मध्य प्रदेश का Mini Brazil: जानें क्या है नशे के बदनाम अड्डे से देश की Football Nursery तक के सफर की कहानी

नशे की लत के लिए कुख्यात रहा मध्य प्रदेश का Mini Brazil आज  Football क्रांति का जन्म स्थली बन चुकी है। इस स्थान की चर्चा पोल मंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात के संस्करण मे किया था। क्या आप जानते हैं कि  कभी यह इलाका नशे के लिए बदनाम था। यह इलाका अवैध शराब के लिए बदनाम था और यहाँ के युवा पूरी तरह नशे की गिरफ्त में थे और इसका खामियाजा इस माहौल का सबसे बड़ा नुकसान यहाँ के युवाओं को हो रहा था| लेकिन अब देश मे यह Football क्रांति का जन्म स्थली बन चुकी है जो अब धीरे- धीरे पूरे क्षेत्र में फैल रही है | आज शहडोल और उसके आसपास के काफ़ी बड़े इलाके में 1200 से ज्यादा Football club बन चुके हैं | इसकी चर्चा इसकी चर्चा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात के जुलाई 2023 के संस्करण मे किया था। आइए जानते हैं कि क्या है नशे के बदनाम अड्डे से देश की Football Nursery तक के सफर की कहानी। 

शहडोल में एक गांव है बिचारपुर

मध्य प्रदेश (एम.पी.) के शहडोल में एक गांव है बिचारपुर | बिचारपुर को Mini Brazil कहा जाता है | Mini Brazil इसलिए, क्योंकि ये गांव आज फुटबाल के उभरते सितारों का गढ़ बन गया है | 

रईस एहमद का लग्न और मेहनत 

बिचारपुर गांव के Mini Brazil बनने की यात्रा दो-ढाई दशक पहले शुरू हुई थी | उस दौरान, बिचारपुर गांव अवैध शराब के लिए बदनाम था, नशे की गिरफ्त में था | इस माहौल का सबसे बड़ा नुकसान यहाँ के युवाओं को हो रहा था | एक पूर्व National Player और coach रईस एहमद ने इन युवाओं की प्रतिभा को पहचाना | रईस जी के पास संसाधन ज्यादा नहीं थे, लेकिन उन्होंने, पूरी लगन से, युवाओं को, Football सिखाना शुरू किया | 

कुछ साल के भीतर ही यहाँ Football इतनी popular हो गयी, कि बिचारपुर गांव की पहचान ही Football से होने लगी | अब यहाँ Football क्रांति नाम से एक प्रोग्राम भी चल रहा है | इस प्रोग्राम के तहत युवाओं को इस खेल से जोड़ा जाता है और उन्हें training दी जाती है | ये प्रोग्राम इतना सफ़ल हुआ है कि बिचारपुर से National और state level के 40 से ज्यादा खिलाड़ी निकले हैं | ये Football क्रांति अब धीरे- धीरे पूरे क्षेत्र में फैल रही है | शहडोल और उसके आसपास के काफ़ी बड़े इलाके में 1200 से ज्यादा Football club बन चुके हैं | 

यहाँ से बड़ी संख्या में ऐसे खिलाड़ी निकल रहे है, जो, National level पर खेल रहे हैं | Football के कई बड़े पूर्व खिलाड़ी और coach, आज, यहाँ, युवाओं को, Training दे रहे हैं | एक आदिवासी इलाका जो अवैध शराब के लिए जाना जाता था, नशे के लिए बदनाम था, वो अब देश की Football Nursery बन गया है|

(स्रोत-मन की बात कार्यक्रम)

   

Mazargues War Cemetery, France: Facts in Brief


मज़ार्ग्यूज़ युद्ध समाधि स्थल यूरोप में शांति के लिए लड़ने वाले भारतीय सैनिकों की वीरता और बलिदान का इतिहास को खूबसूरती से सँजोये हुए  है।  मज़ार्ग्यूज़ युद्ध समाधि स्थल दोनों देशों के लोगों के बीच उन गहरे संबंधों का स्मरण कराता है जो भारत और फ्रांस संबंधों को विकसित करते रहे हैं। मज़ार्ग्यूज़ युद्ध समाधि स्थल स्थल यूरोप में शांति के लिए लड़ने वाले भारतीय सैनिकों की वीरता और बलिदान के इतिहास को संरक्षित करता है।

  • मज़ार्ग्यूज़ युद्ध समाधि स्थल, बुचेस-डु-रोन विभाग का मुख्य शहर है। मार्सिलेस एक दक्षिणी उपनगर (9वां अरोन्डिसमेंट) है, जो मार्सिले के केंद्र से लगभग 6 किलोमीटर दूर है। 
  • 1914-18 के युद्ध के दौरान फ्रांस में भारतीय सैनिकों का बेस मार्सिले था और पूरे युद्ध के दौरान रॉयल नेवी, मर्चेंट नेवी, ब्रिटिश सैनिक और लेबर यूनिट बंदरगाह में काम करते थे या इससे होकर गुजरते थे।
  • शहर के चार कब्रिस्तानों का इस्तेमाल मुख्य रूप से मार्सिले में मारे गए राष्ट्रमंडल बलों के अधिकारियों और सैनिकों को दफनाने के लिए किया गया था। 
  • शहर के पूर्वी हिस्से में स्थित सेंट पियरे समाधि स्थल में 1914-16 में हिंदू सैनिकों और मजदूरों के शवों का अंतिम संस्कार किया गया था।
  •  ले कैनेट ओल्ड कब्रिस्तान और ले कैनेट न्यू कब्रिस्तान, उत्तर की ओर स्थित हैं, जो 1917-19 में भारतीय सैनिकों और भारतीय, मिस्र और चीनी मजदूरों को दफनाने के स्थान थे।

श्री एस्ट्रोलॉजी: मूलांक 01 (जन्म तिथि 01, 10, 19, 28) - जानें व्यवहार, भविष्य, गुण और अन्य विशेषताएं

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मूलांक 01 (जन्म 01, 10, 19, 28): अंक ज्योतिष या ज्योतिष के अनुसार, अंग्रेजी की तारीख को जन्म लेने वाले लोग जो मूलांक 01 के अंतर्गत आते हैं, उनमें जन्म की तारीख 01, 10, 19, 28 को जन्म लेने वाले लोग शामिल हैं। अर्थात अंक ज्योतिष या रूलिंग संख्या 1 मे वैसे लोग आते हैं जो लोग किसी भी महीने के अंक 1 या 10 (1+0=1), 19 (1+9=1), 28 (2+8=1) से संबंधित हैं, वे अंक 1 की श्रेणी में आते हैं, उन पर सूर्य ग्रह का शासन होता है।

वे मुख्य रूप से दृढ़ निश्चयी और आज्ञाकारी स्वभाव के होते हैं जो उन्हें सबसे अच्छे और स्वाभाविक नेता बनाता है। उनके पास एक अच्छी नियंत्रण और नेतृत्व करने की शक्ति होती है। ये लोग सभी को प्रकाश देते हैं और जीवन में स्पष्टता के साथ इस अंधेरे ब्रह्मांड को रोशन करते हैं। 

सभी अंग्रेजी महीनों में जन्म तिथि 01, 10, 19 और 28 (मूल अंक 01) वाले व्यक्तियों के अंक ज्योतिष के सभी पहलुओं को जानें, प्रसिद्ध ज्योतिषी कुंडली विशेषज्ञ हिमांशु आर. शेखर से।

मूलांक 01 (जन्म तिथि 01, 10, 19, 28) वाले लोग स्वाभिमानी होने के साथ-साथ महत्वाकांक्षी भी होते हैं और अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए दृढ़ इच्छा शक्ति रखते हैं। ऐसे लोग निर्णय लेने में अपनी स्पष्टता के लिए जाने जाते हैं और शायद ही कभी असमंजस की स्थिति में होते हैं। वे अपने किसी भी काम को करने से पहले उचित योजना बनाकर ही आगे बढ़ते हैं और अपने कामों में किसी भी तरह का हस्तक्षेप बिल्कुल भी पसंद नहीं करते हैं।

नेतृत्व करने की क्षमता

मूलांक 01 (जन्म तिथि 01, 10, 19, 28) वाले लोग नेतृत्व करने की क्षमता के साथ पैदा होते हैं। ऐसे लोगों को अपने काम में हस्तक्षेप पसंद नहीं होता है और वे चीजों को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत करना पसंद करते हैं। ऐसे लोग योजना बनाने वाले होते हैं और साथ ही रणनीति बनाकर अपने प्रोजेक्ट को लागू करना चाहते हैं। ऐसे लोगों की नेतृत्व करने की अनोखी क्षमता का लोहा न केवल उनके परिवार के सदस्य बल्कि उनके दोस्त और परिचित भी मानते हैं और अक्सर इस गुण का फायदा उठाते हैं। जीवन में अनुशासन सर्वोपरि है.

अनुशासन का पालन करने वाले 

मूलांक 01 वाले लोग (जन्म 01, 10, 19, 28) अपने जीवन में अनुशासन को बहुत महत्व देते हैं। जीवन में लक्ष्य निर्धारित करने से लेकर उसे पूरा करने तक, हर जगह आपका अनुशासन नियंत्रण में रहता है। जीवन में घृणित व्यवहार, आचरण, जीवनशैली आदि आपसे घृणा करती है। आपके जीवन में अनुशासन का महत्व इस बात से लगाया जा सकता है कि आप नकारात्मक और निराशावादी लोगों और विचारों या विचारधाराओं वाले लोगों से तुरंत दूर हो जाते हैं।

प्रभावशाली व्यक्तित्व

मूलांक 01 वाले लोग (जन्म 01, 10, 19, 28) प्रभावशाली व्यक्तित्व के स्वामी होते हैं। स्वाभिमानी और महत्वाकांक्षी तथा मेहनती होने के कारण ऐसे लोग अपने व्यक्तित्व से दूसरों को प्रभावित करने में पूरी तरह सफल होते हैं। जीवन में कठिन परिस्थितियों में भी आप हार नहीं मानते और उम्मीद नहीं छोड़ते और ऐसा इसलिए है क्योंकि आपका व्यक्तित्व मिस्टर कूल जैसा है जहाँ विपरीत परिस्थितियों में भी आप अधिक केंद्रित हो जाते हैं और अपना आपा नहीं खोते। इच्छा शक्ति और साहस के कारण ऐसे लोग आसानी से हार नहीं मानते।

उत्कृष्ट वक्ता और कानून का पालन करने वाले

मूलांक 01 वाले लोगों (जन्म 01, 10, 19, 28) की विशेषता होती है कि वे कुशल वक्ता होते हैं और अपनी गंभीर बातों से लोगों के सामने अपनी छाप छोड़ने में सफल होते हैं। ऐसे लोग नियमों और कानूनों के प्रति अपना सम्मान दिखाते हैं और कुशल वक्ता होने के कारण अक्सर वकालत का पेशा अपनाते हैं।

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अस्वीकरण: कृपया ध्यान दें कि लेख में बताए गए सुझाव/सुझाव केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से हैं ताकि आपको इस मुद्दे के बारे में अपडेट रखा जा सके जो आम लोगों से अपेक्षित है और इन्हें पेशेवर सलाह के रूप में नहीं समझा जाना चाहिए/पालन नहीं किया जाना चाहिए। हम अनुशंसा करते हैं और आपसे अनुरोध करते हैं कि यदि आपके पास एस्ट्रोलॉजी संबंधित विषय से के बारे मे कोई विशिष्ट प्रश्न हैं, तो हमेशा अपने पेशेवर सेवा प्रदाता से परामर्श करें।


Point of View: भगवान शिव के माथे पर लगने वाले तीन क्षैतिज रेखाओं को कहते हैं-त्रिपुंड, जाने खास बातें


महाशिवरात्रि 2025: महाशिवरात्रि 26 फरवरी, 2026 को पूरे उत्साह के साथ मनाई जाएगी। दुनिया भर के शिव भक्तों के लिए महाशिवरात्रि महत्वपूर्ण दिनों में से एक है। कुछ लोगों के लिए महाशिवरात्रि वह दिन है जब सदियों की प्रतीक्षा, तपस्या और साधना के बाद भगवान शिव और मां पार्वती का मिलन हुआ था। कुछ अन्य लोगों के लिए यह वह रात है जब भगवान शिव ने तांडव किया था, जो ब्रह्मांडीय सृजन, संरक्षण और विनाश का नृत्य है। यह भगवान शिव की पूजा करने का शुभ अवसर है, जिन्हें आमतौर पर सभी देवताओं के देव महादेव के रूप में जाना जाता है। भगवान शिव का रहस्य इतना आसान नहीं है और सच्चाई यह है कि यह एक निरंतर खोज है जो भक्तों को आत्म-ज्ञान और आध्यात्मिक विकास की ओर ले जाती है। 

शिव पुराण और हिंदू मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव स्वयंभू हैं और उनका न तो कोई आरंभ है और न ही कोई अंत। उनके अस्तित्व के कारण ही यह पूरी दुनिया घूम रही है। जबकि विष्णु पुराण में भगवान शिव का जन्म भगवान विष्णु से हुआ था। नर्मदेश्वर शिवलिंग को भगवान शिव के निराकार स्वरूप की पूजा करने के लिए सबसे अच्छा स्थान माना जाता है। भगवान शिव का रहस्य एक जटिल और बहुआयामी विषय है, जिसके कई पहलू हैं।

हिंदू धर्म में त्रिपुंड का बहुत महत्व है और इसे भगवान शिव के कई पहलुओं का प्रतीक माना जाता है। भगवान शिव के माथे पर त्रिपुंड तीन गुणों (सत्व, रज, तम) का प्रतीक है। इससे पता चलता है कि वे इन तीन गुणों से परे हैं।

विनाश और सृजन का चक्र:

भगवान शिव का रहस्य विनाश और सृजन का चक्र है। यह चक्र हमें जीवन के प्राकृतिक क्रम को समझने और उसके साथ सामंजस्य बिठाने में मदद करता है। भगवान शिव को अक्सर विनाश के देवता के रूप में देखा जाता है, लेकिन वे सृजन के देवता भी हैं। वे 'सृष्टि चक्र' का प्रतीक हैं, जिसमें जीवन, मृत्यु और पुनर्जन्म शामिल हैं। भगवान शिव को अक्सर 'महाकाल' या 'काल' कहा जाता है, जो समय के देवता हैं। समय सभी चीजों को नष्ट कर देता है, और भगवान शिव इस विनाशकारी शक्ति का प्रतिनिधित्व करते हैं।

भगवान शिव को 'नटराज' के नाम से भी जाना जाता है, जो 'नृत्य' के देवता हैं। उनका 'तांडव' नृत्य ब्रह्मांड के विनाश का प्रतीक है, लेकिन यह एक नए ब्रह्मांड के निर्माण का भी प्रतीक है।

ज्ञान और ध्यान:

ज्ञान और ध्यान जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ज्ञान हमें सही और गलत के बीच अंतर करने में मदद करता है, और ध्यान हमें शांत और एकाग्र रहने में मदद करता है। भगवान शिव को ज्ञान और ध्यान का देवता भी माना जाता है। वे योग, तपस्या और आध्यात्मिक ज्ञान के प्रतीक हैं। भगवान शिव को 'ज्ञान का भण्डार' माना जाता है। वे 'वेद', 'शास्त्र' और सभी प्रकार के 'ज्ञान' के ज्ञाता हैं। भगवान शिव 'ध्यान' के प्रतीक हैं। वे 'समाधि' की अवस्था में रहते हैं, जो 'आत्म-ज्ञान' प्राप्त करने का मार्ग है।

त्रिपुंड:

त्रिपुंड भगवान शिव के माथे पर लगाई जाने वाली तीन क्षैतिज रेखाएं हैं। इसे राख, चंदन या मिट्टी से बनाया जा सकता है। हिंदू धर्म में त्रिपुंड का बहुत महत्व है और इसे भगवान शिव के कई पहलुओं का प्रतीक माना जाता है। भगवान शिव के माथे पर त्रिपुंड तीन गुणों (सत्व, रज, तम) का प्रतीक है। इससे पता चलता है कि वे इन तीन गुणों से परे हैं।

त्रिपुंड के तीन अर्थ हैं:

सृजन, संरक्षण और विनाश: त्रिपुंड की तीन रेखाएं ब्रह्मांड के तीन गुणों का प्रतीक हैं: सृजन, संरक्षण और विनाश। भगवान शिव को इन तीन गुणों का स्वामी माना जाता है। भूत, वर्तमान और भविष्य: त्रिपुंड की तीन रेखाएं समय के तीन पहलुओं का भी प्रतीक हैं: भूत, वर्तमान और भविष्य। भगवान शिव को समय का देवता माना जाता है। आत्मा, मन और शरीर: त्रिपुंड की तीन रेखाएं मनुष्य के तीन पहलुओं का प्रतीक हैं: आत्मा, मन और शरीर। भगवान शिव को इन तीनों पहलुओं का स्वामी माना जाता है। नंदी बैल: नंदी बैल भगवान शिव का वाहन है। यह शक्ति, धैर्य और भक्ति का प्रतीक है। नंदी को आमतौर पर शिव मंदिरों के प्रवेश द्वार पर बैठे देखा जाता है। भगवान शिव का वाहन नंदी बैल 'शक्ति' और 'धैर्य' का प्रतीक है। गंगा नदी: भगवान शिव ने गंगा नदी को अपनी जटाओं में धारण किया है। इससे पता चलता है कि वे 'पवित्रता' और 'शुद्धिकरण' के प्रतीक हैं। अर्धनारीश्वर: भगवान शिव को 'अर्धनारीश्वर' रूप में भी दर्शाया गया है, जिसमें वे आधे पुरुष और आधे महिला हैं। इससे पता चलता है कि वे 'पुरुष-महिला समानता' और 'संपूर्णता' के प्रतीक हैं।

 मृत्युंजय:

भगवान शिव को 'मृत्युंजय' भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है 'मृत्यु को जीतने वाला'। इससे पता चलता है कि वे 'अमरता' और 'जीवन शक्ति' का प्रतीक हैं।

त्रिनेत्र:

भगवान शिव की तीन आंखें हैं, जो 'भूत, वर्तमान और भविष्य' का प्रतीक हैं। इससे पता चलता है कि वे 'सर्वज्ञ' और 'सर्वव्यापी' हैं।

सांप:

भगवान शिव अपने गले में सांप पहनते हैं। इससे पता चलता है कि वे 'जहर' और 'बुराई' पर विजय प्राप्त करते हैं।

रुद्र:

भगवान शिव को 'रुद्र' भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है 'विनाशक'। इससे पता चलता है कि वे 'अन्याय' और 'अधर्म' का नाश करते हैं।

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अस्वीकरण: कृपया ध्यान दें कि लेख में उल्लिखित सुझाव केवल सामान्य जानकारी है जो विभिन्न सामाजिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है ताकि आपको उस मुद्दे के बारे में अपडेट रखा जा सके जिसकी आम लोगों से अपेक्षा की जाती है। आपसे अनुरोध है कि कृपया इन सुझावों को पेशेवर सलाह न समझें तथा यदि इन विषयों से संबंधित आपके कोई विशिष्ट प्रश्न हों तो सदैव संबंधित विशेषज्ञ से परामर्श करें।

Mahashivratri 2025 Date: महाशिवरात्रि कब और कैसे मनाएं, जानें इतिहास, पूजन सामग्री और विधि तथा और भी बहुत कुछ

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Mahashivratri 2024 Date: हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि व्रत को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है जिस दिन भगवान शंकर और माता पार्वती का पूजन किया जाता है. भगवन शिव की उपासना करने वाले व्यक्तियों के लिए तो यह खास अवसर होता है, हालाँकि हिन्दू धर्म में महाशिवरात्रि का विशेष स्थान है जिस दिन का इन्तजार सभी पुरुष और महिलायें करती है. 

महाशिवरात्रि का इस अवसर के लिए शिव भक्त सालों का इंतजार करते हैं क्योंकि उनके लिए यह पर्व भक्त भगवान शिव का आशीर्वाद पाने और उनके योग्य होने के लिए सबसे महान दिन होता है। इस दिन भक्तगण पूजा के लिए विशेष अनुष्ठानों का पूरा करते हैं साथ ही भगवान शिव के प्रसिद्ध मंदिरों या अपने घर के पास के मंदिरों में करना पसंद करते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस विशेष दिन पर भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना करने से सभी दुख दूर हो जाते हैं साथ ही लोगों की ऐसी मान्यता है की भगवान शंकर की कृपा से उनके घरों में सुख एवं समृद्धि की प्राप्ति होती है. वैदिक पंचांग के अनुसार, प्रत्येक वर्ष महाशिवरात्रि व्रत फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि के दिन रखा जाता है. हिन्दू पंचांग के अनुसार 08 मार्च 2024, शुक्रवार के दिन महाशिवरात्रि का पर्व मनाया  जाएगा. 

महाशिवरात्रि का इतिहास क्या है?

हिंदू पौराणिक कथाओं और मान्यताओं के अनुसार, महाशिवरात्रि कई कारणों से महत्व रखती है। एक मान्यता यह है कि इस दिन भगवान शंकर और माता पार्वती का विवाह हुआ था, और यह त्योहार उनके दिव्य मिलन का जश्न मनाने के लिए हर साल मनाया जाता है। साथ ही यह शिव और शक्ति के मिलन का भी प्रतीक है।

शिवरात्रि मनाने का क्या कारण है?

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, यह त्योहार फाल्गुन या माघ महीने के कृष्ण पक्ष के चौदहवें दिन मनाया जाता है। यह त्योहार शिव और पार्वती के विवाह और उस अवसर की याद दिलाता है जब शिव अपना दिव्य नृत्य करते हैं, जिसे तांडव कहा जाता है।

साल में कितनी बार शिवरात्रि आती है?

हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल 2 बार महाशिवरात्रि मनाया जाता है। पहली महाशिवरात्रि फाल्गुन माह में कृष्ण चुतर्दशी तिथि को मनाई जाती है और दूसरी सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है।

महाशिवरात्रि के व्रत में शाम को क्या खाते हैं?

उपवास में ड्राई फ्रूट्स खाने की सलाह दी जाती है. महाशिवरात्रि के व्रत में काजू, किशमिश, बादाम, मखाना आदि खा सकते हैं. महाशिवरात्रि के व्रत के दौरान आप साबूदाना की खिचड़ी, लड्डू, हलवा खा सकते हैं.

शिवरात्रि की पूजा में क्या क्या सामान लगता है?

महाशिवरात्रि की पूजा सामग्री (Mahashivratri Puja Samagri)

  • बेलपत्र
  • गंगाजल
  • दूध
  • शिवलिंग: पत्थर, धातु या मिट्टी का
  • गंगाजल:
  • दूध:
  • दही:
  • घी:
  • शहद:
  • फल:
  • फूल:
  • बेलपत्र:
  • धतूरा:
  • भांग:
  • चंदन:
  • दीप:
  • अगरबत्ती:
  • नारियल:
  • पान:
  • सुपारी:
  • कपूर:
  • लौंग:
  • इलायची

पूजन विधि:

  • स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • पूजा स्थान को साफ करें और गंगाजल छिड़कें।
  • शिवलिंग को गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद, फल, फूल, बेलपत्र, धतूरा, भांग, चंदन आदि से स्नान कराएं।
  • शिवलिंग पर दीप जलाएं और अगरबत्ती लगाएं।
  • ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करें।
  • शिव चालीसा का पाठ करें।
  • भगवान शिव से अपनी मनोकामना व्यक्त करें।
  • आरती करें और प्रसाद वितरित करें।
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अस्वीकरण: कृपया ध्यान दें कि लेख में उल्लिखित टिप्स/सुझाव केवल सामान्य जानकारी है जो विभिन्न सामाजिक और धार्मिक आस्था पर आधारित हैं.ताकि आपको उस मुद्दे के बारे में अपडेट रखा जा सके जो कि आम लोगों से अपेक्षित है. आपसे निवेदन है कि कृपया इन सुझावो को  पेशेवर सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए तथा अगर आपके पास इन विषयों से सम्बंधित कोई विशिष्ट प्रश्न हैं तो हमेशा सम्बंधित एक्सपर्ट से अवश्य परामर्श करें।


Point of View- डायरी लिखने की आदत से बनाएं अपने लाइफ को डिसिप्लिनड, प्रैक्टिकल, अपडेटेड और प्लांड

Inspiring Thoughts Benefit of Diary Writing
Point of View : अनुशासित और प्लांड जीवन शैली आज के टफ लाइफ की सबसे बड़ी जरुरत है।  यह न केवल  हमें अपने अपडेट रखने में मदद करता है बल्कि यह हमारे जीवन में हर सफलता की कुंजी भी है.दोस्तों,अपने जीवन को डिसिप्लिनड और प्रैक्टिकल  बनाने के लिए  हमें डायरी लिखने की आदत विकसित करने पर ध्यान देना चाहिए। 
इस लेख के माध्यम से आप जान सकते हैं कि डायरी की कला आप कैसे सीख  सकते हैं और यह आपको कैसे जीवन को प्रैक्टिकल और अनुशासित बनाने में मदद करती है। 

दोस्तों, प्रतिदिन डायरी लिखने की आदत वह कला है जो आपको व्यावहारिक अनुशासित तरीके से जीवन जीने का मार्ग प्रदान करती है।.डायरी लिखने की आदत जरूरी है क्योंकि यह न केवल आपके प्रत्येक और आपके जीवन में विकास को मापती है । 

हम सभी जानते हैं कि जीवन में सफलता कभी भी लिफ्ट की तरह नहीं मिलती है है और हमारे जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए इसका कोई शॉर्टकट नहीं है। वास्तव में सफलता एक सीढ़ी के अलावा और कुछ नहीं है जिसे केवल कदम दर कदम बढ़ा  जा सकता है। डायरी लिखना वह प्रक्रिया है जो आपको अनुशासित और संगठित जीवन बनाने का मार्ग प्रदान करती है।

डायरी लिखने से आप अपने बारे में और अपने लक्ष्यों के बारे में भी अपडेट रहेंगे। डायरी लिखने को शौक के तौर पर अपनाने से आपके विचार व्यवस्थित और सुनियोजित तरीके से बने रहेंगे।

डायरी लिखने की कला, जो आपको संपूर्ण, स्मार्ट और समग्र रूप से एक अपडेटेड  व्यक्तित्व बनाएगी।  डायरी  लिखने के कला  से  सबसे बड़ा लाभ यह होता है कि आप अपने विचारों को व्यवस्थित और योजनाबद्ध तरीके से रख सकते हैं।  

डायरी लिखने से हमें आपके विचारों को व्यवस्थित करने और उन्हें आपके नियमित कार्य के लिए बहुत व्यवस्थित और नियोजित तरीके से  निपटाने में   मदद मिलती है।

हाँ दोस्तों,डायरी लिखना केवल एक शौक नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा उपकरण है जो आपको अपडेट रखने में और आपके दैनिक जीवन के लिए महत्वपूर्ण चीज़ों के बारे में आपकी मदद करता है।  यह आपके विचारों को नया आयाम देता है साथ ही यह  आपकी रचनात्मकता को प्रेरित करेगा। 

अपनी दैनिक गतिविधियों को दैनिक आधार पर अपनी डायरी में लिखें।  यहां तक ​​कि आपकी सभी महत्वपूर्ण बैठकों/घटनाओं/रणनीतियों को भी अपनी डायरी में तारीख के साथ दर्ज किया जाना चाहिए। 

आप विश्वास नहीं कर सकते, लेकिन यह तथ्य है कि डायरी लिखने की आदत आपके तनाव, चिंता को भी आपके लिए स्वास्थ्य के मोर्चे पर दूर करने में मदद करती है। यह आपके तनाव और चिंता को कम करता है और यह आपको एक शांतिपूर्ण दिमाग रखने की अनुमति देता है जो आपके समग्र विकास और व्यवस्थित जीवन के लिए आवश्यक है।

अपने सभी महत्वपूर्ण आयोजनों/बैठकों/परियोजनाओं/पहलों को अपनी डायरी की क्रमागत तिथि में अंकित करें।  अगले दिन का कार्यक्रम आपकी डायरी में अवश्य रखा जाना चाहिए, चाहे कार्यक्रम अगले सप्ताह/पखवाड़े/माह में निर्धारित हो.याद रखें, आपकी वार्षिक डायरी में वर्ष के सभी 365 दिनों के साथ सभी 12 महीने होते हैं। 

वास्तव में, आप अपनी संपूर्ण 365 दिनों की रणनीतियों को डायरी में लिख सकते हैं लेकिन याद रखें, शाम के समय अपने दैनिक क्रिया कलापों  को दैनिक रूप से लिखना उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना कि हमारी डायरी के अपने कल के कार्यों की जांच करना, लेकिन एक दिन पहले।

डायरी लेखन की कलाओं का पालन करने में कुछ शुरुआती परेशानी और झिझक होगी, लेकिन मेरा विश्वास कीजिये।  इसे लिखने की आदत आपको तनाव मुक्त और अनुशासित जीवन शैली के साथ एक अद्यतन और व्यावहारिक व्यक्तित्व बनाए रखने में मदद करेगी।

Parenting Tips: इन टिप्स से बढ़ाएं अपने बच्चों में ध्यान केंद्रित करने की क्षमता


अपने बच्चों मे कंसन्ट्रेशन (ध्यान केंद्रित करने) की क्षमता को बढ़ाना सभी पेरेंट्स का प्रमुख उदेश्य होता है क्योंकि इसका सीधा संबंध न केवल उनके पढ़ाई बल्कि उनके करियर से भी संबंधित है। खासतौर पर आजकल जिस तरह से  मोबाईल और इंटरनेट ने हमारे जीवन के हर छोटे से छोटे से ऐक्टिविटी मे भी सीधा हस्तक्षेप कर चुका है, आज कल के बच्चों मे कंसन्ट्रेशन (ध्यान केंद्रित करने) की क्षमता को बढ़ाना ज्यादा जरूरी बन चुका है। यहाँ कुछ स्टेप्स दिए गए है जो आपके बच्चों के कंसन्ट्रेशन (ध्यान केंद्रित करने) की क्षमता को बढ़ाने मे  सहायक हो सकते हैं-

नियमित ध्यान (मेडिटेशन) के लिए जागरूक करें

कान्सन्ट्रैशन बढ़ाने के लिए सबसे जरूरी है कि बच्चों के दिमाग मे जो हलचल और फास्ट लाइफ के जो कीड़े भर चुके हैं, उनसे उन्हे बाहर निकालने के लिए उन्हे नियमित ध्यान (मेडिटेशन) के लिए प्रेरित करें। बेशक यह अचानक मे नहीं होगा लेकिन आप खुद भी बच्चों के साथ समय निकालकर उनके साथ नियमित ध्यान के लिए मोटिवेट करें। प्रतिदीन कम से काम  10-15 मिनट का मेडिटेशन आपके दिमाग को न केवल शांत करता है बल्कि उनके मस्तिष्क को कस बढ़ाने में मदद करता है। ध्यान के  दौरान शुरू मे गहरी सांस लें और अपने दिमाग को बिल्कुल चिंतमुक्त और बाहरी वातावरण से अप्रभावित रखें। आप अपने बच्चों को खेल के तौर पर इसे शुरुआत करने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। 

रविवार के दिन  पैदा हुए लोगों पर होती है भगवान सूर्य की विशेष कृपा

मल्टीटास्किंग से बचें

आज कल के भाग दौड़ वाले जीवन मे न केवल पेरेंट्स बल्कि बच्चे को भी मल्टीटास्क को निपटाने के लिए बाध्य कर दिया गया है। आप देखेंगे कि कोरोना के काल से भले दुनिया बाहर या चुका है लेकिन आज भी स्कूल से उनके काम मोबाईल के माध्यम से भेजे जाते हैं। यहाँ तक कि बच्चों के पढ़ाई के एक जरूरी माध्यम मोबाईल को बना दिया गह है और इसके कारण बच्चे भी मल्टी टास्क करने के लिए बाध्य हो गए हैं। इसके लिए यह जरूरी है कि आप बच्चों को एक बार मे  एक वर्क निपटाने के लिए कहें ताकि वह अनावश्यक स्ट्रेस से बचे और अनुशासन के साथ टाइम  फ्रेम मे  काम निपटाना सीखे। 

फोन और सोशल मीडिया का उपयोग सीमित करें

न केवल बच्चे बल्कि सभी पेरेंट्स भी इस बात से इनकार नहीं कर सकते कि मोबाईल और सोशल मीडिया ने हमेशा से हमारी ध्यान और एकाग्रता को बुरी तरह से प्रभावित किया है। आप खुद अगर सोशल मीडिया पर विज़िट करें तो पाएंगे की आपके अंदर अवसाद और नकारात्मक चीजें ज्यादा हावी होती है क्योंकि यह हमारी विडंबना है की मोबाईल और सोशल मीडिया पर ऐसे ही कंटेन्ट परोसे जाते हैं जो हमारे अंदर नकारात्मकता को ओर धकेल रहे होते हैं। आप सहज ही अंदाज लगा सकते हैं की जब पेरेंट्स के लिए ये चीजें इतनी हानिकारक हैं तो बच्चों के कोमल मस्तिष्क पर इनका गलत प्रभाव पड़ता होगा। इसके लिए यह जरूरी है की आप बच्चों के लिए जहां तक हो सकें फोन और सोशल मीडिया के उपयोग को सीमित करें। 

डायरी लिखने की आदत डालें

बच्चों को लिखने और पढ़ने की आदत डालें साथ ही उनके डायरी लिखने के लिए प्रेरित करें। उन्हे बताएं की डायरी लिखने के लिए समय कैसे निकली जा सकती है और साथ ही डायरी लिखने के क्या लाभ हैं। डायरी मे प्रतिदिन के अपने प्राइऑरटी और उन्हे समय पर निपटाने के लिए डायरी पर एंट्री करने से उनके अंदर डायरी लिखने की और साथ हीं अपनी प्रतिमिकताओं को समय पर निपटाने मे मदद मिलेगी। 

पढ़ने के तरीके को बदलें

बच्चों को पढ़ने और उन्हे याद करने की पारंपरिक तरीकों से अलग कुछ नया टेक्निक की मदद लेना सिखाएं। यहाँ ध्यान देने की जरूरी है की पढ़ाई के  पारंपरिक तरीके आज भी आउट डेटेड नहीं है, बल्कि उन्हे नए अंदाज मे प्रस्तुत किया जाना चाहिए जिसे मे बच्चे उन्हे ठीक ढंग से आत्मसात कर सकें। ध्यान रखें की पढ़ना और याद करने मे फर्क होता है और बच्चों को पढ़ने से अलग समझकर याद करने के लिए प्रेरित किया जाना जरूरी है।  साथ हीं उन्हे यह भी बताया जाना जरूरी है कि पढ़ने से आपकी मानसिक स्पष्टता बढ़ती है। जो सीखा है, उसे लिखने से ध्यान केंद्रित करने की क्षमता मजबूत होती है।

पर्याप्त नींद जरूरी 

आज कल बच्चे अपने पेरेंट्स के तमाम  व्यस्तताओं और ऑफिस और घर के कार्यों की अधिकता के कारण देर रात तक जगे रहते हैं। ऑफिस का बर्डन और घर के अतिरिक्त कार्यों के कारण पेरेंट्स के लिए देर रात तक जागना तो मजबूरी है, लेकिन बच्चों के  लिए पर्याप्त नींद का होना जरूरी है इसके लिए यह जरूरी है की आप खुद के रूटीन से बच्चों को अलग रखें और उन्हे समय पर सोने के लिए भेजना सुनिश्चित करें। पर्याप्त नींद के अभाव मे बच्चों मे अनिद्रा और मानसिक रूप से अवसाद की समस्या से भी गुजरना पड़ सकता है। 


महाकुंभ 2025; महत्व, महत्वपूर्ण तिथियां, शाही स्नान, और अन्य जानकारी


2025 का महाकुंभ मेला 13 जनवरी से 26 फरवरी, 2024 तक उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक प्रयागराज में आयोजित होने वाला है। महाकुंभ मेला के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की मेजबानी के लिए वैश्विक मानकों को फिर से परिभाषित करने के लिए तैयार पूरी तरह से तैयार है। महाकुंभ मेला 2025 आस्था, संस्कृति और इतिहास का एक असाधारण उत्सव है, जो सभी उपस्थित लोगों के लिए एक समृद्ध यात्रा प्रदान करता है। कुंभ मेला दुनिया का सबसे बड़ा शांतिपूर्ण समागम है, जिसमें लाखों तीर्थयात्री पवित्र नदियों में स्नान के लिए आते हैं। यह स्नान आध्यात्मिक सफाई और नवीनीकरण का प्रतीक है। 

यह हर 12 साल में चार बार होता है, गंगा पर हरिद्वार, शिप्रा पर उज्जैन, गोदावरी पर नासिक और प्रयागराज, जहाँ गंगा, यमुना और सरस्वती मिलती हैं। उत्तर प्रदेश सरकार की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, हिंदू धर्म में कुंभ मेला एक धार्मिक तीर्थयात्रा है जो 12 वर्षों के दौरान चार बार मनाई जाती है। 

कुंभ मेले की भौगोलिक स्थिति का अनुसर भारत में चार महत्वपूर्ण स्थानों पर फैली हुई है और जो चार पवित्र नदियों पर स्थित जिन चार तीर्थस्थलों पर आयोजन होता है वे निम्न हैं-

महत्वपूर्ण शहर और नदियाँ

  • हरिद्वार, उत्तराखंड में, गंगा के तट पर
  • उज्जैन, मध्य प्रदेश में, शिप्रा के तट पर
  • नासिक, महाराष्ट्र में, गोदावरी के तट पर
  • प्रयागराज, उत्तर प्रदेश में, गंगा, यमुना और पौराणिक अदृश्य सरस्वती के संगम पर।


प्रत्येक स्थल का उत्सव सूर्य, चंद्रमा और बृहस्पति की ज्योतिषीय स्थितियों के एक अलग सेट पर आधारित है।

कुंभ मेला एक आध्यात्मिक सभा से कहीं अधिक है। यह संस्कृतियों, परंपराओं और भाषाओं का एक जीवंत मिश्रण है, जो एक "लघु-भारत" को प्रदर्शित करता है, जहाँ लाखों लोग बिना किसी औपचारिक निमंत्रण के एक साथ आते हैं। यह आयोजन विभिन्न पृष्ठभूमियों से तपस्वियों, साधुओं, कल्पवासियों और साधकों को एक साथ लाता है, जो भक्ति, तप और एकता का प्रतीक है। 2017 में यूनेस्को द्वारा अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के रूप में मान्यता प्राप्त, कुंभ मेला ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बहुत मूल्यवान है। प्रयागराज 2025 में 13 जनवरी से 26 फरवरी तक फिर से इस भव्य आयोजन की मेजबानी करेगा, जिसमें अनुष्ठान, संस्कृति और खगोल विज्ञान का मिश्रण होगा।

महाकुंभ मेला 2025: आध्यात्मिकता और नवाचार का एक नया युग

2025 में महाकुंभ मेला प्रयागराज में आध्यात्मिकता, संस्कृति और इतिहास के एक अनूठे मिश्रण का वादा करता है। 13 जनवरी से 26 फरवरी तक, तीर्थयात्री न केवल आध्यात्मिक अनुष्ठानों की एक श्रृंखला में शामिल होंगे, बल्कि एक ऐसी यात्रा पर भी निकलेंगे जो भौतिक, सांस्कृतिक और यहाँ तक कि आध्यात्मिक सीमाओं से परे होगी। 

शहर की जीवंत सड़कें, चहल-पहल भरे बाज़ार और स्थानीय व्यंजन इस अनुभव में एक समृद्ध सांस्कृतिक परत जोड़ते हैं। अखाड़ा शिविर एक अतिरिक्त आध्यात्मिक आयाम प्रदान करते हैं, जहाँ साधु और तपस्वी चर्चा, ध्यान और ज्ञान साझा करने के लिए एक साथ आते हैं। ये तत्व मिलकर महाकुंभ मेला 2025 को आस्था, संस्कृति और इतिहास का एक असाधारण उत्सव बनाते हैं, जो सभी उपस्थित लोगों के लिए एक समृद्ध यात्रा प्रदान करता है।

आगामी 2025 महाकुंभ मेला भी उन्नत सुविधाओं और बुनियादी ढांचे के साथ भक्तों के अनुभव को बढ़ाने के लिए तैयार है, जो सभी प्रतिभागियों के लिए एक सहज, सुरक्षित और अधिक आकर्षक यात्रा सुनिश्चित करता है। बेहतर सफाई व्यवस्था, विस्तारित परिवहन नेटवर्क और उन्नत सुरक्षा उपायों से एक सहज, सुरक्षित और अधिक समृद्ध अनुभव प्रदान करने की उम्मीद है। अभिनव समाधानों को शामिल करते हुए, 2025 महाकुंभ मेला इस परिमाण के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की मेजबानी के लिए वैश्विक मानकों को फिर से परिभाषित करने के लिए तैयार है।

प्रयागराज: समय के साथ जानें शहर कि  यात्रा

एक समृद्ध इतिहास वाला प्रयागराज 600 ईसा पूर्व का है जब वत्स साम्राज्य फला-फूला और कौशाम्बी इसकी राजधानी थी। गौतम बुद्ध ने कौशाम्बी का दौरा किया था। बाद में, सम्राट अशोक ने मौर्य काल के दौरान इसे एक प्रांतीय केंद्र बनाया, जो उनके अखंड स्तंभों से चिह्नित था। शुंग, कुषाण और गुप्त जैसे शासकों ने भी इस क्षेत्र में कलाकृतियाँ और शिलालेख छोड़े।

7वीं शताब्दी में, चीनी यात्री ह्वेन त्सांग ने प्रयागराज को "मूर्तिपूजकों का महान शहर" बताया, जो इसकी मजबूत ब्राह्मणवादी परंपराओं को दर्शाता है। शेर शाह के शासनकाल में इसका महत्व बढ़ गया, जिन्होंने इस क्षेत्र से होकर ग्रैंड ट्रंक रोड का निर्माण कराया। 16वीं शताब्दी में, अकबर ने इसका नाम बदलकर 'इलाहाबास' कर दिया, जिससे यह एक किलेबंद शाही केंद्र और प्रमुख तीर्थ स्थल बन गया, जिसने इसकी आधुनिक प्रासंगिकता के लिए मंच तैयार किया।

प्रयागराज के प्रमुख स्थल और आध्यात्मिक स्थल

त्रिवेणी संगम वह स्थान है जहाँ गंगा, यमुना और रहस्यमयी सरस्वती मिलती हैं। माना जाता है कि अदृश्य सरस्वती कुंभ मेले के दौरान प्रकट होती है, जो ज्ञान और बुद्धि का प्रतीक है। भक्त अपने पापों को धोने के लिए आते हैं, जो इसे कुंभ मेले का केंद्र बनाता है, जो भारत की सांस्कृतिक विरासत का एक भव्य उत्सव है।

त्रिवेणी संगम पर आने वाले तीर्थयात्री प्रयागराज में कई प्रतिष्ठित मंदिरों का भी भ्रमण करते हैं। संत समर्थ गुरु रामदासजी द्वारा स्थापित दारागंज में श्री लेटे हुए हनुमान जी मंदिर में शिव-पार्वती, गणेश, भैरव, दुर्गा, काली और नवग्रह की मूर्तियाँ हैं। पास में, श्री राम-जानकी और हरित माधव मंदिर आध्यात्मिक वातावरण में चार चांद लगाते हैं। 

त्सोमोरिरी झील, लद्दाख है दुनिया की सबसे ऊँची रामसर साइट

Tsomoriri Lake Facts in Brief

15,075 फीट की ऊंचाई पर, यह भारत की सबसे ऊंची खारे पानी की झील है। लद्दाख के चांगथांग क्षेत्र में स्थित, 'त्सो मोरीरी' एक खूबसूरत झील है, जो काफी ऊंचाई पर स्थित है। यह खूबसूरत नीली पैलेट झील अब रामसर साइट के तहत वेटलैंड रिजर्व का एक हिस्सा है, जिसे त्सोमोरिरी वेटलैंड कंजर्वेशन रिजर्व के रूप में जाना जाता है, यह दुनिया की सबसे ऊँची रामसर साइट है। 

  • समुद्र तल से लगभग 4000 मीटर ऊपर चांगथांग पठार में स्थित है।
  • इसका क्षेत्रफल  लगभग 19 किमी लंबी और 8 किमी चौड़ी है, जिसके चारों ओर बर्फ से ढकी बंजर पहाड़ियाँ हैं, सुंदर प्रवासी पक्षी और अन्य दुर्लभ जीव इस दृश्य को आश्चर्यजनक बनाते हैं।
  • यहाँ पर पाई जाने वाले प्रजातियों मे शामिल है- बार-हेडेड गूज, ब्राउन हेडेड गल, ग्रेट क्रेस्टेड ग्रीबे और हिमालयन हार्स। 
  • यहां जाने से पहले पर्यटकों के लिए 'इनर लाइन परमिट' जारी किया जाता है जो न केवल विदेशियों बल्कि भारतीयों के लिए अनिवार्य है।

कुंभवाणी : महाकुंभ 2025 पर शुरू हुआ आकाशवाणी का कुंभ बुलेटिन, पाएं विस्तृत जानकारी


एक ओर जहां भारत मे आयोजित महाकुंभ 2025 ने दुनिया का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है, ऐसे में आकाशवाणी ने विशेष महाकुंभ न्यूज बुलेटिन अर्थात "कुंभवाणी" का प्रसारण आरंभ कर इस आध्यात्मिक सामाजिक समागम मे भाग लेने वाले श्रद्धालुओं के लिए मेले से संबंधित विभिन्न गतिविधियों पर अपडेट प्रदान करने का बीड़ा उठाया है। 

कुंभवाणी समाचार बुलेटिन दिन में तीन बार, सुबह 8.30 बजे, दोपहर 2.30 बजे और शाम 8.30 बजे प्रसारित किए जाएंगे, जो महाकुंभ मेले से संबंधित विभिन्न गतिविधियों पर अपडेट प्रदान करेंगे। इसके अतिरिक्त, श्रद्धालु प्रयागराज में 103.5 मेगाहर्ट्ज फ्रीक्‍वेंसी पर कुंभवाणी समाचार बुलेटिन भी सुन सकते हैं। विशेष कुंभ समाचार बुलेटिन न्यूज़ ऑन एआईआर ऐप, वेव्स ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म पर भी प्रसारित किए जाते हैं और ये आकाशवाणी के आधिकारिक यूट्यूब चैनल न्यूज़ ऑन एआईआर ऑफिशियल पर भी उपलब्ध हैं।

श्रद्धालुओं और तीर्थयात्रियों ने इस पहल की सराहना की है और कई लोगों ने इसे "महाकुंभ के बारे में जानकारी प्राप्त करने की महत्‍वपूर्ण पहल” बताया है। प्रयागराज की निवासी तनु शर्मा ने कहा, "आकाशवाणी के कुंभ बुलेटिन विश्वसनीय, सटीक और जानकारी से परिपूर्ण हैं।" महाकुंभ में आए मध्य प्रदेश के उज्जैन निवासी योगराज सिंह झाला ने कहा, "मेला परिसर में आकाशवाणी के कुंभ बुलेटिन सुनना एक सुखद अनुभव है। इससे महाकुंभ में श्रद्धालुओं को जानकारी का एक प्रामाणिक स्रोत मिला है।" 

प्रसार भारती के अध्यक्ष नवनीत कुमार सहगल ने कहा, "महाकुंभ एक विशाल आध्यात्मिक सामाजिक समागम है और प्रसार भारती पूरी प्रामाणिकता के साथ समाचार उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। आकाशवाणी और दूरदर्शन के पूरे नेटवर्क पर महाकुंभ की निरंतर कवरेज के लिए प्रयागराज में संवाददाताओं, संपादकों और समाचार वाचकों की एक समर्पित टीम तैनात की गई है।" 

महाकुंभ 2025 को समर्पित आकाशवाणी के कुंभवाणी चैनल का शुभारंभ 10 जनवरी को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने केंद्रीय सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन की वर्चुअल मौजूदगी में किया था। यह चैनल 26 फरवरी तक समाचार और अन्य कार्यक्रम प्रसारित करता रहेगा।


नृत्यधारा: भरतनाट्यम के गहरे अध्यात्म, सुरुचिपूर्ण सुंदरता और पारंपरिक समर्पण को भव्यता से प्रस्तुत

आयाम इंस्टीट्यूट ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स द्वारा आयोजित नृत्यधारा – द्वितीय ने भरतनाट्यम के गहरे अध्यात्म, उसकी सुरुचिपूर्ण सुंदरता, और पारंपरिक समर्पण को भव्यता से प्रस्तुत किया। यह कार्यक्रम लिटिल थिएटर ग्रुप (LTG) ऑडिटोरियम में संपन्न हुआ, जिसे प्रसिद्ध गुरु श्रीमती सिंधु मिश्रा ने बड़ी ही कुशलता और श्रद्धा के साथ संजोया और कोरियोग्राफ किया।  

यह आयोजन भरतनाट्यम के पारंपरिक बानी पर आधारित था, जिसे विख्यात गुरु के.एन. दंडयुधापाणि पिल्लई ने विकसित किया था। नृत्यधारा ने नृत्य (शुद्ध नृत्य), भाव (अभिव्यक्ति) और ताल (लय) के जटिल समन्वय को जीवंत कर दिया।  

कार्यक्रम का शुभारंभ पुष्पांजलि से हुआ, जिसमें रागम बौली और तालम आदि पर आधारित एक दिव्य प्रस्तुति दी गई। यह प्रस्तुति गुरु, देवता और दर्शकों को समर्पित थी। इसके बाद ध्यान श्लोकम प्रस्तुत किया गया, जो भगवान शिव के अद्वितीय स्वरूप को समर्पित था। इसे प्रसिद्ध संगीतकार श्रीमती सुधा रघुरामन ने रचा और इसमें शिव के वैश्विक और ब्रह्मांडीय स्वरूप को चित्रित किया गया। 

प्रत्येक प्रस्तुति में भरतनाट्यम की शास्त्रीयता और रचनात्मकता का अद्भुत मेल देखने को मिला। शिवाष्टकम में भगवान शिव की महानता को राग भूपाली और ताल खंड चापू पर प्रस्तुत किया गया। इसमें भगवान शिव को असुरों के विनाशक, गणेश के स्नेही पिता, और ब्रह्मांडीय ऊर्जा के प्रतीक के रूप में दिखाया गया।  

इसके बाद तुलसीदास जी के भजन श्री राम चंद्र पर आधारित भरतनाट्यम प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। राग सिंधु भैरवी और आदि ताल पर आधारित इस प्रस्तुति में भगवान राम के गुणों को अत्यंत भावुकता से प्रस्तुत किया गया।  

पदम – यारो इवर यारो में माता सीता और भगवान राम की प्रथम भेंट को भावनात्मक गहराई के साथ प्रस्तुत किया गया। राग भैरवी और ताल आदि पर आधारित इस प्रस्तुति ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। इसके अलावा भो शंभो और तिल्लाना जैसे नृत्यांशों ने भी दर्शकों को अद्भुत आध्यात्मिक और सांस्कृतिक अनुभव प्रदान किया।  

गुरु श्रीमती सिंधु मिश्रा ने कहा, "नृत्यधारा – द्वितीय समर्पण, श्रद्धा और भरतनाट्यम की शाश्वत सुंदरता का उत्सव है। दर्शकों का अपार स्नेह और समर्थन इस कला रूप की अमरता को प्रमाणित करता है। हमारा उद्देश्य इस अद्भुत परंपरा को संरक्षित रखना और नई पीढ़ी को इसकी ओर प्रेरित करना है।"  

नृत्यधारा – द्वितीय न केवल एक नृत्य प्रस्तुति थी, बल्कि यह भरतनाट्यम की समृद्धता और विविधता का जीवंत उत्सव था। इसने दर्शकों को भरतनाट्यम की अद्वितीय सुंदरता और शाश्वत आकर्षण का अनुभव कराया।

Point of View: जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रेगिस्तान मे बिताई थी रात, जानें कैसे बना गुजरात मे रण उत्सव बड़ा इवेंट


ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म जेरोधा (Zerodha) के को-फाउंडर निखिल कामथ के पॉडकास्ट मे इस सवाल के जवाब मे कि कोई एक ऐसी चीज जिसे प्रधानमंत्री मिस करते हैं, और उसके बारे मे अपनी व्यस्तताओं के कारण नहीं सोच पाते हैं,  प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने बताया कि वन लाइफ वन विजन जैसा हो गया है। इसलिए शायद मुझे लेकिन एक चीज मैं पहले करता था जो कभी-कभी मेरा मन अभी भी करता है। 

मेरा एक कार्यक्रम होता था और मैंने उसको नाम दिया था मैं मुझको मिलने जाता हूं, मैं मुझको मिलने जाता हूं, यानी कभी-कभी हम खुद को ही नहीं मिलते दुनिया को तो मिलते हैं खुद को मिलने के लिए समय ही नहीं है। तो मैं क्या करता था साल में कोई समय निकाल के तीन चार दिन मेरी जितना जरूरत है उतना सामान लेकर के चल पड़ता था और उस जगह पर जाकर रहता था जहां कोई मनुष्य ना हो, कहीं पानी की सुविधा मिल जाए बस ऐसी जगह मैं ढूंढता था जंगलों में कहीं, उस समय तो ये मोबाइल फोन वगैरह तो कुछ था ही नहीं, अखबार वगैरह का कुछ सवाल नहीं उठता था, तो वो जीवन मेरा एक अलग आनंद होता था, वो मैं कभी-कभी मिस करता हूं।

प्रधानमंत्री ने बताया कि अपने आप में खो जाना बस यही एक बात है। एक उदाहरण बताता हूं जैसे क्या हुआ। शायद 80 का कालखंड होगा, मैंने तय किया कि मैं रेगिस्तान में रहूंगा, तो मैं चल पड़ा, लेकिन रेगिस्तान में मैं भटकता ही गया भटकता ही गया, लेकिन एक दिया दिखता था लेकिन मैं पहुंच ही नहीं पाता था, तो कोई मुझे एक कैमल वाला मिल गया, बोले भाई तुम क्या कर रहे हो यहां पर, मैंने कहा भाई मैं रेगिस्तान में अंदर जाना चाहता हूं, उसने कहा ऐसा करो अभी मेरे साथ चलो वो जो सामने लाइट दिखती है वो एक आखिरी गांव है, मैं तुम्हें वहां तक छोड़ देता हूं, रात को वहां रुक जाना और सुबह फिर कोई वहां से तुम्हें मिल जाए तो तो मुझे ले गया। कोई गुलबेक करके मुस्लिम सज्जन थे, उनके यहां ले गया। 

प्रधानमंत्री ने बताया कि अब वो छोटा सा गांव धोरडो जो पाकिस्तान की सीमा पर भारत का आखिरी गांव है, और वहां 20-25 घर और सभी मुस्लिम परिवार तो अतिथि सत्कार तो हमारे देश में है ही है उनका भाई बच्चे तुम आओ भाई, मैंने कहा नहीं मुझे तो जाना है तो बोले नहीं जा सकते रेगिस्तान में अभी तो तुम्हें अंदाज है माइनस टेंपरेचर होगा। तुम कैसे रहोगे वहां, अभी रात को यहां सो जाओ तुम्हें सुबह दिखाएंगे। खैर रात को मैं उनके घर रुका उन्होंने खाना वाना खिलाया, मैंने कहा भाई मुझे तो अकेले रहना है कुछ चाहिए नहीं मुझे, बोले तुम अकेले रह ही नहीं सकते तुम्हें यहां एक हमारा छोटा सा झोपड़ी है तुम वहां रहो और उस दिन में चले जाना तुम रण में रात को वापिस आ जाना, मैं गया वो वाइट रण था और कल्पना बाहर का वो एक दृश्य ने मेरे मन को इतना छू लिया जो चीजें मैंने मेरे हिमालयन लाइफ में अनुभव की थी, बर्फ की चट्टानों के बीच में जिंदगी गुजारना यहां मैं वही दृश्य अनुभव कर रहा था और मुझे एक स्पिरिचुअल फीलिंग आता था लेकिन वो जो दृश्य मेरे मन में था जब मैं मुख्यमंत्री बना तो मैंने वहां एक रण उत्सव बड़ा इवेंट बना दिया और आज वो टूरिज्म का बहुत बड़ा डेस्टिनेशन बन गया है और अभी ग्लोबली बेस्ट टूरिस्ट विलेज का उसको दुनिया में नंबर वन इनाम मिला है उसको। (स्रोत-PIB )

Makar Sankranti 2025: जानें कैसे करें पवित्र स्नान और क्या है मंत्र और महत्व


हिन्दू पंचांग और धर्म के अनुसार ऐसी मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से सभी पाप समाप्त हो जाते हैं। इस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है, जो हिन्दू धर्म में अत्यधिक शुभ माना जाता है। पवित्र स्नान से न केवल शरीर शुद्ध होता है बल्कि  यह मन, आत्मा और विचारों की शुद्धि का भी प्रतीक है। इस प्रक्रिया में सच्ची भक्ति और पवित्रता का होना सबसे जरूरी है।

इस दिन स्नान करने से व्यक्ति की मानसिक और शारीरिक शुद्धता प्राप्त होती है, जिससे आत्मा को शांति मिलती है और आध्यात्मिक उन्नति होती है। स्नान के लिए यदि संभव हो, तो पवित्र नदियों (जैसे गंगा, यमुना) या तीर्थस्थानों में स्नान करें हालांकि अगर व्यस्तताओं के कारण वहाँ जाना संभव नहीं हो तो आप अपने घर में स्नान करते समय गंगा जल मिलाकर स्नान करें।

स्नान से पहले की तैयारी

स्नान से पहले मन को शांत करें और सकारात्मक विचार रखना अत्यंत जरूरी होता है क्योंकि स्नान सिर्फ तन से हीं नहीं बल्कि यह मन, आत्मा और विचारों की शुद्धि का भी प्रतीक है। इस प्रक्रिया में सच्ची भक्ति और पवित्रता का होना सबसे जरूरी है। 

हमारे धर्म ग्रंथों मे नदियों की पवित्रता को विशेष रूप से उल्लेख किया गया है जिन्हे माँ के रूप मे पुकारा जाता है। यदि संभव हो, तो पवित्र नदियों (जैसे गंगा, यमुना) या अन्य  तीर्थस्थानों में स्नान करें। हालांकि व्यस्तताओं के कारण अगर आप पवित्र नदी मे नहीं जा सकते तो अपने घर में स्नान करते समय गंगा जल मिलाकर स्नान करें। स्नान आरंभ करने से पहले यह मान्यता है कि जल को हाथ में लेकर भगवान का ध्यान करते हुए आचमन करें।

 स्नान का विधि-विधान

स्नान करने के लिए ऐसी मान्यता हा कि पहले जल को पवित्र करें और फिर शुद्ध मन से हाथ मे जल को हाथ में लेकर संकल्प करें-

"मैं इस स्नान के द्वारा अपने पापों और दोषों को दूर कर, शारीरिक और मानसिक शुद्धि प्राप्त करना चाहता/चाहती हूं।"

इसके साथ ही इस अवसर पर भगवान सूर्य, विष्णु या शिव का ध्यान करें और उनसे अपने  शारीरिक और मानसिक शुद्धि के लिए प्रार्थना करें। 

मंत्रोच्चार करें: स्नान करते समय निम्न मंत्रों का जाप कर सकते हैं:

गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वति।

नर्मदे सिन्धु कावेरी जलऽस्मिन्सन्निधिं कुरु।।

ॐ अपवित्र: पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोपि वा।

य: स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स: बाह्याभंतर: शुचि:।।

स्नान के बाद के नियम

स्नान के बाद हमेशा शुद्ध और स्वच्छ वस्त्र पहनें क्योंकि स्नान के बाद पूजा और भगवान को ध्यान करने कि प्रक्रिया पूरी करना जरूरी होता है। भगवान को ध्यान और प्रार्थना करें तथा इस अवसर पर आप दान दें। मकर संक्रांति जैसे पावन अवसर पर तिल, गुड़, अन्न, वस्त्र, या धन का दान करें। भोजन में सात्विकता जरूरी है और स्नान के बाद केवल सात्विक भोजन ग्रहण करें। की स्थानों पर लोग दही चूड़ा, तिल और अन्य चीजों से बनी लाई खाते हैं। 

मकर संक्रांति में हमें क्या नहीं करना चाहिए?

जैसा कि पहले ही कहा जा गया है कि मकर संक्रांति का आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व बहुत अधिक है क्योंकिइस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है, जो हिन्दू धर्म में अत्यधिक शुभ माना जाता है। पर कोई भी 'तामसिक' खाद्य पदार्थ न खाएं और न ही घर लाएं । आपको सभी का सम्मान करना चाहिए और इस दिन किसी का अपमान नहीं करना चाहिए न हीं किसी का दिल दुखाना चाहिए। अगर संभव हो तो गरीब या भूखे लोगों को अन्न और वस्त्र दान करनी चाहिए। खुद को कारात्मक विचारों और नकारात्मक वातावरण से दूर रखनी चाहिए साथ ही नकारात्मक  ऊर्जा वाले स्थानों और लोगों से हमें दूर रखनी चाहिए। 

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अस्वीकरण: कृपया ध्यान दें कि लेख में बताए गए सुझाव/सुझाव केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से हैं ताकि आपको इस मुद्दे के बारे में अपडेट रखा जा सके जो आम लोगों से अपेक्षित है और इन्हें पेशेवर सलाह के रूप में नहीं समझा जाना चाहिए/पालन नहीं किया जाना चाहिए। हम अनुशंसा करते हैं और आपसे अनुरोध करते हैं कि यदि आपके पास विषय से संबंधित कोई विशिष्ट प्रश्न हैं, तो हमेशा अपने पेशेवर सेवा प्रदाता से परामर्श करें।