English is easy pairs of confusing english words


Here are 20 pairs/groups of confusing English words with similar spellings. These are excellent for testing children's attention to detail, vocabulary, spelling awareness, and verbal IQ. These words are mainly from the various Competitive examinations.

No.WordMeaning
1AcceptTo receive
ExceptExcluding
2AffectTo influence
EffectResult; consequence
3AdviceGuidance (noun)
AdviseTo give guidance (verb)
4PrincipalHead of a school; most important
PrincipleA rule or belief
5StationaryNot moving
StationeryWriting materials
6ComplementSomething that completes
ComplimentPraise
7DesertDry land / to abandon
DessertSweet dish after a meal
8LooseNot tight
LoseTo misplace or fail to win
9QuietSilent
QuiteVery; completely
10ThenAfter that
ThanUsed in comparisons
11WeatherClimate conditions
WhetherIf
12BreathAir taken into the lungs (noun)
BreatheTo inhale and exhale (verb)
13ClothFabric
ClotheTo dress someone
14FartherGreater physical distance
FurtherAdditional; more
15PersonalPrivate; belonging to a person
PersonnelEmployees or staff
16ElicitTo draw out a response
IllicitIllegal
17EminentFamous; respected
ImminentAbout to happen
18AllusionAn indirect reference
IllusionA false appearance
19MoralA lesson or ethical principle
MoraleConfidence or team spirit
20HistoricImportant in history
HistoricalRelated to history

IQ Vocabulary Challenge Choose the Correct Meaning


20 sets of advanced English words with meanings. They are arranged from moderately difficult to highly challenging. These word meaning are important for forthcoming competitive exams and it will be beneficial for you to score and leading on your opponents in the exams. 

Set Word Meaning
1 Ephemeral Lasting for a very short time
2 Meticulous Very careful and precise
3 Ambiguous Having more than one possible meaning
4 Benevolent Kind and generous
5 Resilient Able to recover quickly from difficulties
6 Pragmatic Dealing with things realistically and practically
7 Ubiquitous Present everywhere
8 Eloquent Fluent and persuasive in speaking or writing
9 Scrutinize To examine very carefully
10 Alleviate To make something less severe
11 Tenacious Determined; not giving up easily
12 Candid Honest and straightforward
13 Conundrum A confusing or difficult problem
14 Fastidious Very attentive to detail; hard to please
15 Ineffable Too great to be expressed in words
16 Magnanimous Generous and forgiving, especially toward rivals
17 Obfuscate To deliberately make something unclear or confusing
18 Perspicacious Having keen insight and good judgment
19 Recalcitrant Stubbornly refusing to obey authority
20 Sagacious Wise and showing sound judgment

Now Check your IQs and reply all these questions given below-

 1. Ephemeral means:

A. Permanent
B. Short-lived
C. Powerful
D. Dangerous
Answer: B

2. Ubiquitous means:
A. Rare
B. Everywhere
C. Invisible
D. Ancient
Answer: B

3. Magnanimous means:
A. Selfish
B. Brave
C. Generous and forgiving
D. Angry
Answer: C

4. Obfuscate means:
A. Simplify
B. Clarify
C. Confuse intentionally
D. Ignore
Answer: C

5. Perspicacious means:
A. Lazy
B. Highly perceptive
C. Nervous
D. Humorous
Answer: B

6. Recalcitrant means:
A. Cooperative
B. Stubbornly disobedient
C. Friendly
D. Excited
Answer: B

7. Ineffable means:
A. Impossible to express in words
B. Easily explained
C. Very loud
D. Extremely common
Answer: A

8. Tenacious means:
A. Weak
B. Persistent
C. Forgetful
D. Curious
Answer: B

9. Fastidious means:
A. Careless
B. Hard to satisfy because of high standards
C. Funny
D. Honest
Answer: B

10. Conundrum means:
A. Celebration
B. Difficult problem
C. Success
D. Adventure
Answer: B

11. Pragmatic means:
A. Imaginative
B. Practical
C. Emotional
D. Wealthy
Answer: B

12. Alleviate means:
A. Increase
B. Reduce or relieve
C. Destroy
D. Build
Answer: B

13. Eloquent means:
A. Silent
B. Fluent and persuasive
C. Shy
D. Confused
Answer: B

14. Benevolent means:
A. Kind
B. Cruel
C. Proud
D. Lazy
Answer: A

15. Meticulous means:
A. Careful and precise
B. Quick
C. Angry
D. Loud
Answer: A

16. Ambiguous means:
A. Clear
B. Having multiple meanings
C. Honest
D. Fast
Answer: B

17. Scrutinize means:
A. Ignore
B. Examine carefully
C. Celebrate
D. Predict
Answer: B

18. Sagacious means:
A. Wise
B. Foolish
C. Timid
D. Confident
Answer: A

19. Candid means:
A. Honest and direct
B. Secretive
C. Confused
D. Arrogant
Answer: A

20. Resilient means:
A. Easily broken
B. Able to recover quickly
C. Slow
D. Quiet
Answer: B

Scoring Guide

  • 18–20: Exceptional Vocabulary IQ
  • 15–17: Excellent
  • 12–14: Very Good
  • 8–11: Good
  • 5–7: Average
  • 0–4: Needs Vocabulary Improvement

जानें कैसे करें अपने महंगे फर्नीचर की देखभाल: एक्सपर्ट टिप्स

मानसून के आरंभ होने के साथ हीं जहाँ हमें गर्मी से निजात मिलती है, वहीं खाने पीने से लेकर घर की चीजों खासतौर पर फर्नीचर के देखभाल की भी जरूरत होती है।आपके घर के अंदर रखी गई महँगी और मूल्यवान फर्नीचर को मेंटेन रखना सिर्फ उनकी लंबी उम्र के लिए नहीं बल्कि घरों में शांति और सकारात्मकता के लिए भी जरूरी है। घरों को सुन्दर और व्यवस्थित रखना न केवल आपको शांति और खुशगवार माहौल प्रदान करता है बल्कि वास्तु के हिसाब से भी यह पॉजिटिव और सकारात्मक  ऊर्जाओं की प्रवेश के लिए जरुरी होता है. जाहिर है कि आपके घर के अंदर रखी गई महँगी और मूल्यवान फर्नीचर को  व्यवस्थित और सजाकर रखने आपके घर को शोभा बढ़ाने के साथ ही शांति और प्रगति का मार्ग भी प्रशस्त करता है. इसके साथ ही आपके घरो में मौजूद महँगी और मूल्यवान फर्नीचर को उचित रूप से देखभाल की भी जरुरत होती है ताकि आपके घर को यह हमेशा की तरह रौनक प्रदान करती रहे. 

मानसून लगभग हमेशा उमस भरी गर्मी से राहत चाहता है. यह एक ऐसा मौसम है जो  उदासीनता के साथ ही भावनात्मक रूप से एक शांत ठहराव की अभियक्ति देता है. इसके लिए जरुरी है की हम अपने घरों के अंदर  मानसून के दौरान आंतरिक सजावट में कुछ चेंज करें ताकि हम मानसून के दौरान घर को व्यस्थित करें. जानें इस सम्बन्ध में विशेषज्ञों का क्या कहता है ताकि हम मानसून के दौरान अपने घरों के फर्नीचर और आंतरिक साज सजा को कैसे करें व्यवस्थित. 

नमी, कवक और बैक्टीरिया से कैसे बचें?
जैसा कि आप जानते हैं कि मानसून के दौरान एक साथ रखे गए फर्नीचर नमी को अवशोषित करते हैं और कवक और बैक्टीरिया के विकास को बढ़ावा देते हैं. इसके लिए यह जरुरी है कि फर्नीचर को एक-दूसरे से दूर रखे साथ हीं अगर संभव हो सके तो घरों के अंदर रखे गए फर्नीचर को दीवार और खिड़कियों से भी दूर रखें ताकि मॉइस्चर से उन्हें बचाया जा सके. 

सामान्यत: इसके लिए सबसे सही जगह होगा कमरे के अंदर फर्नीचर को ऐसे जगह स्थान देना जहाँ प्राकृतिक प्रकाश समुचित रूप से पहुँच सके. इसके साथ ही हवा का हमेशा आना भी जरुरी है ताकि फर्नीचर को मॉइस्चर से बचाई जा सके. 

गीले कपड़ों से बचें
फर्नीचर को साफ करने के लिए गीले कपड़ों के इस्तेमाल से हमेशा बचें. ध्यान रखें कि गीले कपडे मॉइस्चर का कारण बन सकते हैं जो आपके फर्नीचर में बरसाती फंगस और बैक्टेरिया का कारन बन समते हैं. गीले कपड़े के बजाय, धूल के संचय से बचने के लिए एक हल्का , सूखे कपड़े का उपयोग करें धूल नमी को अवशोषित करती है जिसके परिणामस्वरूप समय के साथ फर्नीचर नरम हो सकता है.

खिड़कियों के बहुत पास न जाएं- 
अपने फर्नीचर को खिड़कियों से दूर रखने की कोशिश करें. मानसून के दौरान बाहर से आने वाले हवा के माध्यम से घर के अंदर नमी आ सकती है जो आपके महंगे फर्नीचर के लिए घातक हो सकती है. खिड़कियों के माध्यम से आने वाले नमी के कारण  फर्नीचर का रंग भी फीका हो सकता है.

नवीनीकरण या रिनोवेशन के कार्यो से बचे- मानसून के दौरान किसी भी प्रकार के नवीनीकरण या रिनोवेशन के कार्यो को ना कहना ज्यादा सही कदम हो सकता है. 

 हवा में नमी न होने पर इमारत का रेनोवेशन, पेंटिंग और बढ़ईगीरी आदि के कार्यों पर असर पड़ता है. इस हिसाब से  मॉनसून के दौरान आवशयकता है कि आपके फर्नीचर  को आवश्यक रखरखाव देकर उनके सुंदरता और मजबूती को बढ़ाने का उपक्रम किया जाए. 

Daily Current Affairs one linear Complete GK Dose July 04 2026

 

Daily Current Affairs one linear Complete GK Dose July 04 2026

प्रधानमंत्री मोदी ने लॉन्च की ‘विकसित उड़ान’ योजना: Facts in Brief 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राजस्थान के जोधपुर में उड़ान (उड़े देश का आम नागरिक) योजना के अगले चरण ‘विकसित उड़ान’ का शुभारंभ किया। 

  • अक्टूबर 2016 में शुरू की गई उड़ान योजना के तहत अब तक 669 मार्गों का संचालन शुरू किया जा चुका है।
  •  इस योजना के माध्यम से 95 हवाई अड्डों, हेलीपोर्ट और जल एयरोड्रोम को जोड़ा गया है, जिससे 1.66 करोड़ से अधिक यात्रियों को लाभ मिला है। 
  • इस सफलता को आगे बढ़ाते हुए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 25 मार्च 2026 को संशोधित उड़ान योजना को मंजूरी दी थी। 
  • अगले 10 वर्षों के लिए इस योजना पर लगभग 29,000 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे, जिससे नागरिक उड्डयन क्षेत्र को गति मिलने के साथ ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को आगे बढ़ाया जाएगा।
  • संशोधित योजना के तहत 12,159 करोड़ रुपए के निवेश से 100 एयरोड्रोम विकसित किए जाएंगे। 
  •  3,661 करोड़ रुपए की लागत से 200 आधुनिक हेलीपैड विकसित होंगे

चाणक्‍य नीति :जानें किन तीन चीजों के पास में होना हीं पुरुषों के स्वर्ग के समान है यह धरती


चाणक्य या कौटिल्य के विचार आज भी उतने हीं प्रासंगिक है जितने चाणक्य के काल में थे. नन्द वंश को समूल नाश करने धरती को वास्तविक राजा देने की शपथ खाने वाले चाणक्य किसी परिचय की मोहताज नहीं है. उन्होंने धरती को वास्तविक राजा देने के लिए काफी खोज किया और चन्द्रगुप्त मौर्य को  राजा बनाकर मौर्य वंश की स्थापना किया। चाणक्य वास्तव में विद्वान थें जिनकी पुस्तक अर्थशास्त्र जिसका आजतक मूल्याङ्कन नहीं  किया जा सका है. 

उन्हीं  लिखित उक्त श्लोक के बारे में हम यहाँ चर्चा कर रहें हैं जो वास्तव में किसी भी पुरुष की सम्पूर्णता के लिए चाणक्य ने बताया  है.

यस्य पुत्रो वशीभूतो भार्या छन्दानुगामिनी ।

विभवे यश्च सन्तुष्टस्तस्य स्वर्ग इहैव हि ॥ 

उक्त  श्लोक के माध्यम से आचार्य चाणक्य ने किसी भी पुरुष  के जीवन में पुत्र, पत्नी और धन के महत्त्व पर प्रकाश डाला  है.  लेकिन चाणक्य ने बताया है कि पुरुष के जीवन में सिर्फ  पुत्र, पत्नी और धन का होना हीं उसके सुखद जीवन की गारंटी बिलकुल नहीं  है.  उनका कहना है कि   बेटा आज्ञाकारी हो तथा पत्नी पति के अनुकूल आचरण करने वाली हो तभी उनके होने की सार्थकता है. इसके साथ हीं पत्नी  पतिव्रता हो एवं जो प्राप्त धन से ही सन्तुष्ट हो, ऐसे व्यक्ति के लिए स्वर्ग यहीं है, यह जानना चाहिए।

आचार्य चाणक्य के अनुसार, किसी भी व्यक्ति को सुखी जीवन के लिए तीन प्रमुख बातों का ध्यान रखना चाहिए या ये तीन चीजें होनी चाहिए:

संस्कारी संतान: यदि पुत्र आज्ञाकारी हो, माता-पिता की बात मानता हो और सही मार्ग पर चलता हो, तो परिवार में कभी क्लेश नहीं होता।

समर्पित पत्नी: यदि पत्नी पति की भावनाओं को समझने वाली, सुख-दुःख में साथ देने वाली और अनुकूल आचरण करने वाली हो, तो गृहस्थ जीवन बेहद आनंदित रहता है।

संतोषी मन: मनुष्य को अपने कर्म से प्राप्त धन (वैभव) पर संतोष करना चाहिए। अत्यधिक लालच और असंतोष ही मनुष्य के दुखों का मुख्य कारण होते हैं।

बिहार के मुंगेर में मिला दुनिया का सबसे प्राचीन वैज्ञानिक रूप से दिनांकित बरगद का पेड़


बिहार के मुंगेर में लगभग 700 वर्ष पुराना अनुमानित एक बरगद का पेड़ मिला है। रेडियोकार्बन डेटिंग के उपयोग से इसे सबसे पुराना और सटीक तिथि वाल बरगद का पेड़ (फाइकस बेंगालेंसिस) माना गया है। यह एक ऐसी विधि है, जो ऐतिहासिक या स्‍थानीय लोक‍कथाओं के बजाय पूरी तरह से वैज्ञानिक साक्ष्‍यों पर निर्भर करती है।
बरगद के वृक्ष अपनी जटिल जड़ों और शाखाओं के जाल के कारण पक्षियों और कीटों तथा अन्‍य वन्यजीवों के लिए महत्‍वपूर्ण आवास प्रदान करते हैं। सदियों से इनका भारतीय सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन में भी विशेष स्‍थान रहा है। परंपरागत रूप से इनकी आयु का अनुमान लोककथाओं, स्थानीय मान्‍यताओं अथवा ऐतिहासिक अभिलेखों के आधार पर लगाया जाता था, जो प्राय: सटीक नहीं होते थे। स्पष्ट प्रोटोकॉल के अभाव में इतिहास के इन सजीव प्रतीकों को पहले वैज्ञानिक रूप से दिनांकित नहीं किया गया था। क्षेत्रीय नमूनाकरण और प्रयोगशाला विश्लेषणों से ये स्‍पष्‍ट हुआ कि अधिकांश उष्णकटिबंधीय चौड़ी पत्ती वाले वृक्षों में स्पष्ट वार्षिक वृद्धि-वलय नहीं होते, जिससे पारंपरिक डेन्‍ड्रोक्रोनोलॉजी तकनीकों का उपयोग सीमित हो जाता है। इसलिए रेडियोकार्बन डेटिंग जैसी उच्च-सटीकता वाली वैकल्पिक विधियों की आवश्यकता महसूस हुई।

जब विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के अधीन काम करने वाले लखनऊ स्थित एक स्वायत्त संस्थान-बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान - की डॉ. त्रिना बोस को जब बिहार वन विभाग द्वारा मुंगेर के बरगद के वृक्ष की जांच करने और उसकी आयु निर्धारित करने के लिए आमंत्रित किया गया, तो उन्होंने उष्णकटिबंधीय चौड़ी पत्ती वाली प्रजातियों के लिए पारंपरिक डेटिंग तरीकों की सीमाओं को पहचाना। इस चुनौती से निपटने के लिए उन्होंने आयु निर्धारण के लिए एक नए वैज्ञानिक दृष्टिकोण के विकास की शुरूआत की। ​​डॉ. बोस ने डॉ. मयंक शेखर और डॉ. अखिलेश के. यादव की एक शोध टीम का नेतृत्व किया, जिन्होंने पेड़ की आयु निर्धारित करने के लिए मिलकर एक अभिनव कार्य प्रणाली विकसित की और उसे लागू किया।

डॉ. बोस के नेतृत्व में और डॉ. शेखर व डॉ. यादव की सदस्‍यता वाली शोध टीम ने एक द्वितीयक तने और एक प्राचीन प्राथमिक शाखा के केंद्र के पास से एकत्र किए गए लकड़ी के नमूनों से ‘अल्फा-सेल्यूलोज’ निकाला, जो पौधे की कोशिका दीवारों का सबसे स्थिर प्राथमिक घटक है। पिथ विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह द्वितीयक विकास के प्रारंभिक चरण के दौरान बनी सबसे पहली लकड़ी का प्रतिनिधित्व करती है। निकाले गए सेल्यूलोज नमूनों को एक्सीलरेटर मास स्पेक्ट्रोमेट्री (एएमएस) का उपयोग करके उच्च सटीकता वाली रेडियोकार्बन डेटिंग के अधीन किया गया, जिसके बाद नवीनतम आईएनटीसीएएल20 कैलिब्रेशन वक्र और ओएक्ससीएएल सॉफ्टवेयर की सहायता से परिणामों का अंशांकन किया गया, जिससे वृक्ष की आयु का एक मजबूत और विश्वसनीय अनुमान स्थापित किया जा सका।

ये खोज उन पिछले अनुमानों को खारिज करती है कि मुंगेर के इस बरगद को ऐतिहासिक 'बीयूआरआरए बंगला' के सामने लगाया गया था। वास्‍तुकाला शैली के आधार पर यह बंगला उत्‍तर मुगल - प्रारंभिक ब्रिटिश काल (लगभग 300 से 350 वर्ष पुराना) का है, जिसे शासकों और आम नागरिकों के बीच संवाद, ग्राम सभाओं, धार्मिक समारोहों और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के स्थल के रूप में उपयोग किया जाता था। यह स्‍थापित करता है कि लगभग 700 वर्ष पुराना यह पेड़ संभवतः इस क्षेत्र में मौजूद रहे एक प्राकृतिक जंगल का जीवित अवशेष है और यह इस इमारत के निर्माण का गवाह रहा है। इसलिए, यह विश्लेषण इस क्षेत्र की ऐतिहासिक घटनाओं के क्रम को फिर से परिभाषित करता है।

ये शोध ‘क्वाटरनरी रिसर्च’ नामक शोध पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। इसमें प्रस्‍तुत वैज्ञानिक विधि विरासत वृक्षों की आयु का सटीक निर्धारण करने में सक्षम है, जिससे सरकारों, वन विभागों और संरक्षण एजेंसियों को सांस्कृतिक तथा पारिस्थितिक दृष्टि से महत्वपूर्ण वृक्षों की पहचान और संरक्षण में सहायता मिलेगी। यह अनिश्चित आयु आकलनों के स्‍थान पर विश्वसनीय वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्‍ध कराकर प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण को और मजबूत बनाती है। इस कार्यप्रणाली का उपयोग विश्व भर के अन्य प्राचीन उष्णकटिबंधीय वृक्षों के लिए भी किया जा सकता है तथा यह जैव विविधता संरक्षण, धरोहर प्रबंधन, पर्यावरण शिक्षा और अतीत के जलवायु एवं ऐतिहासिक परिदृश्यों के अध्‍ययन में भी उपयोगी सिद्ध होगी।

पूर्णिमा को जन्म लेने वाले होते हैं सूर्य के समान सितारा: गौतम बुद्ध , महर्षि वेदव्यास, नानक देव और अन्य


वैसे तो कार्तिक महीना का व्रत त्योहार को लेकर खास महत्व होता है जिसमें दीपावली, करवा चौथ, भाई दूज सहित सबसे खास आस्था के महापर्व छठ का आयोजन इसी महीने में होता है। वैसे में भला कार्तिक पूर्णिमा खास क्यों नहीहोगा जो इसी महीने का समापन का दिन होता हैं वैसे तो पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है खासकर कार्तिक पूर्णिमा का जिसे कार्तिक स्नान और अन्य महत्व का दिन के लिए भी जाना जाता है। आइए जानते हैं कि पूर्णिमा का क्यों खास महत्व है। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि एकम  तिथि के बाद धीरे-धीरे चन्द्रमा की  कला के अनुसार तिथि बढ़ते जाता है और पूर्णिमा को चन्द्रमा पूर्ण हो जाता है  इसलिए पूर्णिमा को पूर्णता का प्रतीक माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि 
पूर्णिमा का प्रभाव रचनात्मकता और कलात्मक प्रवृत्तियों को बढ़ावा देता है और इस  दिन  को जन्म लेने वाले लोगों की कल्पना शक्ति अक्सर प्रबल होती है और ये कला, लेखन, संगीत या अन्य रचनात्मक गतिविधियों से संबंधित क्षेत्रों में उत्कृष्टता प्राप्त कर सकते हैं।जैसा कि आप जानते हैं कि पंचांग के अनुसार एकम या प्रतिपदा से लेकर पूर्णिमा तक कुल 15 तिथियां और अमावस्या होती है. इन अलग-अलग तिथियों को जन्म लेने वाले जातकों की अलग-अलग विशेषता होती है जो उनके व्यवहार से लेकर उनका व्यक्तित्व, सोच, स्वास्थय और विभिन्न गुणों को प्रदर्शित करता है. आज हम बात करेंगे विख्यात कुंडलीशास्त्र, नुमेरोलॉजिस्ट और मोटिवेटर हिमांशु  रंजन शेखर से कि  पूर्णिमा तिथि को जन्म लेने वाले जातकों की क्या होती विशेषता। 

न  केवल ज्योतिष और कुंडलीशास्त्र के अनुसार, बल्कि भौगोलिक दृष्टिकोण से अगर देखी जाए तो पूर्णिमा का हमारे जीवन में खास महत्त्व होता है. कई घरों में पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु जिन्हे सत्यनारायण भगवान् के नाम से भी पुकारा जाता है, उनका पूजन किया जाता है.  जाहिर है की एक महीने में पूर्णिमा का दिन अगर इतना महत्व का है तो निश्चित हीं पूर्णिमा के दिन जन्म लेना शुभ माना जाता है.  

पूर्णिमा के दिन जन्मे बच्चे कैसे होते हैं

वैदिक ज्योतिष के अनुसार भी पूर्णिमा के दिन जन्मे लोगों को भाग्यशाली समझा जाता है और ऐसे व्यक्ति मानसिक रूप से मजबूत, बुद्धिमान, और सफल होता है. ऐसे लोग अक्सर दयालु होते हैं और धनवान भी बनते हैं, हालांकि कुंडली में अन्य ग्रहों की स्थिति और व्यक्तिगत प्रयास भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. 

एस्ट्रोलॉजी के अनुसार अलग-अलग तिथियों को जन्म लेने  वाले व्यक्तियों में खास लक्षण और गुण  पाए जाते हैं और उसमे अगर आप पूर्णिमा की महत्त्व को देखेंगे तो हिन्दू पंचांग के अनुसार इसका अलग स्थान होता है. गुरु पूर्णिमा, बुद्ध पूर्णिमा, शरद पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा, श्रावण पूर्णिमा सहित अन्य पूर्णिमा है जिनके स्थान होता है. स्वाभाविक है कि पूर्णिमा को जन्म लेने वाले लोग भी खास गुणों से परिपूर्ण होते हैं. 


उदार प्रवृति: 

पूर्णिमा के दिन जन्म लेने वाले जातक की सबसे बड़ी विशेषता यह होती है कि  ऐसे लोग अपने जीवन में काफी उदार प्रवृत्ति वाले होते हैं ऐसे लोग दूसरों के मनोभावों को और भावनाओं को काफी अच्छी तरह समझते हैं.  यह लोग अपने संबंधी या आपने आसपास के लोगों को हमेशा सुखी  देखना चाहते हैं और उनके सुख दुख में हमेशा साथ रहते हैं वह कभी भी अपने संबंधियों के वह हमेशा वह हमेशा अपने संबंधियों और अपने दोस्तों की आवश्यकता के समय उपलब्ध रहते हैं. 

जानें किस दिन को जन्म लेने वाले लोग होते हैं रोमांटिक और अपने पार्टनर के प्रति केयरिंग

भगवान में विशेष अनुरक्ति 

 पूर्णिमा के दिन जन्म लेने वाले जातक भगवान में अत्यधिक विश्वास करने वाले होते हैं और उनका ऐसा मान्यता है कि ईश्वर हमेशा उनके लिए उपलब्ध रहते हैं. ईश्वर की  भक्ति और पूजा-पाठ उनके जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा होती है और उनका यह मान्यता है की ईश्वर होता है जो  किसी भी संकट या कष्ट में वह मदद करता है. ऐसे विश्वास का कारण भी होता क्योंकि  ये लोग अपने कार्यो को  अंजाम तक पहुंचाने के दौरान भी ईश्वर को नहीं भूल सकते हैं. 

गुरु/पिता का विशेष स्थान:

पूर्णिमा के दिन जन्म लेने वाले जातकों में अपने  गुरु और पिता के प्रति विशेष अनुरक्ति देखी  जाती है. जीवन में किसी भी उपलब्धि या विशेष अवसरों पर  ऐसे लोग अपने पिता और अपने गुरु को विशेष तौर पर याद करना  हैं और सारा श्रेय उन्हें हीं देना पसंद करते हैं. उनका ऐसा मान्यता है कि जीवन में पिता  और टीचर  के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता और जीवन में वाे इनके  प्रति वे काफी अनुराग दिखाते हैं और अपना पथ प्रदर्शक और मोटीवेटर मानते हैं.

वचन के पक्के: 

पूर्णिमा के दिन जन्म लेने वाले जातकों की सबसे बड़ी विशेषता यह होती है कि वह वचन के काफी  पक्के होते हैं. उनके लिए उनके द्वारा किया गया कोई भी वादा या वचन अपने जीवन से काफी जरूरी है और इसके लिए वह किसी भी हद तक जा सकते हैं. उनके लिए  अपने द्वारा दिया गया कोई भी वचन या किया गया वादा को हर हाल में पूरा किया जाना और  ऐसे लोग ईमानदारी के साथ उसे पूरा करने की कोशिश भी करते हैं. 

यशस्वी और प्रभावशाली:

पूर्णिमा के दिन जन्म लेने वाले जातक काफी यशस्वी और प्रभावशाली होते हैं जो जीवन में काफी प्रभाव छोड़ने में सफल  रहते हैं. ऐसे लोग अपने कर्मों और अपने सोच की वजह से जीवन में काफी आगे बढ़ते हैं साथ ही दुनिया को रोशनी भी दिखाने का काम करते हैं. उन्हें जो भी काम जीवन में मिलती है वे लोग उसे काफी तल्लीनता के साथ करना पसंद करते हैं.

ईमानदारी: 

ईमानदारी पूर्णिमा के दिन जन्म लेने वाले लोगों का सबसे प्रमुख विशेषता होती है जीवन जीने के लिए ऐसे लोग ईमानदारी को काफी तवज्जो देते  हैं और जीवन में आगे बढ़ने का सबसे प्रमुख कारण यही होती है कि वे अपने जीवन के  हर क्षेत्र   में  चाहे वह इनके निजी जीवन  हो या परिवारिक जीवन हो सामाजिक जीवन हो या प्रोफेशनल फ्रंट,  हर जगह वह इमानदारी से अपने काम को अंजाम देते हैं.

पूर्णिमा  के दिन जन्म लेने  वालों में अक्सर समाज और दुनिया के महापुरुषों और धार्मिक  हस्तियों का नाम आता है. पूर्णिमा के दिन जिन महापुरुषों और धार्मिक हस्तियों का जन्म हुआ था उनमे शामिल हैं-

गौतम बुद्ध: बौद्ध धर्म के संस्थापक भगवान बुद्ध का जन्म, ज्ञान प्राप्ति (बुद्धत्व), और महापरिनिर्वाण (मृत्यु) तीनों ही वैशाख पूर्णिमा के दिन हुए थे। इस दिन को बुद्ध पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है।

महर्षि वेदव्यास: जिन्होंने वेदों का संकलन किया और महाभारत की रचना की, उनका जन्म आषाढ़ पूर्णिमा को हुआ था। इस दिन को भारत में गुरु पूर्णिमा या व्यास पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है।

गुरु नानक देव जी: सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी का जन्म पारंपरिक रूप से कार्तिक पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है, जिसे गुरु नानक जयंती के नाम से जाना जाता है।

संत कबीर दास: कई ऐतिहासिक स्रोतों और मान्यताओं के अनुसार, संत कबीर का जन्म ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन हुआ था।

चैतन्य महाप्रभु: गौड़ीय वैष्णव धर्म के एक प्रमुख संत और समाज सुधारक चैतन्य महाप्रभु का जन्मदिन फाल्गुन पूर्णिमा को 'गौरा पूर्णिमा' के रूप में मनाया जाता है।



नजरिया जीने का: भगवान राम के जीवन से सीखें, जीवन की चुनौतियों का सामना करना

 


भगवान राम का जीवन एक आदर्श जीवन के रूप में माना जाता है, जहाँ उन्होंने जीवन की अनेक चुनौतियों का सामना धैर्य, साहस और समर्पण के साथ किया। उनके जीवन से कई महत्वपूर्ण सीखें ली जा सकती हैं जो हमें जीवन में सही दृष्टिकोण अपनाने में मदद करती हैं। भगवान राम के जीवन से सबसे बड़ी सीख यह मिलती है कि जब  जीवन कठिन हो, तब शिकायत के बजाय धैर्य और विश्वास बनाए रखें। अगर आप भगवन राम के जीवन पर गौर करेंगे तो पाएंगे की वनवास पर गए और इसके लिए उन्होंने राज्य, सुख-सुविधा और परिवार को त्याग दिया, उन्होंने कभी शिकायत नहीं की।  कहते हैं न की परिस्थितियों  देने  से अच्छा है कि या तो हम उन्हें बदलें या फिर उन्हें ईश्वर की इच्छा मानकर स्वीकार कर लें।

  1. धैर्य और सहनशीलता: भगवान राम ने वनवास के दौरान और रावण के साथ युद्ध में अत्यधिक धैर्य और सहनशीलता का परिचय दिया। जीवन में जब कठिनाइयाँ आती हैं, तो धैर्य रखना और अपने लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित रखना आवश्यक होता है।

  2. कर्तव्यपरायणता: भगवान राम ने अपने पिता के वचन को निभाने के लिए राजसुख को त्याग कर वनवास स्वीकार किया। यह हमें सिखाता है कि जीवन में कर्तव्य का पालन करना कितना महत्वपूर्ण है, चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी हों।


  1. सच्चाई और न्याय: राम ने हमेशा सत्य और न्याय का पालन किया, चाहे परिणाम कुछ भी हो। यह हमें सिखाता है कि सत्य के मार्ग पर चलने से हमें जीवन में अंततः सफलता और सम्मान मिलता है।भले ही हालात विपरीत हों, भगवान राम ने कभी धर्म का त्याग नहीं किया। रावण से युद्ध भी धर्म की रक्षा के लिए लड़ा गया था।

  2. संबंधों का सम्मान: भगवान राम ने हमेशा इस वास्तविकता को साबित किया कि रिश्तों की नींव सम्मान, त्याग और सच्चाई पर टिकती है और उनके जीवन पर अगर  करें तो पाएंगे किभगवान् राम ने न केवल इंसानों के साथ बल्कि जटायु, हनुमान, सुग्रीव, जैसों के साथ भी रिश्तों की मर्यादा को निभाया। 

    राम ने अपने माता-पिता की आज्ञा का पालन करने के साथ हीं भ्राता लक्ष्मण और भरत के प्रति कर्तव्य निभाया। उन्होंने हर रिश्ते की मर्यादा का आदर किया।

  3. विपरीत परिस्थितियों में सकारात्मक दृष्टिकोण: रावण के साथ युद्ध के समय भी, भगवान राम ने कभी नकारात्मक दृष्टिकोण नहीं अपनाया। उन्होंने सदा सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ कठिनाइयों का सामना किया। जीवन में विपरीत परिस्थितियों का आना स्वाभाविक है और इससे कोई भी बच नहीं सकता. भगवान् राम का जीवन भी इसका अपवाद नहीं था. आप देखेंगे तो भगवान् राम ने भी अपने  जीवन में अनगिनत विपरीत परिस्थितियों का सामना किया खासतौर पर वनवास के समय. इस  दौरान भगवान राम ने हनुमान, सुग्रीव और विभीषण जैसे सच्चे मित्र बनाए और एक नई शक्ति का निर्माण किया।

    कहने का तात्पर्य यह है जीवन की मुश्किलें हमें नए अनुभव और नए साथी देती हैं लेकिन भगवन राम  के तरह उन्हें अवसर की तरह अपनाइए।

इन सबक से हमें यह समझ में आता है कि जीवन में आने वाली चुनौतियों का सामना कैसे किया जाए। भगवान राम का जीवन एक प्रेरणा है, जो हमें सिखाता है कि कैसे हर परिस्थिति में सही नजरिया अपनाकर आगे बढ़ा जा सकता है।


नजरिया जीने का: जीवन के मूल्यों के प्रतीक हैं शिव, सीखें जीवन की ये महत्वपूर्ण बातें

 



देवों के देव अर्थात महादेव का व्यक्तित्व सम्पूर्ण रूप से रहस्यों से भर हुआ है।भगवान शंकर, भोले शंकर भोले नाथ जैसे अनेकों नामों से अपने भक्तों में पूजे जाने वाले महादेव केवल संहार के देव नहीं हैं, बल्कि वे परिवर्तन, संतुलन, ध्यान और आत्म-विकास के प्रतीक हैं। उनका जीवन हमें सिखाता है कि सफलता केवल बाहरी उपलब्धियों से नहीं, बल्कि आंतरिक शक्ति और संतुलन से मिलती है।

भक्त एक तरफ उन्हे भोलानाथ कहते हैं जिसका मतलब हीं निकलता है सादगी, दया और करुणा से भरपूर हैं जिन्हे प्रसन्न करना भक्तों के लिए काफी आसान है। भगवान शिव का जीवन बहुत सरल है—ना महल, ना आडंबर। सच तो यह है कि भगवान शंकर की जीवन का सार हीं यही हैं कि सफल व्यक्ति वही है जो कम संसाधनों में भी संतुष्ट और केंद्रित रह सके। आडंबर और दिखावा ने हमारे जीवन को सबसे अधिक बर्बाद किया है जहां हम दूसरों को देखकर अपना सुख चैन गवां देते हैं 
 वहीं दूसरी तरफ भगवान शिव सत्यम, शिवम, सुंदरम, यानी सत्य, अच्छाई और सुंदरता के रूप में महत्वपूर्ण अच्छाई का भी प्रतिनिधित्व करते हैं। 

भगवान शिव को “आदियोगी” कहा जाता है। उनका ध्यानमग्न स्वरूप हमें सिखाता है कि सफलता की शुरुआत मन को नियंत्रित करने से होती है। जब मन शांत होता है, तो निर्णय सही होते हैं और जीवन में स्पष्टता आती है।

भगवान शिव सब पर काफी दया और प्रेम रखने वाले हैं चाहे वह देवता हों, असुर हों या साधारण मनुष्य। और यही वजह है कि राक्षसों और दानवों ने भी प्रेम पूर्वक उनका पूजन कर उनसे हीं वरदान लेकर उनके हीं अंत का उपाय अर्थात खुद के विनाश की तैयारी कर लेते थे। 

"महज एक देवता नहीं,
जीवन के मूल्यों के प्रतीक भी हैं शिव। 
भस्म और बाघंबर मे रमे हुए,
संतोष और सादगी के प्रतीक भी हैं शिव। 
समुद्र मंथन से निकले विष को पी जाने वाले,
धैर्य और सहनशीलता के प्रतीक भी हैं शिव। 
बाहरी कोलाहल और तांडव से परे,
ध्यान और समाधि के प्रतीक भी हैं शिव। 
देवता, असुर या हों सामान्य भक्त सब पर ,
एक समान दृष्टि के प्रतीक भी हैं शिव। "

दलाई लामा के जीवन का सार हैं ये Quotes; आपके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा भर देंगे


दलाई लामा अपने शांति और आध्यात्मिक विचारों के कारण पूरी दुनिया में एक विलक्षण हस्ती बन चुके हैं। तिब्बत से निवासित होने के बावजूद दलाई लामा में अपने विचारों और दर्शन से शांति के पूजारीनके रूप में दुनिया में पूजे जाते हैं . आपको यह जानकार आश्चर्य होगा कि वास्तव में दलाई लामा एक पदवी है जो मंगोलियाई खिताब के नाम से जानी जातियां। अगर शाब्दिक अर्थ निकाली जाए तो दलाई लामा का मतलब होता है ज्ञान का महासागर। ऐसा माना जाता है कि वे भगवान अवलोकेतेश्वर के बुद्ध के गुणों के साक्षात रूप होते हैं।

दलाई लामा:Facts In Brief
दलाई लामा का जा 6 जुलाई, 1935 को हुआ था।
दलाई लामा जोकि एक पदवी है, ये 14वें और वर्तमान दलाई लामा हैं जिनका नाम  तेनजिंग ज्ञात्सो है।
दलाई लामा ने 31 मार्च 1959 को तिब्बत से भारत में क़दम रखा था।
दुनिया में अपने शांति के प्रतीक और मसीहा वाली छवि प्राप्त होने के कारण 1989 में दलाई लामा को शांति का नोबेल सम्मान मिला

दलाई लामा: महत्वपूर्ण कोट्स
कहने की जरूरत नहीं है कि चीन की ज्यादतियों के कारण वे अपने भूमि तिब्बत को छोड़कर भारत में शरणार्थी और निर्वासित जीवन जी रहे हैं फिर भी वो करुणा के सागर हैं। वे अपने दुश्मनों के लिए दयाभाव रखते हैं और यही उनके व्यक्तित्व की वास्तविक पहचान है जिसके कारण उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार भी दिया गया।
प्रस्तुत है उनके प्रमुख कोट्स
1. एक छोटे से विवाद से किसी रिश्ते को टूटने मत देना।
2.आप आकर्षण से ही दुसरे के दिमाग को बदल सकते हो गुस्से से नही।

प्रधानमंत्री मोदी हुए रॉयल नॉर्वे ऑर्डर ऑफ मेरिट का ग्रैंड क्रॉस से सम्मनित: देखें अब तक मिले 32 पुरस्कारों की लिस्ट


एक अन्य महत्वपूर्ण उपलब्धि तब प्रधान  मंत्री नरेंद्र मोदी के नाम हुआ जब उन्हें 'द रॉयल नॉर्वे ऑर्डर ऑफ मेरिट के ग्रैंड क्रॉस' से सम्मानित किया  गया. प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को नॉर्वे के महामहिम सम्राट हेराल्ड पंचम ने आज ओस्लो में आयोजित एक विशेष समारोह में 'द रॉयल नॉर्वे ऑर्डर ऑफ मेरिट के ग्रैंड क्रॉस' से सम्मानित किया। विदेशी राष्ट्राध्यक्षों को प्रदान किया जाने वाला यह पुरस्कार नॉर्वे का सर्वोच्च सम्मान है। यह सम्मान नॉर्वे तथा मानवता के हित में उत्कृष्ट सेवा के लिए प्रदान किया जाता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर अपने संबोधन में इस सम्मान के लिए नॉर्वे के महामहिम सम्राट हेराल्ड पंचम और नॉर्वे की जनता के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने इस पुरस्कार को भारत और नॉर्वे के बीच ऐतिहासिक मित्रता को समर्पित करते हुए इसे भारत और नॉर्वे की जनता के बीच साझा की गई अटूट गर्मजोशी, विश्वास और स्नेह के प्रति श्रद्धांजलि बताया।

यह सम्मान भारत और नॉर्वे के बीच मौजूद सद्भावना के गहरे बंधन का प्रतीक है और भविष्य में उनकी मित्रता तथा सहयोग की यात्रा का मार्गदर्शन करेगा।

अब तक 32वां सम्‍मान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अब तक 32 देशों ने सर्वोच्‍च नागर‍िक सम्‍मान से सम्‍मान‍ित क‍िया है. एक द‍िन पहले ही स्‍वीडन ने भी पीएम मोदी अपने सर्वोच्च सम्मान ‘रॉयल ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार, कमांडर ग्रैंड क्रॉस’ से सम्मानित किया था.

Order of Abdulaziz Al Saudऑर्डर ऑफ अब्दुलअज़ीज़ अल सऊदSaudi Arabia / सऊदी अरब2016
State Order of Ghazi Amir Amanullah Khanगाज़ी अमीर अमानुल्लाह खान सम्मानAfghanistan / अफगानिस्तान2016
Grand Collar of the State of Palestineग्रैंड कॉलर ऑफ द स्टेट ऑफ फिलिस्तीनPalestine / फिलिस्तीन2018
Champions of the Earth Awardचैंपियंस ऑफ द अर्थ अवॉर्डUnited Nations / संयुक्त राष्ट्र2018
Seoul Peace Prizeसियोल शांति पुरस्कारSouth Korea / दक्षिण कोरिया2018
Order of Zayedऑर्डर ऑफ ज़ायेदUnited Arab Emirates / यूएई2019
Order of St. Andrew the Apostleऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयूRussia / रूस2019
Order of the Distinguished Rule of Nishan Izzuddinनिशान इज़्ज़ुद्दीन सम्मानMaldives / मालदीव2019
King Hamad Order of the Renaissanceकिंग हमाद ऑर्डर ऑफ रेनैसांसBahrain / बहरीन2019
Global Goalkeeper Awardग्लोबल गोलकीपर अवॉर्डBill & Melinda Gates Foundation2019
Legion of Meritलीजन ऑफ मेरिटUnited States / अमेरिका2020
Ig Nobel Prize (Parody)इग नोबेल पुरस्कारInternational / अंतरराष्ट्रीय2020
Order of the Druk Gyalpoऑर्डर ऑफ द ड्रुक ग्यालपोBhutan / भूटान2021
Companion of the Order of Fijiकंपेनियन ऑफ द ऑर्डर ऑफ फिजीFiji / फिजी2023
Grand Companion of the Order of Logohuग्रैंड कंपेनियन ऑफ द ऑर्डर ऑफ लोगोहूPapua New Guinea / पापुआ न्यू गिनी2023
Ebakl Awardएबाक्ल अवॉर्डPalau / पलाऊ2023
Order of the Nileऑर्डर ऑफ द नाइलEgypt / मिस्र2023
Grand Cross of the Legion of Honourग्रैंड क्रॉस ऑफ द लीजन ऑफ ऑनरFrance / फ्रांस2023
Grand Cross of the Order of Honourग्रैंड क्रॉस ऑफ द ऑर्डर ऑफ ऑनरGreece / ग्रीस2023
Dominica Award of Honourडोमिनिका अवॉर्ड ऑफ ऑनरDominica / डोमिनिका2024
Grand Commander of the Order of the Nigerग्रैंड कमांडर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द नाइजरNigeria / नाइजीरिया2024
The Order of Excellenceद ऑर्डर ऑफ एक्सीलेंसGuyana / गुयाना2024
Honorary Order of Freedom of Barbadosऑनरेरी ऑर्डर ऑफ फ्रीडम ऑफ बारबाडोसBarbados / बारबाडोस2024
Order of Mubarak Al-Kabeerऑर्डर ऑफ मुबारक अल-कबीरKuwait / कुवैत2024
Grand Commander of the Order of the Star and Key of the Indian Oceanस्टार एंड की ऑफ द इंडियन ओशन सम्मानMauritius / मॉरीशस2025
Sri Lanka Mitra Vibhushanaश्रीलंका मित्र विभूषणSri Lanka / श्रीलंका2025
Grand Cross of the Order of Makarios IIIऑर्डर ऑफ माकारियोस तृतीयCyprus / साइप्रस2025
Officer of the Order of the Star of Ghanaस्टार ऑफ घाना सम्मानGhana / घाना2025
Grand Collar of the National Order of the Southern Crossनेशनल ऑर्डर ऑफ द सदर्न क्रॉसBrazil / ब्राज़ील2025
Grand Cross of the Royal Norwegian Order of Meritरॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिटNorway / नॉर्वे2026
Sweden’s Highest Civilian Honourस्वीडन का सर्वोच्च नागरिक सम्मानSweden / स्वीडन2026
Additional International Diplomatic Honours & City Keysअन्य अंतरराष्ट्रीय सम्मान एवं सिटी कीज़Various Countries / विभिन्न देशVarious

Top 20 Daily Current Affairs वन लाइनर May 19 , 2026



  • प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और  नॉर्वे के प्रधानमंत्री महामहिम श्री जोनास गहर स्टोर ने कब  भारत और नॉर्वे के बीच वर्तमान व्यापार के मूल्य को दोगुना करने के लक्ष्य रखा है-वर्ष 2030 तक
  • प्रधानमंत्री श्री मोदी ने नॉर्वे को जून 2026 में फ्रांस में आयोजित होने वाले 'भारत इनोवेट्स 2026' में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया। 
  • दोनों नेताओं ने पर्यावरण के प्रति उत्तरदायी तौर-तरीकों की पुष्टि करते हुए, आर्कटिक में ध्रुवीय अनुसंधान और लॉजिस्टिक्स को मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की।
  • प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को रॉयल नॉर्वे ऑर्डर ऑफ मेरिट का ग्रैंड क्रॉस से सम्मनित किया गया.
  • श्री वीडी सतीशन को केरलम के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ दिलाई  गई.

दिल्ली: अनधिकृत कॉलोनियों का ‘जहां है, जैसा है’ के आधार पर नियमितीकरण, ऐसे करें ऑनलाइन आवेदन


केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री श्री मनोहर लाल ने नई दिल्ली में एक प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि आज दिल्लीवासियों के जीवन में एक ऐतिहासिक क्षण है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत सरकार ने दिल्लीवासियों को स्वामित्व अधिकार प्रदान करने के लिए 2019 में पीएम-उदय योजना लागू की थी। उन्होंने कहा कि कॉलोनियों को "जहां है, जैसा है" आधार पर नियमित करने के वर्तमान निर्णय से निवासियों को अपनी संपत्तियों के पंजीकरण के लिए आगे आने हेतु प्रोत्साहन मिलेगा।

उन्होंने कहा कि इससे न केवल कानूनी स्वामित्व प्राप्त होगा बल्कि नागरिकों को एमसीडी के मानदंडों के अनुसार अपने घरों का निर्माण या पुनर्निर्माण करने में भी मदद मिलेगी।

केंद्रीय मंत्री श्री मनोहर लाल ने यह भी कहा कि ये परिवर्तनकारी कदम प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और प्रेरणा से उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में दिल्ली सुनियोजित और समावेशी शहरी विकास के एक नए चरण में प्रवेश कर रही है, जिसका उद्देश्य भविष्य के लिए तैयार शहर का निर्माण करते हुए विरासत संबंधी मुद्दों का समाधान करना है।

दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि माननीय प्रधानमंत्री ने उन परिवारों की लंबे समय से चली आ रही चिंताओं को समझा है, जो अपने घरों में रहने के बावजूद कानूनी अधिकारों से वंचित हैं। इसी संवेदनशील और दूरदर्शी दृष्टिकोण ने पीएम-उदय योजना का मार्ग प्रशस्त किया और आज 1731 अनधिकृत कॉलोनियों में से 1511 का नियमितीकरण संभव हो पाया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में अनधिकृत कॉलोनियों का नियमितीकरण आज दिल्ली के 45 लाख लोगों के जीवन में राहत, सम्मान और अधिकारों का एक नया अध्याय जोड़ता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आवेदन प्रक्रिया 24 अप्रैल से शुरू होगी। इसके लिए एक सुनियोजित समय-सीमा निर्धारित की गई है। इसके तहत 7 दिनों के भीतर जीआईएस सर्वेक्षण, 15 दिनों के भीतर आवेदन में मौजूद कमियों का निवारण और 45 दिनों के भीतर हस्तांतरण विलेख जारी किया जाएगा।

अनधिकृत कॉलोनियां – पीएम-उदय

अक्टूबर 2019 में, केंद्र सरकार ने "दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (अवैध बस्तियों में रहने वालों के संपत्ति अधिकारों की मान्यता) विनियम, 2019" को अधिसूचित किया। इसके अनुसरण में, प्रधानमंत्री - दिल्ली में अनधिकृत बस्तियां आवास अधिकार योजना (पीएम-उदय) 29.10.2019 को शुरू की गई।

इन विनियमों के तहत, जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (जीपीए), बिक्री समझौता, भुगतान और कब्जा दस्तावेजों के आधार पर 1,731 अनधिकृत कॉलोनियों (जो 2019 के विनियमों के तहत बाहर नहीं हैं) के निवासियों को स्वामित्व/हस्तांतरण/गिरवी अधिकार प्रदान किए जा रहे हैं।

जिन कॉलोनियों को अपवादों के अंतर्गत रखा गया है—जहां कोई अधिकार प्रदान नहीं किए जाएंगे—उनमें आरक्षित/अधिसूचित वन, प्राचीन स्मारक और पुरातत्व स्थल एवं अवशेष अधिनियम, 1958 के अंतर्गत संरक्षित क्षेत्र, जोन-ओ (यमुना बाढ़ का मैदान), सड़कों का मार्ग, हाई टेंशन लाइनें, दिल्ली के पहाड़ी क्षेत्र, या किसी भी कानून के अंतर्गत संरक्षित भूमि पर स्थित कॉलोनियां शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, 69 समृद्ध अनधिकृत कॉलोनियां भी अपवादों के अंतर्गत आती हैं।

सरकारी भूमि पर निर्मित संपत्तियों के लिए हस्तांतरण विलेख (सीडी) जारी किए जाते हैं, और निजी भूमि पर संपत्तियों के लिए अधिकार पर्ची (एएस) जारी की जाती हैं।

पीएम-उदय कार्यक्रम वर्तमान में डीडीए द्वारा प्रबंधित एक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से लागू किया जा रहा है, जहां आवेदन जमा करने और उनकी प्रक्रिया करने की सुविधा उपलब्ध है।

31.03.2026 तक, पीएम-उदय के तहत लगभग 40,000 हस्तांतरण विलेख / अधिकार पर्ची जारी की जा चुकी हैं।

योजना के प्रति अपेक्षाकृत कम रूचि को लेकर की जांच की गई है। यह देखा गया है कि संपत्ति हस्तांतरण विलेख/अधिकार पर्ची जारी होने के बाद भी, अनुमोदित लेआउट योजनाओं के अभाव में निवासी भवन निर्माण योजनाओं को स्वीकृत कराने या मौजूदा संरचनाओं को नियमित करने में असमर्थ हैं। ये लेआउट योजनाएं आवासीय प्राधिकरणों द्वारा तैयार की जानी थीं और एमसीडी द्वारा अनुमोदित की जानी थीं।

इन अनधिकृत कॉलोनियों का नियमितीकरण

2019 के विनियमों में लेआउट योजनाओं की मंजूरी के बाद इन कॉलोनियों को "जहां है, जैसा है" आधार पर नियमित करने की परिकल्पना भी की गई है। हालांकि, अनुमोदित लेआउट योजनाओं का अभाव एक बड़ी बाधा बना हुआ है।

लेआउट योजनाओं और भवन योजनाओं की मंजूरी के बिना, अनधिकृत कॉलोनियों के निवासियों को शहरीकरण की मुख्यधारा में लाने का उद्देश्य पूरी तरह से प्राप्त नहीं किया जा सकता है। हालांकि पीएम-उदय योजना स्वामित्व अधिकार प्रदान करती है, लेकिन इससे निवासी स्वतः ही भवन योजना अनुमोदन के लिए पात्र नहीं हो जाते।

आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा लिए गए निर्णय

इन समस्याओं के समाधान के लिए निम्नलिखित निर्णय लिए गए हैं:

• 1511 अनधिकृत कॉलोनियों (1731 अनधिकृत कॉलोनियों में से) को अनुमोदित लेआउट योजनाओं की आवश्यकता के बिना "जहां है, जैसा है" के आधार पर नियमित किया जाएगा, जो अपवर्जन मानदंडों के अंतर्गत नहीं आती हैं।

• इन कॉलोनियों में सभी भूखंडों और भवनों का भूमि उपयोग आवासीय माना जाएगा।

• 20 वर्ग मीटर तक के सुविधा स्टोरों को नियमित किया जाएगा यदि उन्हें 6 मीटर का मार्ग उपलब्ध हो। 10 वर्ग मीटर तक के स्टोरों के लिए आवश्यक मार्ग की चौड़ाई 6 मीटर से कम हो सकती है।

• नियमितीकरण मौजूदा निर्मित संरचनाओं पर "जैसा है, जहां है" के आधार पर लागू होगा।

• अनुमोदित लेआउट योजनाओं का अभाव नियमितीकरण में बाधा नहीं बनेगा।

• एमसीडी/स्थानीय निकाय नियमितीकरण प्रमाणपत्र जारी करेंगे, खाली भूखंडों का सर्वेक्षण करेंगे और नागरिक इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में सहायता करेंगे।

• राष्ट्रीय राज्य राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (जीएनसीटीडी) का राजस्व विभाग पात्र निवासियों को हस्तांतरण विलेख/अधिकार पर्ची जारी करेगा।

ऑनलाइन आवेदन के लिए प्रक्रिया

  • आवेदक एमसीडी स्वगम पोर्टल ( https://mcdonline.nic.in/swagam ) पर लॉग इन करेंगे।
  • अनधिकृत कॉलोनी (पात्र 1511 कॉलोनियों में से) का नाम चुनें; वार्ड और जोन स्वतः भर जाएंगे।
  • चुनें कि क्या पीएम-यूडीएवाई केस आईडी मौजूद है (हां/नहीं)।
  • यदि नहीं → पीएम-उदय पोर्टल पर रिडायरेक्ट किया गया।
  • यदि हां → केस आईडी दर्ज करें:
  • यदि सीडी/एएस जारी किया गया है → आवेदन पत्र खुल जाएगा।
  • यदि जारी नहीं किया गया है → स्थिति जानने के लिए पीएम-उदय पोर्टल पर रिडायरेक्ट किया गया।
  • राजस्व विभाग/जीएनसीटीडी द्वारा डीडीए के सहयोग से आवेदनों की प्रक्रिया और सीडी/एएस जारी करना।
  • जारी की गई सीडी/एएस को स्वगम पोर्टल के माध्यम से एमसीडी को भेजा जाता है।