Mann Ki Baat: मिलिए कार्यक्रम के इन सभी छुपे रुस्तम हीरोज से जो अपने आप में एक आंदोलन हैं



PM Modi Mann Ki Baat : मन की बात कार्यक्रम के  111 वें संस्करण के प्रसारण  30, 2024 को संपन्न हुआ। इसके साथ हीं इस लोकप्रिय कार्यक्रम का प्रसारण करीब तीन महीने के बाद प्रारंभ हुआ।

लोक सभा चुनाव के पहले प्रधान मंत्री ने कहा था कि आचार संहिता लागु होने के बाद अब अगले संस्करण  जो कि 111 वां संस्करण होगा उसका प्रसारण अब ठीक 3 महीने के बाद होगा. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 111 शुभ अंक होता है और इससे अच्छा भला और क्या होगा सकता है कि इसके बाद 111 वे अंक का प्रसारण होगा।

मन की बात के पहले एपिसोड  एपिसोड का प्रसारण कब हुआ था?
  • पहला मन की बात कार्यक्रम 3 अक्टूबर 2014 को विजयादशमी के अवसर पर सबसे पहले प्रसारित किया गया था। कार्यक्रम के दूसरे ससंस्करन का प्रसारण इसके बाद 2 नवंबर 2014 को दूसरा प्रसारण किया गया था। 30 अप्रैल 2023 को इसका सौवाँ प्रसारण हुआ।

मन की बात की 111वीं कड़ी : खास हस्तियाँ 
सिद्धो-कान्हू
30 जून का ये दिन बहुत ही महत्वपूर्ण है। इस दिन को हमारे आदिवासी भाई-बहन ‘हूल दिवस’ के रूप में मनाते हैं। यह दिन वीर सिद्धो-कान्हू के अदम्य साहस से जुड़ा है, जिन्होंने विदेशी शासकों के अत्याचार का पुरजोर विरोध किया था। वीर सिद्धो-कान्हू ने हजारों संथाली साथियों को एकजुट करके अंग्रेजों का जी-जान से मुकाबला किया, और जानते हैं ये कब हुआ था ? ये हुआ था 1855 में, यानी ये 1857 में भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से भी दो साल पहले हुआ था, तब, झारखंड के संथाल परगना में हमारे आदिवासी भाई-बहनों ने विदेशी शासकों के खिलाफ हथियार उठा लिया था। हमारे संथाली भाई-बहनों पर अंग्रेजों ने बहुत सारे अत्याचार किए थे, उन पर कई तरह के प्रतिबंध भी लगा दिए थे। इस संघर्ष में अद्भुत वीरता दिखाते हुए वीर सिद्धो और कान्हू शहीद हो गए। झारखंड की भूमि के इन अमर सपूतों का बलिदान आज भी देशवासियों को प्रेरित करता है।

कार्थुम्बी छाता-केरला 
बारिश के इस मौसम में सबके घर में जिस चीज की खोज शुरू हो गई है, वो है ‘छाता’। ‘मन की बात’ में  प्रधान मंत्री म ने  एक खास तरह के छातों के बारे में बताया।  ये छाते तैयार होते हैं हमारे केरला में। वैसे तो केरला की संस्कृति में छातों का विशेष महत्व है। छाते, वहाँ कई परंपराओं और विधि-विधान का अहम हिस्सा होते हैं। लेकिन मैं जिस छाते की बात कर रहा हूँ, वो हैं ‘कार्थुम्बी छाते’ और इन्हें तैयार किया जाता है केरला के अट्टापडी में। ये रंग-बिरंगे छाते बहुत शानदार होते हैं। और खासियत ये इन छातों को केरला की हमारी आदिवासी बहनें तैयार करती हैं। आज देशभर में इन छातों की मांग बढ़ रही हैं। इनकी Online बिक्री भी हो रही है। इन छातों को ‘वट्टालक्की सहकारी कृषि सोसाइटी’ की देखरेख में बनाया जाता है। इस सोसाइटी का नेतृत्व हमारी नारीशक्ति के पास है। महिलाओं के नेतृत्व में अट्टापडी के आदिवासी समुदाय ने Entrepreneurship की अद्भुत मिसाल पेश की है। इस society ने एक बैंबू-हैंडीक्राफ्ट यूनिट की भी स्थापना की है। अब ये लोग एक Retail outlet और एक पारंपरिक cafe खोलने की तैयारी में भी हैं। इनका मकसद सिर्फ अपने छाते और अन्य उत्पाद बेचना ही नहीं, बल्कि ये अपनी परंपरा, अपनी संस्कृति से भी दुनिया को परिचित करा रहे हैं। आज कार्थुम्बी छाते केरला के एक छोटे से गाँव से लेकर Multinational कंपनियों तक का सफर पूरा कर रहे हैं।
कुवैत रेडियो
कुवैत सरकार ने अपने National Radio पर एक विशेष कार्यक्रम शुरू किया है। और वो भी हिन्दी में। ‘कुवैत रेडियो’ पर हर रविवार को इसका प्रसारण आधे घंटे के लिए किया जाता है। इसमें भारतीय संस्कृति के अलग-अलग रंग शामिल होते हैं। हमारी फिल्में और कला जगत से जुड़ी चर्चाएं वहाँ भारतीय समुदाय के बीच बहुत लोकप्रिय हैं।  कुवैत के स्थानीय लोग भी इसमें खूब दिलचस्पी ले रहे हैं। प्रधान  मंत्री मोदी ने कुवैत की सरकार और वहाँ के लोगों का हृदय से धन्यवाद करता हूँ, जिन्होंने ये शानदार पहल की है।

तुर्कमेनिस्तान: गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर जी  को सम्मान 

 अब जैसे, तुर्कमेनिस्तान में इस साल मई में वहाँ के राष्ट्रीय कवि की 300वीं जन्म-जयंती मनाई गई। इस अवसर पर तुर्कमेनिस्तान के राष्ट्रपति ने दुनिया के 24 प्रसिद्ध कवियों की प्रतिमाओं का अनावरण किया। इनमें से एक प्रतिमा गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर जी की भी है। ये गुरुदेव का सम्मान है, भारत का सम्मान है।

सूरीनाम  और Saint Vincent and the Grenadines
 इसी तरह जून के महीने में दो कैरेबियाई देश सूरीनाम और Saint Vincent and the Grenadines ने अपने Indian heritage को पूरे जोश और उत्साह के साथ celebrate किया। सूरीनाम में हिन्दुस्तानी समुदाय हर साल 5 जून को Indian Arrival Day और प्रवासी दिन के रूप में मनाता है। यहाँ तो हिन्दी के साथ ही भोजपुरी भी खूब बोली जाती है। Saint Vincent and the Grenadines में रहने वाले हमारे भारतीय मूल के भाई-बहनों की संख्या भी करीब छ: हजार है। उन सबको अपनी विरासत पर बहुत गर्व है। एक जून को इन सबने Indian Arrival Day को जिस धूम-धाम से मनाया, उससे उनकी ये भावना साफ झलकती है। दुनियाभर में भारतीय विरासत और संस्कृति का जब ऐसा विस्तार दिखता है तो हर भारतीय को गर्व होता है।

Araku coffee, आंध्र प्रदेश 
 Araku coffee. Araku coffee आंध्र प्रदेश के अल्लुरी सीता राम राजू जिले में बड़ी मात्रा में पैदा होती है। ये अपने rich flavor और aroma के लिए जानी जाती है। Araku coffee की खेती से करीब डेढ़ लाख आदिवासी परिवार जुड़े हुए हैं। Araku coffee को नई ऊंचाई  देने में Girijan cooperative की बहुत बड़ी भूमिका रही है। इसने यहाँ के किसान भाई बहनों को एक साथ लाने का काम किया और उन्हें Araku coffee की खेती के लिए प्रोत्साहन दिया। इससे इन किसानों की कमाई भी बहुत बढ़ गई है। इसका बहुत लाभ कोंडा डोरा आदिवासी समुदाय को भी मिला है। कमाई के साथ साथ उन्हें सम्मान का जीवन भी मिल रहा है। मुझे याद है एक बार विशाखापत्नम में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू गारु के साथ मुझे इस coffee का स्वाद लेने का मौका मिला था। इसके taste की तो पूछिए ही मत ! कमाल की होती है ये coffee ! Araku coffee को कई Global awards मिले हैं। दिल्ली में हुई G-20 समिट में भी coffee छाई हुई थी। आपको जब भी अवसर मिले, आप भी Araku coffee का आनंद जरूर लें।

कब्बन पार्क,  बेंगलुरू 
 बेंगलुरू में एक पार्क है- कब्बन पार्क ! इस पार्क में यहाँ के लोगों ने एक नई परंपरा शुरू की है। यहाँ हफ्ते में एक दिन, हर रविवार बच्चे, युवा और बुजुर्ग आपस में संस्कृत में बात करते हैं। इतना ही नहीं, यहाँ वाद- विवाद के कई session भी संस्कृत में ही आयोजित किए जाते हैं। इनकी इस पहल का नाम है – संस्कृत weekend ! इसकी शुरुआत एक website के जरिए समष्टि गुब्बी जी ने की है। कुछ दिनों पहले ही शुरू हुआ ये प्रयास बेंगलुरूवासियों के बीच देखते ही देखते काफी लोकप्रिय हो गया है। अगर हम सब इस तरह के प्रयास से जुड़ें तो हमें विश्व की इतनी प्राचीन और वैज्ञानिक भाषा से बहुत कुछ सीखने को मिलेगा।

संस्कृत बुलेटिन
 आज 30 जून को आकाशवाणी का संस्कृत बुलेटिन अपने प्रसारण के 50 साल पूरे कर रहा है। 50 वर्षों से लगातार इस बुलेटिन ने कितने ही लोगों को संस्कृत से जोड़े रखा है।

 110वां एपिसोड : 25 फरवरी, 2024  
ऊललेखनिय है कि पिछले एपिसोड 25 फरवरी 2024 को प्रधनामंत्री नरेंद्र मोदी के रेडियो प्रोग्राम मन की बात का के 110वां एपिसोड को सम्बोधित किया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ( Modi ) के रेडियो प्रोग्राम मन की बात  ( Mann Ki Baat ) का पिछला एपीसोड 25 फरवरी, 2024  को अर्थात 110वां एपिसोड सुबह 11 बजे से ब्रॉडकास्ट हुआ था।  यहाँ पाएं 110 वें एपिसोड कि खास झलकियां। 

मोहम्मद मानशाह, गान्दरबल (जम्मू-कश्मीर )
जम्मू-कश्मीर में गान्दरबल के मोहम्मद मानशाह जी पिछले तीन दशकों से गोजरी भाषा को संरक्षित करने के प्रयासों में जुटे हैं। वे गुज्जर बकरवाल समुदाय से आते हैं जो कि एक जनजातीय समुदाय है। उन्हें बचपन में पढ़ाई के लिए कठिन परिश्रम करना पड़ा था, वो रोजाना 20 किलोमीटर की दूरी पैदल तय करते थे। इस तरह की चुनौतियों के बीच उन्होंने Masters की Degree हासिल की और ऐसे में ही उनका अपनी भाषा को संरक्षित करने का संकल्प दृढ़ हुआ।
साहित्य के क्षेत्र में मानशाह जी के कार्यों का दायरा इतना बड़ा है कि इसे करीब 50 संस्करणों में सहेजा गया है। इनमें कविताएं और लोकगीत भी शामिल हैं। उन्होंने कई किताबों का अनुवाद गोजरी भाषा में किया है।

बनवंग लोसू, अरुणाचल प्रदेश
अरुणाचल प्रदेश में तिरप के बनवंग लोसू जी एक टीचर हैं। उन्होंने वांचो भाषा के प्रसार में अपना अहम योगदान दिया है। यह भाषा अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और असम के कुछ हिस्सों में बोली जाती है। उन्होंने एक Language school बनवाने का काम किया है। 
इसके वांचो भाषा की एक लिपि भी तैयार की है। वो आने वाली पीढ़ियों को भी वांचो भाषा सिखा रहे हैं ताकि इसे लुप्त होने से बचाया जा सके।

 वेंकप्पा अम्बाजी सुगेतकर, कर्नाटक
कर्नाटका के वेंकप्पा अम्बाजी सुगेतकर उनका जीवन भी इस मामले में बहुत प्रेरणादायी है। यहां के बागलकोट के रहने वाले सुगेतकर जी एक लोक गायक हैं। इन्होनें 1000 से अधिक गोंधली गाने गाए हैं, साथ ही, इस भाषा में, कहानियों का भी खूब प्रचार- प्रसार किया है। उन्होंने बिना फीस लिए, सैकड़ों विद्यार्थियों, को Training भी दी है। 

‘मेरा पहला वोट - देश के लिए’
कुछ दिन पहले ही चुनाव आयोग ने एक और अभियान की शुरुआत की है – ‘मेरा पहला वोट - देश के लिए’। इसके जरिए विशेष रूप से first time voters से अधिक-से-अधिक संख्या में मतदान करने का आग्रह किया गया है। भारत को, जोश और ऊर्जा से भरी अपनी युवा शक्ति पर गर्व है। हमारे युवा-साथी चुनावी प्रक्रिया में जितनी अधिक भागीदारी करेंगे, इसके नतीजे देश के लिए उतने ही लाभकारी होंगे। 18 का होने के बाद आपको 18वीं लोकसभा के लिए सदस्य चुनने का मौका मिल रहा है। यानि ये 18वीं लोकसभा भी युवा आकांक्षा का प्रतीक होगी।

बिहार में भोजपुर के भीम सिंह भवेश जी
प्रधान मंत्री ने बताया कि अपने क्षेत्र के मुसहर जाति के लोगों के बीच भीम सिंह भवेश जी के  कार्यों की खूब चर्चा है।  बिहार में मुसहर एक अत्यंत वंचित समुदाय रहा है, बहुत गरीब समुदाय रहा है। भीम सिंह भवेश जी ने इस समुदाय के बच्चों की शिक्षा पर अपना focus किया है, ताकि उनका भविष्य उज्ज्वल हो सके। उन्होंने मुसहर जाति के करीब 8 हज़ार बच्चों का स्कूल में दाखिला कराया है। 
उन्होंने एक बड़ी Library भी बनवाई है, जिससे बच्चों को पढाई-लिखाई की बेहतर सुविधा मिल रही है। भीम सिंह जी, अपने समुदाय के सदस्यों के जरूरी Documents बनवाने में, उनके Form भरने में भी मदद करते हैं। इससे जरुरी संसाधनों तक गाँव के लोगों की पहुँच और बेहतर हुई है। लोगों का स्वास्थ्य बेहतर हो, इसके लिए उन्होंने 100 से अधिक Medical Camps लगवाए हैं।
 जब कोरोना का महासंकट सिर पर था, तब, भीम सिंह जी ने अपने क्षेत्र के लोगों को Vaccine लगवाने के लिए भी बहुत प्रोत्साहित किया। देश के अलग-अलग हिस्सों में भीम सिंह भवेश जी जैसे कई लोग हैं, जो समाज में ऐसे अनेक नेक कार्यों में जुटे हैं। 

ड्रोन दीदी-उत्तर प्रदेश के सीतापुर
उत्तर प्रदेश के सीतापुर की रहने वाली सुनीता देवी हैं जिन्हे ड्रोन दीदी के नाम से जाना जाता है जिनकी चर्चा प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात के 110 वें  संस्करण में किया। सुनीता देवी   बताया की ड्रोन की कृषि सम्बंधित कार्यों के बारे में उन्होंने बताया की  जैसे अभी फसल बड़ी हो रही है। बरसात का मौसम या कुछ भी ऐसे, बरसात में दिक्कत होती खेत में फसल में हम लोग घुस नहीं पा रहे हैं तो कैसे मजदूर अन्दर जाएगा, तो इसके माध्यम से बहुत फायदा किसानों को होगा और वहाँ खेत में घुसना भी नहीं पड़ेगा। हमारा drone जो हम मजदूर लगाकर अपना काम करते हैं वो हमारा drone से मेढ़ पे खड़े होके, हम अपना वो कर सकते हैं, कोई कीड़ा-मकोड़ा अगर खेत के अन्दर है उससे हमें सावधानी भी बरतनी रहेगी, कोई दिक्कत नहीं हो सकती है और किसानों को भी बहुत अच्छा लग रहा है। उन्होंने बताया कि  हमने 35 एकड़ spray कर चुके हैं अभी तक।  
उन्होंने बताया कि किसानों को बहुत संतुष्ट होते हैं कह रहे हैं बहुत अच्छा लग रहा। समय का भी बचत होता है,सारी सुविधा आप खुद देखती हैं, पानी, दवा सब कुछ साथ-साथ में रखती है और  लोगों को सिर्फ आकर खेत बताना पड़ता है कि कहां से कहां तक मेरा खेत है और सारा काम आधे घंटे में ही निपटा देती हूँ।

कल्याणी प्रफुल्ल पाटिल जी, महाराष्ट्र
प्राकृतिक खेती में इन्होने अपना खास योगदान दिया है. उनके अनुसार दस प्रकार के हमारी वनस्पति है उसको एकत्रित करके उससे उन्होंने  organic फवारणी(spray) बनाया जैसे कि जो हम pesticide वगैहरा spray करते तो उस से pest वगैरह जो हमारी मित्र कीट(pest) रहती है वो भी नष्ट हो रहे, और हमारी soil का pollution होता है जो तो तब chemical चीज़े जो पानी में घुल-मिल रही हैं उसकी वजह से हमारी body पर भी हानिकारक परिणाम दिख रहे हैं उस हिसाब से हमने कम से कम pesticide का use कर के।  
  
प्राकृतिक खेती में अनुभव के सम्बन्ध में कल्याणी जी ने बताया कि  हमारी महिलाएं हैं, उनको जो खर्च है, वो, कम लगा और जो product हैं, तो वो समाधान पाकर, हमने, without pest वो किया क्योंकि अब cancer के प्रमाण जो बढ़ रहे हैं जैसे शहरी भागों में तो है ही लेकिन गाँव में भी हमारी उसका प्रमाण बढ़ रहा है तो उस हिसाब से अगर आप अपने आगे के परिवार को अपने सुरक्षित करना है तो ये मार्ग अपनाना जरूरी है इस हिसाब से वो महिलाएं भी सक्रिय सहभाग इसके अन्दर दिखा रही हैं।  

मन की बात: 22 भारतीय 11 विदेशी भाषाओं में ब्रॉडकास्ट

इस खास कार्यक्रम का प्रसारण सुबह  11 बजे से ब्रॉडकास्ट  किया जायेगा जिसका प्रसारण  22 भारतीय भाषाओं और 29 बोलियों के अलावा 11 विदेशी भाषाओं में भी किया जायेगा. इसके अतिरिक्त 11 विदेशी भाषाओं में भी होता है मन की बात का प्रसारण जिसमे शामिल है फ्रेंच, चीनी, इंडोनेशियाई, तिब्बती, बर्मी, बलूची, अरबी, पश्तू, फारसी, दारी और स्वाहिली। 

मन की बात : 101वीं कड़ी
International Museum Expo: कुछ दिन पहले ही भारत में International Museum Expo का भी आयोजन किया था। इसमें दुनिया के 1200 से अधिक Museumsकी विशेषताओं को दर्शाया गया
Museo Camera संग्रहालय, गुरुग्राम 
इसमें 1860 के बाद के 8 हजार से ज्यादा कैमरों का collection मौजूद है।
Museum of Possibilities, तमिलनाडु 
इस म्यूज़ीअम  को हमारे दिव्यांगजनों को ध्यान में रखकर,design किया गया है।
मुंबई का छत्रपति शिवाजी महाराज वास्तु संग्रहालय 
जिसमें 70 हजार से भी अधिक चीजेंसंरक्षित की गई हैं।
Indian Memory Project 
साल 2010 में स्थापित, एक तरह का Online museum है।
यह दुनियाभर से भेजी गयी तस्वीरों और कहानियों के माध्यम से भारत के गौरवशाली इतिहास की कड़ियों को जोड़ने में जुटा है। विभाजन की विभिषिका से जुड़ी स्मृतियों को भी सामने लाने का प्रयास किया गया है।

FluxGen
यह एक  Start-Up IOT enabled  है जो तकनीक के जरिए water management के विकल्प देता है। ये technology पानी के इस्तेमाल के patterns बताएगा और पानी के प्रभावी इस्तेमाल में मदद करेगा। एक और startupहैLivNSense। ये artificial intelligence और machine learning पर आधारित platform है। इसकी मदद से water distribution की प्रभावी निगरानी की जा सकेगी। इससे ये भी पता चल सकेगा कि कहाँ कितना पानी बर्बाद हो रहा है।

‘कुंभी कागज (KumbhiKagaz)’
यह कुंभी कागज (KumbhiKagaz) भी एक स्टार्ट अप  है जिसने एक विशेष काम शुरू किया है। वे जलकुंभी से कागज बनाने का काम कर रहे हैं, यानी, जो जलकुंभी, कभी, जलस्त्रोतों के लिए एक समस्या समझी जाती थी, उसी से अब कागज बनने लगा है।

शिवाजी शामराव डोले ,  महाराष्ट्र
 महाराष्ट्र के श्रीमान् शिवाजी शामराव डोले जी। शिवाजी डोले, नासिक जिले के एक छोटे से गाँव के रहने वाले हैं। वो गरीब आदिवासी किसान परिवार से आते हैं, और, एक पूर्व सैनिक भी हैं। फौज में रहते हुए उन्होंने अपना जीवन देश के लिए लगाया।Retire होने के बाद उन्होंने कुछ नया सीखने का फैसला किया और Agriculture में Diploma किया, यानी,वो, जय जवान से, जय किसान की तरफ बढ़ चले। अब हर पल उनकी कोशिश यही रहती है कि कैसे कृषि क्षेत्र में अपना अधिक से अधिक योगदान दें। अपने इस अभियान में शिवाजी डोले जी ने 20 लोगों की एक छोटी-सी Team बनाई और कुछ पूर्व सैनिकों को भी इसमें जोड़ा। 
इसके बाद उनकी इस Team ने Venkateshwara Co-Operative Power & Agro Processing Limitedनाम की एक सहकारी संस्था का प्रबंधन अपने हाथ में ले लिया।ये सहकारी संस्था निष्क्रिय पड़ी थी, जिसे revive करने का बीड़ा उन्होंने उठाया। देखते ही देखते आज Venkateshwara Co-Operative का विस्तार कई जिलों में हो गया है। आज ये team महाराष्ट्र और कर्नाटका में काम कर रही है। 
इससे करीब 18 हजार लोग जुड़े हैं, जिनमें काफी संख्या में हमारे Ex-Servicemen भी हैं। नासिक के मालेगाँव में इस team के सदस्य 500 एकड़ से ज्यादा जमीन में Agro Farming कर रहे हैं। ये team जल संरक्षण के लिए भी कई तालाब भी बनवाने में जुटी है। खास बात यह है कि इन्होंने Organic Farming और Dairy भी शुरू की है। अब इनके उगाए अंगूरों को यूरोप में भी export किया जा रहा है। 
इस team की जो दो बड़ी विशेषतायें हैं, जिसने मेरा ध्यान आकर्षित किया है, वो ये है – जय विज्ञान और जय अनुसंधान। इसके सदस्य technology और Modern Agro Practices का अधिक से अधिक उपयोग कर रहे हैं। दूसरी विशेषता ये है कि वे export के लिए जरुरी कई तरह के certifications पर भी focus कर रहे हैं।

109वीं कड़ी: जनवरी 28, 2024 
मन की बात रेडियो कार्यक्रम का जनवरी 28, 2024 को मन की बात की 109वीं कड़ी का प्रसारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  किया। आज का यह कार्यक्रम नए साल अर्थात 2024 का पहला ‘मन की बात’का कार्यक्रम है।
मन की बात रेडियो कार्यक्रम एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्यक्रम है जिसने देश की जनता को एकजुट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। एक ओर जहां इंटरनेट और टीवी के साथ ही ओटीटी प्लेटफॉर्म ने मनोरंजन के नए सोपान स्थापित कर रहे हैं ऐसे माहौल में आउटडेटेड हो चुके रेडियो की बदौलत मन की बात एक जन आंदोलन का रूप ले चुका हैं। निश्चित इसका पूरा श्रेय जाता है प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी की चमत्कारिक व्यक्तित्व को।

मन की बात रेडियो कार्यक्रम का आज अर्थात जनवरी 28, 2024 को मन की बात की 109वीं कड़ी का प्रसारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  किया। आज का यह कार्यक्रम नए साल अर्थात 2024 का पहला ‘मन की बात’का कार्यक्रम है।

मन की बात की 109वीं कड़ी की खास बातें 

  • इस साल हमारे संविधान के भी 75 वर्ष हो रहे हैं और सुप्रीम कोर्ट के भी 75 वर्ष हो रहे हैं।
  • 26 जनवरी की परेड बहुत ही अद्भुत रही-Women Power  को लेकर।
  • इस बार परेड में मार्च करने वाले 20 दस्तों में से 11 दस्ते महिलाओं के थे।
  • अर्जुन अवार्ड समारोह- इस बार 13 Women Athletes को Arjun Award से सम्मानित किया गया है।
  •  इन women athletes ने अनेकों बड़े टूर्नामेंटों में हिस्सा लिया और भारत का परचम लहराया। 
  • कार्यक्रम का इतिहास:

    • पहला मन की बात 3 अक्टूबर 2014 को प्रसारित किया गया था।
    • 30 अप्रैल 2023 को इसका 100वां प्रसारण हुआ।
    • 2 जून 2017 से यह कार्यक्रम क्षेत्रीय भाषाओं में भी उपलब्ध है।

सुश्री यानुंग जामोह लैगो-अरुणाचल प्रदेश 

यानुंग जामोह लैगो की भी तस्वीर आ रही हैं। सुश्री यानुंग अरुणाचल प्रदेश की रहने वाली हैं और हर्बल औषधीय विशेषज्ञ हैं। इन्होंने आदि जनजाति की पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली को पुनर्जीवित करने के लिए काफी काम किया है। इस योगदान के लिए उन्हें इस बार पद्म सम्मान भी दिया गया है। इसी तरह इस बार छत्तीसगढ़ के हेमचंद मांझी उनको भी पद्म सम्मान मिला है। 

वैद्यराज हेमचंद मांझी-छत्तीसगढ़

वैद्यराज हेमचंद मांझी भी आयुष चिकित्सा पद्धति की मदद से लोगों का इलाज करते हैं। छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में गरीब मरीजों की सेवा करते हुए उन्हें 5 दशक से ज्यादा का समय हो रहा है। 

आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी चिकित्सा- डेटा  का वर्गीकरण

आयुष मंत्रालय ने आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी चिकित्सा से जुड़े डेटा और शब्दावली का वर्गीकरण किया है, इसमें, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी मदद की है। दोनों के प्रयासों से आयुर्वेद, यूनानी और सिद्ध चिकित्सा में बीमारी और इलाज से जुड़ी शब्दावली की coding कर दी गयी है। इस coding की मदद से अब सभी डॉक्टर prescription या अपनी पर्ची पर एक जैसी भाषा लिखेंगे। इसका एक फायदा ये होगा कि अगर आप वो पर्ची लेकर दूसरे डॉक्टर के पास जाएंगे तो डॉक्टर को इसकी पूरी जानकारी उस पर्ची से ही मिल जाएगी। 
आपकी बीमारी, इलाज, कौन-कौन सी दवाएं चली हैं, कब से इलाज चल रहा है, आपको किन चीज़ों से allergy है, ये सब जानने में उस पर्ची से मदद मिलेगी। इसका एक और फायदा उन लोगों को होगा, जो research के काम से जुड़े हैं। दूसरे देशों के वैज्ञानिकों को भी बीमारी, दवाएं और उसके प्रभाव की पूरी जानकारी मिल जाएगी। 
Research बढ़ने और कई वैज्ञानिकों के साथ-साथ जुड़ने से ये चिकित्सा पद्धति और बेहतर परिणाम देंगे और लोगों का इनके प्रति झुकाव बढ़ेगा। मुझे विश्वास है, इन आयुष पद्धतियों से जुड़े हमारे चिकित्सक, इस coding को जल्द से जल्द अपनाएंगे।

कार्यक्रम 'हमर हाथी - हमर गोठ’: छत्तीसगढ़ 

छत्तीसगढ़ में आकाशवाणी के चार केन्द्रों अंबिकापुर, रायपुर, बिलासपुर और रायगढ़ से हर शाम इस कार्यक्रम का प्रसारण होता है और आपको जानकर हैरानी होगी कि छत्तीसगढ़ के जंगल और उसके आसपास के इलाके में रहने वाले बड़े ध्यान से इस कार्यक्रम को सुनते हैं। ‘हमर हाथी - हमर गोठ’ कार्यक्रम में बताया जाता है कि हाथियों का झुण्ड जंगल के किस इलाके से गुजर रहा है। ये जानकारी यहाँ के लोगों के बहुत काम आती है। लोगों को जैसे ही रेडियो से हाथियों के झुण्ड के आने की जानकारी मिलती है, वो सावधान हो जाते हैं। जिन रास्तों से हाथी गुजरते हैं, उधर जाने का ख़तरा टल जाता है। इससे जहाँ एक ओर हाथियों के झुण्ड से नुकसान की संभावना कम हो रही है, वहीँ हाथियों के बारे में data जुटाने में मदद मिलती है। इस data के उपयोग से भविष्य में हाथियों के संरक्षण में भी मदद मिलेगी। यहाँ हाथियों से जुड़ी जानकारी social media के जरिए भी लोगों तक पहुंचाई जा रही है। इससे जंगल के आसपास रहने वाले लोगों को हाथियों के साथ तालमेल बिठाना आसान हो गया है। छत्तीसगढ़ की इस अनूठी पहल और इसके अनुभवों का लाभ देश के दूसरे वन क्षेत्रों में रहने वाले लोग भी उठा सकते हैं।

Beach Games-दीव

Beach Games  का आयोजन दीव के अन्दर उसका आयोजन हुआ था।  ‘दीव’ केन्द्रशासित प्रदेश है, सोमनाथ के बिलकुल पास है। इस साल की शुरुआत में ही दीव में इन Beach Games का आयोजन किया गया। ये भारत का पहला multi-sports beach games था। इनमें  Tug of war, Sea swimming, pencaksilat, मलखंब, Beach volleyball, Beach कबड्डी, Beach soccer,और Beach Boxing जैसे competition हुए। इनमें हर प्रतियोगी को अपनी प्रतिभा दिखाने का भरपूर मौका मिला। इस Tournament  में ऐसे राज्यों से भी बहुत से खिलाड़ी आए,जिनका दूर दूर तक समंदर से कोई नाता नहीं है। इस टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा Medal  भी मध्य प्रदेश ने जीते, जहाँ कोई Sea Beach नहीं है। खेलों के प्रति यही Temperament  किसी भी देश को sports की दुनिया का सरताज बनाता है।

 पिछले दिनों नवंबर 26, 2023 को प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी 107 वे मन की बात रेडियो कार्यक्रम के संस्करण के अंतर्गत सम्बोधन किया. यूपी के रामसिंह, आंध्र प्रदेश के बेल्जिपुरम, तमिलनाडू के लोगनाथन जिनकी चर्चा पी एम ने किया है  प्रत्येक महीने आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम ने कई ऐतिहासिक ऊंचाइयों को छुआ है और इसमें  किसी को संदेह नहीं होने चाहिए। 

मन की बात: Facts in Brief 
  • शुरुआत: मन की बात रेडियो कार्यक्रम की शुरुआत 26 मई, 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी।
  • प्रसारण: यह कार्यक्रम हर महीने के अंतिम रविवार को प्रसारित होता है।
  • प्रसारण का समय: यह कार्यक्रम सुबह 11:00 बजे से 11:15 बजे तक प्रसारित होता है।
  • प्रसारण के माध्यम: यह कार्यक्रम All India Radio (AIR) के सभी चैनलों पर प्रसारित होता है। इसके अलावा, इसे Doordarshan, YouTube, Twitter, Facebook और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी प्रसारित किया जाता है।
  • श्रोताओं की संख्या: इस कार्यक्रम को हर महीने करोड़ों लोग सुनते हैं। एक सर्वेक्षण के अनुसार, 2023 में इस कार्यक्रम को लगभग 100 करोड़ लोग सुन चुके हैं।

राम सिंह बौद्ध जी: उत्तर प्रदेश
मुझे उत्तर प्रदेश में अमरोहा के राम सिंह बौद्ध जी  पिछले कई दशकों से रेडियो संग्रह करने के काम में जुटे हैं। उनका कहना है कि ‘मन की बात’ के बाद से, उनके Radio Museum के प्रति लोगों की उत्सुकता और बढ़ गई है। उनका कहना है कि ‘मन की बात’ के बाद से, उनके Radio Museum के प्रति लोगों की उत्सुकता और बढ़ गई है।

बेल्जिपुरम Youth club’:  काकुलम आँध्रप्रदेश 
आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम में है और इसका नाम ‘बेल्जिपुरम Youth club’है।Skill development पर focus कर ‘बेल्जिपुरमYouth club’ने करीब 7000 महिलाओं को सशक्त बनाया है। इनमें से अधिकांश महिलाएं आज अपने दम पर अपना कुछ काम कर रही हैं। इस संस्था ने बाल मजदूरी करने वाले बच्चों को भी कोई ना कोई हुनर सिखाकर उन्हें उस दुष्चक्र से बाहर निकालने में मदद की है।‘

बेल्जिपुरमYouth club’की टीम ने किसान उत्पाद संघ यानि FPOs से जुड़े किसानों को भी नई Skill सिखाई जिससे बड़ी संख्या में किसान सशक्त हुए हैं। स्वच्छता को लेकर भी ये Youth club गांव–गांव में जागरूकता फैला रहा है। इसने अनेक शौचालयों का निर्माण की भी मदद की है।

लोगनाथन: कोयम्बटूर,   तमिलनाडु 
तमिलनाडु के कोयम्बटूर में रहने वाले लोगानाथन जी भी बेमिसाल हैं। बचपन में गरीब बच्चों के फटे कपड़ों को देखकर वे अक्सर परेशान हो जाते थे। इसके बाद उन्होंने ऐसे बच्चों की मदद का प्रण लिया और अपनी कमाई का एक हिस्सा इन्हें दान देना शुरू कर दिया। जब पैसे की कमी पड़ी तो लोगानाथन जी ने Toilets तक साफ़ किये ताकि जरूरतमंद बच्चों की मदद हो सके। वे पिछले 25 सालों से पूरी तरह समर्पित भाव से अपने इस काम में जुटे हैं और अब तक 1500 से अधिक बच्चों की मदद कर चुके हैं। 

सफाई संडे सूरत 
सूरत में स्वक्षता अभियान का आरंभ जिसमे ताप्ती नदी की सफाई की गई. लगभग 50 हजार की संख्या में युवाओं ने जमीनी स्तर पर शुरू किया गया. 

प्रधान मंत्री ने विदेशों में होने वाले शादियों पर कहा कि शादी और व्याह जैसे त्यौहार अपने देश में करना लोकल पर वोकल ध्यान देने की जरुरत. 

सऊदी अरब में संस्कृत मेले का आयोजन 
सऊदी अरब में ‘संस्कृत उत्सव’ नाम का एक आयोजन हुआ। यह अपने आप में बहुत अनूठा था, क्योंकि ये पूरा कार्यक्रम ही संस्कृत में था। संवाद, संगीत, नृत्य सब कुछ संस्कृत में, इसमें, वहाँ के स्थानीय लोगों की भागीदारी भी देखी गयी।

श्रीनगर में ‘छऊ’ पर्व का आयोजन

15  से 17 नवम्बर तक एक भारत श्रेष्ठ भारत की भावना के साथ श्रीनगर में ‘छऊ’ पर्व का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में सबने ‘छऊ’ नृत्य का आनंद उठाया। श्रीनगर के नौजवानों को ‘छऊ’ नृत्य की training देने के लिए एक workshop का भी आयोजन हुआ। इसी प्रकार, कुछ सप्ताह पहले ही कठुआ जिले में ‘बसोहली उत्सव’ आयोजित किया गया। ये जगह जम्मू से150 किलोमीटर दूर है। इस उत्सव में स्थानीय कला, लोक नृत्य और पारंपरिक रामलीला का आयोजन हुआ।


अंबाजी:  ‘भादरवी पूनम मेले’ का आयोजन
कुछ सप्ताह पहले वहां अंबाजी में ‘भादरवी पूनम मेले’ का आयोजन किया गया था इस मेले में 50 लाख से ज्यादा लोग आए।ये मेला प्रतिवर्ष होता है। इसकी सबसे ख़ास बात ये रही कि मेले में आये लोगों ने गब्बर हिल के एक बड़े हिस्से में सफाई अभियान चलाया। मंदिरों के आसपास के पूरे क्षेत्र को स्वच्छ रखने का ये अभियान बहुत प्रेरणादायी है।

एक तरफ जहां टेलीविजन और इंटरनेट का युग नए नए मनोरंजन का आयाम प्रस्तुत कर रहा है, ऐसे समय में लगभग आउटडेटेड हो चुका रेडियो कार्यक्रम मन की बात जनांदोलन बन चुका हैं निसंदेह इसका पूरा श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता को जाता है।  उल्लेखनीय है कि मन की बात  का पहले संस्करण कार्यक्रम 3 अक्टूबर 2014 को विजयादशमी के अवसर पर प्रसारित किया गया था। प्रत्येक महीने में इसका आयोजन होता है और 30 अप्रैल 2023 को इसका सौवाँ प्रसारण हुआ था ।


हाल हीं में 29 अक्टूबर 2023 को प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने 106वीं कड़ी के अंतर्गत सम्बोधन किया.  जब पूरा देश  त्योहारों की उमंग में डूबा है ऐसे समय में मन की बात के 106वीं कड़ी के सम्बोधन में  मन की बात के 106वीं कड़ी के सम्बोधन में प्रधान  मंत्री ने जिन खास  मुद्दों को याद किया उनमे शामिल है-गांधी जयन्ती के अवसर पर दिल्ली में खादी की रिकॉर्ड बिक्री, मेरा युवा भारत, यानी MYBharat. MYBharat संगठन, लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जन्म-जयंती,हमारा साहित्य, literature, कन्याकुमारी के थिरु ए. के. पेरूमल जी 15 नवंबर को पूरा देश जनजातीय गौरव दिवस तथा और भी बहुत कुछ. 

मन की बात की 106वीं कड़ी अक्टूबर 29, 2023 Facts in Brief

मन की बात के 106वीं कड़ी के सम्बोधन में प्रधान मंत्री ने एक बार फिर से इस कार्यकर्म में उन हीरो का जिक्र किया जिन्होंने देश और समाज को एक नहीं दिशा और ऊंचाई दिया है.  जैसा कि जाहिर है, इस कार्यक्रम में प्रधान मंत्री उन लोगों का ज़िक्र करते हैं जो हमारे Heroes हैं और जिन्होंने इस कार्यक्रम को जीवंत बनाया है। तो आइये  106वीं कड़ी के अंतर्गत सम्बोधन में प्रधान मंत्री ने मन की बात के जिन Heroes का चर्चा किया उन पर एक नजर डालते हैं. 
15 नवंबर-भगवान बिरसा मुंडा की जन्म-जयंती-जनजातीय गौरव दिवस 
15 नवंबर को पूरा देश जनजातीय गौरव दिवस मनाएगा। यह विशेष दिन भगवान बिरसा मुंडा की जन्म-जयंती से जुड़ा है। भगवान बिरसा मुंडा हम सब के ह्रदय में बसे हैं। सच्चा साहस क्या है और अपनी संकल्प शक्ति पर अडिग रहना किसे कहते हैं, ये हम उनके जीवन से सीख सकते हैं। उन्होंने विदेशी शासन को कभी स्वीकार नहीं किया।

 उन्होंने ऐसे समाज की परिकल्पना की थी, जहाँ अन्याय के लिए कोई जगह नहीं थी। वे चाहते थे कि हर व्यक्ति को सम्मान और समानता का जीवन मिले। भगवान बिरसा मुंडा ने प्रकृति के साथ सद्भाव से रहना इस पर भी हमेशा जोर दिया। आज भी हम देख सकते हैं कि हमारे आदिवासी भाई-बहन प्रकृति की देखभाल और उसके संरक्षण के लिए हर तरह से समर्पित हैं। हम सब के लिए, हमारे आदिवासी भाई-बहनों का ये काम बहुत बड़ी प्रेरणा है।

कन्याकुमारी के थिरु ए. के. पेरूमल
कन्याकुमारी के थिरु ए. के. पेरूमल जी का काम भी बहुत प्रेरित करने वाला है। उन्होंने तमिलनाडु के ये जो storytelling tradition है उसको संरक्षित करने का सराहनीय काम किया है। वे अपने इस मिशन में पिछले 40 सालों से जुटे हैं। इसके लिए वे तमिलनाडु के अलग-अलग हिस्सों में Travel करते हैं और Folk Art Forms को खोज कर उसे अपनी Book का हिस्सा बनाते हैं। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि उन्होंने अब तक ऐसी करीब 100 किताबें लिख डाली हैं। इसके अलावा पेरूमल जी का एक और भी Passion है। तमिलनाडु के Temple Culture के बारे में Research करना उन्हें बहुत पसंद है। उन्होंने Leather Puppets पर भी काफी Research की है, जिसका लाभ वहाँ के स्थानीय लोक कलाकारों को हो रहा है। शिवशंकरी जी और ए. के. पेरूमल जी के प्रयास हर किसी के लिए एक मिसाल हैं। भारत को अपनी संस्कृति को सुरक्षित करने वाले ऐसे हर प्रयास पर गर्व है, जो हमारी राष्ट्रीय एकता को मजबूती देने के साथ ही देश का नाम, देश का मान, सब कुछ बढ़ाये।

तमिल की प्रसिद्ध लेखिका बहन शिवशंकरी जी

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने तमिल की प्रसिद्ध लेखिका बहन शिवशंकरी जी का चर्चा किया. उन्होंने बताया कि शिवशंकरी जी ने एक Project किया है – Knit India, Through Literature इसका मतलब है – साहित्य से देश को एक धागे में पिरोना और जोड़ना। वे इस Project पर बीते 16 सालों से काम कर रही है। इस Project के जरिए उन्होंने 18 भारतीय भाषाओं में लिखे साहित्य का अनुवाद किया है। 

उन्होंने कई बार कन्याकुमारी से कश्मीर तक और इंफाल से जैसलमेर तक देशभर में यात्राएँ की, ताकि अलग - अलग राज्यों के लेखकों और कवियों के Interview कर सकें। शिवशंकरी जी ने अलग - अलग जगहों पर अपनी यात्रा की, travel commentary के साथ उन्हें Publish किया है। यह तमिल और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में है।
 इस Project में चार बड़े volumes हैं और हर volume भारत के अलग-अलग हिस्से को समर्पित है। 

असम स्थित Akshar Forum खास स्कूल 

प्रधान मंत्री ने बतायाकि सम के Kamrup Metropolitan District में Akshar Forum इस नाम का एक School बच्चों में, Sustainable Development की भावना भरने का, संस्कार का, एक निरंतर काम कर रहा है। यहां पढ़ने वाले विद्यार्थी हर हफ्ते Plastic Waste जमा करते हैं, जिसका उपयोग Eco- Friendly ईटें और चाबी की Chain जैसे सामान बनाने में होता है। यहां Students को Recycling और Plastic Waste से Products बनाना भी सिखाया जाता है। कम आयु में ही पर्यावरण के प्रति ये जागरूकता, इन बच्चों को देश का एक कर्तव्यनिष्ठ नागरिक बनाने में बहुत मदद करेगी।  

मीराबाई की 525वीं जन्म-जयंती

 देश इस वर्ष महान संत मीराबाई की 525वीं जन्म-जयंती मना रहा है। वो देशभर के लोगों के लिए कई वजहों से एक प्रेरणाशक्ति रही हैं। अगर किसी की संगीत में रूचि हो, तो वो संगीत के प्रति समर्पण का बड़ा उदाहरण ही है, अगर कोई कविताओं का प्रेमी हो, तो भक्तिरस में डूबे मीराबाई के भजन, उसे अलग ही आनंद देते हैं, अगर कोई दैवीय शक्ति में विश्वास रखता हो, तो मीराबाई का श्रीकृष्ण में लीन हो जाना उसके लिए एक बड़ी प्रेरणा बन सकता है। मीराबाई, संत रविदास को अपना गुरु मानती थी। वो कहती भी थी- 

गुरु मिलिया रैदास, दीन्ही ज्ञान की गुटकी। 

प्रधान मंन्त्री ने बताया कि देश की माताओं-बहनों और बेटियों के लिए मीराबाई आज भी प्रेरणापुंज हैं। उस कालखंड में भी उन्होंने अपने भीतर की आवाज़ को ही सुना और रुढ़िवादी धारणाओं के खिलाफ खड़ी हुई। एक संत के रूप में भी वे हम सबको प्रेरित करती हैं। वे भारतीय समाज और संस्कृति को तब सशक्त करने के लिए आगे आईं, जब देश कई प्रकार के हमले झेल रहा था। सरलता और सादगी में कितनी शक्ति होती है, ये हमें मीराबाई के जीवनकाल से पता चलता है।

अंबाजी मंदिर, गुजरात

प्रधान मंत्री ने गुजरात के तीर्थक्षेत्र अंबाजी मंदिर के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि  यह एक महत्वपूर्ण शक्तिपीठ है, जहां देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां अंबे के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। यहां गब्बर पर्वत के रास्ते में आपको विभिन्न प्रकार की योग मुद्राओं और आसनों की प्रतिमाएं दिखाई देंगी। क्या आप जानते हैं कि इन प्रतिमाओं की खास क्या बात है ? दरअसल ये Scrap से बने Sculpture हैं, एक प्रकार से कबाड़ से बने हुए और जो बेहद अद्दभुत हैं। यानि ये प्रतिमाएं इस्तेमाल हो चुकी, कबाड़ में फेक दी गयी पुरानी चीजों से बनाई गई हैं। अंबाजी शक्ति पीठ पर देवी मां के दर्शन के साथ-साथ ये प्रतिमाएं भी श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बन गई हैं। 

MYBharat संगठन

प्रधान मंत्री ने घोषणा किया कि MYBharat संगठन की जो भारत के युवाओं को राष्ट्रनिर्माण के विभिन्न आयोजनों में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर देगा। उन्होंने कहाः कि, "31 अक्टूबर को एक बहुत बड़े राष्ट्रव्यापी संगठन की नींव रखी जा रही है और वो भी सरदार साहब की जन्मजयन्ती के दिन। इस संगठन का नाम है – मेरा युवा भारत, यानी MYBharat. MYBharat संगठन, भारत के युवाओं को राष्ट्रनिर्माण के विभिन्न आयोजनों में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर देगा। 

ये, विकसित भारत के निर्माण में भारत की युवा शक्ति को एकजुट करने का एक अनोखा प्रयास है। मेरा युवा भारत की वेबसाइट MYBharat भी शुरू होने वाली है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किय कि  MYBharat.Gov.in पर register करें और विभिन्न कार्यक्रम के लिए Sign Up करें। 

वल्लभभाई पटेल की जन्म-जयंती- 31 अक्टूबर 

हम भारतवासी सरदार पटेल को कई वजहों से याद करते हैं, और श्रद्धापूर्वक नमन करते हैं। सबसे बड़ी वजह है – देश की 580 से ज्यादा रियासतों को जोड़ने में उनकी अतुलनीय भूमिका।  हर साल 31 अक्टूबर को गुजरात में Statue of Unity पर एकता दिवस से जुड़ा मुख्य समारोह होता है। इस बार इसके अलावा दिल्ली में कर्तव्य पथ पर एक बहुत ही विशेष कार्यक्रम आयोजित हो रहा है। आपको याद होगा, मैंने पिछले दिनों देश के हर गाँव से, हर घर से मिट्टी संग्रह करने का आग्रह किया गया था।

 हर घर से मिट्टी संग्रह करने के बाद उसे कलश में रखा गया और फिर अमृत कलश यात्राएं निकाली गईं। देश के कोने-कोने से एकत्रित की गयी ये माटी, ये हजारों अमृत कलश यात्राएं अब दिल्ली पहुँच रही हैं। यहाँ दिल्ली में उस मिट्टी को एक विशाल भारत कलश में डाला जाएगा और इसी पवित्र मिट्टी से दिल्ली में ‘अमृत वाटिका’ का निर्माण होगा।

 यह देश की राजधानी के हृदय में अमृत महोत्सव की भव्य विरासत के रूप में मौजूद रहेगी। 31 अक्टूबर को ही देशभर में पिछले ढ़ाई साल से चल रहे आजादी के अमृत महोत्सव का समापन होगा। आजादी के अमृत महोत्सव में, लोगों ने अपने स्थानीय इतिहास को, एक नई पहचान दी है। इस दौरान सामुदायिक सेवा की भी अद्भुत मिसाल देखने को मिली है।

Special Olympics World Summer Games 

प्रधान मंत्री ने Special Olympics World Summer Games का चर्चा भी मन की बात के 106 थे संस्करण में किया जिसका आयोजन बर्लिन में हुआ था। ये प्रतियोगिता हमारे Intellectual Disabilities वाले एथलीटों की अद्भुत क्षमता को सामने लाती है। इस प्रतियोगिता में भारतीय दल ने 75 Gold Medals सहित 200 पदक जीते। Roller skating हो, Beach Volleyball हो, Football हो, या Tennis, भारतीय खिलाड़ियों ने Medals की झड़ी लगा दी। इन पदक विजेताओं की Life Journey काफ़ी Inspiring रही है।
 हरियाणा के रणवीर सैनी ने Golf में Gold Medal जीता है। बचपन से ही Autism से जूझ रहे रणवीर के लिए कोई भी चुनौती Golf को लेकर उनके जुनून को कम नहीं कर पाई। उनकी माँ तो यहाँ तक कहती हैं कि परिवार में आज सब Golfer बन गए हैं। पुडुचेरी के 16 साल के टी-विशाल ने चार Medal जीते। गोवा की सिया सरोदे ने Powerlifting में 2 Gold Medals सहित चार पदक अपने नाम किये। 9 साल की उम्र में अपनी माँ को खोने के बाद भी उन्होंने खुद को निराश नहीं होने दिया। छत्तीसगढ़ के दुर्ग के रहने वाले अनुराग प्रसाद ने Powerlifting में तीन Gold और एक Silver Medal जीता है। ऐसे ही प्रेरक गाथा झारखंड के इंदु प्रकाश की है, जिन्होंने Cycling में दो Medal जीते हैं। ब

हुत ही साधारण परिवार से आने के बावजूद, इंदु ने गरीबी को कभी अपनी सफलता के सामने दीवार नहीं बनने दिया। मुझे विश्वास है कि इन खेलों में भारतीय खिलाड़ियों की सफलता Intellectual Disabilities का मुकाबला कर रहे अन्य बच्चों और परिवारों को भी प्रेरित करेगी। प्रधानमंत्री ने लोगों से कहा किआपके गाँव में, आपके गाँव के अगल-बगल में, ऐसे बच्चे, जिन्होंने इस खेलकूद में हिस्सा लिया है या विजयी हुए हैं, आप सपरिवार उनके साथ जाइए। उनको बधाई दीजिये। और कुछ पल उन बच्चों के साथ बिताइए। आपको एक नया ही अनुभव होगा। परमात्मा ने उनके अन्दर एक ऐसी शक्ति भरी है आपको भी उसके दर्शन का मौका मिलेगा।

आदिवासी योद्धाओं का समृद्ध इतिहास 

प्रधान मंत्री ने कहा कि देश आदिवासी समाज का कृतज्ञ है, जिन्होंने राष्ट्र के स्वाभिमान और उत्थान को हमेशा सर्वोपरि रखा है। भारतवर्ष में आदिवासी योद्धाओं का समृद्ध इतिहास रहा है। इसी भारत भूमि पर महान तिलका मांझी ने अन्याय के खिलाफ बिगुल फूंका था। इसी धरती से सिद्धो-कान्हू ने समानता की आवाज उठाई। हमें गर्व है कि जिन योद्धा टंट्या भील ने हमारी धरती पर जन्म लिया।
 हम शहीद वीर नारायण सिंह को पूरी श्रद्धा के साथ याद करते हैं, जो कठिन परिस्थितियों में अपने लोगों के साथ खड़े रहे। वीर रामजी गोंड हों, वीर गुंडाधुर हों, भीमा नायक हों, उनका साहस आज भी हमें प्रेरित करता है। अल्लूरी सीताराम राजू ने आदिवासी भाई-बहनों में जो अलख जगाई, उसे देश आज भी याद करता है।

 North East में कियांग नोबांग और रानी गाइदिन्ल्यू जैसे स्वतंत्रता सेनानियों से भी हमें काफी प्रेरणा मिलती है। आदिवासी समाज से ही देश को राजमोहिनी देवी और रानी कमलापति जैसी वीरांगनाएं मिलीं। देश इस समय आदिवासी समाज को प्रेरणा देने वाली रानी दुर्गावती जी की 500वीं जयंती मना रही हैं। 

मन की बात -100वीं कड़ी

मन की बात की 100वीं कड़ी में आज प्रधान मंत्री ने देश को सम्बोधन किया. 3 अक्टूबर, 2014,  विजय दशमी के दिन ‘मन की बात’ की यात्रा शुरू हुई  थी। विजय दशमी यानी बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व। 

इस अवसर पर प्रधान मंत्री ने अपने सम्बोधन में कहा- यकीन नहीं होता कि ‘मन की बात’ को इतने महीने और इतने साल गुजर गए। हर एपिसोड अपने आप में खास रहा। हर बार, नए उदाहरणों की नवीनता, हर बार देशवासियों की नई सफलताओं का विस्तार। ‘मन की बात’ में पूरे देश के कोने-कोने से लोग जुड़े, हर आयु-वर्ग के लोग जुड़े। बेटी-बचाओ बेटी-पढ़ाओ की बात हो, स्वच्छ भारत आन्दोलन हो, खादी के प्रति प्रेम हो या प्रकृति की बात, आजादी का अमृत महोत्सव हो या फिर अमृत सरोवर की बात, ‘मन की बात’ जिस विषय से जुड़ा, वो, जन-आंदोलन बन गया, और इसे  लोगों ने बना दिया। 

प्रधान मंत्री के अनुसार मन की बात’ में जिन लोगों का हम ज़िक्र करते हैं वे सब हमारे Heroes हैं जिन्होंने इस कार्यक्रम को जीवंत बनाया है। आज जब यह 100वें एपिसोड के पड़ाव पर पहुंचे हैं, तो फिर प्रधन मंत्री मोदी ने  इन सारे Heroes और उनकी यात्रा के बारे में विस्तार से चर्चा किया ।

हरियाणा के भाई सुनील जगलान जी।

सुनील जगलान जी का मेरे मन पर इतना प्रभाव इसलिए पड़ा क्योंकि हरियाणा में Gender Ratio पर काफी चर्चा होती थी. प्रधान मंत्री ने  भी ‘बेटी बचाओ-बेटी पढाओ’ का अभियान हरियाणा से ही शुरू किया था। और इसी बीच जब सुनील जी के ‘Selfie With Daughter’ Campaign पर प्रधान मंत्री की नजर पडी। 

छत्तीसगढ़ के देउर गाँव 

छत्तीसगढ़ के देउर गाँव की महिलाओं की चर्चा पहले किया जा चूका है. ये महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के जरिए गाँव के चौराहों, सड़कों और मंदिरों के सफाई के लिए अभियान चलाती हैं। 

 तमिलनाडु की वो आदिवासी महिलाएं


तमिलनाडु की वो आदिवासी महिलाएं, जिन्होंने हज़ारों Eco-Friendly Terracotta Cups (टेराकोटा कप्स) निर्यात किए, उनसे भी देश ने खूब प्रेरणा ली। तमिलनाडु में ही 20 हजार महिलाओं ने साथ आकर वेल्लोर में नाग नदी को पुनर्जीवित किया था। 

मंजूर अहमद, जम्मू-कश्मीर 

मंजूर अहमद। ‘मन की बात’ में, जम्मू-कश्मीर की Pencil Slates (पेन्सिल स्लेट्स) के बारे में बताते हुए मंजूर अहमद  जी का जिक्र पहले के मन की बात  संस्करण में हुआ था।
प्रधानमंत्री  द्वारा यह पूछने पर की ये पेंसिल- स्लेट्स वाला काम कैसा चल रहा है, मंजूर जी  ने बताया कि बहुत अच्छे से चल रहा है सर बहुत अच्छे से, जब से सर  आपने हमारी बात, ‘मन की बात’ में कही सर तब से बहुत काम बढ़ गया सर और दूसरों को भी रोज़गार यहाँ बहुत बढ़ा है इस काम में।

विशाखापट्नम के वेंकट मुरली प्रसाद जी

विशाखापट्नम के वेंकट मुरली प्रसाद जी ने एक आत्मनिर्भर भारत Chart Share किया था। उन्होंने बताया था कि वो कैसे ज्यादा से ज्यादा भारतीय products ही इस्तेमाल करेंगे। जब बेतिया के प्रमोद जी ने LED बल्ब बनाने की छोटी यूनिट लगाई या गढ़मुक्तेश्वर के संतोष जी ने mats बनाने का काम किया, ‘मन की बात’ ही उनके उत्पादों को सबके सामने लाने का माध्यम बना। हमने Make in India के अनेक उदाहरणों से लेकर Space Start-ups तक की चर्चा ‘मन की बात’ में की है।
 

मणिपुर की बहन विजयशांति देवी जी

मणिपुर की बहन विजयशांति देवी जी का भी जिक्र पहले की मन की बात सेक्सकरन में किया था। विजयशांति जी कमल के रेशों से कपड़े बनाती हैं। ‘मन की बात’ में उनके इस अनोखे eco-friendly idea की बात हुई तो उनका काम और popular हो गया।

प्रदीप सांगवान जी 


‘मन की बात’ के पहले के संस्करण में प्रधान मंत्री ने  प्रदीप सांगवान जी के ‘हीलिंग हिमालयाज़’ अभियान की चर्चा की थी। प्रदीप जी ने बताया कि शुरुआत बहुत nervous हुई थी बहुत डर था इस बात को लेके कि जिंदगी भर ये कर पाएँगे कि नहीं कर पाएँगे पर थोड़ा support मिला और 2020 तक हम बहुत struggle भी कर रहे थे honestly। लोग बहुत कम जुड़ रहे थे बहुत सारे ऐसे लोग थे जो कि support नहीं कर पा रहे थे। हमारी मुहिम को इतना तवज्जो भी नहीं दे रहे थे। But 2020 के बाद जब ‘मन की बात’ में जिक्र हुआ उसके बाद बहुत सारी चीज़े बदल गई। मतलब पहले हम, साल में 6-7 cleaning drive कर पाते थे, 10 cleaning drive कर पाते थे। आज की date में हम daily bases पे पाँच टन कचरा इक्कठा करते हैं। अलग-अलग location से। 

झारखण्ड के संजय कश्यप जी


झारखण्ड के गांवों में Digital Library चलाने वाले संजय कश्यप जी हों, Covid के दौरान E-learning के जरिये कई बच्चों की मदद करने वाली हेमलता N.K. जी हों, ऐसे अनेक शिक्षकों के उदाहरण हमने ‘मन की बात’ में लिये हैं। हमने Cultural Preservation के प्रयासों को भी ‘मन की बात’ में लगातार जगह दी है।

Born on Sunday: सूर्य की तरह चमकते सितारे होते है रविवार को जन्मे लोग-रचनात्मक, आत्मविश्वासी और आशावादी

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Born on Sunday:
 रविवार या  sunday  के दिन जन्मे बच्चे कैसे होते हैं,  रविवार को जन्मे ladki का नाम क्या रखें, sunday को जन्मे बच्चे का नाम के लिस्ट संडे को जन्मे लोगों कि विशेषता ,रविवार को जन्मे बच्चों के नाम आदि की सवाल हैं जो अक्सर हमारे जहाँ मे घूमते रहते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार रविवार को जन्म लेने वाले व्यक्तियों का सीधा संबंध सूर्य से होता है और इस दिन पैदा होने वाले लोगों में सूर्य सा तेज होने के मान्यता है। सूर्य के तरह ऐसे लोग खुद को स्टार मानते हैं और ये लोग बहुत ही क्रिएटिव प्रवृति के होते हैं चाहे वह जीवन के किसी भी प्रफेशन मे  होते हैं।अक्सर लोगों के जेहन में यह सवाल होता है कि आखिर रविवार को जन्म का क्या मतलब है और ऐसे लोगों कि क्या खासियत होती है। दोस्तों, रविवार को जन्म लेने वाले लोगों कि सबसे बड़ी विशेषता होती है कि ऐसे लोग अक्सर रचनात्मक, आत्मविश्वासी और आशावादी होते हैं जो सुर्खियों में रहना पसंद करते हैं और दूसरों के साथ घुलना-मिलना पसंद करते हैं। रविवार का स्वामी सूर्य को माना जाता है और यही कारण है कि ऐसे लोगों मे एक प्राकृतिक करिश्मा  होता है जो दूसरों को उनकी ओर आकर्षित करता है।
 रविवार को जन्म लेने वाले लोगों  कि सबसे बड़ी विशेषता यह होती है कि ये लोग लीक से हटकर सोचते हैं और ये प्रभावशाली, सकारात्मक, मशहूर, नेतृत्वकर्ता, मेहनती और थोड़े संवेदनशील भी होते हैं। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि रविवार का हमारे जीवन में खास महत्त्व है.अगर आप देखेंगे तो संसार की अधिकांश परंपराओं में रविवार को सप्ताह का पहला दिन माना जाता है जिस दिन का इंतजार हमें हमेशा होता है। आखिर हो भी क्यों नहीं, यह रविवार ही तो दिन होता ही जिसका उपयोग आने वाले सप्ताह की तैयारी, आराम और पूजा के लिए करते हैं। ज्योतिष और एस्ट्रोलॉजी के अनुसार रविवार के इस अद्भुत दिन का स्वामी सूर्य है।र विवार को जन्म लेने वाले लोगों का मस्तिष्क महत्वाकांक्षाओं से भरा होता है और आत्मविश्वास चरम पर होता है। 

रविवार को जन्मे व्यक्ति बहुत मेहनती होते हैं और अपने परिश्रम की बदौलत ये जीवन में बुलंदियों को छूते हैं. ऐसे लोग कम बोलने में विश्वास रखते हैं हालाँकि जो भी बोलते हैं गंभीरता के साथ और सोच-समझकर बोलते हैं यही वजह है कि इनकी बातों का सामने वाले पर अलग और गहरा प्रभाव पड़ता है.  ये लोग आस्थावान होते हैं. इसके अलावा इनके परिजनों, दोस्तों और रिश्तेदारों से अच्छे संबंध होते हैं. कुंडली और ज्योतिष के अनुसार रविवार को जन्म लेने वाले लोग मिलनसार और मददगार होने के साथ ही उनमे नेतृत्व की क्षमता, और स्वाभिमानी होने के साथ ही भ्रमणशील और घूमने के शौक़ीन होते हैं. वे अपने जीवन में किसी भी परिस्थिति में हमेशा आशावादी होते हैं. सकारात्मक गुणों से भरपूर होने क्व साथ ही रविवार को पैदा होने बच्चा भाग्यशाली और खुश माना जाता है। आइये जानते हैं रविवार को जन्म लेने वाले व्यक्तियों की क्या होती है विशेषता, विशेषज्ञ हिमांशु रंजन शेखर (एस्ट्रॉलोजर और मोटिवेटर) द्वारा.

सूर्य की तरह चमकते सितारे 
रविवार को जन्मे लोग सचमुच सूर्य की तरह चमकते सितारे होते हैं। ज्योतिष के अनुसर अलग-अलग दिन के अनुसार जन्‍में लोगों का व्यक्तित्व भी अलग ही होता है और इस प्रकार से तरह रविवार को जन्‍में लोगों की भी कुछ स्पेशल विशेषताएं होती है. ऐसे लोगों पर भगवान सूर्य की कृपा हमेशा बनी रहती है और यही कारण है कि इसलिये इनके जीवन पर सूर्यदेव काफी गहरा असर छोड़ते हैं। 

रविवार को जन्मे बच्चे का नाम क्या रखें
रविवार को जन्म लेने वाले व्यक्तित्व का जीवन सूर्य के समान चमकीला होता है क्योकि आप जानते हैं कि सूर्य रविवार का स्वामी होते हैं. ऐसे लोग जीवन में थोड़े से संतुष्ट कभी नहीं होना चाहते भले ही वह सफलता हीं क्यों नहीं हो.

रविवार को जन्मे बच्चे का नामकरण और उनको उपयुक्त नाम रखने के लिए अक्सर माता पिता उत्सुक और परेशान रहते हैं. हालाँकि नामकरण के पीछे भी सामान्यत:कुंडली और जन्म के समय ग्रहों की स्थिति और घर के अनुसार रखने की परंपरा होती है और सच तो यह है कि बच्चे का नाम रखने में ज्योतिष और परंपरागत फैक्टर की भूमिका महत्पूर्ण होती है. 

इसके साथ हीं  परिवार की पसंद और आपकी खुद की राय भी जरुरी होत्ती है. हालाँकि  जन्म के दिन के आधार पर नाम रखने की परंपरा के अनुसार बच्चे के नाम का चयन भी हो सकता है। आप चाहें तो रविवार को जन्म लेने वाले बच्चों के लिए निम्न नामों को एक सुझाव के तौर पर ले सकते हैं. 

रविवार को जन्मे बच्चे के लिए कुछ नाम 

सूरज: सूरज रविवार का प्रतीक होता है और यह एक पॉवरफुल नाम हो सकता है।
आदित्य: आदित्य भी सूरज के देवता का नाम है और यह एक प्रसिद्ध हिन्दू नाम है।
दिनेश: दिनेश भी सूरज का एक अन्य नाम हो सकता है, जो रविवार के साथ जुड़ा होता है।
आर्यम: यह एक पॉप्युलर हिन्दू नाम है जो सूर्य के रूप में जाना जाता है।

याद रखें कि नाम चुनते समय व्यक्तिगत पसंद और परंपराओं का महत्वपूर्ण होता है, इसलिए यह आपके परिवार और आपके स्वयं के मूड और समर्थन के आधार पर आधारित होना चाहिए।

रविवार को जन्म लेने वाले लोग दूसरों को प्रेरित करते हैं और अपने जीवम वे बहुत सफल होते हैं तथा काफी सफलताएं  हासिल करते हैं. रविवार को जन्म लेने वाले लोगों का जीवन बहुत खुशहाल और सफल होता है. वे दूसरों के लिए प्रेरणा का स्रोत होते हैं और हमेशा दूसरों की मदद करने के लिए तैयार रहते हैं. वे अपने जीवन में बहुत कुछ हासिल करते हैं और दुनिया को एक बेहतर जगह बनाते हैं.

Sunday को जन्म लेने वाले लोग अपने क्रिएटिव के बदौलत काफी नाम कमाते हैं और जीवन के हर क्षेत्र में सफल होते हैं. 


नेतृत्व की क्षमता 
रविवार को जन्म लेने वाले व्यक्ति सूर्य के गुणों से युक्त होते हैं और वे भीड़ का हिस्सा शायद ही बनकर रहें. वे हमेशा नेतृत्व करने का हौसला रखते है. ऐसे जातक जातक किसी की अधीनता स्वीकार नहीं करना चाहते हैं और न हीं किसी के अंदर  कार्य करना पसन्द करते हैं. ये अपना रास्ता खुद बनाना चाहते हैं और इसमें अक्सर सफल भी होते हैं. ये अच्छे व्यवस्थापक और कठोर नियम कानून में रहने के अभ्यस्त होते हैं. 

सुन्दर नेत्र और आकर्षक व्यक्तित्व का स्वामी 
रविवार को जन्मे व्यक्ति सुन्दर नेत्रों वाले तथा आकर्षक व्यक्तित्व के मालिक होते हैं. अपने इष्ट देव भगवान् सूर्य के तरह गंभीर व्यक्तित्व वाले होते हैं. अपने आकर्षक छवि जिसमे इनके व्यक्तित्व और बोलने की कला और दूसरे खूबियों  के कारण अन्य लोगों को शीघ्र ही अपनी ओर आकर्षित कर लेते है.


स्वाभिमानी अपमान स्वीकार नहीं 
रविवार को जन्मे लोगों के लिए स्वाभिमान और आत्म सम्मान की भूख अधिक होती है. यह अपने आत्म-सम्मान और अपने सम्मान के लिए हर प्रकार की कुर्बानी  के लिए तैयार रहते हैं. अपने रिश्तों के साथ हीं साथ अपने वातावरण के प्रति जहाँ ये रहते हैं, बेहद संवेदनशील होते है. किसी की अप्रिय या कड़वी बातों को भूलना इनके लिए आसान नहीं होता है और ये उसे अक्सर काफी दिनों तक भूल नहीं पाते हैं. 

घूमने का शौक़ीन 
रविवार को जन्मे जातक घूमने-फिरने के शौक़ीन होते हैं और एक जगह शायद ही स्थिर रहना चाहें. मजबूरी  के कारण उन्हें ऐसा करना पड़े तो और बात है लेकिन स्वाभाव से ये घूमने के काफी शौक़ीन होते हैं और उसे पूरा भी करते हैं. 

स्पष्ट बोलने वाले और निश्चल 
रविवार को जन्मे व्यक्ति सामान्यत स्पष्ट बोलने वाले होते हैं और स्टेट फॉरवर्ड संबंधों में विश्वास करते हैं. न्यायप्रिय होते हैं लेकिन  बल पूर्वक न्याय हासिल करना अपना धर्म समझते हैं. हालाँकि ये स्वभाव से  निश्छल होते हैं और दूसरों का अहित सोच नहीं सकते हैं. 

अनुशासन युक्त जीवन 
रविवार को जन्मे जातकों में अनुशासन की भावना सर्वोपरि होती है और ये लोग खुद पर भी अनुशासन लागु करने में आगे रहते हैं. सफलता कहाँ तक मिलती है ये दूसरे बातों पर भी निर्भर करती है लेकिन अपनी ओर से अनुशासन में रहने इनकी प्राथमिकता और स्वाभाव होती है. 

महत्वकाँक्षी एवं दृढ इच्छा शक्ति के धनी 
रविवार को जन्में लोग काफी महत्वाकांक्षी होते हैं. जीवन में  ये बड़े-बड़े सपने देखते हैं और उसे पूरा करने के लिए अपनी ओर  से पूर्ण कोशिश भी करते हैं. इनके पास  दृढ इच्छा शक्ति होती है और इसकी मदद से ऐसे जातक अपने उदेश्यों को पूरा करने में जी जान लगा देते हैं और उसे पूरा भी करते है. 

रविवार को जन्म लेने वाले बच्चों के बारे में
आम तौर पर ऐसा माना  जाता है कि रविवार को जन्मे लेने वाला बच्चा आकर्षक,प्रसन्न रहने वाला और बुद्धिमान होता है।  सकारात्मक गुणों से भरपूर होने क्व साथ ही रविवार को पैदा होने बच्चा भाग्यशाली और खुश माना जाता है। 

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अस्वीकरण: कृपया ध्यान दें कि लेख में उल्लिखित टिप्स/सुझाव केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से हैं ताकि आपको उस मुद्दे के बारे में अपडेट रखा जा सके जो आम लोगों से अपेक्षित है. आपसे निवेदन है कि कृपया इन सुझावो को  पेशेवर ज्योतिषीय सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए तथा अगर आपके पास इन विषयों से सम्बंधित कोई विशिष्ट प्रश्न हैं तो हमेशा अपने ज्योतिषी या पेशेवर ज्योतिष/कुंडली सुझाव प्रदाता से अवश्य परामर्श करें।

नजरिया जीने का: सेल्फ डिसप्लिन जीवनशैली अपनाएं, आजमाएं ये टिप्स

najariya jine ka tips for self discipline daily routine

नकारात्मक विचारों को खुद से दूर रखने के लिए आपको अपने भीतर के प्रेरक और प्रेरणादायी विचारों का पालन करना होगा। अनुशासित जीवनशैली और गलत विचारों और कार्यों से दूर रहने का इरादा आपके आत्मविश्वास को बेहतर बनाने का मापदंड है। यहां कुछ सुझाव दिए गए हैं जो आपको बेहतर समय प्रबंधन और आत्मविश्वास बनाने के लिए अनुशासित जीवनशैली का पालन करने के लिए दिशा-निर्देश प्रदान करेंगे।

1. स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करें

अनुशासित जीवनशैली की नींव के लिए स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करना सबसे महत्वपूर्ण है। याद रखें कि आपको अपने लक्ष्यों को अल्पकालिक और दीर्घकालिक में वर्गीकृत करना होगा। अल्पकालिक लक्ष्यों के तहत, आपको दैनिक और साप्ताहिक लक्ष्यों से शुरुआत करनी चाहिए जो प्राप्त करने योग्य हों। वह दृष्टि और सपना जिसे आप अगले कुछ महीनों या वर्षों में प्राप्त करना चाहते हैं, उसे दीर्घकालिक लक्ष्य कहा जा सकता है।

2. दैनिक दिनचर्या बनाएं

अपनी दैनिक दिनचर्या को न्यायिक और पारदर्शी तरीके से विभाजित करें ताकि आप अपने तरीके से उसका पालन कर सकें। आप अपनी दिनचर्या को इस तरह से विभाजित कर सकते हैं-

सुबह की दिनचर्या: अपने दिन की शुरुआत ऐसी गतिविधियों से करें जो आपको ऊर्जा प्रदान करें। इसमें व्यायाम, ध्यान, स्वस्थ नाश्ता और अपने दिन की योजना बनाना शामिल हो सकता है।

काम/अध्ययन कार्यक्रम: काम, अध्ययन और ब्रेक के लिए विशिष्ट समय ब्लॉक आवंटित करें। अपने कार्यों को व्यवस्थित करने के लिए प्लानर, कैलेंडर या ऐप जैसे टूल का उपयोग करें।

शाम की दिनचर्या: ऐसी गतिविधियों के साथ आराम करें जो आपको आराम दें, जैसे पढ़ना, हल्का व्यायाम या दिन के बारे में सोचना।

3. कार्यों को प्राथमिकता दें

हमेशा अपने कार्यों को समय पर और समय सीमा में पूरा करने की आवश्यकता और महत्व के आधार पर प्राथमिकता दें।

अपने कार्यों को ज़रूरी/महत्वपूर्ण, ज़रूरी नहीं/महत्वपूर्ण, ज़रूरी/महत्वपूर्ण नहीं और ज़रूरी नहीं/महत्वपूर्ण नहीं में वर्गीकृत करें।

हमेशा एक स्टिकी नोट तैयार करें और "टू-डू लिस्ट" के रूप में चिह्नित करें जो आपकी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

4. शारीरिक स्वास्थ्य बनाए रखें

नियमित रूप से व्यायाम करें: अपनी दिनचर्या में शारीरिक गतिविधि को शामिल करें, दिन में कम से कम 30 मिनट का लक्ष्य रखें।

संतुलित भोजन करें: सुनिश्चित करें कि आपके आहार में आपकी ऊर्जा के स्तर को बनाए रखने के लिए विभिन्न पोषक तत्व शामिल हों।

अच्छी नींद लें: समग्र स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए हर रात 7-9 घंटे की अच्छी नींद लेने का लक्ष्य रखें।

4. मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान दें

मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान दें और अपने आत्मविश्वास के स्तर को प्रोत्साहित करने और अपने दिमाग में नकारात्मक विचारों से बचने की रणनीति पर भी ध्यान दें। नकारात्मक व्यक्तियों और ऐसे लोगों से बचें जिनकी टिप्पणियाँ और सुझाव हमारे दिमाग में नकारात्मक विचारों के निर्माण के लिए परेशानी पैदा कर रहे हैं। आप नीचे दिए गए कुछ सुझावों का पालन करके अपने मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।

ध्यान और माइंडफुलनेस: तनाव को कम करने और फोकस बढ़ाने के लिए रोजाना ध्यान या माइंडफुलनेस का अभ्यास करें।

सकारात्मक पुष्टि: सकारात्मक मानसिकता बनाने और आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए पुष्टि का उपयोग करें।

सहायता लें: अगर आप अभिभूत महसूस कर रहे हैं तो दोस्तों, परिवार या पेशेवरों से संपर्क करने में संकोच न करें।

5. लगातार सीखते रहें

चुनौतियों से निपटने और प्रतिकूल स्थिति का विश्लेषण करने की आपकी सारी शक्ति और क्षमता आपके आत्म-संदेह चिह्न से ठीक हो सकती है और यह आपके करियर और जीवन के लिए विनाशकारी होगा। याद रखें, प्रकृति ने हमें अपने जीवन में हर विषम परिस्थिति और परिस्थितियों से निपटने और उनका सामना करने की अपार शक्ति प्रदान की है। हमारे समग्र विकास में हमारे ज्ञान और पूर्णता को बढ़ाने के लिए हमारे जीवन में निरंतर सीखने की आवश्यकता है।

पढ़ें: अपने ज्ञान और दृष्टिकोण का विस्तार करने के लिए पढ़ने को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएँ। पढ़ना और उचित अध्ययन ज्ञान और दृष्टिकोण को बढ़ाने का अंतिम तरीका है

पाठ्यक्रम लें: उन पाठ्यक्रमों या कार्यशालाओं में दाखिला लें जिनमें आपकी रुचि हो या जो आपके कौशल को बढ़ाएँ।

चिंतन करें: आपने जो सीखा है और आप इसे कैसे लागू कर सकते हैं, इस पर चिंतन करने में समय बिताएँ।

7. आत्म-अनुशासन का अभ्यास करें

प्रतिदिन दोहराए जाने वाले नियमित कार्य आपको अपने भीतर आत्मविश्वास बनाने का तरीका प्रदान करेंगे और निश्चित रूप से यह नकारात्मक विचारों को आपसे दूर रखेगा, किसी से भी अपनी तुलना करने से बचें क्योंकि प्रकृति ने आपको विशेष क्षमताओं के साथ और आपके लिए विशेष कार्यकाल के लिए बनाया है। उन आत्मविश्वास निर्माण अभ्यासों का पालन करें ताकि यह नकारात्मक मानसिकता को आपसे दूर रख सके। याद रखें कि यह केवल आप ही हैं जो आपके दिमाग में नकारात्मक विचारों को जन्म देते हैं जो आपके जीवन की सभी क्रियाओं और रणनीति में बाधा डालते हैं। टालमटोल से बचें: कार्यों को टालने के बजाय तुरंत निपटाएँ। सीमाएँ निर्धारित करें: विकर्षणों को सीमित करें और उत्पादकता के लिए अनुकूल वातावरण बनाएँ। खुद को पुरस्कृत करें: लक्ष्य प्राप्त करने के लिए खुद को पुरस्कृत करें, जो सकारात्मक व्यवहार को मजबूत करता है। 

8. प्रगति की निगरानी करें: 

अपनी प्रगति को ट्रैक करने, अपनी उपलब्धियों पर विचार करने और सुधार के क्षेत्रों की पहचान करने के लिए एक जर्नल रखें। नियमित समीक्षा: यह सुनिश्चित करने के लिए कि वे आपकी आकांक्षाओं के अनुरूप हैं, समय-समय पर अपने लक्ष्यों और दिनचर्या की समीक्षा करें। 

9. मोटिवेटेड  रहें

 जीवन में कुछ सीखने पर ध्यान केंद्रित करें और दूसरों से अपनी तुलना करने की आदत से बचें, यह आपके आत्मविश्वास के स्तर को कम करने में सबसे बड़ी बाधा है। एक बार जब आप अपने दृष्टिकोण, क्षमता और अन्य योग्यताओं की तुलना दूसरों से करना शुरू कर देते हैं, तो आप अपनी दक्षता को कम आंकने लगते हैं और अपने आप को सीमित कर लेते हैं।


People Born On Sunday: जानें रविवार को जन्मे बच्चों कि क्या होती है खासियत?

 

People born on sunday features  career health nature

नजरिया जीने का: ईश्वर वैसे तो प्रत्येक व्यक्ति को चाहे  वह किसी भी दिन जन्म लेता है, उसके अंदर ऊर्जा कि अपार संभावना प्रदान करता है। सच्चाई तो यह भी है कि हर व्यक्ति अपने भाग्य का निर्माता खुद होता है और कड़ी मेहनत और लगन से सफलता प्राप्त कर सकता है। हालांकि सच यह भी है कि हमारे जीवन मे अस्ट्रालजी और ज्योतिष विज्ञान के प्रभाव से भी पूर्णत: इनकार नहीं किया जा सकता।

 कुंडली विज्ञान,एस्ट्रोलॉजी के अनुसार यह कहा जाता है कि रविवार को जन्मे बच्चे विशेष प्रतिभाओं और सकारात्मक गुणों के साथ धन्य होते हैं और  जीवन में सफलता और खुशी प्राप्त करने की प्रबल संभावना रखते हैं। रविवार को जन्म लेने वाले व्यक्तियों कि सबसे बड़ी विशेषता यह होती है कि वे सूर्य के अनुसार गाइड होते हैं क्योंकि ज्योतिष का अनुसार रविवार को सूर्य का दिवस माना जाता है। आइये जानते हैं रविवार को जन्म लेने वाले लोगों की खासियत, विशेषज्ञ हिमांशु रंजन शेखर (एस्ट्रॉलोजर और मोटिवेटर) द्वारा.

 आत्मविश्वास और नेतृत्व: 

रविवार को जन्मे बच्चे आमतौर पर नेतृत्व क्षमता से परिपूर्ण होते हैं और उन्हे जो भी कार्य असाइन किया जाए, उसे वे तल्लीनता और संपूर्णता के साथ अंजाम देते हैं। ऐसे लोग आत्मविश्वास से भरपूर और स्वाभाविक नेता होते हैं। इनमें दूसरों को प्रेरित करने और उनका नेतृत्व करने की स्वाभाविक क्षमता होती है। अक्सर यह किसी भी समूह में अग्रणी की भूमिका निभाते हैं और दूसरों को अपना अनुसरण करने के लिए प्रेरित करते हैं

रचनात्मकता और बुद्धि:

रविवार को जन्मे बच्चों मे रचनात्मकता और कल्पनाशीलता कूट-कूट कर भरी होती है। कल्पनाशीलता और इमैजनैशन पावर इन्हे जीवन मे सफलता के लिए प्रेरित करती है और ऐसे लोग कला, संगीत, लेखन या अन्य रचनात्मक क्षेत्रों में सफल हो सकते हैं। साथ ही, ये शांत और प्रखर बुद्धि वाले होते हैं। सीखने कि क्षमता इनमे गजब कि होती है और ऐसे लोग चीजों के काफी जल्दी और आसानी से सीखते हैं।

उदारता और दया:

 रविवार को जन्मे लोग काफी उदार और दयालु प्रवृति के होते हैं। ऐसे लोग बहुत जल्द किसी के परेशानी से व्यथित हो जाते हैं और उन्मे सेवा और मदद करने कि भावना प्रबल होती है। यह दूसरों की मदद करने और ज़रूरतमंदों की सहायता करने में हमेशा आगे रहते हैं। रविवार को जन्मे लोग सम्मानजनक और मिलनसार होते हैं। यह सभी के साथ अच्छे संबंध बनाते हैं और समाज में सम्मान प्राप्त करते हैं।

ऊर्जावान और उत्साही:

 यह लोग ऊर्जावान और उत्साही होते हैं। यह जीवन का भरपूर आनंद लेते हैं और हर काम को पूरे उत्साह के साथ करते हैं।  यह लोग स्वतंत्र और आत्मनिर्भर होते हैं। यह अपनी ज़िंदगी अपनी शर्तों पर जीना पसंद करते हैं और दूसरों पर निर्भर नहीं रहते हैं।

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अस्वीकरण: कृपया ध्यान दें कि लेख में उल्लिखित टिप्स/सुझाव केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से हैं ताकि आपको उस मुद्दे के बारे में अपडेट रखा जा सके जो आम लोगों से अपेक्षित है. आपसे निवेदन है कि कृपया इन सुझावो को  पेशेवर ज्योतिषीय सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए तथा अगर आपके पास इन विषयों से सम्बंधित कोई विशिष्ट प्रश्न हैं तो हमेशा अपने ज्योतिषी या पेशेवर ज्योतिष/कुंडली सुझाव प्रदाता से अवश्य परामर्श करें।

नजरिया जीने का: हम काम की अधिकता से नहीं, उसे बोझ समझने से थकते हैं, बदलें इस माइंडसेट को

नजरिया जीने का: मानव का मन भी बहुत हीं विचित्र और रहस्यपूर्ण है. जब कभी हमें कोई कार्य करने की जरुरत होती है हम पहले उस  कार्य की गंभीरता और जरुरत की अपेक्षा गैर जरुरी और अनावश्यक विचारों के आधार पर उस कार्य को तौलने की कोशिश करते हैं. नजरिया जीने का एक ऐसा हीं मंच है जो आपके अंदर की आग को जलाने की कोशिश करती है जो क्योंकि आपके अंदर की आग सबसे बड़ी चीज है। 


हमारी यह सबसे बड़ी कमजोरी है कि हम काम को जीवन और कर्त्तव्य समझने से पहले हम काम को एक ऐसी चीज़ के रूप में देखना शुरू कर देते हैं जिससे हमें छुटकारा पाना है. जबकि हकीकत यह है की इसके बजाय हमें काम को ऐसे चीज़ के रूप में लेने की जरुरत है जो हमारे जीवन में मूल्य जोड़ती है साथ ही  यह हमें पैसा कमाने, अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने, अपने कौशल और क्षमताओं को विकसित करने, और दूसरों से जुड़ने में मदद करता है। काम को बोझ समझने से बचने के लिए, हमें यह याद रखना चाहिए कि काम हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।  अपने काम को एक चुनौती के रूप में देखें अपने काम में से कुछ आनंद लें। जब आप काम को एक अवसर के रूप में देखते हैं, तो आप इसे बोझ नहीं समझेंगे। आप इसे अपने जीवन में एक सकारात्मक और मूल्यवान योगदान के रूप में देखेंगे।

निगेटिव माइंडसेट हमारी सफलता के लिए सबसे बड़ी बाधक है इसमें हम में से किसी को शायद हीं संदेह हो. इसके साथ ही यह भी उतना हीं बड़ा सच है कि हम सभी इस सत्य को जानने के बावजूद खुद पर शायद हीं इम्प्लीमेंट करते हों.

अगर कोई कार्य और लक्ष्य हमारी जरुरत है तो उसके लिए हर दुर्गम रास्तों को भी अपनाये जाने पर विचार किया जाना चाहिए, लेकिन अगर अगर कोई खास कार्य हमारे लिए जरुरी नहीं है तो बेहिचक उससे किनारा कर लिया जाना चाहिए.  

देखें वीडियो: नजरिया-जीने का-जीवन में स्व-अनुशासन का महत्त्व 


लेकिन हमारी विडम्बना है कि हम कार्यों की अधिकता या अमाउंट ऑफ़ वर्क से नहीं बल्कि उसे पहले ही बोझ समझ लेते हैं और यही कारण है कि हम पहले ही थक जाते हैं, ऐसे स्थिंति में कार्य पूरा होने के सम्भावना की कल्पना सहज ही की जा सकती है.

आप काम की अमाउंट और अपने नेचर के एडॉप्शन का अध्ययन करेंगे तो पाएंगे कि अगर आप सकारात्मकता से सराबोर हैं तो जटिल से जटिल काम भी आप कर लेते हैं लेकिन एक छोटा और अत्यंत साधारण सा कार्य भी आपको पहाड़ सा प्रतीत होता है अगर आप पहले ही मान लेते हैं की बहुत भारी और उबाऊ सा काम है.

फिर क्या इसमें संदेह बचता है कि हमारा माइंडसेट यह निर्धारित करता है कि काम भारी है या आसान.
देखें वीडियो-नजरिया जीने का: सकारात्मक सोचें, सकारात्मक देखें और सकारात्मक दृष्टिकोण रखें



दोस्तों यह सामान्य सी प्रवृति है जिसके गिरफ्त में हम हमेशा से रहे हैं और विडम्बना यह है कि हम उससे निकलना नहीं चाहते.

जैसे  ही हमें कोई काम असाइन  किया जाता है,  हम उसे पूरा करने की बजाय उसके नकारात्मक और असंभव सा लगने वाले प्रकृति को ही पहले  देखते हैंहम यह नहीं सोचते हैं कि हममें उस कार्य को पूरा करने की क्षमता और सामर्थ्य है या नहीं. 

जब तक हम दिए गए काम पूर्ण रूप से समाप्त करने का विश्वास  खुद के अंदर नहीं लाएंगे, उस असंभव से कार्य के पूर्ण होने की तो बात ही छोड़िये,  किसी  साधारण से काम को आरम्भ नहीं करने के लिए भी हमें सैकड़ों बहाने मिल जाएंगेआश्चर्य है कि हम काम की अधिकता और उसे उबाऊ प्रकृति को दोष देते है
दोस्तों अगर, हम अपनी ऊर्जा के साथ उस काम को खत्म करने की कोशिश करेंगे तो वह काम समाप्त हो सकता है लेकिन हमारा नकारात्मकता है कि हम पहले ही उसे बोझ  समझ लेते हैं
सबसे पहले यह जरूरी है किसी भी काम को शुरू करने के लिए हम अपने अंदर सकारात्मक या पॉजिटिव ऊर्जा का संचार करें.




 जब तक आपके अंदर पॉजिटिव उर्जा नहीं होगा आप किसी भी काम को उसके पूरी ईमानदारी और सफाई के साथ पूर्ण नहीं कर सकते और आपके अंदर सकारात्मकता तब आएगी जब आप खुद में भरोसा करना सीखें.

इसके लिए जरूरी है कि आप अपने आसपास वैसे लोगों को हमेशा रखें जो आपके और आपके सपने में विश्वास करते हैं आप जब तक अपने ऊपर विश्वास नहीं करेंगे कोई भी काम जो आपको करना है उसे आप संपूर्ण ईमानदारी के साथ नहीं करें इसके लिए यह जरूरी है कि आप अपने अंदर स्थित ऊर्जा  को पहचाने.


विश्वास करें दोस्तों आप जितना अपने बारे में सोचते हैं उससे कहीं बहुत ज्यादा साहसी है आप. अपने अंदर के साहस को पहचाने क्योंकि आपके अंदर का यह साहस हीं है जो आपको सकारात्मक ऊर्जा से सराबोर रखेगा. 

किसी भी काम को करने के लिए आपको आप अपने ऊपर कभी भी अविश्वास नहीं करें क्योंकि आपमें न टैलेंट की कमी है और न हीं योग्यता की और ना दूरदर्शिता की कमी है अगर कमी है तो सिर्फ इस प्रवृति कि जिसमे आप नकारात्मक माइंडसेट से खुद का मूल्यांकन करने का आदत बना चुके हैं.

दोस्तों विश्वास करें किसी भी काम को सफाई के साथ करने में सबसे बड़ी बाधा यह है कि हम अपनी ऊर्जा का समुचित रूप से उपयोग नहीं कर पाते.

विश्वास करें दोस्तों ऐसा कोई भी असंभव कार्य नहीं है जिससे आप पूरा नहीं कर सकते हैं क्योंकि आपके अंदर ऊर्जा का विशाल भण्डार स्थित है. ... आशा और उम्मीद नहीं छोड़े दोस्तों क्योंकि बिना उम्मीद के आप जीवन में कुछ भी हासिल नहीं कर सकते और उम्मीद के लिए यह जरूरी है कि आप अपने ऊपर सबसे पहले विश्वास करना सीखें.

नजरिया जीने का: पढ़ें और भी...

रिश्ते खास हैं, इन्हे अंकुरित करें प्रेम से, जिंदा रखें संवाद से और दूर रखें गलतफहमियों से

इमोशनल हैं, तो कोई वादा नहीं करें और गुस्से में हों तो इरादा करने से परहेज करें

स्व-अनुशासन के महत्त्व को समझे और जीवन को बनाएं सार्थक 

रखें खुद पर भरोसा,आपकी जीत को कोई ताकत हार में नहीं बदल सकती

जाने क्या कहते हैं ये हस्तियां नागरिक विश्वास और समावेशी विकास के सन्दर्भ में

नजरिया जीने का: बेहतर कल के लिए नहीं छोड़िए आशावाद का दामन

Inspiring Thoughts: बेहतर कल के लिए नहीं छोड़िए आशावाद का दामन

नजरिया जीने का: आशावाद एक शक्तिशाली शक्ति है. यह हमें मुश्किल समय में आगे बढ़ने और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद कर सकता है. जब हम आशावाद रखते हैं, तो हम मुश्किलों को स्वीकार करने और उनसे निपटने के लिए अधिक तैयार होते हैं. हम अधिक रचनात्मक होते हैं और नए समाधान खोजने में सक्षम होते हैं. हम अधिक दृढ़ होते हैं और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अधिक प्रयास करते हैं. नजरिया जीने का एक ऐसा हीं मंच है जो आपके अंदर की आग को जलाने की कोशिश करती है जो क्योंकि आपके अंदर की आग सबसे बड़ी चीज है। 


आशावाद एक चमत्कार नहीं है. यह एक दृष्टिकोण है. यह एक विश्वास है कि चीजें बेहतर होंगी. यह एक विश्वास है कि हम अपने सपनों को प्राप्त कर सकते हैं. जब हम आशावाद रखते हैं, तो हम अपने जीवन को बेहतर बनाते हैं. हम अपने जीवन को अधिक सार्थक बनाते हैं. हम अपने जीवन को अधिक आनंददायक बनाते हैं.

तो, आइए हम बेहतर कल के लिए आशावाद का दामन न छोड़ें. आइए हम अपने सपनों के लिए लड़ें और कभी भी हार न मानें. आइए हम अपने जीवन को बेहतर बनाएं.

मुसीबतों को देख कर क्यों डरता है,
तू लड़ने से क्यों पीछे हटता है।
किसने तुमको रोका है,
तुम्ही ने तुम को रोका है।
भर साहस और दम, बढ़ा कदम,
अब इससे अच्छा कोई न मौका है।
-नरेंद्र वर्मा


जाहिर है, अगर जीवन है तो बाधाओं का आना स्वाभाविक है और इससे हम इनकार नहीं कर सकते।लेकिन क्या इन बाधाओं और परेशानियों से घबराकर हमें अपनी हार स्वीकार लेनी चाहिए।हाफिज नहीं। सच तो यह है कि जिंधिवमें कितनी भी विषम परिस्थितियों से हमें सामना करना पड़े, हमें आशा और उम्मीद कभी नहीबखिनी चाहिए।

विश्वास कीजिए, आशावादी होना मानव का सबसे अनुपम और प्रभावी लक्षण है जो न केवल आपके परिस्थितियों से लड़ने के लिए शक्ति प्रदान करता है बल्कि एक अपेक्षाकृत अच्छे सुबह किबुम्मिद भी जगाती है।

आप इतिहास को पलट कर देख लीजिए, विपरीत और विषम परिस्थितियों से किसका सामना नहीं हुआ है। लेकिन इतिहास के पन्नों में स्थान उन्हें ही मिली है जिन्होंने अपने कर्मठता से उन परिस्थितियों से भी निकलने का रास्ता बनाया है।

किसी कवि ने क्या खूब कहा है।।
" जो कहे नही करता भी हो 
विश्वास उसी का होता है
जो युग को कर्मठता से मोडे
इतिहास उसी का होता है।"

कहने का आशय यह है कि आशावादी बने रहने में वर्तमान की परिस्थितियों से निकलने की एक उम्मीद तो जिंदा रहती है। लेकिन अगर हम निराशावाद का दामन थाम भी लेते हैं तोवक्या इससे हम स्थिति से निकल जायेंगे।।हरगिज नही।

निराशा मन में आते हीं आपकी शरीर के तमाम अंगों पर पड़ने वाले प्रभाव का कभी अध्ययन किया है। आंखों के आगे अंधेरा छाना, मस्तिष्क में अनावश्यक दर्द, अंदरूनी अंगों के कार्य पद्धति पर अनावश्यक दबाव।।।ऐसी स्थिति में जब बाहर की परिस्थितियों का सामना करने केलिए हमें अंदर से स्ट्रॉन्ग रहने की जरूरत है, हम अंदर के फ्रंट पर ही अगर खुद को निराशावादी बनाकर कमजोर हो जायेंगे तो फिर उस स्थिति से कैसे निकल पाएंगे इसका अंदाजा सहज ही लगाई जा सकती है।।

वही अगर उसी प्रकार की विषम परिस्थितियों के सामने खुद को आशावादी रखते हुए उनका सामना करने की कोशिश करो, आप खुद ही बदलाव को महसूस कर सकते हैं.

बाधाएँ आती हैं आएँ
घिरें प्रलय की घोर घटाएँ,
पावों के नीचे अंगारे,
सिर पर बरसें यदि ज्वालाएँ,
निज हाथों में हँसते-हँसते,
आग लगाकर जलना होगा।
क़दम मिलाकर चलना होगा।
-अटल बिहारी वाजपेयी


सच तो यह है कि आशावादी बने रहने पर हमारी मस्तिष्क भी व्यवहारिक और प्रभावी उपाय सुझाती है साथ ही स्थितियों से निकलने के लिए स्ट्रेटजी और उनके कार्यानयन में भी हमारी मदद करती है।



नजरिया जीने का: विपत्तियां यह अहसास दिलाती हैं कि आप किस मिटटी के बने हैं, घबराएं नहीं सामना करें

Opportunity in Adversity
नजरिया जीने का: जब हम मुश्किलों का सामना करते हैं, तभी हमारी तैयारियां और अपने शक्ति का एहसास होती है। जीवन का यथार्थ भी यही है कि यह मुश्किल समय हीं है जो हमें सिखाता है कि हम कितने मजबूत और लचीले हैं। निसंदेह विपत्तियां दर्दनाक और चुनौतीपूर्ण होती हैं, लेकिन वे हमें सिखाने और विकसित करने के लिए भी अमूल्य अवसर प्रदान करती हैं। अगर हम इन अनुभवों से सीखने और बढ़ने के लिए तैयार रहें, तो हम मजबूत और अधिक पूर्ण जीवन जी सकते हैं। नजरिया जीने का एक ऐसा हीं मंच है जो आपके अंदर की आग को जलाने की कोशिश करती है जो क्योंकि आपके अंदर की आग सबसे बड़ी चीज है। 


"कठिनाई ही असली परीक्षा है जिससे मजबूत आत्माएं विकसित होती हैं।" - महात्मा गांधी

विश्वास करें, विपतियों या मुसीबतों के सामना करने के समय हमारे पास दो विकल्प होते हैं- या तो हम उनके सामने समर्पण कर लें या उनका सामना करने का हिम्मत पैदा करें। जो लोग विपत्तियों का सामना सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ करते हैं, वे अक्सर अधिक लचीले, दृढ़निश्चयी और आत्मविश्वासी बन जाते हैं। उनका सामना करने कि यह शक्ति हमें अपनी कमजोरियों को खत्म करने और उन पर विजय प्राप्त करने का अवसर देता है। विपत्तियां हमें दूसरों के प्रति करुणा और सहानुभूति विकसित करने में भी मदद करती हैं।

अंधेरे में ही तारे चमकते हैं। - मार्टिन लूथर किंग जूनियर

विपत्तियां जीवन का एक हिस्सा हैं और वास्तव में विपत्तियां हमारे ज्जीवन की वह आकस्मिक घटनाएं होती हैं जो हमारे जीवन में परेशानी और दुःख लाती हैं। विपत्तियाँ अक्सर नकारात्मक मानी जाती हैं, क्योकि इसके आगमन के साथ ही हमारे जीवन में उथल पुथल आ जाती ही यही हमारा सामान्य जीवन को ब्रेक सा लग जाता है. विपत्तियाँ अक्सर नकारात्मक मानी जाती हैं, लेकिन, यदि हम उनका सामना सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ करते हैं, तो वे हमें बेहतर इंसान बनने में मदद कर सकती हैं. हालांकि, विपत्तियाँ अक्सर नकारात्मक मानी जाती हैं, लेकिन वे हमारे जीवन में सकारात्मक भूमिका भी निभा सकती हैं। 

सच तो है है कि यह हमारे जीवन में आने वाली विपत्तियां हीं होती है जो हमारे साहस और धैर्य और दूसरों की मदद करने की भावना का अहसास दिलाती है. विपत्तियां के केवल हमें यह बताती है कि हम किस मिट्टी के बने हैं बल्कि यह हमें समस्याओं को सुलझाने की क्षमता और जीवन के मूल्यों को समझने की क्षमता भी विकसित करने में मदद करता है. 
"जो तुम्हें नहीं मारता वो तुम्हें मजबूत बनाता है।" - फ्रेडरिक नीत्शे

आपदा या विपरीत परिस्थितियों में माध्यम से नेचर या प्रकृति भी हमारी परीक्षा लेती है..... जीवन में जिसको जितना आगे जाना होता है उसके  रास्ते में प्रकृति उतना ही शूल और  कांटे बिछा के रखती है....... 
अगर आप उन कांटों के डर से वापस लौट जाएंगे तो आपकी यात्रा वहीँ  जायेगी....लेकिन याद रखें जिसे जीवन में जितना आगे जाना होता है उसे प्रकृति अपनी ओर से उतना ही ऊर्जा प्रदान कर उसे सकारात्मक ऊर्जाओं से पूर्ण कर भेजती है ताकि वे लोग लाइफ में मिलने वाले तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद वह अपने सफलता के कीर्तिमान स्थापित करते हैं.


विपत्तियों से निकलने के लिए सबसे जरुरी 

विपत्तियों से निबटना यह सच है की आसान नहीं होता लेकिन इंसान अगर ठान ले तो यह इतना मुश्किल भी नहीं होती. विपत्तियों का आना तो अपने हाथ में नहीं होती लेकिन आपकी मानसिक स्थिति, आपकी सोच और आपकी सकारात्मक सोच अवश्य ही इससे बाहर निकलने में मदद कर सकती है. विपत्तियों से निकलने के लिए सबसे जरुरी है कि सकारात्मक रहें। मुश्किल परिस्थितियों में भी सकारात्मक रहने की कोशिश करें। इससे आपको अपने लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करने और आगे बढ़ने में मदद मिलेगी। अपने परिवार, दोस्तों और समुदाय से मदद मांगने से न डरें। दूसरों की मदद से आप मुश्किल समय में बेहतर तरीके से निपट पाएंगे। अपने अनुभव से सीखें। विपत्तियों से सीखने से आपको भविष्य में बेहतर तरीके से तैयार रहने में मदद मिलेगी।
"हर मुसीबत अपने साथ एक उपहार लाती है, बस हमें उसे ढूंढना होता है।" - चीनी कहावत

आपदा में भी अवसर 

सच्चाई तो यह है कि इस आपदा में भी हमें अवसर की तलाश करनी होती है क्योंकि आपदा या विपरीत परिस्थितियां हमारे लिए एक अवश्यंभावी प्रहार  होती है जो हमारे वश में नहीं हो सकते.
क्या आपदा या बुरा समय हमसे पूछ कर आती है, नहीं ना. आपदा का आना हमारे लिए नियति है लेकिन यह हमारी सूझ- बुझ और इच्छाशक्ति होती है कि  हम  आगे टूट जाते हैं या उस आपदा में भी अवसर तलाश कर उससे निकलने का प्रयास करते हैं. 
"विपत्तियों से निपटने का सबसे अच्छा तरीका है कि हम उनका सामना करें।" - अल्बर्ट आइंस्टीन

अगर आप देखेंगे तो पिछले कुछ सालों से कोविड-19 नामक एक नए आपदा ने पूरी दुनिया को अस्त-व्यस्त करने के साथ ही कई देशों के विकास दर को न जाने कई साल  पीछे कर दिया है. कितने जानों को असामायिक काल के ग्रास में जाने को मजबूर होना पड़ा और कई परिवार तो छिन्न-भिन्न हो गए.
यह कहानी काफी लम्बी हो सकती है, न केवल हिंदुस्तान बल्कि दुनिया के सभी देशों में आपदा की स्थिति बन  चुकी थी  तो क्या हमें इस आपदा के भरोसे खुद को छोड़ देनी चाहिए थी ? 

आप अगर देखेंगे तो इस दौरान कई लोगों के व्यापार को जहां बंद तक करना पड़ा, लेकिन कई ऐसे लोग हैं जिन्हे इस आपदा ने भी रोगजार के अवसर प्रदान किये. वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन पढ़ाई व्ययस्था, ऑनलाइन ट्यूशन  जैसे कई व्यवसाय थे जो कोरोना के कारण आज फल-फूल  रहे हैं. 
"विपत्तियां जीवन का हिस्सा हैं। उनसे बचना असंभव है। लेकिन हम उनसे कैसे निपटते हैं, यह हमारे ऊपर निर्भर करता है।" - डेल कार्नेगी

 याद रखें दोस्तों वह चाहे कोई भी विपरीत परिस्थिति  या आपदा हो आपको इस से निकलना होगा इसके लिए सबसे जरूरी यह है कि हमारे अंदर यह जिजीविषा पैदा करनी होगी हम इसे झेल  सकते हैं....

इस आपदा को एक अवसर  के रूप में देखकर जो इसका उपयोग कर लेगा लाइफ में आगे जाएगा इसमें कोई संदेह नहीं है. इसके लिए जरूरी है कि आप अपने एटीट्यूड और अपने माइंडसेट को बदलें क्योंकि यह आपका माइंडसेट  और एटीट्यूड ही है जो आपको इस आपदा में अवसर तलाश करने में मदद करेगा...

 याद रखें दोस्तों आपको इस आपदा से निकलने के लिए अपने अंदर साहस का संचार खुद करना होगा आपको अपने आसपास निराशावादी या नकारात्मक सोच के लोगों से खुद को दूर रखना होगा और इसके लिए यह जरूरी है कि सबसे पहले अपने अंदर सकारात्मक और पॉजिटिव ऊर्जा को कम नहीं होने दिया जाए.

"विपत्तियां हमें मजबूत बनाती हैं।" - नेल्सन मंडेला

याद रखें आपके जीवन में आपदाएं और विपत्तियां या  विपरीत परिस्थिति सभी परेशानियों के साथ ही आपके लिए एक नया सवेरा के रूप में  कई सारे अवसर भी लेकर आती है.

लेकिन यह आप पर निर्भर करता है कि आप इस आपदा में अवसर की तलाश कर उसे पाने के लिए होम कर देते हैं या एक निराशावादी की तरह बस इस आपदा के भरोसे खुद को छोड़ देते हैं.







नजरिया जीने का: स्वयं पर विश्वास करना सीखें, आपके भीतर की क्षमता, सामने की समस्या से ज्यादा ताकतवर है

नजरिया जीने का:  प्रकृति ने हम सभी को अपने आप में बहुत ज्यादा ताकत, सूझबूझ और अपार संभावनाएं दी हैं। विश्वास करें, प्रत्येक व्यक्ति के अंदर ऊर्जा का भण्डार छुपा है और हमें सिर्फ इस पर विश्वास करना है कि  हमारे अंदर की क्षमता और शक्ति के सामने समस्या और बाधा कुछ भी नहीं है। नजरिया जीने का एक ऐसा हीं मंच है जो आपके अंदर की आग को जलाने की कोशिश करती है जो क्योंकि आपके अंदर की आग सबसे बड़ी चीज है। 

एक बार अगर हम खुद पर और अपनी अंदर छुपे सामर्थ्य पर विश्वास करना अगर सीख लें तो फिर हम सब कुछ कर सकते हैं। इस लेख के माध्यम से आप सीखेंगे कि कैसे अपनी क्षमता और ऊर्जा पर विश्वास किया जाए ताकि हम जीवन के रास्ते में आने वाली बाधाओं को दूर कर सकें।

अपनी क्षमता पर विश्वास करना स्वयं से बात करने की प्रक्रिया है जो आत्म संदेह को दूर करने और आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए आवश्यक शर्त है।

 हम पड़ाव को समझे मंज़िल

 लक्ष्य हुआ आंखों से ओझल

 वतर्मान के मोहजाल में-

आने वाला कल न भुलाएँ।

 आओ फिर से दिया जलाएँ।

-अटल बिहारी वाजपेयी


हम समस्याओं और बाधाओं को और  भी विकराल बनाकर देखने लगते है जो  खुद को कम  आंकने की प्रक्रिआ का आरम्भ हो जाता है, जबकि जरुरी यह है कि उसके बदले में, अपने भीतर छिपी संभावनाओं और संभावनाओं को देखने की पूरी कोशिश करनी चाहिए  जो इन बाधाओं को कुचलने में  आपका व्यापक हथियार हैं।

Inspiring  Thoughts: आपकी प्रसन्ता में छिपा  है जीवन की सफलता का रहस्य.... 

इस संदर्भ में रॉय टी. बेनेट के सुंदर उद्धरण को याद रखें "अपने आप पर विश्वास करें। आप जितना सोचते हैं उससे कहीं अधिक बहादुर हैं, आप जितना जानते हैं उससे कहीं अधिक प्रतिभाशाली हैं, और आप जितना सोचते हैं उससे कहीं अधिक सक्षम हैं। ”

धैर्य और आत्मविश्वास का नहीं छोड़े दामन.... मिलेगी विपरीत परिस्थितियों में भी सफलता

कहने की जरूरत नहीं है कि मनुष्य इस अजीब सच से पीड़ित है कि वह जानता तो सही है लेकिन करता गलत है.... आप खुद पर और अपने  आस  पास के लोगों पर नजर डालें तो शायद यही पाएंगे....  और इसलिए हम बाधाओं से पहले अपनी क्षमता को अनदेखा कर देते हैं।

हमें अनंत क्षमता प्रदान करने में प्रकृति ने हमारे बीच कोई पक्षपात नहीं किया है। हम सभी के पास ऊर्जा और संभावनाओं के साथ महान क्षमता है और यह केवल हम ही हैं जो हमारी क्षमता और ऊर्जा की सीमा निर्धारित करते हैं। हां, बाधाओं और कठिनाइयों का महिमामंडन करना और कुछ नहीं बल्कि हमारी क्षमता की सीमा तय करना है।

मुसीबतों को देख कर क्यों डरता है,

तू लड़ने से क्यों पीछे हटता है।

किसने तुमको रोका है,

तुम्ही ने तुम को रोका है।

भर साहस और दम, बढ़ा कदम,

अब इससे अच्छा कोई न मौका है।

-नरेंद्र वर्मा


Inspiring Thoughts: साहस को अपनाएँ... सफलता की कहानी खुद लिखें...


इस तथ्य पर विश्वास करें कि जैसे ही आप अपने मन में यह तथ्य पैदा करते हैं कि आपके पास किसी समस्या का समाधान है या आप किसी भी कठिन परिस्थिति को संभाल सकते हैं, न केवल आपका दिमाग बल्कि पर्यावरण और प्रकृति भी आपके समाधान के तरीके प्रदान करना शुरू कर देती है। बस आपको किसी समस्या के समाधान के बारे में सोचना है, आपको समस्या का समाधान अपने संसाधनों के भीतर और निश्चित समय सीमा के साथ मिल जाएगा।

Inspiring Thoughts: डिप्रेशन और फ़्रस्ट्रेशन पर काबू पाने के लिए पाएं नेगेटिव माइंडसेट से छुटकारा