नजरिया जीने का: इन टिप्स से बचाएं खुद को नेगेटिव थॉट्स के ट्रैप में फंसने से

नकारात्मक विचारों का आना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है और आप इसे नकार नहीं सकते है। अगर आप सभी बड़े और सफल व्यक्तित्व वाले लोगों  की जीवनी को पढ़ेंगे तो पाएंगे कि उन्हें भी इससे गुजरना पड़ता है. हर इंसान के मन में कभी न कभी नकारात्मक विचार आते हैं लेकिन यह जानना जरुरी है कि इन नकारात्मक विचारों  से  आप  कितना जल्दी निकलते हैं क्योंकि अगर आप इनके इन्फ्लुएंस में आ  गए तो फिर आप पॉजिटिव विचारों से दूर हो सकते हैं. याद रखें, नकारात्मक विचारों को खुद से दूर रखना ज्यादा जरुरी है क्योंकि ये आते तो सबके दिमाग में हैं, लेकिन इससे निकलना सभी को नहीं आता क्योंकि हम खुद को मोटिवेट करने के टेक्निक से वाकिफ नहीं होता या नकारात्मक विचारों के गिरफ्त में बुरी तरह से फंस चुके होते हैं. 

जब ये विचार बार-बार आने लगें और लंबे समय तक टिके रहें, तो यह एक मानसिक ट्रैप की तरह हमें अपने गिरफ्त में ले लेता है जो  न केवल हमारे आत्मविश्वास को कमजोर करता है, बल्कि हमारे व्यवहार, निर्णय और स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है।

नजरिया जीने का: जानें वृक्ष के चिरस्थायी लाभों को समर्पित प्रधानमंत्री का सुन्दर श्लोक 

खुद से सवाल करें 

नकारात्मक विचारों का दौर हर किसी के जीवन में आता है, लेकिन यह याद रखना जरूरी है कि विचारों को नियंत्रित किया जा सकता है। कभी आपने सोचा है कि अचानक आखिर नकारात्मक विचार क्यों जगह बना लेते हैं. कुछ सवाल ऐसे होते हैं जो सीधे तौर पर नकारात्मक विचार हमारे अंदर हावी करते हैं जैसे कोई असफलता या निराशा का डर खासतौर पर जब चीजें हमारे मन मुताबिक नहीं होतीं या हमें किसी आशा के विपरीत निराशा मिलती है. 

जीवन शार्ट नहीं लॉन्ग रेस है 

दूसरों से हमें अपनी तुलना की आदत भी काफी बुरा प्रभाव डालती है और हमें आज  के प्रतिस्पर्धा वाले दौर में हम किसी से मामूली रूप से भी पिछड़ना नहीं चाहते हैं. हम  ये भूल जाते हैं कि जीवन शार्ट रेस नहीं बल्कि लॉन्ग रेस है और मामूली बढ़त या पीछा होना कोई मतलब है है क्योंकि इसे स्ट्रेटेजी कहते हैं और अंतिम राउंड में जीत को  फाइनल कहा जाता है. 

उम्मीद की एक लौ को जलाना सीखें 

हर नकारात्मक विचार को चुनौती दें, क्योंकि वही आपके आत्मबल की परीक्षा है।”सकारात्मक सोच रखने वाले दोस्तों, परिवार या मार्गदर्शकों से जुड़े रहें। इसके साथ ही जब मन उदास हो, तब अपने भीतर झांकिए — वहां उम्मीद की एक लौ हमेशा जलती रहती हैऔर उस लौ को हमेशा जलाये रखिये. 

अतीत  की जाल से बाहर निकलें 

अक्सर हम अपने  अतीत या पुरानी गलतियों को बार-बार याद करके अपने वर्तमान को खराब करते हैं. यह तय है कि जो ख़तम हो चूका है या बीत गया है वह लौट  नहीं सकता और उससे सिर्फ सबक लेकर हमें आगे की कर देखना हीं हमारे भविष्य का निर्माण करेगा. इसके अतिरिक्त पुराने अतीत के बारे में लगातार सोचने से तनाव, चिंता और अवसाद बढ़ता है जो न केवल हमारे वर्तमान बल्कि भविष्य को भी ख़राब करती है. 

 खुद को कम आंकने की गलती 

अक्सर हम खुद को काम आंकना  दूसरों से अपने  को कम आंकने की बीमारी पाल लेते हैं जिसमे हमें यह लगने लगता  है की समय हमारे साथ नहीं है या मुझमे वह योग्यता नहीं है जो किसी भी प्रकार से  योग्य है और यह हमारी सफलता में सबसे बड़ी बाधा है. इसके अतिरिक्त यह आपके मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाते हैं और यह दीर्घकालिक भी रह सकता है. 


नज़रिया जीने का : इन टिप्स से करें एक्जाम स्ट्रेस को गायब

Avoid Exam Stress, Tips For Exam Stress Controlling

नज़रिया जीने का : एक ओर जबकि देश में बोर्ड और बारहवीं की परीक्षा की घोषणा हो चुकी है और डेट शीट जारी हो चुकी है, परीक्षार्थियों के लिए चुनौतियों का सामना करने का समय आ चुका है। 
राज्यों के बोर्ड का शेड्यूल जारी  हो चुकी है और सच तो यह है कि आने वाले कुछ महीने परीक्षा के माहौल से गुलजार रहने वाला है. जाहिर है की परीक्षार्थी अपने एक्जाम की तैयारी को लेकर तनाव में रहते हैं लेकिन जरूरत इस बात की हैं कि वे एक्जाम स्ट्रेस को खुद पर हावी नहीं होने दें. ऐसे में अब परीक्षार्थियों को अपने आराम क्षेत्र से बाहर निकलने और खुद को तैयार  करने का यह समय है। नई चीजें सीखने और चुनौतियों का सामना करने से आपको अपनी क्षमताओं को बढ़ाने में मदद मिलेगी। 
उच्च तनाव का स्तर छात्रों की दक्षता में बाधा डाल सकता है जिसके परिणामस्वरूप बोर्ड परीक्षाओं के दौरान उनका प्रदर्शन ख़राब हो सकता है। कहने की जरुरत नहीं है कि परीक्षा की तैयारी एक चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया है और इसमें कड़ी मेहनत, लगन और समर्पण की आवश्यकता होती है। 

हालांकि, कभी-कभी परीक्षा की तैयारी के दौरान निराशा का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि कहते हैं ना कि " परिस्थितियां  हमेशा तुम्हारे अनुकूल रहे ऐसी आशा नहीं करो क्योंकि आखिर संसार सिर्फ तुम्हारे लिए तो नहीं बना है।" क्या आप जानते हैं कि आखिर इस निराशा के क्या कारण हो सकते हैं?

याद रखें दोस्तों, निराशा एक सामान्य भावना है। हालांकि, यदि आप निराशा से ग्रस्त हो जाते हैं, तो यह आपकी परीक्षा की तैयारी में बाधा उत्पन्न कर सकता है। इसलिए, निराशा पर काबू पाने के लिए निम्न टिप्स की मदद ले सकते हैं जो आपको परीक्षा की तैयारी में निराशा पर काबू पाने में मदद कर सकते हैं:

परीक्षा की तैयारी में निराशा पर काबू पाने के लिए कुछ उपाय निम्नलिखित हैं:

सकारात्मक सोच रखें। निराशा का सबसे अच्छा इलाज सकारात्मक सोच है। जब आप सकारात्मक सोच रखते हैं, तो आप किसी भी बाधा को पार करने के लिए तैयार रहते हैं।
अपने लक्ष्यों को ध्यान में रखें। परीक्षा की तैयारी करते समय, अपने लक्ष्यों को ध्यान में रखें। यह आपको प्रेरित रहने में मदद करेगा।
अपनी प्रगति का मूल्यांकन करें। अपनी प्रगति का मूल्यांकन करके, आप यह देख पाएंगे कि आप कितनी दूर आ चुके हैं। यह आपको आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद करेगा।
अपनी रणनीति में बदलाव करें। यदि आप लगातार निराशा महसूस कर रहे हैं, तो अपनी रणनीति में बदलाव करने का प्रयास करें। हो सकता है कि आप अपनी तैयारी का तरीका बदलकर बेहतर परिणाम प्राप्त कर सकें।
अपने दोस्तों और परिवार से बात करें। अपने दोस्तों और परिवार से बात करके, आप अपनी भावनाओं को बाहर निकाल सकते हैं और उन्हें समर्थन प्राप्त कर सकते हैं।

तैयारी के लिए एक विशिष्ट योजना बनाएं। यह आपको अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए एक दिशा प्रदान करेगा।  पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, व्यायाम, आराम और मनोरंजन के लिए भी समय निकालें।

अपने आराम क्षेत्र से बाहर निकलने से न डरें। नई चीजें सीखने और चुनौतियों का सामना करने से आपको अपनी क्षमताओं को बढ़ाने में मदद मिलेगी।

नजरिया जीने का: सिर्फ टैलेंट नहीं, जुनून है असली ताकत


 जिस इंसान के भीतर जुनून होता है, उसके रास्ते में कोई मुश्किल टिक नहीं पाती। सच्चाई यह है क़ि जुनून वो आग है, जो साधारण इंसान को भी असाधारण बना देती है। बस जीवन में अगर आप सफलता चाहते हैं तो  आपके पास भले हीं संसाधनों की कमी हो, बस दिल में कुछ कर गुजरने की चाह होनी चाहिए क्योंकि यही चाह हीं  हालात को  रास्ता में बदल देते हैं। जीवन में अगर जुनून नहीं है तो फिर जीवन का कुछ भी मतलब नहीं हैं क्योंकि यह जुनून हीं है जो हमें कुछ पाने का मायने बताती है। यह जुनून ही तो है जो हमें अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए मोटिवेट करता है और जीवन में अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए ऊर्जा और उत्साह प्रदान करता है।
पैशन या जुनून पैदा करें 

जीवन मे सफलता के लिए अगर आप सोचते हैं की सिर्फ टैलेंट या स्किल होना ही काफी है तो फिर आपको दुबारा सोचने की जरूरत है। याद रखें, सिर्फ टैलेंट या स्किल होना काफी नहीं है तब तक जब तक कि आपके अंदर कुछ कर गुजरने के लिए पैशन या जुनून नहीं है। यह जुनून ही है जो आपको जीवन मे अभाव और सीमित संसधनों के बावजूद आपको सफलता दिल देता है, लेकिन टैलेंट या स्किल होने के बावजूद भी की ऐसे लोग हैं जो बार-बार प्रयास करने के बावजूद अपने लक्ष्य तक पहुंचने मे असफल हो गए ।

आप सोचें कि अगर आपके जीवन लक्ष्य और सपना हीं नहीं हो तो फिर आपका जीवन कितना उद्देश्यहीन हो जायेगा।

ठीक वैसे हीं, जीवन में लक्ष्य और सपना तो हो, लेकिन अगर उन्हें पाने का जुनून नहीं हो तो फिर उन सपनों का क्या होगा? 

पहले खुद पर विश्वास करना सीखें

जुनून को विकसित करने के लिए सबसे पहले जरूरी है कि आप खुद पर विश्वास करने शुरू करें और आरंभ मे छोटे-छोटे लक्ष्य बनाएं और उन्हे हर हाल मे पाने की कोशिश करें। उस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए खुद को होम करे दें और अपने तमाम संसाधन और माइंड सेट को उसके प्रति होम कर दें। विश्वास करें, एक बार आप जब अपने छोटे से लक्ष्य को प्राप्त कर लेंगे तो आपका आत्मविश्वास और जुनून बढ़ता जाएगा।

हमारा जुनून उन लक्ष्यों और सपनों को प्राप्त करने के लिए हमें उत्साह और ऊर्जा प्रदान करता है जिसके बगैर हम उन्हें पाने की सोच भी नहीं सकते।

आज के जीवन में मिलने वाले संघर्ष और चुनौतियों से आप इंकार नहीं कर सकते और ऐसे में यह आपका जुनून हीं हैं जो इन चुनौतियों का सामना करने की क्षमता प्रदान  करता है।

याद रखें दोस्तों,जुनून के बिना हम इंसान तो क्या, जानवर भी अपने सर्वाइवल के लिए मुश्किल में पड़ जाएंगे। 

एक शेर को अपने भोजन के लिए हिरन के पीछे भागना भी जुनून है, वहीं हिरन को भी अपने जान को बचाने का जुनून भी जरूरी है।


भगवान राम से सीखें: परिवार में संबंधों की मर्यादा और आदर्श

Teaching of Lord Rama Ramnavmi Maryadapurushotam

Point Of View: भगवान् राम ने जीवन और परिवार में सम्बन्धो के बीच समन्यव स्थापित करते हुए यह बताया है कि निष्ठा, त्याग, बंधुत्व, शालीन स्नेहभाव,उदारता और वत्सलता जैसे जैसे भावों को किस प्रकार से कुशलता से पालन किया जा सकता है. उन्होंने हर सम्बन्धो में उच्च आदर्शों को स्थापित करते हुए किस प्रकार से अपने सभी कर्तव्यों का  पालन किया जा सकता हैं इसकी व्यापक झलक भगवान् राम के चरित्र में पाई जा सकती है. 

भगवान् राम के व्यापक चरित्र जिसमें उन्होंने परिवार के सभी सम्बन्धो को विनम्रता और गंभीरता के साथ निभाया है. भगवान्र राम ने बताया है कि जीवन में कितना भी बड़ा विपत्ति सामने क्यों नहीं आये, संबधो की गरिमा को बनाये हुए श्रेष्ठतम जीवनशैली प्रदर्शित किया जा सकता है. 

यह भगवान् राम के जीवन का उच्चतम आदर्श ही है जिसके लिए हम प्रभु राम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहकर पुकारते हैं. भगवन राम के चरित्र की व्यापकता की हम मानव मात्र सिर्फ कल्पना ही कर सकते हैं जहाँ उन्होंने गुरु, माता-पिता, भाई, पत्नी, सेवक की कौन कहें, यहाँ तक कि  प्रभु राम ने अपने शत्रुओं के साथ भी समरनीति की व्यवहारिकता और आदर्श को स्थापित किया है जो सम्पूर्ण जगत में अनूठा उदहारण है. 

गुरु के प्रति निष्ठा और समर्पण

भगवान राम ने अपने गुरु को हमेशा ही सर्वोपरि रखा जिसकी झलक विश्वामित्र,वशिष्ठ और वाल्मीकि जैसे गुरुजनों की सीख  और आदर्शों को हमेशा से जीवन का सर्वोच्च स्थान दिया. 

माता पिता के आदेश निर्देश का अनुसरण: 

भगवान राम ने हमेशा माता-पिता की बातों को सर्वोच्च स्थान दिया. माता पिता के आदेश और निर्देश को उन्होंने हमेशा से पालन किया और इसकी सबसे सुन्दर झलक मिलती है वनवास के आज्ञा के पालन के दौरान. राज-पाट  को त्याग कर वनवास में एक वनवासी के जीवन जीना इतिहास में एक अनूठा आदर्श है. 

भाई के साथ बंधुत्व की कोमलता: 

भगवान राम ने अपने भाइयों के साथ भी हमेशा से कोमलता और प्रेम को स्थान दिया. वह चाहे भरत-मिलाप हो या फिर अन्य कई ऐसे घटनाएं राम चरितमानस में उल्लेखित हैं जो यह साबित करती है कि  भगवान राम ने बंधुत्व के साथ सम्बन्धो को हमेशा से कोमलता और गंभीरता के साथ निभाया. 

पत्नी के साथ दाम्पत्य का शालीन स्नेहभाव: 

राम चरित मानस में आप पाएंगे की भगवन राम ने पत्नी के साथ शालीन स्नेहभाव का परिचय दिया है. 

सेवक के लिए उदारता और वत्सलता: 

भगवन राम ने अपने सेवकों के साथ किस प्रकार का सम्बन्ध निभाया है, वह अपने आप में अनुकरणीय है. हनुमान भगवान् जो प्रभु राम की भक्ति और अपने सेवक वाली छवि के लिए ही पूजनीय है, रामायण में केवट और शबरी जैसे कितने सेवक हैं जिनके साथ प्रभु राम ने उदारता और वत्सलता का परिचय देकर प्रभु और सेवक के साथ सम्बन्धो को नया आयाम दिया है. 

मित्र के लिए सर्वस्व अर्पण की तत्परता: 

प्रभु राम ने मित्रों के साथ हमेशा दोस्ती के धर्म को निभाया है जिसके लिए प्रभु हमेशा से पूजनीय है. लंका के राजा रावण के भाई विभीषण के साथ मित्रता हो या फिर सुग्रीव के साथ, प्रभु राम ने हमेशा से मित्र धर्म को प्रमुखता के साथ सर्वस्व अर्पण करते हुए तत्परता के साथ निभाया है. 


Amrit Udyan Winter Annuals Edition 2026: राष्ट्रपति भवन का अमृत उद्यान जनता के लिए खुला, जानें कैसे और कहाँ करें टिकट बुकिंग

राष्ट्रपति भवन का अमृत उद्यान 3 फरवरी से खुल चुका है और आप के लिए परिवार के साथ घूमने का सुनहरा अवसर है। ध्यान रहे कि राष्ट्रपति भवन का अमृत उद्यान 31 मार्च, 2026 तक आम जनता के लिए खुला रहेगा। इस साल दर्शक बाल वाटिका - पल्मेरिया गार्डन - बरगद गार्डन - बोन्साई गार्डन - कलकल बहती धारा - केंद्रीय लॉन - लंबा गार्डन - गोलाकार गार्डन का सुन्दर  और आकर्षक नज़ारे का दर्शन कर सकेंगे।

इसके अतिरिक्त इस वर्ष आगंतुक ट्यूलिप और विभिन्न प्रकार के गुलाबों के अलावा, कलकल बहती धारा - झरनों वाली जलधारा और रिफ्लेक्सोलॉजी पथों वाला बरगद उद्यान देख सकेंगे।

लोग सप्ताह में छह दिन सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक (अंतिम प्रवेश शाम 5 बजे) उद्यान का भ्रमण कर सकते हैं। उद्यान सोमवार को बंद रहेगा, क्योंकि यह रखरखाव का दिन है, और होली के कारण 4 मार्च को भी बंद रहेगा।

राष्ट्रपति भवन संग्रहालय: जानें खास बातें 

अमृत ​​उद्यान निम्नलिखित दिनों में विशेष श्रेणियों के लिए खुला रहेगा:

3 मार्च – रक्षा कर्मियों के लिए

5 मार्च – वरिष्ठ नागरिकों के लिए

10 मार्च – महिलाओं और आदिवासी महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए

13 मार्च – दिव्यांगजनों के लिए

जानें कैसे करें टिकट बुकिंग?

उद्यान में प्रवेश और बुकिंग निःशुल्क है। ऑनलाइन बुकिंग https://visit.rashtrapatibhavan.gov.in/ पर की जा सकती है। आगंतुकों के अनुभव को बेहतर बनाने के उद्देश्य से, इस वर्ष मौके पर बुकिंग की सुविधा उपलब्ध नहीं होगी। आगंतुक केवल ऑनलाइन माध्यम से ही टिकट बुक कर सकते हैं। इसलिए, आगंतुकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने स्लॉट पहले से ही ऑनलाइन बुक कर लें। उन्हें टिकट में उल्लिखित समय-सीमा और अन्य निर्देशों का पालन करने की भी सलाह दी जाती है। किसी विशेष दिन के लिए बुकिंग पिछले दिन सुबह 10:00 बजे बंद हो जाएगी।

जानें कैसे और कहाँ  से करें एंट्री?

सभी आगंतुकों के लिए प्रवेश और निकास राष्ट्रपति भवन परिसर के गेट नंबर 35 से होगा, जो नॉर्थ एवेन्यू और राष्ट्रपति भवन के चौराहे के पास स्थित है। आगंतुकों की सुविधा के लिए, केन्‍द्रीय सचिवालय मेट्रो स्टेशन से गेट नंबर 35 तक शटल बस सेवा सुबह 9:30 बजे से शाम 6:00 बजे के बीच हर 30 मिनट पर उपलब्ध रहेगी। केन्‍द्रीय सचिवालय मेट्रो स्टेशन से अंतिम शटल बस सेवा शाम 4:00 बजे होगी।

आगंतुकों के लिए मार्ग बाल वाटिका - पल्मेरिया गार्डन - बरगद गार्डन - बोन्साई गार्डन - कलकल बहती धारा - केंद्रीय लॉन - लंबा गार्डन - गोलाकार गार्डन होगा।

ट्यूलिप और विभिन्न प्रकार के गुलाबों के अलावा, इस वर्ष आगंतुक कलकल बहती धारा - झरनों वाली एक जलधारा और रिफ्लेक्सोलॉजी पथों वाला बरगद उद्यान देख सकेंगे।

क्या-क्या साथ लें जा सकते हैं दर्शक?

आगंतुक अपने साथ मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक चाबियां, पर्स/हैंडबैग, पानी की बोतलें और शिशुओं के लिए दूध की बोतलें ले जा सकते हैं। सार्वजनिक मार्ग पर विभिन्न स्थानों पर पीने का पानी, शौचालय और प्राथमिक चिकित्सा/चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

अमृत ​​उद्यान के अलावा, लोग सप्ताह में छह दिन (मंगलवार से रविवार) राष्ट्रपति भवन और राष्ट्रपति भवन का संग्रहालय भी जा सकते हैं। वे प्रत्येक शनिवार को राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में गार्ड परिवर्तन समारोह भी देख सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए https://visit.rashtrapatibhavan.gov.in/ पर जाएं।

English is Easy: जानें Enquiry और Inquiry शब्द के प्रयोग में अंतर और सामान्य गलतियां


Enquiry और lnquiry इंग्लिश में प्रयोग होने वाले बहुत हीं महत्वपूर्ण शब्द हैं यह और बात है कि हम इनको एक हीं शब्द समझने की गलती कर बैठते हैं. अगर आप डिस्टिंक्शन ऑफ वर्ड के पॉइंट ऑफ व्यू से देखेंगे तो आप समझ सकते हैं कि दोनों शब्दों की अपनी है और इससे आप अंग्रेजी के कॉमन एरर पर कमांड कर सकते हैं. तो आइए जानते है Enquiry और lnquiry में क्या है बेसिक डिफरेंस.


इन्क्वायरी (Enquiry) और इनक्वायरी (lnquiry) में अंतर

इन्क्वायरी (Enquiry) एक नाउन है, जिसका मतलब है जानकारी मांगना या ऑफिशियल इन्वेस्टिगेशन करना। यह 'इनक्वायरी (lnquiry) ' वर्ब से जुड़ा है, जिसका मतलब है जानकारी मांगना या किसी की इन्वेस्टिगेशन करना।
मैंने अपने ब्लड टेस्ट के रिज़ल्ट के बारे में पूछने के लिए डॉक्टर को फ़ोन किया।


कांग्रेस ने बड़े बैंकों द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग की इन्वेस्टिगेशन शुरू की।
डिटेक्टिव ने वादा किया कि वह डकैतियों के बारे में कुछ पूछताछ करेगा।

Enquiry" और "Inquiry" शब्द वैसे तो अक्सर एक-दूसरे की जगह इस्तेमाल किए जाते हैं, लेकिन इनके बीच थोड़ा अंतर और उपयोग का फर्क अमेरिकन और ब्रिटिश अंग्रेजी भाषाओं में पाई जाने वाली अंतर के कारण भी पाया जाता है. 


Enquiry का सामान्य मतलब होता है पूछना या कोई जानकारी लेना. आप रेलवे काउंटर पर किसी संस्थान के कस्टमर केयर से कुछ पूछताछ करने के लिए इसका प्रयोग कर सकते हैं. वही Inquiry का तात्पर्य ऑफिशियल जांच से संबंधित होता है.
British English
अगर आप ब्रिटिश इंग्लिश पर गौर करेंगे तो वहां Enquiry का मतलब सामान्य पूछताछ के लिए किया जाता है. वहीं Inquiry का प्रयोग किसी ऑफिशियल एवं आधिकारिक जांच के लिए किया जाता है. 
American English 
वहीं अमेरिकन इंग्लिश पर आप गौर करेंगे तो वहां अधिकांशतः Inquiry ही इस्तेमाल होता है. भले ही वह सामान्य जांच हो या ऑफिसियल, Inquiry शब्द कभीन प्रयोग होता है. दूसरे शब्दों में,  "Enquiry" बहुत कम प्रयोग होता है।

Common Mistakes in Use 
दोनों शब्दों के प्रयोग और Distinction of words की जानकारी के अभाव में हम सामान्यतः रिपोर्ट, कोर्ट केस, या सरकारी दस्तावेज़ में लोग कभी-कभी “Enquiry” लिख देते हैं जबकि ऑफिशियल इन्वेस्टिगेशन में हम Inquiry का प्रयोग करते हैं. 

राष्ट्रपति भवन संग्रहालय: इतिहास को कहानी के रूप में दर्शाने वाला संग्रहालय-जानें खास बातें

President Museum to open from January 05

राष्ट्रपति भवन में अमृत उद्यान (Amrit Udyan Opening Date)  एक बहुत ही अच्छा और खास डेस्टिनेशन हैं जहां आप पूर्ण रूप से एंजॉय कर सकते हैं. अगर आप फूलों को देखने में रोमांस अनुभव करते हैं तो आप यहां पर कई तरह के रंग-बिरंगे फूलों को देख सकते हैं. आपको बता दें कि अमृत उद्यान में ट्यूलिप और गुलाब के फूलों की कई वैरायटी हैं. अमृत उद्यान को पहले मुगल गार्डन (Mughal Garden) के नाम से जाना जाता था. जिसका नाम बदलकर अमृत उद्यान कर दिया गया है. आप भी यहां पर घूमने का प्लान बना सकते हैं. अमृत उद्यान (Amrit Udyan) जाने के लिए ऑनलाइन टिकट बुक कर सकते हैं.


राष्ट्रपति भवन संग्रहालय: खास बातें 

लगभग 10,000 वर्ग मीटर के क्षेत्र में फैला राष्ट्रपति भवन संग्रहालय परिसर (आरबीएमसी)  मुख्य तौर पर राष्ट्रपति भवन के विभिन्न पहलुओं को प्रदर्शित करने के लिए बेहतर तकनीक के साथ तैयार किया गया है जो अद्वितीय है. 


राष्ट्रपति भवन संग्रहालय परिसर (आरबीएमसी) भारतीय स्वतंत्रता, लोकतंत्र और एकता का प्रतीक है।वास्तव में आप  राष्ट्रपति भवन संग्रहालय में उन सभी उपहारों की झलक प्राप्त कर सकते हैं जो  भारत के राष्ट्रपतियों को वर्षों से मिले हैं तथा सभी इस संग्रहालय में संरक्षित है.  इन खूबसूरत  कलाकृतियों के अलावा अन्य भी कई महत्वपूर्ण वस्तुओं को इसमें संभालकर संगृहीत किया गया है जैसे हथियार, फर्नीचर, मूर्तियां, वस्त्र, तस्वीरें, अभिलेखीय सामग्री और भी बहुत कुछ.


मुगल गार्डन भी एक बहुत हीं सुन्दर स्थल है जो पर्यटकों को अपनी खूबसूरती के कारण आकर्षित करता रहा है. 15 एकड़ के विशाल विस्तार में फैले, मुगल गार्डन को अक्सर राष्ट्रपति के महल की आत्मा के रूप में चित्रित किया जाता है. 

मुगल गार्डन अब तक जनता के लिए फरवरी-मार्च के महीनों में आयोजित होने वाले वार्षिक उत्सव उद्यानोत्सव के दौरान ही खोला जाता था, लेकिन मुगल गार्डन, जो राष्ट्रपति भवन के दौरे का तीसरा सर्किट है, अब जनता के लिए खुला रहेगा। राष्ट्रपति भवन संग्रहालय परिसर इतिहास को कहानी के रूप में दर्शाने वाला एक संग्रहालय है जिसमें कला, संस्कृति, विरासत और इतिहास के उत्तम प्रतीकों और अमूल्य कलाकृतियों को प्रदर्शित किया गया है।

प्रत्येक साल फरवरी मार्च में राष्ट्रपति भवन में अमृत उद्यान (Amrit Udyan Opening Date) खुल जाता है. अमृत उद्यान में पर्यटक कई तरह के रंग-बिरंगे फूलों को देख सकते हैं. अमत उद्यान में ट्यूलिप और गुलाब के फूलों की कई वैरायटी हैं. अमृत उद्यान को पहले मुगल गार्डन (Mughal Garden) के नाम से जाना जाता था. जिसका नाम बदलकर अमृत उद्यान कर दिया गया है. आप भी यहां पर घूमने का प्लान बना सकते हैं. अमृत उद्यान (Amrit Udyan) जाने के लिए ऑनलाइन टिकट बुक कर सकते हैं. यह सभी दिन खुला रहेगा (सोमवार और सरकारी अवकाश को छोड़कर)। आगंतुक भ्रमण के लिए वेबसाइट्स- https://presidentofindia.nic.inया https://rashtrapatisachivalaya.gov.in/या https://rbmuseum.gov.in/पर जाकर ऑनलाइन बुकिंग कर सकते हैं।
राष्ट्रपति भवन संग्रहालय परिसर इतिहास को कहानी के रूप में दर्शाने वाला एक संग्रहालय है जिसमें कला, संस्कृति, विरासत और इतिहास के उत्तम प्रतीकों और अमूल्य कलाकृतियों को प्रदर्शित किया गया है।

Inspiring Thoughts: साहस को अपनाएँ... सफलता की कहानी खुद लिखें..

Inspiring  Thoughts: आपकी प्रसन्ता में छिपा  है जीवन की सफलता का रहस्य.... 

दुनिया के सबसे धनी मंदिरों में से एक है श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर, केरल: जानें रोचक तथ्य


तिरुवनंतपुरम, केरल में  स्थित श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर को भगवान पद्मनाभस्वामी (भगवान विष्णु के अवतार) के रुप में मान्यता  है.  केरल और द्रविड़ स्टाइल के मिले-जुले आर्किटेक्चर स्टाइल के साथ, इस मंदिर का इतिहास 8वीं सदी का है मंदिर द्रविड़ शैली की भव्य वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण है। शहर के पूर्वी किले के अंदर मौजूद इस मंडी को  दुनिया का सबसे अमीर मंदिर माना जाता है।

केरल और द्रविड़ स्टाइल के मिले-जुले आर्किटेक्चर स्टाइल के साथ, इस मंदिर का इतिहास 8वीं सदी का है मंदिर द्रविड़ शैली की भव्य वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण है।

मुख्य मूर्ति जानें खासियत 

मुख्य देवता की मूर्ति अपनी बनावट के लिए मशहूर है जिसमें 12008 शालिग्राम हैं, जिन्हें नेपाल से लाया गया था। माना जाता है कि इसे गंडकी नदी के किनारे से लाया गया था। मुख्य मूर्ति, जो 18 फिट लंबी है जिसे तीन अलग-अलग दरवाज़ों से देखी जा सकती है। पहले दरवाज़े से सिर और छाती दिखाई देती है, दूसरे दरवाज़े से हाथ और तीसरे दरवाज़े से पैर देखे जा सकते हैं।

गर्भगृह के सामने ओट्टक्कल मंडपम स्थित है जो एक ही पत्थर के स्लैब से बना मंडपम  है जो  तिरुमाला रॉक खदान से लिए गए एक बड़े एक ही पत्थर के ब्लॉक से बना है। 


मंदिर के अंदर बहुत खूबसूरत पेंटिंग और म्यूरल लगे हैं, जिनमें से ज़्यादातर में लेटे हुए भगवान विष्णु, भगवान गणपति, गज लक्ष्मी और नरसिंह स्वामी (भगवान विष्णु का आधा शेर, आधा इंसान अवतार) की आदमकद तस्वीरें हैं। 

मंदिर का झंडा (ध्वज स्तंभ) सोने की परत चढ़ी तांबे की चादरों से ढका है और लगभग 80 फीट ऊंचा है। बाली पीड़ा मंडपम और मुख मंडपम, जो अलग-अलग हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियों से सजे हॉल हैं, इस मंदिर की कुछ दिलचस्प आर्किटेक्चरल खासियतें हैं। नवग्रह मंडप एक और खास बात है जो सभी विज़िटर्स का ध्यान खींचती है। यहाँ छत पर नवग्रह (नौ ग्रह) दिखाए गए हैं।

365 स्तंभों वाला एक विशाल गलियारा 

पूरब की तरफ से गर्भगृह तक फैला चौड़ा गलियारा देखने लायक है, जिसमें 365 और एक-चौथाई ग्रेनाइट-पत्थर के खंभे हैं जिन पर बहुत अच्छी नक्काशी की गई है। मुख्य दरवाज़े के नीचे, पूरब की तरफ नाटक शाला (जिसका मतलब है ड्रामा हॉल) है। 

भारत के दिव्य देशम या 108 पवित्र विष्णु मंदिरों में से एक माने जाने वाले इस मंदिर में, भगवान विष्णु को फन वाले सांप, अनंत पर लेटे हुए दिखाया गया है। तमिल अज़वार (संतों) की रचनाओं में दिव्य देशम को भगवान विष्णु के सबसे पवित्र निवास के रूप में बताया गया है।

असल में, केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम का नाम श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर के मुख्य देवता के नाम पर रखा गया है, जिन्हें अनंत (जो अनंत नाग पर लेटे हुए हैं) के नाम से भी जाना जाता है। 'तिरुवनंतपुरम' का मतलब है श्री अनंत पद्मनाभस्वामी की भूमि।

स्कंद पुराण और पद्म पुराण में ज़िक्र

पुराणों, जैसे स्कंद पुराण और पद्म पुराण में भी मंदिर का ज़िक्र मिलता है। मंदिर के पास जो पवित्र तालाब है, उसे पद्म तीर्थम कहा जाता है, जिसका मतलब है 'कमल का झरना।'

त्रावणकोर के सबसे मशहूर पुराने शासकों में से एक मार्तंड वर्मा ने मंदिर का बड़ा रेनोवेशन करवाया था, जिससे इसे आज का स्ट्रक्चर और रूप मिला। उन्होंने ही मंदिर में भद्र दीपम और मुराजपम त्योहार शुरू किए थे। 

1750 में, उस समय के राजा मार्तंड वर्मा ने त्रावणकोर का राज्य भगवान पद्मनाभ को समर्पित किया था। आज भी यह मंदिर त्रावणकोर के पुराने शाही परिवार के हेड वाले एक ट्रस्ट द्वारा चलाया जाता है।

इस शानदार मंदिर के पवित्र हॉल और पवित्र जगह ने सदियों से भक्तों और आने वालों को अपनी ओर खींचा है। आज भी श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर इस ज़मीन की समृद्ध विरासत का सबूत है।

  • मंदिर द्रविड़ शैली की भव्य वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण है।
  • इसका गोपुरम (मुख्य द्वार टॉवर) लगभग 100 फीट ऊँचा है।
  • अंदर 365 स्तंभों वाला एक विशाल गलियारा (Corridor) है।
  • स्कंद पुराण और पद्म पुराण में भी मंदिर का ज़िक्र मिलता है।

Mahashivratri : जानें शिव को प्रिय क्यों है यह महीना और क्यों करते हैं शिवलिंग पर जलाभिषेक?


Mahashivratri Puja Muhurat:  महाशिवरात्रि के अवसर पर भगवान शिव को जलाभिषेक करने का चलन होता है। भक्तगण भगवान शिवलिंग पर जल के साथ बेलपत्र, भांग और धतूरा को समर्पित करते हैं। भक्तजनों का ऐसा विश्वास है कि महाशिवरात्रि के दिन भगवान शंकर का पूजन और जलाभिषेक से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।  तो आइए जानते हैं कि इस सावन मे  पहला सोमवार कब पड़ेगा और जानिए पहले सावन सोमवार का शुभ मुहूर्त क्या है। 

क्यों करते हैं शिवलिंग पर जलाभिषेक?

ऐसी मान्यता है कि इस महीने के दौरान भगवान शिव ने ब्रह्मांड को बचाने के लिए समुद्र मंथन के दौरान निकले घातक हलाहल विष का सेवन किया था। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान समुद्र से कई दिव्य चीज़ें निकली थीं, लेकिन उनमें हलाहल भी शामिल था, जो एक ख़तरनाक ज़हर था। दुनिया को इसके प्रभाव से बचाने के लिए भगवान शिव ने ज़हर पी लिया और इसे अपने गले में रख लिया, जिससे ज़हर नीला हो गया और उन्हें नीलकंठ नाम दिया गया।

ज़हर के प्रभाव को कम करने के लिए देवताओं ने भगवान शिव को गंगा जल अर्पित किया। माना जाता है कि यह दिव्य घटना श्रावण के महीने में हुई थी। इसलिए, यह महीना शिव भक्ति को समर्पित है और सावन के दौरान उनकी पूजा करना विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।कहा जाता है कि विष के प्रभाव को कम करने के लिए देवताओं ने शिव पर गंगा जल डाला और भक्ति का यह कार्य सावन के दौरान विशेष पूजा और उपवास के माध्यम से जारी रहता है। कहा जाता है कि भगवान शंकर ने उस हलाहल विष को अपने कंठ पर हीं रोककर उसके असर को खतम कर दिया था और इसलिए भगवान शंकर को नीलकंठ भी कहा जाता है। 

सावन सोमवार पूजा विधि (पूजा विधि)

हालांकि सावन के इस पवित्र महीने का हर दिन भगवन शंकर के पूजन के लिए उत्तम माना जाता है और भक्तजन अपने सुख और  समृद्धि और शांतिपूर्ण जीवन के लिए भगवान शंकर से आशीर्वाद मांगने का दिन होता है, लेकिन सावन के सोमवार को भगवान शंकर के व्रत (सोमवार व्रत) के लिए विशेष अवसर माना जाता है।

सावन सोमवार पूजा के लिए सबसे जरूरी है कि खुद को पवित्र करें जिसमें शामिल है तन और मन से पवित्र होना। इसके लिए वैसे तो आप विभिन्न पूजा कि पुस्तकों से मदद ले सकते हैं, हालांकि आप निम्न स्टेप्स को अपनाकर सावन सोमवार का व्रत कर सकते हैं। 

  • सुबह जल्दी उठें और सूर्योदय से पहले स्नान करें।
  • अपने घर के मंदिर को साफ करें और शिवलिंग पर गंगाजल मिला हुआ जल या दूध चढ़ाएं।
  • भगवान शिव को बेलपत्र, सफेद फूल, धतूरा, भस्म (पवित्र राख) और फल चढ़ाएं।
  • “ॐ नमः शिवाय” का जाप करें या शिव चालीसा का पाठ करें।
  • पूरे दिन व्रत रखें और शाम को पूजा करने के बाद व्रत तोड़ें।
  • संभव हो तो नज़दीकी शिव मंदिर जाएँ।
 शिव पुराण के अनुसार  सावन के महीने में शिवलिंग पर जल अर्पित करने वाले भक्तजन को विशेष पुण्य मिलता है। इस महीने मे श्रद्धालु पवित्र जल को लेकर पैदल चलकर भगवान शिव को जल अर्पण करते हैं।  शिव पुराण के अनुसार मान्यता है कि ऐसा करने से भगवान शंकर को शीतलता और प्रसन्न करने का माध्यम माना गया है। इसके साथ ही सावन के प्रत्येक सोमवार कि विशेष महता है और ऐसा करने से शिवजी जल्दी प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं।
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अस्वीकरण: कृपया ध्यान दें कि लेख में उल्लिखित टिप्स/सुझाव केवल सामान्य जानकारी है जो विभिन्न सामाजिक और धार्मिक आस्था पर आधारित हैं.ताकि आपको उस मुद्दे के बारे में अपडेट रखा जा सके जो कि आम लोगों से अपेक्षित है. आपसे निवेदन है कि कृपया इन सुझावो को  पेशेवर सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए तथा अगर आपके पास इन विषयों से सम्बंधित कोई विशिष्ट प्रश्न हैं तो हमेशा सम्बंधित एक्सपर्ट से अवश्य परामर्श करें।


पूर्णिमा को जन्म लेने वाले होते हैं सूर्य के समान सितारा: गौतम बुद्ध , महर्षि वेदव्यास, नानक देव और अन्य


वैसे तो कार्तिक महीना का व्रत त्योहार को लेकर खास महत्व होता है जिसमें दीपावली, करवा चौथ, भाई दूज सहित सबसे खास आस्था के महापर्व छठ का आयोजन इसी महीने में होता है। वैसे में भला कार्तिक पूर्णिमा खास क्यों नहीहोगा जो इसी महीने का समापन का दिन होता हैं वैसे तो पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है खासकर कार्तिक पूर्णिमा का जिसे कार्तिक स्नान और अन्य महत्व का दिन के लिए भी जाना जाता है। आइए जानते हैं कि पूर्णिमा का क्यों खास महत्व है। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि एकम  तिथि के बाद धीरे-धीरे चन्द्रमा की  कला के अनुसार तिथि बढ़ते जाता है और पूर्णिमा को चन्द्रमा पूर्ण हो जाता है  इसलिए पूर्णिमा को पूर्णता का प्रतीक माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि 
पूर्णिमा का प्रभाव रचनात्मकता और कलात्मक प्रवृत्तियों को बढ़ावा देता है और इस  दिन  को जन्म लेने वाले लोगों की कल्पना शक्ति अक्सर प्रबल होती है और ये कला, लेखन, संगीत या अन्य रचनात्मक गतिविधियों से संबंधित क्षेत्रों में उत्कृष्टता प्राप्त कर सकते हैं।जैसा कि आप जानते हैं कि पंचांग के अनुसार एकम या प्रतिपदा से लेकर पूर्णिमा तक कुल 15 तिथियां और अमावस्या होती है. इन अलग-अलग तिथियों को जन्म लेने वाले जातकों की अलग-अलग विशेषता होती है जो उनके व्यवहार से लेकर उनका व्यक्तित्व, सोच, स्वास्थय और विभिन्न गुणों को प्रदर्शित करता है. आज हम बात करेंगे विख्यात कुंडलीशास्त्र, नुमेरोलॉजिस्ट और मोटिवेटर हिमांशु  रंजन शेखर से कि  पूर्णिमा तिथि को जन्म लेने वाले जातकों की क्या होती विशेषता। 

न  केवल ज्योतिष और कुंडलीशास्त्र के अनुसार, बल्कि भौगोलिक दृष्टिकोण से अगर देखी जाए तो पूर्णिमा का हमारे जीवन में खास महत्त्व होता है. कई घरों में पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु जिन्हे सत्यनारायण भगवान् के नाम से भी पुकारा जाता है, उनका पूजन किया जाता है.  जाहिर है की एक महीने में पूर्णिमा का दिन अगर इतना महत्व का है तो निश्चित हीं पूर्णिमा के दिन जन्म लेना शुभ माना जाता है.  

पूर्णिमा के दिन जन्मे बच्चे कैसे होते हैं

वैदिक ज्योतिष के अनुसार भी पूर्णिमा के दिन जन्मे लोगों को भाग्यशाली समझा जाता है और ऐसे व्यक्ति मानसिक रूप से मजबूत, बुद्धिमान, और सफल होता है. ऐसे लोग अक्सर दयालु होते हैं और धनवान भी बनते हैं, हालांकि कुंडली में अन्य ग्रहों की स्थिति और व्यक्तिगत प्रयास भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. 

एस्ट्रोलॉजी के अनुसार अलग-अलग तिथियों को जन्म लेने  वाले व्यक्तियों में खास लक्षण और गुण  पाए जाते हैं और उसमे अगर आप पूर्णिमा की महत्त्व को देखेंगे तो हिन्दू पंचांग के अनुसार इसका अलग स्थान होता है. गुरु पूर्णिमा, बुद्ध पूर्णिमा, शरद पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा, श्रावण पूर्णिमा सहित अन्य पूर्णिमा है जिनके स्थान होता है. स्वाभाविक है कि पूर्णिमा को जन्म लेने वाले लोग भी खास गुणों से परिपूर्ण होते हैं. 


उदार प्रवृति: 

पूर्णिमा के दिन जन्म लेने वाले जातक की सबसे बड़ी विशेषता यह होती है कि  ऐसे लोग अपने जीवन में काफी उदार प्रवृत्ति वाले होते हैं ऐसे लोग दूसरों के मनोभावों को और भावनाओं को काफी अच्छी तरह समझते हैं.  यह लोग अपने संबंधी या आपने आसपास के लोगों को हमेशा सुखी  देखना चाहते हैं और उनके सुख दुख में हमेशा साथ रहते हैं वह कभी भी अपने संबंधियों के वह हमेशा वह हमेशा अपने संबंधियों और अपने दोस्तों की आवश्यकता के समय उपलब्ध रहते हैं. 

जानें किस दिन को जन्म लेने वाले लोग होते हैं रोमांटिक और अपने पार्टनर के प्रति केयरिंग

भगवान में विशेष अनुरक्ति 

 पूर्णिमा के दिन जन्म लेने वाले जातक भगवान में अत्यधिक विश्वास करने वाले होते हैं और उनका ऐसा मान्यता है कि ईश्वर हमेशा उनके लिए उपलब्ध रहते हैं. ईश्वर की  भक्ति और पूजा-पाठ उनके जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा होती है और उनका यह मान्यता है की ईश्वर होता है जो  किसी भी संकट या कष्ट में वह मदद करता है. ऐसे विश्वास का कारण भी होता क्योंकि  ये लोग अपने कार्यो को  अंजाम तक पहुंचाने के दौरान भी ईश्वर को नहीं भूल सकते हैं. 

गुरु/पिता का विशेष स्थान:

पूर्णिमा के दिन जन्म लेने वाले जातकों में अपने  गुरु और पिता के प्रति विशेष अनुरक्ति देखी  जाती है. जीवन में किसी भी उपलब्धि या विशेष अवसरों पर  ऐसे लोग अपने पिता और अपने गुरु को विशेष तौर पर याद करना  हैं और सारा श्रेय उन्हें हीं देना पसंद करते हैं. उनका ऐसा मान्यता है कि जीवन में पिता  और टीचर  के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता और जीवन में वाे इनके  प्रति वे काफी अनुराग दिखाते हैं और अपना पथ प्रदर्शक और मोटीवेटर मानते हैं.

वचन के पक्के: 

पूर्णिमा के दिन जन्म लेने वाले जातकों की सबसे बड़ी विशेषता यह होती है कि वह वचन के काफी  पक्के होते हैं. उनके लिए उनके द्वारा किया गया कोई भी वादा या वचन अपने जीवन से काफी जरूरी है और इसके लिए वह किसी भी हद तक जा सकते हैं. उनके लिए  अपने द्वारा दिया गया कोई भी वचन या किया गया वादा को हर हाल में पूरा किया जाना और  ऐसे लोग ईमानदारी के साथ उसे पूरा करने की कोशिश भी करते हैं. 

यशस्वी और प्रभावशाली:

पूर्णिमा के दिन जन्म लेने वाले जातक काफी यशस्वी और प्रभावशाली होते हैं जो जीवन में काफी प्रभाव छोड़ने में सफल  रहते हैं. ऐसे लोग अपने कर्मों और अपने सोच की वजह से जीवन में काफी आगे बढ़ते हैं साथ ही दुनिया को रोशनी भी दिखाने का काम करते हैं. उन्हें जो भी काम जीवन में मिलती है वे लोग उसे काफी तल्लीनता के साथ करना पसंद करते हैं.

ईमानदारी: 

ईमानदारी पूर्णिमा के दिन जन्म लेने वाले लोगों का सबसे प्रमुख विशेषता होती है जीवन जीने के लिए ऐसे लोग ईमानदारी को काफी तवज्जो देते  हैं और जीवन में आगे बढ़ने का सबसे प्रमुख कारण यही होती है कि वे अपने जीवन के  हर क्षेत्र   में  चाहे वह इनके निजी जीवन  हो या परिवारिक जीवन हो सामाजिक जीवन हो या प्रोफेशनल फ्रंट,  हर जगह वह इमानदारी से अपने काम को अंजाम देते हैं.

पूर्णिमा  के दिन जन्म लेने  वालों में अक्सर समाज और दुनिया के महापुरुषों और धार्मिक  हस्तियों का नाम आता है. पूर्णिमा के दिन जिन महापुरुषों और धार्मिक हस्तियों का जन्म हुआ था उनमे शामिल हैं-

गौतम बुद्ध: बौद्ध धर्म के संस्थापक भगवान बुद्ध का जन्म, ज्ञान प्राप्ति (बुद्धत्व), और महापरिनिर्वाण (मृत्यु) तीनों ही वैशाख पूर्णिमा के दिन हुए थे। इस दिन को बुद्ध पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है।

महर्षि वेदव्यास: जिन्होंने वेदों का संकलन किया और महाभारत की रचना की, उनका जन्म आषाढ़ पूर्णिमा को हुआ था। इस दिन को भारत में गुरु पूर्णिमा या व्यास पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है।

गुरु नानक देव जी: सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी का जन्म पारंपरिक रूप से कार्तिक पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है, जिसे गुरु नानक जयंती के नाम से जाना जाता है।

संत कबीर दास: कई ऐतिहासिक स्रोतों और मान्यताओं के अनुसार, संत कबीर का जन्म ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन हुआ था।

चैतन्य महाप्रभु: गौड़ीय वैष्णव धर्म के एक प्रमुख संत और समाज सुधारक चैतन्य महाप्रभु का जन्मदिन फाल्गुन पूर्णिमा को 'गौरा पूर्णिमा' के रूप में मनाया जाता है।



English Is Easy : जानें किलिंग, मर्डर और एसेसिनेशन शब्द के प्रयोग में अंतर और सामान्य गलतियां


Distinction Of Words के अंतर्गत हम आज जानेंगे हत्या के लिए प्रयोग किये जाने वाले तीन कॉमन उपरोक्त वर्ड्स  और उनके अर्थ तथा उनके प्रयोग को लेकर किस प्रकार की सावधानियां बरती जानी चाहिए. याद रखें कि इनके प्रयोग को लेकर विभिन्न कॉम्पिटिटिव  एग्जामिनेशन में कॉमन एरर के लिए छात्रों को कंफ्यूज करने के लिए  शब्दों का विशेष रूप  से प्रयोग किया जाता है. तो आइये जानते हैं कि किलिंग, मर्डर और एसेसिनेशन में समानताएं और विभिन्नताएं है. 

किलिंग, मर्डर और एसेसिनेशन का सामान्य अर्थ हत्या होता है जो  मुख्य रूप से इरादे, कानूनी मान्यता और टिप्पणियों के आधार पर अलग-अलग होते हैं.  


 किलिंग (आम शब्द): सबसे बड़ा शब्द; इसका मतलब है किसी भी जीवित प्राणी, चाहे वह इंसान हो या जानवर, की मौत का कारण बनना। यह एक्सीडेंटल, कानूनी (जैसे, सेल्फ-डिफेंस), या गैर-कानूनी (होमिसाइड) हो सकता है। 

मर्डर (गैर-कानूनी और बताई): किसी इंसान की पहले से सोची-समझी और गैर-कानूनी हत्या के लिए एक कानूनी शब्द। “Murder” का अर्थ है — जानबूझकर और अवैध रूप से किसी की हत्या करना। आप कह सकते हैं कि इसके लिए जान से मारना या गंभीर नुकसान पहुंचाने की बुरी नियत या इरादे की ज़रूरत होती है। इसमें स्पष्ट इरादा (malicious intent) होता है यह हमेशा कानूनी अपराध (crime) होता है।

जानें Continuous और Continual शब्द के प्रयोग में अंतर

एसेसिनेशन  : का मतलब है किसी प्रसिद्ध, महत्वपूर्ण या राजनीतिक व्यक्ति की सुनियोजित हत्या। यह हमेशा साजिश (planned) के तहत होता है और इसके सम्बन्ध में सबसे खास बात  यह होती है कि यह आमतौर पर राजनीतिक, वैचारिक या सत्ता से जुड़े कारणों के लिए  किया जाता है। पीड़ित कोई जाना-माना व्यक्ति होता है, आमतौर पर पॉलिटिक्स की दुनिया में।आप सावधान रहें कि Assassination का शिकार व्यक्ति सामान्य नहीं, बल्कि कोई सार्वजनिक हस्ती (public figure) होती है। 

Valentine Day Special: दिल को छू लेने वाले ये कोट्स भेजें अपने खास को

Valentine Day Messages Quotes Valentine day 2024 Valentine Week

वैलेंटाइन डे प्यार का त्योहार है और इस दिन प्रेमी अपने पार्टनर को प्रेम का अहसास दिलाने के लिए खास तैयारियां करते हैं । यह दिन दुनिया भर के प्रेमी जोड़ों के लिए बेहद खास होता है जहाँ प्रेमी कपल इस दिन का पुरे साल इन्तजार करते हैं। इस दिन प्रेमी जोड़े एक-दूसरे के प्रति अपने प्यार का इजहार करते हैं। वे एक-दूसरे को उपहार देते हैं, रोमांटिक डिनर पर जाते हैं, या एक साथ समय बिताते हैं।

वैलेंटाइन डे हमें यह याद दिलाता है कि हमारे जीवन में प्यार कितना महत्वपूर्ण है। यह हमें अपने साथी के प्रति अपना प्यार व्यक्त करने का मौका देता है।

वैलेंटाइन डे को मनाने के कई तरीके हो सकते हैं और यह खास आपके और आपके पार्टनर की समझ और पसंद पर निर्भर करता है। आखिर आप और आपके पार्टनर को एक दूसरे से अधिक कौन समझ सकता है और इसके लिए आप खुद ही तय करें कि अपने साथी के साथ कैसे यादगार शाम बना सकते हैं. इसके लिए आप एक रोमांटिक डिनर पर जा सकते हैं, एक साथ पार्क में घूम सकते हैं, या एक साथ किसी फिल्म देख सकते हैं। आप अपने साथी को एक उपहार दे सकते हैं, या उसे एक प्यारा सा ग्रीटिंग कार्ड लिख सकते हैं।

अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए आप निम्न पंक्तियों की मदद ले सकते हैं जो आपके पार्टनर को आपके लिए और भी खास बनाने में मदद करेंगी. 

1. तुम 

विश्वास मैं कैसे दूँ, 

जीने की हो प्रेरणा हो तुम 

तेरा कोई विकल्प नहीं, 

कुछ पाने का संकल्प हो तुम 

मेरे इच्छाओं की सीमा हो,

अभिलाषाओं का अंत हो तुम. 


वैलेंटाइन डे स्पेशल 2026: जन्मतिथि से जानें अपने साथी का रोमांटिक नेचर और प्यार का अंदाज़

Valentine day birth day and romantic mood of your partner

वैलेंटाइन डे स्पेशल: वैलेंटाइन वीक शुरू हो चुका है और आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि जन्म के दिन का प्रभाव व्यक्ति के स्वभाव और रोमांटिक मूड पर भी पड़ता है। सप्ताह के प्रत्येक दिन का संबंध एक विशेष ग्रह से होता है, जो व्यक्ति के व्यक्तित्व और प्रेम भावनाओं को प्रभावित करता है। आइए जानते हैं कि किस दिन जन्मे लोग रोमांस के मामले में कैसे होते हैं—

निश्चित रूप से वैलेंटाइन डे 2026  के अवसर पर अपने साथी के प्यार और रिश्ते के रुझान को जानना आपके लिए फायदेमंद और सहायक होगा।

शनिवार (Saturday) – गंभीर लेकिन गहरे प्रेमी

शनिवार को जन्मे लोग अपने पार्टनर के साथ रिलेशनशिप के मामले में बहुत ज़्यादा ध्यान रखते हैं। शनिवार को जन्मे लोग अपने निजी रिश्तों में कभी भी धोखा नहीं देते और प्यार करते हैं और पार्टनर की रुचि और महत्व को समझते हैं। आम तौर पर ऐसे लोग अपने जीवनसाथी या पार्टनर को उच्च घराने से लेते हैं जो आलीशान जीवन जीते हैं और हाई प्रोफाइल समाज और पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखते हैं।

रविवार (Sunday) – आत्मविश्वासी और आकर्षक प्रेमी

रविवार को जन्मे लोग शर्मीले स्वभाव के होते हैं और अपने पार्टनर के सामने अपने प्यार का इज़हार करने की दिशा में पहला कदम नहीं उठा पाते। चूंकि रविवार को जन्मे लोग भगवान सूर्य के अधीन होते हैं और जाहिर है कि ऐसे लोग अपने अहंकार और स्वाभिमान को अपने जीवन में सबसे पहले तरजीह देते हैं। अहंकारी रवैया और स्वाभिमानी स्वभाव उनके पार्टनर के सम्मान को ठेस पहुंचाने का कारक हो सकता है और इसके परिणामस्वरूप आपसी रिश्तों में विश्वास की कमी होती है। रविवार को जन्मे लोग बाहरी तौर पर शांत रहते हैं लेकिन जब कोई मुद्दा उनके सामने आता है तो वे अपना धैर्य खो देते हैं।

सोमवार (Monday) – संवेदनशील और भावुक प्रेमी

सोमवार को जन्मे लोग अपने पार्टनर के साथ खुशनुमा जीवन जीते हैं। अपने साथी के प्रति देखभाल और प्यार से पेश आना और अपने साथी के प्रति देखभाल और ध्यान देना उनके जीवन का पहला आदर्श वाक्य है। वे अपने साथी के प्रति कोमल स्वभाव और यहां तक ​​कि अपनी बातचीत में नरमी दिखाते हैं। हालांकि ऐसे लोग स्वभाव से शांत रहते हैं, वे स्वतंत्र विचारधारा को प्राथमिकता देते हैं जो उनके रिश्ते में कुछ बाधाएं और भ्रम पैदा करता है। यदि वे अपने बीच के मतभेदों का समाधान ढूंढ लेते हैं तो वैवाहिक जीवन सामंजस्यपूर्ण हो सकता है। ये लोग बेहद इमोशनल, केयरिंग और सच्चे प्रेमी होते हैं साथ हीं अपने पार्टनर की भावनाओं को गहराई से समझते हैं और उन्हें प्राथमिकता देते हैं।

रोमांस में ये कोमलता, मिठास और गहराई पसंद करते हैं तथा कभी-कभी जरूरत से ज्यादा इमोशनल हो सकते हैं, जिससे मूड स्विंग्स हो सकते हैं।

मंगलवार (Tuesday) – जुनूनी और जोशीले प्रेमी

मंगलवार को जन्मे लोग स्वभाव से गुस्सैल होते हैं क्योंकि वे मंगल ग्रह द्वारा शासित होते हैं। क्रोध से भरा स्वभाव और व्यवहार उनके रिश्ते को थोड़ा खट्टा कर देता है जब वे अपने मतभेदों का उचित समाधान खुद ही खोज लेते हैं। ऐसे लोगों को जीवन साथी या दोस्ती के लिए सुंदर/स्मार्ट और आकर्षक साथी मिलते हैं जो उन्हें अपने जीवन में शांति प्रदान करते हैं। हालांकि, क्रोधी स्वभाव उनके रिश्ते में परेशानियां और मतभेद पैदा करता है। हालांकि, मतभेदों के बावजूद, वे इन मुद्दों का उचित समाधान ढूंढ लेते हैं और कुल मिलाकर एक खुशहाल और सुखद जीवन जीते हैं

 बुधवार (Wednesday) – चुलबुले और मज़ेदार प्रेमी

बुधवार को जन्मे लोग सुखद व्यक्तित्व के स्वामी होते हैं। इसके कारण, वे अपने जीवन में एक मित्र के रूप में कई व्यक्तियों को प्रभावित करने की शक्ति रखते हैं, लेकिन वे कभी भी अपने सच्चे साथी को धोखा नहीं देते हैं। इस तथ्य के बावजूद कि बुधवार को जन्मे लोगों के जीवन में कई दोस्त होते हैं, वे व्यक्तिगत मोर्चे पर एक खुशहाल और परिपूर्ण जीवन जीते हैं क्योंकि वे अपने साथी के गौरव को प्यार और सम्मान करते हैं। 

 गुरुवार (Thursday) – वफादार और आध्यात्मिक प्रेमी

गुरुवार को जन्मे लोगों के संबंध गुरुवार को जन्मे व्यक्ति के लिए स्थिरता, विश्वसनीयता और देखभाल व्यक्तिगत और रिश्ते के लिए सबसे सही विशेषण हैं। उनके व्यक्तिगत संबंधों के बंधन में उनकी समझ और आपसी सहयोग होता है जो ऐसे व्यक्तित्वों के लिए स्थिर और खुशहाल जीवन की नींव रखता है। 

शुक्रवार (Friday) – रोमांटिक और आकर्षक प्रेमी

शुक्रवार को जन्मे लोगों के संबंध शुक्रवार को जन्मे लोग शुक्र द्वारा शासित और शासित होते हैं और वे अपने व्यक्तित्व में कई अनूठी विशेषताओं के स्वामी होते हैं। अपने व्यक्तित्व के साथ कई विशेष गुणों के कारण, ऐसे लोगों में लोगों को आसानी से अपना मुरीद बनाने की विशेष कला होती है और निश्चित रूप से यह उनके प्रेम संबंधों को भ्रम और विश्वास की कमी का एक सेट बनाता है। हालांकि पूर्णता और उदार मानसिकता के कारण ऐसे लोगों का वैवाहिक जीवन अच्छा रहा, उन्हें विश्वास और विश्वास के साथ अपने रिश्ते की स्थिरता पर ध्यान देने की आवश्यकता है।

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अस्वीकरण: कृपया ध्यान दें कि लेख में बताए गए सुझाव/सुझाव केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से हैं ताकि आपको इस मुद्दे के बारे में अपडेट रखा जा सके जो आम लोगों से अपेक्षित है और इन्हें पेशेवर सलाह के रूप में नहीं समझा जाना चाहिए/पालन नहीं किया जाना चाहिए। हम अनुशंसा करते हैं और आपसे अनुरोध करते हैं कि यदि आपके पास एस्ट्रोलॉजी संबंधित विषय से के बारे मे कोई विशिष्ट प्रश्न हैं, तो हमेशा अपने पेशेवर सेवा प्रदाता से परामर्श करें।