नजरिया जीने का: विपत्तियां यह अहसास दिलाती हैं कि आप किस मिटटी के बने हैं, घबराएं नहीं सामना करें

Opportunity in Adversity
नजरिया जीने का: जब हम मुश्किलों का सामना करते हैं, तभी हमारी तैयारियां और अपने शक्ति का एहसास होती है। जीवन का यथार्थ भी यही है कि यह मुश्किल समय हीं है जो हमें सिखाता है कि हम कितने मजबूत और लचीले हैं। निसंदेह विपत्तियां दर्दनाक और चुनौतीपूर्ण होती हैं, लेकिन वे हमें सिखाने और विकसित करने के लिए भी अमूल्य अवसर प्रदान करती हैं। अगर हम इन अनुभवों से सीखने और बढ़ने के लिए तैयार रहें, तो हम मजबूत और अधिक पूर्ण जीवन जी सकते हैं।

"कठिनाई ही असली परीक्षा है जिससे मजबूत आत्माएं विकसित होती हैं।" - महात्मा गांधी

 विश्वास करें, विपतियों या मुसीबतों के सामना करने के समय हमारे पास दो विकल्प होते हैं- या तो हम उनके सामने समर्पण कर लें या उनका सामना करने का हिम्मत पैदा करें। जो लोग विपत्तियों का सामना सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ करते हैं, वे अक्सर अधिक लचीले, दृढ़निश्चयी और आत्मविश्वासी बन जाते हैं। उनका सामना करने कि यह शक्ति हमें अपनी कमजोरियों को खत्म करने और उन पर विजय प्राप्त करने का अवसर देता है। विपत्तियां हमें दूसरों के प्रति करुणा और सहानुभूति विकसित करने में भी मदद करती हैं।

अंधेरे में ही तारे चमकते हैं। - मार्टिन लूथर किंग जूनियर

विपत्तियां जीवन का एक हिस्सा हैं और वास्तव में विपत्तियां हमारे ज्जीवन की वह आकस्मिक घटनाएं होती हैं जो हमारे जीवन में परेशानी और दुःख लाती हैं। विपत्तियाँ अक्सर नकारात्मक मानी जाती हैं, क्योकि इसके आगमन के साथ ही हमारे जीवन में उथल पुथल आ जाती ही यही हमारा सामान्य जीवन को ब्रेक सा लग जाता है. विपत्तियाँ अक्सर नकारात्मक मानी जाती हैं, लेकिन, यदि हम उनका सामना सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ करते हैं, तो वे हमें बेहतर इंसान बनने में मदद कर सकती हैं. हालांकि, विपत्तियाँ अक्सर नकारात्मक मानी जाती हैं, लेकिन वे हमारे जीवन में सकारात्मक भूमिका भी निभा सकती हैं। 

सच तो है है कि यह हमारे जीवन में आने वाली विपत्तियां हीं होती है जो हमारे साहस और धैर्य और दूसरों की मदद करने की भावना का अहसास दिलाती है. विपत्तियां के केवल हमें यह बताती है कि हम किस मिट्टी के बने हैं बल्कि यह हमें समस्याओं को सुलझाने की क्षमता और जीवन के मूल्यों को समझने की क्षमता भी विकसित करने में मदद करता है. 
"जो तुम्हें नहीं मारता वो तुम्हें मजबूत बनाता है।" - फ्रेडरिक नीत्शे

आपदा या विपरीत परिस्थितियों में माध्यम से नेचर या प्रकृति भी हमारी परीक्षा लेती है..... जीवन में जिसको जितना आगे जाना होता है उसके  रास्ते में प्रकृति उतना ही शूल और  कांटे बिछा के रखती है....... 
अगर आप उन कांटों के डर से वापस लौट जाएंगे तो आपकी यात्रा वहीँ  जायेगी....लेकिन याद रखें जिसे जीवन में जितना आगे जाना होता है उसे प्रकृति अपनी ओर से उतना ही ऊर्जा प्रदान कर उसे सकारात्मक ऊर्जाओं से पूर्ण कर भेजती है ताकि वे लोग लाइफ में मिलने वाले तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद वह अपने सफलता के कीर्तिमान स्थापित करते हैं.


विपत्तियों से निकलने के लिए सबसे जरुरी 

विपत्तियों से निबटना यह सच है की आसान नहीं होता लेकिन इंसान अगर ठान ले तो यह इतना मुश्किल भी नहीं होती. विपत्तियों का आना तो अपने हाथ में नहीं होती लेकिन आपकी मानसिक स्थिति, आपकी सोच और आपकी सकारात्मक सोच अवश्य ही इससे बाहर निकलने में मदद कर सकती है. विपत्तियों से निकलने के लिए सबसे जरुरी है कि सकारात्मक रहें। मुश्किल परिस्थितियों में भी सकारात्मक रहने की कोशिश करें। इससे आपको अपने लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करने और आगे बढ़ने में मदद मिलेगी। अपने परिवार, दोस्तों और समुदाय से मदद मांगने से न डरें। दूसरों की मदद से आप मुश्किल समय में बेहतर तरीके से निपट पाएंगे। अपने अनुभव से सीखें। विपत्तियों से सीखने से आपको भविष्य में बेहतर तरीके से तैयार रहने में मदद मिलेगी।
"हर मुसीबत अपने साथ एक उपहार लाती है, बस हमें उसे ढूंढना होता है।" - चीनी कहावत

आपदा में भी अवसर 

सच्चाई तो यह है कि इस आपदा में भी हमें अवसर की तलाश करनी होती है क्योंकि आपदा या विपरीत परिस्थितियां हमारे लिए एक अवश्यंभावी प्रहार  होती है जो हमारे वश में नहीं हो सकते.
क्या आपदा या बुरा समय हमसे पूछ कर आती है, नहीं ना. आपदा का आना हमारे लिए नियति है लेकिन यह हमारी सूझ- बुझ और इच्छाशक्ति होती है कि  हम  आगे टूट जाते हैं या उस आपदा में भी अवसर तलाश कर उससे निकलने का प्रयास करते हैं. 
"विपत्तियों से निपटने का सबसे अच्छा तरीका है कि हम उनका सामना करें।" - अल्बर्ट आइंस्टीन

अगर आप देखेंगे तो पिछले कुछ सालों से कोविड-19 नामक एक नए आपदा ने पूरी दुनिया को अस्त-व्यस्त करने के साथ ही कई देशों के विकास दर को न जाने कई साल  पीछे कर दिया है. कितने जानों को असामायिक काल के ग्रास में जाने को मजबूर होना पड़ा और कई परिवार तो छिन्न-भिन्न हो गए.
यह कहानी काफी लम्बी हो सकती है, न केवल हिंदुस्तान बल्कि दुनिया के सभी देशों में आपदा की स्थिति बन  चुकी थी  तो क्या हमें इस आपदा के भरोसे खुद को छोड़ देनी चाहिए थी ? 

आप अगर देखेंगे तो इस दौरान कई लोगों के व्यापार को जहां बंद तक करना पड़ा, लेकिन कई ऐसे लोग हैं जिन्हे इस आपदा ने भी रोगजार के अवसर प्रदान किये. वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन पढ़ाई व्ययस्था, ऑनलाइन ट्यूशन  जैसे कई व्यवसाय थे जो कोरोना के कारण आज फल-फूल  रहे हैं. 
"विपत्तियां जीवन का हिस्सा हैं। उनसे बचना असंभव है। लेकिन हम उनसे कैसे निपटते हैं, यह हमारे ऊपर निर्भर करता है।" - डेल कार्नेगी

 याद रखें दोस्तों वह चाहे कोई भी विपरीत परिस्थिति  या आपदा हो आपको इस से निकलना होगा इसके लिए सबसे जरूरी यह है कि हमारे अंदर यह जिजीविषा पैदा करनी होगी हम इसे झेल  सकते हैं....

इस आपदा को एक अवसर  के रूप में देखकर जो इसका उपयोग कर लेगा लाइफ में आगे जाएगा इसमें कोई संदेह नहीं है. इसके लिए जरूरी है कि आप अपने एटीट्यूड और अपने माइंडसेट को बदलें क्योंकि यह आपका माइंडसेट  और एटीट्यूड ही है जो आपको इस आपदा में अवसर तलाश करने में मदद करेगा...

 याद रखें दोस्तों आपको इस आपदा से निकलने के लिए अपने अंदर साहस का संचार खुद करना होगा आपको अपने आसपास निराशावादी या नकारात्मक सोच के लोगों से खुद को दूर रखना होगा और इसके लिए यह जरूरी है कि सबसे पहले अपने अंदर सकारात्मक और पॉजिटिव ऊर्जा को कम नहीं होने दिया जाए.

"विपत्तियां हमें मजबूत बनाती हैं।" - नेल्सन मंडेला

याद रखें आपके जीवन में आपदाएं और विपत्तियां या  विपरीत परिस्थिति सभी परेशानियों के साथ ही आपके लिए एक नया सवेरा के रूप में  कई सारे अवसर भी लेकर आती है.

लेकिन यह आप पर निर्भर करता है कि आप इस आपदा में अवसर की तलाश कर उसे पाने के लिए होम कर देते हैं या एक निराशावादी की तरह बस इस आपदा के भरोसे खुद को छोड़ देते हैं.







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