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संकट मोचन भगवान हनुमान के बारे में जानें खास बातें

Lord Hanuman and Teaching Sankatmochak Hanuman Jayanti

भगवान हनुमान सबसे प्रसिद्ध देवताओं में से एक हैं और ऐसी मान्यता है कि वह आज भी पृथ्वी पर मौजूद हैं। कहा जाता है कि प्रभु हनुमान इस घोर कलयुग मे एक मात्र देवता हैं जो अपने भक्तों के द्वारा कम पूजन पर भी आसानी से उनका कल्याण करते हैं।
वैसे तो भगवन हनमान जी को भक्तगण अनगिनत नामों से पुकारते हैं,  लेकिन उन सबमे जो सबसे लोकप्रिय है वह है "संकट मोचन". ऐसी मान्यता है कि भगवन हनुमान जो खुद प्रभु राम के सेवक हैं, हमेशा से संकट में पड़ें लोगों को उबारने के लिए सदैव तत्पर रहते हैं.

आप रामायण या रामचरित मानस का अध्ययन करेंगे तो पाएंगे कि प्रभु हनुमान न केवल भगवान् राम बल्कि सभी चरित्रों चाहे वह माता सीता हो, लक्ष्मण हो, विभीषण हो, सुग्रीव हो या अन्य चरित्र। हनुमान हमेशा से उन्हें संकटों से निकालने में हमेशा आगे रहे हैं और यही वजह है कि अपने भक्तों में भगवन हनुमान संकटमोचन नाम से अधिक प्रिय भी हैं. मान्यता भी यही है कि सभी के संकट को हरने वाले भगवान् हनुमान इस घोर कलयुग में सबसे आसानी से प्रसन्न हो जाते हैं और अपने भक्तों के कष्टों को दूर भी करते हैं.

भगवान् राम के सेवा के लिए तो प्रभु हुनमान हमेशा तैयार रहते हैं. फिर वह चाहिए रावण द्वारा सीता माता का हरण किये जाने पर लंका में उनका पता लगाना हो या रावण के साथ युद्ध का प्रसंग हो, भगवन हनुमान सदैव तत्पर रहते हैं. 

अपने बड़े भाई बालि द्वारा से प्रताडित होकर सुग्रीव जहाँ पहाड़ों की कंदराओं में जीवन काट रहे थे. बड़े भाई बालि के भय से चिप कर जीवन गुजरने किए लिए विवश सुग्रीव को भगवन हनुमान ही इस संकट से निकलते हैं. सुग्रीव से भगवन राम की मित्रता करने वाले हनुमान ही हैं जो बालि का वध कर सुग्रीव को राज पाट दिलवाने में प्रमुख भूमिका निभाते हैं. 

लंकाधिपति रावण द्वारा ठुकराए गए उसके भाई विभीषण को संकट के क्षण में भगवन हनुमान ही निकलते हैं. पहले भगवन राम से मित्रता और फिर विभीषण को लंका का राजा बनाने में हनुमान प्रमुख भूमिका निभाते हैं. 

कहा जाता है कि लंकाधिपति रावण ने शनि देव को अपने दरबार में उलटा लटका कर बंधक बना लिया था. भगवन शनि देव उस समय खुद संकट में थे क्योंकि रावण के जाल से शनिदेव का निकलना आसान नहीं था. ऐसी मान्यता है कि भगवन हनुमान ने ही शनिदेव को उस संकट से उबारा था. आज भी यह कहा जाता है कि भगवन हनुमान की पूजा करने वाले भक्तों को शनि के प्रकोप से शांति मिलती है. 

ऐसे अनगिनत प्रसंग रामायण और रामचरित मानस में आपको मिलेंगे जो यह प्रमाणित करता है कि भगवन हनुमान हमेशा से आपदाग्रस्त या किसी संकट में रहने वाले चरित्रों को संकट से निकलने में सबसे आगे रहते हैं और यही कारण है कि भगवान् हनुमान हमेशा अपने भक्तों के संकट को दूर करने में तत्पर रहते हैं और इसीलिए भक्तगण उन्हें संकटमोचन के नाम से पुकारते हैं. 

संकटमोचन भगवान हनुमान के बारे में जानें खास बातें


भगवान हनुमान की जयंती चैत्र पूर्णिमा के अवसर पर मनाई जाती है। हनुमान जयंती मनाने के लिए सबसे सुंदर यह होगा कि हम भगवान हनुमान के जीवन और व्यक्तित्व से सीखें तथा अपने अंदर उनके गुणों को आत्मसात करें। भगवान हनुमान सबसे प्रसिद्ध देवताओं में से एक हैं और ऐसी 
मान्यता है कि वह आज भी पृथ्वी पर मौजूद हैं। कहा जाता है कि प्रभु हनुमान इस घोर कलयुग मे एक मात्र देवता हैं जो अपने भक्तों के द्वारा कम पूजन पर भी आसानी से उनका कल्याण करते हैं।

संकट मोचन भगवान हनुमान के बारे में जानें खास बातें
यह सच है कि हमें अपने लक्ष्य को पाने की खातिर हर संभव प्रयासों को अपनाने में कोताही नहीं बरतनी चाहिए। निरंतर प्रयास करते करते अगर आपको लगता है कि कुछ ब्रेक की जरूरत है तो इंस्पायर होने के लिए आप किसी भी अन्य महापुरुषों और व्यक्तित्व का अध्ययन कर सकते हैं क्योंकि यह न केवल मोटिवेट करेगा बल्कि आपको नई आज से सराबोर भी करेगा।

विशेषताएं
बल और बुद्धि:
हनुमान जी अपार बल और बुद्धि के धनी हैं। उन्हें असाधारण शक्ति और बुद्धिमानी का प्रतीक माना जाता है।
अजर-अमर:
वे अजर-अमर हैं, अर्थात उनका न तो कोई जन्म है और न ही कोई मृत्यु।
रामभक्ति:
 वे भगवान राम के सबसे बड़े भक्त माने जाते हैं और उन्होंने रामायण के दौरान उनकी सेवा की थी।

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि भगवान हनुमान अपने गुरु रामचंद्र के चरण कमलों के प्रति काफी समर्पित रहते हैं और इसलिए प्रभु राम को प्रसन्न करके भी लोग भगवान हनुमान को खुश और प्रसन्न करने के लिए मंदिरों और घरों मे पूजन आयोजित करते हैं।
 भगवान हनुमान की पूजा करने के दो तरीके हैं; पारंपरिक पूजा और हनुमान के गुणों का ध्यान।  

प्रमुख घटनाएं
लंकादहन: 
जब रावण ने माता सीता का अपहरण किया था, तब हनुमान जी ने लंका जाकर उसे जलाया था।
संजिवनी बूटी: 
लक्ष्मण जी के मूर्छित होने पर हनुमान जी संजीवनी बूटी लाए थे।
सुंदरकांड: 

रामायण के सुंदरकांड में हनुमान जी की वीरता और भक्ति का वर्णन है।
ऐसी मान्यता है कि भगवान इस लोक मे तब तक  तक गुप्त रूप से पृथ्वी पर रहेंगे जब तक भगवान राम का नाम गाया जाएगा , महिमामंडित और स्मरण और पूजा किया जाएगा।

विशेष गुण
संकटमोचन: 
हनुमान जी को संकटमोचन कहा जाता है क्योंकि वे भक्तों के सभी संकटों का निवारण करते हैं।
अष्टसिद्धि और नव निधि: 
उन्हें अष्टसिद्धि (आठ प्रकार की सिद्धियाँ) और नव निधि (नौ प्रकार की धन) का वरदान प्राप्त है।

लेकिन याद रखें दोस्तों, अपने लक्ष्य को पाने के लिए जिस डिटरमिनेशन या इच्छा शक्ति की जरूरत है, उसे आपको अपने अंदर ही तलाश करनी होगी। इच्छा शक्ति अगर महबूत है तो फिर आपको इंस्पायर होने की जरूरत काम पड़ेगी, क्योंकि यह आपको थकने नही देगा।

प्रसिद्ध कवि जय शंकर प्रसाद की इन पंक्तियों को अपने जीवन का मूल मंत्र बना लें " महाशक्तियों के बेग में रोड़े अटकाने से उनका बेग काम नहीभोता बल्कि वे दुगुने बेग से आगे बढ़ती हैं"

अपने इच्छाशक्ति को मजबूत बनाकर खुद को एक महाशक्ति के समान कठोर बना लें, फिर आपके और आपके लक्ष्य की बीच कोई बाधा टिक नहीं पाएगी।

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अस्वीकरण: कृपया ध्यान दें कि लेख में उल्लिखित टिप्स/सुझाव केवल सामान्य जानकारी है जो विभिन्न सामाजिक और धार्मिक आस्था पर आधारित हैं.ताकि आपको उस मुद्दे के बारे में अपडेट रखा जा सके जो कि आम लोगों से अपेक्षित है. आपसे निवेदन है कि कृपया इन सुझावो को  पेशेवर सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए तथा अगर आपके पास इन विषयों से सम्बंधित कोई विशिष्ट प्रश्न हैं तो हमेशा सम्बंधित एक्सपर्ट से अवश्य परामर्श करें।








नजरिया जीने का: सकारात्मक सोचें, सकारात्मक पक्षों को देखें और सकारात्मक दृष्टिकोण रखें

Inspiring Thoughts Positive Attitude and its Importance in Life
नजरिया जीने का:  
इस सच्चाई से भला किसे इनकार हो सकता है कि जीवन में मुश्किलें आती रहती हैं और जीवन कभी भी फूलों का सेज नहीं रहा। आप इतिहास उठाकर देख लें, जिसकों जीवन मे जितना ऊपर जाना होता है, उसके रास्ते मे प्रकृति ने उतने ही बाधाओं एयर काँटों को बिछाकर उनका परीक्षा लेती है। कहते हैं न,
" वही पथ क्या  पथिक परीक्षा क्या,  जिस पथ मे बिखरे शुल न हो। 
नाविक कि धैर्य परीक्षा क्या,  यदि धाराएं प्रतिकूल न हो। 
सकारात्मक दृष्टिकोण हमें सकारात्मक सोचने में आसान बनाता है और यह हमें चिंताओं और नकारात्मक सोच से बचने की कला भी सिखाता है.

लेकिन याद रखें, जीवन मे इन बाधाओं और परेशानियों से मुक्ति पाने के लिए हमें सकारात्मक सोच रखना बहुत ज़रूरी है। सकारात्मक सोच एक विकल्प है।  यह हमेशा आसान नहीं होता है, लेकिन यह अभ्यास के साथ बेहतर होता जाता है। आपको हमेशा इसका ध्यान रखना होगा कि जिन लोगों के साथ आप समय बिताते हैं, उनका आपके मूड पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है इसलिए हमेशा हीं सकारात्मक और उत्साही लोगों के साथ समय बिताने कि कोशिश करें।  

जीवन में सफलता के लिए यह जरुरी है कि हम नकारात्मक सोच और ऐसी प्रवृति वाले लोगों से एक खास दुरी बनाकर अपने प्रयासों पर फोकस करें। यह सकारात्मक दृष्टिकोण का अभ्यास हीं है जो आपके जीवन में आशावाद और आशावादी दृष्टिकोण लाता है। 


बेशक अगर सकारात्मक और आशा के अनुरूप घटने वाली घटनाओं का हम स्वागत  करते हैं लेकिन थोड़ी से कुछ अप्रिय घटनाएं  हमारे  जीवन में दस्तक  देती  हैं कि हम अपने जीवन और परिस्थितियों को कोसना आरम्भ कर देते हैं.....



 .... लेकिन हमें यह याद रखना होगा कि केवल सकारात्मक दृष्टिकोण ही हमें जीवन के दैनिक जटिल और अप्रिय मामलों से अधिक आसानी से निपटने में मदद करता है।

धैर्य और आत्मविश्वास का नहीं छोड़े दामन.... मिलेगी विपरीत परिस्थितियों में भी सफलता

... यह सकारात्मक दृष्टिकोण का अभ्यास है जो आपके जीवन में आशावाद और आशावादी दृष्टिकोण लाता है। सकारात्मक दृष्टिकोण हमें सकारात्मक सोचने में आसान बनाता है और यह हमें चिंताओं और नकारात्मक सोच से बचने की कला भी सिखाता है...


 अपने जीवन में सफल होने के लिए, यदि कोई आपके जीवन में कुछ रचनात्मक परिवर्तन की उम्मीद कर रहा है, तो सकारात्मक दृष्टिकोण को जीवन के तरीके के रूप में अपनाने की आवश्यकता है।


Inspiring  Thoughts: आपकी प्रसन्ता में छिपा है जीवन की सफलता का रहस्य.... 

Attitude  भले एक छोटी से चीज सही लेकिन सच यह है कि जीवन के इसी बड़े और महत्वपूर्ण फर्क लाने के लिए यह बहुत प्रभावी भूमिका निभाती है....


 सकारात्मक और आशावादी दृष्टिकोण  की मदद से कई लोगों यहाँ तक की कई प्रसिद्ध हस्तियों ने कई बड़ी बीमारियों या संघर्षों के साथ अपनी लड़ाई जीत ली है.... वावजूद इस तथ्य के कि जीतना मुश्किल था….वास्तव में केवल एटीट्यूड ही काफी नहीं है..लेकिन जीवन में हमारी सफलता के लिए सकारात्मक और आशावादी दृष्टिकोण की आवश्यकता है...


 ..... मनोवृत्ति मूल रूप से वह तरीका है जिसमें हम किसी चीज़ के प्रति व्यवहार करते हैं या सोचते हैं या महसूस करते हैं ... आम तौर पर हम अपनी सोच, भावनाओं तथा  अन्य पहलुओं के संदर्भ में अपना दृष्टिकोण प्रदर्शित करते हैं। वास्तव में आपकी सोच गठन के पीछे मूल कारण है किसी चीज के प्रति आपका नजरिया...


यदि आप सकारात्मक सोचने के आदि  हैं और किसी भी घटना का केवल सकारात्मक पक्ष देखते हैं तो आप अपने जीवन के बारे में सकारात्मक दृष्टिकोण रखते हैं ... आप जिस मुद्दे से निपट रहे हैं, उसके बारे में बात करें ...और इसके लिए नेगेटिव विचारों को अपने मन में घर नहीं करने दें...

याद रखें... प्रकृति भी   आपके अंदर उत्पन्न विचारों को हीं सशक्त करने और उसे पूरा करने की लिए बल देती है... और इसलिए हैं हमें बचपन से यह पढ़ाया जाता है कि -" हमें अपने मन में बुरे विचारों को  लाने से बचना चाहिए..... "

आपका Attitude  आपके आस-पास हो रही घटनाओं के बारे में आपकी राय बनाने में आपकी मदद करता है... सोचने के तरीके ने आपके विचारों को तय किया और निश्चित रूप से यह आपके कार्यों में दिखाई देता है। जिस वातावरण में आप रह रहे हैं, वह भी आपके दृष्टिकोण के प्रभाव  प्रदर्शित करता है...

दुनिया में ऐसे लोग भी हैं जिन्होंने अपनी मामूली चोटों और जीवन की कठिनाइयों के कारण जीवन के निराशावादी और नकारात्मक रवैये के कारण दम तोड़ दिया है….

बदल सकते हैं आपदा को अवसर में…जानें कैसे 

अपने जीवन में हर असफलता के लिए अपने आस-पास की परिस्थितियों को दोष न दें… आपके जीवन में कठिन परिस्थितियों से निपटने के लिए अपनी मानसिकता और दृष्टिकोण को बदलने की आवश्यकता है…।

आपके सकारात्मक और आशावादी दृष्टिकोण में आपके जीवन में आपकी हर सफलता/असफलता का कारण प्रदान करने की शक्ति है और इसलिए अपने सोचने के तरीके को नज़रअंदाज़ न करें… निश्चित रूप से यह आपके जीवन में कठिन परिस्थितियों से निपटने का मूल तरीका है…

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आपको अपने जीवन में आने वाली हर घटना के साथ सकारात्मक दृष्टिकोण रखना होगा चाहे वह पेशेवर हो या व्यक्तिगत…। यह एक भावनात्मक स्थिति हो सकती है जिस पर आपको ध्यान देने की आवश्यकता है… सभी घटनाओं से निपटने के लिए आपको सकारात्मक और आशावादी रवैया रखना होगा। मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक सहित ....



विश्वास करें….आपमें परिस्थितियों को बदलने के लिए एटीट्यूड की शक्ति है क्योंकि आप अपनी खुद की परिस्थितियों के निर्माता हैं… अपने सकारात्मक और आशावादी दृष्टिकोण के साथ।

नजरिया जीने का @Budha Purnima: जानें गौतम बुद्ध के अनुसार-सत्य के राह पर चलने वाला मनुष्य कौन सी दो गलतियाँ करता है

 

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बुद्ध पूर्णिमा, जिसे वेसाक या बुद्ध जयंती के नाम से भी जाना जाता है, यह खासतौर पर बौद्ध धर्म के संस्थापक गौतम बुद्ध के जन्म, ज्ञान प्राप्ति और मृत्यु (या परिनिर्वाण) का स्मरण करती है। इस वर्ष बुद्ध पूर्णिमा 23 मई, 2024  को मनाई जा रही है।  हिन्दू पंचांग के अनुसार पूर्णिमा जो प्रत्येक माह मे मनाई जाती है, इसका खास महत्व है। 

गौतम बुद्ध, जिन्हें "शांत" और "ज्ञानोदय" के प्रतीक के रूप में जाना जाता है, जीवन जीने का एक अनूठा और गहन नजरिया प्रदान करते हैं।गौतम बुद्ध  कहते हैं, अगर आप जीवन में शांति और खुशी चाहते हैं तो कभी भी भूतकाल और भविष्य काल में न उलझें। वह कहते हाँ कि सत्य की राह पर चलने वाला मनुष्य जीवन में दो ही गलतियां कर सकता है- पहला या तो पूरा रास्ता तय नहीं करता और दूसरा कि वह शुरुआत ही नहीं करता।

 बौद्ध धर्म के संस्थापक महात्मा गौतम बुद्ध ने अपने जीवन में हमेशा लोगों को अहिंसा और करुणा की शिक्षा दी और आज भी यह सच है कि साथ ही गौतम बुद्ध के विचार और उपदेश हमें जीवन की हकीकत से रूबरू कराते हैं,उनकी शिक्षाएं, जिन्हें "धर्म" कहा जाता है, आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी कि 2500 साल पहले थीं।

बुद्ध से सीखने के कुछ महत्वपूर्ण पहलू:

वर्तमान पर ध्यान दें: बुद्ध हमें वर्तमान क्षण में जीने का महत्व सिखाते हैं। अतीत के पछतावे या भविष्य की चिंता में फंसने के बजाय, हमें वर्तमान क्षण की सुंदरता और संभावनाओं को स्वीकार करना चाहिए। भूतकाल पर ध्यान मत दो, भविष्य के बारे में मत सोचो, अपने मन को वर्तमान क्षण पर केंद्रित करो। 

अपने विचारों को संभालें: "आपके सबसे बड़े दुश्मन को भी उतना नुकसान नहीं पहुँचा सकता जितना कि आपके अपने असुरक्षित विचार।

करुणा और दया: बुद्ध की शिक्षाओं का केंद्र करुणा और दया है। हमें दूसरों के प्रति दयालु और सहानुभूतिपूर्ण होना चाहिए, चाहे वे कोई भी हों। घृणा को घृणा से खत्म नहीं किया जा सकता है, बल्कि इसे प्रेम से ही खत्म किया जा सकता है जो की एक प्राकृतिक सत्य है.

क्रोध से बचें: गौतम बुद्ध का कहना है कि क्रोध एक दण्ड है साथ  हीं क्रोध एक जहर  और आग है जो तुम्हें जला देगी। उनका कहना है कि क्रोध को हर प्रकार शमन किया जाना जरूरी है अगर जीवन मे शांति कि तलाश है। "किसी विवाद में हम जैसे ही क्रोधित होते हैं, हम सच का मार्ग छोड़ देते हैं और अपने लिए प्रयास करने लगते हैं."

मन को वश में करें: गौतम बुद्ध  ने कहा है कि जिसने अपने मन को वश में कर लिया उसने शांति को प्राप्त कर लिया। इसके लिए सबसे जरूरी इस बात की  हैं कि  हम अपने मन को अपने वश मे करें जो कि संतोष के साथ जीने का अवसर प्रदान करती है। 

अपने कार्यों के प्रति जागरूक रहें:  "हम वही हैं जो बार-बार करते हैं। उत्कृष्टता तब एक क्रिया नहीं बल्कि एक आदत बन जाती है।"

खुद को जानो: बुद्ध ने हमें अपने विचारों, भावनाओं और कार्यों के बारे में जागरूक होने का महत्व सिखाया। उनका कहना है ki आत्म-जागरूकता से ही हम अपने जीवन में बदलाव ला सकते हैं। स्वयं की विजय सबसे बड़ी विजय है। आप चाहें जितनी किताबें पढ़ लें, कितने भी अच्छे प्रवचन सुन लें, उनका कोई फायदा नहीं होगा, जब तक कि आप उनको अपने जीवन में नहीं अपनाते.

सीखने की यात्रा पर रहें:  सीखने की कभी समाप्ति नहीं होती और यह जीवन का सतत प्रक्रिया है। उनका  कहना है कि  अज्ञानी व्यक्ति एक बैल के समान है वह ज्ञान में नहीं बल्कि आकार में बढ़ता है।

शांति का मार्ग अपनाएं: शांति अपने आप में नहीं आती है; यह उपलब्धि है जिसे बुद्धि, करुणा और साहस से प्राप्त किया जाना चाहिए। नफरत से नफरत कभी खत्म नहीं हो सकती. नफरत को केवल प्यार द्वारा ही समाप्त किया जा सकता है. यह एक प्राकृतिक सत्य है.

बुद्ध की शिक्षाओं को अपने जीवन में कैसे लागू करें:

  • ध्यान: ध्यान एकाग्रता और आत्म-जागरूकता विकसित करने का एक शक्तिशाली तरीका है।
  • सचेतता: अपने विचारों, भावनाओं और कार्यों के प्रति सचेत रहने का प्रयास करें।
  • करुणा: दूसरों के प्रति दयालु और सहानुभूतिपूर्ण बनें।
  • मध्यम मार्ग: चरम सीमाओं से बचें और संतुलित जीवन जीने का प्रयास करें।
  • नैतिकता: सदाचारी जीवन जीने का प्रयास करें।
  • गौतम बुद्ध की शिक्षाएं हमें एक अधिक शांतिपूर्ण, खुशहाल और सार्थक जीवन जीने में मदद कर सकती हैं।
गौतम बुद्ध Quotes 

  • भविष्य के सपनों में मत खोओ और भूतकाल में मत उलझो सिर्फ वर्तमान पर ध्यान दो। -गौतम बुद्ध
  • शत्रुओं से बदला लेना चाहिए, न कि शत्रुओं को बदल देना चाहिए। - गौतम बुद्ध
  • क्रोध में हजारों शब्दों को गलत बोलने से अच्छा, मौन वह एक शब्द है जो जीवन में शांति लाता है।
  • अपने विचारों का मालिक बनो, न कि अपने विचारों के गुलाम। - गौतम बुद्ध
  • स्वास्थ्य सबसे बड़ा उपहार है, संतोष सबसे बड़ा धन है, वफ़ादारी सबसे बड़ा संबंध है।गौतम बुद्ध
  • घृणा घृणा से नहीं प्रेम से ख़त्म होती है, यह शाश्वत सत्य है। गौतम बुद्ध
  • विवेकी पुरुष विचारों के परिणामों के आधार पर अपने कार्य को निर्णय करता है, और फिर कार्य करता है।-गौतम बुद्ध
  • बुद्धिमान व्यक्ति अपने मन को शांत करता है, जैसे एक झील में पानी को शांत किया जा सकता है, ताकि अन्यत्र मछलियाँ तस्वीरें देख सकें।" - गौतम बुद्ध
  • वहीं जीत है, जो दूसरों को जीतता है।- 
  • किसी विवाद में हम जैसे ही क्रोधित होते हैं हम सच का मार्ग छोड़ देते हैं, और अपने लिए प्रयास करने लगते हैं। -गौतम बुद्ध


नजरिया जीने का: असीमित सोच और विचारों को किसी सीमा से नहीं बांधे, ऊँचा सोचें और बड़ा लक्ष्य हासिल करें

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अगर आप असीमित शब्द के सार्थकता को समझेंगे तो पाएंगे कि यह शब्द बहुत ही उपयोगी है क्योंकि यह आपको  विश्वास दिलाता है कि आप वह सब कुछ कर सकता हूं जो आप चाहते हैं। सच तो यही है कि यह आपकी असीमित सोच है जो आपके अंदर के विचारों को जागृत करता है और  संभावनाओं की याद दिलाता है, तब भी जब सारी परिस्थितियाँ मेरे विरुद्ध हों। असीमित सोच और असीमित विचारों पर विश्वास करके, आप असीमित चीजें हासिल कर सकते हैं हाँ इसके लिए पहल आपको हीं करनी होगी । 


सोचने की कोई सीमा नहीं है, इसलिए बड़ा सोचें और अपने जीवन में बड़ा हासिल करें क्योंकि हर व्यक्ति के अंदर अपार शक्ति है और हमें बस उसे प्रज्वलित करना है। प्रकृति ने हमें अपने जीवन में चमत्कार करने की अपार शक्ति और क्षमता प्रदान की है, लेकिन त्रासदी यह है कि हम दर्शक दीर्घा के बीच में फिट होने का आनंद लेते हैं। विडम्बना यह हैं कि प्रकृति ने तो हमें कोई भेदभाव नहीं किया हमें शक्ति और सामर्थ्य प्रदान करने में, लेकिन यह केवल हम ही हैं जो अपनी सोच को सीमा प्रदान करते हैं, इस तथ्य के बावजूद कि आपके पास इसे हासिल करने के लिए पर्याप्त शक्ति और ऊर्जा है।

आपके आस-पास होने वाली हर घटना को कुछ न कुछ सीमा प्रदान की गई है। चाहे वह सड़क हो, क्रेडिट/डेबिट कार्ड हो, आपका शरीर हो, आपके शरीर के अंग हों और यहां तक कि सभी अत्यधिक परिष्कृत और नवीनतम उपकरण हों, उनके उपयुक्त और मानक प्रदर्शन की अपनी सीमाएं हैं। यह केवल आपकी सोच है जिसकी कोई सीमा नहीं है और यह बहुत ऊपर तक जा सकती है क्योंकि आपके पास वास्तविक तर्क है और आपके संसाधन और दृष्टिकोण इसकी अनुमति देते हैं।

असीमित सोच:

हमारा दिमाग शारीरिक बाधाओं से बंधा नहीं है और हम चाहें  तो हम वर्तमान और सीमाओं से परे कल्पना कर सकते हैं, अन्वेषण कर सकते हैं और सपने देख सकते हैं। यह केवल आपकी सोच है जिसकी कोई सीमा नहीं है और यह बहुत ऊपर तक जा सकती है क्योंकि आपके पास वास्तविक तर्क है और आपके संसाधन और दृष्टिकोण इसकी अनुमति देते हैं।

यह केवल हम ही हैं जो इस तथ्य के बावजूद कि आपके पास इसे हासिल करने के लिए पर्याप्त शक्ति और ऊर्जा है, अपनी सोच को सीमा प्रदान करते हैं। यह असीमित सोच हमें उन संभावनाओं पर विचार करने की अनुमति देती है जो पहली नज़र में संभव नहीं लगती हैं।

रखें खुद पर भरोसा,आपकी जीत को कोई ताकत हार में नहीं बदल सकती

बड़ी सोच का महत्व:

प्रकृति ने हमें अपने जीवन में चमत्कार करने की अपार शक्ति और क्षमता प्रदान की है, लेकिन त्रासदी यह है कि हम दर्शक दीर्घा के बीच में फिट होने का आनंद लेते हैं। महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित करने से प्रेरणा मिलती है और हमें उत्कृष्टता के लिए प्रयास करने के लिए प्रेरित किया जाता है।

बड़ी सोच चुनौतियों का सामना करने में नवीनता, रचनात्मकता और लचीलेपन को बढ़ावा देती है। हमें ऊंचा सोचना चाहिए और अपनी सोच को नई ऊंचाइयां प्रदान करनी चाहिए, आश्चर्यजनक रूप से हम अखबारों और टीवी समाचारों में ऐसे चमत्कार रचने वालों से गुजरते रहते हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि ऐसे लोगों ने अपनी सोच को नई ऊंचाई प्रदान की है और अपने जीवन में बड़ा मुकाम हासिल किया है.

असीमित सोच और विचारों को किसी सीमा से नहीं बांधे, ऊँचा सोचें 

संतुलन महत्वपूर्ण है-

जबकि बड़ा सोचना महत्वपूर्ण है, लेकिन साथ हीं सुनिश्चित करना भी जरुरी है कि आपके लक्ष्य भी यथार्थवादी हों और आपके मूल्यों और संसाधनों के अनुरूप हों। अपने लक्ष्यों को प्राप्त करना महत्वपूर्ण है, सीखने, बढ़ने और उनके साथ तालमेल बिठाने की प्रक्रिया अत्यधिक मूल्यवान है। 

दुनिया में हर सफल शख्सियत ने तभी बड़ा हासिल किया है, जब उसने बड़ा सोचने का साहस किया। हमें एक मुर्ख और लापरवाह इंसान बनने की मानसिकता को बदलने के लिए तैयार रहना होगा न कि यह सोचना होगा कि प्रकृति ने हमें चमत्कार करने की सारी शक्ति और विचारों से सुसज्जित किया है।

नजरिया जीने का: पढ़ें और भी...

रिश्ते खास हैं, इन्हे अंकुरित करें प्रेम से, जिंदा रखें संवाद से और दूर रखें गलतफहमियों से

इमोशनल हैं, तो कोई वादा नहीं करें और गुस्से में हों तो इरादा करने से परहेज करें


नजरिया जीने का: विपत्तियां यह अहसास दिलाती हैं कि आप किस मिटटी के बने हैं, घबराएं नहीं सामना करें

Opportunity in Adversity
नजरिया जीने का: जब हम मुश्किलों का सामना करते हैं, तभी हमारी तैयारियां और अपने शक्ति का एहसास होती है। जीवन का यथार्थ भी यही है कि यह मुश्किल समय हीं है जो हमें सिखाता है कि हम कितने मजबूत और लचीले हैं। निसंदेह विपत्तियां दर्दनाक और चुनौतीपूर्ण होती हैं, लेकिन वे हमें सिखाने और विकसित करने के लिए भी अमूल्य अवसर प्रदान करती हैं। अगर हम इन अनुभवों से सीखने और बढ़ने के लिए तैयार रहें, तो हम मजबूत और अधिक पूर्ण जीवन जी सकते हैं।

"कठिनाई ही असली परीक्षा है जिससे मजबूत आत्माएं विकसित होती हैं।" - महात्मा गांधी

 विश्वास करें, विपतियों या मुसीबतों के सामना करने के समय हमारे पास दो विकल्प होते हैं- या तो हम उनके सामने समर्पण कर लें या उनका सामना करने का हिम्मत पैदा करें। जो लोग विपत्तियों का सामना सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ करते हैं, वे अक्सर अधिक लचीले, दृढ़निश्चयी और आत्मविश्वासी बन जाते हैं। उनका सामना करने कि यह शक्ति हमें अपनी कमजोरियों को खत्म करने और उन पर विजय प्राप्त करने का अवसर देता है। विपत्तियां हमें दूसरों के प्रति करुणा और सहानुभूति विकसित करने में भी मदद करती हैं।

अंधेरे में ही तारे चमकते हैं। - मार्टिन लूथर किंग जूनियर

विपत्तियां जीवन का एक हिस्सा हैं और वास्तव में विपत्तियां हमारे ज्जीवन की वह आकस्मिक घटनाएं होती हैं जो हमारे जीवन में परेशानी और दुःख लाती हैं। विपत्तियाँ अक्सर नकारात्मक मानी जाती हैं, क्योकि इसके आगमन के साथ ही हमारे जीवन में उथल पुथल आ जाती ही यही हमारा सामान्य जीवन को ब्रेक सा लग जाता है. विपत्तियाँ अक्सर नकारात्मक मानी जाती हैं, लेकिन, यदि हम उनका सामना सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ करते हैं, तो वे हमें बेहतर इंसान बनने में मदद कर सकती हैं. हालांकि, विपत्तियाँ अक्सर नकारात्मक मानी जाती हैं, लेकिन वे हमारे जीवन में सकारात्मक भूमिका भी निभा सकती हैं। 

सच तो है है कि यह हमारे जीवन में आने वाली विपत्तियां हीं होती है जो हमारे साहस और धैर्य और दूसरों की मदद करने की भावना का अहसास दिलाती है. विपत्तियां के केवल हमें यह बताती है कि हम किस मिट्टी के बने हैं बल्कि यह हमें समस्याओं को सुलझाने की क्षमता और जीवन के मूल्यों को समझने की क्षमता भी विकसित करने में मदद करता है. 
"जो तुम्हें नहीं मारता वो तुम्हें मजबूत बनाता है।" - फ्रेडरिक नीत्शे

आपदा या विपरीत परिस्थितियों में माध्यम से नेचर या प्रकृति भी हमारी परीक्षा लेती है..... जीवन में जिसको जितना आगे जाना होता है उसके  रास्ते में प्रकृति उतना ही शूल और  कांटे बिछा के रखती है....... 
अगर आप उन कांटों के डर से वापस लौट जाएंगे तो आपकी यात्रा वहीँ  जायेगी....लेकिन याद रखें जिसे जीवन में जितना आगे जाना होता है उसे प्रकृति अपनी ओर से उतना ही ऊर्जा प्रदान कर उसे सकारात्मक ऊर्जाओं से पूर्ण कर भेजती है ताकि वे लोग लाइफ में मिलने वाले तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद वह अपने सफलता के कीर्तिमान स्थापित करते हैं.


विपत्तियों से निकलने के लिए सबसे जरुरी 

विपत्तियों से निबटना यह सच है की आसान नहीं होता लेकिन इंसान अगर ठान ले तो यह इतना मुश्किल भी नहीं होती. विपत्तियों का आना तो अपने हाथ में नहीं होती लेकिन आपकी मानसिक स्थिति, आपकी सोच और आपकी सकारात्मक सोच अवश्य ही इससे बाहर निकलने में मदद कर सकती है. विपत्तियों से निकलने के लिए सबसे जरुरी है कि सकारात्मक रहें। मुश्किल परिस्थितियों में भी सकारात्मक रहने की कोशिश करें। इससे आपको अपने लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करने और आगे बढ़ने में मदद मिलेगी। अपने परिवार, दोस्तों और समुदाय से मदद मांगने से न डरें। दूसरों की मदद से आप मुश्किल समय में बेहतर तरीके से निपट पाएंगे। अपने अनुभव से सीखें। विपत्तियों से सीखने से आपको भविष्य में बेहतर तरीके से तैयार रहने में मदद मिलेगी।
"हर मुसीबत अपने साथ एक उपहार लाती है, बस हमें उसे ढूंढना होता है।" - चीनी कहावत

आपदा में भी अवसर 

सच्चाई तो यह है कि इस आपदा में भी हमें अवसर की तलाश करनी होती है क्योंकि आपदा या विपरीत परिस्थितियां हमारे लिए एक अवश्यंभावी प्रहार  होती है जो हमारे वश में नहीं हो सकते.
क्या आपदा या बुरा समय हमसे पूछ कर आती है, नहीं ना. आपदा का आना हमारे लिए नियति है लेकिन यह हमारी सूझ- बुझ और इच्छाशक्ति होती है कि  हम  आगे टूट जाते हैं या उस आपदा में भी अवसर तलाश कर उससे निकलने का प्रयास करते हैं. 
"विपत्तियों से निपटने का सबसे अच्छा तरीका है कि हम उनका सामना करें।" - अल्बर्ट आइंस्टीन

अगर आप देखेंगे तो पिछले कुछ सालों से कोविड-19 नामक एक नए आपदा ने पूरी दुनिया को अस्त-व्यस्त करने के साथ ही कई देशों के विकास दर को न जाने कई साल  पीछे कर दिया है. कितने जानों को असामायिक काल के ग्रास में जाने को मजबूर होना पड़ा और कई परिवार तो छिन्न-भिन्न हो गए.
यह कहानी काफी लम्बी हो सकती है, न केवल हिंदुस्तान बल्कि दुनिया के सभी देशों में आपदा की स्थिति बन  चुकी थी  तो क्या हमें इस आपदा के भरोसे खुद को छोड़ देनी चाहिए थी ? 

आप अगर देखेंगे तो इस दौरान कई लोगों के व्यापार को जहां बंद तक करना पड़ा, लेकिन कई ऐसे लोग हैं जिन्हे इस आपदा ने भी रोगजार के अवसर प्रदान किये. वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन पढ़ाई व्ययस्था, ऑनलाइन ट्यूशन  जैसे कई व्यवसाय थे जो कोरोना के कारण आज फल-फूल  रहे हैं. 
"विपत्तियां जीवन का हिस्सा हैं। उनसे बचना असंभव है। लेकिन हम उनसे कैसे निपटते हैं, यह हमारे ऊपर निर्भर करता है।" - डेल कार्नेगी

 याद रखें दोस्तों वह चाहे कोई भी विपरीत परिस्थिति  या आपदा हो आपको इस से निकलना होगा इसके लिए सबसे जरूरी यह है कि हमारे अंदर यह जिजीविषा पैदा करनी होगी हम इसे झेल  सकते हैं....

इस आपदा को एक अवसर  के रूप में देखकर जो इसका उपयोग कर लेगा लाइफ में आगे जाएगा इसमें कोई संदेह नहीं है. इसके लिए जरूरी है कि आप अपने एटीट्यूड और अपने माइंडसेट को बदलें क्योंकि यह आपका माइंडसेट  और एटीट्यूड ही है जो आपको इस आपदा में अवसर तलाश करने में मदद करेगा...

 याद रखें दोस्तों आपको इस आपदा से निकलने के लिए अपने अंदर साहस का संचार खुद करना होगा आपको अपने आसपास निराशावादी या नकारात्मक सोच के लोगों से खुद को दूर रखना होगा और इसके लिए यह जरूरी है कि सबसे पहले अपने अंदर सकारात्मक और पॉजिटिव ऊर्जा को कम नहीं होने दिया जाए.

"विपत्तियां हमें मजबूत बनाती हैं।" - नेल्सन मंडेला

याद रखें आपके जीवन में आपदाएं और विपत्तियां या  विपरीत परिस्थिति सभी परेशानियों के साथ ही आपके लिए एक नया सवेरा के रूप में  कई सारे अवसर भी लेकर आती है.

लेकिन यह आप पर निर्भर करता है कि आप इस आपदा में अवसर की तलाश कर उसे पाने के लिए होम कर देते हैं या एक निराशावादी की तरह बस इस आपदा के भरोसे खुद को छोड़ देते हैं.







नजरिया जीने का: मोदी का करिश्माई व्यक्तित्व, स्पष्ट दृष्टि और मजबूत लोकप्रियता होगी मुख्य चुनौती विपक्ष के लिए


Najariya jine ka Modi His Personality And Positive Things
विपक्षी गठबंधन भले हीं 2024 में जीत के कितने दावे कर ले, लेकिन सच तो यह है प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के करिश्माई व्यक्तित्व, स्पष्ट दृष्टि और मजबूत लोकप्रियता के आगे उसके मनसूबे सफल होने का कोई आसार नजर नहीं आर रहा. सच्चाई तो यह है कि मोदी के करिश्माई व्यक्तित्व, स्पष्ट दृष्टि और मजबूत लोकप्रियता ने उन्हें भारत के सबसे लोकप्रिय नेताओं में से एक बना दिया है। उनकी नीतियों और उनके नेतृत्व ने भारत को कई क्षेत्रों में प्रगति करने में मदद की है।

एक क्वोट्स है जो इस प्रकार है- "यह सोचना कठिन है कि क्या असंभव है। क्योंकि कल का सपना आज की आशा और कल की वास्तविकता है।" ऐसा लगता है कि यह उद्धरण विशेष रूप से भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को ध्यान में रखकर लिखा गया है जो इस पर बिल्कुल फिट बैठता है। मोदी अपने करिश्माई व्यक्तित्व के लिए जाने जाते हैं, जो न केवल दूरदर्शी और निर्णायक हैं, बल्कि वे भारत के लोगों के बीच लोकप्रिय भी हैं।

भले ही विपक्षी नेताओं ने आगामी 2024 के चुनाव में मोदी को हराने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी है, लेकिन इसमें कोई शक नहीं है कि वह एक करिश्माई और प्रभावी नेता हैं। वह अपने मजबूत संचार कौशल, लोगों से जुड़ने की क्षमता और भारत के लिए अपने दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व के कुछ उज्जवल और मजबूत बिंदुओं पर अगर गौर करें तो आप खुद ही अंदाजा लगा सकते हैं कि आखिर मोदी क्यों देश ही नहीं बल्कि दुनिया में अपने प्रद्तिंद्वंदियों को पीछ छोड़ कर लोकप्रियता में सबसे शीर्ष पर हैं. 

करिश्माई व्यक्तित्व: 

 मोदी एक स्वाभाविक नेता हैं जो लोगों को प्रेरित और प्रेरित करने में सक्षम हैं। वह एक प्रतिभाशाली वक्ता हैं जो भावनात्मक स्तर पर लोगों से जुड़ने में सक्षम हैं।

दूरदर्शी: 

मोदी  के पास भारत के भविष्य के लिए एक स्पष्ट दृष्टिकोण है। वह बड़ा सोचने से डरते नहीं हैं और वह भारत को वैश्विक नेता बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

निर्णायक: 

मोदी एक निर्णायक नेता हैं जो कठोर निर्णय लेने से नहीं डरते। वह जोखिम लेने से नहीं डरते और यथास्थिति को चुनौती देने को तैयार हैं।

कुशलता के साथ पथ पर अग्रसर: 

 मोदी एक कुशल नेता हैं जो काम करवाने में सक्षम हैं। वह कार्य सौंपने से नहीं डरता और वह लोगों को जवाबदेह ठहराने में सक्षम है।

लोकप्रियता: 

 मोदी एक लोकप्रिय नेता हैं जिन्हें भारतीय लोगों के बीच व्यापक समर्थन प्राप्त है। उन्हें एक मजबूत और निर्णायक नेता के रूप में देखा जाता है जो अपने वादों को पूरा करने में सक्षम है।


बेशक, नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व के कुछ नकारात्मक पहलू भी हैं, जैसे विपक्ष उन पर आरोप लगाता रहता है, हालांकि, उनकी सरकार को लोगों द्वारा दिया गया जनादेश और समर्थन दर्शाता है कि वह असली व्यक्ति हैं जो भारत को बदलने की कोशिश कर रहे हैं।

कुल मिलाकर नरेंद्र मोदी एक ऐसी शख्सियत हैं जो अपनी वाकपटुता से विपक्षी नेताओं को मजबूर करने की कला जानते हैं और उनके काम उनकी कार्यकुशलता और लोकप्रियता को साबित करने के लिए काफी हैं।

नजरिया जीने का: आखिर नरेंद्र मोदी की कौन से हैं वह खूबियां जो बनाती हैं लोकप्रिय और प्रभावशाली नेता @Mission 400


हाल के पांच राज्यों जैसे मध्य प्रदेश, राजस्थान, तेलंगाना. छत्तीसगढ़ और मिजोरम के चुनाव परिणामों ने यह साबित कर दिया है कि प्रधान मोदी का मैजिक आज भी  जारी है. इंडिया अलायन्स (Indian National Developmental Inclusive Alliance) ने अपने गठन के साथ जो दिवास्वप्न दिखाए थे अब लगता है कि उसका यथार्थ की धरातल पर उतारने में सबसे बड़ी समस्या विपक्षी नेताओं के लिए नरेंद्र मोदी का चमत्कारी व्यक्तिव है. विपक्षी नेताओं जिसमें सूत्रधार रहने वाले नेताओं के साथ ही खुद को प्रधान मंत्री का सपना देखने वाले नेताओं को भी यह पता है कि मोदी का आकर्षण आज भी ख़त्म नहीं हुआ है. इन राज्यों के चुनाव परिणामों ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया है. आइये देखते हैं कि आखिर नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व की क्या है वह खासियत जिसका आकर्षण आज भी बरक़रार है. 

अगर आप नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व का आकलन करेंगे तो पाएंगे कि उनकी कार्यकुशलता और कुशल नेतृत्व उनकी सबसे बड़ी खासियत है। वह एक बहुत ही मेहनती और लक्ष्य-उन्मुख नेता हैं साथ ही मुश्किल परिस्थितियों से कभी वह घबराते नहीं है  वह अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत करने और बाधाओं को पार करने से नहीं डरते। मोदी ने अपने राजनीतिक जीवन में कई चुनौतियों का सामना किया है, लेकिन उन्होंने हर बार उनका सामना किया है और सफलता प्राप्त की है।

मोदी की कार्यकुशलता और निर्णय लेने की क्षमता का अंदाजा इसी से लगाया जार सकता है कि उनके प्रधानमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान कभी भी ज्वलंत मुद्दों पर ठोस  निर्णय लेने में विलम्ब नहीं लेते । उन्होंने अपने कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण योजनाओं और नीतियों को लागू किया है, जैसे कि स्वच्छ भारत मिशन, डिजिटल इंडिया मिशन, और मेक इन इंडिया। इन योजनाओं और नीतियों ने भारत के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

न केवल प्रधान मंत्री के रूप में बल्कि मोदी की कार्यकुशलता का उदाहरण उनके गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान देखा जा सकता है जहाँ उन्होंने  गुजरात को भारत का सबसे विकसित राज्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने गुजरात में आर्थिक विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, और बुनियादी ढांचे के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण सुधार किए।

निसंदेह मोदी की कार्यकुशलता ने उन्हें भारत के सबसे लोकप्रिय नेताओं में से एक बना दिया है। वह एक ऐसे नेता हैं जिन पर लोग भरोसा करते हैं कि वह उनके लिए काम करेंगे।

मोदी के व्यक्तित्व की अन्य खासियतों में शामिल हैं:

उनका संवाद कौशल: 

मोदी एक बहुत ही प्रभावशाली वक्ता हैं और अपनी बातों को वह बेहद प्रभावशाली ढंग से श्रोताओं तक पहुंचते हैं । मोदी की क्षमता और हर वर्ग के श्रोताओं पर उनकी पकड़ का अंदाजा आप इसी से लगा सकते है कि वह किसाओं से लेकर महिलाओं तक और परीक्षा पर चर्चा कर विद्यार्थियों की समस्या पर अपने राय बेबाकी से देता है. वह अपने भाषणों के माध्यम से लोगों को प्रेरित और उत्साहित कर सकते हैं।

उनकी नेतृत्व क्षमता:

 मोदी एक दृढ़निश्चयी और कुशल नेता हैं और उनकी इस क्षमता को उनके विरोधी भी दबी जुबान से स्वीकार करते हैं। वह अपने अनुयायियों को एकजुट कर सकते हैं और उन्हें एक लक्ष्य की ओर ले जा सकते हैं।

उनका विजन: 

मोदी एक दूरदर्शी नेता हैं और देश के साथ एक व्यापक विजन पर काम करते हैं  जिसपर देश वासी भरोसा भी करते हैं. उन्होंने भारत के लिए एक मजबूत और समृद्ध भविष्य की कल्पना की है और उनके हर कदम यह साबित करते हैं जो देशवासी द्वारा उनके ऊपर किया गया भरोसा दिखा

नजरिया जीने का: धैर्य और आत्मविश्वास का समझें महत्व- प्रेरित करना, हार न मानना, क्षमताओं पर विश्वास, जोखिम लेना और अंत मे सफलता दिलाना


नजरिया जीने का: जीवन मे सफलता प्राप्त करने के लिए कठिन परिश्रम के अलावा भी हमें धैर्य और आत्मविश्वास का होना बहुत जरूरी है। आपका इस तथ्य को समझना होगा कि आजकल के कठिन और कम्पेटिटिव माहौल मे जहां सफलता आसान नहीं रहा गया है, हमें धैर्य और आत्मविश्वास को अपनाने कि नितांत जरूरत हैं।

धैर्य वह है जो हमें चुनौतियों का सामना करने और लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रेरित करता है, भले ही परिणाम तुरंत न मिलें। यह हमें हार न मानने और प्रयास करते रहने की शक्ति प्रदान करता है। वहीं आत्मविश्वास हमें अपनी क्षमताओं पर विश्वास करने और अपनी पूरी क्षमता का उपयोग करने में मदद करता है। यह हमें जोखिम लेने और नए अवसरों का पता लगाने के लिए प्रोत्साहित करता है।


 याद रखें तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद हम अपने लाइफ में सफल हो सकते हैं और इसके लिए सबसे जरुरी फैक्टर हैं  आपके अंदर आत्मविश्वास और धैर्य का होना.

आप विश्वास कीजिए जिनके पास आत्मविश्वास है वह इन विपरीत परिस्थितियों में भी अपने सफलता का मार्ग लेते हैं और इसके लिए सबसे जरूरी है  सकारात्मक और पॉजिटिविटी का होना.

दोस्तों विपरीत परिस्थितियों में सफलता प्राप्त करने के लिए धैर्य  का होना बहुत जरूरी है पर यह याद रखें यह आपको अपने अंदर ही विकसित करनी होगी.  

किसी कवि की ये पंक्तियाँ आप को विपरीत परिस्थितियों में लड़ने में सार्थंक हो सकती है. 
वह पथ क्या पथिक परीक्षा क्या
जिस पथ में बिखरे शूल ना हो
नाविक की धैर्य परीक्षा क्या 
यदि धाराएं प्रतिकूल ना हो. 


आप इतिहास के तमाम महापुरुषों की जीवन वृतांत को देखें तो यह साबित हो जाएगा की रातों-रात सफलता किसी को नहीं मिलती और यह भी उतना ही बड़ा सच है कि जिसने जितनी बड़ी सफलता हासिल किया है उसके मार्ग पर प्रकृति ने उतने ही कांटे और फूल बिछा कर रखे थे ऐसा नहीं है कि वे महापुरुषों और उन बाधाओं को देख अपने कदम वापस खींच लिए. 

तू रुख हवाओं का मोड़ दे,
हिम्मत की अपनी कलम उठा,
लोगों के भरम को तोड़ दे।
-नरेंद्र वर्मा

किसी भी कार्य को करने के बहुत सारे तरीके हो सकते हैं. और आपको भी अपने लिए तरीकों को चुनने की पूरी आजादी है. लेकिन यह याद रहें दोस्तों . अपने चुने गए तरीकों को जस्टिफाई करना भी आपको ही होगा. हाँ इसके लिए आप सफल महापुरुषों के अनुभवो और बताये गए रास्तों को आधार बना सकते हैं. 

विख्यात कवि/ साहित्यकार की उस कथन को याद करों दोस्तों..."महाशक्तियों के वेग में रोड़े अटकाने से उनके वेग कम नहीं होता बल्कि वो दुगुने वेग से आगे बढ़ती है." दोस्तों अब फैसला आपको करना है कि आप खुद का तुलना किसी मामूली शक्ति करते हैं या किसी महाशक्ति. अगर उत्तर महाशक्ति में है तो फिर याद रखें.आप इन बाधाओं को पार करने और निकलने के लिए दुगुने वेग से प्रयास करने वालों में से हैं. 
अक्सर ऐसा होता है कि अपनी राहों में मिलने वाले थोड़ी से चुनौतियों को हम बाधा का नाम देकर उससे परेशान हो जाते हैं कि हम खुद को परिस्थति के आगे विवश और लाचार समझने लगते हैं. पता नहीं हमें ऐसा क्यों लगता है कि परिस्थितियों का हमेशा हमारे पक्ष में हीं होनी चाहिए.

लेकिन क्या यह सच नहीं है दोस्तों कि परिस्थितियों हमेशा हमारे अनुकूल रहे हैं ऐसा नहीं करना चाहिए आखिर यह संसार सिर्फ हमारे लिए हीं तो नहीं बनी है. 

दोस्तों आपको आश्चर्य होगा के हम जिन बाधाओं और परिस्थितियों को अपनी सफलता के मार्ग का सबसे बाड़ा बाधा बताते हैं. सच्चाई तो यह है कि हम अपनी सफलता के मार्ग का बाधा खुद होते हैं. 

हमारी नेगेटिव सोच और खुद का अंदर पैदा किया गया नकारात्मक माइंडसेट प्रमुख बाधा होती है हमारी असफलता के पीछे….लेकिन हम दोष देते हैं उन परिस्थितियों और बाधाओं को. 
प्रमुख कोट्स:
  • "धैर्य ही शक्ति है। शांत रहकर आप किसी भी परिस्थिति का सामना कर सकते हैं।" - महात्मा गांधी
  • "आत्मविश्वास सफलता की पहली कुंजी है।" - स्वामी विवेकानंद
  • "अगर आप खुद पर विश्वास करते हैं, तो आप कुछ भी कर सकते हैं।" - अननोद मॉरिल
  • "धैर्यवान व्यक्ति ही विजेता होता है।" - विलियम आर्थर वॉर्ड
  • "हार मत मानो। हारने वाले ही हारते हैं।" - विनस्टन चर्चिल

Hanuman Jayanti 2024: : शक्ति, भक्ति और सेवा के अवतार भगवान हनुमान के इन टिप्स से बढ़ाएं आत्मविश्वास


Najariya  Jine Ka Build Self Confidence with Teaching of Lord Hanuman

Hanuman Jayanti 2024: शक्ति, भक्ति और सेवा के अवतार, भगवान हनुमान आत्मविश्वास पैदा करने के लिए मूल्यवान सबक प्रदान करते हैं। भगवान हनुमान के जीवन का अध्ययन करके, हम आत्मविश्वास के निर्माण के बारे में बहुमूल्य सबक सीख सकते हैं। उनका जीवन और कार्य उन शिक्षाओं से भरे हुए हैं जो हमें चुनौतियों से उबरने और खुद पर विश्वास करने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। अपने आप में उनके अटूट विश्वास, उच्च उद्देश्य के प्रति उनकी भक्ति, उनकी विनम्रता और दूसरों की सेवा करने की उनकी प्रतिबद्धता को अपनाकर, हम अपने भीतर उन्हीं गुणों को विकसित कर सकते हैं और साहस और विश्वास के साथ दुनिया का सामना कर सकते हैं। हनुमान की आत्मा अडिग थी। यहां तक कि जब दुर्गम बाधाओं का सामना करना पड़ा, तब भी वह अटूट विश्वास और दृढ़ संकल्प के साथ डटे रहे। यह सकारात्मक दृष्टिकोण की शक्ति और बाधाओं को दूर करने की क्षमता में विश्वास का उदाहरण देता है।

क्षमताओं में अटूट विश्वास

हनुमान का सबसे प्रतिष्ठित पराक्रम समुद्र पार करके लंका तक छलांग लगाना था। यह कार्य केवल शारीरिक शक्ति के बारे में नहीं था, बल्कि अपनी क्षमताओं में उनके अटूट विश्वास के बारे में भी था। उन्हें संदेह और डर का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने खुद पर भरोसा करने और छलांग लगाने का फैसला किया। यह हमें सिखाता है कि खुद पर विश्वास करना हमारे लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में पहला कदम है।



साहस के साथ करें चुनौतियों का सामना: 

भगवन कई बाधाओं के बावजूद भी कभी पीछे नहीं हटना, बल्कि साहस और दृढ़ संकल्प के साथ हर चुनौती का सामना करें ।

शक्तिशाली सेवक: 

अपार शक्ति और ताकत के बावजूद, हनुमान जी सदा विनम्र बने रहे और खुद को केवल भगवान राम का सेवक मानते थे और उन्होंने कभी भी मान्यता या प्रशंसा की मांग नहीं की। अपनी पूरी यात्रा के दौरान, हनुमान ने कई बाधाओं और प्रतिकूलताओं का सामना किया। वह कभी पीछे नहीं हटे, बल्कि साहस और दृढ़ संकल्प के साथ हर चुनौती का सामना किया। इससे हमें पता चलता है कि आत्मविश्वास का मतलब डर की अनुपस्थिति नहीं है, बल्कि खुद पर विश्वास के साथ इसका डटकर सामना करने की क्षमता है।

मार्गदर्शन की तलाश: 

अपनी क्षमताओं के साथ भी, उन्होंने महापुरुषों की बुद्धिमत्ता से हमशा सीखने और विकास के महत्व को महत्व दिया, जो याद दिलाता है कि आत्मविश्वास का मतलब सब कुछ जानना नहीं है, बल्कि सीखने और खुद को बेहतर बनाने के लिए ओपन माइंड होना जरुरी  है।

अदम्य भावना:

हनुमान की आत्मा अडिग थी। यहां तक कि जब दुर्गम बाधाओं का सामना करना पड़ा, तब भी वह अटूट विश्वास और दृढ़ संकल्प के साथ डटे रहे। यह सकारात्मक दृष्टिकोण की जो शक्ति है वह बाधाओं को दूर करने की क्षमता देता है। जब सीता को खोजने में कथित विफलता के कारण हनुमान निराश हो गए, तो उन्हें अपनी असली ताकत याद आई। उन्होंने अपनी भक्ति और योग्यता की स्मृति में एक पर्वत उखाड़कर अर्पित कर दिया। यह अधिनियम दर्शाता है कि हम सभी में अपार क्षमताएं हैं और इसे पहचानने से हमारा आत्मविश्वास बढ़ सकता है।

भगवान राम की सेवा: 

भगवान राम के प्रति हनुमान का समर्पण पूर्ण था जो हमें सिखाता है कि उच्च उद्देश्य पर ध्यान केंद्रित करने से हमें दिशा मिल सकती है और हमारा संकल्प मजबूत हो सकता है। भगवान राम की सेवा: भगवान राम के प्रति हनुमान का समर्पण पूर्ण था। उन्होंने अटूट निष्ठा और विश्वास के साथ उनकी सेवा की, उनके कार्यों पर कभी सवाल नहीं उठाया या उनके उद्देश्य पर संदेह नहीं किया। यह हमें सिखाता है कि उच्च उद्देश्य पर ध्यान केंद्रित करना, चाहे वह व्यक्तिगत लक्ष्य हो या कुछ बड़ा, हमें दिशा दे सकता है और हमारे संकल्प को मजबूत कर सकता है।

असफलताओं का सामना: 

हनुमान को अपनी यात्रा में कई असफलताओं का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी गलतियों से सीखा, खुद को संभाला और आगे बढ़ते रहे। यह हमें सिखाता है कि चुनौतियों पर काबू पाने और असफलताओं से सीखने से आत्मविश्वास बनता है।

टीम वर्क की शक्ति: 

हनुमान ने सीता की खोज में अन्य वानरों और सहयोगियों के साथ काम किया। उन्होंने टीम वर्क और सहयोग के महत्व को समझा, यह पहचानते हुए कि महान चीजें हासिल करने के लिए अक्सर दूसरों के समर्थन और सामूहिक ताकत की आवश्यकता होती है। यह हमें याद दिलाता है कि मजबूत रिश्ते बनाने और समर्थन मांगने से हमारा आत्मविश्वास बढ़ सकता है और हमें और अधिक हासिल करने के लिए सशक्त बनाया जा सकता है।


रामनवमी 2024: भगवान राम के जीवन से सीखें-जीवन की चुनौतियों को स्वीकार एवं सामना करने की कला

 



Ram Navami 2024: राम नवमी का पावन पर्व चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाते हैं.  जो इस साल अप्रैल 17 , 2024 को मनाई जा रही है। ऐसी मान्यता है कि त्रेतायुग में भगवान विष्णु ने राम और माता लक्ष्मी ने सीता के रूप मे अवतार लिया था। जिस दिन श्रीहरि ने राजा दशरथ के यहां माता कौशल्या की कोख से जन्म लिया था, उस दिन चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि थी और इसलिए इस तिथि को राम नवमी के रूप में मनाई जाती है।
 इस दिन चैत्र नवरात्रि का समापन भी होगा. चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को पुण्य तिथियों में से एक माना जाता है। भगवान राम, जिन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में जाना जाता है, उनका जीवन कठिनाइयों और त्याग से भरा था। 14 वर्ष का वनवास, प्रिय पत्नी सीता का अपहरण, रावण के साथ युद्ध - इन सबके बावजूद उन्होंने धैर्य, साहस और नैतिकता का परिचय दिया। 

भगवान राम का जीवन  फूलों का सेज नहीं बल्कि काँटों का ताज था लेकिन इसके बावजूद उन्होंने जीवन के उच्च  मर्यादाओं का पालन करते है मर्यादा पुरुषोतम  राम के रूप मे पूजा किए जाते हैं। जीवन मे चुनौतियों का आना निश्चित होता है लेकिन उनके सामने नतमस्तक हो जाना कायरता है। आइए हम भगवान राम के जीवन से सीखते हैं कि कैसे इन चुनौतियों को स्वीकार कर उनका सामना किया जाए।

 1. कर्म पर विश्वास:

भगवान राम ने सदैव अपना कर्म निष्ठापूर्वक किया, चाहे परिस्थितियां कैसी भी हों। उन्होंने हमें सिखाया है कि कर्म का फल हमें अवश्य मिलेगा, इसलिए हमें सदैव कर्म करते रहना चाहिए। आपको याद होगा कि राज्याभिषेक से ठीक एक दिन पहले, श्री राम को 14 साल के वनवास के लिए जाने का आदेश मिला। भगवान राम ने बिना किसी शिकायत के, प्रसन्न भाव से वह जीवन को वैसे ही स्वीकार कर अपनी नई यात्रा पर निकल पड़ते हैं।

2. धैर्य और संयम:

राजमहल मे रहने वाले भगवान राम के सामने वनवास के जीवन चुनौतियों से भरी रही होंगी इसमे किसी प्रकार का कोई संदेह नहीं। अपने पत्नी सीता और भरत लक्ष्मण के साथ वनवास के दौरान अनेक कठिनाइयों का सामना करने के बावजूद भगवान राम ने कभी भी धैर्य और संयम नहीं खोया। वनवास के दौरान मिलने वाले विपरीत परिस्थितियों का सामना करने के दौरान उन्होंने हमें सिखाया है कि जीवन में धैर्य और संयम बनाए रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

3. साहस और दृढ़ संकल्प:

रावण के साथ युद्ध में भगवान राम ने अदम्य साहस और दृढ़ संकल्प का प्रदर्शन किया। उन्होंने हमें सिखाया है कि जीवन में आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए साहस और दृढ़ संकल्प होना आवश्यक है।

4. सत्य और न्याय का मार्ग:

जीवन में पैदा होने वाले विपरीत परिस्थितियों के सामने भी कभी भी भगवान राम ने सत्य और न्याय का मार्ग नहीं त्याग। सत्य के मार्ग पर चलना हमेशा से काँटों के पथ पर चलने के समान होता है और भगवान राम ने हमें सिखाया है कि जीवन में सत्य और न्याय के मार्ग पर चलना चाहिए, चाहे इसके लिए हमें कितने भी त्याग क्यों न करने पड़ें।

5. क्षमा और करुणा:

मर्यादा पुरुषोतम राम भगवान राम क्षमा और करुणा के प्रतीक थे और उन्होंने अपने शरण मे आने वाले आगंतुकों को कभी भी मना नहीं किया। यहाँ तक कि उन्होंने रावण के भाई विभीषण को क्षमा करने मे विलंब नहीं किया। सच तो यह है कि जीवन में क्षमा और करुणा का क्या महत्व है, यह हमे भगवान राम के जीवन से सीख सकते हैं।

6. मित्रता और सेवा:

भगवान राम ने हनुमान और सुग्रीव जैसे मित्रों का साथ पाकर हमें सिखाया है कि जीवन में सच्ची मित्रता का क्या महत्व है। उन्होंने शबरी, निषादराज आदि की सेवा करके हमें सिखाया है कि दूसरों की सेवा करने से जीवन सार्थक होता है।

7. विनम्रता और सरलता:

राजकुमार होने के बावजूद भगवान राम सदैव विनम्र और सरल रहे। उन्होंने हमें सिखाया है कि जीवन में विनम्रता और सरलता का गुण अपनाना चाहिए। उन्होंने राजाओं से लेकर साधुओं और यहाँ तक कि जानवरों तक सभी के साथ समान व्यवहार किया।

Ramnavmi 2024-नजरिया जीने का: भगवान राम से सीखें परिवार, एकता और रिश्तों का महत्व

 


Ramnavmi 2024: भगवान राम, जिन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम के नाम से भी जाना जाता है, ने हमेशा अपने निजी सुख सुविधा से अधिक अपने परिवार, राज्य, को महत्व दिया। सच तो यह है कि  भगवान राम का जीवन एकता, परिवार और रिश्तों को महत्व देने की प्रेरणादायक कहानी है जिसकी आज के संदर्भ मे लोगों को सबसे अधिक जरूरत है। आज जहां हम अपने निजी लाभ के लिए परिवार से अलग हो जाना और खुद के बारे मे सोचने को प्रोफेशनल और समझदार मानते हैं, सच्चाई यह है कि हम अपने जीवन मे भगवान राम के आदर्शों को भूल गए हीं जिन्होंने अपने जीवन को इन मूल्यों को अपनाने के लिए न्योछावर कर मर्यादा पुरुषोतम के रूप मे पूजनीय बने।

एकता

भगवान राम ने सदैव एकता पर बल दिया और जीवन मे हर समय अपने परिवार और अपने सहयोगियों कि सहायता के लिए सदैव उपस्थितः रहे । उन्होंने अपने भाई लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के साथ मिलकर वनवास के कष्टों का सामना किया। उन्होंने वनवासियों और वनचरों को भी एकजुट किया और रावण के विरुद्ध युद्ध में उनका नेतृत्व किया।

भगवान राम का यह एकता और त्याग  हमें सिखाता है कि जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए एकता अत्यंत आवश्यक है। हमें अपने परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति समर्पित रहना चाहिए और एकता के सूत्र में बंधकर काम करना चाहिए।

परिवार

भगवान राम के लिए परिवार सर्वोपरि था और इसकी झलक हर समय प्राप्त होती है जब उन्हे परिवार के सदस्यों के लिए त्याग या समर्पण कि जरूरत होती है। उन्होंने अपने पिता दशरथ के वचन को पूरा करने के लिए वनवास का कष्ट सहन किया और अपनी पत्नी सीता को रावण से मुक्त कराने के लिए युद्ध लड़ा। उन्होंने अपने भाईयों और माता कैकेयी का भी सदैव सम्मान किया।

भगवान राम हमेशा प्रतिकूल परिस्थितियों मे भी एक परिवार के रूप में एक साथ खड़े रहें एकजुटता का ही वह फल होता है जो आपको सबसे बुरे तूफानों से निपटने की शक्ति देता है। हर रिश्ता हमारे लिए लालच, क्रोध और शक्ति से ऊपर उठने का एक अवसर होता है और भगवान राम ने जीवन मे हर अवसर पर इसे साबित किया कि मर्यादा और उच्च आदर्श उनके लिए सबसे जरूरी है बजाए लालच, क्रोध और शक्ति है। अगर हम प्यार को हर चीज से ऊपर रखते हैं, जीवन के प्रति हमारा मूल्य और सम्मान अपने आप बढ़ जाता है। इसके अलावा, यह हमारी आत्मा को शुद्ध करता है और हमें अच्छे कर्म के मार्ग पर स्थापित करता है।

भगवान राम का परिवार और उसके सदस्यों के प्रति प्रेम हमें सिखाता है कि जीवन में परिवार का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान होता है। हमें अपने परिवार के सदस्यों के प्रति सदैव प्रेम, स्नेह और सम्मान का भाव रखना चाहिए और उनके सुख-दुख में सदैव उनके साथ खड़ा रहना चाहिए।

रिश्ते

भगवान राम ने अपने जीवन में सभी रिश्तों को महत्व दिया फिर चाहे वह पुत्र के रूप में हो, पति के रूप मे हो चाहे भाई के रूप मे  उन्होंने गुरु वशिष्ठ, मित्र हनुमान, भक्त विभीषण और शत्रु रावण के साथ भी सदैव सम्मान और विनम्रता का व्यवहार किया। अगर आप भगवान राम के जीवन के विभिन्न पहलुओं को देखेंगे तो पाएंगे कि उन्होंने सभी रिश्तों को महत्व दिया। उन्होंने अपने पिता के सम्मान की रक्षा के लिए स्वेच्छा से 14 साल जंगल में बिताने का फैसला किया। इस दौरान, लक्ष्मण - उनके सौतेले भाई - भी उनका समर्थन करने के लिए उनके साथ वनवास गए।


भगवान राम के परिवार और अन्य सहकर्मियों के संबंधों को देखकर यह कहा जा सकता है कि जीवन में सभी रिश्ते अनमोल होते हैं। हमें अपने रिश्तेदारों, मित्रों और परिचितों के साथ सदैव प्रेम, विश्वास और सद्भाव का भाव रखना चाहिए और उनके साथ मजबूत संबंध बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए।

भगवान राम का जीवन एकता, परिवार और रिश्तों को महत्व देने का एक प्रेरणादायक उदाहरण है। उनके जीवन से हमें अनेक शिक्षाएं मिलती हैं जो हमें अपने जीवन में इन मूल्यों को अपनाने के लिए प्रेरित करती हैं। हमें सदैव एकता के सूत्र में बंधकर काम करना चाहिए, अपने परिवार के प्रति समर्पित रहना चाहिए, और सभी रिश्तों को महत्व देना चाहिए।


नजरिया जीने का: युवा भगवान राम के जीवन से सीखें -आत्मनिरीक्षण और आत्म-खोज की जरूरत


आत्मनिरीक्षण और आत्म-खोज आज के युवाओं के लिए सबसे जरूरी  है जो न केवल उन्ही सफलता के लिए प्रेरित करती है बल्कि इससे वे इस संबंध मे भगवान राम की शिक्षाओं को अपनाकर, एक ऐसा रास्ता बना सकता है जो न केवल व्यक्तिगत सफलता की ओर ले जाता है बल्कि बड़े पैमाने पर समाज और दुनिया की भलाई की ओर भी ले जाता है।

मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान राम का जीवन और उनका त्याग हमेशा से  लोगों के लिए आदर्श रहा है। जीवन मे तमाम उत्तार चड्डाव और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद भगवान राम ने कभी भी रिश्तों के प्रति श्रद्धा, प्रेम और स्नेह का साथ कभी नहीं छोड़ा। 

भगवान राम: प्रेरणा श्रोत

सच तो यह है कि भगवान राम  का जीवन आज के युवाओं के लिए प्रेरणा श्रोत है जो जीवन मे किसी भी प्रतिकूल परिस्थितियों में लचीलापन, परंपरा और अनुकूलनशीलता के बीच नाजुक संतुलन और आत्मनिरीक्षण की शक्ति  को  प्राप्त करने और उसे खुद पर अनुशासन के रूप के लागू करने के लिए तैयार करती है।

आत्मनिरीक्षण और आत्म-खोज

 भगवान राम का जीवन हमें खासकर आज के युवाओं को यह सिखाता है कि जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए आत्मनिरीक्षण और आत्म-खोज अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। हमें अपने जीवन के उद्देश्य को समझने और आध्यात्मिक चेतना प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए।

आप अगर भगवान राम  के जीवन को गंभीरता से देखेंगे तो पाएंगे कि उन्होंने ने अपने जीवन में अनेक बार आत्मनिरीक्षण और आत्म-खोज की  और अपने जीवन के उद्देश्य और मायने को समझने का प्रयास किया। लोगों  को जीवन और धर्म का उपदेश देते हुए भी मर्यादा पुरुषोतम राम ने वनवास के दौरान उन्होंने ऋषि-मुनियों से ज्ञान प्राप्त करने का कोई मौका नहीं जाने दिए। 

स्वयं की गहन खोज

आत्मनिरीक्षण और आत्म-खोज के लिए भगवान राम की यात्रा केवल एक बाहरी खोज नहीं है, बल्कि स्वयं की गहन खोज है जिसके लिए वह जीवन मे आने वाले हर किसी से कुछ भी सीखने का कोई अवसर नहीं छोड़ते। जीवन मे विभिन्न विपरीत परिस्थितियों  से निबटने के दौरान भी कभी भी वह धैर्य नहीं खोते  हैं साथ ही उनके निर्णय गहन आत्मनिरीक्षण और अपने कर्तव्यों के प्रति गहन जागरूकता द्वारा निर्देशित होते हैं।

 निरंतर विकर्षणों और बाहरी प्रभावों के युग में, रामायण आज के युवाओं को आत्मनिरीक्षण के लिए क्षण निकालने के लिए प्रेरित करती है। स्वयं को, अपनी प्रेरणाओं को, और व्यक्तिगत विकल्पों के प्रभाव को समझना एक परिवर्तनकारी प्रक्रिया बन जाती है जो अधिक उद्देश्यपूर्ण और पूर्ण जीवन की ओर ले जा सकती है।


नजरिया जीने का- रामनवमी 2024: भगवन राम की चरित्र की पांच विशेषताएं जो मर्यादा पुरुषोत्तम बनाती है

Najariya jine ka Qualities of Lord Ram

राम नवमी मुख्य रूप से एक हिंदू त्योहार है जो चैत्र महीने (हिंदू कैलेंडर) के शुक्ल पक्ष के नौवें दिन मनाया जाता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार, यह दिन आमतौर पर मार्च और अप्रैल के महीनों के बीच आता है। 2024 में राम नवमी 17 अप्रैल, बुधवार को है। 
भगवान राम के चरित्र की ये पांच महिमाएं हमें जीवन में सत्य, धर्म, दया, वीरता और नैतिकता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं। भगवान राम ने विषम परिस्थितियों में भी नीति सम्मत रहेऔर धर्म का मार्ग उन्होंने कभी नहीं छोड़ा । उन्होंने वेदों और मर्यादा का पालन करते हुए सुखी राज्य की स्थापना की तथा अपने निकट आने वाले सभी का कल्याण किया चाहे वह पशु रूप में हो, पक्षी रूप में हो, अमीर  हो गरीब हो । स्वयं की भावना व सुखों से समझौता कर न्याय और सत्य का साथ दिया। बाली का वध करने, रावण का संहार करने या पिता के वचन की रक्षा के लिए वन का मार्ग चुनने जैसे अनेक उदाहरण है जहाँ भगवान् राम ने धर्म और न्याय का मार्ग कभी नहीं छोड़ा. 

भगवान राम के चरित्र की ये  महिमाएं हमें जीवन में सत्य, धर्म, दया, वीरता और नैतिकता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं।

सत्य:

 मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम सत्य के पुजारी थे। उन्होंने अपने जीवन में चाहे परिस्थिति कितनी भी कठिन क्यों न हो, उन्होंने झूठ कभी नहीं बोलै। उन्होंने अपने पिता दशरथ के वचन का पालन करने के लिए 14 साल का वनवास स्वीकार किया लेकिन पुत्र धर्म का त्याग नहीं किया।

धर्म: 

भगवान राम धर्म के पालनकर्ता थे। उन्होंने अपने जीवन में हमेशा धर्म के मार्ग पर चलने का प्रयास किया। भाईयों के लिए त्याग और समर्पण के लिए भी वे हमेशा तैयार रहे. उन्होंने सभी भाइयों के प्रति सगे भाई से बढ़कर त्याग और समर्पण का भाव रखा और स्नेह दिया। धर्म का पालन करना उन्होंने तब भी नहीं छोड़ा और  उन्होंने रावण जैसे अत्याचारी का वध करके धर्म की रक्षा की। 

दया: 

भगवान राम दयालु और करुणावान थे। उन्होंने हमेशा दूसरों की मदद करने की कोशिश की। उन्होंने सुग्रीव और हनुमान जैसे अनेकों लोगों की मदद की।  भगवान राम ने अपनी दयालुता के कारण उनकी सेना में पशु, मानव व दानव सभी थे और उन्होंने सभी को आगे बढ़ने का मौका दिया।

बेहतर प्रबंधक

भगवान राम न केवल कुशल प्रबंधक थे, बल्कि वे अपने सभी स्वजनों और सहकर्मियों को साथ लेकर चलने वाले थे। वे सभी को विकास का अवसर देते थे व उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते थे। सुग्रीव को राज्य, हनुमान, जाम्बवंत व नल-नील को भी उन्होंने समय-समय पर नेतृत्व करने का अधिकार दिया और इसी वजह से लंका जाने के लिए उन्होंने व उनकी सेना ने पत्थरों का सेतु बना लिया था। 

नैतिकता: 

भगवान राम नैतिकता के आदर्श थे। उन्होंने अपने जीवन में हमेशा नैतिकता का पालन किया। उन्होंने रावण के साथ युद्ध करते समय भी उसके साथ नैतिकता का पालन किया।