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Navratri 2026 जानें माँ दुर्गा के 9 रूपों का पूजन और अनुष्ठान, तिथि और भी बहुत कुछ
नवरात्र के अवसर पर हम नवदुर्गा या दुर्गा के नौ रूपों की पूजा करते हैं। हालाँकि, पहले दिन हम देवी शैलपुत्री की पूजा करते हैं, जो देवी दुर्गा के सभी नौ रूपों में सबसे पहले हैं। जैसा कि आप जानते हैं कि नवरात्र के दौरान देवी दुर्गा के कुल नौ स्वरूपों की पूजा की गई है- शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री।
प्रथम शैलपुत्री
शैलपुत्री को पर्वत हिमालय की पुत्री माना जाता है जिसका उल्लेख पुराण में मिलता है। ऐसा कहा जाता है कि शैपुत्री देवी दुर्गा के सभी नौ रूपों में प्रथम है। देवी शैलपुत्री को प्रकृति माता का पूर्ण रूप माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि शैलपुत्री का जन्म पर्वतों के राजा, हिमालय शैल के घर में हुआ था और इसलिए उन्हें "शैलपुत्री" के नाम से जाना जाता है।
द्वितीय ब्रह्मचारिणी
ब्रह्मचारिणी देवी दुर्गा की दूसरी अभिव्यक्ति है जिसे हम नवरात्र के दूसरे दिन पूजा करते हैं।
तृतीय चंद्रघंटा
देवी दुर्गा के तीसरे स्वरूप का नाम चंद्रघंटा है जो चंद्रमा की आकृति स्थापित करती हैं। वे चंद्रमा के रूप में एक विशेष आसन पर विराजमान हैं। वे चंद्रमा से प्रकाशित हैं और उनके मुख पर एक विशाल चंद्रमा की छवि है।
चंद्रघंटा माँ के चेहरे का दृश्य शांतिपूर्ण है, लेकिन उनका रूप भयंकर और महान है। वे अपने दोनों हाथों में वीणा धारण करती हैं और अपने मुख पर चंद्रमा के आकार की चंद्रकोटि धारण करती हैं।
चतुर्थ कुष्मांडा देवी
नवदुर्गा माता के चौथे स्वरूपों में से एक हैं। इस रूप में मां दुर्गा को जीवन की उत्पत्ति को बनाए रखने वाली देवी के रूप में दर्शाया गया है। मां कुष्मांडा का स्वरूप बहुत ही भयंकर और प्रभावशाली है। उनकी आंखों का रंग लाल है और उनके चेहरे पर एक उग्र मुस्कान है। उनके चेहरे का एक रूप उनकी आंतरिक शक्तियों को दर्शाता है। मां कुष्मांडा की चार भुजाएं हैं, जिसमें वह एक हाथ में छड़ी और दूसरे हाथ में कमंडल धारण करती हैं। वह एक शूल और धारदार चाकू धारण करती हैं, जो उनकी उत्पत्ति का प्रतीक है। कुष्मांडा मां का वाहन शेर है, जो उनकी शक्ति और साहस का प्रतिनिधित्व करता है। कुष्मांडा मां की पूजा करने से भक्तों को उनके जीवन में आने वाली सभी समस्याओं और बाधाओं से मुक्ति मिलती है, और उन्हें एक सार्थक और समृद्ध जीवन मिलता है। उनकी पूजा से भक्तों को शक्ति और साहस का आशीर्वाद मिलता है।
पांचवीं मां स्कंदमाता
पांचवें स्वरूप में मां स्कंदमाता हैं, जो स्कंद (कार्तिकेय) की माता हैं। स्कंदमाता नवदुर्गा माता के पांचवें स्वरूप में से एक हैं। इस रूप में मां दुर्गा को स्कंद (कार्तिकेय) की माता के रूप में पूजा जाता है। स्कंदमाता का स्वरूप बहुत ही प्रसन्न और सुंदर है। वह अपनी गोद में एक बच्चे के साथ बैठती हैं, जो कार्तिकेय (स्कंद) का प्रतिनिधित्व करता है। उनकी लीलाएँ आध्यात्मिक और आनंदमय हैं, और उन्हें एक आकर्षक साध्वी के रूप में जाना जाता है। स्कंदमाता माँ की पूजा करने से भक्तों को अपने जीवन में संतान, सुख और समृद्धि की प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है। उनकी पूजा करने से माँ उनके परिवार की सुरक्षा का आशीर्वाद प्रदान करती हैं।
छठी कात्यायनी
छठा रूप है मां कात्यायनी, जो महिषासुर के वध के लिए उत्तर कुमार की पूजा करती हैं। देवी कात्यायनी का स्वरूप बहुत ही महान और उदार है। उसका चेहरा खुशी और सौम्यता का अवतार है, लेकिन उसकी निगाहें भयंकर और आज्ञाकारी हैं। कात्यायनी देवी के चार हाथ हैं, जिसमें एक हाथ में खड़ा त्रिशूल है और दूसरे हाथ में वीणा है। उनके दो हाथ और एक मुद्रा है जो उनकी शक्ति का प्रतिनिधित्व करती है। कात्यायनी देवी का वाहन शेर है, जो उनकी ताकत और बहादुरी का प्रतिनिधित्व करता है। देवी कात्यायनी की पूजा करने से भक्तों को अपने जीवन में स्थिरता, समृद्धि और सफलता प्राप्त करने का आशीर्वाद मिलता है। उनकी पूजा करने से माँ उनके सभी कार्यों में सफलता के लिए संयम और निर्णय प्रदान करती हैं।
सातवीं कालरात्रि
सातवां रूप है माँ कालरात्रि, जो कालरात्रि की उत्पत्ति को बनाए रखने वाली देवी हैं। देवी कालरात्रि का रूप अत्यंत उग्र और भयंकर है। वह काली के रूप में पूजनीय हैं, जिनका चेहरा उग्रता और आश्चर्य से भरा है। उनके चेहरे पर एक विशाल चाकू की मूर्ति है, और उनकी आँखों में आग की लपटें दिखाई देती हैं। देवी कालरात्रि के चार हाथ हैं, जिनमें से एक हाथ में खड़ा त्रिशूल और दूसरे हाथ में एक काला घड़ा है। अपने तीसरे हाथ में उन्होंने डमरू और चौथे हाथ में वरदान की मुद्रा धारण की है, जो उनकी शक्ति का प्रतिनिधित्व करते हैं। देवी कालरात्रि का वाहन एक भालू है, जो उनकी शक्ति और सुरक्षा का प्रतिनिधित्व करता है। कालरात्रि मां की पूजा करने से भक्तों को अपने जीवन में शक्ति, साहस और निर्भयता प्राप्त करने का आशीर्वाद मिलता है। उनकी पूजा करने से, माँ उनके सभी भय और संकट को दूर करती हैं, और उन्हें सुरक्षा और सम्मान का आशीर्वाद प्रदान करती हैं।
आठवीं महागौरी
मां महागौरी नवदुर्गा माता के आठवें स्वरूपों में से एक हैं। इस स्वरूप में मां दुर्गा की पूजा शुभ और पवित्र स्वरूप में की जाती है। इस स्वरूप में मां दुर्गा को उनकी विशेषता और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। महागौरी देवी का स्वरूप भव्य और दिव्य है। उनका चेहरा ज्योतिर्मय है और वे अत्यंत पवित्र दिखाई देती हैं। वे सफेद वस्त्र पहनती हैं, जो उनकी पवित्रता और शुद्धता को दर्शाता है। महागौरी देवी के दो हाथ हैं, जिसमें एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे हाथ में वरदान मुद्रा है। इनके चेहरे पर मुस्कान है, जो उनकी दयालुता और खुशी को दर्शाती है। महागौरी देवी का वाहन सिंह है, जो उनकी शक्ति और साहस को दर्शाता है। महागौरी मां की पूजा करने से भक्तों को अपने जीवन में शुभ और पवित्र गुणों की प्राप्ति होती है। इनकी पूजा करने से माता उनके सभी दुखों और बुराइयों को दूर करती हैं और उन्हें सुख-शांति का आशीर्वाद प्रदान करती हैं।
नौवीं सिद्धिदात्री
नौवां रूप है मां सिद्धिदात्री, जो सभी सिद्धियों की देवी हैं। वे अपने दोनों हाथों में वरदान और वाहन धारण करती हैं। ये नौ रूप देवी दुर्गा के अद्वितीय और प्रतिष्ठित रूप हैं, जिनकी पूजा नवरात्रि के नौ दिनों में की जाती है। सिद्धिदात्री देवी नवदुर्गा माता के नौवें और अंतिम रूपों में से एक हैं। इस रूप में, माँ दुर्गा को सर्वशक्तिमान सिद्धिदात्री के रूप में पूजा जाता है, जो अपने भक्तों को सिद्धियाँ (अच्छे परिणाम) प्रदान करती हैं।
Navratri 2026: माँ अम्बे की आरती
माँ अम्बे की आरती
ॐ जय अम्बे गौरी…
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी ।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को ।
उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै ।
रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी ।
सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती ।
कोटिक चंद्र दिवाकर, सम राजत ज्योती ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
शुंभ-निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती ।
धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे ।
मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
ब्रह्माणी, रूद्राणी, तुम कमला रानी ।
आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरों ।
बाजत ताल मृदंगा, अरू बाजत डमरू ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता,
भक्तन की दुख हरता । सुख संपति करता ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
भुजा चार अति शोभित, खडग खप्पर धारी ।
मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती ।
श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
श्री अंबेजी की आरति, जो कोइ नर गावे ।
कहत शिवानंद स्वामी, सुख-संपति पावे ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी ।
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अस्वीकरण: कृपया ध्यान दें कि लेख में उल्लिखित टिप्स/सुझाव केवल सामान्य जानकारी है जो विभिन्न सामाजिक और धार्मिक आस्था पर आधारित हैं ताकि आपको उस मुद्दे के बारे में अपडेट रखा जा सके जो कि आम लोगों से अपेक्षित है. आपसे निवेदन है कि कृपया इन सुझावो को पेशेवर सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए तथा अगर आपके पास इन विषयों से सम्बंधित कोई विशिष्ट प्रश्न हैं तो हमेशा सम्बंधित एक्सपर्ट से अवश्य परामर्श करें।
Navratri 2026: जानें माँ दुर्गा के 9 स्वरूपों का पूजन विधि, जानें शुभ मुहूर्त और महत्व
नवरात्र का पावन अवसर है जब देवी दुर्गा और उनके नौ स्वरूपों की पूजा कि जाती है जो आम तौर पर नवरात्र शैलपुत्री या प्रतिपदा, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री सहित नौ देवी की पूजा की जाती है।
शैलपुत्री :
पहला रूप शैलपुत्री है, जो शैल (पर्वत) की पुत्री कहलाती हैं। इस रूप में माता का ध्यान शुद्धता और त्याग में होता है। वह एक कमंडलु और लोटा धारण करती हैं। देवी शैल पुत्री देवी दुर्गा के नौ रूपों में से एक हैं जिन्हें भगवान शिव की पत्नी देवी पार्वती के रूप में जाना जाता है। शैलपुत्री को पर्वतराज हिमालय की पुत्री माना गया है जिसका उल्लेख पुराण में किया गया है। ऐसा कहा गया है कि देवी दुर्गा के सभी नौ स्वरूपों में शैपुत्री प्रथम हैं। जैसा कि हिंदू पौराणिक कथाओं में उल्लेख किया गया है, शैलपुत्री को सती का पुनर्जन्म माना जाता है और वह दक्ष शैलपुत्री की बेटी थीं।
ब्रह्मचारिणी:
दूसरे रूप में माता ब्रह्मचारिणी हैं, जो तपस्या, ध्यान, और संतान की कल्याण की प्रतीक्षा करती हैं। ब्रह्मचारिणी देवी का नाम नवदुर्गा माता के नौ रूपों में से एक है। इस रूप में माँ दुर्गा को तपस्या, ध्यान, और संतान की कल्याण की प्रतीक्षा का दर्शाया जाता है।
ब्रह्मचारिणी का स्वरूप उत्तम ध्यान, तपस्या, और संयम का प्रतीक है। ब्रह्मचारिणी के हाथों में माला और कमंडलु होती है। माला का प्रतीक है ध्यान और मनन, जबकि कमंडलु तपस्या और ब्रह्मचर्य के प्रतीक होती है। वे साधारणतः सफेद वस्त्र पहनती हैं जो उनकी शुद्धता और सात्विकता को दर्शाता है।
चंद्रघंटा:
तीसरे रूप में माता चंद्रघंटा हैं, जो चंद्र के आकार की स्थापना करती हैं। वह चंद्रमा के रूप में विशेष आसन पर बैठती हैं। वे चाँद से प्रकाशित होती हैं और उनके मुख पर एक विशालकाय चंद्रमा की प्रतिमा होती है।
चंद्रघंटा माँ के चेहरे की दृष्टि शांतिप्रद होती है, लेकिन उनका रूप विक्रमी और महान होता है। वे अपने दो हाथों में वीणा धारण करती हैं और अपने चेहरे पर चंद्रमा के रूप का चंद्रकोटि धारण करती हैं। चंद्रघंटा माँ के चंद्रकोटि के बीच एक तिरंगा होता है, जो अभिनवता और शक्ति का प्रतीक होता है। उनके साथ अक्षमाला, बेल, और धूप-दीप का सामान होता है, जो पूजन के लिए प्रयोग में लाए जाते हैं। चंद्रघंटा माँ की पूजा से भक्त अपने जीवन में शांति, सुख, और समृद्धि की प्राप्ति का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। उन्हें भयभीत होने की कोई आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि माँ चंद्रघंटा हमेशा अपने भक्तों की रक्षा करती हैं।
कुष्माण्डा देवी:
नवदुर्गा माता के चौथे रूप में से एक हैं। इस रूप में माँ दुर्गा को जीवन की उत्पत्ति को बनाए रखने वाली देवी के रूप में दर्शाया जाता है। कुष्माण्डा माँ का स्वरूप बहुत ही भयंकर और प्रभावशाली होता है। उनकी आंखों का रंग लाल होता है और उनके मुख पर एक उग्र मुस्कान होती है। उनके मुख के एक स्वरूप में उनके आंतरिक शक्तियों को दर्शाता है। कुष्माण्डा माँ के चार हाथ होते हैं, जिनमें एक हाथ में छड़ी और दूसरे हाथ में कमंडलु होती है। वे एक शूल और एक बिखरी चाकू धारण करती हैं, जो उनकी उत्पत्ति की प्रतीक हैं। कुष्माण्डा माँ का वाहन एक शेर होता है, जो उनकी शक्ति और साहस को प्रतिनिधित करता है। कुष्माण्डा माँ की पूजा से भक्त अपने जीवन में उत्पन्न होने वाली समस्त समस्याओं और बाधाओं का निवारण प्राप्त करते हैं, और उन्हें सार्थक और समृद्धिशाली जीवन प्राप्त होता है। उनकी पूजा भक्तों को शक्ति और साहस का आशीर्वाद प्रदान करती है।
स्कंदमाता:
पांचवे रूप में माता स्कंदमाता हैं, जो स्कंद (कार्तिकेय) की माँ हैं। स्कंदमाता, नवदुर्गा माता के पांचवे रूप में से एक हैं। इस रूप में माँ दुर्गा को स्कंद (कार्तिकेय) की माँ के रूप में पूजा जाता है। स्कंदमाता का स्वरूप अत्यंत प्रसन्न और सुंदर होता है। वह एक बालक को अपने गोद में ले कर बैठती हैं, जो कार्तिकेय (स्कंद) को प्रतिनिधित करता है। उनकी विगति आध्यात्मिक और आनंदमयी होती है, और वे आकर्षक साध्वी के रूप में विशेषता दिखाती हैं।स्कंदमाता माँ की पूजा से भक्त अपने जीवन में बच्चों की संतान, सुख, और समृद्धि की प्राप्ति के लिए आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। उनकी पूजा से माँ उनके परिवार की सुरक्षा के लिए आशीर्वाद प्रदान करती हैं।
कात्यायनी:
छठे रूप में माता कात्यायनी हैं, जो महिषासुर के वध के लिए उत्तर कुमार की पूजा करती हैं। कात्यायनी देवी का स्वरूप अत्यंत महान और उदार होता है। वह चेहरे पर प्रसन्नता और सौम्यता का प्रतीक होती हैं, लेकिन उनकी दृष्टि उग्र और प्रभावशाली होती है। कात्यायनी देवी के चार हाथ होते हैं, जिनमें एक हाथ में खड़ा त्रिशूल होता है और दूसरे हाथ में वीणा होती है। उनके दो हाथ और एक मुद्रा में विशेषता दिखाते हैं, जो उनके शक्ति को प्रतिनिधित करते हैं। कात्यायनी देवी का वाहन सिंह होता है, जो उनकी शक्ति और वीरता को प्रतिनिधित करता है। कात्यायनी माँ की पूजा से भक्त अपने जीवन में स्थिरता, समृद्धि, और सफलता की प्राप्ति के लिए आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। उनकी पूजा से माँ उनके सभी कार्यों में सफलता के लिए संयम और निर्णय देती हैं।
कालरात्रि:
सातवें रूप में माता कालरात्रि हैं, जो कालरात्रि की उत्पत्ति को बनाए रखने वाली देवी हैं।कालरात्रि देवी का स्वरूप अत्यधिक उग्र और भयंकर होता है। वह काली के रूप में प्रतिष्ठित होती हैं, जिनका चेहरा उग्रता और अद्भुतता से भरा होता है। उनके मुख पर विशालकाय चाकु की प्रतिमा होती है, और उनके आंखों में अग्नि की ज्वाला लगती है। कालरात्रि देवी के चार हाथ होते हैं, जिनमें एक हाथ में खड़ा त्रिशूल होता है और दूसरे हाथ में काले रंग का घड़ा होता है। उनकी तीसरी हाथ में दमरू होता है, और चौथे हाथ में वरदान का मुद्रा होता है, जो उनकी शक्ति को प्रतिनिधित करते हैं। कालरात्रि देवी का वाहन भालू होता है, जो उनकी शक्ति और संरक्षण को प्रतिनिधित करता है। कालरात्रि माँ की पूजा से भक्त अपने जीवन में शक्ति, साहस, और अभय की प्राप्ति के लिए आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। उनकी पूजा से माँ उनके सभी भयों और संकटों को दूर करती हैं, और उन्हें संरक्षण और सम्मान का आशीर्वाद प्रदान करती हैं।
महागौरी देवी
नवदुर्गा माता के आठवें रूप में से एक हैं। इस रूप में माँ दुर्गा को शुभ और पवित्र स्वरूप में पूजा जाता है। इस रूप में माँ दुर्गा को उनकी विशेषता और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। महागौरी देवी का स्वरूप शानदार और दिव्य होता है। उनका चेहरा प्रकाशमय होता है और वे अत्यंत पवित्र दिखाई देती हैं। वे श्वेत वस्त्र पहनती हैं, जो उनकी निर्मलता और पवित्रता को दर्शाता है। महागौरी देवी के दो हाथ होते हैं, जिनमें एक हाथ में त्रिशूल होता है और दूसरे हाथ में वरदान का मुद्रा होता है। उनके चेहरे पर एक मुस्कान होती है, जो उनकी दयालुता और प्रसन्नता को प्रतिनिधित करती है। महागौरी देवी का वाहन सिंह होता है, जो उनकी शक्ति और साहस को प्रतिनिधित करता है। महागौरी माँ की पूजा से भक्त अपने जीवन में शुभ और पवित्र गुणों को प्राप्त करते हैं। उनकी पूजा से माँ उनके सभी दुःखों और बुराइयों को दूर करती हैं, और उन्हें शांति और सुख का आशीर्वाद प्रदान करती हैं।
सिद्धिदात्री:
नौवें रूप में माता सिद्धिदात्री हैं, जो सभी सिद्धियों की देवी हैं। वह अपने दोनों हाथों में वरदान और वाहन को धारण करती हैं। ये नौ रूप माता दुर्गा के अद्वितीय और प्रतिष्ठित रूप हैं, जो नवरात्रि के नौ दिनों में पूजे जाते हैं। सिद्धिदात्री देवी, नवदुर्गा माता के नौवें और अंतिम रूप में से एक हैं। इस रूप में माँ दुर्गा को सर्वशक्तिमान सिद्धिदात्री के रूप में पूजा जाता है, जो अपने भक्तों को सिद्धियाँ (अच्छे परिणाम) प्रदान करती हैं।
सिद्धिदात्री देवी का स्वरूप अत्यधिक प्रसन्न और उदार होता है। उनका चेहरा प्रकाशमय होता है और उनकी आंखों में अनंत दया और स्नेह की भावना होती है। सिद्धिदात्री देवी के दो हाथ होते हैं, जिनमें एक हाथ में खड़ा त्रिशूल होता है और दूसरे हाथ में वरदान का मुद्रा होता है। उनके हाथों में उज्जवल और शुभता की भावना होती है। सिद्धिदात्री देवी का वाहन गदा होता है, जो उनकी सामर्थ्य और शक्ति को प्रतिनिधित करता है। सिद्धिदात्री माँ की पूजा से भक्त अपने जीवन में सिद्धियाँ, सफलता, और अनुग्रह प्राप्त करते हैं। उनकी पूजा से माँ उनके सभी कार्यों में सफलता और समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करती हैं।
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अस्वीकरण: कृपया ध्यान दें कि लेख में उल्लिखित टिप्स/सुझाव केवल सामान्य जानकारी है जो विभिन्न सामाजिक और धार्मिक आस्था पर आधारित हैं.ताकि आपको उस मुद्दे के बारे में अपडेट रखा जा सके जो कि आम लोगों से अपेक्षित है. आपसे निवेदन है कि कृपया इन सुझावो को पेशेवर सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए तथा अगर आपके पास इन विषयों से सम्बंधित कोई विशिष्ट प्रश्न हैं तो हमेशा सम्बंधित एक्सपर्ट से अवश्य परामर्श करें।
Born on Monday : सोमवार को जन्में लोग होते हैं भावुक, आकर्षक व्यक्तित्व के स्वामी, इनकी खासियत आपको भी कर देगी हैरान
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सोमवार के दिन जन्मे बच्चे का नाम क्या रखना चाहिए
सोमवार को जन्में लड़के का नाम लिस्ट
- शिवांश - एक नाम जिसका अर्थ है "शिव का अंश"
- शिवेन - एक नाम जिसका अर्थ है "जो पवित्र और दयालु है"
- चंद्र - एक नाम जिसका अर्थ है "चाँद"
- सोमन - एक नाम जिसका अर्थ है "चाँद जैसा"
- नवनीत - एक नाम जिसका अर्थ है "नया और मनमोहक"
- शिवेश - एक नाम जिसका अर्थ है "सफलता का स्वामी"
- शिवाया - एक नाम जिसका अर्थ है "आशीर्वादों से भरा हुआ"
- शुभम - एक नाम जिसका अर्थ है "सौभाग्य"
- शुक्ल - एक नाम जिसका अर्थ है "उज्ज्वल और शुद्ध"
- तुषार - एक नाम जिसका अर्थ है "बर्फ का टुकड़ा"
- उदय - एक नाम जिसका अर्थ है "उठो, सुबह"
- शिवानंद - एक नाम जिसका अर्थ है "अनंत सुख"
- शिवेंद्र - एक नाम जिसका अर्थ है "देवताओं का राजा"
सोमवार को जन्में लड़कियों के नाम
- रोहिणी - एक नाम जिसका अर्थ है "जो समृद्ध और चमकीला है"
- शिवांगी - एक नाम जिसका अर्थ है "सुंदर शरीर वाली"
- शिवाली - एक नाम जिसका अर्थ है "एक जो शिव की पूजा करती है"
- सोम्या - एक नाम जिसका अर्थ है "शांत और शांतिपूर्ण"
- शिवानी - एक नाम जिसका अर्थ है "सौभाग्य लाने वाली"
- अमृता - एक नाम जिसका अर्थ है "शाश्वत, अमर और दिव्य अमृत"
- शिवंशी - एक नाम जिसका अर्थ है "दिव्य चेतना का अंश"
गजब का आकर्षण
- शिवेश
- शिव
- नवनीत
- सोम्या
- शिवानी
- शुभम्
- शिक्षा
- शिवंशी
- उदय
- शाइनी
परिश्रमी: सोमवार को जन्म लेने वाले व्यक्ति काफी परिश्रमी और मेहनती होते हैं. ऐसे व्यक्ति कभी भी शांति से बैठना पसंद नहीं करते हैं और हमेशा खुद को व्यस्त रखना चाहते हैं. समय का सदुपयोग करने में ऐसे लोग काफी सक्रिय रहते हैं और अगर अच्छे और क्रियाशील प्रवृति के स्वामी होने पर ऐसे जातक जीवन में कई सारे कार्यों को अपने हाथ में एक साथ लेकर सफलतापूर्वक उसे अंजाम तक पहुंचाते हैं.
चरित्रवान: सोमवार को जन्म लेने वाले व्यक्तियों की यह खासियत होती है कि वे उच्च चरित्र वाले होते हैं और खुद की चरित्र की उन्हें काफी परवाह रहती हैं. हालाँकि जातक विपरीत और विरोधावासी प्रवृति को जीना पसंद करे हैं. जैसे विषय वासना और भोग को वे गलत नहीं समझते लेकिन फिर भी उच्च चरित्र उनके लिए हमेशा महत्वपूर्ण होता है और इसके लिए वे सामान्यत: कोई समझौता पसंद नहीं करते हैं.
धार्मिक/सामाजिक कार्यों में भाग लेने वाले: सोमवार को जन्म लेने वाले व्यक्ति सामान्यत: धार्मिक प्रवृति के होते हैं धार्मिक कार्यों और पूजा पाठ में उनकी विशेष रूचि होती है. भले है वे अधिक देर तक पूजा करने विश्वाश नहीं करें लेकिन धार्मिक और सामाजिक कार्यों में वे विशेष रूचि दिखाते हैं.
रविवार को हुआ है जन्म तो आप होंगे: दृढ इच्छा शक्ति के मालिक
सुख दुःख में समान रहेगा: ऐसे व्यक्ति सुख और दुःख दोनों हीं परिस्थितियों में एक सामान होते हैं और जल्दी विचलित होना पसंद नहीं करते. सुख की स्थिति में भी ये सामान्यत: अपने आपको दिखावे और आडंवर से बचाए रखते हैं. वहीँ दुःख की स्थिति में भी ये अपने सम्मान को नहीं छोड़ते हैं और जल्दी किसी के सामने हाथ फैलाना पसंद नहीं करते हैं.
स्वास्थय और व्यक्तित्व : ऐसे व्यक्तियों का चेहरा सामान्यत: गोल होता ऐसे लोगों को स्वास्थ्य को लेकर कोल्ड या ठंडी से विशेष सावधान रहने की जरुरत होगी. ऐसे लोग सर्दी या जुकाम से काफी संवेदनशील होते हैं और उन्हें इससे विशेष परहेज लेने की जरुरत होती है. हल्का कोल्ड भी इन्हे परेशान करती है और इन्हे सर्दी या जुकाम अपने चपेट में ले सकती है. इसके साथ ही सोमवार को जन्म लेने वाले जातको का शरीर वात और कफ से युक्त होता है इसलिए इन्हे विशेष सावधानी बरतनी चाहिए.
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रविवार को जन्मे लोगों की विशेषता
किन लोगों पर होती है भगवान सूर्य की विशेष कृपा
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अस्वीकरण: कृपया ध्यान दें कि लेख में उल्लिखित टिप्स/सुझाव केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से हैं ताकि आपको उस मुद्दे के बारे में अपडेट रखा जा सके जो आम लोगों से अपेक्षित है. आपसे निवेदन है कि कृपया इन सुझावो को पेशेवर ज्योतिषीय सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए तथा अगर आपके पास इन विषयों से सम्बंधित कोई विशिष्ट प्रश्न हैं तो हमेशा अपने ज्योतिषी या पेशेवर ज्योतिष/कुंडली सुझाव प्रदाता से अवश्य परामर्श करें।
भगवान राम से सीखें: परिवार में संबंधों की मर्यादा और आदर्श
भगवान् राम के व्यापक चरित्र जिसमें उन्होंने परिवार के सभी सम्बन्धो को विनम्रता और गंभीरता के साथ निभाया है. भगवान्र राम ने बताया है कि जीवन में कितना भी बड़ा विपत्ति सामने क्यों नहीं आये, संबधो की गरिमा को बनाये हुए श्रेष्ठतम जीवनशैली प्रदर्शित किया जा सकता है.
यह भगवान् राम के जीवन का उच्चतम आदर्श ही है जिसके लिए हम प्रभु राम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहकर पुकारते हैं. भगवन राम के चरित्र की व्यापकता की हम मानव मात्र सिर्फ कल्पना ही कर सकते हैं जहाँ उन्होंने गुरु, माता-पिता, भाई, पत्नी, सेवक की कौन कहें, यहाँ तक कि प्रभु राम ने अपने शत्रुओं के साथ भी समरनीति की व्यवहारिकता और आदर्श को स्थापित किया है जो सम्पूर्ण जगत में अनूठा उदहारण है.
गुरु के प्रति निष्ठा और समर्पण:
भगवान राम ने अपने गुरु को हमेशा ही सर्वोपरि रखा जिसकी झलक विश्वामित्र,वशिष्ठ और वाल्मीकि जैसे गुरुजनों की सीख और आदर्शों को हमेशा से जीवन का सर्वोच्च स्थान दिया.
माता पिता के आदेश निर्देश का अनुसरण:
भगवान राम ने हमेशा माता-पिता की बातों को सर्वोच्च स्थान दिया. माता पिता के आदेश और निर्देश को उन्होंने हमेशा से पालन किया और इसकी सबसे सुन्दर झलक मिलती है वनवास के आज्ञा के पालन के दौरान. राज-पाट को त्याग कर वनवास में एक वनवासी के जीवन जीना इतिहास में एक अनूठा आदर्श है.
भाई के साथ बंधुत्व की कोमलता:
भगवान राम ने अपने भाइयों के साथ भी हमेशा से कोमलता और प्रेम को स्थान दिया. वह चाहे भरत-मिलाप हो या फिर अन्य कई ऐसे घटनाएं राम चरितमानस में उल्लेखित हैं जो यह साबित करती है कि भगवान राम ने बंधुत्व के साथ सम्बन्धो को हमेशा से कोमलता और गंभीरता के साथ निभाया.
पत्नी के साथ दाम्पत्य का शालीन स्नेहभाव:
राम चरित मानस में आप पाएंगे की भगवन राम ने पत्नी के साथ शालीन स्नेहभाव का परिचय दिया है.
सेवक के लिए उदारता और वत्सलता:
भगवन राम ने अपने सेवकों के साथ किस प्रकार का सम्बन्ध निभाया है, वह अपने आप में अनुकरणीय है. हनुमान भगवान् जो प्रभु राम की भक्ति और अपने सेवक वाली छवि के लिए ही पूजनीय है, रामायण में केवट और शबरी जैसे कितने सेवक हैं जिनके साथ प्रभु राम ने उदारता और वत्सलता का परिचय देकर प्रभु और सेवक के साथ सम्बन्धो को नया आयाम दिया है.
मित्र के लिए सर्वस्व अर्पण की तत्परता:
प्रभु राम ने मित्रों के साथ हमेशा दोस्ती के धर्म को निभाया है जिसके लिए प्रभु हमेशा से पूजनीय है. लंका के राजा रावण के भाई विभीषण के साथ मित्रता हो या फिर सुग्रीव के साथ, प्रभु राम ने हमेशा से मित्र धर्म को प्रमुखता के साथ सर्वस्व अर्पण करते हुए तत्परता के साथ निभाया है.
थर्मोस्फीयर: MCQ क्विज़
थर्मोस्फीयर पृथ्वी के वायुमंडल की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ऊपरी परत है जहाँ तापमान बहुत अधिक होता है और अंतरिक्ष स्टेशन परिक्रमा करते हैं। “परत” किसी संरचना के स्तर को दर्शाती है, जबकि “थर्मामीटर” तापमान मापने का उपकरण है।
यह विषय सामान्य ज्ञान, स्कूल शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 1. थर्मोस्फीयर वायुमंडल की कौन-सी परत है?
A. पहली
B. दूसरी
C. चौथी
D. पाँचवीं
उत्तर: C. चौथी
प्रश्न 2. थर्मोस्फीयर लगभग कितनी ऊँचाई से शुरू होती है?
A. 10 किमी
B. 50 किमी
C. 80 किमी
D. 150 किमी
उत्तर: C. 80 किमी
प्रश्न 3. निम्नलिखित में से कौन-सी घटना थर्मोस्फीयर में होती है?
A. वर्षा
B. बादल बनना
C. ऑरोरा
D. ओस बनना
उत्तर: C. ऑरोरा
प्रश्न 4. International Space Station किस परत में परिक्रमा करता है?
A. क्षोभमंडल
B. समतापमंडल
C. मध्यमंडल
D. थर्मोस्फीयर
उत्तर: D. थर्मोस्फीयर
प्रश्न 5. थर्मोस्फीयर में तापमान अधिक होने का मुख्य कारण क्या है?
A. बादलों की अधिकता
B. सूर्य की ऊर्जावान किरणों का अवशोषण
C. वर्षा
D. वायु दाब
उत्तर: B. सूर्य की ऊर्जावान किरणों का अवशोषण
प्रश्न 6. वायुमंडल की सबसे निचली परत कौन-सी है?
A. समतापमंडल
B. मध्यमंडल
C. क्षोभमंडल
D. थर्मोस्फीयर
उत्तर: C. क्षोभमंडल
प्रश्न 7. “परत” का सही अर्थ क्या है?
A. ऊँचाई
B. स्तर (Layer)
C. तापमान
D. दबाव
उत्तर: B. स्तर (Layer)
प्रश्न 8. थर्मामीटर का उपयोग किसे मापने के लिए किया जाता है?
A. दबाव
B. ऊँचाई
C. तापमान
D. आर्द्रता
उत्तर: C. तापमान
प्रश्न 9. थर्मामीटर के प्रारंभिक विकास का श्रेय किसे दिया जाता है?
A. आइंस्टीन
B. न्यूटन
C. Galileo Galilei
D. एडिसन
उत्तर: C. गैलीलियो गैलिली
प्रश्न 10. आयनमंडल (Ionosphere) मुख्यतः किस परत में पाया जाता है?
A. क्षोभमंडल
B. मध्यमंडल
C. थर्मोस्फीयर
D. एक्सोस्फीयर
उत्तर: C. थर्मोस्फीयर
प्रश्न 11. थर्मोस्फीयर में तापमान लगभग कितना हो सकता है?
A. 50°C
B. 200°C
C. 500°C
D. 1500°C या अधिक
उत्तर: D. 1500°C या अधिक
प्रश्न 12. थर्मोस्फीयर के ऊपर की परत क्या कहलाती है?
A. समतापमंडल
B. मध्यमंडल
C. एक्सोस्फीयर
D. क्षोभमंडल
उत्तर: C. एक्सोस्फीयर
नजरिया जीने का: प्रधानमंत्री के क्रोध को त्यागने वाला कौन सा श्लोक आज हर जुबान पर है
क्रोधः प्राणहरः शत्रुः क्रोधो मित्रमुखो रिपुः।
क्रोधो ह्यसिर्महातीक्ष्णः सर्व क्रोधोऽपकर्षति॥
इसका अर्थ है कि क्रोध प्राण लेने वाला शत्रु है, जो मित्र के रूप में दिखता है पर भीतर से दुश्मन होता है। क्रोध अत्यंत तीक्ष्ण (धारदार) तलवार के समान है, जो जीवन की हर अच्छाई को काट देता है।
क्रोधः प्राणहरः शत्रुः क्रोधो मित्रमुखो रिपुः।
— Narendra Modi (@narendramodi) December 12, 2025
क्रोधो ह्यसिर्महातीक्ष्णः सर्व क्रोधोऽपकर्षति॥ pic.twitter.com/GBxlYC0oIH
नजरिया जीने का: जानें वृक्ष के चिरस्थायी लाभों को समर्पित प्रधानमंत्री का सुन्दर श्लोक
वास्तव में उक्त श्लोक वाल्मीकि रामायण से लिए गया है जिसका चर्चा प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय सद्भाव के लिए क्रोध को त्यागने की आवश्यकता बताते हुए किया है.
क्रोधः प्राणहरः शत्रु: क्रोधो मित्रमुखी रिपुः |
क्रोधो हि असिर्महातीक्ष्णः सर्वं क्रोधोपकर्षति ||
-वाल्मीकि रामायण
गुस्सा अर्थात क्रोध एक दुश्मन की तरह है जो किसी की जान ले सकता है और दोस्तों के बीच दुश्मनी का मुख्य कारण भी है। गुस्सा निश्चित रूप सेएक बहुत तेज़ तलवार की तरह है, जो हर किसी को नुकसान और अपमान पहुंचा सकता है।
दूसरे शब्दों में कहें तो गुस्सा प्राणहरण करने वाले शत्रु के समान है तथा मित्रों के बीच शत्रुता होने का कारण भी होता है | क्रोध वास्तव में एक तीक्ष्ण तलवार के समान है जो सब् को अपमानित कर हानि पहुंचाता है. श्लोक का साफ अर्थ है कि हमें गुस्सा अर्थात क्रोध पर पूर्ण नियंत्रण करना चाहिए.
नजरिया जीने का: सकारात्मक और उत्साही लोगों के साथ समय बिताएं, जीवन का हर मुश्किल होगा आसान
यह सकारात्मक दृष्टिकोण का अभ्यास है जो आपके जीवन में आशावाद और आशावादी दृष्टिकोण लाता है। सकारात्मक दृष्टिकोण हमें सकारात्मक सोचने में आसान बनाता है और यह हमें चिंताओं और नकारात्मक सोच से बचने की कला भी सिखाता है...
याद रखें, प्रकृति भी आपके अंदर उत्पन्न विचारों को हीं सशक्त करने और उसे पूरा करने की लिए बल देती है, और इसलिए हैं हमें बचपन से यह पढ़ाया जाता है कि -" हमें अपने मन में बुरे विचारों को लाने से बचना चाहिए"
आपका Attitude आपके आस-पास हो रही घटनाओं के बारे में आपकी राय बनाने में आपकी मदद करता है... सोचने के तरीके ने आपके विचारों को तय किया और निश्चित रूप से यह आपके कार्यों में दिखाई देता है। जिस वातावरण में आप रह रहे हैं, वह भी आपके दृष्टिकोण के प्रभाव प्रदर्शित करता है.
दुनिया में ऐसे लोग भी हैं जिन्होंने अपनी मामूली चोटों और जीवन की कठिनाइयों के कारण जीवन के निराशावादी और नकारात्मक रवैये के कारण दम तोड़ दिया है.
अपने जीवन में हर असफलता के लिए अपने आस-पास की परिस्थितियों को दोष न दें. आपके जीवन में कठिन परिस्थितियों से निपटने के लिए अपनी मानसिकता और दृष्टिकोण को बदलने की आवश्यकता है.।
आपके सकारात्मक और आशावादी दृष्टिकोण में आपके जीवन में आपकी हर सफलता/असफलता का कारण प्रदान करने की शक्ति है और इसलिए अपने सोचने के तरीके को नज़रअंदाज़ न करें.निश्चित रूप से यह आपके जीवन में कठिन परिस्थितियों से निपटने का मूल तरीका है,
लॉकडाउन और ऑनलाइन पढ़ाई: बच्चों से अधिक है पेरेंट्स की भूमिका, अपनाएँ ये टिप्स
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अस्वीकरण: कृपया ध्यान दें कि लेख में उल्लिखित टिप्स/सुझाव केवल सामान्य जानकारी है जो विभिन्न सामाजिक और धार्मिक आस्था पर आधारित हैं.ताकि आपको उस मुद्दे के बारे में अपडेट रखा जा सके जो कि आम लोगों से अपेक्षित है. आपसे निवेदन है कि कृपया इन सुझावो को पेशेवर सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए तथा अगर आपके पास इन विषयों से सम्बंधित कोई विशिष्ट प्रश्न हैं तो हमेशा सम्बंधित एक्सपर्ट से अवश्य परामर्श करें।
Mercury Retrograde क्या है? जानें Date , कब तक चलेगा क्या होगा इसका प्रभाव?
इसी दृश्य भ्रम को Mercury Retrograde कहा जाता है। यह वास्तव में उल्टा चलना नहीं है, बल्कि एक optical illusion (दृश्य भ्रम) है।
Mercury Retrograde कितने समय तक रहता है?
हर बार Mercury Retrograde लगभग 3 सप्ताह (21 से 24 दिन) तक रहता है।
साल में कितनी बार होता है?
Mercury Retrograde आमतौर पर साल में 3 से 4 बार होता है।
हर कुछ महीनों में यह चक्र दोबारा आता है।
Shadow Period क्या होता है?
Retrograde शुरू होने से लगभग 1–2 हफ्ते पहले और खत्म होने के 1–2 हफ्ते बाद भी इसका प्रभाव महसूस किया जाता है।
इसे “Shadow Period” कहा जाता है।
मतलब कुल मिलाकर इसका असर लगभग 6 से 8 हफ्तों तक महसूस हो सकता है।
Mercury Retrograde के दौरान क्या होता है?
अपनी वक्री अवस्था के दौरान, बुध या कोई भी अन्य ग्रह वास्तव में अंतरिक्ष में पीछे की ओर गति नहीं करता या धीमा नहीं होता। बुध की वक्री अवस्था तब होती है जब ग्रह राशिचक्र में अपने सामान्य पथ पर यात्रा कर रहा होता है और फिर, हमारे दृष्टिकोण से, कुछ समय के लिए रुकने से पहले धीमा हो जाता है और फिर अपनी आभासी गति को उलट कर ब्रह्मांड में उस स्थान पर लौट आता है जहाँ वह हाल ही में था। यह राशिचक्र में एक विशिष्ट बिंदु तक पीछे की ओर जाता है और फिर एक बार फिर धीमा हो जाता है, कुछ समय के लिए रुकता है और फिर से आगे की ओर बढ़ता हुआ प्रतीत होता है
GK Quiz : UPSC, SSC, Railway, NDA आदि में पूछे गए सवालों का कलेक्शन
प्रतियोगिता परीक्षा (UPSC, SSC, Railway, NDA, State PSC विभिन्न राज्य सेवा आयोगों ) की परीक्षा में पूछे जाते रहे है. आगामी प्रतियोगिता परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए तथा अन्य अवसरों जैसे स्कूल, प्रतियोगी परीक्षा, मंच संचालन, ब्लॉग और क्विज़ प्रतियोगिता के लिए जरुरी ये प्रश्नोत्तर आपके लिए काफी उपयोगी हैं.
प्रश्न 1. भारत का संविधान किस तिथि को लागू हुआ?
- उत्तर: 26 जनवरी 1950
- परीक्षा: UPSC Prelims
- वर्ष: 2016
प्रश्न 2. 26 जनवरी को ही संविधान लागू करने का निर्णय क्यों लिया गया था?
- उत्तर: 26 जनवरी 1930 को पूर्ण स्वराज की घोषणा हुई थी
- परीक्षा: SSC CGL
- वर्ष: 2018
प्रश्न 3. संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष कौन थे?
- उत्तर: डॉ. राजेंद्र प्रसाद
- परीक्षा: Railway Group D
- वर्ष: 2019
प्रश्न 4.भारतीय संविधान की प्रारूप समिति (Drafting Committee) के अध्यक्ष कौन थे?
- उत्तर: डॉ. भीमराव अंबेडकर
- परीक्षा: SSC CHSL
- वर्ष: 2020
प्रश्न 5. भारत का पहला गणतंत्र दिवस परेड कहाँ आयोजित हुआ था?
- उत्तर: इरविन स्टेडियम, दिल्ली
- परीक्षा: NDA
- वर्ष: 2015
प्रश्न 6. भारत के पहले गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि कौन थे?
- उत्तर: सुकर्णो (इंडोनेशिया)
- परीक्षा: State PSC (UPPSC)
- वर्ष: 2017
प्रश्न 7. संविधान को बनने में कुल कितना समय लगा?
- उत्तर: 2 वर्ष 11 महीने 18 दिन
- परीक्षा: SSC GD
- वर्ष: 2021
प्रश्न 8. भारतीय संविधान की मूल भाषा क्या थी?
- उत्तर: अंग्रेज़ी
- परीक्षा: Railway NTPC
- वर्ष: 2020
प्रश्न 9. गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रपति को कितनी तोपों की सलामी दी जाती है?
- उत्तर: 21 तोपों की
- परीक्षा: CDS
- वर्ष: 2016
प्रश्न 10. संविधान सभा की पहली बैठक कब हुई थी?
- उत्तर: 9 दिसंबर 1946
- परीक्षा: UPSC Prelims
- वर्ष: 2014
प्रश्न 11. भारत को “गणराज्य” घोषित करने का क्या अर्थ है?
- उत्तर: देश का प्रमुख जनता द्वारा चुना जाता है
- परीक्षा: SSC MTS
- वर्ष: 2019
प्रश्न 12. गणतंत्र दिवस समारोह का समापन किस देशभक्ति गीत से होता है?
- उत्तर: सारे जहाँ से अच्छा
- परीक्षा: Railway ALP
- वर्ष: 2018
प्रश्न 13. संविधान में मौलिक कर्तव्य किस संशोधन द्वारा जोड़े गए?
- उत्तर: 42वां संविधान संशोधन
- परीक्षा: UPSC Prelims
- वर्ष: 2017
प्रश्न 14. प्रारंभ में भारतीय संविधान में कितनी अनुसूचियाँ थीं?
- उत्तर: 8 अनुसूचियाँ
- परीक्षा: State PSC (BPSC)
- वर्ष: 2016
प्रश्न 15.भारत का संविधान विश्व में किस रूप में जाना जाता है?
- उत्तर: विश्व का सबसे लंबा लिखित संविधान
- परीक्षा: SSC CPO
- वर्ष: 2022
प्रश्न 16.संविधान सभा की पहली बैठक कब हुई थी?
- उत्तर: 9 दिसंबर 1946
- परीक्षा: UPSC Prelims
- वर्ष: 2014
प्रश्न 17.संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष कौन थे?
- उत्तर: डॉ. राजेंद्र प्रसाद
- परीक्षा: SSC CHSL
- वर्ष: 2020
प्रश्न 18. भारतीय संविधान की प्रारूप समिति (Drafting Committee) के अध्यक्ष कौन थे?
- उत्तर: डॉ. भीमराव अंबेडकर
- परीक्षा: UPSC Prelims
- वर्ष: 2017
प्रश्न 19. भारतीय संविधान को बनने में कुल कितना समय लगा?
- उत्तर: 2 वर्ष 11 महीने 18 दिन
- परीक्षा: SSC GD
- वर्ष: 2021
प्रश्न 20.भारत का पहला गणतंत्र दिवस परेड कहाँ आयोजित हुआ था?
- उत्तर: इरविन स्टेडियम, दिल्ली
- परीक्षा: SSC MTS
- वर्ष: 2017
प्रश्न 21.संविधान में मौलिक कर्तव्य किस संविधान संशोधन द्वारा जोड़े गए?
- उत्तर: 42वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1976
- परीक्षा: UPSC Prelims
- वर्ष: 2017
प्रश्न 22.प्रारंभ में भारतीय संविधान में कितनी अनुसूचियाँ थीं?
- उत्तर: 8 अनुसूचियाँ
- परीक्षा: SSC CHSL
- वर्ष: 2016
प्रश्न 23.“गणराज्य” का सही अर्थ क्या है?
- उत्तर: राज्य का प्रमुख जनता द्वारा चुना जाता है
- परीक्षा: SSC MTS
- वर्ष: 2019
प्रश्न 24.गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रपति को कितनी तोपों की सलामी दी जाती है?
- उत्तर: 21 तोपों की
- परीक्षा: UPSC Prelims
- वर्ष: 2013
प्रश्न 25. भारतीय संविधान को किस तिथि को अंगीकृत (Adopt) किया गया?
- उत्तर: 26 नवंबर 1949
- परीक्षा: UPSC Prelims
- वर्ष: 2019









