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शालबुग वेटलैंड कंजर्वेशन रिजर्व (जम्मू कश्मीर) जहाँ है चार लाख से अधिक पक्षियों का आश्रय : Facts in Brief

Shallbugh Wetland Conservation Reserve Facts in Brief

Shallbugh Wetland Conservation Reserve: शालबुग वन्यजीव संरक्षण/वेटलैंड रिजर्व, झेलम नदी बेसिन के भीतर आने वाले बहुत महत्वपूर्ण वेटलैंड संरक्षण रिजर्व में से एक है। शल्लाबुग वेटलैंड संरक्षण रिजर्व जम्मू-कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश श्रीनगर जिले में स्थित है। यह कश्मीर हिमालय का एक महत्वपूर्ण जलीय पारिस्थितिकी तंत्र है और 1675 हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करता है।

क्या होता है वेटलैंड या आर्द्रभूमि?

वेटलैंड या आर्द्रभूमि वास्तव में ऐसे क्षेत्र होते हैं जहाँ पर्यावरण और संबंधित पौधे व पशु जीवन को नियंत्रित करने वाला प्राथमिक कारक क्षेत्र में उपलब्ध जल को माना जाता है। दूसरे शब्दों में हम कह सकते हैं कि वेटलैंड या आर्द्रभूमि ऐसे क्षेत्र होते हैं जहाँ पानी की मात्रा इतनी अधिक होती है कि यह मिट्टी को संतृप्त कर देती है या इसे उथले पानी से ढक देती है.आर्द्रभूमि स्थलीय और जलीय पारिस्थितिकी प्रणालियों के बीच संक्रमणकालीन भूमि होती है जहाँ जल आमतौर पर सतह पर होता है या भूमि उथले पानी से ढकी होती है।

इसी के अंतर्गत आता है जो शालबुग वेटलैंड कंजर्वेशन रिजर्व केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर के श्रीनगर  जिले में स्थित है। आर्द्रभूमि के बड़े क्षेत्र सितंबर और मार्च के बीच सूख जाते हैं। इस क्षेत्र में फ्राग्माइट्स कम्युनिस और टायफा अंगुस्ताता के बड़े स्‍तर पर रीडबेड हैं, और खुले पानी पर निम्फिया कैंडिडा और एन स्टेलाटा की समृद्ध वृद्धि है। 

  • यह कम से कम 21 प्रजातियों के चार लाख से अधिक स्‍थानिक और प्रवासी पक्षियों के आश्रय के रूप में कार्य करता है। 
  • वेटलैंड की औसत ऊंचाई 1580 मीटर एएमएसएल है।
  • यह कम से कम 21 प्रजातियों के चार लाख से अधिक निवासी और प्रवासी पक्षियों के निवास स्थान के रूप में कार्य करता है।
  •   यह कश्मीर हिमालय का एक महत्वपूर्ण जलीय पारिस्थितिकी तंत्र है और 1675 हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करता है।

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शालबुग वेटलैंड प्राकृतिक नियंत्रण, सुधार या बाढ़ की रोकथाम में एक प्रमुख भूमिका निभाता है, यह आर्द्रभूमि या डाउनस्ट्रीम संरक्षण महत्व के अन्य क्षेत्रों के लिए मौसमी जल प्रतिधारण के लिए भी महत्वपूर्ण है।

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आर्द्रभूमि जलाशयों के फिर से भरने के लिए महत्वपूर्ण है। यह एक प्रमुख प्राकृतिक बाढ़ क्षेत्र प्रणाली के रूप में भी कार्य करती है। 

शालबुग वेटलैंड अत्‍याधिक पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएं प्रदान करती है, इनमें मछली और फाइबर, जल आपूर्ति, जल शोधन, जलवायु विनियमन, बाढ़ विनियमन, मनोरंजन के अवसर शामिल हैं। 

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आर्द्रभूमि जलपक्षियों की कई प्रजातियों के लिए एक महत्वपूर्ण प्रजनन स्थल के रूप में भी कार्य करती है।

वेटलैंड्स से होने वाले लाभ क्या हैं? 
जल संरक्षण: वेटलैंड्स पानी को अवशोषित और संग्रहीत करते हैं, जिससे बाढ़ और सूखे को कम करने में मदद मिलती है.
जल शोधन:वेटलैंड्स पानी को प्रदूषण से मुक्त करते हैं, जिससे पीने के पानी की गुणवत्ता में सुधार होता है.
जैव विविधता का संरक्षण: वेटलैंड्स कई प्रजातियों के पौधों और जानवरों का घर हैं, जिनमें कुछ प्रजातियां विलुप्त होने के खतरे में हैं.

मनोरंजन: वेटलैंड्स लोगों के लिए मनोरंजन और शिक्षा के लिए एक लोकप्रिय स्थान हैं.

राष्ट्रपति भवन संग्रहालय: इतिहास को कहानी के रूप में दर्शाने वाला संग्रहालय-जानें खास बातें

President Museum to open from January 05


2 फरवरी 2024 से राष्ट्रपति भवन में अमृत उद्यान (Amrit Udyan Opening Date) खुल गया है. अमृत उद्यान में पर्यटक कई तरह के रंग-बिरंगे फूलों को देख सकते हैं. अमत उद्यान में ट्यूलिप और गुलाब के फूलों की कई वैरायटी हैं. अमृत उद्यान को पहले मुगल गार्डन (Mughal Garden) के नाम से जाना जाता था. जिसका नाम बदलकर अमृत उद्यान कर दिया गया है. आप भी यहां पर घूमने का प्लान बना सकते हैं. अमृत उद्यान (Amrit Udyan) जाने के लिए ऑनलाइन टिकट बुक कर सकते हैं.

राष्ट्रपति भवन संग्रहालय: खास बातें 

लगभग 10,000 वर्ग मीटर के क्षेत्र में फैला राष्ट्रपति भवन संग्रहालय परिसर (आरबीएमसी)  मुख्य तौर पर राष्ट्रपति भवन के विभिन्न पहलुओं को प्रदर्शित करने के लिए बेहतर तकनीक के साथ तैयार किया गया है जो अद्वितीय है. 

राष्ट्रपति भवन संग्रहालय परिसर (आरबीएमसी) भारतीय स्वतंत्रता, लोकतंत्र और एकता का प्रतीक है।वास्तव में आप  राष्ट्रपति भवन संग्रहालय में उन सभी उपहारों की झलक प्राप्त कर सकते हैं जो  भारत के राष्ट्रपतियों को वर्षों से मिले हैं तथा सभी इस संग्रहालय में संरक्षित है.  इन खूबसूरत  कलाकृतियों के अलावा अन्य भी कई महत्वपूर्ण वस्तुओं को इसमें संभालकर संगृहीत किया गया है जैसे हथियार, फर्नीचर, मूर्तियां, वस्त्र, तस्वीरें, अभिलेखीय सामग्री और भी बहुत कुछ.

देखें वीडियो: नजरिया-जीने का-जीवन में स्व-अनुशासन का महत्त्व 



मुगल गार्डन भी एक बहुत हीं सुन्दर स्थल है जो पर्यटकों को अपनी खूबसूरती के कारण आकर्षित करता रहा है. 15 एकड़ के विशाल विस्तार में फैले, मुगल गार्डन को अक्सर राष्ट्रपति के महल की आत्मा के रूप में चित्रित किया जाता है. 

मुगल गार्डन अब तक जनता के लिए फरवरी-मार्च के महीनों में आयोजित होने वाले वार्षिक उत्सव उद्यानोत्सव के दौरान ही खोला जाता था, लेकिन मुगल गार्डन, जो राष्ट्रपति भवन के दौरे का तीसरा सर्किट है, अब जनता के लिए खुला रहेगा। राष्ट्रपति भवन संग्रहालय परिसर इतिहास को कहानी के रूप में दर्शाने वाला एक संग्रहालय है जिसमें कला, संस्कृति, विरासत और इतिहास के उत्तम प्रतीकों और अमूल्य कलाकृतियों को प्रदर्शित किया गया है।




2 फरवरी 2024 से राष्ट्रपति भवन में अमृत उद्यान (Amrit Udyan Opening Date) खुल गया है. अमृत उद्यान में पर्यटक कई तरह के रंग-बिरंगे फूलों को देख सकते हैं. अमत उद्यान में ट्यूलिप और गुलाब के फूलों की कई वैरायटी हैं. अमृत उद्यान को पहले मुगल गार्डन (Mughal Garden) के नाम से जाना जाता था. जिसका नाम बदलकर अमृत उद्यान कर दिया गया है. आप भी यहां पर घूमने का प्लान बना सकते हैं. अमृत उद्यान (Amrit Udyan) जाने के लिए ऑनलाइन टिकट बुक कर सकते हैं. यह सभी दिन खुला रहेगा (सोमवार और सरकारी अवकाश को छोड़कर)। आगंतुक भ्रमण के लिए वेबसाइट्स- https://presidentofindia.nic.inया https://rashtrapatisachivalaya.gov.in/या https://rbmuseum.gov.in/पर जाकर ऑनलाइन बुकिंग कर सकते हैं।

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धैर्य और आत्मविश्वास का नहीं छोड़े दामन.... मिलेगी विपरीत परिस्थितियों में भी सफलता
राष्ट्रपति भवन संग्रहालय परिसर इतिहास को कहानी के रूप में दर्शाने वाला एक संग्रहालय है जिसमें कला, संस्कृति, विरासत और इतिहास के उत्तम प्रतीकों और अमूल्य कलाकृतियों को प्रदर्शित किया गया है।

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नजरिया: मोदी के करिश्माई व्यक्तित्व,स्पष्ट दृष्टि और मजबूत लोकप्रियता के आगे क्यों है विपक्ष बेबस

Najariya: Why Modi is Unbeatable Against Opposition

इसमें कोई संदेह नहीं है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जो अपने कौशल और वाकपटुता के साथ ही राजनितिक सूझबूझ के लिए भी जाने जाते हैं.और उनकी इस खूबियों का कायल उनके विरोधी भी हैं. उनके विरोधी भी मोदी को भली भांति जानते हैं कि उन्हें हराना इतना आसान नहीं है क्योंकि मोदी का करिश्माई व्यक्तित्व, स्पष्ट दृष्टि और मजबूत लोकप्रियता उन्हें और भी अजेय बनाती है.
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प्रधान मंत्री मोदी के व्यक्तित्व की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि वह अपने विरोधियों को कभी कोई मौका नहीं देते हैं और उनके वार और आक्रमण की तीर में ही उनके लिए मुद्दे छुपे होते हैं। यहां तक कि उनके आलोचक भी आसानी से विपक्ष के सामने आत्मसमर्पण नहीं करने के उनके कौशल और उनके दृढ़ निश्चय की सराहना करते हैं।

 विपक्षी दलों और नेताओं के मुद्दे और गलतियाँ आम तौर पर मोदी को एक मंच प्रदान करते हैं और वे विरोधी दलों को अपने मुद्दों से हराते हैं। नरेंद्र मोदी अपने कदमों से अपने आलोचकों को प्रभावित करने की इच्छाशक्ति और कौशल के लिए जाने जाते हैं।

 यह उसके स्वभाव की विशेषता है और आसपास की चीजों से निपटने की उसकी क्षमता भी। इसलिए उनके विरोधी भी बेशक चुपचाप और कभी-कभार उनकी तारीफ करते हैं।

मोदी का करिश्माई व्यक्तित्व:

  • उत्साही और प्रेरक वक्ता: मोदी अपनी ऊर्जावान और प्रेरक भाषणों के लिए जाने जाते हैं। वे जनता से जुड़ने और उन्हें प्रेरित करने में माहिर हैं।
  • मजबूत नेतृत्व: मोदी एक मजबूत और निर्णायक नेता के रूप में देखे जाते हैं। वे अपनी नीतियों पर दृढ़ रहते हैं और कठिन परिस्थितियों में भी पीछे नहीं हटते।
  • लोकप्रिय छवि: मोदी एक साधारण और जमीन से जुड़े नेता के रूप में लोकप्रिय हैं। वे सोशल मीडिया का सक्रिय रूप से उपयोग करते हैं और युवाओं से जुड़ने में सफल रहे हैं।

स्पष्ट दृष्टि:

  • विकास और समृद्धि: मोदी का मुख्य लक्ष्य भारत को एक विकसित और समृद्ध राष्ट्र बनाना है। उन्होंने 'मेक इन इंडिया', 'डिजिटल इंडिया' और 'स्वच्छ भारत अभियान' जैसे कई महत्वाकांक्षी कार्यक्रम शुरू किए हैं।
  • राष्ट्रीय सुरक्षा: मोदी राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर भी बहुत गंभीर हैं। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है और भारत की सैन्य शक्ति को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं।
  • सामाजिक न्याय: मोदी सभी वर्गों के लोगों के लिए समान अवसरों की वकालत करते हैं। उन्होंने गरीबों और वंचितों के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं।

मजबूत लोकप्रियता:

  • चुनावी सफलता: मोदी 2014 और 2019 में लोकसभा चुनावों में भारी बहुमत से जीते। यह उनकी लोकप्रियता का प्रमाण है।
  • जन समर्थन: मोदी देश भर में, विशेष रूप से युवाओं में, बहुत लोकप्रिय हैं। उनकी नीतियों और उनके नेतृत्व में लोगों का विश्वास है।
  • विश्व नेता: मोदी को एक मजबूत और प्रभावशाली विश्व नेता के रूप में देखा जाता है। उन्होंने कई देशों के साथ संबंधों को मजबूत किया है और भारत की वैश्विक छवि को बेहतर बनाया है।

नरेंद्र मोदी अलग तरीके से काम करते हैं और शायद इसीलिए वे नरेंद्र मोदी हैं। 2014 में अपने शपथ ग्रहण समारोह के दौरान याद करें जब उन्होंने समारोह के दौरान सभी सार्क देशों के प्रमुखों को बुलाने का फैसला किया था, जिसकी विशेषज्ञों द्वारा व्यापक रूप से सराहना की गई थी। निश्चित रूप से इन राष्ट्रों के प्रमुख को आमंत्रित करने का कदम पूरी दुनिया को स्पष्ट और प्रभावशाली संदेश दिया ।

उसके बाद तो मोदी ने देश से परे हटकर दुनिया में अपने व्यक्तित की ऐसे छाप छोड़ी की दुनिया के दिग्गज देशों की राष्ट्रपतियों को पीछा छोड़कर आज वे दुनिये के सबसे लोकप्रिय नेताओं की सूची में सर्वोच्च स्थान पर हैं. 

नजरिया जीने का: पढ़ें और भी...

रिश्ते खास हैं, इन्हे अंकुरित करें प्रेम से, जिंदा रखें संवाद से और दूर रखें गलतफहमियों से

इमोशनल हैं, तो कोई वादा नहीं करें और गुस्से में हों तो इरादा करने से परहेज करें

स्व-अनुशासन के महत्त्व को समझे और जीवन को बनाएं सार्थक 

रखें खुद पर भरोसा,आपकी जीत को कोई ताकत हार में नहीं बदल सकती

जाने क्या कहते हैं ये हस्तियां नागरिक विश्वास और समावेशी विकास के सन्दर्भ में




सॉवरेन स्वर्ण बांड योजना 2024: फ़रवरी में इस तिथि को खुलेंगी, जाने कैसे खरीदें और क्या है विशेषताएं

Sovereign Gold Bond Scheme facts in brief features

भारत सरकार ने सॉवरेन स्वर्ण बॉन्ड्स 2023-24 (श्रृंखला-IV), 12-16 फ़रवरी, 2024 की अवधि के लिए खोले जाने जाने का निर्णय किया है. भारत सरकार की अधिसूचना संख्या फ़.संख्या.4(6)-B(W&M)/2023 दिनांक 08 दिसंबर, 2023 के संदर्भ में, सॉवरेन स्वर्ण बॉन्ड्स 2023-24 (श्रृंखला-IV), 12-16 फ़रवरी, 2024 की अवधि के लिए खोली जाएगी। सॉवरेन स्वर्ण बॉन्ड्स 2023-24 (श्रृंखला-IV) की निपटान तिथि 21 फ़रवरी, 2024 होगी।

 इस अभिदान अवधि के दौरान बॉन्ड का निर्गम मूल्य ₹ 6,263 (छह हज़ार दो सौ तिरेसठ रुपये मात्र) प्रति ग्राम होगा, जैसा कि भारतीय रिजर्व बैंक की प्रेस विज्ञप्ति दिनांक 09 फ़रवरी, 2024 में भी प्रकाशित किया गया है।

भारत सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक के परामर्श से उन निवेशकों, जो ऑनलाइन आवेदन करते हैं तथा डिजिटल तरीके से भुगतान करते हैं, को निर्गम मूल्य में रु.50 (पचास रुपये मात्र) की छूट देने का फैसला किया है। ऐसे निवेशकों के लिए स्वर्ण बांड का निर्गम मूल्य रु 6,213 (छह हज़ार दो सौ तेरह रुपये मात्र) प्रति ग्राम स्वर्ण होगा।

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की विशेषताएं

एसजीबी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (लघु वित्त बैंकों, भुगतान बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को छोड़कर), स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एसएचसीआईएल), क्लियरिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (सीसीआईएल), नामित डाकघरों और मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज जैसे, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया लिमिटेड और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज लिमिटेड के माध्यम से बेचे जाएंगे। 

उत्पाद का नाम-सॉवरेन स्वर्ण बांड स्कीम 2023-24

निर्गमन-भारत सरकार की ओर से भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी किए जाएंगे ।

पात्रता- एसजीबी निवासी व्यक्तियों, हिन्‍दू अविभाजित परिवारों, न्‍यासों, विश्‍वविद्यालयों, धर्मार्थ संस्‍थाओं को ही बेचे जाएंगे।

मूल्‍यवर्ग-एसजीबी को एक ग्राम की मूल यूनिट के साथ ग्राम (ग्रामों) के गुणजों के मूल्‍यवर्ग में वर्गीकृत किया जाएगा।

अवधि- 5वें वर्ष के पश्चात् समय पूर्व मोचन के साथ बांड की अवधि 8 वर्ष की होगी जिसका प्रयोग ब्‍याज की देय तारीखों पर किया जा सकेगा।

न्‍यूनतम मात्रा-न्‍यूनतम अनुमत निवेश एक ग्राम सोना होगा।

अधिकतम सीमा-निवेश की अधिकतम सीमा व्यक्तियों के लिए 4 किलोग्राम, एचयूएफ के लिए 4 किलो ग्राम और ट्रस्टों और सरकार द्वारा समय-समय पर अधिसूचित समान संस्थाओं के लिए 20 किलो ग्राम प्रति वित्तीय वर्ष (अप्रैल-मार्च) की होगी।  इसके संबंध में, स्‍वघोषणा आवेदन करते समय प्राप्‍त की जाएगी। वार्षिक अधिकतम सीमा में, वित्तीय वर्ष के दौरान विभिन्‍न ट्रांशों के अंतर्गत अभिदत्‍त बांड और द्वितीयक बाजार से खरीदे जाने वाले बांड शामिल होंगे।

संयुक्‍त धारक-संयुक्‍त धारिता के मामले में निवेश सीमा 4 किलो ग्राम केवल प्रथम आवेदक के लिए लागू होगी।

निर्गमन मूल्‍य-एसजीबी का मूल्‍य अभिदान की अवधि से पहले सप्‍ताह के अंतिम तीन कार्य दिवसों के लिए इंडियन बुलियन एंड जूलर्स एसोसिएशन लि. द्वारा प्रकाशित 999 शुद्धता वाले सोने के सामान्‍य औसत के आधार पर भारतीय रुपए में तय किया जाएगा। ऑनलाइन आवेदन करने वालों और इसका भुगतान डिजीटल रूप में करने वालों के लिए स्‍वर्ण बांड का निर्गम मूल्‍य 50 रूपए प्रतिग्राम कम होगा।

भुगतान का विकल्‍प-एसजीबी के लिए भुगतान नकद भुगतान (अधिकतम 20,000 रूपए) या डिमांड ड्राफ्ट या चैक या इलेक्‍ट्रानिक बैंकिंग के जरिए होगा।

निर्गमन का प्रकार-एसजीबी जी एस अधिनियम, 2006 के अंतर्गत भारत सरकार स्‍टाक के रूप में जारी किए जाएंगे। निवेशकों को इसके लिए होल्‍डिंग प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा। ये बांड डिमेट रूप में रूपांतरण हेतु पात्र होंगे।

उन्‍मोचन मूल्‍य-उन्‍मोचन मूल्‍य आईबीजेए द्वारा प्रकाशित 999 की शुद्धता वाले सोने के पिछले तीन कार्य दिवस के लिए अंतिम मूल्य के साधारण औसत के आधार पर भारतीय रूपए में होगा। 

बिक्री के चैनल-एसजीबी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (लघु वित्त बैंकों, भुगतान बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को छोड़कर) , स्‍टॉक हाल्‍डिंग कारपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एसएचसीआईएल), क्लियरिंग कारपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (सीसीआईएल) और नामित डाक घरों (जैसा भी अधिसूचित किया जाए) और मान्यता प्राप्त स्‍टॉक एक्‍सचेंजों अर्थात् नेशनल स्‍टॉक एक्‍सचेंज ऑफ इंडिया लिमिटेड और बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज से सीधे या एजेंटों के जरिए बेचे जाएंगे।

ब्‍याज दर-निवेशकों को निवेश के आरंभिक मूल्‍य पर 2.50 प्रतिशत प्रति वर्ष की नियत दर पर अर्धवार्षिक रूप से देय होगा।

संपार्श्‍विक-एसजीबी को ऋणों के लिए संपार्श्‍विक के रूप में प्रयोग किया जा सकता है। मूल्‍य के लिए ऋण (एलटीवी) का अनुपात भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा समय-समय पर अधिदेशित साधारण स्वर्ण ऋण के बराबर निहित किया जाएगा। 

केवाईसी प्रलेखन-अपने ग्राहक को जानो (केवाईसी) मानदंड वही होंगे जो वास्‍तविक सोने की खरीद के हैं। केवाईसी दस्‍तावेज जैसे मतदाता पहचानपत्र, आधार कार्ड/पैन या टैन/पासपोर्ट जरूरी होंगे। प्रत्येक आवेदन के साथ आयकर विभाग और अन्य इकाइयों द्वारा जारी किया गया पैन नम्बर लगा होना चाहिए

कर उपचार-आयकर अधिनियम, 1961 (1961 का 43) के उपबंधों के अनुसार एसजीबी पर ब्‍याज करादेय होगा। किसी व्‍यक्‍ति को एसजीबी के उन्‍मोचन से प्राप्‍त पूंजी लाभ कर पर छूट दी गई है। बांड अंतरित किए जाने पर किसी व्‍यक्‍ति को मिलने वाले दीर्घावधिक पूंजी लाभों के लिए सूचीकरण लाभ दिए जाएंगे। 

व्‍यापार योग्‍यता-एसजीबी व्‍यापार योग्‍य होंगे।

एसएलआर पात्रता-केवल ग्रहणाधिकार/दृष्टिबाधक गिरवी रखने की प्रक्रिया के माध्यम से बैंकों द्वारा अर्जित एसजीबी की गणना सांविधिक नकदी अनुपात में की जाएगी।

कमीशन-प्राप्‍तकर्ता कार्यालयों द्वारा एसजीबी के वितरण के लिए कमीशन कुलअभिदान राशि के 1 प्रतिशत की दर पर अदा किया जाएगा और प्राप्‍तकर्ता कार्यालय उनके द्वारा किए गए कारोबार के लिए एजेंटों अथवा उप एजेंटों के साथ प्राप्‍त कमीशन का 50 प्रतिशत भाग साझा करेंगे। 

(श्रोत: वित्त मंत्रालय द्वारा जारी रिलीज़ )

नजरिया: नरेंद्र मोदी के चमत्कारिक व्यक्तित्व और सीट शेयरिंग पर इंडी गठबंधन की अपनी "डफली अपनी राग"

najariya jine ka I.N.D.I.A. Vs NDA in 2024

भारतीय राष्ट्रीय विकासात्मक समावेशी गठबंधन (आई.एन.डी.आई.ए.) का गठन कर प्रमुख विपक्षियों पार्टियों ने जो एक उम्मीद देश को दिया थान नरेंद्र मोदी के खिलाफ एक गठबंधन बना कर, हाल में सीटों के शेयरिंग और संयोजक के पद को लेकर मची खलबली ने उम्मीदों को धुंधला सा कर दिया है। पहले पटना और हाल में बैंगलोर के बाद हाल में संपन्न बैठक के माध्यम से एक सकारात्मक और सर्वमान्य विपक्ष देखने को मिला था लेकिन आज  की हकीकत यह है कि गठबंधन में शामिल सभी दल गतभंधन के हितों से अलग अपनी पार्टी के हितों को लेकर अपनी डफली अपनी राग गा  रहे हैं।  हालाँकि वावजूद इसके कि I.N.D.I.A. अपनी एकता बनाए रखने में अब तक सक्षम रहा है जो 2024 के आम चुनाव में एनडीए के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है, लेकिन प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के चमत्कारिक व्यक्तित्व और मजबूत चेहरे के मुकाबले के लिए एक स्ट्रॉन्ग चेहरा की कमी विपक्ष को खलेगी जिसकी कीमत गठबंधन को चुकानी पड़ सकती है क्योंकि एन डी ए तो मोदी के चेहरे पर ही चुनाव लडेगी।

हालाँकि एनडीए 30 से अधिक विभिन्न दलों का गठबंधन है, लेकिन यह नरेंद्र मोदी जैसे मजबूत नेता सहित कई प्रथाओं को अपनाकर स्थिरता बनाए रखने में सक्षम है, जो विभिन्न दलों को एकजुट करने में सक्षम हैं।

भारत में गठबंधन सरकारों की स्थिरता कई वर्षों से बहस का विषय रही है। कुछ लोगों का तर्क है कि गठबंधन सरकारें स्वाभाविक रूप से अस्थिर होती हैं, क्योंकि वे विभिन्न विचारधाराओं और हितों वाली कई अलग-अलग पार्टियों द्वारा बनाई जाती हैं। इससे संघर्ष और अस्थिरता पैदा हो सकती है, क्योंकि पार्टियां प्रमुख नीतियों या निर्णयों पर सहमत नहीं हो पाएंगी।

लगभग एक दशक का समय बीत चुका है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लंबे समय बाद बीजेपी को पूर्ण बहुमत मिलने पर भारत में गठबंधन सरकार की कवायदों पर पूर्ण विराम लगा दिया था। इस तथ्य के बावजूद, भाजपा ने 2014 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के तहत सरकार बनाई।

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भारत में गठबंधन सरकारों की स्थिरता कई वर्षों से बहस का विषय रही है। कुछ लोगों का तर्क है कि गठबंधन सरकारें स्वाभाविक रूप से अस्थिर होती हैं, क्योंकि वे विभिन्न विचारधाराओं और हितों वाली कई अलग-अलग पार्टियों द्वारा बनाई जाती हैं। इससे संघर्ष और अस्थिरता पैदा हो सकती है, क्योंकि पार्टियां प्रमुख नीतियों या निर्णयों पर सहमत नहीं हो पाएंगी।

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दूसरों का तर्क है कि गठबंधन सरकारें एकल-दलीय सरकारों की तरह ही स्थिर हो सकती हैं, यदि पार्टियाँ प्रभावी ढंग से एक साथ काम करने में सक्षम हों। वास्तव में, भारत में कई सफल गठबंधन सरकारें रही हैं, जिनमें राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) भी शामिल है, जो 2014 से सत्ता में है।

एनडीए 35 से अधिक विभिन्न दलों का गठबंधन है, लेकिन यह कई प्रथाओं को अपनाकर स्थिरता बनाए रखने में सक्षम है। इसमे शामिल है:

  • एक मजबूत नेता होना जो विभिन्न दलों को एकजुट करने में सक्षम हो।
  • एक सामान्य एजेंडे और प्राथमिकताओं के सेट पर सहमति।
  • विभिन्न पक्षों के बीच संचार की स्पष्ट रेखाएँ स्थापित करना।
  • आवश्यकता पड़ने पर समझौता करना।

एनडीए की स्थिरता को इस तथ्य से मदद मिली है कि भाजपा गठबंधन में सबसे बड़ी पार्टी है, और यह निर्णय लेने में प्रमुख भूमिका निभाने में सक्षम है। हालाँकि, एनडीए की स्थिरता अन्य दलों की प्रभावी ढंग से मिलकर काम करने की क्षमता पर भी निर्भर करेगी। यदि बहुत अधिक संघर्ष या असहमति हो तो गठबंधन अस्थिर हो सकता है।

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम, जिनका सभी सम्बन्धो के लिए अनुकरणीय व्यक्तित्व

भारतीय राष्ट्रीय विकासात्मक समावेशी गठबंधन (आई.एन.डी.आई.ए.) का हालिया गठन एक संकेत है कि विपक्षी दल एनडीए को चुनौती देने के अपने प्रयासों में अधिक एकजुट हो रहे हैं। यदि I.N.D.I.A. अपनी एकता बनाए रखने में सक्षम है, यह 2024 के आम चुनाव में एनडीए के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।

निष्कर्षतः, भारत में गठबंधन सरकारों की स्थिरता कई कारकों पर निर्भर करती है, जिनमें नेता की ताकत, एक साझा एजेंडे पर सहमति और पार्टियों की प्रभावी ढंग से एक साथ काम करने की क्षमता शामिल है। एनडीए आठ वर्षों से अधिक समय से स्थिरता बनाए रखने में सक्षम है, लेकिन I.N.D.I.A. का गठन अगले आम चुनाव में एनडीए के प्रभुत्व के लिए एक गंभीर चुनौती पैदा कर सकता है।

Assembly Election Result 2023 Live: सेमीफानल में बीजेपी ने दिखाई ताकत, एमपी, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस पीछे

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मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे जो सामने आ रहे हैं उसे यह साबित कर दिया है कि मोदी फैक्टर देश में आज भी कायम है. इन चारों राज्यों में भाजपा स्पष्ट जीत हासिल करने की और अग्रसर है. एक झलक आप ताजा रुझानों पर डालेंगे तो पाएंगे की मध्य प्रदेश और राजस्थान के बाद अब भाजपा छत्तीसगढ़ में भी सरकार बना सकती है. 

इन नतीजों को 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए एक सेमीफाइनल के रूप में देखा जा रहा था। भाजपा के इन नतीजों से यह संकेत मिलता है कि वह 2024 में लोकसभा चुनाव में भी जीत हासिल कर सकती है।

कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ सकता है जो की उसके लिए काफी बुरी हो सकती है. कांग्रेस के साथ इंडियन अलायन्स के लिए भी यह व्यापक हार का कारण हो सकती है और उनके उम्मीदों पर पानी फेर सकती है. 

इन चुनावों में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा है। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस को 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में इन चारों राज्यों में जीत हासिल हुई थी।

कांग्रेस के इस हार के कई कारण हैं। इनमें पार्टी की अंदरूनी कलह, आर्थिक संकट और केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ लोगों का गुस्सा शामिल है।

भाजपा ने दिखाई ताकत

भाजपा ने इन चुनावों में अपनी ताकत दिखाई है जिसने  ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में सरकारें बनाने की और अग्रसर है.

भाजपा के इस जीत के कई कारण हैं। इनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता, केंद्र सरकार की नीतियों का लोगों पर सकारात्मक प्रभाव और कांग्रेस की कमजोर स्थिति शामिल है।

नतीजों का राजनीतिक प्रभाव

इन नतीजों का राजनीतिक प्रभाव भी देखने को मिलेगा। भाजपा को इन नतीजों से 2024 के लोकसभा चुनाव में मदद मिलेगी। कांग्रेस को इन नतीजों से झटका लगा है। कांग्रेस को अपने संगठन को मजबूत करने और लोगों से जुड़ने की जरूरत है।

मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश में भाजपा ने 127 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत हासिल किया है। कांग्रेस 82 सीटों पर सिमट गई है।

राजस्थान

राजस्थान में भाजपा ने 107 सीटें जीतकर सत्ता बरकरार रखी है। कांग्रेस 80 सीटों पर सिमट गई है।

छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकारें बनाने की और अग्रसर है.



तंपारा झील ओडिशा: पक्षियों की 60, मछलियों की 46 और फाइटोप्लांकटन की 48 प्रजातियों से पूर्ण, जाने क्या है खासियत और कैसे पहुंचे ?

Tampara Lake freshwater lakes Odisha Facts In Brief

तंपारा झील भारत के ओडिशा राज्य के गंजम जिले में स्थित एक मीठे पानी की झील है जो लगभग 300 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली हुई है. यह रुशिकुल्या नदी के दाहिने किनारे पर स्थित है जो एक प्राकृतिक स्थल होने के साथ ही यह महत्वपूर्ण पक्षी विहार और एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल हैतंपारा झील एक महत्वपूर्ण पक्षी विहार है और यहां पर कई प्रजातियों के पक्षी पाए जाते हैं. यह झील एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल भी है और यहां पर लोग तैराकी, बोटिंग और मछली पकड़ने का आनंद लेते हैं. झील के किनारे पर कई होटल और रेस्तरां हैं, जहां पर लोग भोजन और आराम कर सकते हैं.

तंपारा झील: भारत में स्वतंत्रता के 75वें वर्ष में देश में 13,26,677 हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करते हुए कुल 75 रामसर स्थलों को बनाने के लिए रामसर स्‍थलों की सूची में 11 और आर्द्रभूमि शामिल हो गई हैं। रामसर स्थलों के रूप में नामित 11 आर्द्रभूमियों में से  ओडिशा स्थित तंपारा झील भी शामिल है. 

तंपारा झील: Facts in Brief 

तंपारा झील गंजम जिले में स्थित ओडिशा राज्य की सबसे प्रमुख मीठे पानी की झीलों में से एक है। यहां की भूमि का क्षेत्र धीरे-धीरे वर्षा जल के प्रवाह से भर गया और इसे अंग्रेजों द्वारा "टैम्प" कहा गया और बाद में स्थानीय लोगों द्वारा इसे "तंपारा" कहा गया।

आर्द्रभूमि पक्षियों की कम से कम 60 प्रजातियों, मछलियों की 46 प्रजातियों, फाइटोप्लांकटन की कम से कम 48 प्रजातियों और स्थलीय पौधों और मैक्रोफाइट्स की सात से अधिक प्रजातियों का पालन करती है। 

तंपारा झील एक महत्वपूर्ण पक्षी विहार है. यहां पर कई प्रजातियों के पक्षी पाए जाते हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • सारस
  • बगुला
  • हंस
  • कबूतर
  • तोता
  • मैना
  • कोयल
  • मोर
  • चकवा
  • बतख

आर्द्रभूमि दुर्लभ प्रजातियों जैसे कि साइप्रिनस कार्पियो, कॉमन पोचार्ड (अथ्या फेरिना), और रिवर टर्न (स्टर्ना औरंतिया) के लिए एक महत्वपूर्ण निवास स्थान है। प्रति वर्ष 12 टन की अनुमानित औसत मछली उपज के साथ, आर्द्रभूमि स्थानीय समुदायों के लिए आजीविका का एक महत्वपूर्ण स्रोत है।

 यह आर्द्रभूमि मछलियों के साथ-साथ कृषि और घरेलू उपयोग के लिए पानी जैसे प्रावधान की सेवाएं भी उपलब्‍ध कराती है और यह एक प्रसिद्ध पर्यटन और मनोरंजन स्थल भी है।

तम्पारा  झील: जाने क्या है खासियत? 

तम्पारा  एक मीठे पानी की झील है जो राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या  5 के निकट (छत्रपुर से) सुंदर में स्थित है. तंपारा झील की सबसे बड़ी खासियत है कि इसके  किनारे पर हल्की लहरें उठती हैं और या वाटर सम्बंधित गतिविधियों के लिए शानदार डेस्टिनेशन है,तट के किनारे स्थित काजू के बागानों से होकर बंगाल की खाड़ी के अविर्जिन समुद्र तट तक जाने वाली रोमांचक यात्रा का आनंद भी आप उठा सकते हैं. 

FAQ

पर्यटकों के लिए तम्पारा पहुँचने के लिए किस प्रकार के मार्ग उपलब्ध है?

हवाईजहाज

अगर आप हवाईजहाज से जाना चाहते हैं तो निकटतम हवाई अड्डा भुवनेश्वर है.

 ट्रेन से

अगर आप ट्रेन से तम्पारा पहुंचना चाहते हैं तो निकटतम रेलवे स्टेशन छत्रपुर है.

सड़क द्वारा 

अगर आप सड़क द्वारा जाना चाहते हैं तो सड़क मार्ग से यह छत्रपुर से 4 किमी दूर है.

77th Independence Day 2023; प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ऐतिहासिक लाल किले से समारोह का करेंगे नेतृत्व, जाने कहाँ-कहाँ है सेल्फी पॉइंट

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स्वतंत्रता दिवस अर्थात देश की आजादी का ऐतिहासिक दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 15 अगस्त, 2023 को दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले से 77वें स्वतंत्रता दिवस का उत्सव मनाने में देश का नेतृत्व करेंगे। वह राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे और इस ऐतिहासिक स्मारक की प्राचीर से राष्ट्र को पारंपरिक संबोधन देंगे। 
12 स्थानों पर सरकार की विभिन्न योजनाओं और पहलों को समर्पित सेल्फी प्वाइंट स्थापित किए गए हैं।आइये जानते हैं कि इस साल के स्वतंत्रता दिवस की आयोजन की क्या है विशेषताएं, और पूरा कार्यक्रम।

इस वर्ष के स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ समारोह, जिसका शुभारंभ प्रधानमंत्री ने 12 मार्च, 2021 को गुजरात के अहमदाबाद स्थित साबरमती आश्रम से किया था, का समापन होगा और 2047 तक भारत को एक विकसित देश बनाने के श्री नरेन्द्र मोदी के सपने को साकार करने हेतु देश को नए उत्साह के साथ एक बार फिर ‘अमृत काल’ में प्रवेश कराया जाएगा। 77वें स्वतंत्रता दिवस को मनाने के लिए कई नई पहल की गई हैं। पिछले साल की तुलना में इस वर्ष बड़ी संख्या में अतिथियों को आमंत्रित किया गया है।

विशिष्ट अतिथि

विशिष्ट अतिथि के रूप में लाल किले में आयोजित समारोह का हिस्सा बनने के लिए देश भर से विभिन्न व्यवसायों से जुड़े लगभग 1,800 लोगों को उनके जीवनसाथी के साथ आमंत्रित किया गया है। यह पहल सरकार के ‘जनभागीदारी’ दृष्टिकोण के अनुरूप की गई है।

इन विशिष्ट अतिथियों में 660 से अधिक जीवंत गांवों के 400 से अधिक सरपंच; किसान उत्पादक संगठन योजना से जुड़े 250 लोग; प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना और प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के 50-50 प्रतिभागी; नई संसद भवन सहित सेंट्रल विस्टा परियोजना से जुड़े 50 श्रम योगी (निर्माण श्रमिक); 50-50 खादी कार्यकर्ता, सीमा पर स्थित सड़कों के निर्माण, अमृत सरोवर और हर घर जल योजना से जुड़े लोगों के साथ-साथ 50-50 प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक, नर्स और मछुआरे शामिल हैं। इनमें से कुछ विशिष्ट अतिथियों का दिल्ली में अपने प्रवास के दौरान राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का दौरा करने और रक्षा राज्यमंत्री श्री अजय भट्ट से मुलाकात करने का कार्यक्रम है।

प्रत्येक राज्य/केन्द्र-शासित प्रदेश से पचहत्तर (75) जोड़ों को भी उनकी पारंपरिक पोशाक में लाल किले में आयोजित समारोह को देखने के लिए आमंत्रित किया गया है।

सेल्फी प्वाइंट

राष्ट्रीय युद्ध स्मारक, इंडिया गेट, विजय चौक, नई दिल्ली रेलवे स्टेशन, प्रगति मैदान, राजघाट, जामा मस्जिद मेट्रो स्टेशन, राजीव चौक मेट्रो स्टेशन, दिल्ली गेट मेट्रो स्टेशन, आईटीओ मेट्रो गेट, नौबत खाना और शीश गंज गुरुद्वारा सहित 12 स्थानों पर सरकार की विभिन्न योजनाओं और पहलों को समर्पित सेल्फी प्वाइंट स्थापित किए गए हैं।

इन योजनाओं/पहलों में वैश्विक आशा: टीके और योग; उज्ज्वला योजना; अंतरिक्ष शक्ति; डिजिटल इंडिया; कौशल भारत; स्टार्ट-अप इंडिया; स्वच्छ भारत; सशक्त भारत, नया भारत; पॉवरिंग इंडिया; प्रधानमंत्री आवास योजना और जल जीवन मिशन शामिल हैं।

इस समारोह के हिस्से के रूप में, रक्षा मंत्रालय द्वारा 15-20 अगस्त तक मायगव पोर्टल पर एक ऑनलाइन सेल्फी प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। लोगों को इस प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए 12 में से एक या अधिक स्थानों पर सेल्फी लेने और उन्हें मायगव प्लेटफॉर्म पर अपलोड करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। कुल बारह विजेताओं, प्रत्येक स्थान से एक, का चयन ऑनलाइन सेल्फी प्रतियोगिता के आधार पर किया जाएगा। प्रत्येक विजेता को 10,000 रुपये की पुरस्कार राशि दी जाएगी।


समारोह

लाल किला पहुंचने पर, प्रधानमंत्री का स्वागत रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह, रक्षा राज्य मंत्री श्री अजय भट्ट और रक्षा सचिव श्री गिरिधर अरामने करेंगे। रक्षा सचिव, लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ, जनरल ऑफिसर कमांडिंग (जीओसी), दिल्ली क्षेत्र का परिचय प्रधानमंत्री से कराएंगे। इसके बाद जीओसी, दिल्ली क्षेत्र श्री नरेन्द्र मोदी को सलामी स्थल तक ले जायेंगे, जहां एक संयुक्त इंटर-सर्विसेज और दिल्ली पुलिस गार्ड प्रधानमंत्री को सलामी देंगे। इसके बाद प्रधानमंत्री गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण करेंगे।

प्रधानमंत्री के गार्ड ऑफ ऑनर दल में सेना, वायु सेना और दिल्ली पुलिस के एक-एक अधिकारी और 25 कर्मी तथा नौसेना के एक अधिकारी और 24 कर्मी शामिल होंगे। भारतीय सेना इस वर्ष के लिए समन्वय सेवा की भूमिका में है। गार्ड ऑफ ऑनर की कमान मेजर विकास सांगवान के हाथों में होगी। प्रधानमंत्री के गार्ड की कमान मेजर इंद्रजीत सचिन, नौसेना के सैन्यदल की कमान लेफ्टिनेंट कमांडर एमवी राहुल रमन और वायु सेना के सैन्यदल की कमान स्क्वाड्रन लीडर आकाश गांघस के हाथों में होगी। दिल्ली पुलिस के दल की कमान एडिशनल डीसीपी संध्या स्वामी संभालेंगी।

गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण करने के बाद, प्रधानमंत्री लाल किले की प्राचीर की ओर बढ़ेंगे, जहां उनका स्वागत रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह, रक्षा राज्य मंत्री श्री अजय भट्ट, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे, नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार और वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी करेंगे। । दिल्ली क्षेत्र के जीओसी प्रधानमंत्री को राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए प्राचीर पर बने मंच तक ले जाएंगे।

झंडा फहराए जाने के बाद, तिरंगे को 'राष्ट्रीय सलामी' दी जाएगी। सेना का बैंड, जिसमें एक जेसीओ और 20 अन्य सैन्यकर्मी शामिल होंगे, राष्ट्रीय ध्वज फहराने और 'राष्ट्रीय सलामी' प्रस्तुत करने के दौरान राष्ट्रगान बजाएगा। बैंड का संचालन नायब सूबेदार जतिंदर सिंह करेंगे।

मेजर निकिता नायर और मेजर जास्मीन कौर राष्ट्रीय ध्वज फहराने में प्रधानमंत्री की सहायता करेंगी। विशिष्ट 8711 फील्ड बैटरी (औपचारिक) के बहादुर बंदूकधारियों द्वारा 21 तोपों की सलामी के साथ, इस कार्यक्रम का समन्वय किया जाएगा। लेफ्टिनेंट कर्नल विकास कुमार सेरेमोनियल बैटरी की कमान संभालेंगे और नायब सूबेदार (एआईजी) अनूप सिंह गन पोजिशन ऑफिसर होंगे।

राष्ट्रीय ध्वज गार्ड में सेना, नौसेना, वायु सेना और दिल्ली पुलिस के पांच अधिकारी और 128 अन्य कर्मी शामिल होंगे, जो प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराए जाने के समय राष्ट्रीय सलामी देंगे। सेना के मेजर अभिनव देथा इस इंटर-सर्विसेज गार्ड और पुलिस गार्ड की कमान संभालेंगे।

राष्ट्रीय ध्वज गार्ड में सेना के सैन्यदल की कमान मेजर मुकेश कुमार सिंह, नौसेना के सैन्यदल की कमान लेफ्टिनेंट कमांडर हरप्रीत मान और वायु सेना के सैन्यदल की कमान स्क्वाड्रन लीडर श्रेय चौधरी के हाथों में होगी। दिल्ली पुलिस के दल की कमान एडिशनल डीसीपी शशांक जयसवाल संभालेंगे।

जैसे ही प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाएगा, पार्श्व पंक्ति विन्यास में भारतीय वायु सेना के दो उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर मार्क-III ध्रुव द्वारा कार्यक्रम स्थल पर फूलों की वर्षा की जाएगी। हेलीकॉप्टर के कैप्टन, विंग कमांडर अंबर अग्रवाल और स्क्वाड्रन लीडर हिमांशु शर्मा होंगे।

पुष्पवर्षा के बाद, प्रधानमंत्री राष्ट्र को संबोधित करेंगे। प्रधानमंत्री के संबोधन के समापन पर राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) के कैडेट राष्ट्रगान गाएंगे। राष्ट्रीय उत्साह के इस उत्सव में देश भर के विभिन्न स्कूलों के एक हजार एक सौ (1,100) बालक और बालिका एनसीसी कैडेट (सेना, नौसेना और वायु सेना) भाग लेंगे। ज्ञानपथ पर सीटें लगाए गयीं हैं, जिन पर कैडेट आधिकारिक सफेद पोशाक में बैठेंगे।

इसके अलावा, समारोह के भाग के रूप में एनसीसी कैडेटों को वर्दी में ज्ञान पथ पर बैठाया जाएगा। एक अन्य आकर्षण जी-20 प्रतीक चिन्ह होगा, जो लाल किले पर फूलों की सजावट का भाग होगा। (Source PIB)

दिल्ली अध्यादेश बिल: केजरीवाल का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पर सीधा हमला

Delhi Service Bll Kejriwal Attaced on Modi amit Shah

दिल्ली अध्यादेश बिल को राज्यसभा में पास होने पर सीएम अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पर सीधा हमला बोलते हुए कहा है कि आज का दिन भारतीय लोकतंत्र के लिए काला दिन रहा।  उन्होंने  कहा कि जब इन लोगों को लगा कि आम आदमी पार्टी को हराना मुश्किल है, तब इन्होंने चोर दरवाजे से अध्यादेश लाकर दिल्ली की सत्ता हथियाने की कोशिश की है। दिल्लीवालों ने 2015 और 2020 में हमारी सरकार बनाई, क्योंकि मैं दिल्ली का बेटा हूं और मोदी जी दिल्ली के नेता बनना चाहते हैं।

दिल्ली के लोगों ने भाजपा को 25 साल से वनवास दिया

सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि जब इन लोगों ने देखा कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी को हराना बहुत मुश्किल है। ये लोग पिछले चार चुनाव हो चुके हैं। दिल्ली में 2013, 2015 और 2020 में विधानसभा चुनाव हारने के बाद एमसीडी का चुनाव भी भाजपा आम आदमी पार्टी से हार गई। पिछले 25 साल से दिल्ली के अंदर भाजपा की सरकार नहीं बनी है। 25 साल से इनको दिल्ली के लोगों ने वनवास दिया हुआ है। 

भाजपा वाले केजरीवाल के काम में कॉम्पिटिशन नहीं कर सकते

सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री दिल्ली में ऐसा इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि पिछले 7-8 साल में बिना किसी पावर के भी हम लोगों ने बहुत शानदार काम किए हैं। दिल्ली में हमने इतने शानदार स्कूल-अस्पताल बनाए, 24 घंटे बिजली कर दी, बिजली फ्री कर दी, घर-घर पानी पहुंचा रहे हैं, सड़कें बनाई। हम लोगों ने इतने सारे काम कर दिए, लेकिन इन लोगों से ये काम नहीं हो रहे हैं। ये लोग आम आदमी पार्टी के जैसे काम नहीं कर सकते, इसीलिए केजरीवाल को काम करने से रोक रहे हैं। 

भाजपा दिल्लीवालों से नफरत करती है

 दिल्ली के लोगों को अपना बेटा पसंद है, दिल्ली के लोगों को मोदी जी जैसे नेता नहीं चाहिए। हम दिल्लीवाले दिल्ली से बहुत प्यार करते हैं और हम जानते हैं कि भाजपा दिल्ली के लोगों से नफ़रत करती है। इस बार दिल्ली के लोग लोकसभा में एक भी सीट नहीं देंगे। इस पूरे संघर्ष में बहुत सारी पार्टियों, बहुत सारे नेताओं ने दिल्ली के लोगों का साथ दिया। उन सब नेताओं को और पार्टियों को मैं तहे दिल से दिल्ली के दो करोड़ लोगों की तरफ से शुक्रिया अदा करता हूं।



दिल्ली सेवा विधेयक 2023: 24 चुनाव के पहले मिली यह हार कांग्रेस और केजरीवाल के लिए बड़ा झटका

I.N.D.I.A Defeated in Delhi Service Bill Kejriwal Lost

दिल्ली सेवा विधेयक पर राज्यसभा में कांग्रेस की हार को एक बड़ा झटका माना जा रहा है. इस हार से कांग्रेस के 2024 के लोकसभा चुनाव में जीत की संभावनाएं कम हो गई हैं. उल्लेखनीय है कि राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) विधेयक 2023 बृहस्पतिवार को लोकसभा से पारित हो गया था।


दिल्ली सेवा विधेयक दिल्ली सरकार को दिल्ली के अधिकारियों की नियुक्ति और स्थानांतरण का अधिकार देता है. यह विधेयक कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण था क्योंकि यह दिल्ली सरकार को अपनी नीतियों को लागू करने में सक्षम बनाता है.

राज्यसभा में कांग्रेस की हार से यह स्पष्ट हो गया है कि कांग्रेस अब भी विपक्ष में है और सरकार को चुनौती देने में सक्षम नहीं है. यह हार कांग्रेस के लिए एक बड़ी राजनीतिक हार है और इसका असर 2024 के लोकसभा चुनाव पर पड़ सकता है.

दिल्ली सेवा विधेयक पर कांग्रेस की हार को कुछ लोगों ने मोदी सरकार की जीत के रूप में भी देखा है. वे मानते हैं कि इस हार से यह स्पष्ट हो गया है कि मोदी सरकार अब भी मजबूत है और कांग्रेस उसे चुनौती देने में सक्षम नहीं है.

दिल्ली सेवा विधेयक पर कांग्रेस की हार को एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है. इसका असर 2024 के लोकसभा चुनाव पर पड़ सकता है.

हाइगम आर्द्रभूमि संरक्षण रिजर्व-जम्मू-कश्मीर: Facts in Brief

Hygam Wetland Conservation Reserve Facts in Brief

Hygam Wetland Conservation Reserve:
 हाइगम वेटलैंड (आर्द्रभूमि) झेलम नदी बेसिन के भीतर आता है  जो संघ शासित प्रदेश की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर से 40 किमी दूर स्थित है. यह जम्मू-कश्मीर के जिला बारामूला  में 1580 मीटर asl की ऊंचाई पर झेलम नदी के बाढ़ के मैदान में स्थित है। वास्तव में कई प्रवासी पक्षी प्रजातियों के निवास के रूप में स्थापित होने के कारण इसे एक महत्वपूर्ण पक्षी क्षेत्र (आईबीए) के रूप में भी मान्यता प्राप्त है।

हाइगम वेटलैंड झेलम नदी बेसिन के भीतर आता है और स्थानीय समुदायों के लिए बाढ़ अवशोषण बेसिन, जैव विविधता संरक्षण स्थल, पर्यावरण-पर्यटन स्थल और आजीविका सुरक्षा के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आर्द्रभूमि बारामुला जिले में स्थित है।
मन की बात: मिलिए इन हीरो से जिनका चर्चा प्रधानमंत्री ने किया ऐतिहासिक प्रस्तुति में

 यह कई निवासियों और प्रवासी पक्षी प्रजातियों के निवास के रूप में कार्य करता है। इसे एक महत्वपूर्ण पक्षी क्षेत्र (आईबीए) के रूप में भी मान्यता प्राप्त है। अत्‍यधिक गाद के कारण हाइगम वेटलैंड ने अपनी आर्द्रभूमि विशेषताओं को काफी हद तक खो दिया है और कई जगहों पर इसकी रूपरेखा को एक भूभाग में बदल दिया है। 

इसके परिणामस्वरूप प्रवासी पक्षियों (शीतकालीन/ग्रीष्मकालीन प्रवासी) और स्‍थानीय पक्षियों के लिए भी उपयुक्त आश्रय स्थल की स्थिति के मामले में यहां नुकसान हुआ है। 

हाइगम वेटलैंड पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं की अधिकता प्रदान करता है, इनमें मछली और फाइबर, जल आपूर्ति, जल शोधन, जलवायु विनियमन, बाढ़ विनियमन और मनोरंजक अवसर शामिल हैं। 

आर्द्रभूमियों के किनारे और आसपास रहने वाले लोगों की आजीविका आंशिक रूप से या पूरी तरह से आर्द्रभूमि पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं पर निर्भर करती है।


अरविंद केजरीवाल ने क्यों कहा कि-"सुगर का मरीज हूं, 15 दिन भूखे रहने के बावजूद जिंदा बच गया"

सीएम श्री अरविंद केजरीवाल ने सीबीआई दफ्तर के लिए निकलने से पहले रविवार सुबह एक वीडियो जारी किया। इसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कहा कि आप चाहे जो मर्ज़ी कर लीजिए, अब आप रोक नहीं पाएंगे।  उन्होंने कहा कि देश के लिए मेरी जान भी हाजिर है। मैं सुगर का मरीज हूं। एक-एक दिन में 50 यूनिट से ज्यादा इंसुलिन लेता हूं। इतनी सुगर होने के बावजूद भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बार मैंने 10 दिन और दूसरी बार 15 दिन का अनशन किया था। उस वक्त सभी डॉक्टरों ने कहा कि सुगर वाला मरीज भूखा रहेगा तो किसी भी हालत में जिंदा नहीं बचेगा। लेकिन मैं 15 दिन भूखे रहने के बावजूद जिंदा बच गया। यह किसी चमत्कार से कम नहीं है। भगवान मेरे साथ है। 

प्रधानमंत्री जी, आप जो मर्ज़ी कर लीजिए, पर रोक नहीं पाएंगे

सीएम श्री  अरविंद केजरीवाल ने सीबीआई दफ्तर के लिए निकलने से पहले रविवार सुबह एक वीडियो जारी किया। इसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कहा कि आप चाहे जो मर्ज़ी कर लीजिए, अब आप रोक नहीं पाएंगे। अब भारत दुनिया का नंबर-1 देश बन कर रहेगा। पहले ही भारत दुनिया का नंबर-1 देश बन सकता था। लेकिन आप जैसे नेताओं और पार्टियों ने अपने भ्रष्टाचार, पैसे और सत्ता की वजह से अभी तक नहीं बनने दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा के नेता कल से चिल्ला-चिल्ला कर कह रहे हैं कि केजरीवाल को गिरफ्तार करेंगे। शायद भाजपा ने मुझे गिरफ्तार करने का आदेश भी दे दिया है। लेकिन क्या मुझे गिरफ्तार करने से देश की समस्याएं दूर हो जाएंगी, सबको रोजगार और शिक्षा मिल जाएगी? ऐसा कुछ नहीं होगा। हालांकि प्रधानमंत्री के अहंकार की संतुष्टि जरूर हो जाएगी। सीएम ने कहा कि मैं पूरी ईमानदारी से सीबीआई के सारे सवालों का जवाब दूंगा। जब मैंने कुछ किया ही नहीं है तो छिपाना क्या?

ये लोग बहुत ताकतवर हैं, किसी को भी जेल भेज सकते हैं

सीएम श्री  अरविंद केजरीवाल ने रविवार सुबह एक वीडियो जारी कर कहा कि इन्होंने आज मुझे सीबीआई बुलाया है। मैं पूरी ईमानदारी और सच्चाई से इनके सभी सवालों के जवाब दूंगा। जब कुछ गलत किया ही नहीं है तो फिर छिपाना क्या है? ये लोग बहुत ताकतवर हैं, किसी को भी जेल भेज सकते हैं। चाहे किसी ने कोई जुर्म किया हो या न किया हो। कोई फर्क नहीं पड़ता। ये बहुत पावरफुल लोग हैं। कल से इनके सारे नेता चिल्ला-चिल्ला कर कह रहे हैं कि केजरीवाल को गिरफ्तार करेंगे। शायद भाजपा ने सीबीआई को आदेश भी दे दिया है कि केजरीवाल को गिरफ्तार करना है। अब भाजपा ने आदेश दे दिया है तो फिर सीबीआई की क्या मजाल है। फिर तो सीबीआई गिरफ्तार करेगी ही। 

इन्हें सत्ता का अहंकार हो गया है, सबको जेल में डालने की धमकी देते हैं

उन्होंने कहा कि इन्हें सत्ता का बहुत अहंकार हो गया है। पावर का नशा हो गया है। ये किसी को कुछ नहीं समझते हैं। किसी को भी धमकी देते रहते हैं। जजों, मीडिया वालों, नेताओं, व्यापारियों, उद्योगपतियों सबको धमकी देते फिरते हैं कि हमारी बात मानो, नहीं तो जेल में डाल देंगे। सबको जेल भेजने की धमकी देते हैं। मैं अपने देश से बहुत प्यार करता हूं। अपनी भारत मां से बे-इंतहां मुहब्बत करता हूं। अपने मुल्क के लिए जान भी दे सकता हूं। 


Womens World Boxing Championships: बॉक्सर नीतू घनघास ने रचा इतिहास

Nitu Ghanghas won Gold in Womens World Boxing Championships

भारतीय मुक्केबाज नीतू घनघास ने Womens World Boxing Championships में अपना परचम लहराते हुए गोल्ड मैडल पर कब्जा जमाया. नीतू घनघास (48 किग्रा) ने  मंगोलिया की अल्तानसेत्सेग को हराकर विश्व चैंपियनशिप का खिताब अपने नाम किया राष्ट्रमंडल खेलों (Commonwealth Games) की स्वर्ण पदक विजेता नीतू घनघास (48 किग्रा) ने मंगोलिया की अल्तानसेत्सेग को एकतरफ़ा मुकाबले में 5-0 से हराया।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले शनिवार को नीतू घनघास (Nitu Ghanghas) ने सेमीफाइनल मैच में कजाकिस्तान की बॉक्सर को हराया था।

इसके पहले छह बार की चैंपियन रहने वाले बॉक्सर है. 

  1. मैरी कॉम (2002, 2005, 2006, 2008, 2010 और 2018), 
  2. सरिता देवी (2006), 
  3. जेनी आरएल (2006),
  4.  लेखा केसी (2006), 
  5. निखत ज़रीन (2022), 
  6. नीतू (2023)   

प्रधानमंत्री ने नीतू घनघास को दी बधाई

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने महिला मुक्‍केबाजी विश्‍व चैंपियनशिप में स्‍वर्ण पदक जीतने पर नीतू घनघास को बधाई दी है।

प्रधानमंत्री ने ट्वीट किया:

“हार्दिक बधाई

@NituGhanghas333 को महिला मुक्केबाजी विश्व चैंपियनशिप में प्रतिष्ठित स्वर्ण पदक जीतने पर। भारत उनकी इस उल्लेखनीय उपलब्धि से गौरान्वित है।”

इस जीत के साथ, 2022 स्ट्रैंड्जा मेमोरियल स्वर्ण पदक विजेता नीतू विश्व चैंपियन बनने वाली छठी भारतीय मुक्केबाज बन गईं।

नीतू हरियाणा के भिवानी के गांव धनाना से सम्बन्ध रखती हैं.नीतू ने अपना बॉक्सिंग का करियर साल 2012 में शुरू किया था.


लोक सभा में प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का मूल पाठ

PM Reply to the Motion of Thanks on the President's Address in the Lok Sabha

आदरणीय अध्यक्ष जी,
सबसे पहले मैं राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर धन्यवाद करता हूं और ये मेरा सौभाग्य रहा है कि मुझे पहले भी कई बार राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर धन्यवाद करने का अवसर मिला है। लेकिन इस बार मैं धन्यवाद के साथ-साथ राष्ट्रपति महोदया जी का अभिनंदन भी करना चाहता हूं। अपनी विजनरी भाषण में राष्ट्रपति जी ने हम सबका और करोड़ो देशवासियों का मार्गदर्शन किया है। गणतंत्र के मुखिया रूप में उनकी उपस्थिति ऐतिहासिक भी है और देश की कोटि-कोटि बहन-बेटियों के लिए बहुत बड़ा प्रेरणा का अवसर भी है।

आदरणीय राष्ट्रपति महोदया ने आदिवासी समाज का गौरव तो बढ़ाया ही है लेकिन आज आजादी के इतने सालों के बाद आदिवासी समाज में जो गौरव की अनुभूति हो रही है, उनका जो आत्मविश्वास बढ़ा है और इसके लिए ये सदन भी और देश भी उनका आभारी होगा। राष्ट्रपति जी के भाषण में ‘संकल्प से सिद्धि तक यात्रा का बहुत बढ़िया तरीके से एक खाका खींचा गया एक प्रकार से देश को अकाउंट भी दिया गया, इंस्पिरेशन भी दिया गया है।

आदरणीय अध्यक्ष जी यहां पर सभी माननीय सदस्यों ने इस चर्चा में हिस्सा लिया, हर किसी ने अपने-अपने आंकड़े दिए, अपने-अपने तर्क दिए और अपनी रुचि, प्रवृत्ति के अनुसार सबने अपनी बातें रखी और जब इन बातों को गौर से सुनते हैं, उसे समझने का जब प्रयास करते हैं तो ये भी ध्यान में आता है कि किसकी कितनी क्षमता है, किसकी कितनी योग्यता है, किसकी कितनी समझ है और किसका क्या इरादा है। ये सारी बातें प्रकट होती ही हैं। और देश भली-भांति तरीके से उसका मूल्यांकन भी करता है। मैं चर्चा में शामिल सभी माननीय सदस्यों का ह्दय से आभार व्यक्त करता हूं। लेकिन मैं देख रहा था कल कुछ लोगों के भाषण के बाद पूरा Ecosystem, समर्थक उछल रहा था और कुछ लोग तो खुश होकर के कह रहे थे, ये हुई न बात। बड़ा शायद नींद भी अच्छी आई होगी, शायद आज उठ भी नहीं पाए होंगे। और ऐसे लोगों के लिए कहा गया है, बहुत अच्छे ढंग से कहा गया है-

ये कह-कहकर हम दिल को बहला रहे हैं,

ये कह-कहकर के हम दिल को बहला रहे हैं, वो अब चल चुके हैं,

वो अब चल चुके हैं, वो अब आ रहे हैं।

माननीय अध्यक्ष जी,

जब राष्ट्रपति जी का भाषण हो रहा था, कुछ लोग कन्नी भी काट गए और एक बड़े नेता महामहिम राष्ट्रपति जी का अपमान भी कर चुके हैं। जनजातीय समुदाय के प्रति नफरत भी दिखाई दी है और हमारे जनजातीय समाज के प्रति उनकी सोच क्या है। लेकिन जब इस प्रकार की बातें टीवी के सामने कही गई तो भीतर पड़ा हुआ जो नफरत का भाव था जो सच वो बाहर आकर ही रहा गया। ये खुशी है, ठीक है बाद में चिट्ठी लिखकर के बचने की कोशिश तो की गई है।

माननीय अध्यक्ष जी।

जब राष्ट्रपति जी के भाषण पर चर्चा मैं सुन रहा था, तो मुझे लगा कि बहुत सी बातों को मौन रहकर भी स्वीकार किया गया है। यानी एक प्रकार से सबके भाषण में सुनता था, तब लगा कि राष्ट्रपति जी के भाषण के प्रति किसी को एतराज नहीं है, किसी ने उसकी आलोचना नहीं की। भाषण की हर बात, अब देखिए क्या कहा है राष्ट्रपति जी ने मैं उन्हीं के शब्द को क्वोट करता हूं। राष्ट्रपति जी ने अपने भाषण में कहा था, जो भारत कभी अपनी अधिकांश समस्याओं के समाधान के लिए दूसरों पर निर्भर था, वही आज दुनिया की समस्याओं के समाधान का माध्यम बन रहा है। राष्ट्रपति जी ने यह भी कहा था, जिन मूल सुविधाओं के लिए देश की एक बड़ी आबादी ने दशकों तक इंतजार किया, वे इन वर्षों में उसे मिली है। बड़े-बड़े घोटालों, सरकारी योजनाओं में भ्रष्ट्राचार की जिन समस्याओं से देश मुक्ति चाहता था, वह मुक्ति अब देश को मिल रही है। पॉलिसी-पैरालिसिस की चर्चा से बाहर आकर आज देश और देश की पहचान, तेज विकास और दूरगामी दृष्टि से लिए गए फैसलों के लिए हो रही है। ये पैराग्राफ जो मैं पढ़ रहा हूं वो राष्ट्रपति जी भाषण के पैराग्राफ को मैं क्वोट कर रहा हूं। और मुझे आशंका था कि ऐसी-ऐसी बातों पर यहां जरूर एतराज करने वाले तो कुछ लोग निकलेंगे, वो विरोध करेंगे कि ऐसा कैसे बोल सकते हैं राष्ट्रपति जी। लेकिन मुझे खुशी है किसी ने विरोध नहीं किया सबने स्वीकार किया, सबने स्वीकार किया। और माननीय अध्यक्ष जी मैं 140 करोड़ देशवासियों का आभारी हूं कि सबके प्रयास के परिणाम आज इन सारी बातों को पूरे सदन में स्वीकृति मिली है। इससे बड़ा गौरव का विषय क्या होगा।

आदरणीय अध्यक्ष जी। सदन में हंसी-मजाक, टीका-टिप्पणी, नोक-झोंक ये तो होता रहता है। लेकिन ये नहीं भूलना चाहिए कि आज राष्ट्र के रूप में गौरवपूर्ण अवसर हमारे सामने खड़े हैं, गौरव के क्षण हम जी रहे हैं। राष्ट्रपति जी के पूरे भाषण में जो बातें हैं वो 140 करोड़ देशवासियों के सेलिब्रेशन का अवसर है, देश ने सेलिब्रेट किया है।

माननीय अध्यक्ष जी। 100 साल में आई हुई ये भयंकर बीमारी, महामारी दूसरी तरफ युद्ध की स्थिति, बंटा हुआ विश्व इस स्थिति में भी, इस संकट के माहौल में भी देश को जिस प्रकार से संभाला गया है, देश जिस प्रकार से संभला है इससे पूरा देश आत्मविश्वास से भर रहा है, गौरव से भर रहा है।

आदरणीय अध्यक्ष जी। चुनौतियों के बिना जीवन नहीं होता है, चुनौतियां तो आती हैं। लेकिन चुनौतियों से ज्यादा सामर्थ्यवान है 140 करोड़ देशवासियों का जज्बा। 140 करोड़ देशवासियों का सामर्थ्य चुनौतियों से भी ज्यादा मजबूत है, बड़ा है और सामर्थ्य से भरा हुआ है। इतनी बड़ी भयंकर महामारी, बंटा हुआ विश्व युद्ध के कारण हो रहे विनाश, अनेकों देशों में अस्थिरता का माहौल है। कई देशों में भीषण महंगाई है, बेरोजगारी, खाने-पीने का संकट और हमारे अड़ोस-पड़ोस में भी जिस प्रकार से हालत बनी हुई है, ऐसी स्थिति में माननीय अध्यक्ष जी कौन हिन्दुस्तानी इस बात पर गर्व नहीं करेगा कि ऐसे समय में भी देश दुनिया की 5वीं बड़ी अर्थव्यवस्था बना है। आज पूरे विश्व में भारत को लेकर के पॉजिटिविटी है, एक आशा है, भरोसा है। और माननीय अध्यक्ष जी ये भी खुशी की बात है कि आज भारत को विश्व के समृद्ध देश ऐसे जी-20 समूह की अध्यक्षता का अवसर भी मिला है।

ये देश के लिए गर्व की बात है। 140 करोड़ देशवासियों के लिए गौरव की बात है। लेकिन मुझे लगता है, पहले मुझे नहीं लगता था, लेकिन अभी लग रहा है शायद इससे भी कुछ लोगों को दुख हो रहा है। 140 करोड़ देशवासियों में किसी को दुख नहीं हो सकता है। वो आत्मनिरीक्षण करें वो कौन लोग हैं जिसको इसका भी दु:ख हो रहा है।

माननीय अध्यक्ष जी,

आज दुनिया की हर विश्वसनीय संस्था, सारे एक्सपर्ट्स जो वैश्विक प्रभावों को बहुत गहराई से अध्ययन करते हैं। जो भविष्य का अच्छे से अनुमान भी लगा सकते हैं। उन सबको आज भारत के प्रति बहुत आशा है, विश्वास है और बहुत एक मात्रा में उमंग भी है। और आखिर ये सब क्यों? ऐसे ही तो नहीं है। आज पूरी दुनिया भारत की तरफ इस प्रकार से बड़ी आशा की नजरों से क्यों देख रही है। इसके पीछे कारण है। इसका उत्तर छिपा है भारत में आई स्थिरता में, भारत की वैश्विक साख में, भारत के बढ़ते सामर्थ्य में और भारत में बन रही नई संभावनाओं में है।

माननीय अध्यक्ष जी,

हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में जो बातें हो रही हैं। उसी को मैं अगर शब्दबद्ध करूं और कुछ बातें उदाहरण से समझाने की कोशिश करुं। अब आप देखिए भारत में एक दो तीन दशक अस्थिरता के रहे हैं। आज स्थिरता है, political stability है, Stable Government भी है और Decisive Government है, और उसका भरोसा स्वाभाविक होता है। एक निर्णायक सरकार, एक पूर्ण बहुमत से चलने वाली सरकार वो राष्ट्र हित में फैसले लेने का सामर्थ्य रखती है। और ये वो सरकार है Reform out of compulsion नहीं Reform out of conviction हो रही है। और हम इस मार्ग पर हटने वाले नहीं है चलते रहेंगे। देश को समय की मांग के अनुसार जो चाहिए वो देते रहेंगे।

माननीय अध्यक्ष जी,

एक और उदाहरण की तरफ मैं जाना चाहूंगा। इस कोरोना काल में मेड इन इंडिया वैक्सीन तैयार हुई। भारत ने दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीनेशन अभियान चलाया और इतना ही नहीं अपने करोड़ों नागरिकों को मुफ्त वैक्सीन के टीके लगाए। इतना ही नहीं 150 से ज्यादा देशों को इस संकट के समय हमने जहां जरूरत थी, वहां दवाई पहुंचाई, जहां जरूरत थी, वहां वैक्सीन पहुंचाई। और आज विश्व के कई देश हैं, जो भारत के विषय में इस बात पर बड़े गौरव से विश्व के मंच पर धन्यवाद करते हैं, भारत का गौरव गान करते हैं। उसी प्रकार से तीसरे एक पहलू की तरफ ध्यान दें। इसी संकट काल में आज भारत का digital infrastructure जिस तेजी से digital infrastructure ने अपनी ताकत दिखाई है। एक आधुनिकता की तरफ बदलाव किया है। पूरा विश्व इसका अध्ययन कर रहा है। मैं पिछले दिनों जी-20 समिट में बाली में था। Digital India की चारों तरफ वाहवाही हो रही थी। और बहुत curiosity थी कि देश कैसे कर रहा है? कोरोना काल में दुनिया के बड़े-बड़े देश, समृद्ध देश अपने नागरिकों को आर्थिक मदद पहुंचाना चाहते थे। नोटें छापते थे, बांटते थे, लेकिन बांट नहीं पाते थे। ये देश है जो एक फ्रिक्शन ऑफ सेकंड में लाखों करोड़ों रुपये देशवासियों के खाते में जमा करवा देता है। हजारों करोड़ रुपये ट्रांसफर हो जाते हैं। एक समय था, छोटी-छोटी टेक्नोलॉजी के लिए देश तरसता था। आज देश में बहुत बड़ा फर्क महसूस हो रहा है। टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में देश बड़ी ताकत के साथ आगे बढ़ रहा है। CoWin दुनिया के लोग अपने वैक्सीनेशन का सर्टिफिकेट भी दे नहीं पाते थे जी। आज वैक्सीन का हमारे मोबाइल फोन पर हमारा सर्टिफिकेट दूसरी सेकंड पर अवेलेबल है। ये ताकत हमनें दिखाई है।

माननीय अध्यक्ष जी,

भारत में नई संभावनाएं हैं। दुनिया को सशक्त value और supply chain उसमें आज पूरी दुनिया ने इस कोरोना कालखंड ने supply chain के मुद्दे पर दुनिया को हिला कर रख दिया है। आज भारत उस कमी को पूरा करने की ताकत के साथ आगे बढ़ रहा है। कईयों को ये बात समझने में बहुत देर लग जाएगी, अध्यक्ष जी। भारत आज इसी दिशा में एक manufacturing hub के रूप में उभर रहा है और दुनिया भारत की इस समृद्धि में अपनी समृद्धि देख रही है।

माननीय अध्यक्ष जी,

निराशा में डूबे हुए कुछ लोग इस देश की प्रगति को स्वीकार ही नहीं कर पा रहे हैं। उन्हें भारत के लोगों की उपलब्धियां नहीं दिखती है। अरे 140 करोड़ देशवासियों के पुरुषार्थों पर आस्था का परिणाम है, जिसके कारण आज दुनिया में डंका बजना शुरू हुआ है। उन्हें भारत के लोगों के पुरुषार्थ परिश्रम से प्राप्त उपलब्धियां उनको नजर नहीं आ रही है।

माननीय अध्यक्ष जी,

पिछले 9 वर्ष में भारत में 90 हजार स्टार्टअप्स और आज स्टार्टअप्स की दुनिया में हम दुनिया में तीसरे नंबर पर पहुंच चुके हैं। एक बहुत बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम आज देश के Tier 2, Tier 3 cities में भी पहुंच चुका है। हिन्दुस्तान के हर कोने में पहुंचा है। भारत के युवा सामर्थ्य की पहचान बनता जा रहा है।

माननीय अध्यक्ष जी,

इतने कम समय में और कोरोना के विकट कालखंड में 108 यूनिकॉर्न बने हैं। और एक यूनिकॉर्न का मतलब होता है, उसकी वैल्यू 6-7 हजार करोड़ से ज्यादा होती है। ये इस देश के नौजवानों ने करके दिखाया है।

माननीय अध्यक्ष जी,

आज भारत दुनिया में mobile manufacturing में दुनिया में दूसरे बड़ा देश बन गया है। घरेलू विमान यात्री domestic Air Traffic पर हैं। आज विश्व में हम तीसरे नंबर पर पहुंच चुके हैं। Energy Consumption को प्रगति का एक मानदंड माना जाता है। आज भारत Energy consumption में दुनिया में consumer के रूप में तीसरे नंबर पर हम पहुंच चुके हैं। Renewable Energy की capacity में हम दुनिया में चौथे नंबर पर पहुंच चुके हैं। स्पोर्ट्स कभी हमारी कोई पूछ नहीं होती थी, कोई पूछता नहीं था। आज स्पोर्ट्स की दुनिया में हर स्तर पर भारत की खिलाड़ी अपना रुतबा दिखा रहे हैं। अपना सामर्थ्य दिखा रहे हैं।

Education समेत हर क्षेत्र में आज भारत आगे बढ़ रहा है। पहली बार माननीय अध्यक्ष जी, गर्व होगा, पहली बार higher education में enrolment वालों की संख्या चार करोड़ से ज्यादा हो गई है। इतना ही नहीं, बेटियों की भी भागीदारी बराबर होती जा रही है। देश में इंजीनियरिंग हो, मेडिकल कॉलेज हो, professional colleges हों उसकी संख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है। स्पोर्ट्स के अंदर भारत का परचम ओलंपिक हो, कॉमनवेल्थ हो, हर जगह पर हमारे बेटे, हमारी बेटियों ने शानदार प्रदर्शन किया है। 

माननीय अध्यक्ष जी,

किसी भी भारतीय को ऐसी अनेक बातें मैं गिना सकता हूँ। राष्ट्रपति जी ने अपने भाषण में कई बातें कही हैं। देश में हर स्तर पर, हर क्षेत्र में, हर सोच में, आशा ही आशा नजर आ रही है। एक विश्वास से भरा हुआ देश है। सपने और संकल्प लेकर के चलने वाला देश है। लेकिन यहाँ कुछ लोग ऐसे निराशा में डूबे हैं, काका हाथरसी ने एक बड़ी मजेदार बात कही थी। काका हाथरसी ने कहा था-

'आगा-पीछा देखकर क्यों होते गमगीन, जैसी जिसकी भावना वैसा दीखे सीन'।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

आखिर ये निराशा भी ऐसी नहीं आई है, इसके पीछे एक कारण है। एक तो जनता का हुकुम, बार-बार हुकुम, लेकिन साथ-साथ इस निराशा के पीछे जो अंतर्मन में पड़ी हुई चीज़ है, जो चैन से सोने नहीं देती है, वो क्या है, पिछले 10 साल में, 2014 के पहले 2004 से 2014, भारत की अर्थव्यवस्था खस्ताहाल हो गई। निराशा नहीं होगी तो क्या होगा? 10 साल में महंगाई डबल डिजिट रही, और इसलिए कुछ अगर अच्छा होता है तो निराशा और उभर करके आती है और जिन्होंने बेरोजगारी दूर करने के वादे किए थे।

माननीय अध्यक्ष जी,

एक बार जंगल में दो नौजवान शिकार करने के लिए गए और वो गाड़ी में अपनी बंदूक-वंदूक नीचे उतार करके थोड़ा टहलने लगे। उन्होंने सोचा कि थोड़ा अभी आगे चलना है तो थोड़ा हाथ-पैर ठीक कर लें। लेकिन गए थे तो बाघ का शिकार करने के लिए और उन्होंने देखा कि आगे जाएंगे तो बाघ मिलेगा। लेकिन हुआ ये कि वहीं पर बाघ दिखाई दिया, अभी नीचे उतरे थे। अपनी गाड़ी में बंदूक-वंदूक वहीं पड़ी थी। बाघ दिखा, अब करें क्या? तो उन्होंने licence दिखाया कि मेरे पास बंदूक का licence है। इन्होंने भी बेरोजगारी दूर करने के नाम पर कानून दिखाया कि कानून बना दिया है जी। अरे देखो, कानून बना दिया है। यही इनके तरीके हैं, पल्ला झाड़ दिया। 2004 से 2014, आजादी के इतिहास में सबसे घोटालों का दशक रहा, सबसे घोटालों का। वही 10 साल, UPA के वो 10 साल, कश्मीर से कन्याकुमारी, भारत के हर कोने में आतंकवादी हमलों का सिलसिला चलता रहा, 10 साल। हर नागरिक असुरक्षित था, चारों तरफ यही सूचना रहती थी कि कोई अंजानी चीज़ को हाथ मत लगाना। अंजानी चीज़ से दूर रहना, वहीं खबरें रहती थी। 10 साल में जम्मू-कश्मीर से लेकर नॉर्थ ईस्ट तक हिंसा ही हिंसा देश उनका शिकार हो गया था। उन 10 साल में, भारत की आवाज ग्लोबल प्लैटफॉर्म पर इतनी कमजोर थी कि दुनिया सुनने तक तैयार नहीं थी।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

इनकी निराशा का कारण ये भी है आज जब देश की क्षमता का परिचय हो रहा है, 140 करोड़ देशवासियों का सामर्थ्य खिल रहा है, खुलकर के सामने आ रहा है। लेकिन देश का सामर्थ्य तो पहले भी था। लेकिन 2004 से लेकर के 2014 तक इन्होंने वो अवसर गंवा दिया। और UPA की पहचान बन गई हर मौके को मुसीबत में पलट दिया। जब technology information का युग बड़ी तेजी से बढ़ रहा था, उछल रहा था, उसी समय ये 2जी में फंसे रहे, मौका मुसीबत में। सिविल न्यूक्लियर डील हुआ, जब सिविल न्यूक्लियर डील की चर्चा थी, तब ये कैश फॉर वोट में फंसे रहे। ये खेल चले।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

2010 में, कॉमनवेल्थ गेम्स हुए, भारत को दुनिया के सामने, भारत के युवा सामर्थ्य को प्रस्तुत करना एक बहुत बड़ा अवसर था। लेकिन फिर मौका मुसीबत में और CWG घोटाले में पूरा देश दुनिया में बदनाम हो गया।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

ऊर्जा का किसी भी देश के विकास में अपना एक महात्म्य होता है। और जब दुनिया में भारत की ऊर्जा शक्ति के उभार की दिशा में चर्चा की जरूरत थी, इस सदी के दूसरे दशक में हिन्‍दुस्‍तान की चर्चा ब्लैकआउट के नाते हुई। पूरे विश्व में ब्लैकआउट के वो दिन चर्चा के केंद्र में आ गए। कोयला घोटाला चर्चा में आ गया।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

देश पर इतने आतंकी हमले हुए। 2008 के हमलों को कोई भूल नहीं सकता है। लेकिन आतंकवाद पर सीना तानकर आंख में आंख मिलाकर के हमले करने का सामर्थ्य नहीं था, उसकी चुनौती को चुनौती देने की ताकत नहीं थी और उसके कारण आतंकवादियों के हौसले बुलंद होते गए, और पूरे देश में दस साल तक खून बहता रहा, मेरे देश के निर्दोष लोगों का, वो दिन रहे थे।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

जब एलओसी, एलएसी भारत के सामर्थ्य की ताकत का अवसर रहता था, उस समय डिफेंस डील को ले करके हेलिकॉप्टर घोटाले, और सत्ता को कंट्रोल करने वाले लोगों के नाम उसमें चिह्नित हो गए।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

जब देश के लिए जरूरत थी और निराशा के मूल में ये चीजें पड़ी हुई हैं, सब उभर करके आ रहा है।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

इस बात को हिंदुस्तान हर पल याद रखेगा कि 2014 के पहले का जो दशक था, The Lost Decade के रूप में जाना जाएगा और इस बात को इंकार नहीं कर सकते कि 2030 का जो दशक है, ये India's Decade है पूरे विश्व के लिए।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

लोकतंत्र में आलोचना का बहुत महत्व मैं मानता हूं। और मैं हमेशा मानता हूं कि भारत जो कि Mother of democracy है, सदियों से हमारे यहां लोकतंत्र हमारी रंगों में पनपा हुआ है। और इसलिए मैं हमेशा मानता हूं कि आलोचना एक प्रकार से लोकतंत्र की मजबूती के लिए, लोकतंत्र के संवर्धन के लिए, लोकतंत्र के स्पिरिट के लिए, आलोचना एक शुद्धि यग्न है। उस रूप में हम आलोचना को देखने वाले हैं। लेकिन दुर्भाग्य से बहुत दिनों से मैं इंतजार कर रहा हूं कोई तो मेहनत करके आएगा, कोई तो एनालिसिस करे तो कोई आलोचना करेगा ताकि देश को कुछ लाभ हो। लेकिन 9 साल आलोचना ने आरोपों में गंवा दिए इन्होंने। सिवाय आरोप, गाली-गलौच, कुछ भी बोल दो, इसके सिवाय कुछ नहीं किया। गलत आरोप और हाल ये चुनाव हार जाओ-ईवीएम खराब, दे दो गाली, चुनाव हार जाओ-चुनाव आयोग को गाली दे दो, क्या तरीका है। अगर कोर्ट में फैसला पक्ष में नहीं आया तो सुप्रीम कोर्ट को गाली दे दो, उसकी आलोचना कर दो।

माननीय अध्यक्ष जी,

अगर भ्रष्टाचार की जांच हो रही है तो जांच एजेंसियों को गाली दो। अगर सेना पराक्रम करे, सेना अपना शौर्य दिखाए और वो narrative देश के जन-जन के अंदर एक नया विश्वास पैदा करें तो सेना की आलोचना करो, सेना को गाली दो, सेना पर आरोप करो।

कभी आर्थिक, देश की प्रगति की खबरें आएं, आर्थिक प्रगति की चर्चा हो, विश्व के सारे संस्थान भारत का आर्थिक गौरवगान करें तो यहां से निकलो, आरबीआई को गाली दो, भारत के आर्थिक संस्‍थानों को गाली दो।

माननीय अध्यक्ष जी,

पिछले नौ साल हमने देखा है कुछ लोगों की bankruptcy को देखा है। एक constructive criticism की जगह compulsive critics ने ले ली है और compulsive critics इसी में डूबे हुए हैं, खोए हुए हैं।

माननीय अध्यक्ष जी,

सदन में भ्रष्टाचार की जांच करने वाली एजेंसियों के बारे में बहुत कुछ कहा गया और मैंने देखा कि बहुत सारे विपक्ष के लोग इस विषय में सुर में सुर मिला रहे थे। मिले मेरा-तेरा सुर।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

मुझे लगता था देश की जनता देश के चुनाव के नतीजें ऐसे लोगों को जरूर एक मंच पर लाएंगे। लेकिन वो तो हुआ नहीं, लेकिन इन लोगों को ईडी का धन्यवाद करना चाहिए कि ईडी के कारण ये लोग एक मंच पर आए हैं। ईडी ने इन लोगों को एक मंच पर ला दिया है और इसलिए जो काम देश के मतदाता नहीं कर पाए।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

मैं कई बार सुन रहा हूँ, यहां कुछ लोगों को Harvard Study का बड़ा क्रेज है। कोरोना काल में ऐसा ही कहा गया था और कांग्रेस ने कहा था कि भारत की बर्बादी पर Harvard में Case Study होगी, ऐसा कहा था और कल फिर सदन में Harvard University में Study की बात कल फिर हुई, लेकिन माननीय अध्यक्ष जी बीते वर्षों में Harvard में एक बहुत बढ़िया Study हुई है, बहुत important study हुई है। और वो स्‍टडी है, उसका टॉपिक क्‍या था मैं जरूर सदन को बताना चाहूंगा और ये स्‍टडी हो चुकी है। स्‍टडी है The Rise and Decline of India’s Congress Party, ये स्‍टडी हो चुका है और मुझे विश्वास है अध्यक्ष जी, मुझे विश्वास है भविष्य में कांग्रेस की बर्बादी पर सिर्फ Harvard नहीं, बड़े-बड़े विश्वविद्यालयों में अध्ययन होना ही होना है और डूबाने वाले लोगों पर भी होने वाला है।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

इस प्रकार के लोगों के लिए दुष्यंत कुमार ने बहुत बढ़िया बात कही है और दुष्यंत कुमार ने जो कहा है बहुत फिट बैठता है उन्होंने कहा है:-

‘तुम्हारे पाँव के नीचे, कोई जमीन नहीं,

कमाल ये है कि फिर भी तुम्हें यकीन नहीं’।

आदरणीय अध्यक्ष जी

ये लोग बिना सिर-पैर की बात करने के आदी होने के कारण उनको ये भी याद नहीं रहता है वो खुद का कितना contradiction करते हैं। कभी एक बात-कभी दूसरी बात, कभी एक तरफ, कभी दूसरी तरफ हो सकता है वो आत्मचिंतन करके खुद के अंदर जो विरोधाभास है उसको भी तो ठीक करेंगे। अब 2014 से ये लगातार कोस रहे हैं हर मौके पर कोस रहे हैं भारत कमजोर हो रहा है, भारत की कोई सुनने को तैयार नहीं है, भारत का दुनिया में कोई वजूद ही नहीं रहा न जाने क्या- क्या कहा और अब क्या कह रहे हैं। अब कह रहे हैं कि भारत इतना मजबूत हो गया है कि दूसरे देशों को धमकाकर फैसले करवा रहा है। अरे पहले यह तो तय करो भई कि भारत कमजोर हुआ है कि मजबूत हुआ है।

माननीय अध्यक्ष जी

कोई भी जीवंत संगठन होता है, अगर जीवंत व्यवस्था होती है जो जमीन से जुड़ी हुई व्यवस्था होती है वे जनता-जनार्दन में क्या चलता है लोगों के अंदर उसका चिंतन करता है, उससे कुछ सीखने की कोशिश करता है और अपनी राह भी समय रहते हुए बदलता रहता है। लेकिन जो अहंकार में डूबे होते है, जो बस सब कुछ हम ही को ज्ञान है सब कुछ हमारा ही सही है ऐसी जो सोच में जीते हैं, उनको लगता है कि मोदी को गाली देकर ही हमारा रास्ता निकलेगा। मोदी पर झूठे अनाप-शनाप कीचड़ निकालकर ही रास्ता निकलेगा। अब 22 साल बीत गए वो गलतफहमी पालकर के बैठे हुए है।

आदरणीय अध्यक्ष जी

मोदी पे भरोसा अखबार की सुर्खियों से पैदा नहीं हुआ है। मोदी पे ये भरोसा टीवी पर चमकते चेहरों से नहीं हुआ है। जीवन खपा दिया है पल-पल खपा दिए है। देश के लोगों के लिए खपा दिए हैं, देश के उज्जवल भविष्य के लिए खपा दिए है।  

आदरणीय अध्यक्ष जी

जो देशवासियों का मोदी पर भरोसा है, ये इनकी समझ के दायरे से बाहर है और समझ के दायरे से भी काफी ऊपर है। क्या ये झूठे आरोप लगाने वालों पर मुफ्त राशन प्राप्त करने वाले मेरे देश के 80 करोड़ देशवासी क्या कभी उन पर भरोसा करेंगे क्या।

आदरणीय अध्यक्ष जी

वन नेशन वन राशन कार्ड देशभर में कहीं पर भी गरीब से गरीब को भी अब राशन मिल जाता है। वो आपकी झूठी बातों पर, आपके गलत गलीच आरोपों पर कैसे भरोसा करेगा।

आदरणीय अध्यक्ष जी

जिस किसान के खाते में साल में 3 बार पीएम किसान सम्मान निधि के 11 करोड़ किसानों के खाते में पैसे जमा होते हैं, वो आपकी गालियां, आपके झूठे आरोपों पर विश्वास कैसे करेगा।

आदरणीय अध्यक्ष जी

जो कल फुटपाथ पर जिंदगी जीने के लिए मजबूर थे, जो झुग्गी-झोपड़ी में जिंदगी बसर करते थे, ऐसे 3 करोड़ से ज्यादा लोगों को पक्के घर मिले हैं उनको तुम्हारी ये गालियां, ये तुम्हारी झूठी बातें क्यों वो भरोसा करेगा अध्यक्ष जी।

आदरणीय अध्यक्ष जी

9 करोड़ लोगों को मुफ्त गैस के कनेक्शन मिला है वो आपके झूठ को कैसे स्वीकार करेगा। 11 करोड़ बहनों को इज्जत घर मिला है, शौचालय मिला है वो आपके झूठ को कैसे स्वीकार करेगा।

आदरणीय अध्यक्ष जी

आजादी के 75 साल बीत गए 8 करोड़ परिवारों को आज नल से जल मिला है, वो माताएं तुम्हारे झूठ को कैसे स्वीकार करेगी, तुम्हारी गलतियों को, गालियों को कैसे स्वीकार करेगी। आयुष्मान भारत योजना से 2 करोड़ परिवारों को मदद पहुंची है जिंदगी बच गई है उनकी मुसीबत के समय मोदी काम आया है, तुम्हारी गालियों को वो कैसे स्वीकार करेगा, कैसे स्वीकार करेगा।

आदरणीय अध्यक्ष जी

आपकी गालियां, आपके आरोपों को इन कोटि-कोटि भारतीयों से होकर के गुजरना पड़ेगा, जिनको दशकों तक मुसीबतों में जिंदगी जीने के लिए तुमने मजबूर किया था।

आदरणीय अध्यक्ष जी

कुछ लोग अपने लिए, अपने परिवार के लिए बहुत कुछ तबाह करने पर लगे हुए हैं। अपने लिए, अपने परिवार के लिए जी रहे हैं मोदी तो 25 करोड़ देशवासियों के परिवार का सदस्य है।

आदरणीय अध्यक्ष जी

140 करोड़ देशवासियों के आशीर्वाद ये मेरा सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है। और गालियों के शस्त्र से, झूठ के शस्त्र-अस्त्रों से इस सुरक्षा कवच को तुम कभी भेद नहीं सकते हो। वो विश्वास का सुरक्षा कवच है और इन शस्त्रों से तुम कभी भेद नहीं सकते हो।

आदरणीय अध्यक्ष जी

हमारी सरकार कुछ बातों के लिए प्रतिबद्ध है। समाज के वंचित वर्ग को वरीयता उस संकल्प को लेकर के हम जी रहे हैं, उस संकल्प को लेकर के चल रहे हैं। दशकों तक दलित, पिछड़े, आदिवासी जिस हालत में उनको छोड़ दिया गया था। वो सुधार नहीं आया जो संविधान निर्माताओं ने सोचा था। जो संविधान निर्माताओं ने निर्दिष्ट किया था। 2014 के बाद गरीब कल्याण योजनाओं का सर्वाधिक लाभ मेरे इन्ही परिवारों को मिला है। दलित, पिछड़ों, आदिवासी की बस्तियों में पहली बार माननीय अध्यक्ष जी पहली बार बिजली पहुंची है। मीलों तक पानी के लिए जाना पड़ता था। पहली बार नल से जल पहुंच रहा है। इन परिवारों में पहुंच रहा है माननीय अध्यक्ष जी। अनेक परिवार, कोटि-कोटि परिवार पहली बार पक्के घर में आज जा पाए हैं। वहां रह पाए हैं।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

जो बस्तियां आपने छोड़ दी थी। आपके लिए चुनाव के समय ही जिसकी याद आती थी। आज सड़क हो, बिजली हो, पानी हो, इतना ही नहीं 4जी कनेक्टिविटी भी वहां पहुंच रही है।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

पूरा देश गौरव कर रहा है। आज एक आदिवासी राष्ट्रपति के रूप में जब देखते हैं। पूरा देश गौरवगान कर रहा है। आज देश में आधी जाति समूह के नर-नारी जिन्होंने मातृभूमि के लिए जीवन तर्पण कर दिए। आजादी के जंग का नेतृत्व किया उनका पुण्य स्मरण आज हो रहा है और हमारे आदिवासियों का गौरव दिवस मनाया जा रहा है। और हमें गर्व है कि ऐसी महान हमारी आदिवासी परंपरा के प्रतिनिधि के रूप में एक महिला देश का नेतृत्व कर रही है, राष्ट्रपति के रूप में काम कर रही है। हमने उनका हक दिया है।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

हम पहली बार देख रहे हैं। एक बात ये भी सही है। हम सबका समान अनुभव है सिर्फ मेरी ही है ऐसा नहीं है आपका भी है। हम सब जानते हैं कि जब मां सशक्त होती है, तो पूरा परिवार सशक्त होता है। परिवार सशक्त होता है तो समाज सशक्त होता है और तभी जाकर के देश सशक्त होता है। और मुझे संतोष है कि माताएं, बहनों, बेटियों की सबसे ज्यादा सेवा करने का सौभाग्य हमारी सरकार को मिला है। हर छोटी मुसीबत को दूर करने का प्रामाणिक पूर्वक प्रयास किया है। बड़ी संवेदनशीलता के साथ उस पर हमने ध्यान केंद्रित किया है।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

कभी-कभी मजाक उड़ाया जा रहा है। ऐसा कैसा प्रधानमंत्री है। लाल किले पर से टॉयलेट की बात करता है। बड़ा मजाक उड़ाया गया। आदरणीय अध्यक्ष जी, ये टॉयलेट, ये इज्जत घर, ये मेरी इन माताओं-बहनों की क्षमता, उनकी सुविधा, उनका सुरक्षा का सम्मान करने वाली बात है। इतना ही नहीं माननीय अध्यक्ष जी, जब मैं सेनेटरी पैड की बात करता हूं तो लोगों को लगता है अरे प्रधानमंत्री ऐसे विषयों में क्यों जाते हैं।

माननीय अध्यक्ष जी,

सेनेटरी पैड के अभाव में गरीब बहन-बेटियां क्या अपमान सहती थीं, बीमारियों का शिकार हो जाती थीं। माताओं-बहनों को धुएं में दिन के कई घंटे बिताने पड़ते थे। उनका जीवन धुएं में फंसा रहता था, उससे मुक्ति दिलाने का काम उन गरीब माताओं-बहनों के लिए यह सौभाग्य हमें मिला है। जिंदगी खप जाती थी। आधा समय पानी के लिए, आधा समय केरोसिन की लाइन के अंदर खपे रहते थे। आज उससे माताओं-बहनों को मुक्ति दिलाने का संतोष हमें मिला है।

माननीय अध्यक्ष जी,

जो पहले चलता था, अगर वैसा ही हम चलने देते शायद कोई हमें सवाल भी नहीं पूछता कि मोदी जी ये क्यों नहीं किया, वो क्यों नहीं किया क्योंकि देश को आपने ऐसी स्थिति में ला दिया था कि इससे बाहर निकल ही नहीं सकता था। वैसी निराशा में देश को झोंक कर रखा हुआ था। हमने उज्ज्वला योजना से धुएं से मुक्ति दिलाई, जल-जीवन से पानी दिया, बहनों के सशक्तिकरण के लिए काम किया। 9 करोड़ बहनों को सेल्फ हेल्प ग्रुप स्वयं सहायता समूह से जोड़ना। माइनिंग से लेकर के डिफेंस तक आज माताओं-बहनों को, बेटियों के लिए अवसर खोल दिए हैं। ये अवसर खोलने का काम हमारी सरकार ने किया है।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

इस बात को हम याद करें, वोट बैंक की राजनीति ने देश के सामर्थ्य को कभी-कभी बहुत बड़ा गहरा धक्का पहुंचाया है। और उसी का परिणाम है कि देश में जो होना चाहिए, जो समय पर होना चाहिए था उसमें काफी देर हो गई। आप देखिए मध्यम वर्ग, लंबे समय तक मध्यम वर्ग को पूरी तरह नकार दिया गया। उसकी तरफ देखा तक नहीं गया। एक प्रकार से वो मान के चला कि हमारा कोई नहीं, अपने ही बलबूते पर जो हो सकता है करते चलो। वो अपनी पूरी शक्ति बेचारा खपा देता था। लेकिन हमारी सरकार, एनडीए सरकार ने मध्यम वर्ग की ईमानदारी को पहचाना है। उन्हें सुरक्षा प्रदान की है और आज हमारा परिश्रमी मध्यम वर्ग देश को नई ऊंचाई पर ले जा रहा है। सरकारी की विभिन्न योजनाओं से मध्यम वर्ग को कितना लाभ हुआ है माननीय अध्यक्ष जी, मैं उदाहरण देता हूं 2014 से पहले जीबी डेटा क्योंकि आज युग बदल चुका है। ऑनलाइन दुनिया चल रही है। हरेक के हाथ में मोबाइल पड़ा हुआ है। कुछ लोगों के जेब फटे हुए हो तो भी मोबाइल तो होता ही है।

आदरणीय अध्यक्ष जी, 2014 के पहले जीबी डेटा की कीमत 250 रुपया थी। आज सिर्फ 10 रुपया है। आदरणीय अध्यक्ष जी, Average हमारे देश में एक नागरिक Average 20 जीबी का उपयोग करता है। अगर उस हिसाब को मैं लगाऊँ तो Average एक व्यक्ति का 5 हजार रुपया बचता है आदरणीय अध्यक्ष जी।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

जन औषधि स्‍टोर आज पूरे देश में आकर्षण का कारण बने हैं, क्योंकि मध्‍यम वर्ग का परिवार उसको अगर परिवार में सीनियर सिटीजन है, डायबिटीज जैसी बीमारी है, तो हजार, दो हजार, ढाई हजार, तीन हजार की दवाई हर बार महीने लेनी पड़ती है। जन औषधि केंद्र में जो दवाई बाजार में 100 रुपये में मिलती है, जन औषधि में 10 रुपये, 20 रुपये मिलती है। आज 20 हजार करोड़ रुपया मध्‍यम वर्ग का जन औषधि के कारण बचा है।

माननीय अध्यक्ष जी,

हर मध्यम वर्गीय परिवार का एक सपना होता है खुद का एक घर बने और urban इलाके में होम लोन के लिए की बड़ी व्यवस्था करने का काम हमने किया और रेरा का कानून बनाने के कारण जो कभी इस प्रकार का तत्व मध्‍यम वर्ग की मेहनत की कमाई को सालों तक डूबों कर रखते थे, उसमें से मुक्ति दिलाकर के उसको एक नया विश्वास देने का काम हमने किया और उसके कारण खुद का घर बनाने की उसकी सहूलियत बढ़ गई है।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

हर मध्यम वर्गीय परिवार को अपने बच्‍चों के भविष्‍य के लिए उसकी उच्च शिक्षा के लिए उसके मन में एक मंसूबा रहता है। वो चाहता है आज जितनी मात्रा में मेडिकल कॉलेजेस हों, इंजीनियरिंग कॉलेजेस हों, प्रोफेशनल कॉलेजों की संख्या बढ़ाई गई है। सीटें बढ़ाई गई हैं। उसने मध्यम वर्ग के एस्‍पीरेशन को बहुत उत्तम तरीके से एड्रेस क्या है। उसको विश्वास होने लगा है कि उनके बच्‍चों का उज्‍जवल भविष्‍य निर्धारित है।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

देश को आगे बढ़ाना है, तो भारत को आधुनिकता की तरफ ले जाए बिना कोई चारा नहीं है। और समय की मांग है कि अब समय नहीं गंवा सकते और इसलिए हमने इंफ्रास्ट्रक्चर की तरफ बहुत बड़ा ध्यान दिया है और ये भी मानें, स्वीकारियेगा भारत की एक जमाने में पहचान थी गुलामी के कालखंड के पहले, ये देश architecture के लिए infrastructure के लिए दुनिया में उसकी एक ताकत थी, पहचान थी। गुलामी के कालखंड में सारा नष्ट हो गया। देश आजाद होने के बाद वो दिन दोबारा आएगा, ऐसी आशा थी, लेकिन वो भी समय बीत गया। जो होना चाहिए था, जिस गति से होना चाहिए, जिस स्केल से होना चाहिए था वो हम नहीं कर पाए। आज उसमें बहुत बड़ा बदलाव इस दशक में देखा जा रहा है। सड़क हो, समुद्री मार्ग हो, व्यापार हो, waterways हो, हर क्षेत्र में आज infrastructure का कायाकल्‍प दिख रहा है। Highways पर, रेकॉर्ड निवेश हो रहा है माननीय अध्यक्ष जी। दुनिया भर में आज चौड़ी सड़कों की व्यवस्था होती थी, भारत में चौड़ी सड़कें, highway, expressway, आज देश की नई पीढ़ी देख रही है। भारत में वैश्विक स्‍तर के अच्छे highway, expressway दिखें, इस दिशा में हमारा काम है। पहले रेलवे infrastructure, अंग्रेजों ने जो देकर के गए उसी पर भी हम बैठे रहे, उसी को हमने अच्‍छा मान लिया। गाड़ी चलती थी।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

वो समय था, जिस प्रकार से अंग्रेज जो छोड़ करके गए थे उसी भाव में जीते रहे और रेलवे की पहचान क्‍या बन गई थी? रेलवे यानी धक्‍का-मुक्‍की, रेलवे यानी एक्सीडेंट, रेलवे यानी लेटलतीफी, यही यानी एक स्थिति थी लेटलतीफी में एक कहावत बनी गई थी रेलवे यानी लेटलतीफी। एक समय था हर महीने एक्सीडेंट होने वाली घटनाएं बार-बार आती थी। एक समय था एक्सीडेंट एक किस्मत बन गई थी। लेकिन अब ट्रेनों में, ट्रेनों के अंदर वंदे भारत, वंदे भारत की मांग हर एमपी चिट्ठी लिखता है, मेरे यहां वंदे भारत चालू करें। आज रेलवे स्टेशनों का कायाकल्प हो रहा है। आज एयरपोर्टों का कायाकल्प हो रहा है। सत्तर साल में सत्तर एयरपोर्ट, नौ साल में सत्तर एयरपोर्ट। देश में waterways भी बन रहा है। आज waterways पर ट्रान्स्पोर्टशन हो रहा है। आदरणीय अध्यक्ष जी, देश आधुनिकता की तरफ बढ़े इसके लिए आधुनिक infrastructure को बल देते हुए हम आगे बढ़ रहे हैं।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

मेरे जीवन में सार्वजनिक जीवन में, 4-5 दशक मुझे हो गए और मैं हिन्‍दुस्‍तान के गांवों से गुजरा हुआ इंसान हूँ। 4-5 दशक तक उसमें से एक लंबा कालखंड परिव्राजक के रूप में बिताया है। हर स्तर के परिवारों से बैठने-उठने का, बात करने का अवसर मिला है और इसलिए भारत के हर भू भाग को समाज की हर भावना से परिचित हूँ। और मैं इसके आधार पर कह सकता हूँ और बड़े विश्वास से कह सकता हूँ कि भारत का सामान्य मानवी positivity से भरा हुआ है। सकारात्मकता उसके स्वभाव का, उसके संस्कार का हिस्सा है। भारतीय समाज negativity को सहन कर लेता है, स्वीकार नहीं करता है, ये उसकी प्रकृति नहीं है। भारतीय समुदाय का स्‍वभाव खुशमिजाज है, स्‍वप्‍नशील समाज है, सत्कर्म के रास्ते पर चलने वाला समाज है। सृजन कार्य से जुड़ा हुआ समाज है। मैं आज कहना चाहूंगा जो लोग सपने लेकर के बैठे हैं कि कभी यहां बैठते थे फिर कभी मौका मिलेगा, ऐसे लोग जरा 50 बार सोचें, अपने तौर-तरीकों पर जरा पुनर्विचार करें। लोकतंत्र में आपको भी आत्मचिंतन करने की आवश्यकता है। आधार आज डिजिटल लेनदेन का सबसे बड़ा महत्वपूर्ण अंग बन गया है। आपने उसको भी निराधार करके रख दिया था। अब उसके भी पीछे पड़ गए थे। उसको भी रोकने के लिए कोर्ट-कचहरी तक को छोड़ा नहीं था। GST को ना जाने क्‍या-क्‍या कह दिया गया। पता नहीं लेकिन आज हिन्‍दुस्‍तान की अर्थव्यवस्था को और सामान्य मानवी का जीवन सुगम बनाने में GST ने एक बहुत बड़ी भूमिका अदा की है। उस जमाने में HAL को कितनी गालियां दी गई, किस प्रकार से और बड़े-बड़े फॉरम का misuse किया गया। आज एशिया का सबसे बड़ा हेलीकॉप्टर बनाने वाला हब बन चुका है वो। जहां से तेजस हवाई जहाज सैकड़ों की संख्या में बन रहे हैं, भारतीय सेना के हजारों, हजारों-करोड़ों रुपयों के ऑर्डर आज HAL के पास है। भारत के अंदर vibrant डिफेन्स industry आगे आ रही है। आज भारत defence export करने लगा है। माननीय अध्यक्ष जी, हिन्‍दुस्‍तान के हर नौजवान को गर्व होता है, निराशा में डूबे हुए लोगों से अपेक्षा नहीं है।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

आप जानते हैं भलीभांति समय सिद्ध कर रहा है जो कभी यहां बैठते थे वो वहां जाने के बाद भी फेल हुए हैं और देश पास होता जा रहा है, distinction पर जाके और इसलिए समय की मांग है कि आज निराशा में डूबे हुए लोग थोड़ा स्वस्थ मन रख के आत्मचिंतन करें।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

यहां जम्मू-कश्मीर की भी चर्चा हुई और जो अभी अभी जम्मू-कश्मीर घूम करके आए उन्होंने देखा होगा कितने आन-बान-शान के साथ आप जम्मू-कश्मीर में जा सकते हैं, घूम सकते हैं, फिर सकते हैं।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

पिछली शताब्दी के उत्तरार्द्ध में, मैं भी जम्‍मू-कश्‍मीर में यात्रा लेकर के गया था और लाल चौक पर तिरंगा फहराने का संकल्प लेकर के चला था और तब आतंकवादियों ने पोस्टर लगाए थे, उस समय और कहा था कि देखते हैं किसने अपनी माँ का दूध पिया है जो लाल चौक पर आ करके तिरंगा फहराता है? पोस्टर लगे थे और उस दिन 24 जनवरी थी, मैंने जम्मू के अंदर भरी सभा में कहा था, अध्यक्ष जी। मैं पिछली शताब्दी की बात कर रहा हूं। और तब मैंने कहा था आतंकवादी कान खोलकर सुन लें, 26 जनवरी को ठीक 11 बजे मैं लाल चौक पहुंचुंगा, बिना सिक्योरिटी आऊंगा, बुलेटप्रूफ जैकेट के बिना आऊंगा और फैसला लाल चौक में होगा, किसने अपनी मां का दूध पिया है। वो समय था।

माननीय अध्यक्ष जी,

और जब श्रीनगर के लालचौक में तिरंगा फहराया, उसके बाद मैंने मीडिया के लोग पूछने लगे मैंने कहा था, कि आमतौर पर तो 15 अगस्त और 26 जनवरी को जब भारत का तिरंगा लहराता है तो भारत के आयुध, भारत के बारूद सलामी देते हैं, आवाज करके देते हैं। मैंने कहा, आज जब मैं लाल चौक के अंदर तिरंगा फहराऊं, दुश्मन देश का बारूद भी सलामी कर रहा है, गोलियां चला रहा था, बंदूकें-बम फोड़ रहा था।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

आज जो शांति आई है, आज चैन से जा सकते हैं। सैकड़ों की तादाद में जा सकते हैं। ये माहौल और पर्यटन की दुनिया में कई दशकों के बाद सारे रिकॉर्ड जम्मू–कश्मीर ने तोड़े हैं। आज जम्मू-कश्मीर में लोकतंत्र का उत्सव मनाया जा रहा है।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

आज जम्मू-कश्मीर में हर घर तिरंगा के सफल कार्यक्रम होते हैं। मुझे खुशी है कुछ लोग हैं, जो कभी कहते थे तिरंगे से शांति बिगड़ने का खतरा लगता था कुछ लोगों को। ऐसा कहते थे कि तिरंगे से जम्मू-कश्मीर में शांति बिगड़ने का खतरा रहता था। वक्त देखिए, वक्त का मजा देखिए- अब वो भी तिरंगा यात्रा में शरीक हो रहे हैं।

और आदरणीय अध्यक्ष जी,

अखबारों में एक खबर आई थी जिसकी तरफ ध्यान नहीं गया होगा। आदरणीय अध्यक्ष जी, उसी समय अखबारों में एक खबर आई थी इसके साथ जब ये लोग टीवी में चमकने की कोशिश में लगे थे। लेकिन उसी समय श्रीनगर के अंदर दशकों बाद थियेटर हाउस फुल चल रहे थे और अलगाववादी दूर-दूर तक नजर नहीं आते थे। अब ये विदेश ने देखा है.

आदरणीय अध्यक्ष जी

अभी हमारे साथी, हमारे माननीय सदस्य नॉर्थ-ईस्‍ट के लिए कह रहे थे। मैं कहूंगा जरा एक बार नॉर्थ-ईस्‍ट हो आइए। आपके जमाने का नॉर्थ-ईस्‍ट और आज के जमाने का नॉर्थ-ईस्‍ट देखकर आइये। आधुनिक चौड़े हाइवे हैं, रेल की सुख-सुविधा वाला सफर है। आप आराम से हवाई जहाज से जा सकते हैं। नॉर्थ-ईस्‍ट के हर कोने में आज बड़ी और मैं गर्व के साथ कहता हूँ आजादी के 75 साल मना रहे हैं, तब मैं गर्व से कहता हूं 9 साल में करीब-करीब 7500 जो हथियार के रास्ते पर चल पड़े थे, ऐसे लोगों ने सरेंडर किया और अलगाववादी प्रवृत्ति छोड़ करके मुख्‍य धारा में आने का काम किया है।

आदरणीय अध्‍यक्ष जी,

आज त्रिपुरा में लाखों परिवारों को पक्का घर मिला है, उसकी खुशी में मुझे शरीक होने का अवसर मिला था। जब मैंने त्रिपुरा में हीरा योजना की बात कही थी, तब मैंने कहा था हाईवे-आईवे-रेलवे और एयरवे हीरा, ये हीरा का आज सफलतापूर्वक त्रिपुरा की धरती पर मजबूती नजर आ रही है। त्रिपुरा तेज गति से आज भारत की विकास यात्रा का भागीदार बना है।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

मैं जानता हूं सच सुनने के लिए भी बहुत सामर्थ्‍य लगता है। आदरणीय अध्यक्ष जी, झूठे, गंदे आरोपों को सुनने के लिए भी बहुत बड़ा धैर्य लगता है और मैं इन सबका अभिनंदन करता हूं जिन्‍होंने धैर्य के साथ गंदी से गंदी बातें सुनने की ताकत दिखाई है, ये अभिनंदन के अधिकारी हैं। लेकिन सच सुनने का सामर्थ्य नहीं रखते हैं वो कितनी निराशा की गर्त में डूब चुके होंगे इसका देश आज सबूत देख रहा है।

माननीय अध्यक्ष जी,

राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, विचारधाराओं में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन ये देश अजर-अमर है। आओ हम चल पड़ें- 2047, आजादी के 100 साल मनाएंगे, एक विकसित भारत बनाकर रहेंगे। एक सपना ले करके चलें, एक संकल्प ले करके चलें, पूरे सामर्थ्य के साथ चलें और जो लोग बार-बार गांधी के नाम पर रोटी सेंकना चाहते हैं- उनको मैं कहना चाहता हूं एक बार गांधी को पढ़ लें। एक बार महात्मा गांधी को पढ़ें, महात्‍मा गांधी ने कहा था- अगर आप अपने कर्तव्यों का पालन करोगे तो दूसरे के अधिकारों की रक्षा उसमें निहित है। आज कर्तव्य और अधिकार के बीच में भी लड़ाई देख रहे हैं, ऐसी नासमझी शायद देश ने पहली बार देखी होगी।

और इसलिए माननीय अध्यक्ष जी,

मैं फिर एक बार आदरणीय राष्ट्रपति जी को अभिनंदन करता हूं, राष्‍ट्रपति जी का धन्यवाद करता हूं और देश आज यहां से एक नई उमंग-नए विश्‍वास-नए संकल्प के साथ चल पड़ा है।

बहुत-बहुत धन्यवाद!

(Source PIB)