थर्मोस्फीयर: MCQ क्विज़

 


थर्मोस्फीयर पृथ्वी के वायुमंडल की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ऊपरी परत है जहाँ तापमान बहुत अधिक होता है और अंतरिक्ष स्टेशन परिक्रमा करते हैं। “परत” किसी संरचना के स्तर को दर्शाती है, जबकि “थर्मामीटर” तापमान मापने का उपकरण है।

यह विषय सामान्य ज्ञान, स्कूल शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

प्रश्न 1. थर्मोस्फीयर वायुमंडल की कौन-सी परत है?

A. पहली

B. दूसरी

C. चौथी

D. पाँचवीं

उत्तर: C. चौथी

प्रश्न 2. थर्मोस्फीयर लगभग कितनी ऊँचाई से शुरू होती है?

A. 10 किमी

B. 50 किमी

C. 80 किमी

D. 150 किमी

उत्तर: C. 80 किमी

प्रश्न 3. निम्नलिखित में से कौन-सी घटना थर्मोस्फीयर में होती है?

A. वर्षा

B. बादल बनना

C. ऑरोरा

D. ओस बनना

उत्तर: C. ऑरोरा

प्रश्न 4. International Space Station किस परत में परिक्रमा करता है?

A. क्षोभमंडल

B. समतापमंडल

C. मध्यमंडल

D. थर्मोस्फीयर

उत्तर: D. थर्मोस्फीयर

प्रश्न 5. थर्मोस्फीयर में तापमान अधिक होने का मुख्य कारण क्या है?

A. बादलों की अधिकता

B. सूर्य की ऊर्जावान किरणों का अवशोषण

C. वर्षा

D. वायु दाब

उत्तर: B. सूर्य की ऊर्जावान किरणों का अवशोषण

प्रश्न 6. वायुमंडल की सबसे निचली परत कौन-सी है?

A. समतापमंडल

B. मध्यमंडल

C. क्षोभमंडल

D. थर्मोस्फीयर

उत्तर: C. क्षोभमंडल

प्रश्न 7. “परत” का सही अर्थ क्या है?

A. ऊँचाई

B. स्तर (Layer)

C. तापमान

D. दबाव

उत्तर: B. स्तर (Layer)


प्रश्न 8. थर्मामीटर का उपयोग किसे मापने के लिए किया जाता है?

A. दबाव

B. ऊँचाई

C. तापमान

D. आर्द्रता

उत्तर: C. तापमान

प्रश्न 9. थर्मामीटर के प्रारंभिक विकास का श्रेय किसे दिया जाता है?

A. आइंस्टीन

B. न्यूटन

C. Galileo Galilei

D. एडिसन

उत्तर: C. गैलीलियो गैलिली

प्रश्न 10. आयनमंडल (Ionosphere) मुख्यतः किस परत में पाया जाता है?

A. क्षोभमंडल

B. मध्यमंडल

C. थर्मोस्फीयर

D. एक्सोस्फीयर

उत्तर: C. थर्मोस्फीयर

प्रश्न 11. थर्मोस्फीयर में तापमान लगभग कितना हो सकता है?

A. 50°C

B. 200°C

C. 500°C

D. 1500°C या अधिक

उत्तर: D. 1500°C या अधिक

प्रश्न 12. थर्मोस्फीयर के ऊपर की परत क्या कहलाती है?

A. समतापमंडल

B. मध्यमंडल

C. एक्सोस्फीयर

D. क्षोभमंडल

उत्तर: C. एक्सोस्फीयर

नजरिया जीने का: प्रधानमंत्री के क्रोध को त्‍यागने वाला कौन सा श्लोक आज हर जुबान पर है

कहने की जरुरत नहीं है कि आज क्रोध और गुस्सा इंसानों पर सबसे विकृत रूप में हावी हो चूका है. आज छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा  का आलम यह है कि हम अपने शांति और विनय जैसे आचरणों को लगभग भूल से गए है. 
ऐसा लगता है, शायद इसलिए हीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बार के सुभषित के अंतर्गत क्रोध और गुस्सा पर अपने विचार व्यक्त किये हैं.   

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय सद्भाव के लिए क्रोध को त्‍यागने की आवश्यकता पर बल देते हुए संस्कृत श्लोक का उद्धरण दिया जो निम्न प्रकार से है-

क्रोधः प्राणहरः शत्रुः क्रोधो मित्रमुखो रिपुः।

क्रोधो ह्यसिर्महातीक्ष्णः सर्व क्रोधोऽपकर्षति॥

इसका अर्थ है कि क्रोध प्राण लेने वाला शत्रु है, जो मित्र के रूप में दिखता है पर भीतर से दुश्मन होता है।  क्रोध अत्यंत तीक्ष्ण (धारदार) तलवार के समान है, जो जीवन की हर अच्छाई को काट देता है।

क्रोधः प्राणहरः शत्रुः क्रोधो मित्रमुखो रिपुः।

क्रोधो ह्यसिर्महातीक्ष्णः सर्व क्रोधोऽपकर्षति॥ pic.twitter.com/GBxlYC0oIH

— Narendra Modi (@narendramodi) December 12, 2025

नजरिया जीने का: जानें वृक्ष के चिरस्थायी लाभों को समर्पित प्रधानमंत्री का सुन्दर श्लोक 

वास्तव में उक्त श्लोक वाल्मीकि  रामायण से लिए गया है जिसका चर्चा प्रधानमंत्री  ने राष्ट्रीय सद्भाव के लिए क्रोध को त्‍यागने की आवश्यकता बताते हुए किया है. 

क्रोधः  प्राणहरः शत्रु:  क्रोधो  मित्रमुखी  रिपुः  |

 क्रोधो हि असिर्महातीक्ष्णः सर्वं क्रोधोपकर्षति ||             

                                      -वाल्मीकि  रामायण

गुस्सा अर्थात  क्रोध एक दुश्मन की तरह है जो किसी की जान ले सकता है और दोस्तों के बीच दुश्मनी का मुख्य कारण भी है। गुस्सा निश्चित रूप सेएक बहुत तेज़ तलवार की तरह है, जो हर किसी को नुकसान और अपमान पहुंचा सकता है।

दूसरे  शब्दों में कहें तो गुस्सा  प्राणहरण करने  वाले शत्रु के समान है  तथा मित्रों के बीच शत्रुता होने का कारण भी होता है |  क्रोध वास्तव में एक तीक्ष्ण  तलवार के समान है जो सब् को अपमानित कर हानि पहुंचाता है. श्लोक का साफ अर्थ है कि हमें गुस्सा अर्थात क्रोध पर पूर्ण नियंत्रण करना चाहिए. 

नजरिया जीने का: सकारात्मक और उत्साही लोगों के साथ समय बिताएं, जीवन का हर मुश्किल होगा आसान

Inspiring Thoughts Positive Attitude and its Importance in Life

नजरिया जीने का  :  जीवन  में  सफलता  के लिए हमेशा अपनाएँ पांच सकारात्मक दृष्टिकोण जिसके बिना आप नकारात्मकता और असफलता के शिकार हो सकते  हैं.याद रखें इन पांच सकारात्मक मानसिक दृष्टिकोण की फैक्टर्स को जिनमें शामिल हैं- लचीलापन, साहस,आशावाद, कृतज्ञता और स्वीकृति। सकारात्मक सोच हीं जीवन मे सफलता का एकमात्र मूलमंत्र है और इसमे हमें तनिक भी संदेह नहीं होना चाहिए।
 पहले के मुहावरों मे कहा जाता था कि अकेला चना भांड नहीं फोड़ता लेकिन आज अगर आप इतिहास उठा कर देखेंगे तो अकेले लोगों ने अपने बूते न केवल अपने संगठन बल्कि देश और समाज को भी अग्रणी पहुंचाने मे आगे रहे हैं। यह ठीक है कि कारवां का बनना सफलता कि गारंटी को बढ़ा देता है, लेकिन यह भी ध्यान रखें कि उस कारवां के बनने का विचार या आइडिया किसी एक व्यक्ति का हीं होता है। यह याद रखें कि लोगों को अगर अपनी क्षमताओं पर भरोसा होता है, तो उनके सफल होने और सफल होने की संभावना अधिक होती है। 



जो लोग जीवन के प्रति अधिक सकारात्मक दृष्टिकोण रखते हैं, वे तनाव से बेहतर तरीके से निपटते हैं, उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है और समय से पहले मृत्यु का जोखिम कम होता है।


इस सच्चाई से भला किसे इनकार हो सकता है कि जीवन में मुश्किलें आती रहती हैं और जीवन कभी भी फूलों का सेज नहीं रहा। आप इतिहास उठाकर देख लें, जिसकों जीवन मे जितना ऊपर जाना होता है, उसके रास्ते मे प्रकृति ने उतने ही बाधाओं एयर काँटों को बिछाकर उनका परीक्षा लेती है। कहते हैं न,
" वही पथ क्या  पथिक परीक्षा क्या,  जिस पथ मे बिखरे शुल न हो। 
नाविक कि धैर्य परीक्षा क्या,  यदि धाराएं प्रतिकूल न हो। 
सकारात्मक दृष्टिकोण हमें सकारात्मक सोचने में आसान बनाता है और यह हमें चिंताओं और नकारात्मक सोच से बचने की कला भी सिखाता है.

लेकिन याद रखें, जीवन मे इन बाधाओं और परेशानियों से मुक्ति पाने के लिए हमें सकारात्मक सोच रखना बहुत ज़रूरी है। सकारात्मक सोच एक विकल्प है।  यह हमेशा आसान नहीं होता है, लेकिन यह अभ्यास के साथ बेहतर होता जाता है। आपको हमेशा इसका ध्यान रखना होगा कि जिन लोगों के साथ आप समय बिताते हैं, उनका आपके मूड पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है इसलिए हमेशा हीं सकारात्मक और उत्साही लोगों के साथ समय बिताने कि कोशिश करें।  

जीवन में सफलता के लिए यह जरुरी है कि हम नकारात्मक सोच और ऐसी प्रवृति वाले लोगों से एक खास दुरी बनाकर अपने प्रयासों पर फोकस करें। यह सकारात्मक दृष्टिकोण का अभ्यास हीं है जो आपके जीवन में आशावाद और आशावादी दृष्टिकोण लाता है। 

बेशक अगर सकारात्मक और आशा के अनुरूप घटने वाली घटनाओं का हम स्वागत  करते हैं लेकिन थोड़ी से कुछ अप्रिय घटनाएं  हमारे  जीवन में दस्तक  देती  हैं कि हम अपने जीवन और परिस्थितियों को कोसना आरम्भ कर देते हैं.


 लेकिन हमें यह याद रखना होगा कि केवल सकारात्मक दृष्टिकोण ही हमें जीवन के दैनिक जटिल और अप्रिय मामलों से अधिक आसानी से निपटने में मदद करता है।

यह सकारात्मक दृष्टिकोण का अभ्यास है जो आपके जीवन में आशावाद और आशावादी दृष्टिकोण लाता है। सकारात्मक दृष्टिकोण हमें सकारात्मक सोचने में आसान बनाता है और यह हमें चिंताओं और नकारात्मक सोच से बचने की कला भी सिखाता है...


 अपने जीवन में सफल होने के लिए, यदि कोई आपके जीवन में कुछ रचनात्मक परिवर्तन की उम्मीद कर रहा है, तो सकारात्मक दृष्टिकोण को जीवन के तरीके के रूप में अपनाने की आवश्यकता है।
Attitude  भले एक छोटी से चीज सही लेकिन सच यह है कि जीवन के इसी बड़े और महत्वपूर्ण फर्क लाने के लिए यह बहुत प्रभावी भूमिका निभाती है.


सकारात्मक और आशावादी दृष्टिकोण  की मदद से कई लोगों यहाँ तक की कई प्रसिद्ध हस्तियों ने कई बड़ी बीमारियों या संघर्षों के साथ अपनी लड़ाई जीत ली है. वावजूद इस तथ्य के कि जीतना मुश्किल था.
वास्तव में केवल एटीट्यूड ही काफी नहीं है..लेकिन जीवन में हमारी सफलता के लिए सकारात्मक और आशावादी दृष्टिकोण की आवश्यकता है.
मनोवृत्ति मूल रूप से वह तरीका है जिसमें हम किसी चीज़ के प्रति व्यवहार करते हैं या सोचते हैं या महसूस करते हैं .आम तौर पर हम अपनी सोच, भावनाओं तथा  अन्य पहलुओं के संदर्भ में अपना दृष्टिकोण प्रदर्शित करते हैं। वास्तव में आपकी सोच गठन के पीछे मूल कारण है किसी चीज के प्रति आपका नजरिया.
यदि आप सकारात्मक सोचने के आदि  हैं और किसी भी घटना का केवल सकारात्मक पक्ष देखते हैं तो आप अपने जीवन के बारे में सकारात्मक दृष्टिकोण रखते हैं. आप जिस मुद्दे से निपट रहे हैं, उसके बारे में बात करें और इसके लिए नेगेटिव विचारों को अपने मन में घर नहीं करने दें...

याद रखें, प्रकृति भी   आपके अंदर उत्पन्न विचारों को हीं सशक्त करने और उसे पूरा करने की लिए बल देती है, और इसलिए हैं हमें बचपन से यह पढ़ाया जाता है कि -" हमें अपने मन में बुरे विचारों को  लाने से बचना चाहिए"

आपका Attitude  आपके आस-पास हो रही घटनाओं के बारे में आपकी राय बनाने में आपकी मदद करता है... सोचने के तरीके ने आपके विचारों को तय किया और निश्चित रूप से यह आपके कार्यों में दिखाई देता है। जिस वातावरण में आप रह रहे हैं, वह भी आपके दृष्टिकोण के प्रभाव  प्रदर्शित करता है.

दुनिया में ऐसे लोग भी हैं जिन्होंने अपनी मामूली चोटों और जीवन की कठिनाइयों के कारण जीवन के निराशावादी और नकारात्मक रवैये के कारण दम तोड़ दिया है.

अपने जीवन में हर असफलता के लिए अपने आस-पास की परिस्थितियों को दोष न दें. आपके जीवन में कठिन परिस्थितियों से निपटने के लिए अपनी मानसिकता और दृष्टिकोण को बदलने की आवश्यकता है.।

आपके सकारात्मक और आशावादी दृष्टिकोण में आपके जीवन में आपकी हर सफलता/असफलता का कारण प्रदान करने की शक्ति है और इसलिए अपने सोचने के तरीके को नज़रअंदाज़ न करें.निश्चित रूप से यह आपके जीवन में कठिन परिस्थितियों से निपटने का मूल तरीका है,

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आपको अपने जीवन में आने वाली हर घटना के साथ सकारात्मक दृष्टिकोण रखना होगा चाहे वह पेशेवर हो या व्यक्तिगत। यह एक भावनात्मक स्थिति हो सकती है जिस पर आपको ध्यान देने की आवश्यकता है… सभी घटनाओं से निपटने के लिए आपको सकारात्मक और आशावादी रवैया रखना होगा। मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक सहित .


विश्वास करें, आपमें परिस्थितियों को बदलने के लिए एटीट्यूड की शक्ति है क्योंकि आप अपनी खुद की परिस्थितियों के निर्माता हैं अपने सकारात्मक और आशावादी दृष्टिकोण के साथ।

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अस्वीकरण: कृपया ध्यान दें कि लेख में उल्लिखित टिप्स/सुझाव केवल सामान्य जानकारी है जो विभिन्न सामाजिक और धार्मिक आस्था पर आधारित हैं.ताकि आपको उस मुद्दे के बारे में अपडेट रखा जा सके जो कि आम लोगों से अपेक्षित है. आपसे निवेदन है कि कृपया इन सुझावो को  पेशेवर सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए तथा अगर आपके पास इन विषयों से सम्बंधित कोई विशिष्ट प्रश्न हैं तो हमेशा सम्बंधित एक्सपर्ट से अवश्य परामर्श करें।

Mercury Retrograde क्या है? जानें Date , कब तक चलेगा क्या होगा इसका प्रभाव?

what is Mercury Retrograde Shadow Period

Mercury Retrograde क्या है: Mercury (बुध ग्रह) सौरमंडल का सबसे तेज़ ग्रह है। जब पृथ्वी और Mercury अपनी-अपनी कक्षाओं में घूमते हैं, तो एक समय ऐसा आता है जब पृथ्वी, Mercury को पीछे छोड़ देती है। इस दौरान हमें पृथ्वी से ऐसा लगता है कि Mercury उल्टी दिशा में चल रहा है। मर्करी रेट्रोग्रेड एक बार फिर 26 फरवरी, 2026 को शुरू होगा और 20 मार्च, 2026 को खत्म होगा। माना जाता है कि साल के ये समय आपके मूड और कामों पर काफी असर डालते हैं। नीचे 2026 मर्करी रेट्रोग्रेड की तारीखों के बारे में और जानें। जानें कि कम्युनिकेशन, ट्रैवल और टेक्नोलॉजी के लिए मर्करी रेट्रोग्रेड का क्या मतलब है, और यह आपकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर कैसे असर डाल सकता है।

इसी दृश्य भ्रम को Mercury Retrograde कहा जाता है। यह वास्तव में उल्टा चलना नहीं है, बल्कि एक optical illusion (दृश्य भ्रम) है।

Mercury Retrograde कितने समय तक रहता है?

हर बार Mercury Retrograde लगभग 3 सप्ताह (21 से 24 दिन) तक रहता है।

साल में कितनी बार होता है?

Mercury Retrograde आमतौर पर साल में 3 से 4 बार होता है।

हर कुछ महीनों में यह चक्र दोबारा आता है।

Shadow Period क्या होता है?

Retrograde शुरू होने से लगभग 1–2 हफ्ते पहले और खत्म होने के 1–2 हफ्ते बाद भी इसका प्रभाव महसूस किया जाता है।

इसे “Shadow Period” कहा जाता है।

मतलब कुल मिलाकर इसका असर लगभग 6 से 8 हफ्तों तक महसूस हो सकता है।

Mercury Retrograde के दौरान क्या होता है?

अपनी वक्री अवस्था के दौरान, बुध या कोई भी अन्य ग्रह वास्तव में अंतरिक्ष में पीछे की ओर गति नहीं करता या धीमा नहीं होता। बुध की वक्री अवस्था तब होती है जब ग्रह राशिचक्र में अपने सामान्य पथ पर यात्रा कर रहा होता है और फिर, हमारे दृष्टिकोण से, कुछ समय के लिए रुकने से पहले धीमा हो जाता है और फिर अपनी आभासी गति को उलट कर ब्रह्मांड में उस स्थान पर लौट आता है जहाँ वह हाल ही में था। यह राशिचक्र में एक विशिष्ट बिंदु तक पीछे की ओर जाता है और फिर एक बार फिर धीमा हो जाता है, कुछ समय के लिए रुकता है और फिर से आगे की ओर बढ़ता हुआ प्रतीत होता है

GK Quiz : UPSC, SSC, Railway, NDA आदि में पूछे गए सवालों का कलेक्शन

26 जनवरी 2026 Quiz : रिपब्लिक डे पर UPSC, SSC, Railway, NDA आदि में पूछे गए सवालों का कलेक्शन

प्रतियोगिता परीक्षा  (UPSC, SSC, Railway, NDA, State PSC विभिन्न राज्य सेवा आयोगों ) की परीक्षा में पूछे जाते रहे है. आगामी प्रतियोगिता परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए तथा अन्य अवसरों जैसे स्कूल, प्रतियोगी परीक्षा, मंच संचालन, ब्लॉग और क्विज़ प्रतियोगिता के लिए जरुरी ये प्रश्नोत्तर आपके लिए काफी उपयोगी हैं. 

प्रश्न 1. भारत का संविधान किस तिथि को लागू हुआ?

  • उत्तर: 26 जनवरी 1950
  • परीक्षा: UPSC Prelims
  • वर्ष: 2016

प्रश्न 2. 26 जनवरी को ही संविधान लागू करने का निर्णय क्यों लिया गया था?

  • उत्तर: 26 जनवरी 1930 को पूर्ण स्वराज की घोषणा हुई थी
  • परीक्षा: SSC CGL
  • वर्ष: 2018

प्रश्न 3. संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष कौन थे?

  • उत्तर: डॉ. राजेंद्र प्रसाद
  • परीक्षा: Railway Group D
  • वर्ष: 2019

प्रश्न 4.भारतीय संविधान की प्रारूप समिति (Drafting Committee) के अध्यक्ष कौन थे?

  • उत्तर: डॉ. भीमराव अंबेडकर
  • परीक्षा: SSC CHSL
  • वर्ष: 2020


प्रश्न 5. भारत का पहला गणतंत्र दिवस परेड कहाँ आयोजित हुआ था?

  • उत्तर: इरविन स्टेडियम, दिल्ली
  • परीक्षा: NDA
  • वर्ष: 2015


प्रश्न 6. भारत के पहले गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि कौन थे?

  • उत्तर: सुकर्णो (इंडोनेशिया)
  • परीक्षा: State PSC (UPPSC)
  • वर्ष: 2017


प्रश्न 7. संविधान को बनने में कुल कितना समय लगा?

  • उत्तर: 2 वर्ष 11 महीने 18 दिन
  • परीक्षा: SSC GD
  • वर्ष: 2021


प्रश्न 8. भारतीय संविधान की मूल भाषा क्या थी?

  • उत्तर: अंग्रेज़ी
  • परीक्षा: Railway NTPC
  • वर्ष: 2020


प्रश्न 9. गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रपति को कितनी तोपों की सलामी दी जाती है?

  • उत्तर: 21 तोपों की
  • परीक्षा: CDS
  • वर्ष: 2016


प्रश्न 10. संविधान सभा की पहली बैठक कब हुई थी?

  • उत्तर: 9 दिसंबर 1946
  • परीक्षा: UPSC Prelims
  • वर्ष: 2014


प्रश्न 11. भारत को “गणराज्य” घोषित करने का क्या अर्थ है?

  • उत्तर: देश का प्रमुख जनता द्वारा चुना जाता है
  • परीक्षा: SSC MTS
  • वर्ष: 2019


प्रश्न 12. गणतंत्र दिवस समारोह का समापन किस देशभक्ति गीत से होता है?

  • उत्तर: सारे जहाँ से अच्छा
  • परीक्षा: Railway ALP
  • वर्ष: 2018


प्रश्न 13. संविधान में मौलिक कर्तव्य किस संशोधन द्वारा जोड़े गए?

  • उत्तर: 42वां संविधान संशोधन
  • परीक्षा: UPSC Prelims
  • वर्ष: 2017


प्रश्न 14. प्रारंभ में भारतीय संविधान में कितनी अनुसूचियाँ थीं?

  • उत्तर: 8 अनुसूचियाँ
  • परीक्षा: State PSC (BPSC)
  • वर्ष: 2016


प्रश्न 15.भारत का संविधान विश्व में किस रूप में जाना जाता है?

  • उत्तर: विश्व का सबसे लंबा लिखित संविधान
  • परीक्षा: SSC CPO
  • वर्ष: 2022


प्रश्न 16.संविधान सभा की पहली बैठक कब हुई थी?

  • उत्तर: 9 दिसंबर 1946
  • परीक्षा: UPSC Prelims
  • वर्ष: 2014


प्रश्न 17.संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष कौन थे?

  • उत्तर: डॉ. राजेंद्र प्रसाद
  • परीक्षा: SSC CHSL
  • वर्ष: 2020


प्रश्न 18. भारतीय संविधान की प्रारूप समिति (Drafting Committee) के अध्यक्ष कौन थे?

  • उत्तर: डॉ. भीमराव अंबेडकर
  • परीक्षा: UPSC Prelims
  • वर्ष: 2017


प्रश्न 19. भारतीय संविधान को बनने में कुल कितना समय लगा?

  • उत्तर: 2 वर्ष 11 महीने 18 दिन
  • परीक्षा: SSC GD
  • वर्ष: 2021


प्रश्न 20.भारत का पहला गणतंत्र दिवस परेड कहाँ आयोजित हुआ था?

  • उत्तर: इरविन स्टेडियम, दिल्ली
  • परीक्षा: SSC MTS
  • वर्ष: 2017


प्रश्न 21.संविधान में मौलिक कर्तव्य किस संविधान संशोधन द्वारा जोड़े गए?

  • उत्तर: 42वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1976
  • परीक्षा: UPSC Prelims
  • वर्ष: 2017


प्रश्न 22.प्रारंभ में भारतीय संविधान में कितनी अनुसूचियाँ थीं?

  • उत्तर: 8 अनुसूचियाँ
  • परीक्षा: SSC CHSL
  • वर्ष: 2016


प्रश्न 23.“गणराज्य” का सही अर्थ क्या है?

  • उत्तर: राज्य का प्रमुख जनता द्वारा चुना जाता है
  • परीक्षा: SSC MTS
  • वर्ष: 2019


प्रश्न 24.गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रपति को कितनी तोपों की सलामी दी जाती है?

  • उत्तर: 21 तोपों की
  • परीक्षा: UPSC Prelims
  • वर्ष: 2013


प्रश्न 25. भारतीय संविधान को किस तिथि को अंगीकृत (Adopt) किया गया?

  • उत्तर: 26 नवंबर 1949
  • परीक्षा: UPSC Prelims
  • वर्ष: 2019
(Based on Memory)

Unique GK Quiz (With Answers)

प्रश्न 1.

भारत का संविधान किस तिथि से लागू हुआ?

उत्तर: 26 जनवरी 1950

प्रश्न 2.

26 जनवरी को ही संविधान लागू करने का मुख्य कारण क्या था?

उत्तर: 26 जनवरी 1930 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज की घोषणा की थी

प्रश्न 3.

भारतीय संविधान को तैयार करने में कुल कितना समय लगा?

उत्तर: 2 वर्ष 11 महीने 18 दिन


प्रश्न 4.

भारतीय संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष कौन थे?

उत्तर: डॉ. राजेंद्र प्रसाद

प्रश्न 5.

भारतीय संविधान की प्रारूप समिति (Drafting Committee) के अध्यक्ष कौन थे?

उत्तर: डॉ. भीमराव अंबेडकर

प्रश्न 6.

गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रपति को 21 तोपों की सलामी क्यों दी जाती है?

उत्तर: यह सर्वोच्च संवैधानिक पद का सम्मान दर्शाने की परंपरा है

प्रश्न 7.

भारत का पहला गणतंत्र दिवस परेड कहाँ आयोजित हुआ था?

उत्तर: इरविन स्टेडियम (वर्तमान में नेशनल स्टेडियम), दिल्ली

प्रश्न 8.

भारतीय संविधान किस देश के संविधान से सबसे अधिक प्रभावित है?

उत्तर: ब्रिटेन

प्रश्न 9.

गणतंत्र दिवस परेड में झांकी का मुख्य उद्देश्य क्या होता है?

उत्तर: भारत की सांस्कृतिक, सामाजिक और विकासात्मक विविधता का प्रदर्शन

प्रश्न 10.

भारत के पहले गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि कौन थे?

उत्तर: सुकर्णो (इंडोनेशिया के राष्ट्रपति)

प्रश्न 11.

संविधान में मौलिक कर्तव्य किस संशोधन द्वारा जोड़े गए?

उत्तर: 42वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1976

प्रश्न 12.

गणतंत्र दिवस समारोह का समापन किस गीत से होता है?

उत्तर: सारे जहाँ से अच्छा

प्रश्न 13.

भारत को “गणराज्य” घोषित करने का अर्थ क्या है?

उत्तर: देश का प्रमुख जनता द्वारा चुना गया हो, न कि राजा

प्रश्न 14.

संविधान सभा की पहली बैठक कब हुई थी?

उत्तर: 9 दिसंबर 1946

प्रश्न 15.

भारतीय संविधान की मूल भाषा कौन-सी थी?

उत्तर: अंग्रेज़ी

प्रश्न 16.

गणतंत्र दिवस परेड में तीनों सेनाओं की संयुक्त टुकड़ी किसका प्रतीक है?

उत्तर: राष्ट्रीय एकता और सैन्य शक्ति

प्रश्न 17.

संविधान में कितनी अनुसूचियाँ प्रारंभ में थीं?

उत्तर: 8 अनुसूचियाँ


प्रश्न 18.

भारत का संविधान विश्व का कैसा संविधान है?

उत्तर: विश्व का सबसे लंबा लिखित संविधान

प्रश्न 19.

26 जनवरी को राष्ट्रपति कौन-सा विशेष सम्मान प्रदान करते हैं?

उत्तर: पद्म पुरस्कार एवं वीरता पुरस्कार

प्रश्न 20.

गणतंत्र दिवस भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

उत्तर: क्योंकि इसी दिन भारत एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य बना

नजरिया जीने का: कठिन समय से विचलित होना कायरों का काम है-ऐसे करें सामना

जीवन, जिसे हम अक्सर सरल मान लेते हैं, वास्तव में यह कोई 'फूलों का सेज' नहीं है। यह एक जटिल और निरंतर चलने वाली यात्रा है। इस सफ़र में कभी हम खूबसूरत वादियों से गुजरते हैं, जहाँ सब कुछ हसीन लगता है, तो कभी हमें मुश्किलों और चुनौतियों के ऊबड़-खाबड़ रेगिस्तान से भी दो-चार होना पड़ता है। 

लेकिन याद रखें, कठिन समय में मन का विचलित होना स्वाभाविक है, पर उसी क्षण आपका साहस आपकी पहचान बनाता है क्योंकि सच यही है कि  जीवन में जो तूफ़ान से नहीं डरते, वही आसमान पर राज करते हैं।

फ़र्क़ सिर्फ हमारे नज़रिए का होता है। कुछ लोग इन मुश्किल घड़ियों में टूटकर बिखर जाते हैं, जबकि कुछ लोग इन्हीं हालातों की तपिश से अपनी एक नई और मज़बूत पहचान गढ़ते हैं। 
याद रखें, कठिन समय आपको तोड़ने नहीं, तराशने आता है—ठीक उसी तरह जैसे पत्थर पर हथौड़े की चोट से सुंदर मूर्ति बनती है। जैसा कि एक मशहूर कहावत है:

"मुश्किलें दिल के इरादे आज़माती हैं, स्वप्न के परदे निगाहों से हटाती हैं। हौसला मत हार गिरकर ओ मुसाफ़िर, ठोकरें इंसान को चलना सिखाती हैं।"

यह संसार सिर्फ हमारे अकेले के लिए नहीं बना है। जीवन में सिर्फ अपने सुख-दुख तक सीमित रहना, जीवन के असली मर्म को समझने से चूक जाना है। जब हम दूसरों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करते हैं, तभी हमारी यात्रा सार्थक होती है।

जब हालात आपके खिलाफ हों, तब ही आपकी असली क्षमता सामने आती है। वो कहते हैं ना, "मुश्किलें आपकी राह में इसलिए नहीं आतीं कि आप रुक जाएं, बल्कि इसलिए कि आप और मजबूत बनें।"

याद रखें, जीवन में दो हीं लोग असफल होते हैं - एक जो सोचते हैं पर करते नहीं, और दूसरे जो करते हैं पर सोचते नहीं। मतलब साफ़  है, कायर वही होते हैं जो डर का सामना करने से पहले ही हार मान लेते हैं, जबकि बहादुर वे हैं जो गिरकर भी उठना नहीं भूलते।

जीवन में कठिन समय का आना और जाना लगा रहता है; आप इससे बच नहीं सकते। ये चुनौतियाँ अनिवार्य हैं, लेकिन इनसे निपटने का आपका तरीका, आपकी सकारात्मक सोच (Positive Thinking) और आपका रवैया (Attitude) ही आपको इन मुश्किलों से बाहर निकाल सकता है।
आपका एटीट्यूड ही तय करता है कि आप उस मुश्किल को एक रुकावट के तौर पर देखते हैं या एक अवसर के तौर पर।
"सफलता खुशी की कुंजी नहीं है। खुशी सफलता की कुंजी है। यदि आप जो कर रहे हैं उससे प्यार करते हैं, तो आप सफल होंगे।" - अल्बर्ट श्वाइत्ज़र

जब आप मुश्किल समय से गुज़र रहे हों, तो दोस्तों और परिवार के साथ जुड़ना और अपने मन की बात साझा करना, तनाव को कम करने में मदद करता है। यह आपके मूड को बेहतर बनाता है और जीवन में आए अचानक बदलावों और व्यवधानों को समझने की शक्ति देता है।

हर व्यक्ति के जीवन में ऐसे दौर आते हैं जब सब कुछ उलझा हुआ और अंधकारमय लगता है। यह वह समय होता है जब हमें सबसे अधिक धैर्य की ज़रूरत होती है। 

जीवन में कठिन समय हर किसी के हिस्से आता है, लेकिन उससे टूट जाना समाधान नहीं है। जो लोग जीवन की चुनौतियों को साहस के साथ स्वीकार करते हैं, वही आगे बढ़ते हैं और सफलता का स्वाद चखते हैं।

यही समय हमारी असली ताकत और हमारे चरित्र का इम्तिहान होता है। जो व्यक्ति इस कठिन दौर में धैर्य बनाए रखता है, जो शांत रहकर सही निर्णय लेता है, वही आगे चलकर अनगिनत लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनता है।

"धैर्य एक कड़वा पौधा है, लेकिन इसके फल बहुत मीठे होते हैं।"

जीवन की इस यात्रा में, चाहे रास्ता कितना भी पथरीला क्यों न हो, अपनी उम्मीद की मशाल जलाए रखें। हर मुश्किल आपको सिखाने आई है, हराने नहीं। अपने एटीट्यूड को सही दिशा दें, अपनों का साथ लें और धैर्य रखें — आप न केवल इन मुश्किलों से पार पाएंगे, बल्कि एक बेहतर और मज़बूत इंसान बनकर उभरेंगे।


नजरिया जीने का: इन टिप्स से बचाएं खुद को नेगेटिव थॉट्स के ट्रैप में फंसने से

नकारात्मक विचारों का आना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है और आप इसे नकार नहीं सकते है। अगर आप सभी बड़े और सफल व्यक्तित्व वाले लोगों  की जीवनी को पढ़ेंगे तो पाएंगे कि उन्हें भी इससे गुजरना पड़ता है. हर इंसान के मन में कभी न कभी नकारात्मक विचार आते हैं लेकिन यह जानना जरुरी है कि इन नकारात्मक विचारों  से  आप  कितना जल्दी निकलते हैं क्योंकि अगर आप इनके इन्फ्लुएंस में आ  गए तो फिर आप पॉजिटिव विचारों से दूर हो सकते हैं. याद रखें, नकारात्मक विचारों को खुद से दूर रखना ज्यादा जरुरी है क्योंकि ये आते तो सबके दिमाग में हैं, लेकिन इससे निकलना सभी को नहीं आता क्योंकि हम खुद को मोटिवेट करने के टेक्निक से वाकिफ नहीं होता या नकारात्मक विचारों के गिरफ्त में बुरी तरह से फंस चुके होते हैं. 

जब ये विचार बार-बार आने लगें और लंबे समय तक टिके रहें, तो यह एक मानसिक ट्रैप की तरह हमें अपने गिरफ्त में ले लेता है जो  न केवल हमारे आत्मविश्वास को कमजोर करता है, बल्कि हमारे व्यवहार, निर्णय और स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है।

नजरिया जीने का: जानें वृक्ष के चिरस्थायी लाभों को समर्पित प्रधानमंत्री का सुन्दर श्लोक 

खुद से सवाल करें 

नकारात्मक विचारों का दौर हर किसी के जीवन में आता है, लेकिन यह याद रखना जरूरी है कि विचारों को नियंत्रित किया जा सकता है। कभी आपने सोचा है कि अचानक आखिर नकारात्मक विचार क्यों जगह बना लेते हैं. कुछ सवाल ऐसे होते हैं जो सीधे तौर पर नकारात्मक विचार हमारे अंदर हावी करते हैं जैसे कोई असफलता या निराशा का डर खासतौर पर जब चीजें हमारे मन मुताबिक नहीं होतीं या हमें किसी आशा के विपरीत निराशा मिलती है. 

जीवन शार्ट नहीं लॉन्ग रेस है 

दूसरों से हमें अपनी तुलना की आदत भी काफी बुरा प्रभाव डालती है और हमें आज  के प्रतिस्पर्धा वाले दौर में हम किसी से मामूली रूप से भी पिछड़ना नहीं चाहते हैं. हम  ये भूल जाते हैं कि जीवन शार्ट रेस नहीं बल्कि लॉन्ग रेस है और मामूली बढ़त या पीछा होना कोई मतलब है है क्योंकि इसे स्ट्रेटेजी कहते हैं और अंतिम राउंड में जीत को  फाइनल कहा जाता है. 

उम्मीद की एक लौ को जलाना सीखें 

हर नकारात्मक विचार को चुनौती दें, क्योंकि वही आपके आत्मबल की परीक्षा है।”सकारात्मक सोच रखने वाले दोस्तों, परिवार या मार्गदर्शकों से जुड़े रहें। इसके साथ ही जब मन उदास हो, तब अपने भीतर झांकिए — वहां उम्मीद की एक लौ हमेशा जलती रहती हैऔर उस लौ को हमेशा जलाये रखिये. 

अतीत  की जाल से बाहर निकलें 

अक्सर हम अपने  अतीत या पुरानी गलतियों को बार-बार याद करके अपने वर्तमान को खराब करते हैं. यह तय है कि जो ख़तम हो चूका है या बीत गया है वह लौट  नहीं सकता और उससे सिर्फ सबक लेकर हमें आगे की कर देखना हीं हमारे भविष्य का निर्माण करेगा. इसके अतिरिक्त पुराने अतीत के बारे में लगातार सोचने से तनाव, चिंता और अवसाद बढ़ता है जो न केवल हमारे वर्तमान बल्कि भविष्य को भी ख़राब करती है. 

 खुद को कम आंकने की गलती 

जबकि यह सत्य है कि ईश्वर ने हम सभी में विलक्षण प्रतिभा से परिपूर्ण कर भेजा हैं लेकिन अक्सर हम खुद को कम आंकना खास तौर पर दूसरों से अपने  को कम आंकने की बीमारी पाल लेते हैं। इसके कारण  हमें यह लगने लगता  है की समय हमारे साथ नहीं है या मुझमे वह योग्यता नहीं है। ऐसी सोच को किसी भी प्रकार से सही नहीं कहा जा सकता क्योंकि यह सोच हीं  हमारी सफलता में सबसे बड़ी बाधा है. इसके अतिरिक्त यह आपके मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाते हैं और यह दीर्घकालिक भी रह सकता है. 


तंपारा झील ओडिशा: पक्षियों की 60, मछलियों की 46 और फाइटोप्लांकटन की 48 प्रजातियों से पूर्ण, जाने खासियत

Tampara Lake freshwater lakes Odisha Facts In Brief



तंपारा झील ओडिशा: तंपारा झील, ओडिशा  राज्य के गंजाम जिले में स्थित एक खूबसूरत और शांत जलाशय है जो वहाँ के  प्राकृतिक सौंदर्य और जैव विविधता का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। तंपारा झील एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप मे विख्यात है और अपनी सुंदरता के कारण पर्यटकों के बीच लोकप्रिय है। पर्यटक यहाँ बोटिंग और वॉटर स्पोर्ट्स का आनंद ले सकते हैं। इसके अतिरिक्त यह अपनी जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है क्योंकि झील के आसपास कई प्रकार के पक्षी पाए जाते हैं, जो इसे बर्ड वॉचिंग के लिए एक बेहतरीन स्थान बनाते हैं।तम्पारा झील पक्षी प्रेमियों के लिए आदर्श स्थान है क्योंकि यहां प्रवासी और स्थानीय पक्षियों की कई प्रजातियाँ देखी जा सकती हैं।

यह झील पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए एक आकर्षक पर्यटन स्थल है। यह स्थल प्रकृति प्रेमियों, फोटोग्राफरों और उन सभी के लिए आकर्षण का केंद्र है जो शांति और प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेना चाहते हैं। यहां का शांत वातावरण और सुंदर परिदृश्य मन को शांति और सुकून प्रदान करते हैं।
तंपारा झील एक मीठे पानी की झील है जो लगभग 300 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली हुई है. यह ओडिशा राज्य की सबसे बड़ी मीठे पानी की झीलों में से एक है जो राज्य की खूबसूरत झीलों मे से एक है। यह आर्द्रभूमि दुर्लभ प्रजातियों जैसे कि साइप्रिनस कार्पियो, कॉमन पोचार्ड (अथ्या फेरिना), और रिवर टर्न (स्टर्ना औरंतिया) के लिए एक महत्वपूर्ण निवास स्थान है।

 यह रुशिकुल्या नदी के दाहिने किनारे पर स्थित है जो एक प्राकृतिक स्थल होने के साथ ही यह महत्वपूर्ण पक्षी विहार और एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल हैतंपारा झील एक महत्वपूर्ण पक्षी विहार है और यहां पर कई प्रजातियों के पक्षी पाए जाते हैं. यह झील एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल भी है और यहां पर लोग तैराकी, बोटिंग और मछली पकड़ने का आनंद लेते हैं. झील के किनारे पर कई होटल और रेस्तरां हैं, जहां पर लोग भोजन और आराम कर सकते हैं.

तंपारा झील: 
भारत में स्वतंत्रता के 75वें वर्ष में देश में 13,26,677 हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करते हुए कुल 75 रामसर स्थलों को बनाने के लिए रामसर स्‍थलों की सूची में 11 और आर्द्रभूमि शामिल हो गई हैं। रामसर स्थलों के रूप में नामित 11 आर्द्रभूमियों में से  ओडिशा स्थित तंपारा झील भी शामिल है. 

तंपारा झील: Facts in Brief 

तंपारा झील गंजम जिले में स्थित ओडिशा राज्य की सबसे प्रमुख मीठे पानी की झीलों में से एक है। यहां की भूमि का क्षेत्र धीरे-धीरे वर्षा जल के प्रवाह से भर गया और इसे अंग्रेजों द्वारा "टैम्प" कहा गया और बाद में स्थानीय लोगों द्वारा इसे "तंपारा" कहा गया।

आर्द्रभूमि पक्षियों की कम से कम 60 प्रजातियों, मछलियों की 46 प्रजातियों, फाइटोप्लांकटन की कम से कम 48 प्रजातियों और स्थलीय पौधों और मैक्रोफाइट्स की सात से अधिक प्रजातियों का पालन करती है। 

तंपारा झील एक महत्वपूर्ण पक्षी विहार है. यहां पर कई प्रजातियों के पक्षी पाए जाते हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • सारस
  • बगुला
  • हंस
  • कबूतर
  • तोता
  • मैना
  • कोयल
  • मोर
  • चकवा
  • बतख

आर्द्रभूमि दुर्लभ प्रजातियों जैसे कि साइप्रिनस कार्पियो, कॉमन पोचार्ड (अथ्या फेरिना), और रिवर टर्न (स्टर्ना औरंतिया) के लिए एक महत्वपूर्ण निवास स्थान है। प्रति वर्ष 12 टन की अनुमानित औसत मछली उपज के साथ, आर्द्रभूमि स्थानीय समुदायों के लिए आजीविका का एक महत्वपूर्ण स्रोत है।

 यह आर्द्रभूमि मछलियों के साथ-साथ कृषि और घरेलू उपयोग के लिए पानी जैसे प्रावधान की सेवाएं भी उपलब्‍ध कराती है और यह एक प्रसिद्ध पर्यटन और मनोरंजन स्थल भी है।

तम्पारा  झील: जाने क्या है खासियत? 

तम्पारा  एक मीठे पानी की झील है जो राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या  5 के निकट (छत्रपुर से) सुंदर में स्थित है. तंपारा झील की सबसे बड़ी खासियत है कि इसके  किनारे पर हल्की लहरें उठती हैं और या वाटर सम्बंधित गतिविधियों के लिए शानदार डेस्टिनेशन है,तट के किनारे स्थित काजू के बागानों से होकर बंगाल की खाड़ी के अविर्जिन समुद्र तट तक जाने वाली रोमांचक यात्रा का आनंद भी आप उठा सकते हैं.

चित्रांगुडी अभ्यारण्य 

FAQ

पर्यटकों के लिए तम्पारा पहुँचने के लिए किस प्रकार के मार्ग उपलब्ध है?

हवाई जहाज

अगर आप हवाईजहाज से जाना चाहते हैं तो निकटतम हवाई अड्डा भुवनेश्वर है.

 ट्रेन से

अगर आप ट्रेन से तम्पारा पहुंचना चाहते हैं तो निकटतम रेलवे स्टेशन छत्रपुर है. 

सड़क द्वारा 

यह झील ओडिशा के छत्रपुर शहर के पास स्थित है और राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-16) से आसानी से पहुँचा जा सकता है। अगर आप सड़क द्वारा जाना चाहते हैं तो सड़क मार्ग से यह छत्रपुर से 4 किमी दूर है. 

नजरिया जीने का: हर झगड़े में जीतने से ज्यादा जरूरी है रिश्ते को बचाना


आज के दौड़ में जहाँ मोबाइल फ़ोन और सोशल साइट्स ने हमें छदम रूप से पास किया है, सच्चाई यह है कि हम चिठियों वाले युग से भी अपनों से दूर हो चुके है. आजकल के भागदौड़ वाले जीवन में कंफ्लिक्ट्स या विचारों में अंतर का होना भले हीं  बात है, लेकिन सच्चाई यह है कि झगड़े से दूरी और प्यार से नजदीकी बनती है लेकिन हम इस वास्तविकता को समझने के लिए तैयार नहीं हैं. रिश्तों की बागडोर को बनाए रखने के लिए हम अपने बीच के मतभेदों की दीवारों को अपने कद से काफी ऊंचा रखने लगे हैं. 

हम यह भूल से गए हैं की कुछ रिश्ते माफी मांगने से नहीं, समझने से सुलझते हैं और हमारे अहंकार और ईगो का कद इतना बड़ा  हो चूका है कि हमें माफ़ी मांगने में संकोच होने लगा है. 

झगड़े इंसान को तोड़ते हैं, समझौता रिश्तों को जोड़ता है

जुबान के तीखे शब्द सबसे बड़े झगड़े की जड़ बन सकते हैं और इसलिए यह जरुरी है कि आप रिश्तों की जीवंतता के लिए जुबान  लगाम रखें. याद रखें, झगड़े इंसान को तोड़ते हैं, समझौता रिश्तों को जोड़ता है  और इसलिए समझौतों की अहमियत  को समझें.  लेकिन यह भी सच है कि भावनात्मक रूप से परेशान करने वाला या कठोर नहीं होना चाहिए क्योंकि यह कहा गया है कि "अगर हम हर लड़ाई जीतना चाहें, तो शायद रिश्ते हार जाएंगे।"और आप विश्वास करें कि यही जीवन का एकमात्र सच्चाई है। 

लड़ाई जितने के लिए रिश्तों को नहीं हराएँ  

आज के इस दौर मे जहां हमें अपने हेक्टिक जीवनशैली  और भागती जिंदगी मे रिश्तों को बचाने कि जदोजहद से दो चार होना हमारी लाचारी बन चुकी है, ऐसे मे अगर हम झगड़ों कि कीमत पर सह-अस्तित्व की भावना को तिलांजलि देंगे तो बहाल जीवन का क्या हश्र होगा? जब रिश्तों की बात आती है तो मनमुटाव का होना अपरिहार्य है और इसे अवॉइड करना कुछ हद तक मुश्किल होता है। 

अहंकार का कद छोटा होना आवश्यक 

क्या यह सच नहीं है कि जहां अहंकार खत्म होता है, वहां झगड़ा भी खत्म हो जाता है और इसके लिए यह जरूरी है कि हम  झगड़ों को छोड़कर सह-अस्तित्व की भावना को बढ़ावा दें ताकि हमारा जीवन सँवर सके। जीवन में सह-अस्तित्व का मतलब हीं यही है कि  मिल-जुलकर रहना और  दूसरों की भावनाओं का सम्मान करना और संघर्षों से ऊपर उठना। हर झगड़े में जीतने से ज्यादा जरूरी है रिश्ते को बचाना और इसके लिए जरुरी है कि  जब आप झगड़ों से बचकर एक-दूसरे को समझने और अपनाने का प्रयास करते हैं, तो जीवन में सुख, शांति और संतोष बढ़ता है।

समझौता रिश्तों को जोड़ता है

अगर आप जीवन मे झगड़े और समझौते के महत्व को समझेंगे तो इसमें कोई संदेह नहीं है कि एक तरफ जहां झगड़े इंसान को तोड़ते हैं, समझौता रिश्तों को जोड़ता है। समझौते कि कीमत को समझें और झगड़े कि नकारात्मक प्रभाव को कभी भी जीवन मे तवज्जो नहीं दें। 

अक्सर हम जीवन मे खुद के कद से अधिक अपने अहंकार को बना लेते हैं जो एक प्रमुख वजह होता है आपस के रिश्तों को खत्म कर अहंकार के बीजारोपन का। याद रखें, जहां अहंकार खत्म होता है, वहां झगड़ा भी खत्म हो जाता है।


गुजिया को इंग्लिश में क्या कहते हैं? गुजिया कैसे बनाते हैं, गुजिया के प्रकार


गुजिया (मीठी तली हुई पेस्ट्री) पूरे भारत में होली के त्योहार का एक ज़रूरी हिस्सा है। गुजिया को आमतौर पर "स्वीट डंपलिंग" के नाम से जाना जाता है और भारत में इस त्योहार के लिए इसका अपना ही महत्व है। आप गुजिया के बिना होली के जश्न की कल्पना नहीं कर सकते क्योंकि यह पूरे देश में होली के अलग-अलग रंगों का मुख्य हिस्सा है। गुजिया का एक और नाम भी है जैसे बिहार में पेड़किया जो इसी कॉम्बिनेशन से बनता है। गुजिया पूरे देश में होली के जश्न का एक ज़रूरी हिस्सा है जिसे आपके स्वाद के अनुसार बनाया जाता है।

हम इंग्लिश में गुजिया को क्या कहते हैं?

गुजिया को इंग्लिश में स्वीट फ्राइड डंपलिंग या इंडियन स्वीट एम्पानाडा कहा जा सकता है। इसे आमतौर पर होली के मौके पर बनाया जाता है और सच तो यह है कि मेहमानों और परिवार के सदस्यों को परोसने के लिए गुजिया बनाए बिना होली की कल्पना भी नहीं की जा सकती।

गुजिया, जिसे आम तौर पर बाहर से परतदार और भुरभुरी गुजिया के नाम से जाना जाता है, जिसमें नारियल, काजू और खोया (दूध के ठोस पदार्थ) जैसी कई चीज़ों से नरम और मीठी फिलिंग बनाई जा सकती है।

गुजिया भारत की कई स्वादिष्ट मिठाइयों में से एक अनोखी मीठी डिश है। यह सबसे पॉपुलर डिश है और इसके बिना, पूरे भारत में कई त्योहारों की कल्पना नहीं की जा सकती। गुजिया को आम तौर पर पेड़किया, पुरुकिया और देश के कई हिस्सों में जाना जाता है। इसे देश के कई हिस्सों में करंजी, कज्जिकयालु, सोमस और करजिकायी भी कहा जाता है।

यह हरियाली तीज के त्योहार का भी हिस्सा है जिसे पेड़किया या पुरुकिया के नाम से जाना जाता है और इसकी तैयारी के बिना तीज के त्योहार की कल्पना नहीं की जा सकती। तीज आम तौर पर बिहार, उत्तर प्रदेश और देश के दूसरे हिस्सों में मनाई जाती है जिसमें महिलाएं व्रत रखती हैं और भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा करती हैं।

गुजिया क्या है

गुजिया असल में डीप-फ्राइड, आधे चांद के आकार की पेस्ट्री है जिसे गरम रिफाइंड या घी में फ्राई करके बनाया जाता है। गुजिया बनाने के लिए, आप इसमें मावा (खोया), ड्राई फ्रूट्स, फ्राई सूजी, चॉकलेट और अपने स्वाद के अनुसार कई स्वादिष्ट चीजें भर सकते हैं।

गुजिया का इतिहास

हालांकि गुजिया की शुरुआत के बारे में कोई ऑफिशियल फैक्ट्स नहीं हैं, लेकिन माना जाता है कि इसकी शुरुआत भारत में मिडिल एज में हुई थी। 13वीं-14वीं सदी में मुगलों के आने के बाद, भारतीय मिठाइयों में बदलाव आया, और गुजिया में और वैरायटी आ गई। जैसा कि आप जानते हैं, भारत त्योहारों और कई कल्चरल विरासतों की धरती है, जो कई रीजनल मिठाइयों और तरह-तरह की रीजनल और खास लोकल रेसिपी बनाने का मौका देती है।

जैसा कि कहा गया है, पेड़किया या पुरुकिया जो एक तरह की गुजिया है, आमतौर पर बिहार और उत्तर प्रदेश यानी पूर्वांचल भारत में मशहूर है। गुजिया असल में नॉर्थ इंडिया, खासकर राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार में बनाई जाती थी। इसका ज़िक्र पुराने भारतीय ग्रंथों और शाही किचन में भी मिलता है।

गुजिया के प्रकार

गुजिया कई तरह की होती हैं, जो उनके इंग्रीडिएंट्स और पकाने के तरीके के आधार पर अलग-अलग होती हैं:

मावा (खोया) गुजिया - असल में यह गुजिया का सबसे पारंपरिक रूप है जिसमें हम खोए, जो दूध का प्रोडक्ट है, को सूखे मेवों और नारियल के साथ मिलाकर भरते हैं।

चॉकलेट गुजिया – यह असल में नई पीढ़ी की खास गुजिया है जिसमें अगली पीढ़ी चॉकलेट और नट्स का मिक्सचर भरती है।

काजू गुजिया – काजू के पेस्ट से भरी हुई, जो इसे और भी स्वादिष्ट बनाती है।

नजरिया जीने का: हर बातों को व्यक्तिगत रूप से लेकर दूसरों को खुद पर हावी होने का मौका नहीं दें


जीवन  का भागदौड़ और अवसरों की कमी ने हमारी हालत कुछ ऐसा कर दिया है कि हम खुद पर हीं अपना नियंत्रण खो चुके हैं और  दूसरे लोग हमारी विचार और हमारी एक्टिविटी को गाइड कर रहे हैं. या  यूँ  कहें कि हमने अपने स्टेयरिंग खुद को छोड़ दूसरे के हाथों में  सौंप दिया है. 

कमाल यह है कि शरीर हमारा, मस्तिष्क हमारा,  जीवन हमारा लक्ष्य हमारा लेकिन उसे गाइड करने वाला सामने वाला है.  सामने वाला भी वह जो घर से निकलते  हुए इ-रिक्शा, बस, मेट्रो,  ट्रैन में कुछ मिनटों के लिए साथ होता  है.

दूसरों के शब्द और कार्य केवल उनके व्यक्तित्व का प्रतिबिंब होते हैं । जैसे ही आप किसी बात को दिल पर ले लेते हैं, आप उस व्यक्ति को अपने ऊपर हावी होने की शक्ति दे देते हैं। 

 एलेनोर रूजवेल्ट के इस कथन  को हमेशा याद -रखें  , "आपकी सहमति के बिना कोई भी आपको हीन महसूस नहीं करा सकता।"

आप  ऐसे समझें, एक दिन तो हमें मरना हीं हैं  तो क्या हमे इस चिंता में अपने उम्र के बचें दिन गिनना  शुरू कर देनी चाहिए कि हमें तो एक दिन मर जाना है.  नहीं न? 

लेकिन विडम्बना तो यही है कि हम यथार्थ को जानते होने भी कोरी कल्पना या अनावश्यक भ्रम में अपने वर्तमान को ख़त्म कर रहें हैं.  

एक न्यूज आता है कि हवाई जहाज से भी बड़ा कहीं से भी एक उल्कापिंड आ सकता है और धरती पर सारी जिंदगी को खत्म कर सकता है। तकनीकी रूप से यह संभव है, लेकिन क्या इसके बारे में सोचते रहना फायदेमंद है? 

यह चिंता और सोच-विचार जैसी बेकार की मानसिक आदतों को खत्म कर देता है। किसी बात का सच होना ही फायदेमंद नहीं होता। बहुत से लोग चिंता और सोच-विचार जैसी बेकार की मानसिक आदतों को यह कहकर सही ठहराते हैं कि वे सच हैं (या हो सकती हैं)। 

भगवान राम से सीखें: परिवार में संबंधों की मर्यादा और आदर्श

Teaching of Lord Rama Ramnavmi Maryadapurushotam

Point Of View: भगवान् राम ने जीवन और परिवार में सम्बन्धो के बीच समन्यव स्थापित करते हुए यह बताया है कि निष्ठा, त्याग, बंधुत्व, शालीन स्नेहभाव,उदारता और वत्सलता जैसे जैसे भावों को किस प्रकार से कुशलता से पालन किया जा सकता है. उन्होंने हर सम्बन्धो में उच्च आदर्शों को स्थापित करते हुए किस प्रकार से अपने सभी कर्तव्यों का  पालन किया जा सकता हैं इसकी व्यापक झलक भगवान् राम के चरित्र में पाई जा सकती है. 

भगवान् राम के व्यापक चरित्र जिसमें उन्होंने परिवार के सभी सम्बन्धो को विनम्रता और गंभीरता के साथ निभाया है. भगवान्र राम ने बताया है कि जीवन में कितना भी बड़ा विपत्ति सामने क्यों नहीं आये, संबधो की गरिमा को बनाये हुए श्रेष्ठतम जीवनशैली प्रदर्शित किया जा सकता है. 

यह भगवान् राम के जीवन का उच्चतम आदर्श ही है जिसके लिए हम प्रभु राम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहकर पुकारते हैं. भगवन राम के चरित्र की व्यापकता की हम मानव मात्र सिर्फ कल्पना ही कर सकते हैं जहाँ उन्होंने गुरु, माता-पिता, भाई, पत्नी, सेवक की कौन कहें, यहाँ तक कि  प्रभु राम ने अपने शत्रुओं के साथ भी समरनीति की व्यवहारिकता और आदर्श को स्थापित किया है जो सम्पूर्ण जगत में अनूठा उदहारण है. 

गुरु के प्रति निष्ठा और समर्पण

भगवान राम ने अपने गुरु को हमेशा ही सर्वोपरि रखा जिसकी झलक विश्वामित्र,वशिष्ठ और वाल्मीकि जैसे गुरुजनों की सीख  और आदर्शों को हमेशा से जीवन का सर्वोच्च स्थान दिया. 

माता पिता के आदेश निर्देश का अनुसरण: 

भगवान राम ने हमेशा माता-पिता की बातों को सर्वोच्च स्थान दिया. माता पिता के आदेश और निर्देश को उन्होंने हमेशा से पालन किया और इसकी सबसे सुन्दर झलक मिलती है वनवास के आज्ञा के पालन के दौरान. राज-पाट  को त्याग कर वनवास में एक वनवासी के जीवन जीना इतिहास में एक अनूठा आदर्श है. 

भाई के साथ बंधुत्व की कोमलता: 

भगवान राम ने अपने भाइयों के साथ भी हमेशा से कोमलता और प्रेम को स्थान दिया. वह चाहे भरत-मिलाप हो या फिर अन्य कई ऐसे घटनाएं राम चरितमानस में उल्लेखित हैं जो यह साबित करती है कि  भगवान राम ने बंधुत्व के साथ सम्बन्धो को हमेशा से कोमलता और गंभीरता के साथ निभाया. 

पत्नी के साथ दाम्पत्य का शालीन स्नेहभाव: 

राम चरित मानस में आप पाएंगे की भगवन राम ने पत्नी के साथ शालीन स्नेहभाव का परिचय दिया है. 

सेवक के लिए उदारता और वत्सलता: 

भगवन राम ने अपने सेवकों के साथ किस प्रकार का सम्बन्ध निभाया है, वह अपने आप में अनुकरणीय है. हनुमान भगवान् जो प्रभु राम की भक्ति और अपने सेवक वाली छवि के लिए ही पूजनीय है, रामायण में केवट और शबरी जैसे कितने सेवक हैं जिनके साथ प्रभु राम ने उदारता और वत्सलता का परिचय देकर प्रभु और सेवक के साथ सम्बन्धो को नया आयाम दिया है. 

मित्र के लिए सर्वस्व अर्पण की तत्परता: 

प्रभु राम ने मित्रों के साथ हमेशा दोस्ती के धर्म को निभाया है जिसके लिए प्रभु हमेशा से पूजनीय है. लंका के राजा रावण के भाई विभीषण के साथ मित्रता हो या फिर सुग्रीव के साथ, प्रभु राम ने हमेशा से मित्र धर्म को प्रमुखता के साथ सर्वस्व अर्पण करते हुए तत्परता के साथ निभाया है. 


Daily Current Affairs वन लाइनर Complete GK Dose Feb 19 , 2026: गूगल,क्लाइमेट सेंट्रल, यून सुक येओल


गूगल करेगा भारत में 15 अरब डॉलर का  निवेश 

  • गूगल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुंदर पिचाई ने  कहा है कि गूगल पांच वर्षों में 15 अरब डॉलर के निवेश से समुद्र के अंदर नए केबलों के माध्यम से भारत को अमरीका से जोड़ेगा। 
  • इस पहल के माध्यम से विशाखापट्टणम में समुद्र के अंदर एक नया अंतरराष्ट्रीय गेटवे स्थापित किया जाएगा।
  • भारत को सिंगापुर, दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया से जोड़ने के लिए समुद्र के अंदर तीन नए मार्ग और चार रणनीतिक फाइबर-ऑप्टिक मार्ग स्थापित किए जाएंगे।
  • गूगल, भारत में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान-एम्स के साथ साझेदारी कर रहा है, ताकि मरीज, एआई टूल्स में अपनी स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं दर्ज कर सकें और एआई, डॉक्टरों की सहायता के लिए रिपोर्ट तैयार कर सके।

कानपुर में बनेगा भारत-फ्रांस एयरोनॉटिक्स स्किलिंग सेंटर

  • प्रस्तावित केंद्र एयरोनॉटिक्स, मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहाल (एमआरओ), एयरपोर्ट संचालन, रक्षा विनिर्माण और संबंधित क्षेत्रों में उन्नत कौशल प्रशिक्षण प्रदान करेगा। 

 “द सेज हू रीइमैजिन्ड हिंदूइज्म: द लाइफ, लेसन्स एंड लेगेसी ऑफ श्री नारायण गुरु” पुस्तक के लेखक  डॉ. शशि थरूर हैं. 

  • पुस्तक का विमोचन उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने किया। 

मानव जनित जलवायु परिवर्तन से कॉफी उत्पादन घटा

  • क्लाइमेट सेंट्रल की रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक स्तर पर कॉफी उत्पादन करने वाले  देशों ने  औसतन 47 अतिरिक्त दिनों की हानिकारक गर्मी का अनुभव किया। 
  • वैश्विक उत्पादन का 75% हिस्सा रखने वाले पांच सबसे बड़े उत्पादक देश हैं-ब्राजील, वियतनाम, कोलंबिया, इथियोपिया और इंडोनेशिया

यून सुक येओल

  • दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति यून सुक येओल को 2024 में सैन्‍य शासन लागू करने के असफल प्रयास के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। 

वासे शहर, नाइजीरिया

  • एक सीसा और जस्ता खदान में कार्बन मोनोऑक्साइड रिसाव के कारण कल 33 खनिकों की मौत हो गई।