नोमैडिक एलिफेंट एक्सरसाइज़: भारत और मंगोलिया का संयुक्त सैन्य अभ्यास, जानें खास बातें
छत्रपति शिवाजी महाराज: जीवनी, जीवन की महत्वपूर्ण घटनाएँ और Facts In Brief
शिवाजी की परवरिश पुणे में उनकी माँ और एक कुशल ब्राह्मण, दादाजी कोंडदेव की देखरेख में हुई।
दादाजी कोंडदेव ने शिवाजी को एक कुशल सैनिक और योग्य प्रशासक बनाया। वे गुरु रामदास के धार्मिक प्रभाव में भी आए, जिससे उन्हें अपनी मातृभूमि पर गर्व हुआ।
शिवाजी के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाएँ
तोरणा पर विजय: यह पहला किला था जिसे शिवाजी ने मराठा सरदार के तौर पर जीता था।
इसने 16 साल की उम्र में ही उनके साहस और दृढ़ संकल्प जैसे शासक के गुणों की नींव रखी।
इस जीत ने उन्हें रायगढ़ और प्रतापगढ़ जैसे अन्य किले जीतने के लिए प्रेरित किया। इन जीतों के कारण बीजापुर का सुल्तान घबरा गया और उसने शिवाजी के पिता शाहजी को जेल में डाल दिया। 1659 ई. में शिवाजी ने फिर से बीजापुर पर हमला करने की कोशिश की, तो बीजापुर के सुल्तान ने अपने सेनापति अफ़ज़ल खान को शिवाजी को पकड़ने के लिए भेजा। लेकिन शिवाजी बच निकले और उन्होंने 'बाघ-नख' (बाघ के पंजे जैसा हथियार) से उसे मार डाला।
आखिरकार, 1662 में बीजापुर के सुल्तान ने शिवाजी के साथ शांति संधि की और उन्हें उनके जीते हुए इलाकों का स्वतंत्र शासक मान लिया।
कोंडाना किले पर विजय: यह किला नीलकंठ राव के नियंत्रण में था। यह लड़ाई मराठा शासक शिवाजी के कमांडर तानाजी मालुसरे और जयसिंह प्रथम के अधीन किले के रक्षक उदयभान राठौड़ के बीच लड़ी गई थी।
शिवाजी: Facts in Brief
- उन्हें "भारतीय नौसेना का जनक" कहा जाता है।
- उन्होंने गुरिल्ला युद्ध की तकनीक शुरू की।
- उनकी शादी साईबाई, सोयराबाई, काशीबाई, पुतलाबाई और सगुनाबाई से हुई थी और उनके दो बेटे और तीन बेटियाँ थीं। एक शासक के तौर पर, उनकी तुलना नेपोलियन, जूलियस सीज़र और स्वीडन के राजा गुस्तावस एडोल्फस से की जाती है, जो सभी अपने-अपने समय के महान शासक थे।
- शिवाजी महाराज मराठा राज्य के संस्थापक माने जाते हैं।
- उनका जन्म शिवनेरी दुर्ग में हुआ था।
- उनके पिता का नाम शाहजी भोंसले था।
- उनकी माता का नाम जीजाबाई था।
- 19 फरवरी को महाराष्ट्र में शिवाजी जयंती मनाई जाती है।
- रायगढ़ उनके राज्य का प्रमुख राजनीतिक केंद्र बना।
- उनका राज्याभिषेक 1674 में रायगढ़ में हुआ।
- राज्याभिषेक के बाद उन्होंने छत्रपति की उपाधि धारण की।
- अष्टप्रधान उनकी केंद्रीय प्रशासनिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण अंग था।
- प्रतापगढ़ अफजल खान से जुड़े संघर्ष के कारण प्रसिद्ध है।
- 1665 की पुरंदर संधि मुगल-शिवाजी संबंधों की महत्वपूर्ण घटना थी।
- 1666 का आगरा प्रसंग उनके जीवन की चर्चित घटनाओं में से एक है।
- दुर्ग उनकी सैन्य और प्रशासनिक रणनीति का महत्वपूर्ण आधार थे।
- उन्होंने पश्चिमी तट पर नौसैनिक शक्ति विकसित करने पर ध्यान दिया।
- उनका निधन 1680 में रायगढ़ में हुआ।
गोलकुंडा के कुतुब शाही शासकों के साथ गठबंधन: इस गठबंधन की मदद से, शिवाजी ने बीजापुर-कर्नाटक (1676-79 ईस्वी) में अभियान चलाया और जिंजी (जिंगी), वेल्लोर और कर्नाटक के कई किलों पर कब्ज़ा किया।
अष्टप्रधान परिषद
शिवाजी की प्रशासनिक व्यवस्था में अष्टप्रधान यानी आठ प्रमुख मंत्रियों की परिषद महत्वपूर्ण थी।
इसके प्रमुख पद थे:
- पद- प्रमुख कार्य
- पेशवा- प्रधान प्रशासनिक अधिकारी
- अमात्य- वित्त एवं लेखा
- सचिव- राजकीय पत्राचार
- मंत्री- आंतरिक कार्य/सूचना
- सुमंत- विदेश एवं कूटनीति
- सेनापति- सैन्य व्यवस्था
- न्यायाधीश- न्याय व्यवस्था
- पंडितराव- धार्मिक एवं दान संबंधी कार्य
अपोलो 11: कैसे इंसान ने चंद्रमा तक पहुंचकर इतिहास रचा?
मानव का चंद्रमा पर पहला कदम – अपोलो 11 इतिहास का पहला मिशन था जिसने इंसानों को चंद्रमा की सतह पर सफलतापूर्वक उतारा। 20 जुलाई 1969 को "ईगल (Eagle)" लूनर मॉड्यूल ने चंद्रमा के Sea of Tranquility (शांति का सागर) क्षेत्र में सफल लैंडिंग की।
वास्तविकता तो यह है कि अपोलो 11 केवल एक अंतरिक्ष मिशन नहीं था, बल्कि मानव साहस, वैज्ञानिक नवाचार और असंभव को संभव बनाने की मिसाल था। 20 जुलाई 1969 को चंद्रमा पर रखा गया पहला मानव कदम आज भी पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा और उपलब्धि का प्रतीक माना जाता है। आइये जानते हैं अपोलो मिशन की खास बातें-
अपोलो 11 का मुख्य मकसद प्रेसिडेंट जॉन एफ. केनेडी का 25 मई, 1961 को किये गए नेशनल गोल को पूरा करना था जिसका सार थे- क्रू के साथ चांद पर लैंडिंग करना और धरती पर वापस आना।
अपोलो 11 को 16 जुलाई, 1969 को केप केनेडी से लॉन्च किया गया था।
अपोलो 11 को कमांडर नील आर्मस्ट्रांग, कमांड मॉड्यूल पायलट माइकल कॉलिन्स और लूनर मॉड्यूल पायलट एडविन “बज़” एल्ड्रिन 114 गुणा 116 मील के शुरुआती अर्थ-ऑर्बिट में ले गए।
18 जुलाई को, आर्मस्ट्रांग और एल्ड्रिन ने अपने स्पेससूट पहने और कोलंबिया से ईगल तक डॉकिंग टनल से LM को चेक करने और दूसरा TV ट्रांसमिशन करने के लिए चढ़े।
19 जुलाई को, अपोलो 11 के चांद के पीछे से धरती के संपर्क से बाहर निकलने के बाद, इसने पहला लूनर ऑर्बिट इंसर्शन मैनूवर किया।
20 जुलाई, 1969 को नील आर्मस्ट्रांग चांद की सतह पर उतरे और उन्होंने इस घटना के बारे में बताते हुए कहा, “…इंसान के लिए एक छोटा कदम, इंसानियत के लिए एक बड़ी छलांग।”
पहला कदम – Neil Armstrong चंद्रमा पर कदम रखने वाले दुनिया के पहले व्यक्ति बने।
ऐतिहासिक कथन – "यह एक इंसान का छोटा कदम है, लेकिन मानवता के लिए एक विशाल छलांग है।"
दूसरे व्यक्ति – Buzz Aldrin चंद्रमा पर उतरने वाले दूसरे व्यक्ति बने।
चंद्रमा पर समय – दोनों अंतरिक्ष यात्रियों ने लगभग 21 घंटे 36 मिनट चंद्रमा की सतह पर बिताए, जिनमें लगभग 2 घंटे 31 मिनट बाहर चलकर वैज्ञानिक कार्य किए।
चंद्र नमूने – लगभग 21.5 किलोग्राम चंद्रमा की मिट्टी और चट्टानों के नमूने पृथ्वी पर लाए गए।
ईगल साइट 2 में सी ऑफ़ ट्रैंक्विलिटी में 0 डिग्री, 41 मिनट, 15 सेकंड नॉर्थ लैटिट्यूड और 23 डिग्री, 26 मिनट ईस्ट लॉन्गिट्यूड पर उतरा।
क्रू मेंबर
- नील आर्मस्ट्रांग, कमांडर
- एडविन ई. “बज़” एल्ड्रिन जूनियर, लूनर मॉड्यूल पायलट
- माइकल कॉलिन्स, कमांड मॉड्यूल पायलट
लैंडिंग
- 24 जुलाई, 1969; दोपहर 12:50 बजे EDT
- पैसिफिक ओशन
- रिकवरी शिप: USS हॉर्नेट
दूरदर्शन का एक यादगार क्लासिक शो जिसने हंसी के बहाने परिवार को टीवी के सामने एक साथ बैठाया, जानें खास बातें
'देख भाई देख "1993 में शुरू हुआ था जो उस समय दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले कार्क्रमों में काफी लोकप्रिय सीरियल था। सीरियल मुख्य तौर पर मुंबई के एक पुराने बंगले में साथ रहने वाला दीवान परिवार से सम्बंधित था और कहानी पारिवारिक रिश्तों, रोजमर्रा की उलझनों और हास्य के इर्द-गिर्द घूमती थी। सीरियल में नवीन निश्चल, फरीदा जलाल, शेखर सुमन, सुषमा सेठ, भावना बलसावर और कई अन्य कलाकार प्रमुख भूमिकाओं में थे जिनसे दर्शक और परिवार के प्रत्येक सदस्य खुद को भी उस परिवार के सदस्य में पाते थे.
नवीन निश्चल अर्थात बलराज दीवान परिवार में बतौर मुखिया की भूमिका निभाई और बड़े परदे पर अपनी अभिनय का लोहा मनवा चुकी फरीदा जलाल सीरियल में सुहासिनी दीवान के किरदार में नजर आईं। इसके अतिरिक्त शेखर सुमन ने समीर दीवान की भूमिका निभाकर दर्शकों का खूब मनोरंजन किया था.
इस सीरियल की खासियत थी इसका सादापन
दर्शकों को हंसाने के लिए इसमें कोई उलझी हुई कहानी या अजीबोगरीब हालात नहीं दिखाए गए थे। इसके बजाय, 'देख भाई देख' ने उन चीज़ों में कॉमेडी ढूंढी जिनका सामना लोग अपने घरों में करते थे—जैसे परिवार में बहस, गलतफहमियां, निजी आदतें, घर की परेशानियां और साथ रहने में होने वाली मज़ेदार अफरातफरी।
इसी अपनापन भरे माहौल की वजह से दर्शक किरदारों से मज़बूत भावनात्मक जुड़ाव महसूस कर पाए।
सीरियल के किसी एपिसोड में डायबिटीज की आशंका से परिवार परेशान होता है, तो किसी में पत्नी को पति के किसी दूसरी महिला के साथ संबंध होने का शक को लेकर हीं माथा पच्ची चलती है. कहीं रहस्यमय गुलाबी चिट्ठी परिवार में उत्सुकता पैदा करती है, तो कहीं पानी की कमी जैसी आम समस्या पूरे परिवार के लिए परेशानी बन जाती है।
कहने का मतलब यह है कि कहानी का आधार भले ही हास्य था, लेकिन उसके पीछे परिवार और रिश्तों की वास्तविक दुनिया दिखाई देती थी।
कई सारे लोकप्रिय कहानियों में एक वह काफी लोकप्रिय रही जिसमें परिवार के कुछ शरारती सदस्य एक पुस्तक के आधार पर एपिसोड में हिप्नोटाइज तो कर देते हैं लेकिन बाद में पता चलता है कि हिप्नोटाइज ख़त्म करने वाले पेज हीं उस पुस्तक से गायब है.
“देख भाई देख” का निर्माण Saraswati Audio Visuals के बैनर के तहत बनाया गया था।
विश्व अल्जाइमर दिवस 2026 : थीम, इतिहास लक्षण और अन्य-Facts In Brief
विश्व अल्जाइमर दिवस का वैश्विक महत्व क्या है?
विश्व अल्जाइमर दिवस का जागरूकता बढ़ाने और बीमारी से जुड़े कलंक को कम करने पर बड़ा प्रभाव पड़ता है। लोगों को अल्जाइमर के लक्षणों के बारे में जागरूक करना और देखभाल करने वालों का समर्थन करना हमें एक ऐसा समाज बनने में मदद करता है जो इससे जूझ रहे लोगों के प्रति अधिक समझदारी दिखाता है। यह अल्जाइमर रोग के कारणों पर अधिक शोध के बारे में जागरूकता पैदा करने का भी आह्वान करता है ताकि इसे रोकने के तरीके खोजे जा सकें।
विश्व अल्जाइमर दिवस 2026 थीम
विश्व अल्जाइमर दिवस 2026 की आधिकारिक थीम है "जितनी जल्दी आप जानेंगे, उतना ही अधिक आप कर सकेंगे: डिमेंशिया का निदान मायने रखता है।" इस थीम का उद्देश्य डिमेंशिया के बारे में लगातार कम जागरूकता, कलंक और भेदभाव से निपटना है और साथ ही जल्द निदान के महत्व को उजागर करना है।
क्या आप जानते हैं कि अल्जाइमर डिमेंशिया का सबसे आम कारण है? कुछ रिसर्चर्स के अनुसार, बुज़ुर्गों की मौत की वजहों में यह बीमारी दिल की बीमारी और कैंसर के बाद तीसरे नंबर पर आ सकती है। इस बीमारी से पीड़ित ज़्यादातर लोगों में 65 साल की उम्र के बाद इसका पता चलता है। कहा जाता है कि डिमेंशिया के 60 से 80 प्रतिशत मामले अल्जाइमर की बीमारी की वजह से होते हैं।
इसलिए, हम कह सकते हैं कि अल्जाइमर एक न्यूरोडीजेनेरेटिव और धीरे-धीरे बढ़ने वाली बीमारी है जो याददाश्त और याददाश्त से जुड़े दूसरे कामों को धीरे-धीरे खत्म कर देती है। यह तब होता है जब दिमाग में बीटा-अमाइलॉइड वाले प्लाक बन जाते हैं।
इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति ठीक से सोच नहीं पाता और सबसे आसान काम करने की क्षमता भी खत्म हो जाती है। समय के साथ, अल्जाइमर के लक्षण और खराब हो जाते हैं; व्यक्ति के लिए हाल की घटनाओं को याद रखना, तर्क करना और यहाँ तक कि जिन लोगों को वे जानते हैं, उन्हें पहचानना भी मुश्किल हो जाता है।
अल्जाइमर की बीमारी के बारे में कुछ बातें
अल्जाइमर की बीमारी का नाम डॉ. एलॉइस अल्जाइमर के नाम पर रखा गया है। उन्होंने एक महिला के दिमाग के टिश्यू में कुछ बदलाव देखे थे, जिसकी मौत एक असामान्य मानसिक बीमारी से हुई थी। यह दूसरी बीमारियों के साथ भी हो सकती है।
अल्जाइमर की बीमारी सिर्फ़ याददाश्त खोना नहीं है, बल्कि याददाश्त कम होना इस बीमारी का एक मुख्य लक्षण है।
यह दिमाग के अंदर 'टैंगल्स' या 'प्लाक' के रूप में जाने जाने वाले प्रोटीन के जमा होने से भी होती है और इसे तीसरे प्रकार की डायबिटीज भी कहा जाता है।
इस अल्जाइमर बीमारी के कारण दिमाग की कोशिकाएं खराब हो जाती हैं और सोचने-समझने की अलग-अलग क्षमताओं पर असर पड़ता है, जैसे याददाश्त खोना, भाषा की समस्याएँ और अजीब व्यवहार।
अल्जाइमर की बीमारी का वजह दुर्लभ जेनेटिक बदलाव होते हैं। यानी ऐसे जीन जो हमारे नियंत्रण में नहीं होते और हमें विरासत में मिलते हैं, जैसे कि एपोलिपोप्रोटीन जीन का एक रूप जिसे ApoE (जीन के तीन रूपों में से एक) कहा जाता है; इसी वजह से कम उम्र में अल्जाइमर (early-onset Alzheimer's) की शुरुआत हो सकती है।
SLINEX-26: भारत-श्रीलंका समुद्री अभ्यास, Facts in Brief
SLINEX क्या है?
SLINEX भारत और श्रीलंका के बीच एक द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास है, जिसे दोनों देशों के बीच आपसी तालमेल (interoperability), समुद्री सहयोग और आपसी समझ को बेहतर बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसके हार्बर और समुद्री चरण हिंद महासागर में पेशेवर आदान-प्रदान और सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा देते हैं।
2005 में शुरू की गई SLINEX पहल अब दोनों नौसेनाओं के बीच समुद्री सहयोग, आपसी तालमेल और आपसी समझ को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बन गई है।
SLINEX-26 में भाग लेने के लिए, भारतीय नौसेना की ओर से स्वदेशी एंटी-सबमरीन वॉरफेयर कार्वेट INS कवरत्ती और फ्लीट टैंकर INS ज्योति शामिल होंगे, जबकि श्रीलंका नौसेना का प्रतिनिधित्व SLNS सिंदुराला करेगा।
ईस्टर्न नेवल कमांड की देखरेख में आयोजित हार्बर चरण की शुरुआत एक उद्घाटन समारोह और INS कवरत्ती पर SLNS सिंदुराला के क्रू (चालक दल) के स्वागत समारोह के साथ हुई।
इस चरण में पेशेवर बातचीत, एक-दूसरे के जहाजों का दौरा (cross-deck visits), बेहतरीन तौर-तरीकों का आदान-प्रदान, योग, खेल और सांस्कृतिक गतिविधियां शामिल हैं। इसके बाद होने वाले समुद्री चरण में समुद्र में समन्वित गतिविधियों के माध्यम से ऑपरेशनल तालमेल और आपसी सहयोग (interoperability) को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
भारत के 'महासागर' (MAHASAGAR) विजन के अनुरूप, SLINEX-26 एक सुरक्षित, स्थिर और समावेशी समुद्री माहौल के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है और भारत व श्रीलंका के बीच लंबे समय से चली आ रही समुद्री साझेदारी को और पुख्ता करता है।
SLINEX-25
श्रीलंका-भारत नौसैनिक अभ्यास (SLINEX-25) का 12वां संस्करण दो चरणों में आयोजित किया गया – पहला चरण 14 से 16 अगस्त 2025 तक कोलंबो में 'हार्बर चरण' (बंदरगाह पर होने वाला चरण) और उसके बाद 17 से 18 अगस्त 2025 तक 'सी फ़ेज़' (समुद्री चरण) आयोजित हुआ।
SLINEX-24
SLINEX-24 (श्रीलंका-भारत अभ्यास) भारतीय नौसेना की पूर्वी नौसेना कमान की देखरेख में 17 से 20 दिसंबर 2024 तक विशाखापत्तनम में आयोजित किया गया था।
शांति के समय अपना भाला बेच देता है, उसे युद्ध के समय लकड़ी की छड़ी से काम चलाना पड़ता है
अफ्रीका की एक बहुत ही प्रसिद्ध कहावत है —
'जो व्यक्ति शांति के समय अपना भाला बेच देता है, उसे युद्ध के समय लकड़ी की छड़ी से काम चलाना पड़ता है।"
मतलब स्पष्ट है।।
याद रखें दोस्तों, इस कहावत में जीवन की वह सच्चाई छुपी है जो हमारे जीवन में हर वक्त प्रासंगिक है। कहने का अर्थभाई कबजो व्यक्ति शांति के समय में अपना भाला बेच देता है, उसे युद्ध के समय छड़ी खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। यहीं तो जीवन का एकमात्र सच्चाई है। भविष्य की तैयारी करें। जब आपके पास ताकत और अवसर हों, तो उन्हें बर्बाद न करें, क्योंकि जब मुसीबत आएगी, तो हो सकता है कि आपके पास वो संसाधन (resources) न हों जिनकी आपको ज़रूरत है।
जीवन में सफलता के लिए हम अपने पढ़ाई, स्किल सीखने या वित्तीय सुरक्षा को अहमियत देते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि हम भविष्य के लिए कितने जागरूक और सचेत हैं।
जब आज आपके पास ताकत है, समय है और मौके हैं, तो उन्हें फालतू चीज़ों में बर्बाद मत कीजिए।
क्योंकि जब मुसीबत आती है, तब पछताने का वक्त नहीं मिलता। अगर आज आपने अपने संसाधनों की कद्र नहीं की, तो कल आपको मजबूरियों से समझौता करना पड़ेगा।
इसलिए आज ही खुद को मजबूत बनाइए!
मोबाइल की आदत छोड़ें, IQ बढ़ाएं: बच्चों के लिए इंग्लिश ब्रेन टेस्ट
IQ (इंटेलिजेंस कोशंट) एक स्कोर है जो बच्चे की सोचने-समझने की काबिलियत को मापता है—जैसे सोचने-समझने की स्किल, प्रॉब्लम सॉल्विंग, याद रखने और समझने की काबिलियत। बच्चों के साथ डील करते समय इसे मापने में मदद मिलती है। साइकोलॉजी के फील्ड में इसका बहुत इस्तेमाल होता है। अपने बच्चे का IQ चेक करना और उन्हें रेगुलर ब्रेन एक्सरसाइज के लिए बढ़ावा देना ज़रूरी है।
नीचे दी गई इमेज में, बीस इंग्लिश शब्दों का कलेक्शन है और आपको उन्हें बच्चे को चालीस सेकंड के लिए दिखाना है और फिर उन्हें सभी शब्द याद करके लिखने के लिए कहना है।
Top MCQs on BRICS Summit: Quiz और अन्य कॉम्पिटिशन एग्जाम में पूछे गए
English Is Easy: 20 Important Vocabularies Common asked in Competitive Exams
20 sets of advanced English words with meanings. They are arranged from moderately difficult to highly challenging. These word meaning are important for forthcoming competitive exams and it will be beneficial for you to score and leading on your opponents in the exams.
1. Ephemeral means:
A. Permanent
B. Short-lived
C. Powerful
D. Dangerous
Answer: B
2. Ubiquitous means:
A. Rare
B. Everywhere
C. Invisible
D. Ancient
Answer: B
3. Magnanimous means:
A. Selfish
B. Brave
C. Generous and forgiving
D. Angry
Answer: C
4. Obfuscate means:
A. Simplify
B. Clarify
C. Confuse intentionally
D. Ignore
Answer: C
5. Perspicacious means:
A. Lazy
B. Highly perceptive
C. Nervous
D. Humorous
Answer: B
6. Recalcitrant means:
A. Cooperative
B. Stubbornly disobedient
C. Friendly
D. Excited
Answer: B
7. Ineffable means:
A. Impossible to express in words
B. Easily explained
C. Very loud
D. Extremely common
Answer: A
8. Tenacious means:
A. Weak
B. Persistent
C. Forgetful
D. Curious
Answer: B
9. Fastidious means:
A. Careless
B. Hard to satisfy because of high standards
C. Funny
D. Honest
Answer: B
10. Conundrum means:
A. Celebration
B. Difficult problem
C. Success
D. Adventure
Answer: B
11. Pragmatic means:
A. Imaginative
B. Practical
C. Emotional
D. Wealthy
Answer: B
12. Alleviate means:
A. Increase
B. Reduce or relieve
C. Destroy
D. Build
Answer: B
13. Eloquent means:
A. Silent
B. Fluent and persuasive
C. Shy
D. Confused
Answer: B
14. Benevolent means:
A. Kind
B. Cruel
C. Proud
D. Lazy
Answer: A
15. Meticulous means:
A. Careful and precise
B. Quick
C. Angry
D. Loud
Answer: A
16. Ambiguous means:
A. Clear
B. Having multiple meanings
C. Honest
D. Fast
Answer: B
17. Scrutinize means:
A. Ignore
B. Examine carefully
C. Celebrate
D. Predict
Answer: B
18. Sagacious means:
A. Wise
B. Foolish
C. Timid
D. Confident
Answer: A
19. Candid means:
A. Honest and direct
B. Secretive
C. Confused
D. Arrogant
Answer: A
20. Resilient means:
A. Easily broken
B. Able to recover quickly
C. Slow
D. Quiet
Answer: B
Scoring Guide
- 18–20: Exceptional Vocabulary IQ
- 15–17: Excellent
- 12–14: Very Good
- 8–11: Good
- 5–7: Average
- 0–4: Needs Vocabulary Improvement
मन की बात: जानें किस वेबसाइट का चर्चा प्रधान मंत्री ने किया जो बताएगा एक क्लिक में देश का सम्पूर्ण इतिहास
मन की बात की 137वीं कड़ी में प्रधानमंंत्री नरेंद्र मोदी ने कार्यक्रम को सम्बोधित किया। इस दौरान प्रधानमंत्री ने एक खास वेबसाइट का चर्चा किया जिसका नाम है www.bharatrajya.com. प्रधानमंत्री ने इस के अंतर्गत वेबसाइट को बनाने वाले श्रीमान कृष्णा शेषाद्री से वार्तालाप भी किया। प्रधानमंत्री ने बताया कि "कुछ समय पहले social media पर किसी ने लिखा था “आषाढ़ी एकादशी के पावन अवसर पर मुझे यह बताते हुए अत्यंत प्रसन्नता हो रही है कि इतिहास को रोचक बनाने के अपने प्रयास का शुभारंभ कर रहा हूँ।” उन्होंने आगे बताया ये idea बहुत ही simple है। आप इस website पर जाएँ और कोई भी एक वर्ष चुन लें। यहाँ आपको आसानी से पता चलेगा कि उस समय भारत के किस हिस्से पर किसका शासन था। मुझे भी यह काफी दिलचस्प लगा। मैंने सोचा कि इसके बारे में और अधिक जानकारी ली जाए। मुझे पता चला कि ये काम मुंबई में रहने वाले श्रीमान कृष्णा शेषाद्री जी ने किया है। मजे की बात ये है कि कृष्णा जी ने website का नाम भी बहुत simple रखा है www.bharatrajya.com उन्होंने जो प्रयास किया है, उसकी जानकारी आप लोगों तक भी जरूर पहुंचनी चाहिए। इसलिए, मैंने सोचा कि क्यों न सीधे श्री कृष्णा जी से ही बात की जाए।"
प्रधानमंत्री : कृष्णा जी नमस्ते।
कृष्णा शेषाद्री : नमस्ते sir नमस्ते।
प्रधानमंत्री : भाई, मुझे पता चला है, न आप tech की दुनिया से हो, न आप history teacher हो, फिर भी, आपने technology का प्रयोग करके history की site बना डाली। तो मुझे बहुत उत्सुकता है, ये सब कैसे हुआ?
कृष्णा शेषाद्री: धन्यवाद sir आपसे बात करके बहुत मेरा बहुत बड़ा सौभाग्य है तो sir मेरे बारे अगर मैं थोड़ा बताऊँ, तो sir मैं एक engineer था, फिर मैंने MBA किया, फिर मैं marketing field में चला गया लेकिन ये सब जब भी करता था तब भी मेरे को बचपन से इतिहास (History) में बहुत interest था। तो I always wanted to do something on History, how to make it interesting and मेरे को ये भी लगता था कि हम जैसे History सिखाते हैं उसमें हम बहुत improvement कर सकते हैं उसमें हम बहुत बदलाव लेकर आ सकते हैं History को एक कहानी बनाकर लोगों तक पहुंचा सकते हैं।
प्रधानमंत्री : कृष्णा जी, भारतीय इतिहास का ऐसा कौन-सा पहलू है, जिसके बारे में आपको लगा कि इसकी जानकारी ज्यादा-से-ज्यादा लोगों को होनी चाहिए ?
कृष्णा शेषाद्री: Sir, अगर हम भारतीय इतिहास जैसे हमारे स्कूलों या कॉलजों में सिखाया जाता है जैसा आप देखते हो वो एक कोई एक empire या कोई एक kingdom उसके दृष्टिकोण से, उसके नजरिए से सिखाया जाता है और वो empires को disproportionate attention भी मिलता है। इस चक्कर में बाकी के बहुत सारे जो हमारे साम्राज्य थे जो महान साम्राज्य थे जैसे cholas, pallavas, karkota dynasty था कश्मीर में Ahoms थे जिन्होंने कम से कम 600 साल असम में अपनी संस्कृति, अपनी values system को बरकरार रखा ये सबके बारे में हम नहीं जानते। तो मैंने सोचा कि कोई ऐसा कोई site बनाएं जो ऐसे महान साम्राज्य को भी लोगों से इनको introduce किया जाए।
प्रधानमंत्री : कृष्णा जी आप इतनी मेहनत करते हैं, मैं ऐसे ही आपको hypothetical सवाल पूछता हूँ। अगर आपको Indian History के किसी भी तीन लोगों से बातचीत का अवसर मिले, तो आप किनसे बात करना चाहेंगे और क्यों ?
कृष्णा शेषाद्री: हाँ सर, तो पहले मैं बात करूंगा, राजाराजा चोला या राजेन्द्र चोला सर जो चोला साम्राज्य के सबसे most powerful या सबसे important राजाओं में से थे, तो मैं उनसे ये जानना चाहूँगा कि पहले उनको ये vision कैसे आया जैसे उन्होंने बृहदेश्वर temple या गंगईकोंडा चोलपुरम जो बड़े बड़े मंदिर हैं, शिवजी के मंदिर हैं, वो execute करने के लिए वो vision कहाँ से आया वो planning कैसे की, उनको वो thought कैसे आया कि हम ऐसा कुछ बना के जाएं जो अगले हजार या दो हजार साल तक दूसरे लोगों को प्रेरित कर सके। तो वो मुझे उनसे जानना है। और दूसरी जो personality हैं ये actually मेरे हिसाब से Indian history में एक बहुत under rated personality है। सर उनका नाम है हेमू, तो हम उनके बारे में ज्यादा-से-ज्यादा Indian इतिहास में दो या तीन line पढ़ते हैं। हमको ये नहीं पता है कि वो जो हेमू जो थे वो एक common man थे, एक साधारण इंसान थे, वो एक व्यापारी थे, उधर से उन्होंने एक empire खड़ा किया और वो not only वो एक empire builder थे वो एक military thinker भी थे, military genius थे जिन्होंने अपने carrier में 23 लड़ाईयाँ लड़ीं उसमें से उन्होंने 22 लड़ाईयां जीतीं, तो उनका thought process कैसा था, और वो कैसे एक आम आदमी से इतने बड़े राजा बने, वो उनका वो journey मैं जानने की बहुत दिलचस्पी रखता हूँ सर। और तीसरी जो है ये this is a very interesting personality, she is a women sir, त्रिभुवन महादेवी, तो ये जो है एक ओडिसा में एक kingdom है जिसका नाम था भौमाकारा dynasty तो इनकी भी कहानी बहुत दिलचस्प है। उन्होंने जब 850 ईस्वी के आसपास जो साल में उनके जो neighbor पाला empire ने, इनके empire पर धावा बोल दिया था सर, और इनके राजा जो इनके husband थे वो उस लड़ाई में शहीद हो गए थे। और इसकी वजह से वो empire बहुत छोटा हो गया और उसके जो सरदार थे, उसके जो leaders थे वो empire छोड़कर जाने लग गए थे तो ये जो त्रिभुवन महादेवी जो lady थी इन्होंने वो सरकार संभाली and she became one of the first independent rulers in the history of India और उन्होंने सरकार को not only stabilize किया but इतना उसको powerful बना दिया कि वो अगले सौ साल तक कलिंगा और वो area में राज करते रहे। तो these are three interesting personalities whom I would like to meet in history sir.
प्रधानमंत्री : कृष्णा जी आपको अब लगता है कि इतिहास को जी रहे हैं। आप पूरी तरह इतिहास में डूब चुके हैं। देखिये मैंने भी बड़े उत्सुकता के साथ आपकी site देखी है और मुझे सबसे interesting ये लगा कि आपकी site पर एक ऐसा tab है, जहां लोग corrections और suggestions भी दे सकते हैं। ऐसे constructive feedback के लिए open रहना ये अपने आप में बहुत बड़ी बात है। क्या आपको लोगों से सुझाव मिलना शुरू हुआ है क्या? और आप उन पर कैसे काम करते हैं ?
कृष्णा शेषाद्री: हाँ सर इन लोगों से बहुत सुझाव आते हैं सर। सुझाव दो प्रकार के आते हैं। एक सुझाव ऐसे आते हैं जो हमको correction suggest करते हैं – इस प्रदेश में, इस time में, इस राष्ट्र में ये राजा थे या इस time में ये युद्ध हुआ था तो ऐसे कुछ suggestion आते हैं। दूसरे suggestion आते हैं कि आप इस website में ये feature भी डाल सकते हैं या वो feature भी डाल सकते हो तो हमको दोनों प्रकार के suggestion आते हैं तो जैसे अगर हमको ऐसा एक suggestion आए कि इस प्रदेश में, इस राजा ने, इस time पे राज किया था तो हम वो suggestion को लेते हैं, तो हमारे जो sources हैं। जैसे हमको किसी ने suggestion में दिया था कि आपने India को तो दिखा दिया अगर प्रदेश के level पर भी दिखा सकते हैं तो और अच्छा होगा तो हमने वो feature implement किया और फिर हमने दूसरे feature आया था जिसमें हमने एक trump card जैसा बनाया था सारे empire के data statistics देके ताकि वो बच्चों तक पहुँच सके तो किसी ने एक suggestion दिया था कि उसको आप एक जगह पर लेकर आइए ताकि हम सब download करके हम सब share कर सके तो वो हम feature implement कर रहे हैं। तो हमे इतना जानना important है कि हम गलती करेंगे, हम क्योंकि हम सर्वश्रेष्ठ नहीं हैं और वो जानके ही हमने वो correction का tab लगाया ताकि ये हम सबकी site हो और आगे जाके सारे contributions के हिसाब से हम एक ऐसा site बनाए जो अगले कुछ साल तक इतिहास एक मजेदार subject बनाए।
प्रधानमंत्री : कृष्णा जी आपने सचमुच में एक बहुत बड़ा काम किया है। अच्छा History के अलावा आपकी कई सारी Hobbies होगी और भी बहुत कुछ करते होंगे आप ?
कृष्णा शेषाद्री: हाँ, नहीं sir हम थोड़े boring type आदमी हैं sir.
प्रधानमंत्री : हँसते हुए
कृष्णा शेषाद्री: हम technology में बहुत दिलचस्पी रखते हैं और इतिहास में रखते हैं और जब अब technology और इतिहास मिल गया इसी में हम डूबे रहते हैं पूरा दिन।
प्रधानमंत्री : चलिए कृष्णा जी आपको मेरी बहुत-बहुत शुभकामना है आपने एक अच्छी शुरुआत की है और आपका तरीका भी ऐसा है कि लोग जुड़ेंगे मुझे पूरा विश्वास है मेरी तरफ से आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएँ।
वित्तीय कठिनाइयों और पारिवारिक दबाव भी नहीं झुका सकी आगे पढ़ने के जूनून को: जानें कुरी श्रवण कुमार के एकेडमिक सफर की कहानी
आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आने वाले स्कॉलर्स के लिए, विश्वसनीय वित्तीय सहायता के बिना उच्च शिक्षा और रिसर्च को आगे बढ़ाना कठिन हो सकता है। समय पर मिलने वाली फेलोशिप सहायता इस आर्थिक बोझ को कम कर सकती है और शोधार्थियों को अधिक स्थिरता व आत्मविश्वास के साथ अपनी शैक्षणिक यात्रा जारी रखने में सक्षम बनाती है।
वित्तीय कठिनाइयों और पारिवारिक दबावों पर विजय प्राप्त की
अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए राष्ट्रीय अध्येतावृत्ति (एनएफएससी) योजना के तहत मिलने वाली सहायता के प्रभाव को दर्शाते हुए, तेलंगाना के भद्राद्री कोठागुडेम जिले के 37 वर्षीय रिसर्च स्कॉलर श्री कुरी श्रवण कुमार ने अपनी पीएचडी की पढ़ाई जारी रखने के लिए वित्तीय कठिनाइयों और पारिवारिक दबावों पर विजय प्राप्त की।
एनएफएससी योजना के तहत सहायता मिलने से पहले, श्रवण कुमार को शैक्षणिक और आर्थिक बाधाओं का सामना करना पड़ रहा था। उनके पिता सेवानिवृत्त हो चुके थे और परिवार आर्थिक समस्याओं से जूझ रहा था, जिससे किसी विश्वसनीय वित्तीय साधन के बिना शोध और उच्च शिक्षा के प्रति अपने जुनून को आगे बढ़ाना उनके लिए कठिन हो रहा था।
एक महत्वपूर्ण मोड़
इन बाधाओं के बावजूद, श्रवण कुमार अपने शैक्षणिक लक्ष्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहे। एनएफएससी फेलोशिप के लिए उनका चयन एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ और इसने उन्हें अपने डॉक्टरेट (पीएचडी) अनुसंधान को जारी रखने में सक्षम बनाया।
श्रवण कुमार को अप्रैल 2023 से एनएफएससी योजना के तहत सहायता मिलनी शुरू हुई। इस सहायता में फेलोशिप और कंटिनजेंसी सहायता शामिल थी।
इस फेलोशिप ने उन्हें निरंतर वित्तीय सहायता प्रदान की, जिससे उनका आर्थिक तनाव कम हुआ और वे अधिक ध्यान व एकाग्रता के साथ अपनी शैक्षणिक और अनुसंधान गतिविधियों को जारी रखने में सक्षम हुए।
दक्षिण कोरिया की यात्रा
इस सहायता ने उनके शैक्षणिक अवसरों का भी विस्तार किया। योजना के तहत मिले सहयोग से श्रवण कुमार ने दक्षिण कोरिया की यात्रा की, जहाँ उन्होंने एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लिया और अपने रिसर्च को अंतरराष्ट्रीय अकादमिक मंच के समक्ष प्रस्तुत किया। इसके अलावा, उन्होंने फील्डवर्क भी किया, जिसने उनके अनुसंधान में महत्वपूर्ण योगदान दिया और उनके डॉक्टरेट थीसिस (शोध-प्रबंध) के लेखन के दौरान अत्यंत बहुमूल्य साबित हुआ।
वर्तमान में अपनी पीएचडी की पढ़ाई कर रहे श्रवण कुमार अधिक आत्मविश्वास और स्थिरता के साथ अपने शैक्षणिक लक्ष्यों की ओर लगातार बढ़ रहे हैं। हालांकि अभी आय में किसी बदलाव की सूचना नहीं है, लेकिन इस फेलोशिप ने उन वित्तीय चुनौतियों को दूर कर दिया जिन्होंने उनके शोध के जारी रहने को प्रभावित किया था।
श्रवण कुमार की यह यात्रा दर्शाती है कि कैसे समय पर मिलने वाली फेलोशिप सहायता स्कॉलर्स को आर्थिक बाधाओं को पार करने, अंतरराष्ट्रीय अकादमिक एक्सपोजर हासिल करने और अपनी उच्च शिक्षा की महत्वाकांक्षाओं को छोड़े बिना अनुसंधान के प्रति अपने जुनून को आगे बढ़ाने में मदद कर सकती है। (Source PIB)
मन की बात: जानिए उन अनजाने नायकों को जो चुपचाप देश बदल रहे हैं-वेसालु पुरो, मैथिली भुए, bharatrajya.com
मन की बात की 130वीं कड़ी
जगदीश प्रसाद अहिरवार जी, मध्य प्रदेश
मीर जाफ़र, अनंतनाग
منشیات، تمباکو اور شراب نوشی جیسی برائیوں کو ختم کرنے کے لئے ایک ساتھ آنے پر اننت ناگ کے شیخ گنڈ کی ستائش کی۔#MannKiBaat pic.twitter.com/4goaoxIf8f
— Narendra Modi (@narendramodi) January 25, 2026
‘लाल पाड़ साड़ी’, मलेशिया
ਤਾਮਿਲ, ਤੇਲਗੂ, ਪੰਜਾਬੀ ਅਤੇ ਹੋਰ ਭਾਸ਼ਾਵਾਂ ਸਿਖਾਉਣ ਤੋਂ ਲੈ ਕੇ ਵਿਰਾਸਤੀ ਸੈਰ ਅਤੇ ਪੱਛਮੀ ਬੰਗਾਲ ਦੇ ਟੈਕਸਟਾਈਲਜ਼ ਅਤੇ ਸੰਗੀਤ ਦਾ ਪ੍ਰਦਰਸ਼ਨ ਕਰਨ ਤੱਕ, ਮਲੇਸ਼ੀਆ ਵਿੱਚ ਭਾਰਤੀ ਭਾਈਚਾਰਾ ਕਮਾਲ ਕਰ ਰਿਹਾ ਹੈ! #MannKiBaat pic.twitter.com/HY87D7OMvn
— Narendra Modi (@narendramodi) January 25, 2026
अनंत नीरू संरक्षणम प्रोजेक्ट, आंध्र-प्रदेश
జలవనరులను పునరుద్ధరించడానికి కృషి చేస్తున్న ఆంధ్రప్రదేశ్లోని అనంతపురం ప్రజలను నేను అభినందిస్తున్నాను.#MannKiBaat pic.twitter.com/YUzM3upUuO
— Narendra Modi (@narendramodi) January 25, 2026
मन की बात कार्यक्रम के 129 संस्करण (28 December 2025) में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने जिन नायकों का चर्चा किया उनमे शामिल हैं-
मोइरांगथेम सेठ जी, मणिपुर
128 वीं कड़ी की खास बातें
विश्व के नेताओं को उपहार में भारतीय शिल्प, कला और परंपरा की झलक
मन की बात कार्यक्रम के 128 संस्करण में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ दिनों पहले G-20 शिखर सम्मेलन के दौरान विश्व के कई नेताओं को दिए गए उपहार के अंतर्गत ‘vocal for local’ का चर्चा किया. प्रधानमंत्री ने बताया कि उन्होंने देशवासियों की ओर से विश्व के नेताओं को जो उपहार भेंट किए, उसमें इस भावना का विशेष ध्यान रखा गया।
- G-20 के दौरान, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति को नटराज की कांस्य प्रतिमा भेंट की गई । ये तमिलनाडु के तंजावुर की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी चोल कालीन शिल्पकला का अद्भुत उदाहरण है।
- कनाडा के प्रधानमंत्री को चांदी के अश्व की प्रतिकृति दी गई। यह राजस्थान के उदयपुर की बेहतरीन शिल्पकला को दर्शाती है।
- जापान के प्रधानमंत्री को चांदी की बुद्ध की प्रतिकृति भेंट की गई। इसमें तेलंगाना और करीमनगर की प्रसिद्ध Silver Craft की बारीकी का पता चलता है।
- इटली की प्रधानमंत्री को फूलों की आकृतियों वाला silver mirror उपहार में दिया। ये भी करीमनगर की ही पारंपरिक धातु शिल्पकला को प्रदर्शित करता है।
- ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री को Brass उरली भेंट की गई ये केरला के मन्नार का एक उत्कृष्ट शिल्प है।
- उन्होंने बताया की इसके पीछे मुख्य उद्देश्य था कि दुनिया भारतीय शिल्प, कला और परंपरा के बारे में जानें। और हमारे कारीगरों की प्रतिभा को Global मंच मिले।
शहद उत्पादन में भारत का नया मुकाम
रामबन सुलाई honey को GI Tag
शिवगंगा कालंजिया, शहद कर्नाटका
शिवगंगा कालंजिया, कर्नाटका
Navy से जुड़े Tourism स्थल एक झलक
- Goa में ‘naval aviation museum’ है, जो Asia में अपनी तरह का अनूठा संग्रहालय है।
- Fort Kochi के INS द्रोणाचार्य में ‘Indian Naval Maritime Museum’ है। यहाँ हमारे देश की Maritime history और Indian Navy के evolution को देखा जा सकता है।
- श्रीविजयापुरम जिसे पहले Port Blair कहा जाता था, वहाँ ‘समुद्रिका- Naval Marine Museum’ उस क्षेत्र के समृद्ध इतिहास को सामने लाने के लिए जाना जाता है।
- कारवार के रवीन्द्रनाथ टैगोर beach पर Warship Museum में मिसाइलों और हथियारों की replica रखी गई हैं।
- विशाखापत्तनम में भी एक submarine, helicopter और aircraft museum है, जो Indian Navy से जुड़ा है।
‘काशी तमिल संगमम’ काशी में
- इस बार के काशी-तमिल संगमम की थीम बहुत ही रोचक है – Learn Tamil – तमिल करकलम्।
- काशी-तमिल संगमम उन सभी लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बन गया है जिन्हें तमिल भाषा से लगाव है। काशी के लोगों से जब भी बात होती है तो वो हमेशा बताते हैं कि काशी-तमिल संगमम का हिस्सा बनना उन्हें बहुत अच्छा लगता है। यहाँ उन्हें कुछ नया सीखने और नए-नए लोगों से मिलने का अवसर मिलता है।
- इस बार भी काशीवासी पूरे जोश और उत्साह के साथ तमिलनाडु से आने वाले अपने भाई-बहनों का स्वागत करने के लिए बहुत उत्सुक हैं।
- प्रधानमंत्री ने लोगों से आग्रह किया कि आप काशी-तमिल संगमम का हिस्सा जरूर बनें। इसके साथ ही ऐसे और भी मंचों के बारे में सोचें, जिनसे ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की भावना मजबूत हो।
चंद्रयान -3 की सफलता का बीज चंद्रयान 2 की असफलता में था
कोमरम भीम,असम
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने महान विभूति कोमरम भीम का चर्चा किया जिनकी जायंत्री अभी 22 अक्टूबर को मनाई है।
कोमरम भीम की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने बताया की किस प्रकार से ऐसे कठिन समय में करीब बीस साल का एक नौजवान अन्याय के खिलाफ खड़ा हुआ था। उस दौर में जब निज़ाम के खिलाफ एक शब्द बोलना भी गुनाह था।
उस नौजवान ने सिद्दीकी नाम के निज़ाम के एक अधिकारी को खुली चुनौती दे दी थी। निज़ाम ने सिद्दीकी को किसानों की फसलें जब्त करने के लिए भेजा था। लेकिन अत्याचार के खिलाफ इस संघर्ष में उस नौजवान ने सिद्दीकी को मौत के घाट उतार दिया। वो गिरफ़्तारी से बच निकलने में भी कामयाब रहा। निज़ाम की अत्याचारी पुलिस से बचते हुए वो नौजवान वहाँ से सैकड़ों किलोमीटर दूर असम जा पहुंचा।
प्रधान मंत्री मोदी ने कहा कि उस महान विभूति कोमरम भीम की आयु बहुत लंबी नहीं रही, वो महज 40 वर्ष ही जीवित रहे लेकिन अपने जीवन-काल में उन्होंने अनगिनत लोगों, विशेषकर आदिवासी समाज के हृदय में अमिट छाप छोड़ी।
उन्होंने निज़ाम के खिलाफ संघर्ष कर रहे लोगों में नई ताकत भरी। वे अपने रणनीतिक कौशल के लिए भी जाने जाते थे। निज़ाम की सत्ता के लिए वे बहुत बड़ी चुनौती बन गए थे। 1940 में निज़ाम के लोगों ने उनकी हत्या कर दी थी। प्रधान मंत्री ने युवाओं से आग्रह किया कि वे उनके बारे में अधिक से अधिक जानने का प्रयास करें।
बेंगलुरु में इंजीनियर कपिल शर्मा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 अक्टूबर 2025 को प्रसारित लोकप्रिय कार्यक्रम मन की बात के 127वीं कड़ी में बेंगलुरु में इंजीनियर कपिल शर्मा जी का जिक्र किया। बेंगलुरु में इंजीनियर कपिल शर्मा जी का चर्चा करते हुए कहा कि बेंगलुरू को झीलों का शहर कहा जाता है और कपिल जी ने यहां झीलों को नया जीवन देने का अभियान शुरू किया है। कपिल जी की टीम ने बेंगलुरु और आसपास के इलाकों में 40 कुंओं और 6 झीलों को फिर से जिंदा कर दिया है। खास बात तो ये है कि उन्होंने अपने mission में corporates और स्थानीय लोगों को भी जोड़ा है। उनकी संस्था पेड़ लगाने के अभियान से भी जुड़ी है। भारतीय नस्ल के ‘श्वान’ यानि Dogs
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सन्दर्भ में कहा कि करीब पाँच वर्ष पहले इस कार्यक्रम में भारतीय नस्ल के ‘श्वान’ यानि dogs की चर्चा की थी। इस दौरान उन्होंने याद किया कि उन्होंने देशवासियों के साथ ही अपने सुरक्षा बलों से आग्रह किया था कि वे भारतीय नस्ल के Dogs को अपनाएं, क्योंकि वो हमारे परिवेश और परिस्थितियों के अनुरूप ज्यादा आसानी से ढ़ल जाते हैं। उन्होंने कहा कि हमारी सुरक्षा एजेंसियों ने इस दिशा में काफी सराहनीय प्रयास किए हैं। BSF और CRPF ने अपने दस्तों में भारतीय नस्ल के Dogs की संख्या बढ़ाई है।
Dogs की training के लिए BSF का National Training Centre ग्वालियर के टेकनपुर में है। यहाँ उत्तर प्रदेश के रामपुर हाउंड, कर्नाटक और महाराष्ट्र के मुधोल हाउंड इस पर विशेष रूप से focus किया जा रहा है। इस Centre पर trainers technology और innovation की मदद से श्वानों को बेहतर तरीके से train कर रहे हैं। भारतीय नस्ल वाले Dogs के लिए Training Manuals को फिर से लिखा गया है ताकि उनकी unique strengths को सामने लाया जा सके।
बेंगलुरु में CRPF के Dog Breeding and training school में मोंग्रेल्स, मुधोल हाउंड, कोम्बाई और पांडिकोना जैसे भारतीय श्वानों को train किया जा रहा है।
रिया, डॉग
रिया की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पिछले वर्ष लखनऊ में All India Police Duty Meet का आयोजन हुआ था। उस समय, रिया नाम की श्वान ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा था। यह एक मुधोल हाउंड है जिसे BSF ने Train किया है। रिया ने यहाँ कई Foreign Breeds को पछाड़ते हुए पहला पुरस्कार जीता।
भारतीय नस्ल के ‘श्वान’ यानि Dogs
126वीं कड़ी की खास बातें
- 47500 kilometre
- 2nd October 2024 को गोवा से यात्रा शरू और
- 29th May 2025 को वापस पहुंचा
- Expedition हमें complete करने के लिए 238 दिन लगे.
- भारत की झंडा Point Nemo पर लहराया
- सल्हेर का किला- मुगलों की हार हुई
- शिवनेरी-छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म हुआ
- खानदेरी का किला- समुद्र के बीच बना अद्भुत किला
- प्रतापगढ़ का किला- अफजल खान पर जीत हुई
- विजयदुर्ग- गुप्त सुरंगें थी
- Trachoma-आँखों की एक बीमारी है।
- कारण-बीमारी Bacteria से फैलती है।
- WHO ने भी इस बात की सराहना की है कि भारत ने बीमारी से निपटने के साथ-साथ उसके मूल कारणों को भी दूर किया है।
- सामाजिक सुरक्षा - ये दुनिया की सबसे बड़ी coverage में से एक है।
- आज देश के लगभग 95 करोड़ (ninety-five crore) लोग किसी-न-किसी social security योजना का लाभ पा रहे हैं।
- 2015 तक 25 करोड़ से भी कम लोगों तक सरकारी योजनाएं पहुँच पाती थी।
जीवन जोशी, उत्तराखंड: पोलियो ने पैरों की ताकत छीनी, हौसला नहीं
काटेझरी-महाराष्ट्र: पहली बार पहुंची बस
Blackboard नहीं Sugarboard
जानें कौन हैं डॉ० चेवांग नोरबू भूटिया (सिक्किम)
गिर वन गुजरात: शेरों की आबादी 674 से बढ़कर 891
आत्मनिर्भर भारत का संकल्प
कर्नाटका का गडग जिला
Fit India Carnival
Rapper Hanumankind (हनुमान काइन्ड)
फगवा चौताल-फ़िजी
Singapore Indian Fine Arts Society
Textile waste
2025 के योग दिवस
Somos India
महुआ के फूल
कृष्ण कमल
थोडासम कैलाश,तेलंगाना
- हिमाचल प्रदेश के सावन बरवाल, महाराष्ट्र के किरण मात्रे, तेजस शिरसे या आंध्र प्रदेश की ज्योति याराजी, सबने, देश को नई उम्मीदें दी हैं।
- उत्तर प्रदेश के Javelin Thrower सचिन यादव और हरियाणा की high jumper पूजा और कर्नाटका की swimmer धिनिधि देसिन्धु ने देशवासियों का दिल जीता।
- इन्होंने तीन नए राष्ट्रीय record बनाकर सबको चौंका दिया।
- 15 साल के shooter गेविन एंटनी, यूपी की Hammer Throw खिलाड़ी 16 साल की अनुष्का यादव।
- मध्य प्रदेश के 19 साल के पोलवाल्टर देव कुमार मीणा ने साबित किया कि भारत का sporting future बेहद प्रतिभावान पीढ़ी के हाथों में है।
- उत्तराखंड में हुए National Games ने ये भी दिखाया कि कभी हार ना मानने वाले ‘जीतते’ जरूर हैं।
Obesity यानि मोटापा पर नीरज चोपड़ा के टिप्स
Obesity यानि मोटापा पर बाक्सर निखत ज़रीन के टिप्स
Obesity यानि मोटापा पर डॉ. देवी शेट्टी जी के टिप्स
Asiatic Lion, Hangul, Pygmy Hogs और Lion-tailed Macaque
118 वीं कड़ी के छुपे रुस्तम
अंतरिक्ष के क्षेत्र में कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल
117वीं कड़ी के छुपे रुस्तम
मन की बात: 116वीं कड़ी
116वीं कड़ी के छुपे रुस्तम
वीरेंद्र, लखनऊ
महेश, भोपाल
राजीव, अहमदाबाद
श्रीराम गोपालन जी, चेन्नई
‘Food for Thought’ Foundation, हैदराबाद
‘Prayog Library, गोपालगंज बिहार
‘एक पेड़ मां के नाम’ इंदौर
कूडुगल ट्रस्ट, चेन्नई
‘Early Bird’ मैसुरू, कर्नाटक
‘Kanpur Ploggers Group
इतिशा, असम
111 वां संस्करण
- पहला मन की बात कार्यक्रम 3 अक्टूबर 2014 को विजयादशमी के अवसर पर सबसे पहले प्रसारित किया गया था। कार्यक्रम के दूसरे ससंस्करन का प्रसारण इसके बाद 2 नवंबर 2014 को दूसरा प्रसारण किया गया था। 30 अप्रैल 2023 को इसका सौवाँ प्रसारण हुआ।
मन की बात की 109वीं कड़ी की खास बातें
- इस साल हमारे संविधान के भी 75 वर्ष हो रहे हैं और सुप्रीम कोर्ट के भी 75 वर्ष हो रहे हैं।
- 26 जनवरी की परेड बहुत ही अद्भुत रही-Women Power को लेकर।
- इस बार परेड में मार्च करने वाले 20 दस्तों में से 11 दस्ते महिलाओं के थे।
- अर्जुन अवार्ड समारोह- इस बार 13 Women Athletes को Arjun Award से सम्मानित किया गया है।
- इन women athletes ने अनेकों बड़े टूर्नामेंटों में हिस्सा लिया और भारत का परचम लहराया।
कार्यक्रम का इतिहास:
- पहला मन की बात 3 अक्टूबर 2014 को प्रसारित किया गया था।
- 30 अप्रैल 2023 को इसका 100वां प्रसारण हुआ।
- 2 जून 2017 से यह कार्यक्रम क्षेत्रीय भाषाओं में भी उपलब्ध है।
सुश्री यानुंग जामोह लैगो-अरुणाचल प्रदेश
वैद्यराज हेमचंद मांझी-छत्तीसगढ़
आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी चिकित्सा- डेटा का वर्गीकरण
कार्यक्रम 'हमर हाथी - हमर गोठ’: छत्तीसगढ़
Beach Games-दीव
- शुरुआत: मन की बात रेडियो कार्यक्रम की शुरुआत 26 मई, 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी।
- प्रसारण: यह कार्यक्रम हर महीने के अंतिम रविवार को प्रसारित होता है।
- प्रसारण का समय: यह कार्यक्रम सुबह 11:00 बजे से 11:15 बजे तक प्रसारित होता है।
- प्रसारण के माध्यम: यह कार्यक्रम All India Radio (AIR) के सभी चैनलों पर प्रसारित होता है। इसके अलावा, इसे Doordarshan, YouTube, Twitter, Facebook और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी प्रसारित किया जाता है।
- श्रोताओं की संख्या: इस कार्यक्रम को हर महीने करोड़ों लोग सुनते हैं। एक सर्वेक्षण के अनुसार, 2023 में इस कार्यक्रम को लगभग 100 करोड़ लोग सुन चुके हैं।












