- प्रेम की शक्ति नफ़रत की ताक़त से हज़ारों गुना प्रभावशाली होती है। -अज्ञात
- संसार को प्रेम से अपने अधीन किया जा सकता है युद्ध से नहीं-हीगेल
- प्रेम का नाता संसार के सभी संबंधो से पवित्र और श्रेष्ठ है। -प्रेमचंद
- जो सचमुच प्रेम करता है उस मनुष्य का ह्रदय धरती पर साक्षात स्वर्ग है। ईश्वर उस मनुष्य में बसता है क्योंकि ईश्वर प्रेम है। -लेमेन्नाइस
- जिस प्यार में पागलपन ना हो, वो प्यार प्यार नहीं है। -अज्ञात
- हमारे अन्तर में यदि प्रेम न जाग्रत हो, तो विश्व हमारे लिए कारागार ही है। -रविंद्रनाथ ठाकुर
- प्रेम में पवित्रता का वास होता है, वासना का नहीं/ प्रेम का अतिनिकृष्ट रूप वासना है. स्वामी अवधेशानंद
- प्रेम के रस में डूबो तो ऐसे कि जब सुबह तुम जागो तो प्रेम का एक और दिन पा जाने का अहसान मानो। और फिर रात में जब तुम सोने जाओ तो तुम्हारे दिल में अपने प्रियतम के लिए प्रार्थना हो और होठों पर उसकी खुशी के लिए गीत। -ख़लील जिब्रान
- प्रेम के पथ पर कायर व्यक्ति नहीं चल सकते हैं अज्ञात
- पुरुषों का प्रेम आंखों से और महिलाओं का प्रेम कानों से शुरू होता है। -अज्ञात
- प्रेम और परमात्मा में कोई अंतर नहीं है- संतवाणी
- प्रेम के स्पर्श से हर व्यक्ति कवि बन जाता है। -प्लेटो
- प्रेम असीम विश्वास है, असीम धैर्य है और असीम बल है। -प्रेमचंद
- एक प्रेम से भरा हृदय सभी ज्ञान का प्रारंभ है। -थॉमस कार्लाइल
नजरिया जीने का: एक प्रेम और कितने अफ़साने- पढ़ें प्रेम की भावना को व्यक्त करते इन नामचीन हस्तियों के कोट्स
नजरिया जीने का: कठिन परिस्थितियों में धैर्य और बुद्धि के महत्व को समर्पित संस्कृत सुभाषितम @ प्रधान मंत्री मोदी का मोटिवेशन
आज प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया है जिसमें कठिन परिस्थितियों में धैर्य रखकर और बुद्धि से विचार करने के महत्व पर प्रकाश डाला गया है।
श्लोक का अर्थ स्पष्ट है कि जब मनुष्य कठिनाई (दुर्भाग्य), आर्थिक संकट, भय या जीवन के अंतिम समय में भी अपनी बुद्धि से सोच-विचार करता है, तो धैर्यवान व्यक्ति कभी निराश नहीं होता।
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के युवा जो भी ठान लेते हैं, उसे हासिल कर लेते हैं। श्री मोदी ने कहा कि हमारी युवा शक्ति ही देश को तीव्र विकास के पथ पर अग्रसर कर रही है।
प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पर लिखा:
"देश के युवा जो ठान लेते हैं, उसे करके दिखाते हैं। यह हमारी युवाशक्ति का ही सामर्थ्य है कि हमारा राष्ट्र आज तेज गति से विकास के पथ पर अग्रसर है।
व्यसने वाऽर्थकृच्छ्रे वा भये वा जीवनान्तके।
विमृशन् वै स्वया बुद्ध्या धृतिमान् नावसीदति॥"
विपत्ति, आर्थिक संकट या प्राणों के संकट के समय, शांत रहने और समझदारी से सोचने वाला व्यक्ति कभी विचलित नहीं होता। कठिन परिस्थितियों में, शांत और सोच-समझकर लिए गए निर्णय उसे दुख और हानि से बचाते हैं।
देश के युवा जो ठान लेते हैं, उसे करके दिखाते हैं। यह हमारी युवाशक्ति का ही सामर्थ्य है कि हमारा राष्ट्र आज तेज गति से विकास के पथ पर अग्रसर है।
— Narendra Modi (@narendramodi) April 10, 2026
व्यसने वाऽर्थकृच्छ्रे वा भये वा जीवनान्तके।
विमृशन् वै स्वया बुद्ध्या धृतिमान् नावसीदति॥ pic.twitter.com/0l87CoFHHz
प्रधानमंत्री के श्लोक को अगर आप गहराई में देखेंगे तो पाएंगे कि आज के जीवन में इसका व्यापक प्रभाव प्रभाव है खासकर इन स्थितियों में
परीक्षा का तनाव हो → शांत दिमाग से सोचें
पैसे की परेशानी हो → योजना बनाएं
डर लगे → वास्तविकता को समझें
जीवन में कठिन समय हो → धैर्य बनाए रखें
क्यू से लेकर क्यूआर कोड तक: यूपीआई, आरटीजीएस, आईएमपीएस -जाने भारत की भुगतान क्रांति के बारे में
भारत की वित्तीय यात्रा सदियों में विकसित हुई है—वस्तु विनिमय प्रणाली और कौड़ी सीप से लेकर सिक्कों, कागज़ी मुद्रा और चेक तक। अपने आधुनिक इतिहास के अधिकांश समय, लेन-देन का प्रमुख माध्यम नकदी बना रहा। हालांकि चेक और डिमांड ड्राफ्ट ने भुगतान को औपचारिक रूप दिया, वे धीमे थे और केवल सीमित वर्ग तक ही सुलभ थे। बैंकिंग ढांचा मुख्यतः शहरी क्षेत्रों तक सीमित थी, जिससे ग्रामीण और दूरदराज़ की आबादी वंचित रह गई।
2000 के शुरुआती दशक ने भुगतान प्रणाली में डिजिटल परिवर्तन की शुरुआत की। भारतीय रिजर्व बैंक ने 2004 में रियल-टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (आरटीजीएस) और 2010 में इमीडिएट पेमेंट सर्विस (आईएमपीएस) जैसी प्रणालियाँ शुरू कीं, जिससे तेज़ और चौबीस घंटे धन का हस्तांतरण संभव हुआ। ये महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ थीं, लेकिन इनकी पहुँच मुख्यतः उन्हीं लोगों तक सीमित रही जो पहले से ही बैंकिंग प्रणाली का हिस्सा थे, और अभी भी अनेक लोगों के लिए औपचारिक वित्तीय सेवाओं की पहुंच सीमित रही।
भारत की एक बड़ी आबादी औपचारिक वित्तीय प्रणाली से बाहर रही—उनकी ऋण, बीमा या सुरक्षित बचत जैसी सुविधाओं तक पहुंच नहीं थी। एक स्केलेबल, समावेशी और रियल-टाइम डिजिटल ढांचे की कमी का मतलब था कि आर्थिक विकास के लाभ सभी तक पूरी तरह नहीं पहुंच पा रहे थे। एक परिवर्तनकारी बदलाव की आवश्यकता स्पष्ट थी, और इसी आवश्यकता ने भारत की डिजिटल भुगतान क्रांति की नींव रखी।
जेएएम ट्रिनिटी: डिजिटल बैंकिंग के लिए एक संरचनात्मक बदलाव
भारत की डिजिटल भुगतान क्रांति एक मजबूत आधारभूत संरचना पर टिकी है, जिसमें तीन प्रमुख स्तंभ शामिल हैं—प्रधान मंत्री जन-धन योजना (जन धन), आधार, और मोबाइल कनेक्टिविटी। इन्हें सामूहिक रूप से जेएएम ट्रिनिटी कहा जाता है। प्रत्येक स्तंभ का अपना अलग उद्देश्य है, लेकिन साथ मिलकर इन्होंने लीकेज को कम करके, औपचारिक बैंकिंग में भरोसा बढ़ाकर, और नागरिकों को डिजिटल सेवाओं से जुड़ने के लिए तैयार करके वित्तीय इकोसिस्टम को मजबूत किया है।
“जेएएम ट्रिनिटी ने हमारी बैंकिंग प्रणाली को पूरी तरह एक नए स्तर पर पहुँचा दिया है।”
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण
प्रधान मंत्री जन-धन योजना ने बड़े पैमाने पर शून्य-बैलेंस खाते खुलवाने के माध्यम से लाखों लोगों को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा है, जिससे सबसे वंचित वर्ग भी वित्तीय रूप से जुड़ सका है। आधार ने एक विश्वसनीय डिजिटल पहचान प्रदान करके इस बुनियाद को और मजबूत किया है, जिससे बेरोकटोक सेवाएं प्रदान करने का सटीक लक्ष्य और निर्बाध वितरण संभव हुआ है। इन दोनों के पूरक के रूप में, मोबाइल कनेक्टिविटी और इंटरनेट पहुंच के तेज़ी से विस्तार ने नागरिकों को संचार, प्रमाणीकरण और लेन-देन के लिए एक सुविधाजनक और रियल-टाइम माध्यम प्रदान किया है।
इस एकीकृत ढांचे को प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) प्रणाली के माध्यम से पूर्ण रूप मिला, जिसने सरकारी लाभों को सीधे बैंक खातों में पहुँचाने की प्रक्रिया को सरल बना दिया है। बिचौलियों को कम करके और पारदर्शिता बढ़ाकर, डीबीटी ने दक्षता में सुधार किया है और साथ ही डिजिटल प्रणालियों में विश्वास भी मजबूत किया है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि यह परिवर्तन केवल पहुंच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने सहभागिता को भी सक्षम बनाया है। जैसे-जैसे नागरिक डीबीटी से जुड़े, वे डिजिटल वित्तीय लेन-देन के प्रति अधिक परिचित होते गए, जिससे यूनीफाइट पेमेन्ट्स इंटरफेस (यूपीआई) जैसे प्लेटफॉर्म व्यापक रूप से अपनाने का मार्ग प्रशस्त हुआ।
यूपीआई : एक क्रांतिकारी नवाचार
2016 में, भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम ने यूनीफाइट पेमेन्ट्स इंटरफेस (यूपीआई) की शुरूआत की—एक ऐसी प्रणाली जिसने भारत में पैसे के लेन-देन के तरीके को मूल रूप से सरल बना दिया। अपने मूल में, यूपीआई किसी भी बैंक खाते को एक वर्चुअल पेमेंट एड्रेस के माध्यम से दूसरे खाते से जोड़ने की सुविधा देता है, जिससे विस्तृत बैंकिंग जानकारी साझा करने की आवश्यकता समाप्त हो जाती है।
यूपीआई का विचार अपनी विलक्षण था। अब न तो खाता नंबर याद रखने की जरूरत है और न ही जटिल विवरण भरने की। यह प्रणाली खाता संख्या और आईएफएससी कोड जैसे जटिल इनपुट को एक आसान इंटरफ़ेस से बदल देती है। उपयोगकर्ताओं को केवल एक मोबाइल नंबर, एक यूपीआई आईडी और सुरक्षित प्रमाणीकरण की आवश्यकता होती है, जिससे वे तुरंत धन हस्तांतरण कर सकते हैं। लेन-देन रियल-टाइम में होते हैं, 24×7 उपलब्ध रहते हैं, और विभिन्न बैंकों व ऐप्स के बीच सहज रूप से काम करते हैं।
यह पारस्परिकता ही यूपीआई के तेज़ विस्तार का मुख्य कारण रही है। 2021 में 216 बैंकों से बढ़कर जनवरी 2026 तक 691 बैंकों तक पहुँचते हुए, यह एक एकीकृत भुगतान संरचना बन गई है, जहाँ उपयोगकर्ता अपने किसी भी बैंक या प्लेटफॉर्म से आसानी से लेन-देन कर सकते हैं। इसके साथ ही, इसकी कम लागत वाली संरचना ने व्यक्तियों और व्यापारियों दोनों के लिए बाधाओं को कम किया है और बैंकों व फिनटेक कंपनियों के बीच नवाचार को बढ़ावा दिया है।
जैसे-जैसे यूपीआई का विस्तार हुआ, इसका प्रभाव केवल भुगतान की सुविधा तक सीमित नहीं रहा। इसने व्यक्तियों, छोटे व्यवसायों और असंगठित क्षेत्र के कामगारों की वित्तीय प्रणाली में भागीदारी के तरीके को बदलना शुरू कर दिया। डिजिटल लेन-देन अधिक सुलभ, विश्वसनीय और विभिन्न क्षेत्रों व आय वर्गों में व्यापक रूप से अपनाए जाने लगे।
यूपीआई के आँकड़े: पैमाना, गति और वैश्विक नेतृत्व
जनवरी 2026 में ही किए गए लेन-देन-21.70 बिलियन
जनवरी 2026 में संसाधित कुल मूल्य- 28.33 लाख करोड़ रुपये
भारत में सभी खुदरा डिजिटल लेन-देन में हिस्सा- 81 प्रतिशत
वैश्विक रियल-टाइम भुगतान लेन-देन में भारत की हिस्सेदारी- 49 प्रतिशत
यूपीआई: संख्या के आधार पर दुनिया की सबसे बड़ी रियल-टाइम भुगतान प्रणाली
दुनिया के अग्रणी भुगतान इकोसिस्टम को बनाने में लगा समय-10 वर्ष से कम समय में
सहूलियत के अलावा: वित्तीय पहुंच का विस्तार
यूपीआई केवल भुगतान को सरल बनाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने वित्तीय प्रणाली में भागीदारी के स्वरूप को भी बदल दिया है। त्वरित और कम लागत वाले लेन-देन को सक्षम बनाकर, इसने नकदी पर निर्भरता को कम किया है, दक्षता बढ़ाई है और लाखों लोगों के लिए औपचारिक वित्तीय सेवाओं तक पहुंच खोली है। छोटे व्यापारियों और असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए यह बदलाव विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे ऋण, बीमा और बचत के नए अवसर उत्पन्न हुए हैं।
इसकी असली कहानी लेन-देन की संख्या में नहीं, बल्कि यह है कि लेन-देन कौन कर रहा है। ऑटो-रिक्शा चालक अब क्यूआर कोड के माध्यम से भुगतान स्वीकार कर रहे हैं। गांवों की मंडियों में लेन-देन तुरंत निपटाए जा रहे हैं। सड़क किनारे विक्रेताओं को अब छुट्टे पैसों की चिंता नहीं करनी पड़ती। एक घरेलू कामगार भी एक साधारण स्मार्टफोन की मदद से कुछ ही सेकंड में राज्यों के बीच पैसे भेज सकता है। इस प्रणाली में शहरी और ग्रामीण, औपचारिक और अनौपचारिक के बीच की खाई धीरे-धीरे खत्म हो रही है—जो वित्तीय समावेशन की दिशा में एक निर्णायक बदलाव को दर्शाती है।
साथ ही यूपीआई अब एक व्यापक वित्तीय प्लेटफ़ॉर्म के रूप में विकसित हो रहा है। यूपीआई लाइट तेज़ और छोटे मूल्य के भुगतानों को आसान बनाता है, जबकि यूपीआई ऑटो पे उपयोगिता बिलों और सब्सक्रिप्शन जैसे आवर्ती खर्चों को सरल और स्वचालित करता है। यूपीआई पर क्रेडिट की सुविधा इसके दायरे को और आगे बढ़ाती है, जिससे पूर्व-स्वीकृत क्रेडिट लाइनों तक पहुंच संभव होती है। इस मजबूत अवसंरचना के आधार पर, एनबीएफसी और फिनटेक कंपनियाँ ऋण प्रदान कर रही हैं, पुनर्भुगतान को सक्षम बना रही हैं और जरूरतों के अनुरूप वित्तीय उत्पाद पेश कर रही हैं—जिससे पूरे देश में औपचारिक वित्तीय सेवाओं की पहुंच लगातार बढ़ रही है।
डिजिटल भुगतान: पहुंच, दक्षता, सुरक्षा और विश्वास बढ़ाना
इस विस्तारित इकोसिस्टम के आधार पर, यूपीआई अब देश की रोज़मर्रा की आर्थिक संरचना का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। जिसे कभी सिर्फ सहूलियत समझा जाता था, वह अब एक विश्वसनीय प्रणाली बन गया है, जो व्यक्तियों, व्यवसायों और वित्तीय संस्थानों—सभी की मदद करता है।
उपयोगकर्ताओं के लिए, इसका अनुभव सरलता और विश्वास से परिभाषित होता है। लेन-देन कभी भी, कहीं से भी, एक ही एप्लिकेशन के माध्यम से किए जा सकते हैं, जो कई बैंक खातों से जुड़ा होता है। संवेदनशील बैंकिंग जानकारी साझा करने की आवश्यकता नहीं होती, और अंतर्निहित सुरक्षा उपाय यह सुनिश्चित करते हैं कि भुगतान सुरक्षित रहें। ऐप्स के भीतर उपलब्ध सहायता सुविधाएँ शिकायत निवारण को भी आसान बनाती हैं, जिससे यह प्रणाली पहली बार उपयोग करने वालों के लिए भी सुलभ हो जाती है।
डिजिटल भुगतान में विश्वास को और मजबूत करते हुए, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने 1 अप्रैल 2026 से डिजिटल भुगतान लेन-देन के लिए उन्नत प्रमाणीकरण तंत्र लागू किए हैं। दो-स्तरीय प्रमाणीकरण का यह प्रावधान सुनिश्चित करता है कि हर लेन-देन कई स्तरों पर सत्यापित हो—जैसे पिन, बायोमेट्रिक्स या सुरक्षित टोकन के साथ ओटीपी। इससे धोखाधड़ी के जोखिम में उल्लेखनीय कमी आई है और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भरोसा और मजबूत हुआ है।
व्यापारियों के लिए, यह नकदी संभालने की आवश्यकता के बिना तेज़ और कुशल तरीके से भुगतान प्राप्त करने का माध्यम प्रदान करता है। इससे व्यवसायों को व्यापक ग्राहक आधार तक पहुंचने में मदद मिलती है, खासकर उन ग्राहकों तक जो कार्ड या नकद के बजाय मोबाइल-आधारित भुगतान को प्राथमिकता देते हैं। चाहे छोटे दुकानों में हो, सड़क बाज़ारों में या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर—लेन-देन तुरंत पूरे होते हैं, जिससे देरी और नकदी प्रबंधन या रिटर्न जैसी परिचालन चुनौतियाँ कम होती हैं।
बैंकों और वित्तीय संस्थानों के लिए, यह मौजूदा प्रणालियों का उपयोग करते हुए सुरक्षित और रियल-टाइम लेन-देन को सक्षम बनाकर सेवा वितरण को बेहतर बनाता है। यह बड़े पैमाने पर व्यक्ति-से-व्यक्ति और व्यापारी भुगतानों का समर्थन करता है, साथ ही मजबूत सुरक्षा उपायों को बनाए रखते हुए दक्षता में सुधार करता है और औपचारिक वित्तीय सेवाओं तक पहुंच का विस्तार करता है।
भारत का नवाचार: विश्व पर प्रभाव बनाता हुआ
भारत का डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम न केवल घरेलू आवश्यकताओं को पूरा करने में सफल रहा है, बल्कि वैश्विक स्तर पर एक आदर्श मॉडल के रूप में भी उभरा है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक जैसे संस्थानों ने इसकी व्यापकता, दक्षता और समावेशिता को सराहा है।
वैश्विक नेताओं, जैसे फ्रांस के राष्ट्रपति श्री इमैनुएल मैक्रों ने भी भारत की इस उपलब्धि पर गौर किया है कि यूपीआई के माध्यम से हर महीने 20 अरब से अधिक लेन-देन किए जाते हैं—जो किसी भी अन्य रियल-टाइम भुगतान प्रणाली के मुकाबले बेजोड़ है।
यूपीआई अब राष्ट्रीय सीमाओं से आगे बढ़ चुका है और संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, भुटान, नेपाल, श्रीलंका, फ्रांस, मॉरीशस और कतर सहित कई देशों में चल रहा है या उनकी भुगतान प्रणालियों से जुड़ा हुआ है। यह बढ़ता हुआ अंतरराष्ट्रीय विस्तार सीमा-पार लेन-देन को आसान बना रहा है, रकम भेजने में मदद कर रहा है और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देते हुए वैश्विक फिनटेक परिदृश्य में भारत की भूमिका को और मजबूत कर रहा है।
यूपीआई : भारत में वित्तीय लेन-देन के लिए एक वरदान
यूपीआई ने वित्तीय रूप से जुड़े और वंचित वर्गों के बीच की खाई को समाप्त कर दिया है। आज ग्रामीण और अर्ध-शहरी भारत भी महानगरों की तरह ही तेज़ी और सहजता से लेन-देन कर रहा है।
एक स्वदेशी प्रणाली, जिसे एक दशक से भी कम समय में विकसित किया गया, आज विश्व में अग्रणी बन चुकी है। जो पहल कभी बैंकिंग से वंचित लोगों को जोड़ने के लिए शुरू हुई थी, वह अब रियल-टाइम भुगतान के लिए वैश्विक मानक बन गई है। कतारों से क्यूआर कोड तक की यह यात्रा समावेशी नवाचार की शक्ति को दर्शाती है।
यूपीआई केवल एक भुगतान प्रणाली नहीं है; यह लोगों का मंच है। इसने वित्तीय लेन-देन को तेज़, सरल, पारदर्शी और वास्तव में समावेशी बना दिया है। ऐसा करते हुए, इसने न केवल यह बदला है कि भारत कैसे भुगतान कर रहा है, बल्कि यह भी कि भारत कैसे आगे बढ़ रहा है। (Source PIB)
कोणार्क सूर्य मंदिर: जानें इतिहास, महत्व और भी खास बातें
कोणार्क सूर्य मंदिर न सिर्फ एक धार्मिक स्थल है बल्कि इंजीनियरिंग और कला का अद्भुत नमूना भी है। मंदिर का आकार एक विशाल रथ जैसा है, जिसमें जटिल नक्काशीदार पत्थर के पहिए, स्तंभ और दीवारें हैं।
मंदिर का निर्माण पूर्वी गंग वंश के राजा नरसिंहदेव प्रथम (1238–1264 ई.) ने करवाया था।
इस मंदिर को एक विशाल रथ के रूप में डिजाइन किया गया है, जिसमें 24 पहिए और 7 घोड़े बने हुए हैं।
ये पहिए समय की गति का प्रतीक हैं-सप्त घोड़े सप्ताह के सात दिनों का, और चौबीस पहिए दिन के चौबीस घंटे या वर्ष के बारह महीनों का प्रतिनिधित्व करते हैं
यह मंदिर यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल में शामिल है।
कोणार्क, पुरी, ओडिशा में स्थित है तथा यह ओडिशा के “स्वर्ण त्रिभुज” (भुवनेश्वर–पुरी–कोणार्क) का हिस्सा है और हर वर्ष फरवरी में आयोजित चंद्रभागा मेला तथा कोणार्क नृत्य महोत्सव के दौरान हजारों पर्यटकों को आकर्षित करता है.
यूरोपीय नाविक इस मंदिर को काला पैगोडा भी कहते थे। यह मंदिर चंद्रभागा नदी के मुहाने पर बना है। कोणार्क मंदिर अपनी यथार्थवादी कला के लिए विश्व प्रसिद्ध है।
पूरा ढांचा लाल बलुआ पत्थर और काले ग्रेनाइट से बना है.ऐसी मान्यता है की यह सूर्य के उगने की दिशा की ओर उन्मुख है ताकि पहली किरण गर्भगृह को स्पर्श करे
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इस उद्देश्य से लोगों को वेव्स ओटीटी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध पत्रिकाओं और ई-पुस्तकों की विस्तृत श्रृंखला का पता लगाने और इस पहल का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
कल्पक्कम: फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने अपनी प्रथम क्रिटिकैलिटी प्राप्त किया, जानें क्या होता है क्रिटिकैलिटी
इस उपलब्धि के साथ, भारत आधिकारिक रूप से अपने तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के दूसरे चरण में प्रवेश कर गया है, जिसकी परिकल्पना सबसे पहले भारत के परमाणु कार्यक्रम के वास्तुकार डॉ. होमी जहाँगीर भाभा ने की थी। यह कीर्तिमान वैश्विक स्तर पर भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। पूर्ण रूप से संचालन में आने के बाद, भारत रूस के बाद दुनिया का दूसरा देश बन जाएगा जो एक वाणिज्यिक फास्ट ब्रीडर रिएक्टर का संचालन करेगा।
यह उपलब्धि परमाणु ऊर्जा विभाग के नेतृत्व में किए जा रहे दशकों के वैज्ञानिक प्रयासों का प्रमाण है। यह भारत की स्वच्छ ऊर्जा यात्रा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है, जो विश्वसनीय, निम्न-कार्बन ऊर्जा के प्रति देश की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करता है। इसके अतिरिक्त, यह भारत को वर्ष 2070 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन प्राप्त करने के अपने लक्ष्य के और निकट लाता है, जिसकी घोषणा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा की गई थी।
क्रिटिकैलिटी क्या है?
क्रिटिकैलिटी वह बिंदु है जिस पर एक सतत् और नियंत्रित नाभिकीय विखंडन श्रृंखला अभिक्रिया प्रारंभ होती है। इस अवस्था में विखंडन से उत्पन्न न्यूट्रॉन की संख्या अवशोषण और रिसाव के चलते खोए गए न्यूट्रॉनों के बराबर होती है, जिससे स्थिर ऊर्जा उत्पादन प्राप्त होता है। यह निर्माण चरण से संचालन चरण में परिवर्तन को दर्शाता है और ऊष्मा तथा अंततः विद्युत उत्पादन की दिशा में पहला आवश्यक कदम है।
भारत का वर्तमान परमाणु ऊर्जा परिदृश्य: Five Facts
भारत का परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम देश के विद्युत मिश्रण में लगातार उपस्थिति बनाए हुए है। यह अब एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है, जहाँ आने वाले वर्षों के लिए उल्लेखनीय विस्तार की योजना बनाई गई है।
स्थापित क्षमता:
भारत की वर्तमान परमाणु क्षमता 8.78 गीगावाट (जीडब्ल्यू) है। वर्ष 2024–25 में, देश भर में परमाणु ऊर्जा संयंत्रों ने 56,681 मिलियन यूनिट विद्युत का उत्पादन किया।
स्थिर योगदान:
परमाणु ऊर्जा ने भारत के कुल विद्युत उत्पादन का लगभग 3% हिस्सा लगातार प्रदान किया है। वर्ष 2024–25 में इसका हिस्सा 3.1% रहा।
नियोजित विस्तार:
आने वाले वर्षों में भारत की परमाणु क्षमता लगभग 3 गुना बढ़ने वाली है। स्वदेशी 700 मेगावाट (एमडब्ल्यू) रिएक्टरों तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग से विकसित किए जा रहे 1,000 मेगावाट रिएक्टरों के साथ, स्थापित क्षमता वर्ष 2031–32 तक 22.38 गीगावाट (जीडब्ल्यू) तक पहुँचने का अनुमान है।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग:
भारत ने शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए नागरिक परमाणु सहयोग पर 18 देशों के साथ अंतर-सरकारी समझौतों (आईजीए) पर हस्ताक्षर किए हैं, जो भारत के परमाणु कार्यक्रम पर बढ़ते वैश्विक विश्वास को दर्शाता है।
बुद्धिमान व्यक्ति के गुणों को समर्पित प्रधानमंत्री का सुभाषितम: जानें क्या है विपरीत परिस्थितियों में बिना विचलित हुए सफलता का मार्ग
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने प्रधानमंत्री मुद्रा योजना की 11वीं वर्षगांठ पर इसकी सफलता की सराहना करते हुए एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया, जिसमें एक बुद्धिमान व्यक्ति के गुणों पर प्रकाश डाला गया है.
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज कहा कि ठीक 11-वर्ष पहले शुरू की गई प्रधानमंत्री मुद्रा योजना युवाओं के स्वरोजगार में बहुत मददगार साबित हुई है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इस योजना की सफलता यह दर्शाती है कि जब किसी व्यक्ति को सही अवसर मिलते हैं, तो वह न सिर्फ आत्मनिर्भर बन सकता है बल्कि राष्ट्र की प्रगति में भी योगदान दे सकता है। इस संदर्भ में, श्री मोदी ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया, जिसमें एक बुद्धिमान व्यक्ति के गुणों पर प्रकाश डाला गया है।
प्रधानमंत्री ने एक्स(X) पर लिखा:
"आज से ठीक 11 वर्ष पहले शुरू की गई प्रधानमंत्री मुद्रा योजना युवाओं के स्वरोजगार में बहुत मददगार साबित हुई है। इस योजना की सफलता बताती है कि सही अवसर मिलने पर व्यक्ति न सिर्फ आत्मनिर्भर बन सकता है, बल्कि राष्ट्र की प्रगति में भी योगदान दे सकता है।
आत्मज्ञानं समारम्भस्तितिक्षा धर्मनित्यता।
यमर्था नापकर्षन्ति स वै पण्डित उच्यते॥
#11YearsOfMUDRA"
आज से ठीक 11 वर्ष पहले शुरू की गई प्रधानमंत्री मुद्रा योजना युवाओं के स्वरोजगार में बहुत मददगार साबित हुई है। इस योजना की सफलता बताती है कि सही अवसर मिलने पर व्यक्ति न सिर्फ आत्मनिर्भर बन सकता है, बल्कि राष्ट्र की प्रगति में भी योगदान दे सकता है।
— Narendra Modi (@narendramodi) April 8, 2026
आत्मज्ञानं समारम्भस्तितिक्षा… pic.twitter.com/PD9RuD7ecI
जो व्यक्ति अपनी योग्यता से भली-भांति परिचित हो, आत्मनिर्भर होकर कल्याणकारी कार्य करने में तत्पर हो, विपरीत परिस्थितियों को धैर्यपूर्वक सहन करता हो और सदा सदाचार का पालन करता हो, जिसे लोभ अपने मार्ग से विचलित नहीं कर पाता, वही वास्तव में बुद्धिमान कहलाता है।
दिल्ली: अनधिकृत कॉलोनियों का ‘जहां है, जैसा है’ के आधार पर नियमितीकरण, ऐसे करें ऑनलाइन आवेदन
उन्होंने कहा कि इससे न केवल कानूनी स्वामित्व प्राप्त होगा बल्कि नागरिकों को एमसीडी के मानदंडों के अनुसार अपने घरों का निर्माण या पुनर्निर्माण करने में भी मदद मिलेगी।
केंद्रीय मंत्री श्री मनोहर लाल ने यह भी कहा कि ये परिवर्तनकारी कदम प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और प्रेरणा से उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में दिल्ली सुनियोजित और समावेशी शहरी विकास के एक नए चरण में प्रवेश कर रही है, जिसका उद्देश्य भविष्य के लिए तैयार शहर का निर्माण करते हुए विरासत संबंधी मुद्दों का समाधान करना है।
दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि माननीय प्रधानमंत्री ने उन परिवारों की लंबे समय से चली आ रही चिंताओं को समझा है, जो अपने घरों में रहने के बावजूद कानूनी अधिकारों से वंचित हैं। इसी संवेदनशील और दूरदर्शी दृष्टिकोण ने पीएम-उदय योजना का मार्ग प्रशस्त किया और आज 1731 अनधिकृत कॉलोनियों में से 1511 का नियमितीकरण संभव हो पाया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में अनधिकृत कॉलोनियों का नियमितीकरण आज दिल्ली के 45 लाख लोगों के जीवन में राहत, सम्मान और अधिकारों का एक नया अध्याय जोड़ता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आवेदन प्रक्रिया 24 अप्रैल से शुरू होगी। इसके लिए एक सुनियोजित समय-सीमा निर्धारित की गई है। इसके तहत 7 दिनों के भीतर जीआईएस सर्वेक्षण, 15 दिनों के भीतर आवेदन में मौजूद कमियों का निवारण और 45 दिनों के भीतर हस्तांतरण विलेख जारी किया जाएगा।
अनधिकृत कॉलोनियां – पीएम-उदय
अक्टूबर 2019 में, केंद्र सरकार ने "दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (अवैध बस्तियों में रहने वालों के संपत्ति अधिकारों की मान्यता) विनियम, 2019" को अधिसूचित किया। इसके अनुसरण में, प्रधानमंत्री - दिल्ली में अनधिकृत बस्तियां आवास अधिकार योजना (पीएम-उदय) 29.10.2019 को शुरू की गई।
इन विनियमों के तहत, जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (जीपीए), बिक्री समझौता, भुगतान और कब्जा दस्तावेजों के आधार पर 1,731 अनधिकृत कॉलोनियों (जो 2019 के विनियमों के तहत बाहर नहीं हैं) के निवासियों को स्वामित्व/हस्तांतरण/गिरवी अधिकार प्रदान किए जा रहे हैं।
जिन कॉलोनियों को अपवादों के अंतर्गत रखा गया है—जहां कोई अधिकार प्रदान नहीं किए जाएंगे—उनमें आरक्षित/अधिसूचित वन, प्राचीन स्मारक और पुरातत्व स्थल एवं अवशेष अधिनियम, 1958 के अंतर्गत संरक्षित क्षेत्र, जोन-ओ (यमुना बाढ़ का मैदान), सड़कों का मार्ग, हाई टेंशन लाइनें, दिल्ली के पहाड़ी क्षेत्र, या किसी भी कानून के अंतर्गत संरक्षित भूमि पर स्थित कॉलोनियां शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, 69 समृद्ध अनधिकृत कॉलोनियां भी अपवादों के अंतर्गत आती हैं।
सरकारी भूमि पर निर्मित संपत्तियों के लिए हस्तांतरण विलेख (सीडी) जारी किए जाते हैं, और निजी भूमि पर संपत्तियों के लिए अधिकार पर्ची (एएस) जारी की जाती हैं।
पीएम-उदय कार्यक्रम वर्तमान में डीडीए द्वारा प्रबंधित एक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से लागू किया जा रहा है, जहां आवेदन जमा करने और उनकी प्रक्रिया करने की सुविधा उपलब्ध है।
31.03.2026 तक, पीएम-उदय के तहत लगभग 40,000 हस्तांतरण विलेख / अधिकार पर्ची जारी की जा चुकी हैं।
योजना के प्रति अपेक्षाकृत कम रूचि को लेकर की जांच की गई है। यह देखा गया है कि संपत्ति हस्तांतरण विलेख/अधिकार पर्ची जारी होने के बाद भी, अनुमोदित लेआउट योजनाओं के अभाव में निवासी भवन निर्माण योजनाओं को स्वीकृत कराने या मौजूदा संरचनाओं को नियमित करने में असमर्थ हैं। ये लेआउट योजनाएं आवासीय प्राधिकरणों द्वारा तैयार की जानी थीं और एमसीडी द्वारा अनुमोदित की जानी थीं।
इन अनधिकृत कॉलोनियों का नियमितीकरण
2019 के विनियमों में लेआउट योजनाओं की मंजूरी के बाद इन कॉलोनियों को "जहां है, जैसा है" आधार पर नियमित करने की परिकल्पना भी की गई है। हालांकि, अनुमोदित लेआउट योजनाओं का अभाव एक बड़ी बाधा बना हुआ है।
लेआउट योजनाओं और भवन योजनाओं की मंजूरी के बिना, अनधिकृत कॉलोनियों के निवासियों को शहरीकरण की मुख्यधारा में लाने का उद्देश्य पूरी तरह से प्राप्त नहीं किया जा सकता है। हालांकि पीएम-उदय योजना स्वामित्व अधिकार प्रदान करती है, लेकिन इससे निवासी स्वतः ही भवन योजना अनुमोदन के लिए पात्र नहीं हो जाते।
आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा लिए गए निर्णय
इन समस्याओं के समाधान के लिए निम्नलिखित निर्णय लिए गए हैं:
• 1511 अनधिकृत कॉलोनियों (1731 अनधिकृत कॉलोनियों में से) को अनुमोदित लेआउट योजनाओं की आवश्यकता के बिना "जहां है, जैसा है" के आधार पर नियमित किया जाएगा, जो अपवर्जन मानदंडों के अंतर्गत नहीं आती हैं।
• इन कॉलोनियों में सभी भूखंडों और भवनों का भूमि उपयोग आवासीय माना जाएगा।
• 20 वर्ग मीटर तक के सुविधा स्टोरों को नियमित किया जाएगा यदि उन्हें 6 मीटर का मार्ग उपलब्ध हो। 10 वर्ग मीटर तक के स्टोरों के लिए आवश्यक मार्ग की चौड़ाई 6 मीटर से कम हो सकती है।
• नियमितीकरण मौजूदा निर्मित संरचनाओं पर "जैसा है, जहां है" के आधार पर लागू होगा।
• अनुमोदित लेआउट योजनाओं का अभाव नियमितीकरण में बाधा नहीं बनेगा।
• एमसीडी/स्थानीय निकाय नियमितीकरण प्रमाणपत्र जारी करेंगे, खाली भूखंडों का सर्वेक्षण करेंगे और नागरिक इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में सहायता करेंगे।
• राष्ट्रीय राज्य राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (जीएनसीटीडी) का राजस्व विभाग पात्र निवासियों को हस्तांतरण विलेख/अधिकार पर्ची जारी करेगा।
ऑनलाइन आवेदन के लिए प्रक्रिया
- आवेदक एमसीडी स्वगम पोर्टल ( https://mcdonline.nic.in/swagam ) पर लॉग इन करेंगे।
- अनधिकृत कॉलोनी (पात्र 1511 कॉलोनियों में से) का नाम चुनें; वार्ड और जोन स्वतः भर जाएंगे।
- चुनें कि क्या पीएम-यूडीएवाई केस आईडी मौजूद है (हां/नहीं)।
- यदि नहीं → पीएम-उदय पोर्टल पर रिडायरेक्ट किया गया।
- यदि हां → केस आईडी दर्ज करें:
- यदि सीडी/एएस जारी किया गया है → आवेदन पत्र खुल जाएगा।
- यदि जारी नहीं किया गया है → स्थिति जानने के लिए पीएम-उदय पोर्टल पर रिडायरेक्ट किया गया।
- राजस्व विभाग/जीएनसीटीडी द्वारा डीडीए के सहयोग से आवेदनों की प्रक्रिया और सीडी/एएस जारी करना।
- जारी की गई सीडी/एएस को स्वगम पोर्टल के माध्यम से एमसीडी को भेजा जाता है।
प्रेम: हमेशा एक नया आरंभ और एक नया सफर शुरू होता है, पढ़ें दिल को छू लेने वाले ये कोट्स
- -प्रेम वह है जो हमें एक दूसरे को स्वीकारने की क्षमता देता है, चाहे हम जैसे भी हों।
- -तुम्हारे बिना मेरा जीवन रंगहीन है, तुम मेरी ज़िंदगी का सबसे सुंदर रंग हो।
- -प्रेम में सब कुछ संभव है।
- -तुम्हारी मुस्कान मेरी दुनिया को रौंगतों से भर देती है, तुम मेरे लिए विशेष हो।
- -प्रेम वह है जो हमें एक दूसरे को सच्चे रूप से समझने की क्षमता देता है।-
- -तुम्हारा साथ ही मेरा जीवन समृद्धि से भर जाता है, तुम मेरी सबसे बड़ी धन हो।
- -प्रेम में हमेशा एक नया आरंभ होता है, एक नया सफर शुरू होता है।-
- -तुम्हारे साथ होना ही मेरी खुशियों का सबसे बड़ा कारण है, तुम मेरे लिए अनमोल हो।
- -प्रेम वह है जो दूसरों को खुशी देने में है, खुद को भूल जाने में नहीं।-
- -तुम्हारे बिना मेरा जीवन अधूरा है, तुम्हारी मौजूदगी ही मेरी पूर्णता है।
- प्रेम दुनिया में सबसे शक्तिशाली शक्ति है। यह वह है जो हमें एक साथ रखता है, हमें आगे बढ़ाता है और हमें बेहतर बनाता है।" - मदर टेरेसा
- "प्रेम वह है जो हमें जीवित रखता है। यह वह है जो हमें खुशी देता है। यह वह है जो हमें दुनिया को बेहतर बनाता है।" - पॉल जे. क्रेग
- "प्रेम वह है जो हमें एक दूसरे के लिए बेहतर बनाता है। यह वह है जो हमें एक साथ लाता है और हमें एक परिवार बनाता है।" - मार्टिन लूथर किंग जूनियर
Born on Monday: सोमवार को जन्में लोगों कि खूबियां जानकर आप भी हो जायेंगे हैरान, रखें ये नाम
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सोमवार को जन्मे बच्चों के नाम
हिन्दू पञ्चाङ्ग के अनुसार सोमवार को जन्मे लोगों के नाम अक्सर भगवान शिव से जुड़े होते हैं साथ ही सोमवार को चंद्रमा का दिन माना जाता है, और ऐसा मान्यता है कि चंद्रमा भगवान शिव का वाहन है। इसलिए, सोमवार को जन्मे लोगों के नाम अक्सर शिव के नामों या चंद्रमा से संबंधित नामों से लिए जाते हैं। हालाँकि किसी बच्चे के नाम रखने के पीछे बहुत सारे फैक्टर होते हैं जैसे कि राशि, नक्षत्र, धर्म, और परिवार की परंपराआदि.
रविवार को हुआ है जन्म तो आप होंगे: दृढ इच्छा शक्ति के मालिक
सोमवार को जन्म लेने वाले बच्चों के नामों के लिए कुछ लोकप्रिय नाम निम्न हो सकते हैं. इनके अलावा, सोमवार को जन्मे लोगों के लिए अन्य नाम भी चुने जा सकते हैं। उदाहरण के लिए, किसी व्यक्ति का नाम उसके जन्म के समय के आधार पर भी रखा जा सकता है। उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति सुबह जल्दी पैदा होता है, तो उसे "उदय" या "प्रभात" जैसे नाम दिया जा सकता है। यदि कोई व्यक्ति शाम को पैदा होता है, तो उसे "शाम" या "सौरभ" जैसे नाम दिया जा सकता है।
नजरिया जीने का: जानें वृक्ष के चिरस्थायी लाभों को समर्पित प्रधानमंत्री का सुन्दर श्लोक
लड़कों के लिए
- शिव
- शंकर
- चंद्र
- कार्तिकेय
- उदय
- दीप
- प्रकाश
- शांत
- धीरज
लड़कियों के लिए
- शिवांगी
- चंद्रिका
- उषा
- दीप्ति
- शीतल
- शांति
- प्रज्ञा
- भावना
- श्रद्धा
सोमवार को जन्मे लोग बहुत मेहनती होते हैं। ऐसे व्यक्ति कभी भी शांति से रहना पसंद नहीं करते और हमेशा खुद को व्यस्त रखना चाहते हैं। ऐसे लोग समय का सदुपयोग करने में काफी सक्रिय होते हैं और अगर ये अच्छी और सक्रिय प्रवृत्ति के स्वामी हों तो ऐसे लोग जीवन में कई कार्यों को सफलतापूर्वक अपने हाथ में लेकर उन्हें अंजाम तक पहुंचा सकते हैं।
उच्च चरित्र के स्वामी
सोमवार को जन्मे लोगों की यह विशेषता होती है कि ये उच्च चरित्र के होते हैं और ये अपने चरित्र का बहुत ध्यान रखते हैं। हालांकि जातक विपरीत और विपरीत स्वभाव को जीना पसंद करता है। वासना और भोग जैसे विषयों को ये गलत नहीं समझते लेकिन फिर भी इनके लिए उच्च चरित्र हमेशा महत्वपूर्ण होता है और इसके लिए ये आमतौर पर कोई समझौता पसंद नहीं करते हैं।
धार्मिक/सामाजिक कार्यों में सहभागी
सोमवार को जन्म लेने वाले व्यक्ति सामान्यतः धार्मिक प्रकृति के होते हैं, धार्मिक कार्यों एवं पूजा-पाठ में इनकी विशेष रुचि होती है. भले ही ये लंबे समय तक पूजा-पाठ में विश्वास नहीं रखते हों, लेकिन धार्मिक और सामाजिक कार्यों में ये विशेष रुचि दिखाते हैं।
सुख-दुःख में समान भाव
ऐसा व्यक्ति सुख हो या दुख दोनों ही स्थितियों में समान रहता है और जल्दी विचलित होना पसंद नहीं करता। सुख की स्थिति में भी ये प्राय: अपने को आडम्बर से दूर ही रखते हैं। साथ ही दु:ख या दुर्दशा की स्थिति में भी ये अपना सम्मान नहीं छोड़ते हैं और जल्दबाजी में किसी के सामने हाथ फैलाना पसंद नहीं करते हैं।
स्वास्थ्य और व्यक्तित्व
ऐसे व्यक्तियों का चेहरा आमतौर पर गोल आकार का होता है। ऐसे लोगों को सेहत को लेकर सर्दी या जुकाम को लेकर विशेष रूप से सावधान रहने की जरूरत होगी। ऐसे लोग सर्दी या जुकाम के प्रति काफी संवेदनशील होते हैं और उन्हें इससे खास परहेज करने की जरूरत होती है। हल्की सर्दी भी उन्हें परेशान करती है और उन्हें सर्दी या जुकाम हो सकता है। इसके साथ ही सोमवार को जन्में जातकों का शरीर वात और कफ से भरपूर होता है इसलिए इन्हें विशेष ध्यान रखना चाहिए।
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अस्वीकरण: कृपया ध्यान दें कि लेख में उल्लिखित टिप्स/सुझाव केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से हैं ताकि आपको उस मुद्दे के बारे में अपडेट रखा जा सके जो आम लोगों से अपेक्षित है. आपसे निवेदन है कि कृपया इन सुझावो को पेशेवर ज्योतिषीय सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए तथा अगर आपके पास इन विषयों से सम्बंधित कोई विशिष्ट प्रश्न हैं तो हमेशा अपने ज्योतिषी या पेशेवर ज्योतिष/कुंडली सुझाव प्रदाता से अवश्य परामर्श करें।
अप्रैल में जन्मे लोग: जानिए इनकी पर्सनैलिटी के अनोखे राज
निडर और साहसी
अप्रैल में जन्मे लोगों में कुछ ऐसी अनोखी खूबियाँ होती हैं जो उन्हें दूसरों से अलग बनाती हैं। ऐसे लोग अपने काम करने के तरीके में किसी भी तरह का दखल बर्दाश्त नहीं करते; अगर उन्हें किसी बात पर समझौता करना मुश्किल लगता है, तो वे अक्सर उस प्रोजेक्ट को दूसरों के लिए छोड़ देने में ज़रा भी नहीं हिचकिचाते। अप्रैल में जन्मदिन मनाने वाले लोगों पर मंगल ग्रह का प्रभाव रहता है, जिसके चलते उनका स्वभाव बेहद निडर और साहसी होता है।
साहस और दृढ़ संकल्प
जो खास गुण उन्हें दूसरों से अलग बनाते हैं, वे हैं—उनके सामने आने वाली किसी भी चुनौती का सामना करने का साहस और उनका दृढ़ संकल्प। मुश्किल समय में भी वे दूसरों को दिलासा देने और सहारा देने की काबिलियत रखते हैं; उनकी कुशलता और मानसिक मज़बूती उन्हें ऐसे पर्याप्त संसाधन मुहैया कराती है, जिनकी मदद से वे कठिन परिस्थितियों में भी अपना धैर्य बनाए रखते हैं।
स्वभाव से अप्रत्याशित
अगर उनके मिजाज़ की बात करें, तो अप्रैल में जन्मे लोगों को सचमुच 'अप्रत्याशित' (जिनके बारे में पहले से कुछ न कहा जा सके) कहा जा सकता है। हालाँकि उनमें गजब का दृढ़ संकल्प होता है और वे किसी भी नए प्रोजेक्ट की शुरुआत पूरे जोश और उत्साह के साथ करते हैं, फिर भी किसी प्रोजेक्ट या अपने भविष्य को लेकर उनके अगले कदम क्या होंगे—इसका अंदाज़ा लगाना या भविष्यवाणी करना काफी मुश्किल होता है। इसके बावजूद, उनके व्यक्तित्व का यह अनोखा पहलू ही उनकी सबसे बड़ी और सबसे महत्वपूर्ण खासियत है।
मज़बूत नेतृत्व क्षमता और जन्मजात शासक
ऐसे लोगों में नेतृत्व के गुण कूट-कूटकर भरे होते हैं; वे बेहद मज़बूत इरादों वाले इंसान होते हैं और उन्हें पूरा यकीन होता है कि उनके विचार और उनके द्वारा लिए गए फ़ैसले हमेशा सही होते हैं। वे अपनी ज़िंदगी को पूरे जुनून के साथ जीते हैं और स्वभाव से काफी रोमांच-प्रेमी होते हैं। उनमें खुद पर शासन करने की काबिलियत होती है; वे एक ऐसे ज़बरदस्त और चुंबकीय व्यक्तित्व के धनी होते हैं कि लोग खुद-ब-खुद उनके पीछे चलने लगते हैं।
स्वभाव से स्वतंत्र
अप्रैल महीने में जन्मे सभी लोग स्वभाव से पूरी तरह स्वतंत्र होते हैं। वे अपने काम करने के तरीके में किसी भी तरह का दखल बर्दाश्त नहीं करते; अगर उन्हें किसी बात पर समझौता करना मुश्किल लगता है, तो वे अक्सर उस प्रोजेक्ट को दूसरों के लिए छोड़ देने में ज़रा भी नहीं हिचकिचाते। ज़िंदगी के प्रति उनका जुनून ही उन्हें अपना रास्ता खुद बनाने के लिए प्रेरित करता है। उनका चुंबकीय व्यक्तित्व और दूसरों को अपनी बात मनवाने की ज़बरदस्त क्षमता ही लोगों को उनके पीछे चलने पर मजबूर कर देती है। वे अच्छी तरह जानते हैं कि मुश्किल हालात में कैसे नेतृत्व करना है, कैसे रास्ता बनाना है और अपनी ज़िंदगी के लिए खुद पैसे कैसे कमाने हैं।
















