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International Women Day : मलाला यूसुफजई-जिनकी आवाज को तालिबानी आतंकवादियों की गोली भी खामोश नहीं कर सकी

International Malala Day  Malala Yusufjai Quotes Importance

Point Of View: मलाला यूसुफजई सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि शिक्षा और हिम्मत की मिसाल हैं जिसने पाकिस्तान के तालिबानी कट्टरपंथियों को ललकार कर अपने मिशन को आगे बढ़ाया। उनका जीवन और संघर्ष हमें यह बताता है कि अगर इरादे पक्के हों, तो किसी भी बाधा को पार किया जा सकता है। अपने जुनून के बदौलत मलाल ने 2014 में, मात्र 17 साल की उम्र में नोबेल शांति पुरस्कार मिला, जिससे वे सबसे कम उम्र की नोबेल विजेता बन गईं।
मलाला यूसुफजई एक पाकिस्तानी शिक्षाविद और मानवाधिकार कार्यकर्त्ता  हैं। उनका जन्म 12 जुलाई, 1997 को पाकिस्तान के स्वात घाटी में हुआ।

मलाला का पिता, जिसका नाम जियाद यूसुफजई है, एक स्कूल का प्रधानाध्यापक थे और उन्होंने हमेशा से अपनी बेटी की शिक्षा पर बहुत ध्यान दिया। मालाला अपने पिता की प्रेरणा से जीवनभर शिक्षा के महत्व को समझने लगीं।

2012 में, जब मलाला केवल 15 वर्षीय थीं, तब उन्हें अपने लेखों के माध्यम से लड़ाई स्तंभ के रूप में जाना जाने लगा। वह पाकिस्तानी तालिबान के शिक्षा पर प्रतिबंध के खिलाफ आवाज उठाने के लिए अपनी आवाज बुलंद करने लगीं। मलाला के द्वारा लिखे गए लेखों में वह लड़कियों के अधिकारों की बहुतायत से चर्चा करतीं थीं और उन्होंने बच्चों की शिक्षा के महत्व पर जोर दिया।

2012 के अक्टूबर में, मलाला को एक बस में जाते हुए तालिबानी लोगों द्वारा गोली मारी गई। इस हमले में उनकी गंभीर घायली हो गई, लेकिन वे बच गईं। मलाला की इस हमले के बाद विश्व भर में उनके समर्थन में आवाज बुलंद हुई और उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार से नवाजा गया। यह उन्हें सबसे युवा व्यक्ति बनाता है जिसे नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

  • मलाला का जन्म 12 जुलाई 1997 को पाकिस्तान के स्वात घाटी में हुआ।
  • उनके पिता ज़ियाउद्दीन यूसुफजई खुद एक शिक्षक और शिक्षा के समर्थक थे।
  • उनकी आत्मकथा "I Am Malala" दुनियाभर में प्रसिद्ध है।
  • उन्होंने "मलाला फंड" नामक संस्था बनाई, जो दुनियाभर में लड़कियों की शिक्षा के लिए काम कर रही है।
  • 2014 में, मात्र 17 साल की उम्र में, मलाला को नोबेल शांति पुरस्कार मिला, जिससे वे सबसे कम उम्र की नोबेल विजेता बन गईं।

मलाला यूसुफजई आज भी मानवाधिकारों की प्रचार-प्रसार करती हैं और बाल-श्रम और बाल-विवाह के खिलाफ लड़ाई में सक्रिय रहती हैं। उन्होंने एक मानवाधिकार संगठन "मलाला फंड" की स्थापना की है, जो गरीबी से पीड़ित बच्चों की शिक्षा को संचालित करने का प्रयास करता है।

यहां कुछ महत्वपूर्ण कोट्स ऑफ़ मलाला यूसुफजई हैं:

"एक किताब, एक कलम, एक बच्चा और एक उसकी शिक्षा में चंद स्लेट, यही है हमारी मुसीबतों की आस्था और साथी।" -मलाला यूसुफजई

("One child, one teacher, one book, and one pen can change the world.")

"हम शिक्षा की ताकत से नहीं डरते हैं, बल्की उसकी आवश्यकता से डरते हैं।" -मलाला यूसुफजई

("We are not afraid of the power of education, but rather the need for it.")

"जब आप शिक्षा को इजाज़त देते हैं, आप उजाले को समर्थन देते हैं।"

-मलाला यूसुफजई

("When you give education the permission to exist, you give support to the light.")

"हमारी लड़ाई शिक्षा की लड़ाई है, और हमें इसमें गिरावट नहीं होने देनी चाहिए।" -मलाला यूसुफजई

("Our fight is a fight for education, and we must not allow setbacks in this.")

"शिक्षा एक बुराई से बचाव कर सकती है। शिक्षा एक बंदूक से ज़्यादा ताकतवर है।" -मलाला यूसुफजई

("Education can save us from evil. Education is mightier than a gun.")

"मैं नहीं चाहती कि मुझे इसलिए याद किया जाए कि मुझ पर हमला हुआ था, बल्कि मुझे इसलिए याद किया जाए कि मैं अपनी आवाज़ बदलने के लिए खड़ी हुई थी।" -मलाला यूसुफजई

("I don't want to be remembered because I was shot, but because I stood up to change my voice.")

"जब आपके शब्द और आपकी आवाज़ मिल जाती है, तब आप दुनिया को बदलने की शक्ति प्राप्त करते हैं।"-मलाला यूसुफजई

("When your words and your voice come together, you gain the power to change the world.")

मलाला यूसुफजई ने अपने समर्पण और साहस के माध्यम से दुनिया भर में शिक्षा के अधिकार के लिए लड़ाई लड़ी है। उनके इन कोट्स ने दुनिया को प्रेरित किया है और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं।


Point Of View : अपनी प्रसन्नता को संभालकर रखें इसमें छिपा है जीवन की सफलता का रहस्य

Inspiring  Thoughts: Happiness..Ultimate weapon for success in life
Point Of View :  
भले ही यह आपको कुछ विचित्र और अस्वाभाविक लगे, लेकिन व्यावहारिक रूप से यह जीवन का यथार्थ  है कि हमारी सफलता का रहस्य खुशी की स्थिति में है. किसी ने क्या खूब कहा है कि " प्रसन्नता ही आपकी सबसे बड़ी पूंजी है। इसे सँभालकर रखें, क्योंकि यह आपको हर मुश्किल से बाहर निकाल सकती है।"
 चिंता या दुखी होना जीवन में किसी भी परिस्थिति का एक हिस्सा हो सकता है लेकिन  यदि आप अपने जीवन में सफल होना चाहते हैं, तो प्रसन्न रहने की कला सीखना नितांत आवश्यक है. याद रखें-"खुश रहना अपने आप में एक महान सफलता है। जो व्यक्ति खुशी को चुनता है, वह हर परिस्थिति में विजयी होता है।"

आप खुद इस बात का अनुभव करेंगे कि अगर आपका चित प्रसन्न है तो आप बेहतर प्रदर्शन कर पाते हैं और आखिर जीवन में सफल होने के लिए आपके बेहतर प्रदर्शन के अतिरिक्त और क्या चाहिए. 

सच्चाई तो यह है कि जीवन मे सच्ची खुशी भीतर से आती है। जब आप अपने जीवन की छोटी-छोटी बातों में खुशी ढूंढने लगते हैं, तो जीवन सफल होने लगता है और यही वह वास्तविकता है जिसे हम खुद के अंदर नहीं ढूंढ पाते हैं। 



प्रसन्नता : एक यात्रा है, एक गंतव्य  नहीं है. आप अपने दैनिक जीवन में  अपने जीवन के लिए खुशी की स्थिति पर विचार करें  तो पाएंगे कि  प्रसन्न रहने की कला आपके द्वारा घटनाओं को देखने की दृष्टिकोण और मन की स्थिति में निहित है.

आप भले हीं इस पर विश्वास नहीं करें लेकिन जीवन कि वास्तविकता यही है कि "खुशी किसी मंज़िल तक पहुँचने का परिणाम नहीं है, बल्कि यह सफर के दौरान हमारे नजरिये की अभिव्यक्ति है।"


धैर्य और आत्मविश्वास का नहीं छोड़े दामन.... मिलेगी विपरीत परिस्थितियों में भी सफलता

 आपको अपने हर एक उस परिवेश  में खुश होने का एक कारण खोजने की कोशिश करनी होगी जिसमें हम रहते हैं,बावजूद इसके कि  आपके आस-पास  आपको दुखी रखने के लिए पर्याप्त कारक मौजूद है। 

"सफलता और खुशी दोनों एक-दूसरे से जुड़ी हैं। खुश रहोगे, तो सफलता अपने आप आपके करीब आएगी।"

हमारे जीवन का अंतिम गंतव्य तो वह टारगेट है जिसके लिए हम अपने जीवन को एक कारण बनाते हैं. लेकिन प्रसन्नता  सिर्फ एक यात्रा है और हमारे प्रदर्शन और हमारे जीवन के अंतिम लक्ष्य को प्राप्त करने के प्रयासों को प्रोत्साहित करने का साधन है.

बदल सकते हैं आपदा को अवसर में…जानें कैसे 

जीवन में प्रसन्नता प्रदान करने वाले कारणों को  नोट करें और इस बात को आत्मसात करें कि "जिंदगी छोटी है, इसलिए हर पल में खुशी ढूंढो। खुश रहने वाले लोग ही अपनी दुनिया बदल सकते हैं।"


आपको खुश रखने और अपने लक्ष्य को हासिल  अभिप्रेरक बनने वाले कारणों को  अपने  डायरी में लिखें....  आपको प्रसन्न रखने वाले आपके जीवन  में तब आपके लिए खास भूमिका निभाएंगे जब आपके दिमाग में निराशावादी और नकारात्मक दृष्टिकोण का विचार आएगा।

गगन पर दो सितारे: एक तुम हो,

धरा पर दो चरण हैं: एक तुम हो,

‘त्रिवेणी’ दो नदी हैं! एक तुम हो,

हिमालय दो शिखर है: एक तुम हो,

 इस देश को रखना मेरे बच्चों संभाल के

-माखनलाल चतुर्वेदी


कहने की जरूरत नहीं है, यदि आप दुखी मनोदशा की स्थिति में आप कोई कार्य कर रहे होते हैं तो  आप देखेंगे कि आपके काम की दर बहुत धीमी है साथ हीं आपसे अक्सर गलतियां भी काफी होती है.  जाहिर है कि  अप्रसन्नता की स्थिति में आप  प्रदर्शन सही नहीं रख पाते हैं साथ ही अंत में  आप  मानसिक तनाव के से भी पीड़ित होते हैं.... 

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 लेकिन अगर आप प्रसन्नता की स्थिति में कोई मुश्किल कार्य को भी  करने का बीड़ा  उठाते हैं तो काम को एन्जॉय  गलतियों  की सम्भावना भी कम  होती है साथ ही आपका काम निर्धारित समय के भीतर पूरा भी हो जाता है... 

जाहिर है...प्रसन्नता की स्थिति में आप अपने प्रदर्शन को अच्छे से दुहरा पाते हैं. पाते हैं.... 


किसी के रोके न रुक जाना तू,

लकीरें किस्मत की खुद बनाना तू,

कर मंजिल अपनी तू फतह,

कामयाबी के निशान छोड़ दे,

घुट-घुट कर जीना छोड़ दे,

-नरेंद्र वर्मा


सभी के पास खुश होने या दुखी होने का कारण मौजूद है क्योंकि यह आपके मन की स्थिति पर निर्भर करता है....  बस आप कल्पना करें ... आपको किसी भी प्रतीक्षित यात्रा के लिए अपना दिन शुरू करना है तो क्या अप्रसन्नता  और नकारात्मक मन की स्थिति के साथ हमारी उस बहुप्रतीक्षित यात्रा को शुरू करना उचित है ... 

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क्या आप इस तरह के आधे-अधूरे प्रयासों में यात्रा के अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं ... . निश्चित रूप से आपकी अंतरात्मा भी आपको अपनी यात्रा के दौरान खुश रहने की सलाह देगी और अपनी यात्रा के बेहतर परिणाम के लिए प्रसन्न रहने के अतिरिक्त और कोई भी बढ़िया  इसमें कोई संदेह नहीं है कि आपको अपने जीवन की बेहतरी के लिए दुखी और नकारात्मक मानसिकता को नजरअंदाज करना होगा।

लॉकडाउन और ऑनलाइन पढ़ाई: बच्चों से अधिक है पेरेंट्स की भूमिका, अपनाएँ ये टिप्स

Parenting Tips: बच्चों को उनके "जरूरत" और "ईच्छाओं" के बीच के फर्क को समझाएं

  difference between want and needs points of view


पैरेटिंग बच्चों के वर्तमान के साथ ही उनके बच्चों के भविष्य से जुड़ा पहलू है और इसके लिए यह जरूरी है कि पेरेंट्स को बच्चों को  बुनियादी बातों का हमेशा ख्याल रखें। कोरोना महामारी के बाद लॉक डाउन और आम लोगों को जिस तरह से जॉब्स और बचत कि क्राइसिस झेलना पड़ा, उसे देखते हुए सभी पेरेंट्स के लिए यह जरूरी है कि वो बच्चों मे बचत की  आदत डालें। और इसके लिए सबसे जरूरी है कि हम बच्चों को "चाहतें (Wants) और ज़रूरतें (Needs)" के बीच के अंतर को सिखाएं ताकि वे जीवन मे दोनों के बीच के फर्क को समझ सकें। 

हमें बच्चों को यह समझना  बहुत जरूरी है कि जरूरत और इच्छाओं मे बेसिक फर्क क्या है? जरूरत और  इच्छाओं मे होने वाली फर्क को अगर हमारे बच्चे समझ लेंगे तो फिर पेरेंट्स की भूमिका काफी आसान हो जाएगी। " ज़रूरतें " वे चीज़ें हैं जिनके बिना आप नहीं रह सकते और इन्हे बेसिक नीड्स भी कह सकते हैं। भोजन और पानी  और रहने के लिए मकान का होना हमें जरूरी है क्योंकि अगर हमें वो चीज़ें न मिलें  तो हमारा जीवन और स्वास्थ्य ख़तरे में पड़ सकता है।

वहीं दूसरी ओर गैर-ज़रूरी चीज़ों को " इच्छाएँ " कहा जाता है जिनके नहीं होने से हमारी जीवन तो खतरे में नहीं पड़ेगी, लेकिन हमारी जीवन के परेशानियों को कुछ हद तक कम हो सकती है। अगर र-ज़रूरी ये चीजें हमारे पास नहीं हैं, तो आपके जीवन पर भौतिक रूप से कोई असर नहीं पड़ेगा, हालाँकि आप कुछ समय के लिए परेशान हो सकते हैं।

बच्चों को "चाहत" और "ज़रूरत" सिखाने का उद्देश्य यह है कि वे निर्णय लेने में सक्षम हों और जीवन के लिए प्राथमिकताएं तय कर सकें। इसे जितना मज़ेदार और इंटरैक्टिव बनाएंगे, उतना ही बेहतर सीखेंगे

याद रखें, यही वो बुनियाद है जिस पर हम अपने बच्चों का भविष्य के महल खड़ा करते हैं। बच्चों को "चाहतें (Wants) और ज़रूरतें (Needs)" के बीच के अंतर को सीखने के लिए आप नीचे दिए गए मज़ेदार और इंटरैक्टिव तरीकों कि हेल्प ले सकते हैं जो न केवल प्रभावी है बल्कि यह आसान भी है-

1. ज़रूरतों और चाहतों के बीच के अंतर को बताएं 

ज़रूरतें: बच्चों को समझाएँ कि ज़रूरतें ऐसी चीज़ें हैं जिनकी हमें जीवित रहने और काम करने के लिए बिल्कुल ज़रूरत होती है, जैसे कि खाना, पानी, आश्रय, कपड़े और नींद। वहीं उन्हे समझाएं कि चाहते हमेशा जरूरत नहीं होती बल्कि वे हमारी इच्छा पर निर्भर करती है और हमारे जीवन के लिए वे जरूरी नहीं है जितनी नीड्स होती है। जैसे  खिलौने, वीडियो गेम, कैंडी या नवीनतम गैजेट के बगैर जीवन तो सकता है लेकिन कहना और पानी के बिना जीवन काटना काफी मुश्किल होगा ।

2. वास्तविकता मे जीने का मतलब समझाएं :

हमेशा बच्चों को अपने यथार्थ और वास्तविकता मे जीना  सिखाएं ताकि वे खयाली और यथार्थ कि जीवन मे फर्क को समझ सकह। ।  बच्चे को किराने की खरीदारी पर ले जाएँ और उन चीज़ों पर चर्चा करें जिन्हें आप खरीद रहे हैं। उन्हें ज़रूरतों (दूध, ब्रेड, सब्ज़ियाँ) या चाहतों (कुकीज़, कैंडी, सोडा) के रूप में सामग्री को बताएं कि क्या उनमें नीड्स है और क्या wants है। मनोरंजन कि चीजें और जरूरी चीजों के फर्क को समझना इसलिए भी आवश्यक है क्योंकि विलासिता और जरूरी चीजों के फर्क पर एक पैरेंट्स खूबसूरती और प्रभावी ढंग से समझा सकता है। 

3. इच्छाओं और ज़रूरतों का चार्ट बनाएँ: 

अगर आप  बच्चों कि जरूरत और इच्छाओं वाली चीजों को एक चार्ट बनाकर बच्चों को समझाएंगे तो वे अछे से समझ सकेंगे। याद रखें चार्ट के माध्यम से उन्हे दोनों वस्तुओं के बीच के फर्क को समझने मे हेल्प मिलेगी। एक बोर्ड पर या फ्लैशकार्ड पर चीजें लिखें, जैसे "चॉकलेट", "किताबें", "स्कूल बैग", "टीवी", "फल"। बच्चों से पूछें कि इनमें से कौन सी ज़रूरत है और कौन सी चाहत।

आप उनसे पूछे कि अगर उसे जोरों कि भूख लगी है तो फिर उसे क्या चाहिए-चॉकलेट या खाना?" "स्कूल जाने के लिए बैग चाहिए, लेकिन डिज़ाइनर बैग ज़रूरत है या चाहत?"

4 . बजट निर्धारित करें:

कभी भी अपने बच्चों के सामने यह प्रकट नहीं करें कि उनके लिए पैसे का कोई अभाव नहीं है और उसके लिए सबकुछ खरीद सकते हैं। आप अगर इस लायक हैं कि आपके पास पैसे का अभाव नहीं है तो यह और भी अच्छा है लेकिन बच्चों को चाहते और जरूरतों मे अंतर को समझाना कभी भी अभाव मे जीना सिखाना नहीं होता है। हमेशा से एक बजट बनाकर बच्चों को दें और कहें कि वो कैसे अपने जरूरी और चाहत वाली चीजों को उस बजट के भीतर चुनाव करता है। इससे उन्हें पैसे के मूल्य और बजट बनाने के महत्व को समझने में मदद मिलेगी।

5. सवाल पूछने के लिए प्रोत्साहित करें:

बच्चों को अपने बच्चे को इच्छाओं और ज़रूरतों के बारे में सवाल पूछने के लिए प्रोत्साहित करें लेकिन इसका ध्यान रखें कि आपका जवाब हमेशा हीं  प्रैक्टिकल एप्लिकेशन पर आधारित हो। आप उनके इच्छाओं और ज़रूरतों के बारे में पूछें गए सवालों का जवाब  ईमानदारी और धैर्य से दें ताकि उनपर इसका व्यापक असर पद सके। इसके साथ ही बच्चों को जरूरत और चाहतों के अतिरिक्त नैतिक शिक्षा कि भी जानकारी दें तथा यह भी सिखाएं कि हर किसी के पास अपनी ज़रूरतें पूरी करने के साधन नहीं होते। उन्हें दयालु बनाएं ताकि वे दूसरों की मदद के लिए प्रेरित हों।


Point Of View: इतिहास बनाने वाले हमारे बीच से ही होते हैं, फर्क तो बस जूनून का होता है

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Point Of View:  सफलता तक पहुँचने के लिए आपके अंदर का जुनून बहुत महत्वपूर्ण होता है और इसके अभाव मे लक्ष्य को पाने की तो भूल जाएँ, आप शुरुआत नहीं कर सकते। किसी भी लक्ष्य को पाने का जुनून केवल एक भावना नहीं, बल्कि त्याग, धैर्य और निरंतर प्रयास की मांग करता है।

इतिहास बनाने वाले लोगों की जीवनी को पढ़ते समय अक्सर हम सोचते हैं कि ऐसे लोग कुछ खास किस्म के होते हैं और वे इतिहास का निर्माण करने के लिए ही पैदा होते है। अगर आप बॉलीवुड के सफल अभिनेताओं की शुरुआती दिनों के संघर्ष को पढ़ेंगे तो आपको पता चलेगा की लगभग सभी को अपना मुकाम हासिल करने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा था।

कहते है ना,

"जो कहे नही करता भी हो,विश्वास उसी का होता है।

जो युग को कर्मठता से मोड़े, इतिहास उसी का होता है।।"

लेकिन क्या कभी आपने इस पर कभी गौर किया कि आज जो अपने क्षेत्र में सफलता का कीर्तिमान स्थापित करने वाले इन कलाकारों का वजूद भी हमारे और आपके बीच से रहा है।।सच तो यह है कि हम अपनी मानसिकता को इस तरह बनाकर जीने की आदत बना चुके हैं,  जहां हम अपने को स्टेज पर नही बल्कि दर्शक दीर्घा में बैठकर ताली बजाने वालों के बीच का बना लिया है।

किसी कवि ने कितना सुंदर चित्रण किया है...

"वह पथ क्या पथिक परीक्षा क्या जिस पथ में बिखरे शूल न हो।

नाविक की धैर्य परीक्षा क्या यदि धाराएं प्रतिकूल न हो।।।"

सफलता का कीर्तिमान बनाने वालों और हमारे बीच अगर कुछ फर्क रहा तो वह सिर्फ जुनून का था जो उन्हें सफलता दिलाया और हम कुछ कर गुजरने के लिए सोचने का साहस तक नही उठा पाए।

अगर आपके सपनों में सच्चा जुनून है, तो पूरा ब्रह्मांड उसे पूरा करने में आपकी मदद करेगा। – पाउलो कोएल्हो

विश्वास कीजिए, अगर हम सभी ने भी जीवन के किसी भी मुकाम पर हार के दर को निकालने में सफलता प्राप्त कर लिया होता तो हमारे अंदर का जुनून भी आज हमें अपने लक्ष्य तक पहुंचा दिया होता।।।

आहुति बाकी यज्ञ अधूरा अपनों के विघ्नों ने घेरा

 अंतिम जय का वज़्र बनाने-नव दधीचि हड्डियां गलाएँ।

आओ फिर से दिया जलाएँ

-अटल बिहारी वाजपेयी


वो इसलिए सफल हुए क्योंकि उन्होंने सिर्फ सफलता को ध्यान में रखकर अपना प्रयास जारी रखा,लेकिन हम सफलता के बारे में नही बल्कि अपने असफलता का खौफ पर फोकस रखा।।।

सिर्फ जुनून का होना ही काफी नहीं है दोस्तों बल्कि जरुरी यह भी है कि हम सही दिशा और उचित अवसर पर इसे नई धार दें।।।

 दुनियाँ के दांव पेंच से रखना न वास्ता 

मंजिल तुम्हारी दूर है लंबा है रास्ता 

 भटका न दे कोई तुम्हें धोखे में डाल के

-प्रदीप 


सफलता अपनी कीमत तो मांगती है और यह भी एक अनिवार्य शर्त होती जिसे आपको अपने संघर्ष के दिनों का लेसन या सीख समझकर आत्मसात करनी होती है।।।

हवा के साथ नाव खेना कोई साहस कार्य नही इसमें कोई संदेह नहीं, याद तो उन्हे किया जाता है जो प्रतिकूल परिस्थितियों में सफलता की अलख जगाए रखते हैं। 

Junoon Quotes in Hindi

  • अगर आपके पास जुनून है, तो असंभव कुछ भी नहीं। 
  • सफलता उन्हीं को मिलती है, जिनमें कुछ कर गुजरने का जुनून होता है।
  • जुनून वह चिंगारी है जो असंभव को भी संभव बना सकती है।
  • "सिर्फ इच्छा करने से कुछ नहीं होता, सफलता के लिए जुनून और मेहनत दोनों जरूरी हैं।"
  • "जब तक आपके अंदर जुनून और हौसला है, तब तक कोई भी मुश्किल आपको रोक नहीं सकती।"
  • "सपने देखने वालों के पास उम्मीद होती है, लेकिन जुनूनी लोगों के पास सफलता होती है।"
  • "अपने जुनून को अपनी ताकत बनाइए, फिर देखिए कैसे दुनिया आपके कदमों में होती है।"
  • "जुनून ही वह ताकत है जो साधारण इंसान को भी असाधारण बना देती है।"
  • "अगर तुम कुछ करने का जुनून रखते हो, तो रास्ते खुद-ब-खुद बनते चले जाएंगे।"

मध्य प्रदेश का Mini Brazil: जानें क्या है नशे के बदनाम अड्डे से देश की Football Nursery तक के सफर की कहानी

नशे की लत के लिए कुख्यात रहा मध्य प्रदेश का Mini Brazil आज  Football क्रांति का जन्म स्थली बन चुकी है। इस स्थान की चर्चा पोल मंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात के संस्करण मे किया था। क्या आप जानते हैं कि  कभी यह इलाका नशे के लिए बदनाम था। यह इलाका अवैध शराब के लिए बदनाम था और यहाँ के युवा पूरी तरह नशे की गिरफ्त में थे और इसका खामियाजा इस माहौल का सबसे बड़ा नुकसान यहाँ के युवाओं को हो रहा था| लेकिन अब देश मे यह Football क्रांति का जन्म स्थली बन चुकी है जो अब धीरे- धीरे पूरे क्षेत्र में फैल रही है | आज शहडोल और उसके आसपास के काफ़ी बड़े इलाके में 1200 से ज्यादा Football club बन चुके हैं | इसकी चर्चा इसकी चर्चा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात के जुलाई 2023 के संस्करण मे किया था। आइए जानते हैं कि क्या है नशे के बदनाम अड्डे से देश की Football Nursery तक के सफर की कहानी। 

शहडोल में एक गांव है बिचारपुर

मध्य प्रदेश (एम.पी.) के शहडोल में एक गांव है बिचारपुर | बिचारपुर को Mini Brazil कहा जाता है | Mini Brazil इसलिए, क्योंकि ये गांव आज फुटबाल के उभरते सितारों का गढ़ बन गया है | 

रईस एहमद का लग्न और मेहनत 

बिचारपुर गांव के Mini Brazil बनने की यात्रा दो-ढाई दशक पहले शुरू हुई थी | उस दौरान, बिचारपुर गांव अवैध शराब के लिए बदनाम था, नशे की गिरफ्त में था | इस माहौल का सबसे बड़ा नुकसान यहाँ के युवाओं को हो रहा था | एक पूर्व National Player और coach रईस एहमद ने इन युवाओं की प्रतिभा को पहचाना | रईस जी के पास संसाधन ज्यादा नहीं थे, लेकिन उन्होंने, पूरी लगन से, युवाओं को, Football सिखाना शुरू किया | 

कुछ साल के भीतर ही यहाँ Football इतनी popular हो गयी, कि बिचारपुर गांव की पहचान ही Football से होने लगी | अब यहाँ Football क्रांति नाम से एक प्रोग्राम भी चल रहा है | इस प्रोग्राम के तहत युवाओं को इस खेल से जोड़ा जाता है और उन्हें training दी जाती है | ये प्रोग्राम इतना सफ़ल हुआ है कि बिचारपुर से National और state level के 40 से ज्यादा खिलाड़ी निकले हैं | ये Football क्रांति अब धीरे- धीरे पूरे क्षेत्र में फैल रही है | शहडोल और उसके आसपास के काफ़ी बड़े इलाके में 1200 से ज्यादा Football club बन चुके हैं | 

यहाँ से बड़ी संख्या में ऐसे खिलाड़ी निकल रहे है, जो, National level पर खेल रहे हैं | Football के कई बड़े पूर्व खिलाड़ी और coach, आज, यहाँ, युवाओं को, Training दे रहे हैं | एक आदिवासी इलाका जो अवैध शराब के लिए जाना जाता था, नशे के लिए बदनाम था, वो अब देश की Football Nursery बन गया है|

(स्रोत-मन की बात कार्यक्रम)

   

Parenting Tips: इन टिप्स से बढ़ाएं अपने बच्चों में ध्यान केंद्रित करने की क्षमता


अपने बच्चों मे कंसन्ट्रेशन (ध्यान केंद्रित करने) की क्षमता को बढ़ाना सभी पेरेंट्स का प्रमुख उदेश्य होता है क्योंकि इसका सीधा संबंध न केवल उनके पढ़ाई बल्कि उनके करियर से भी संबंधित है। खासतौर पर आजकल जिस तरह से  मोबाईल और इंटरनेट ने हमारे जीवन के हर छोटे से छोटे से ऐक्टिविटी मे भी सीधा हस्तक्षेप कर चुका है, आज कल के बच्चों मे कंसन्ट्रेशन (ध्यान केंद्रित करने) की क्षमता को बढ़ाना ज्यादा जरूरी बन चुका है। यहाँ कुछ स्टेप्स दिए गए है जो आपके बच्चों के कंसन्ट्रेशन (ध्यान केंद्रित करने) की क्षमता को बढ़ाने मे  सहायक हो सकते हैं-

नियमित ध्यान (मेडिटेशन) के लिए जागरूक करें

कान्सन्ट्रैशन बढ़ाने के लिए सबसे जरूरी है कि बच्चों के दिमाग मे जो हलचल और फास्ट लाइफ के जो कीड़े भर चुके हैं, उनसे उन्हे बाहर निकालने के लिए उन्हे नियमित ध्यान (मेडिटेशन) के लिए प्रेरित करें। बेशक यह अचानक मे नहीं होगा लेकिन आप खुद भी बच्चों के साथ समय निकालकर उनके साथ नियमित ध्यान के लिए मोटिवेट करें। प्रतिदीन कम से काम  10-15 मिनट का मेडिटेशन आपके दिमाग को न केवल शांत करता है बल्कि उनके मस्तिष्क को कस बढ़ाने में मदद करता है। ध्यान के  दौरान शुरू मे गहरी सांस लें और अपने दिमाग को बिल्कुल चिंतमुक्त और बाहरी वातावरण से अप्रभावित रखें। आप अपने बच्चों को खेल के तौर पर इसे शुरुआत करने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। 

रविवार के दिन  पैदा हुए लोगों पर होती है भगवान सूर्य की विशेष कृपा

मल्टीटास्किंग से बचें

आज कल के भाग दौड़ वाले जीवन मे न केवल पेरेंट्स बल्कि बच्चे को भी मल्टीटास्क को निपटाने के लिए बाध्य कर दिया गया है। आप देखेंगे कि कोरोना के काल से भले दुनिया बाहर या चुका है लेकिन आज भी स्कूल से उनके काम मोबाईल के माध्यम से भेजे जाते हैं। यहाँ तक कि बच्चों के पढ़ाई के एक जरूरी माध्यम मोबाईल को बना दिया गह है और इसके कारण बच्चे भी मल्टी टास्क करने के लिए बाध्य हो गए हैं। इसके लिए यह जरूरी है कि आप बच्चों को एक बार मे  एक वर्क निपटाने के लिए कहें ताकि वह अनावश्यक स्ट्रेस से बचे और अनुशासन के साथ टाइम  फ्रेम मे  काम निपटाना सीखे। 

फोन और सोशल मीडिया का उपयोग सीमित करें

न केवल बच्चे बल्कि सभी पेरेंट्स भी इस बात से इनकार नहीं कर सकते कि मोबाईल और सोशल मीडिया ने हमेशा से हमारी ध्यान और एकाग्रता को बुरी तरह से प्रभावित किया है। आप खुद अगर सोशल मीडिया पर विज़िट करें तो पाएंगे की आपके अंदर अवसाद और नकारात्मक चीजें ज्यादा हावी होती है क्योंकि यह हमारी विडंबना है की मोबाईल और सोशल मीडिया पर ऐसे ही कंटेन्ट परोसे जाते हैं जो हमारे अंदर नकारात्मकता को ओर धकेल रहे होते हैं। आप सहज ही अंदाज लगा सकते हैं की जब पेरेंट्स के लिए ये चीजें इतनी हानिकारक हैं तो बच्चों के कोमल मस्तिष्क पर इनका गलत प्रभाव पड़ता होगा। इसके लिए यह जरूरी है की आप बच्चों के लिए जहां तक हो सकें फोन और सोशल मीडिया के उपयोग को सीमित करें। 

डायरी लिखने की आदत डालें

बच्चों को लिखने और पढ़ने की आदत डालें साथ ही उनके डायरी लिखने के लिए प्रेरित करें। उन्हे बताएं की डायरी लिखने के लिए समय कैसे निकली जा सकती है और साथ ही डायरी लिखने के क्या लाभ हैं। डायरी मे प्रतिदिन के अपने प्राइऑरटी और उन्हे समय पर निपटाने के लिए डायरी पर एंट्री करने से उनके अंदर डायरी लिखने की और साथ हीं अपनी प्रतिमिकताओं को समय पर निपटाने मे मदद मिलेगी। 

पढ़ने के तरीके को बदलें

बच्चों को पढ़ने और उन्हे याद करने की पारंपरिक तरीकों से अलग कुछ नया टेक्निक की मदद लेना सिखाएं। यहाँ ध्यान देने की जरूरी है की पढ़ाई के  पारंपरिक तरीके आज भी आउट डेटेड नहीं है, बल्कि उन्हे नए अंदाज मे प्रस्तुत किया जाना चाहिए जिसे मे बच्चे उन्हे ठीक ढंग से आत्मसात कर सकें। ध्यान रखें की पढ़ना और याद करने मे फर्क होता है और बच्चों को पढ़ने से अलग समझकर याद करने के लिए प्रेरित किया जाना जरूरी है।  साथ हीं उन्हे यह भी बताया जाना जरूरी है कि पढ़ने से आपकी मानसिक स्पष्टता बढ़ती है। जो सीखा है, उसे लिखने से ध्यान केंद्रित करने की क्षमता मजबूत होती है।

पर्याप्त नींद जरूरी 

आज कल बच्चे अपने पेरेंट्स के तमाम  व्यस्तताओं और ऑफिस और घर के कार्यों की अधिकता के कारण देर रात तक जगे रहते हैं। ऑफिस का बर्डन और घर के अतिरिक्त कार्यों के कारण पेरेंट्स के लिए देर रात तक जागना तो मजबूरी है, लेकिन बच्चों के  लिए पर्याप्त नींद का होना जरूरी है इसके लिए यह जरूरी है की आप खुद के रूटीन से बच्चों को अलग रखें और उन्हे समय पर सोने के लिए भेजना सुनिश्चित करें। पर्याप्त नींद के अभाव मे बच्चों मे अनिद्रा और मानसिक रूप से अवसाद की समस्या से भी गुजरना पड़ सकता है। 


Point of View: जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रेगिस्तान मे बिताई थी रात, जानें कैसे बना गुजरात मे रण उत्सव बड़ा इवेंट


ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म जेरोधा (Zerodha) के को-फाउंडर निखिल कामथ के पॉडकास्ट मे इस सवाल के जवाब मे कि कोई एक ऐसी चीज जिसे प्रधानमंत्री मिस करते हैं, और उसके बारे मे अपनी व्यस्तताओं के कारण नहीं सोच पाते हैं,  प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने बताया कि वन लाइफ वन विजन जैसा हो गया है। इसलिए शायद मुझे लेकिन एक चीज मैं पहले करता था जो कभी-कभी मेरा मन अभी भी करता है। 

मेरा एक कार्यक्रम होता था और मैंने उसको नाम दिया था मैं मुझको मिलने जाता हूं, मैं मुझको मिलने जाता हूं, यानी कभी-कभी हम खुद को ही नहीं मिलते दुनिया को तो मिलते हैं खुद को मिलने के लिए समय ही नहीं है। तो मैं क्या करता था साल में कोई समय निकाल के तीन चार दिन मेरी जितना जरूरत है उतना सामान लेकर के चल पड़ता था और उस जगह पर जाकर रहता था जहां कोई मनुष्य ना हो, कहीं पानी की सुविधा मिल जाए बस ऐसी जगह मैं ढूंढता था जंगलों में कहीं, उस समय तो ये मोबाइल फोन वगैरह तो कुछ था ही नहीं, अखबार वगैरह का कुछ सवाल नहीं उठता था, तो वो जीवन मेरा एक अलग आनंद होता था, वो मैं कभी-कभी मिस करता हूं।

प्रधानमंत्री ने बताया कि अपने आप में खो जाना बस यही एक बात है। एक उदाहरण बताता हूं जैसे क्या हुआ। शायद 80 का कालखंड होगा, मैंने तय किया कि मैं रेगिस्तान में रहूंगा, तो मैं चल पड़ा, लेकिन रेगिस्तान में मैं भटकता ही गया भटकता ही गया, लेकिन एक दिया दिखता था लेकिन मैं पहुंच ही नहीं पाता था, तो कोई मुझे एक कैमल वाला मिल गया, बोले भाई तुम क्या कर रहे हो यहां पर, मैंने कहा भाई मैं रेगिस्तान में अंदर जाना चाहता हूं, उसने कहा ऐसा करो अभी मेरे साथ चलो वो जो सामने लाइट दिखती है वो एक आखिरी गांव है, मैं तुम्हें वहां तक छोड़ देता हूं, रात को वहां रुक जाना और सुबह फिर कोई वहां से तुम्हें मिल जाए तो तो मुझे ले गया। कोई गुलबेक करके मुस्लिम सज्जन थे, उनके यहां ले गया। 

प्रधानमंत्री ने बताया कि अब वो छोटा सा गांव धोरडो जो पाकिस्तान की सीमा पर भारत का आखिरी गांव है, और वहां 20-25 घर और सभी मुस्लिम परिवार तो अतिथि सत्कार तो हमारे देश में है ही है उनका भाई बच्चे तुम आओ भाई, मैंने कहा नहीं मुझे तो जाना है तो बोले नहीं जा सकते रेगिस्तान में अभी तो तुम्हें अंदाज है माइनस टेंपरेचर होगा। तुम कैसे रहोगे वहां, अभी रात को यहां सो जाओ तुम्हें सुबह दिखाएंगे। खैर रात को मैं उनके घर रुका उन्होंने खाना वाना खिलाया, मैंने कहा भाई मुझे तो अकेले रहना है कुछ चाहिए नहीं मुझे, बोले तुम अकेले रह ही नहीं सकते तुम्हें यहां एक हमारा छोटा सा झोपड़ी है तुम वहां रहो और उस दिन में चले जाना तुम रण में रात को वापिस आ जाना, मैं गया वो वाइट रण था और कल्पना बाहर का वो एक दृश्य ने मेरे मन को इतना छू लिया जो चीजें मैंने मेरे हिमालयन लाइफ में अनुभव की थी, बर्फ की चट्टानों के बीच में जिंदगी गुजारना यहां मैं वही दृश्य अनुभव कर रहा था और मुझे एक स्पिरिचुअल फीलिंग आता था लेकिन वो जो दृश्य मेरे मन में था जब मैं मुख्यमंत्री बना तो मैंने वहां एक रण उत्सव बड़ा इवेंट बना दिया और आज वो टूरिज्म का बहुत बड़ा डेस्टिनेशन बन गया है और अभी ग्लोबली बेस्ट टूरिस्ट विलेज का उसको दुनिया में नंबर वन इनाम मिला है उसको। (स्रोत-PIB )

Point of View: इमोशनल हैं, तो कोई वादा नहीं करें और गुस्से में हों तो इरादा करने से परहेज करें

Point of View: इमोशनल हैं, तो कोई वादा नहीं करें और गुस्से में हों तो इरादा करने से परहेज करें

Point Of View:
भय, क्रोध, गुस्सा, भावनात्मक स्थिति, दुःख या विरह की घड़ी, ख़ुशी के क्षण  आदि जीवन के कुछ ऐसे पल होते हैं जो हमारे रोज के जीवन का अभिन्न अंग है.  हमारा जीवन इन्ही मनोभाओं और इस प्रकार के अनगिनत रंगों से परिपूर्ण होता है इसमें किसी को संदेह नहीं होनी चाहिए क्योंकि जीवन की परिपूर्णता के लिए यही तो उसके रूप रंग होते हैं जो अलग-अलग रूपों में हमारे सामने आते हैं. 

लेकिन अब सवाल यह उठता है कि भले हैं उपरोक्त वर्णित अवस्थाएं हमारी जीवन कई हिस्सा हैं लेकिन क्या इन परिस्थितियों का सामना करते हुए क्या हमें ठोस निर्णय लेनी चाहिए? क्या किसी कारण से हम अगर क्रोध और गुस्सा से भरे हुए हैं तो उस समय जीवन से कोई महत्वपूर्ण फैसला लेना नुद्धिमानी होगी? प्रेम  या समर्पण जैसे क्षणिक आवेश में आकर या किसी तात्कालिक भावनात्मक लगाव के तहत कोई वादा करना न्यायपूर्ण कदम कही जा सकती है? 


कहने की जरुरत नहीं है दोस्तों कि भले ही भय, क्रोध, गुस्सा, भावनात्मक स्थिति, दुःख या विरह की घड़ी, ख़ुशी के क्षण  आदि स्थितियां हमारे जीवन का हिस्सा है और हमें इनसे दो-चार होना है पड़ता है अपने रोज के जीवन में लेकिन क्या इन परिस्थितयों के रुबरु होते हुए क्या जीवन से जुडी महत्वपूर्ण निर्णय लेना न्यायोचित कही जा सकती है. 

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क्रोध की स्थिति में संयम रखें 

अगर आप जीवन में किसी कारण से काफी  क्रोध और  गुस्सा की स्थिति में है तो ऐसे स्थिति में भला आपका विवेक आपके पास कहाँ रहता है. अगर आपके विवेक आपके साथ होगा तो कदाचित आप गुस्सा हीं करेंगे और शांति और संयम से मामले को देखकर उसे हल करने का प्रयास करेंगे। लेकिन अगर आप गुस्से में लाल-पीले हो रहें हैं तो आपके लिए यह जरुरी है कि आप संयम का परिचय दें और तत्काल उसे परिस्थिति को वेट एंड वाच की तर्ज पर गुजरने का इंतजार करें. 

विश्वास करें, क्रोध और गुस्से की स्थिति में लिया गया निर्णय कभी भी आपके लिए उचित नहीं होती और यह आपके लिए हमेशा प्रतिकूल परिस्थिति का निर्माण करेगी और आपको परेशानी में दाल सकती है. 

सुख और दुःख के दिन 

कहते हैं न, " सुख के दिन कब बीत जाते हैं पता नहीं चलता ये तो दुःख और विरह के दिन होते हैं जो काटे नहीं कटती.... " हाँ ये सच है कि जीवन में दुःख और सुख का आना-जाना लगा रहता है लेकिन अब सवाल यह उठता है कि क्या घोर विपन्नता और दुःख की स्थिति में हमें जीवन से जुडी महत्वपूर्ण निर्णय लेनी चाहिए? 

मुंशी प्रेमचद की उस कथन को याद रखें-" गले पर पड़े पैर को सहलाना   श्रेयस्कर होता है... " जाहिर है, अगर किसी के पैरों के नीचे आपका गला दबा हो तो फिर आपके लिए चुप रहने और उस संकट की स्थिति से बाहर आने के लिए शांति और समझदारी का रास्ता ही चुनना बेहतर होगी. 

भावना और सहानुभूति में वादा नहीं करें 

जीवन में भावनात्मक लगाव और सहानुभूति के शब्दों से हमें आमना-सामना होना पड़ता है और जाहिर है कि क्षणिक आवेंग में आकर हमें जल्दबाजी में कोई वादा नहीं करनी चाहिए। खासकर अगर पुरुष या महिला हों लेकिन युवावस्था के दौर में हैं तो आपको विशेष रूप से सावधान रहने की जरुरत है. 


नजरिया जीने का: पढ़ें और भी...

रिश्ते खास हैं, इन्हे अंकुरित करें प्रेम से, जिंदा रखें संवाद से और दूर रखें गलतफहमियों से

इमोशनल हैं, तो कोई वादा नहीं करें और गुस्से में हों तो इरादा करने से परहेज करें

स्व-अनुशासन के महत्त्व को समझे और जीवन को बनाएं सार्थक 

रखें खुद पर भरोसा,आपकी जीत को कोई ताकत हार में नहीं बदल सकती


Point Of View : इन टिप्स से बढ़ाएं अपना साहस-डर का सामना करें, अपने आप को चुनौती दें तथा दूसरों से प्रेरणा लें

Inspiring Thoughts: Why Courage is Important for Our Life…Follow These Quotes and witness Changes in your Life
Point Of View : साहस एक ऐसा गुण है जो हमें कठिनाइयों का सामना करने और अपनी लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करता है. यह हमें जोखिम लेने और नए अवसरों का पता लगाने के लिए प्रेरित करता है. साहस के बिना, हम अपने जीवन में बहुत कुछ हासिल नहीं कर सकते हैं. यह न केवल हमें कठिनाइयों का सामना करने में मदद करता है बल्कि  जीवन में नए अवसरों को खोजने के लिए तैयार करने का भी कार्य करता है. 

 भले ही आप साहस और हिम्मत के सन्दर्भ में अनगिनत कोट्स पढ़े होंगे लेकिन अगर हम सबसे प्रासंगिक कथन जो हिम्मत को ग्लोरिफाई करती है वह है  कि हिम्मत न कर पाने का कारण यह नहीं होता है की कुछ कर पाना कठिन हैं, बल्कि सच्चाई तो यह है है कि कुछ कर पाना कठिन इसलिए हो जाता है  क्योंकि हम हिम्मत ही नही करते और इसके लिए आवश्यक साहस नहीं जुटा पाते हैं. 

साहस हीं हमारा वह आत्म बल है जो विपरीत परिस्थितियों में भी हमेशा हमारे साथ खड़ा रहता है आपने मुंशी प्रेमचंद की वह कथन तो सुनी होगी-" भय की तरह साहस भी संक्रामक होती है" तो साफ़ है कि अगर आप साहस को अपना जीवन का आधार नहीं बनाएंगे, तो भय आप पर हावी हो जायेगा.  लोगों का हुजूम हो चाहिए आप अपने जीवन के  पथ पर अकेले ही संघर्षरत हो, साहस का होना अत्यंत आवश्यक है. सच तो यह है कि साहस हीं हमारा वह आत्म बल है जो विपरीत परिस्थितियों में भी हमेशा हमारे साथ खड़ा रहता है, यह हमारा साहस हीं हैं जो किसी भी असस्म्भव से लगने वाले काम को भी पूरा करना का हिम्मत प्रदान करती है.

यहाँ कुछ तरीके दिए गए हैं जिनसे आप अपने साहस को बढ़ा सकते हैं:

अपने डर का सामना करें: 
सबसे अच्छा तरीका अपने डर का सामना करना है. जब आप अपने डर का सामना करते हैं, तो आप देखते हैं कि वे उतने खतरनाक नहीं हैं जितने आप सोचते थे.
अपने आप को चुनौती दें: 
अपने आप को चुनौती दें. अपने आप को उन चीजों के लिए चुनौती दें जो आपके लिए मुश्किल हैं. जब आप अपने आप को चुनौती देते हैं, तो आप अपने साहस का निर्माण करते हैं.

दूसरों से प्रेरणा लें: 
 उन लोगों के बारे में सोचें जो आपके लिए साहसी हैं. उन लोगों से प्रेरणा लें और उनके जैसा बनने की कोशिश करें.

साहस एक ऐसा गुण है जो आपको अपने जीवन में बहुत कुछ हासिल करने में मदद कर सकता है. अगर आप सफल होना चाहते हैं, तो आपको साहसवान होना होगा.

इंसान के जीवन में साहस सबसे महत्वपूर्ण घटना है जो आपको अपने जीवन में कुछ सोचने और कुछ आश्चर्य करने की हिम्मत प्रदान करती है..मानव जीवन में जहां सब कुछ अप्रत्याशित है और हमें अपने अस्तित्व की लड़ाई और जीने के लिए बहुत से ऐसे कार्य भी करने होते हैं जो सामान्य रूप से हम उसे नहीं करना चाहते हैं.


दोस्तों.. यह केवल साहस है जो हमारे जीवन में कुछ अप्रत्याशित सपने देखने की शक्ति प्रदान करती है..   अन्यथा हम अपने वर्तमान हालात के आगे मजबूर होकर जीने को विवश हो जाते....

बदल सकते हैं आपदा को अवसर में…जानें कैसे 


 आपका साहस आपको कुछ अप्रत्याशित और असंभव से लगने वाले लक्ष्य को पाने का हिम्मत प्रदान करती है जो आगे चलकर हमारे जीवन में हमारे लक्ष्य को निर्धारित करने का अवसर प्रदान करती है...

Inspiring Thoughts: हम काम की अधिकता से नहीं, उसे बोझ समझने से थकते हैं.. बदलें इस माइंडसेट को

 जीवन में लक्ष्य का होना अत्यंत आवश्यक है और बिना लक्ष्य के हमारा जीवन  करें ... आपके सपने की नींव और आपके प्रयासों का निष्पादन वह कारक है जो आपको प्रदान करता है। अपने भाग्य को प्राप्त करने का तरीका और यह साहस ही है जो आपको रास्ता प्रदान करता है ... सोच से लेकर लक्ष्य हासिल करने तक ...


 कहने की जरूरत नहीं है ... मानव ने  अपने सोच को हमेशा से नकारात्मक और अजीबोगरीब सोच से भरकर उसे कंफ्यूज बनाकर रखा है.... और यही हमारी सोच है जो हमें हमेशा से जीवन के दौड़ में पीछे धकेलने में मुख्य भूमिका निभाती है.... हमने अपने सोच को हमेशा से डर और संदेह से कभी बाहर नहीं आने देते ऐसे में भला हमारा मस्तिष्क सही और साहसी निर्णय कैसे ले सकता है...

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Inspiring Thoughts: साहस को अपनाएँ... सफलता की कहानी खुद लिखें...

 निश्चित रूप से इन संदेहों का जमीनी हकीकत से कोई लेना-देना नहीं है... .हमारे जीवन में और कोई भी इस तथ्य को नजरअंदाज नहीं कर सकता ....तो इसके लिए जरुरी है कि आप निर्णय लेने में अपने साहस का इस्तेमाल करें और कभी भी खुद पर संदेह नहीं करें...

Inspiring Thoughts: डिप्रेशन और फ़्रस्ट्रेशन पर काबू पाने के लिए पाएं नेगेटिव माइंडसेट से छुटकारा

 निश्चित रूप से यह आपके अंदर का साहस है जो इन अनावश्यक डर को दूर करता है और जीवन में ठोस और सही लक्ष्य के निर्धारण में आपकी मदद करती है... दोस्तों बिना किसी लक्ष्य के निर्धारण के आप उसे कैसे प्राप्त करने की कोशिश करेंगे.... जाहिर है कि या आपका साहस ही हैं जो जीवन में किसी भी अप्रत्याशित सपने और लक्ष्य को साकार करने और पाने का हिम्मत प्रदान करती है.

Point Of View: विश्वास के साथ टहलना, दिशाहीन होकर दौड़ने से ज्यादा प्रभावी, जाने कैसे

Inspiring Thoughts: Confident Walking is more Successful than Confused running
Point Of  View:
अपने आत्मविश्वास पर भरोसा करें जो आपके जीवन की परिस्थितियों को बदलने के लिए ज्यादा जरुरी है... जीवन के रास्ते में मिलने वाली असफलता के बारे में कभी चिंता न करें। अपने जीवन में बार-बार असफलता और बाधाओं के बावजूद, आश्वस्त रहें और अपनी नौका को ऐसे नाविक के रूप खेने की कोशिश करे  जिसे अपने हाथों और कंधे पर ज्यादा आत्मविश्वास है। 

जीवन में सफलता पाना चाहते हैं तो हमेशा उन नकारात्मक लोगों से मिलने से बचें जो आपको जीवन के सही तरीके से भटकाते हैं......  अपने जीवन में सभी बाधाओं के बावजूद, आत्मविश्वास से भरे रहे यही आत्मविश्वास और आपका संतुलित सोच आपको शांत रहना और हमारी रणनीति की आवश्यकता के अनुसार चुपचाप काम करना सिखाता है....अपने   जीवन में भ्रमित दौड़ने के बजाय आत्मविश्वास से चलने की कला सीखें। याद रखें, आत्मविश्वास से चलना भ्रमित दौड़ने से ज्यादा सफल है, किसी का अनुसरण न करें बल्कि सभी से सीखें। 

लॉकडाउन और ऑनलाइन पढ़ाई: बच्चों से अधिक है पेरेंट्स की भूमिका, अपनाएँ ये टिप्स

समय के साथ दौड़ या कोई अन्य मोर्चा हमारे जीवन में सफलता के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है ... याद रखें, आपकी रणनीति के अनुसार आत्मविश्वास से चलना आवश्यक है, न कि भ्रमित तरीके से दौड़ना जो आपकी सारी आशा और भविष्य को बर्बाद कर सकता है ...

बाधाएँ आती हैं आएँ

घिरें प्रलय की घोर घटाएँ,

पावों के नीचे अंगारे,

सिर पर बरसें यदि ज्वालाएँ,

निज हाथों में हँसते-हँसते,

आग लगाकर जलना होगा।

क़दम मिलाकर चलना होगा।

-अटल बिहारी वाजपेयी


बदल सकते हैं आपदा को अवसर में…जानें कैसे 

जीवन में मिलने वाले असफलताएं आपको विचलित और दिशाहीन कर सकती हैं..पर वो क्षणिक हैं... आप अपने प्रोजेक्ट पर काम करते रहें... क्योंकि जरुरी यही है न कि असफलताओं से विचलित हो जाना... 

याद रखें... अवव्यस्थित होना और असमंजस का सामना होने सिर्फ आपके लिए समस्या पैदा करती है और या कभी भी आपको शांति नहीं देंगी.. 

Inspiring Thoughts: डिप्रेशन और फ़्रस्ट्रेशन पर काबू पाने के लिए पाएं नेगेटिव माइंडसेट से छुटकारा

आप अपनी महत्वाकांक्षा को प्राप्त करने के लिए सब कुछ करें जो आपकी पहुँच में हैं.... असफलता की कभी चिंता नहीं करें.... 


रुक क्यू जाता है मंजिल की तलाश में

तू एक बार ही सही सोच लिया कर

क्या है तेरी मंजिल ये पता कर

ये राह के मुशाफिर तू चला चल

-नरेंद्र वर्मा


नकारात्मक लोगों से मिलने से बचें क्योंकि ये आपके सफलता  के जूनून और  विश्वास को कुंठित करती है..... 

Inspiring Thoughts: साहस को अपनाएँ... सफलता की कहानी खुद लिखें...

गलतियों से डरो नहीं.... उससे सिखने की कोशिश करें क्योंकि वही  सबसे बड़ा शिक्षक  होती है... 

लेकिन याद रखें.. दूसरी की गलतियों से सीखना ज्यादा जरुरी है क्योकि कहा गया है कि अपनी गलतियों से सीखने के लिए उम्र कम पड़ जाएगी... 


 चलो अभीष्ट मार्ग में सहर्ष खेलते हुए¸

विपत्ति विप्र जो पड़ें उन्हें ढकेलते हुए।

 घटे न हेल मेल हाँ¸ बढ़े न भिन्नता कभी¸

अतर्क एक पंथ के सतर्क पंथ हों सभी।

 तभी समर्थ भाव है कि तारता हुआ तरे

वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे।।

-मैथिलीशरण गुप्त