-साथ 'बीटिंग द रिट्रीट' समारोह के लिए अपने देश में विकसित 1,000 ड्रोन द्वारा एक ड्रोन शो की योजना बनाई गई है।

अतीत से वर्तमान तक: सैनिकों की वर्दी और हथियार क्रमिक विकास को प्रदर्शित करेंगे

मार्चिंग दस्तों का मूल विषय पिछले 75 वर्षों में भारतीय सेना की वर्दी और कार्मिकों के हथियारों के क्रमिक विकास का प्रदर्शन होगा। राजपूत रेजीमेंट की टुकड़ी 1947 की भारतीय सेना की वर्दी पहने हुए होगी और उसके पास .303 राइफल होगी। असम रेजिमेंट 1962 की अवधि के दौरान पहनी गई वर्दी में होगी और उनके पास .303 राइफलें होंगी। जम्मू-कश्मीर लाइट रेजिमेंट 1971 के दौरान पहनी जाने वाली वर्दी में होगी और 7.62 मिमी सेल्फ लोडिंग राइफल के साथ होगी। सिख लाइट रेजिमेंट और सेना आयुध कोर की टुकड़ी वर्तमान में 5.56 एमएम इंसास राइफल के साथ वर्दी में होगी। पैराशूट रेजिमेंट की टुकड़ी भारतीय सेना की नई कॉम्बैट यूनिफॉर्म पहनेगी, जिसका अनावरण 15 जनवरी, 2022 को किया गया और इसमें 5.56 एमएम x 45 एमएम टैवोर राइफल होगी। (PIB)

रेलवे का बड़ा फैसला: ट्रेनों के किराया में हुआ परिवर्तन, देखें कहाँ और कितनी हुई बढ़ोतरी



नए साल के अवसर पर रेलवे ने यात्रियों के लिए ट्रेनों के किराए में बदलाव किया है.संशोधित किराया केवल 26 दिसंबर 2025 से बुक किए गए टिकटों पर लागू होगा, हालाँकि पहले से बुक टिकटों पर भविष्य की यात्रा के लिए भी कोई प्रभाव नहीं लागु होगा. हालाँकि छोटे दुरी की यात्रा करने वालों के लिए लिए कोई नहीं लेकिन लंबी दूरी के यात्रियों का किराया थोड़ा महंगा हो गया है. 

हालाँकि परिवर्तित किराया किराया संरचना के अनुसार  उपनगरीय सेवाओं और सीजन टिकटों के किराए में कोई बदलाव नहीं किया गया है. 

रेलवे के अनुसार आरक्षण शुल्क, सुपरफास्ट अधिभार या अन्य सहायक शुल्कों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, ये सभी मौजूदा नियमों के अनुसार ही लागू रहेंगे। 

साधारण नॉन-एसी (गैर-उपनगरीय) सेवाओं के लिए द्वितीय श्रेणी साधारण, स्लीपर श्रेणी साधारण और प्रथम श्रेणी साधारण में किराए को श्रेणीबद्ध तरीके से युक्तिसंगत बनाया गया है।

साधारण द्वितीय श्रेणी में 215 किमी तक की यात्राओं के लिए किराए में कोई वृद्धि नहीं है, जिससे कम दूरी और दैनिक यात्रियों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। 

216 किमी से 750 किमी तक की दूरी के लिए किराया 5 रुपये बढ़ाया गया है।

 इससे अधिक दूरी की यात्राओं के लिए वृद्धि चरणबद्ध तरीके से लागू की गई है- 751 किमी से 1250 किमी के बीच की दूरी के लिए 10 रुपये, 1251 किमी से 1750 किमी के बीच की दूरी के लिए 15 रुपये और 1751 किमी से 2250 किमी के बीच की दूरी के लिए 20 रुपये।

स्लीपर श्रेणी साधारण और प्रथम श्रेणी साधारण में गैर-उपनगरीय यात्राओं के लिए किराए में प्रति किलोमीटर 1 पैसे की दर से एकसमान संशोधन किया गया है, जिससे किराए में क्रमिक और सीमित वृद्धि सुनिश्चित हुई है।

मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों में नॉन-एसी और एसी दोनों श्रेणियों में किराए में 2 पैसे प्रति किलोमीटर की बढ़ोतरी की गई है। 

इसमें स्लीपर क्लास, फर्स्ट क्लास, एसी चेयर कार, एसी थ्री-टियर, एसी टू-टियर और एसी फर्स्ट क्लास शामिल हैं। 

 नॉन-एसी मेल/एक्सप्रेस कोच में 500 किलोमीटर की यात्रा के लिए यात्रियों को लगभग 10 रुपये अतिरिक्त देने होंगे।

आर्डिनरी (गैर-AC) ट्रेनों में बदलाव किया गया है 

  • द्वितीय श्रेणी आर्डिनरी 
  • -215 किमी तक: कोई बढ़ोतरी नहीं
  • -216–750 किमी: ₹5 बढ़ोतरी
  • -751–1250 किमी: ₹10 बढ़ोतरी
  • -1251–1750 किमी: ₹15 बढ़ोतरी
  • -1751–2250 किमी: ₹20 बढ़ोतरी

मेल/एक्सप्रेस (नॉन-एसी)

  • सेकंड क्लास (मेल/एक्सप्रेस) 02 पैसे
  •  स्लीपर क्लास (मेल/एक्सप्रेस) 02 पैसे
  • फर्स्ट क्लास (मेल/एक्सप्रेस) 02 पैसे

AC क्लास

  • AC चेयर कार 02 पैसे
  • AC-3 टियर/3E 02 पैसे
  • AC-2 टियर 02 पैसे
  • AC फर्स्ट क्लास/EC/EA 02 पैसे

इन गाड़ियों के भाड़े में होगी परिवर्तन?

तेजस राजधानी, राजधानी, शताब्दी, दुरंतो, वंदे भारत, हमसफर, अमृत भारत, तेजस, महामाना, गतिमान, अंत्योदय, गरीब रथ, जन शताब्दी, युवा एक्सप्रेस, नमो भारत रैपिड रेल और साधारण गैर-उपनगरीय सेवाओं (जहां लागू हो, एसी एमईएमयू/डीईएमयू को छोड़कर) सहित प्रमुख रेल सेवाओं के मौजूदा मूल किरायों को अनुमोदित श्रेणीवार मूल किराया वृद्धि के अनुरूप संशोधित किया गया है। यह संशोधन सभी श्रेणियों में समान रूप से और एक क्रमबद्ध तरीके से किया गया है।

स्लीपर क्लास 

-1 पैसा प्रति किमी की बढ़ोतरी

फर्स्ट क्लास (आर्डिनरी)

-1 पैसा प्रति किमी की बढ़ोतरी

जीएसटी की प्रयोज्यता अपरिवर्तित रहेगी और किराए को प्रचलित मानदंडों के अनुसार किराय का पूर्णांकन जारी रहेगा।

यात्रियों को इन टिकटों पर नहीं लगेंगे चार्ज 

पहले से जारी किए गए टिकटों के मामले में, संशोधित किराया ऐसे टिकटों पर लागू नहीं होगा। इसलिए, 26.12.2025 को या उसके बाद की यात्रा के लिए ऐसे टिकटों पर किराए का अंतर आरक्षण चार्ट में नहीं दिखाया जाएगा। हालांकि, 26.12.2025 को या उसके बाद ट्रेनों/स्टेशनों पर TTE/टिकट चेकिंग स्टाफ द्वारा बनाए गए किसी भी नए टिकट पर संशोधित दर से शुल्क लिया जाएगा।

संशोधित किराया केवल 26 दिसंबर 2025 को या उसके बाद बुक किए गए टिकटों पर लागू होगा। इस तिथि से पहले बुक किए गए टिकटों पर, चाहे यात्रा प्रभावी तिथि के बाद ही क्यों न हो, कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा।

एनसीवीईटी-फ्लिपकार्ट समझौता: गुणवत्तापूर्ण नौकरियों और दीर्घकालिक कैरियर का मार्ग होगी प्रशस्त


राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीवीईटी) ने भारत के व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास तंत्र को  मजबूत करने के लिए फ्लिपकार्ट के साथ एक समझौता किया है। इस सहयोग का उद्देश्य कौशल भारत मिशन के अनुरूप, भारत के तेजी से बढ़ते ई-कॉमर्स और लॉजिस्टिक्स कार्यबल के लिए राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त, उद्योग-आधारित कौशल विकास कार्यक्रम तैयार करना है।

एनसीवीईटी भारत के व्यावसायिक शिक्षा, प्रशिक्षण और कौशल विकास तंत्र में गुणवत्ता को विनियमित करने और सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय स्तर पर मानक स्थापित करना है जो कार्यबल की रोजगार क्षमता को मजबूत करे और सतत आर्थिक विकास में योगदान दे।

प्रशिक्षार्थियों के लिए यह पहल मानकीकृत कार्यक्रम संचालन, कठोर मूल्यांकन प्रक्रियाएं और राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत बाजार मान्यता प्राप्त प्रतिष्ठित प्रमाणपत्र प्रदान करेगी। इन प्रमाणपत्रों को डिजिलॉकर पर सुरक्षित रूप से संग्रहीत किया जा सकता है और अकादमिक क्रेडिट को अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (एबीसी) के माध्यम से सत्यापित किया जा सकता है। जिससे करियर में प्रगति और दीर्घकालिक रोजगार क्षमता को और मजबूती मिलेगी।

इस सहयोग के अंतर्गत, एनसीवीईटी  फ्लिपकार्ट को प्रशिक्षण, मूल्यांकन और प्रमाणन के लिए एक मान्यता  प्रदान करने वाली संस्था (द्वि) बनने की दिशा में क्षमता विकसित करने में मदद करेगा। इससे उद्योग द्वारा तैयार किए गए कौशल विकास कार्यक्रमों को औपचारिक रूप से मानकीकृत, पोर्टेबल और राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त करने में सहायता मिलेगी।

यह उपलब्धि फ्लिपकार्ट को राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क (एनएसक्यूएफ) के अनुरूप प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार करने और प्रदान करने में सक्षम बनाएगी, जिससे गुणवत्ता और उद्योग के लिए प्रासंगिकता में निरंतरता सुनिश्चित होगी।

 रोजगार क्षमता को बढ़ाएंगे यह साझेदारी

 यह साझेदारी फ्लिपकार्ट को मानकीकृत, उच्च-गुणवत्ता वाले प्रशिक्षण और प्रमाणन कार्यक्रम विकसित करने में भी मदद करेगी जो विशेष रूप से वंचित पृष्ठभूमि के व्यक्तियों के लिए रोजगार क्षमता को बढ़ाएंगे।

एमएसडीई की सचिव और एनसीवीईटी की अध्यक्ष सुश्री देबाश्री मुखर्जी ने बताया कि  “फ्लिपकार्ट के साथ एनसीवीईटी की साझेदारी भारत के कौशल विकास ढांचे को उद्योग-अनुकूल, विश्वसनीय और परिणाम  देने वाले  हमारे निरंतर प्रयासों को सुदृढ़ करती है। प्रशिक्षण और प्रमाणन को वास्तविक परिचालन आवश्यकताओं के साथ जोड़कर हम गुणवत्तापूर्ण नौकरियों, गतिशीलता और दीर्घकालिक कैरियर विकास के लिए मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं।”

गुणवत्तापूर्ण नौकरियों और दीर्घकालिक कैरियर का मार्ग होगी प्रशस्त 

फ्लिपकार्ट ग्रुप के मुख्य कॉर्पोरेट मामलों के अधिकारी श्री रजनीश कुमार ने कहा कि “फ्लिपकार्ट में, कौशल विकास कोई गौण प्रयास नहीं है, बल्कि यह भारत के डिजिटल वाणिज्य बुनियादी ढांचे के निर्माण में हमारा मूल योगदान है। देश के सबसे बड़े नियोक्ताओं और ई-कॉमर्स और लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम में सहायक संस्थाओं में से एक होने के नाते  हम इसे अपना दायित्व मानते हैं कि हम मानकीकृत, राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त कौशल विकास के ऐसे मार्ग तैयार करने में मदद करें जो उद्योग-आधारित और परिणाम-उन्मुख हों।”

रोजगार के लिए तैयार प्रतिभाओं का एक बड़ा समूह तैयार करना

एनसीवीईटी के साथ यह सहयोग हमें कारखाने के वास्तविक परिचालन संबंधी जानकारियों को औपचारिक प्रशिक्षण, मूल्यांकन और प्रमाणन ढाँचों में शामिल करने की अनुमति देता है। हमारा उद्देश्य रोजगार के लिए तैयार प्रतिभाओं का एक बड़ा समूह तैयार करना है जो भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था के साथ विकसित हो सके, साथ ही स्किल इंडिया मिशन को सार्थक और दीर्घकालिक तरीके से समर्थन दे सके।

प्रधानमंत्री आज करेंगे पश्चिम बंगाल का दौरा: Facts in Brief


प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज अर्थात 20 दिसंबर को पश्चिम बंगाल की यात्रा पर जहाँ लगभग 3200 करोड़ रुपये की दो राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे और उनकी आधारशिला रखेंगे। इसके अतिरिक्त  राष्ट्रीय राजमार्ग-34 के बाराजागुली-कृष्णनगर मार्ग पर 66.7 किलोमीटर लंबे 4-लेन का उद्घाटन एवं बारासात-बराजागुली मार्ग पर 17.6 किलोमीटर लंबे 4-लेन की आधारशिला भी रखेंगे। ये परियोजनाएं कोलकाता और सिलीगुड़ी के बीच महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग के रूप में काम करेंगी।

 प्रधानमंत्री सुबह लगभग 11 बजकर 15 मिनट पर प्रधानमंत्री पश्चिम बंगाल के नदिया जिले के राणाघाट में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे और उनका उद्घाटन करेंगे। श्री मोदी इस अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित भी करेंगे।

प्रधानमंत्री लगभग 3,200 करोड़ रुपये की दो राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे और उनकी आधारशिला रखेंगे।

Facts in Brief 

  • बाराजागुली-कृष्णनगर मार्ग पर 66.7 किलोमीटर लंबे 4-लेन का उद्घाटन
  • बारासात-बराजागुली मार्ग पर 17.6 किलोमीटर लंबे 4-लेन की आधारशिला 
  • ये परियोजनाएं कोलकाता और सिलीगुड़ी के बीच महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग के रूप में काम करेंगी
  • क्षेत्र में पर्यटन के विकास को प्रोत्साहन

प्रधानमंत्री पश्चिम बंगाल के नदिया जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग-34 के बाराजागुली-कृष्णनगर मार्ग पर 66.7 किलोमीटर लंबे 4-लेन का उद्घाटन करेंगे। श्री मोदी पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग-34 के बारासात-बराजागुली मार्ग पर 17.6 किलोमीटर लंबे 4-लेन की आधारशिला भी रखेंगे।

ये परियोजनाएं कोलकाता और सिलीगुड़ी के बीच महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग के रूप में काम करेंगी। इन परियोजनाओं से यात्रा के समय में लगभग 2 घंटे की बचत होगी, निर्बाध यातायात के लिए वाहनों की तेज और सुगम आवाजाही सुनिश्चित होगी, वाहन संचालन लागत में कमी आएगी, और कोलकाता तथा पश्चिम बंगाल के अन्य पड़ोसी जिलों के साथ-साथ पड़ोसी देशों के साथ कनेक्टिविटी में सुधार होगा। इन परियोजनाओं से क्षेत्र में आर्थिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा और पूरे क्षेत्र में पर्यटन के विकास को प्रोत्साहन मिलेगा।

बटेश्वर रेलवे स्टेशन 'बी' श्रेणी के स्टेशन में परिवर्तित: जानें किस पूर्व प्रधानमंत्री की है जन्मस्थली

Bateshwar Station know why famous Atal Behari

बटेश्वर रेलवे स्टेशन जो आगरा डिवीजन में स्थित है  यह पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की जन्मस्थली है. इसके अतिरिक्त बटेश्वर अपनी प्राचीन विरासत के लिए भी प्रसिद्ध है, जिसमें यमुना नदी के किनारे स्थित प्रमुख और ऐतिहासिक शिव मंदिर शामिल हैं। बटेश्वर के  सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और राष्ट्रीय महत्व को देखते हुए एक प्रमुख फैसला करते हुए आगरा  डिवीजन ने बटेश्वर (बीएएसआर) रेलवे स्टेशन  को 'डी' श्रेणी के हॉल्ट स्टेशन से 'बी' श्रेणी के क्रॉसिंग स्टेशन में परिवर्तित करने का प्रस्ताव दिया है। वर्तमान में, बटेश्वर (बीएएसआर) भंडाई-उदीमोर खंड में बाह (एचएबी) और फतेहाबाद (एफएबी) स्टेशनों के बीच स्थित एक 'डी' श्रेणी का हॉल्ट स्टेशन है। 

उल्लेखनीय है कि बटेश्वर का सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और राष्ट्रीय महत्व बहुत अधिक है। यह पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की जन्मस्थली है , जो इस स्थान के महत्व को और भी बढ़ा देती है। बटेश्वर अपनी प्राचीन विरासत के लिए भी प्रसिद्ध है, जिसमें यमुना नदी के किनारे स्थित प्रमुख और ऐतिहासिक शिव मंदिर शामिल हैं।

यह क्षेत्र अपने धार्मिक महत्व के अलावा प्रसिद्ध बटेश्वर पशु मेले की मेजबानी के लिए भी जाना जाता है, जो हर साल पूरे क्षेत्र से बड़ी संख्या में आगंतुकों को आकर्षित करता है।

जानें खास बातें 

प्रस्तावित रूपांतरण में निम्नलिखित कार्य शामिल हैं:

1. 750 मीटर लंबाई की दो लूप लाइनें

2. स्टेशन भवन, जिसमें एल भवन भी शामिल है

3. उच्च-स्तरीय प्लेटफ़ॉर्म की संख्या 01

4. परिसंचरण क्षेत्र का विकास

5. जल टैंक, बोरवेल और पंप हाउस

6. दिव्यांगजनों के लिए सुविधाएं और अन्य न्यूनतम आवश्यक सुविधाओं का निर्माण कार्य

7. सिग्नलिंग और दूरसंचार उपकरण और इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग

8. लूप लाइनों की 02 संख्याओं के लिए ओएचई संशोधन

सुचिन्द्रम थेरूर वेटलैंड कॉम्प्लेक्स: Facts In Brief

Suchindram Theroor Wetland Facts In Brief

Suchindram Theroor Wetland: सुचिन्द्रम थेरूर वेटलैंड कॉम्प्लेक्स, सुचिन्द्रम-थेरूर मनाकुडी कंजर्वेशन रिजर्व का हिस्सा है। इसे एक महत्वपूर्ण पक्षी क्षेत्र घोषित किया गया है और यह प्रवासी पक्षियों के मध्य एशियाई फ्लाईवे के दक्षिणी सिरे पर स्थित है।

इसे पक्षियों के घोंसले के लिए बनाया गया था और यह हर साल हजारों पक्षियों को आकर्षित करता है। थेरूर पर निर्भर कुल जनसंख्या लगभग 10,500 है और इस जनसंख्या की 75 प्रतिशत आजीविका कृषि पर टिकी है जो बदले में थेरूर जलाशय से निकलने वाले पानी पर निर्भर है।

पक्षियों की लगभग 250 प्रजातियाँ दर्ज की गई हैं, जिनमें से 53 प्रवासी हैं, 12 स्थानिक हैं, और चार खतरे में हैं। कम से कम 183 पौधों और जानवरों की प्रजातियों की उपस्थिति जलाशयों को पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण मंच और चारागाह प्रदान करने में सक्षम बनाती है

सुंदरबन आर्द्रभूमि

यह एक मानव निर्मित, अंतर्देशीय जलाशय है और बारहमासी है। 9वीं शताब्दी के तांबे की प्लेट के शिलालेखों में पसुमकुलम, वेंचिकुलम, नेदुमर्थुकुलम, पेरुमकुलम, एलेमचिकुलम और कोनाडुनकुलम का उल्लेख है। 

इस क्षेत्र में पक्षियों की लगभग 250 प्रजातियां दर्ज की गई हैं, जिनमें से 53 प्रवासी, 12 स्थानिक और 4 विलुप्‍त होने की कगार पर हैं.

खजुराहो: प्रेम, कला और संस्कृति का अनोखा संगम

प्रजातियों की गणना

जिला वन अधिकारी एवं वन्यजीव वार्डन, कन्याकुमारी जिला के वेबसाइट के अनुसार सुचिन्द्रम थेरूर वेटलैंड कॉम्प्लेक्स में  प्रजातियों की गणना इस प्रकार से है-

क्रम संख्याश्रेणीसंख्या
1पक्षी की संख्या135
2मछलियों का वर्ग16
3पौधे112
4स्तनधारी की संख्या10
5सरीसृप और उभयचर30
6ऑर्थ्रोपोड75

तंपारा झील-ओडिशा

मुख्य विशेषताएँ

चारों ओर फैली कृषि भूमि जैसे धान के खेत, नारियल के बाग, केले के पेड़ आदि, सिंचाई के लिए आर्द्रभूमि परिसर पर निर्भर हैं। यह संकटग्रस्त प्रजातियों के लिए घोंसले के शिकार आवास प्रदान करता है। यह बर्ड लाइफ इंटरनेशनल के साथ अंतर्राष्ट्रीय पक्षी एवं जैव विविधता क्षेत्र के रूप में सूचीबद्ध है और मध्य एशियाई पक्षी प्रवासी मार्ग का हिस्सा है।

  • स्थान: तमिलनाडु, कन्याकुमारी जिला 
  • क्षेत्रफल: 94.229 हेक्टेयर 
  • संरक्षण: सुचिन्द्रम-थेरूर मनाकुडी संरक्षण रिजर्व का हिस्सा, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत संरक्षित 
  • महत्व: महत्वपूर्ण पक्षी क्षेत्र, मध्य एशियाई फ्लाईवे का दक्षिणी छोर, भूजल पुनर्भरण का स्रोत, बाढ़ नियंत्रण 
  • विशेषताएँ: दो मानव निर्मित जलाशय, थेरूर और सुचिन्द्रम, पक्षियों की 250 से अधिक प्रजातियां

तमिलनाडु का चित्रांगुडी अभ्यारण्य: पक्षीप्रेमियों के लिए एक छिपा खज़ाना- Facts In Brief

Chitrangudi Bird Sanctuary Facts in Brief

चित्रांगुडी पक्षी अभ्‍यारण्य, जिसे स्थानीय रूप से "चित्रांगुडी कनमोली" के नाम से जाना जाता है, तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले में स्थित है। यह रामेश्वरम और मन्नार की खाड़ी के करीब स्थित है, जो इसे एक महत्वपूर्ण पक्षी विहार स्थल बनाता है। यह अभ्यारण्य पक्षी प्रेमियों और प्रकृति प्रेमियों के लिए आदर्श स्थान है जो पक्षियों और प्रकृति की तस्वीरें लेने वालों के लिए एक बेहतरीन अवसर प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त यह अभ्यारण्य जैव विविधता के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक अद्भुत स्थल है।

 यह आर्द्रभूमि 1989 से एक संरक्षित क्षेत्र है और इसे पक्षी अभ्‍यारण्य के रूप में घोषित किया गया है, जो तमिलनाडु वन विभाग, रामनाथपुरम डिवीजन के अधिकार क्षेत्र में आता है। 

चित्रांगुडी पक्षी अभ्‍यारण्य शीतकालीन प्रवासी पक्षियों के लिए एक आदर्श आवास है। स्‍थल से 30 परिवारों के लगभग 50 पक्षियों के उपस्थित होने की जानकारी मिली है। इनमें से 47 जल पक्षी और 3 स्थलीय पक्षी हैं। 

इस स्‍थल क्षेत्र से स्पॉट-बिल्ड पेलिकन, लिटिल एग्रेट, ग्रे हेरॉन, लार्ज एग्रेट, ओपन बिल स्टॉर्क, पर्पल और पोंड हेरॉन जैसे उल्लेखनीय जलपक्षी देखे गए।

पाई जाने वाली पक्षी प्रजातियाँ

  • जलपक्षी: ग्रे पेलिकन, लिटिल कॉर्मोरेंट, स्पूनबिल, एग्रेट, पेंटेड स्टॉर्क।
  • प्रवासी पक्षी: फ्लेमिंगो, ग्रे हेरॉन, ब्लैक-टेल्ड गॉडविट, सैंडपाइपर।
  • स्थानीय पक्षी: भारतीय बगुला, किंगफिशर, टर्न आदि।

 चित्रांगुडी कृषि क्षेत्रों से घिरा हुआ है, जहां साल भर विभिन्न फसलें उगाई जाती हैं। आर्द्रभूमि कई मछलियों, उभयचरों, मोलस्क, जलीय कीड़ों और उनके लार्वा का भी पालन करती है यह प्रवासी जलपक्षियों के लिए अच्छे भोजन स्रोत बनाते हैं। कृषि उद्देश्यों के लिए आर्द्रभूमि के आसपास और भीतर सिंचाई के लिए भूजल निकाला जाता है।

वडुवूर पक्षी अभयारण्य: साइबेरियन सारस, ग्रे पेलिकन, पेंटेड स्टॉर्क, स्पूनबिल जैसे पक्षियों का स्थल

Vaduvur

Vaduvur Bird Sanctuar: वडुवूर पक्षी अभयारण्य तमिलनाडु के तिरुवरूर जिले में स्थित है, जो एक बड़ा मानव निर्मित सिंचाई तालाब है, जो कावेरी डेल्टा के हिस्से के साथ नीदमंगलम तालुक में स्थित है. यह तंजावुर से लगभग 25 किमी और तिरुवरूर से 30 किमी दूर स्थित है। यह अभयारण्य हरे-भरे जलाशयों, दलदली भूमि और घास के मैदानों से घिरा हुआ है जो पक्षियों के लिए अनुकूल पर्यावास प्रदान करते हैं। यहाँ कई  प्रकार कि प्रवासी पक्षी जैसे  साइबेरियन सारस, ग्रे पेलिकन, पेंटेड स्टॉर्क, स्पूनबिल, फ्लेमिंगो, ब्लैक-टेल्ड गॉडविट आदि आते हैं। इसके अतिरिक्त स्थानीय पक्षी जैसे  भारतीय बगुला, किंगफिशर, कॉर्मोरेंट, डार्टर्स, एग्रेट आदि का भी स्थल है। 

वडुवूर पक्षी अभयारण्य 112.638 हेक्टेयर के क्षेत्र में फैला हुआ है, यह एक बड़ा मानव निर्मित सिंचाई जलाशय और प्रवासी पक्षियों के लिए आश्रय है क्योंकि यह भोजन, आश्रय और प्रजनन के लिए उपयुक्त वातावरण प्रदान करता है। 

इन जलाशयों में निवासी और सर्दियों के पानी के पक्षियों की अच्छी आबादी को शरण देने की क्षमता है लेकिन इसकी पुष्टि के लिए कोई अध्ययन नहीं किया गया है। 

सर्वेक्षण किए गए अधिकांश जलाशयों में भारतीय जलाशय बगुला अर्देओला ग्रेई पाया गया। यूरेशियन विजोन अनस पेनेलोप, नॉर्दर्न पिंटेल अनस एक्यूटा, गार्गनी अनस क्वेरक्वेडुला जैसे सर्दियों के जलपक्षी की बड़ी उपस्थिति जलाशयों में दर्ज की गई थी। 

कांजीरकुलम पक्षी अभयारण्य-तमिलनाडु

वडुवूर पक्षी अभ्यारण्य में विविध निवास स्थान हैं जिनमें कई इनलेट और आसपास के सिंचित कृषि क्षेत्र शामिल हैं जो पक्षियों के लिए अच्छा घोंसला बनाने और चारागाह प्रदान करते हैं। इस प्रकार, यह स्‍थल उपर्युक्‍त सूचीबद्ध प्रजातियों को उनके जीवन-चक्र के महत्वपूर्ण चरणों के दौरान सहायता प्रदान करती है।

पक्षी प्रजातियाँ

प्रवासी पक्षी: साइबेरियन सारस, ग्रे पेलिकन, पेंटेड स्टॉर्क, स्पूनबिल, फ्लेमिंगो, ब्लैक-टेल्ड गॉडविट।

शालबुग वेटलैंड कंजर्वेशन रिजर्व-जम्‍मू और कश्‍मीर

स्थानीय पक्षी: भारतीय बगुला, किंगफिशर, कॉर्मोरेंट, डार्टर्स, एग्रेट आदि।

Google 27th Birthday: जानें अबतक का सफर, जन्म, इतिहास, क्या होता डूडल


Google की स्थापना 1998 में हुई थी जिसका उद्देश्य दुनिया भर में जानकारी और नवीनतम अपडेट को लोगों तक पहुंचाना था, एक ऐसा मंच बनाना जो दुनिया भर के हर हिस्से के लोगों की उंगलियों और जापान पर रहा। और आज स्थापना के 27 वें वर्ष में ऐसा लगता है कि Google ने अधिकांश लक्ष्य प्राप्त कर लिया है। जी हाँ, इसकी स्थापना लैरी पेज और सर्जी ब्रायन ने की थी, जो स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में मिले थे और उन्होंने वर्ल्ड वाइड वेब को और अधिक आसान बनाने के लिए एक दृष्टिकोण साझा किया था।

भले ही उनका लक्ष्य एक अनुसंधान और अनुसंधान के रूप में शुरुआत थी, लेकिन समय के साथ वह एक वैश्विक दिग्गज में बदल गए। 4 सितंबर 1998 को Google की शुरुआत हुई और 27 सितंबर 1998 को Google Inc. की आधिकारिक शुरुआत हुई। कंपनी का पहला 7 साल तक जन्मदिन 4 सितंबर को मनाया जाता था, जिसके बाद 27 सितंबर को जन्मदिन मनाया गया।

डूडल क्या हैं

27 वे जन्मदिवस के अवसर पर गूगल ने अपने पुराने डूडल को डिस्प्ले किया है जो इस बात का प्रतिक है की अपने पुराने डूडल को याद कर सम्मान प्रदान करें। 

गूगल डूडल, होमपेज पर दिखाई देने वाले मूल लोगो का एक अस्थायी कलात्मक संशोधन होता है। गूगल हमेशा किसी खास अवसर पर अपने डूडल  के माध्यम से सम्मान देने की कोशिश करता है जिसका मतलब साफ कि गूगल दुनिया के सभी लोगों के दिलों में उतर कर उनके साथ खुशियां शेयर करने का माध्यम तलाशता है.  त्योहारों, छुट्टियों, प्रसिद्ध हस्तियों या वर्षगाँठ जैसे सांस्कृतिक महत्व के आयोजनों का जश्न मनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। 

गूगल के अनुसार, पहला डूडल एक तरह के 'आउट ऑफ ऑफिस' संदेश के रूप में तब लॉन्च किया गया था जब संस्थापक लैरी और सर्गेई छुट्टी पर गए थे। पहला डूडल 1998 में लोगों को यह बताने के लिए प्रकाशित किया गया था कि वे छुट्टी पर जा रहे हैं। पहला अंतर्राष्ट्रीय डूडल 2000 में फ्रांस में बैस्टिल दिवस मनाने के लिए लॉन्च किया गया था।

EPFO: ऑटो-सेटलमेंट सीमा 1 लाख रु से बढ़कर हुई 5 लाख, लोगों को मौजा हीं मौजा


ईपीएफओ सदस्यों के लिए पहुँच को आसान बनाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हुए सरकार ने व्यापक फैसला लेते हुए अग्रिम दावों के लिए ऑटो-सेटलमेंट सीमा को मौजूदा 1 लाख रु से बढ़ाकर 5 लाख रु कर दिया है। इस कदम से लाखों ईपीएफओ सदस्यों को खासकर तत्काल ज़रूरत के समय में, जल्दी धन प्राप्त करने में मदद मिलेगी। 

वित्तीय वर्ष 2024-25 में, ईपीएफओ ​​ने ऑटो-सेटलमेंट के माध्यम से रिकॉर्ड 2.34 करोड़ अग्रिम दावों को सफलतापूर्वक संसाधित करके एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की, जो पिछले वर्ष की तुलना में 161% की वृद्धि को दर्शाता है। उल्लेखनीय रूप से, 2024-25 में सभी अग्रिम दावों में से 59% का निपटान ऑटो मोड के माध्यम से किया गया।

इस वृद्धि को जारी रखते हुए, वित्त वर्ष 2025-26 के पहले ढाई महीनों में, ईपीएफओ ​​ने पहले ही 76.52 लाख दावों का स्वतः निपटान कर दिया है, जो अब तक निपटाए गए सभी अग्रिम दावों का लगभग 70% है। यह वृद्धि ईपीएफओ ​​के स्वचालन पर मजबूत फोकस और अपने सदस्यों को तेज़, अधिक कुशल सेवाएँ प्रदान करने पर प्रकाश डालती है।

5 लाख रुपये की बढ़ी हुई सीमा के साथ, अतिरिक्त अग्रिम दावे अब स्वतः निपटान के लिए स्वीकार होंगे, जिससे जमा करने के तीन दिनों के भीतर उनका निपटान हो जाएगा। यह बढ़ी हुई सीमा और धन तक जल्दी पहुँच सदस्यों को जब उन्हें धन की सबसे अधिक आवश्यकता होगी तब समय पर वित्तीय सहायता प्राप्त करने में मदद करेगी।

यह कदम प्रौद्योगिकी का उपयोग करके सेवा वितरण में सुधार करने के लिए ईपीएफओ के व्यापक प्रयास का हिस्सा है। ईपीएफओ सदस्यों के लिए पहुँच को आसान बनाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हुए, यह रेखांकित किया गया है कि संगठन निर्बाध और कुशल सेवा अनुभव सुनिश्चित करने में प्रौद्योगिकी और प्रक्रिया सरलीकरण का लाभ आगे भी उठाएगा। इन सुधारों ने न केवल दावा निपटान प्रक्रिया को तेज किया है, बल्कि सदस्यों की शिकायतों को कम करने में भी योगदान दिया है, जिससे सदस्यों का जीवन आसान हुआ है। (source PIB)


Tatkal Ticket Rules 2025: 1 जुलाई से आईआरसीटीसी और ऐप पर तत्काल टिकट सिर्फ यही लोग बुक कर सकेंगे

 

Tatkal Ticket Rules 2025

Tatkal Ticket Rules 2025: तत्काल बुकिंग में पारदर्शिता बढ़ाने और यात्रियों को तत्काल टिकट निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से सुलभ कराने के लिए भारतीय रेलवे ने तत्काल टिकट बुकिंग प्रणाली में महत्वपूर्ण संशोधनों की घोषणा की है। इनका उद्देश्य उपयोगकर्ता सत्‍यापन बढ़ाना और योजना का दुरुपयोग रोकना है।

यात्रियों को तत्काल टिकट निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से सुलभ कराने और उनके हितों की रक्षा के लिए भारतीय रेलवे ने तत्काल टिकट बुकिंग प्रणाली में महत्वपूर्ण संशोधनों की घोषणा की है। इनका उद्देश्य उपयोगकर्ता सत्‍यापन बढ़ाना और योजना का दुरुपयोग रोकना है।

नए प्रावधान में निम्‍नलिखित व्‍यवस्‍था की गई है:

1. ऑनलाइन तत्काल बुकिंग के लिए आधार सत्‍यापन:

एक जुलाई 2025 से, भारतीय रेलवे खानपान और पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) की आधिकारिक वेबसाइट और मोबाइल ऐप द्वारा तत्काल टिकट बुकिंग केवल आधार सत्‍यापित उपयोगकर्ताओं के लिए ही उपलब्ध होंगे।

इसके अलावा, 15 जुलाई 2025 से ऑनलाइन तत्काल बुकिंग के लिए आधार ओटीपी सत्‍यापन अनिवार्य हो जाएगा।

2. यात्री आरक्षण प्रणाली काउंटर (पीआरएस काउंटर) और एजेंटों द्वारा बुकिंग में सिस्टम-आधारित ओटीपी सत्‍यापन:

कम्प्यूटरीकृत यात्री आरक्षण प्रणाली (पीआरएस) काउंटरों और अधिकृत एजेंटों के माध्यम से तत्काल टिकटों की बुकिंग के दौरान उपयोगकर्ता के मोबाइल नंबर पर ओटीपी सत्‍यापन की आवश्यकता होगी।

यह प्रावधान भी 15 जुलाई 2025 से लागू होगा।

3. अधिकृत एजेंटों के लिए बुकिंग समय की पाबंदी:

रेल आरक्षण के शुरूआती समय में बल्क (एक साथ बहुत सारे) बुकिंग रोकने के लिए, भारतीय रेलवे के अधिकृत टिकटिंग एजेंटों को बुकिंग विंडो के पहले 30 मिनट के दौरान तत्काल टिकट बुक करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

एसी क्लासों के लिए, यह प्रतिबंध सुबह 10 बजे से 10 बजकर 30 मिनट तक और गैर-एसी क्लास के लिए, सुबह 11 बजे से 11 बजकर 30 मिनट तक लागू होगा।

ये बदलाव तत्काल बुकिंग में पारदर्शिता बढ़ाने और सुनिश्चित करने के लिए लागू किए जा रहे हैं कि योजना का लाभ वास्तविक उपयोगकर्ताओं को मिले।

रेलवे सूचना प्रणाली केन्‍द्र (सीआरआईएस) और आईआरसीटीसी को इस बारे में आवश्यक प्रणालीगत संशोधन करने और सभी रेलवे जोन और संबंधित विभागों को सूचित करने के निर्देश दिये गये हैं।