साल्हेर किला: जिसका चर्चा प्रधान मंत्री ने मन की बात में किया, जाने इतिहास और विशेषता

Salher Fort history significance how to go facts in brief

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात के 124 वें संस्करण मे कुल 12 किलों का चर्चा किया है जिसे  UNESCO ने World Heritage Sites के रूप में मान्यता दिया है। UNESCO ने जिन 12 मराठा किलों को World Heritage Sites के रूप में मान्यता दिया है, उनमे शामिल है सलहेर या साल्हेर किला (Salher Fort) का किला। आइए जानते हैं कि सलहेर के का क्या है विशेषता जिसके कारण UNESCO ने इसे World Heritage Sites के रूप में मान्यता दिया है। 

साल्हेर किला (Salher Fort) महाराष्ट्र के नासिक ज़िले में स्थित एक ऐतिहासिक और दर्शनीय स्थल है। सलहेर किला" नाम इसलिए पड़ा क्योंकि यह महाराष्ट्र के नासिक जिले की सतना तहसील के सलहेर गाँव के पास स्थित है। 

किला सह्याद्री पर्वतमाला में स्थित है और समुद्र तल से लगभग 5,141 फीट (1,567 मीटर) की ऊँचाई पर स्थित है, जो इसे महाराष्ट्र का सबसे ऊँचा किला बनाता है। 

साल्हेर किला महाराष्ट्र के नासिक जिले के बगलान तालुका में साल्हेर गाँव के पास स्थित एक ऐतिहासिक किला है । यह किला समुद्र तल से 1,567 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। साल्हेर किला साहसिक गतिविधियों के शौकीनों के लिए एक लोकप्रिय स्थल है।

1671 में यह किला महाराजा शिवाजी के नेतृत्व में था। 1672 में मुगलों ने इस किले पर हमला किया और यह लड़ाई मराठों ने जीत ली।

प्राचीन समय में यह किला शिलाहार वंश के अधीन था लेकिन 17वीं शताब्दी में यह किला शिवाजी महाराज के अधीन आया। साल्हेर किला खास तौर पर  ऐतिहासिक रूप से मराठा साम्राज्य और मुग़ल साम्राज्य के बीच संघर्ष का प्रमुख केंद्र रहा है।

1672 ई. में इस किले पर मराठों और मुगलों के बीच एक ऐतिहासिक युद्ध हुआ जिसे "साल्हेर का युद्ध" कहा जाता है। यह युद्ध मराठों की पहली बड़ी विजय थी जिसमें उन्होंने मुगलों को हराया।

किला न केवल एक ऐतिहासिक गाथा का प्रतीक है, बल्कि यह प्राकृतिक सौंदर्य और साहसिक अनुभव का संगम भी है। यह स्थान इतिहास, ट्रेकिंग और प्राकृतिक दृश्यों में रुचि रखने वालों के लिए एक आदर्श स्थल है।


कांवड़ यात्रा 2025: आस्था और भक्ति से सराबोर एक पवित्र तीर्थयात्रा, जानें महत्व, प्रकार और भी अन्य


कांवड़ यात्रा भगवान शिव के भक्तों द्वारा की जाने वाली एक वार्षिक तीर्थयात्रा है। यह सबसे महत्वपूर्ण प्रथाओं में से एक है जिसके अंतर्गत कांवड़िये (भक्त) गंगा नदी (आमतौर पर हरिद्वार, गौमुख, गंगोत्री से) से पवित्र जल लेकर निकटवर्ती शिवलिंग पर चढ़ाते हैं। कांवड़ यात्रा वह प्रथा है जिसमें लोग पवित्र नदी से पवित्र जल लेते हैं और उसे प्रसिद्ध शिवलिंग पर चढ़ाने के लिए लंबी दूरी तय करते हैं। शिवलिंग पर पवित्र जल चढ़ाने के पवित्र अभियान का हिस्सा बनने वाले कांवड़ यात्रियों को कांवड़िये कहा जाता है। वास्तव मे काँवड़ यात्रा सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं बल्कि यह एक आस्था और भक्ति से जुड़ा श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक भी है। 

वास्तव में, कांवड़ यात्रा एक धार्मिक अनुष्ठान से कहीं बढ़कर है क्योंकि यह एक प्रकार की आध्यात्मिक यात्रा से सीधे तौर पर जुड़ी हुई है जो कांवड़ियों से उनकी इच्छाशक्ति की परीक्षा और भगवान शिव के प्रति उनके गहरे प्रेम की अभिव्यक्ति के रूप में मांग करती है।

भारत में सावन (श्रावण) के महीने में हरिद्वार, गौमुख, बैद्यनाथ, नीलकंठ, काशी विश्वनाथ आदि सभी प्रसिद्ध शिवलिंगों के दर्शन के लिए कांवड़ यात्रा विशेष रूप से मनाई जाती है। कांवड़ यात्रा कई प्रकार की होती है और भक्तों द्वारा यात्रा करने के तरीके के आधार पर इसे मोटे तौर पर विभिन्न प्रकारों में वर्गीकृत किया जा सकता है, जैसे डाक कांवड़, बैठी कांवड़, साइकिल/बाइक/वाहन कांवड़ आदि। आपको यहाँ कांवड़ यात्रा, सावन में यह क्यों मनाई जाती है, और कांवड़ यात्रा के प्रकार आदि के बारे में पूरी जानकारी मिलेगी।

कांवड़ यात्रा क्या है?

कांवड़ यात्रा भगवान शिव के भक्तों द्वारा की जाने वाली एक वार्षिक तीर्थयात्रा है जिसके तहत वे पवित्र जल उठाते हैं और उसे प्रसिद्ध शिवलिंग पर चढ़ाते हैं। इस पवित्र यात्रा को कांवड़ यात्रा के रूप में जाना जाता है, जिसके दौरान भक्त हरिद्वार, गौमुख, गंगोत्री या सुल्तानगंज जैसे स्थानों से गंगा नदी का पवित्र जल लाने के लिए अधिकतर पैदल यात्रा करते हैं। भगवान शिव के प्रति अपनी भक्ति के अनुसार, वे कांवड़ सजाते हैं, अर्थात वह उपकरण जिसके माध्यम से वे कांवड़ ले जाते हैं। लंबी दूरी तय करने के बाद, वे इसे स्थानीय या प्रसिद्ध शिव मंदिरों, विशेष रूप से झारखंड के प्रसिद्ध बैद्यनाथ धाम (देवघर) या उत्तराखंड के नीलकंठ महादेव में शिवलिंग पर चढ़ाते हैं।

सावन के महीने में कांवड़ यात्रा क्यों मनाई जाती है?

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, पवित्र महीना सावन या श्रावण भगवान शिव की पूजा और पवित्र जल चढ़ाने का महीना है। पूरा सावन महीना भक्तों के लिए भगवान शिव की पूजा करने के लिए उपयुक्त है।



हिंदू शास्त्रों के अनुसार, सावन का महीना भगवान शिव की पूजा के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव ने दुनिया को बचाने के लिए समुद्र मंथन के दौरान निकले हलाहल विष को पी लिया था। ऐसा कहा जाता है कि भगवान शिव ने विष को अपने कंठ में धारण कर लिया था (और नीलकंठ बन गए थे)। भक्त शिवलिंग को शीतलता प्रदान करने के लिए उस पर गंगा जल चढ़ाते हैं और शिवलिंग पर जल चढ़ाकर अपनी भक्ति और कृतज्ञता व्यक्त करते हुए, भक्त भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

सावन में गंगा जल चढ़ाने से आशीर्वाद, स्वास्थ्य, धन और पापों व पिछले कर्मों से मुक्ति मिलती है।

कांवड़ यात्रा के प्रकार:

भक्तों द्वारा की जाने वाली यात्रा के आधार पर कांवड़ यात्रा को मोटे तौर पर निम्नलिखित प्रकारों में वर्गीकृत किया जा सकता है:

डाक कांवड़

कांवड़ यात्रा का सबसे तेज़ रूप जिसमें भक्त गंगा स्रोत से मंदिर तक बिना रुके दौड़ते या जॉगिंग करते हैं और इसे कांवड़ यात्रा का एक कठिन मार्ग माना जाता है। यह कांवड़ यात्रा का कठिन मार्ग है जो आमतौर पर बिना सोए एक ही बार में किया जाता है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, पवित्र नदी से जल लेने के 24 घंटे के भीतर शिव को पवित्र जल अर्पित किया जाता है।

बैठी काँवर

बैठी काँवड़ की प्रथा के तहत, पूरी यात्रा के दौरान काँवर को कभी ज़मीन पर नहीं रखा जाता। भक्त इसे वैकल्पिक रूप से या कंधों का उपयोग करके ले जाते हैं, लेकिन यह सुनिश्चित करते हैं कि पवित्र नदी से काँवर उठाने के बाद यह ज़मीन को न छुए।

खड़ी काँवर

भक्तों के विश्राम के समय काँवर को सीधा खड़ा रखा जाता है और इसे गिरना या झुकना नहीं चाहिए—अगर ऐसा होता है तो इसे अशुभ माना जाता है।

झूला काँवर

झूला काँवर के अंतर्गत काँवर को कंधों पर संतुलित एक डंडे पर लटकाकर ले जाया जाता है। संतुलन बनाए रखने के लिए दोनों सिरों पर जल के घड़े लटकाए जाते हैं।

संकल्प काँवर

संकल्प काँवर के अंतर्गत ऐसी मान्यता है कि भक्तों को पूर्ण उपवास की स्थिति में पवित्र जल अर्पित करना होता है। काँवरिये शिवलिंग पर जल अर्पित करने तक उपवास रखते थे।

साइकिल/बाइक/वाहन कांवड़

यह कांवड़ यात्रा का आधुनिक रूप है जिसके अंतर्गत कांवड़िये लंबी दूरी की यात्रा करने के लिए साइकिल, बाइक या यहां तक कि ट्रक का उपयोग करते हैं।

काँवड़ यात्रा के दौरान किन सावधानियों का पालन करना है जरूरी? 

अगर आप काँवड़ यात्रा पर जाने कि तैयार कर रहे हैं तो यह जरूरी है कि आप कुछ सावधानियों को बरते और किसी किस्म कि लापरवाही से बचें। स्वास्थ्य और फिटनेस से जुड़ी सावधानियों के साथ है यह जरूरी है कि आप धार्मिक मर्यादा और अनुशासन का ध्यान रखें। इसके अतिरिक्त क्योंकि रात में काँवड़ यात्रा के साथ ही सड़क पर दूसरे वाहन और सवारी और गाड़ियों को भी गुजरना होता है इसलिए यह जरूरी है कि आप यातायात नियम का पालन करें और  रात में रिफ्लेक्टिव जैकेट पहन कर ही यात्रा करें। खाली पेट यात्रा न करें और हल्का और सात्त्विक भोजन करें साथ ही डिहाइड्रेशन से बचें तथा खूब पानी पिएं, नींबू पानी या ORS साथ रखें।

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अस्वीकरण: कृपया ध्यान दें कि लेख में उल्लिखित टिप्स/सुझाव केवल सामान्य जानकारी है जो विभिन्न सामाजिक और धार्मिक आस्था पर आधारित हैं.ताकि आपको उस मुद्दे के बारे में अपडेट रखा जा सके जो कि आम लोगों से अपेक्षित है. आपसे निवेदन है कि कृपया इन सुझावो को  पेशेवर सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए तथा अगर आपके पास इन विषयों से सम्बंधित कोई विशिष्ट प्रश्न हैं तो हमेशा सम्बंधित एक्सपर्ट से अवश्य परामर्श करें।

सावन 2025 अंतिम सोमवार आज: जाने क्यों चढ़ाते है शिवलिंग पर दूध और क्या है इसके पीछे मान्यता

Saavan 2023 why milk is offered to Shivling
आज अर्थात 5 अगस्त को सावन महीने का अंतिम सोमवार पड़ रहा है. वैसे तो सावन का प्रत्येक दिन भगवान शंकर को जलाभिषेक के लिए युपयुक्त माना जाता है लेकिन सोमवार का विशेष महत्व माना जाता है. ख़ासतौर पर सावन के अंतिम सोमवार को जलाभिषेक का विशेष महत्व माना जाता है.सावन में जलाभिषेक का विशेष महत्व है. शिवलिंग पर जल के साथ ही, दूध चढ़ाने की प्रथा कई धार्मिक और पौराणिक कथाओं से जुड़ी हुई है। इस प्रथा का पालन हिन्दू धर्म में किया जाता है, जहां शिवलिंग को महादेव शिव का प्रतीक माना जाता है। इस प्रतीक की पूजा और अर्चना मान्यताओं के अनुसार की जाती है।

दूध को शिवलिंग पर चढ़ाने का मुख्य कारण मान्यता है कि दूध महादेव को प्रिय होता है और यह उन्हें प्रसन्न करने में सक्षम होता है। शिवलिंग पर दूध चढ़ाने का अन्य एक मान्यता है कि यह प्रतीक ग्रहणशीलता के रूप में काम करता है, अर्थात् शिवलिंग द्वारा दूध अदृश्य रूप से ग्रहण किया जाता है और महादेव को उसका प्रसाद मिलता है। इसके अलावा, दूध शिव की प्रकृति के प्रतीक के रूप में भी माना जाता है, जिसे इस प्रतीक की पूजा में उपयोग किया जाता है।



शिवलिंग पर दूध का अन्य एक अर्थ संकेतिक हो सकता है। दूध को सफेद रंग का माना जाता है, जो शुद्धता, पवित्रता, और निर्मलता का प्रतीक हो सकता है। इस तरह, दूध को शिवलिंग पर चढ़ाकर, श्रद्धालुओं का अभिवादन किया जाता है और प्रार्थना की जाती है कि महादेव सभी दुःखों को दूर करें और अच्छा स्वास्थ्य और समृद्धि प्रदान करें।

यह उल्लेखनीय है कि धार्मिक प्रथाओं के पीछे विशेषता और मान्यताओं का प्रभाव होता है और व्यक्ति के आस-पास के सांस्कृतिक संदर्भों पर भी निर्भर करता है। अलग-अलग समुदायों में इस प्रतीक की विशेषताएं और अर्थों में अंतर हो सकता है।

शिवलिंग पर दूध चढ़ाने की प्रथा का मूल आधार धार्मिक और पौराणिक कथाओं में पाया जा सकता है। यह प्रथा भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व रखती है और इसका मतलब भक्ति और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। निम्नलिखित कुछ मुख्य कारण बताए गए हैं जो इस प्रथा को समझाते हैं:

शिव के प्रतीक के रूप में:

 शिवलिंग पौराणिक दृष्टिकोण से शिव की प्रतिष्ठा का प्रतीक होता है। इसे अभिवादन करके भक्ति और समर्पण का अभिप्रेत किया जाता है। दूध को शिवलिंग पर चढ़ाने से भक्त अपनी पूजा और आराधना को शिव के प्रति समर्पित करता है और उनके श्रीमंत, स्नेही, और प्रसन्न होने की कामना करता है।

  • पहला सावन सोमवार व्रत 14 जुलाई, सोमवार
  • दूसरा सावन सोमवार व्रत 21 जुलाई, सोमवार
  • तीसरा सावन सोमवार व्रत 28 जुलाई, सोमवार
  • चौथा सावन सोमवार व्रत 4 अगस्त, सोमवार


पौराणिक कथाओं का महत्व: 

कई पौराणिक कथाओं में शिव को दूध का प्रिय भोग माना जाता है। इन कथाओं में दूध उनके प्रसन्नता और कृपा का प्रतीक होता है। इसलिए, भक्त शिवलिंग पर दूध चढ़ाते हैं ताकि उन्हें आनंदित करें और उनकी मनोकामनाएं पूरी हों।



शिव के अनुयायों का परंपरागत रिवाज:

 दूध को शिव के लिए प्रिय भोग मानने और उनकी कृपा को प्राप्त करने की प्रथा शिव के भक्तों के बीच प्रचलित है। इसलिए, विशेष रूप से सावन महीने में शिवलिंग पर दूध की अर्पणा की जाती है, जब शिव भक्त अपने समर्पण और निष्ठा को दिखाते हैं।

यहां यह महत्वपूर्ण है कि धार्मिक प्रथाओं में भक्ति और समर्पण के भाव को महत्व दिया जाता है, और इन प्रतिष्ठानों का स्वरूप और महत्व व्यक्तिगत विश्वास और आचार्यों द्वारा सिद्धांतों पर निर्धारित किया जा सकता है।

International Friendship Day 2025: सच्चा दोस्त-मिलना मुश्किल है और मिला जाना सौभाग्य की बात


फ्रेंडशिप डे 2025  या  मित्रता दिवस हमारे दोस्तों के साथ हमारे संबंधों का जश्न मनाने के लिए समर्पित एक विशेष दिन है। भारत में  फ्रेंडशिप डे 2025  हर साल अगस्त के पहले रविवार को मनाया जाता है। हालाँकि  फ्रेंडशिप डे 2025 पूरी दुनिया में मनाई जाती है , लेकिन हर देश में इसकी तिथि अलग-अलग हो सकती है। यह दिन दोस्तों के महत्व और हमारे जीवन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका का सम्मान और पहचान भी करता है।

फ्रेंडशिप डे का यह दिन खास तौर पर दोस्तों के लिए होता है और इसके लिए हम उनके प्रति आभार व्यक्त करने, रिश्तों को मज़बूत करने और दोस्ती से मिलने वाली खुशियों का जश्न मनाने का अवसर मनाते हैं।

सच्ची मित्रता के रिश्ते का वर्णन करने के लिए, हमें प्रसिद्ध हिंदी उपन्यासकार मुंशी प्रेमचंद के उद्धरणों से परिचित होना चाहिए, जो इस प्रकार हैं - "विचारों में समानता ही व्यक्तियों के बीच मित्रता का आधार है।" मित्रता दिवस के अवसर पर मित्रता को परिभाषित करने वाला यह सर्वोत्तम उद्धरण है। 

विचार और हमारी प्रतिबद्धता ही मानवीय रिश्तों की नींव हैं, यह प्रेम के बंधन, साथ रहने के आनंद और सीमाओं, देशों और पृष्ठभूमियों से परे समर्थन और साथ के प्रति कृतज्ञता का जश्न मनाने के लिए एक विशेष श्रद्धांजलि है। आपसी सम्मान, विश्वास, समर्थन और साझा अनुभव इस रिश्ते की आधारशिला हैं।

इस दिन, लोग आमतौर पर उपहारों का आदान-प्रदान करते हैं, संदेश भेजते हैं और साथ में समय बिताते हैं, ये सभी मज़बूत और सहयोगी दोस्ती के महत्व को और मज़बूत करते हैं।

फ्रेंडशिप डे 2025: तिथि

ध्यान दें कि भारत में फ्रेंडशिप डे अगस्त के पहले रविवार को मनाया जाता है और इस साल यानी 2025 में साल का पहला रविवार 3 अगस्त को पड़ रहा है, इसलिए फ्रेंडशिप डे 5 अगस्त, 2025 को मनाया जाएगा।

फ्रेंडशिप डे का महत्व

दोस्ती का जश्न: यह उन दोस्तों का सम्मान और सराहना करने का दिन है जो हमारे जीवन में खुशी और अर्थ जोड़ते हैं।

रिश्तों को मज़बूत करना: मित्रता दिवस कृतज्ञता और स्नेह व्यक्त करके मौजूदा दोस्ती को मज़बूत करने का अवसर प्रदान करता है।

सांस्कृतिक आदान-प्रदान: विभिन्न संस्कृतियाँ मित्रता दिवस को अनूठी परंपराओं के साथ मनाती हैं, जिससे वैश्विक समुदाय और समझ की भावना को बढ़ावा मिलता है।

मानसिक स्वास्थ्य: मित्रता को पहचानना और उसका जश्न मनाना सामाजिक सहयोग नेटवर्क को मज़बूत करके मानसिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

मित्रता के बारे में महत्वपूर्ण Quotes

  • अरस्तू: "मित्र क्या है? दो शरीरों में एक ही आत्मा निवास करती है।"
  • राल्फ वाल्डो इमर्सन: "मित्र होने का एकमात्र तरीका स्वयं मित्र होना है।"
  • अल्बर्ट कैमस: "मेरे आगे मत चलो... हो सकता है मैं पीछे न आऊँ। मेरे पीछे मत चलो... हो सकता है मैं नेतृत्व न करूँ। मेरे साथ चलो... बस मेरे मित्र बनो।"
  • हेलेन केलर: "मैं उजाले में अकेले चलने की बजाय अंधेरे में एक मित्र के साथ चलना पसंद करूँगी।"
  • ऑस्कर वाइल्ड: "अंततः, सभी संगति का बंधन, चाहे वह विवाह में हो या मित्रता में, बातचीत ही है।"
  • एल्बर्ट हबर्ड: "एक दोस्त वह होता है जो आपके बारे में सब कुछ जानता है और फिर भी आपसे प्यार करता है।"
  • सी.एस. लुईस: "दोस्ती उस पल पैदा होती है जब एक व्यक्ति दूसरे से कहता है, 'क्या! तुम भी? मुझे तो लगा था कि मैं ही अकेला हूँ।'"
  • महात्मा गांधी: "खुद को खोजने का सबसे अच्छा तरीका है दूसरों की सेवा में खुद को खो देना।"
  • मार्क ट्वेन: "अच्छे दोस्त, अच्छी किताबें और एक सुप्त अंतःकरण: यही आदर्श जीवन है।"
  • हेनरी डेविड थोरो: "दोस्ती की भाषा शब्द नहीं, बल्कि अर्थ हैं।"
  • वाल्टर विंचेल: एक सच्चा दोस्त वह होता है जो तब भी आपके साथ रहता है जब बाकी दुनिया चली जाती है।
  • वुडरो विल्सन: दोस्ती ही एकमात्र सीमेंट है जो दुनिया को एक साथ जोड़े रखेगी।
  • मैंडी हेल: दो चीजें जिनके पीछे आपको कभी नहीं भागना पड़ेगा: सच्चे दोस्त और सच्चा प्यार।
  • आयरिश कहावत: एक अच्छा दोस्त चार पत्ती वाले तिपतिया घास की तरह होता है; मिलना मुश्किल है और मिलना सौभाग्य की बात है।
  • एड कनिंघम: दोस्त वो दुर्लभ लोग होते हैं जो पूछते हैं कि हम कैसे हैं और फिर जवाब सुनने का इंतज़ार करते हैं।
  • जॉर्ज हर्बर्ट: सबसे अच्छा आईना एक पुराना दोस्त होता है।

व्रत के लिए जरुरी मखाना मिठाई: स्वाद में लाजवाब और सेहत के लिहाज़ से फायदेमंद


जैसा कि हम सभी जानते हैं  कि व्रत के दिनों में कुछ हल्का, सात्विक और ऊर्जा देने वाला भोजन ज़रूरी होता है। मखाना मिठाई न केवल स्वादिष्ट होती है, बल्कि उपवास के दौरान आपकी सेहत का भी ध्यान रखती है। ऐसे में मखाना से बनी मिठाई न केवल स्वाद में लाजवाब होती है, बल्कि सेहत के लिहाज़ से भी बेहद फायदेमंद होती है। 

आज हम आपके साथ मखाना मिठाई (लड्डू या बर्फी) की व्रत विशेष रेसिपी बता  रहे हैं जो आप व्रत के दौरान अपने थाली में इसे शामिल कर सकते हैं। इसके सबसे बड़ा लाभ यह  होता है कि इसमें फाइबर की मात्रा होती है, जो पेट साफ रखने और कब्ज से राहत देने में मदद करता है।

 सामग्री (Ingredients): 

  • मखाने (फॉक्स नट्स) 2 कप
  • देसी घी 2-3 बड़े चम्मच
  • गुड़ (या शुद्ध मिश्री) 1 कप (कद्दूकस किया हुआ)
  • सूखा नारियल (वैकल्पिक) ¼ कप (कद्दूकस किया हुआ)
  • इलायची पाउडर ½ चम्मच
  • काजू/बादाम (कटा हुआ) 2-3 बड़े चम्मच
  • दूध (वैकल्पिक) 2 बड़े चम्मच



बनाने की विधि (Step-by-Step Recipe):

मखाने भूनना:

सबसे पहले एक कढ़ाही में 1 बड़ा चम्मच घी गर्म करें। उसमें मखाने डालकर धीमी आंच पर 7-8 मिनट तक कुरकुरे होने तक भूनें। भूनने के बाद ठंडा करके मिक्सी में दरदरा पीस लें। चाहें तो आधे मखाने दरदरे रखें और आधे पाउडर बना लें, इससे टेक्सचर अच्छा आएगा।


मखाना मिठाई गुड़ की चाशनी कैसे तैयार करें?

एक पैन में थोड़ा सा पानी डालकर गुड़ गर्म करें जब तक वह पूरी तरह पिघलकर चाशनी जैसा बन जाए। ध्यान रहे – चाशनी को ज़्यादा गाढ़ा न करें।

मखाना मिठाई मिश्रण कैसे तैयार करें?

अब कढ़ाही में थोड़ा घी गर्म करें और उसमें कटा हुआ नारियल, काजू-बादाम हल्का भूनें। फिर उसमें मखाना पाउडर डालें और अच्छी तरह मिलाएं। अब इसमें गुड़ की चाशनी डालें और इलायची पाउडर मिलाएं।

सेट करना या लड्डू बनाना:

अगर आप बर्फी बनाना चाहते हैं: मिश्रण को एक घी लगी थाली में फैलाएं, ठंडा होने दें और मनचाहे आकार में काट लें।

अगर आप लड्डू बनाना चाहते हैं: मिश्रण हल्का गुनगुना रहते ही हाथों से लड्डू का आकार दें।

श्रावण में शिव महिमा: भगवान शिव ने क्यों लिए ये प्रमुख अवतार?

Lord Shankar Avtaar Shivpuran
हिन्दू धर्म में सावन का महीना बेहद पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है जो देवों के देव महादेव की पूजा के लिए पूरी तरह से समर्पित होता है।  भगवान शंकर को सभी हिन्दू देवताओं में सर्वोच्च भगवान माना जाता है भगवान सबसे अधिक पूजे जाने वाले देवी-देवताओं में से भी एक है. हिन्दू धर्म ग्रंथों के अनुसार यह मान्यता है कि सावन के पावन महीने में विधिपूर्वक भगवान शंकर की पूजा-अर्चना करने और उनके निमित्त व्रत रखने से वे अपने सभी भक्तों की सभी मनोकामना पूरी करते हैं. बाबा भोलेनाथ के साथ ही माता पार्वती का भी भक्तों को आशीर्वाद मिलता है। हिंदू पौराणिक कहानियों और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव ने कई अवतार लिया था. आइए जानते हैं भगवान शंकर के प्रमुख अवतारों के बारे में.
शिव के 19 अवतार
शिव के 19 अवतारों का वर्णन शिव पुराण में मिलता है निम्नलिखित में कुछ महत्वपूर्ण शिव अवतारों के बारे में जानकारी दी गई है.  हिंदू पंचांग के अनुसार, शिव पुराण एक प्रमुख हिंदू पुराण है, जो भगवान शिव के महत्वपूर्ण कथाओं, अवतारों और उपास्य रूपों के बारे में विस्तृत ज्ञान प्रदान करता है। शिव के 19 अवतारों का वर्णन शिव पुराण में मिलता है निम्नलिखित में कुछ महत्वपूर्ण शिव अवतारों के बारे में जानकारी दी गई है :शिव के इन 19 अवतारों ने सभी प्राणियों को कष्टों से मुक्त किया है और उन्हें सुख और समृद्धि प्रदान की है. वे सभी भक्तों के लिए पूजनीय हैं और उन्हें सभी प्रकार के कष्टों से मुक्त करते हैं.

 हिन्दू पञ्चाङ्गे और अन्य स्रोतों के अनुसार भगवान शिव के प्रमुख अवतार हैं-वीरभद्र, पिप्पलाद, नंदी, भैरव, महेश, अश्वत्थामा, शरभावतार, गृहपति, दुर्वासा, हनुमान, वृषभ, यतिनाथ, कृष्णदर्शन, अवधूत, भिक्षुवर्य, सुरेश्वर, किरात, सुनटनर्तक, ब्रह्मचारी, यक्ष, वैश्यानाथ, द्विजेश्वर, हंसरूप, द्विज, नतेश्वर आदि । 



शिव के 19 अवतारों का वर्णन शिव पुराण में मिलता है. इनमें से कुछ प्रमुख अवतार हैं:

विश्वरूप अवतार: इस अवतार में भगवान शिव ने समुद्र मंथन के समय विष और अमृत पीने वाले देवता-असुरों के सामने अपनी विश्वरूप दिखाई थी। इससे उन्होंने अपने भक्तों को प्रेरित किया और दुर्योधन के पक्ष से द्रोणाचार्य को मदद करने का भी वादा किया था।

भैरव अवतार: भगवान शिव के इस अवतार में उन्होंने अश्वत्थामा के श्राप से मुक्ति पाने के लिए भैरव रूप धारण किया था। उन्होंने अश्वत्थामा को प्रतिज्ञा की थी कि उन्हें उसके श्राप से मुक्ति मिलेगी।

दक्षिणामूर्ति अवतार: इस अवतार में भगवान शिव ने गुरुपूर्वक ज्ञान को प्रदान किया था। उन्होंने चारों दिशाओं के देवताओं को ज्ञान दिया था और संसार की माया और अविद्या का नाश करने की महत्वपूर्ण उपदेश दिया था।

महाकाल: महाकाल भगवान शिव का सबसे प्रसिद्ध अवतार है. वे काल का देवता हैं और मृत्यु के अधिपति हैं. वे सभी प्राणियों के अंत के जिम्मेदार हैं.

अर्धनारीश्वर अवतार: इस अवतार में भगवान शिव और पार्वती के सम्मिलित रूप में व्यक्त होते हैं, जो प्रकृति और पुरुष के सम्मिलन को प्रतिष्ठित करता है। इस रूप में उन्हें सृष्टि, स्थिति और संहार का सार्वभौमिक अधिकार होता है।



जानें चार धामों के बारे में: बद्रीनाथ, जगन्नाथ पुरी, रामेश्वरम और द्वारका

तारक: तारा भगवान शिव का एक अन्य प्रसिद्ध अवतार है. वे तारा देवी के अवतार हैं, जो एक शक्तिशाली देवी हैं जो सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति देती हैं.

भुवनेश: भुवनेश भगवान शिव का एक अवतार है जो समस्त ब्रह्मांड का स्वामी है. वे सभी प्राणियों के संरक्षक हैं और उन्हें सभी प्रकार के कष्टों से बचाते हैं.



षोडश: षोडश भगवान शिव का एक अवतार है जो सभी प्रकार के ज्ञान और शक्ति का भंडार है. वे सभी भक्तों को ज्ञान और शक्ति प्रदान करते हैं.

गौरीशंकर अवतार: इस अवतार में भगवान शिव ने भक्ता पार्वती के साथ गौरीशंकर के रूप में जन्म लिया था। यह अवतार पर्वतीश्वरी देवी के श्रद्धावान भक्तों को आशीर्वाद देने के लिए धारण किया गया था।

कालभैरव अवतार: इस अवतार में भगवान शिव ने कालभैरव रूप धारण किया था और दक्ष यज्ञ का विनाश किया था। उन्होंने देवी सती के दुख को दूर करने के लिए अपना शक्तिशाली रूप प्रदर्शित किया था।

धूम्रवान: धूम्रवान भगवान शिव का एक अवतार है जो सभी प्रकार के रोगों और बीमारियों को दूर करने वाला है. वे सभी भक्तों को रोगों और बीमारियों से मुक्त करते हैं.

बगलामुख: बगलामुख भगवान शिव का एक अवतार है जो सभी प्रकार के शत्रुओं और विरोधियों को हराने वाला है. वे सभी भक्तों को शत्रुओं और विरोधियों से मुक्त करते हैं.

मातंग: मातंग भगवान शिव का एक अवतार है जो सभी प्रकार के सुख और समृद्धि का भंडार है. वे सभी भक्तों को सुख और समृद्धि प्रदान करते हैं.

कमल: कमल भगवान शिव का एक अवतार है जो सभी प्रकार के ज्ञान और मोक्ष का मार्गदर्शक है. वे सभी भक्तों को ज्ञान और मोक्ष प्रदान करते हैं.

यह केवल कुछ शिव पुराण में वर्णित अवतार हैं, लेकिन इस पुराण में भगवान शिव के अन्य अवतारों का भी वर्णन है। शिव पुराण के अलावा भी अन्य हिंदू पुराणों में भगवान शिव के विभिन्न अवतारों का वर्णन मिलता है।

शिव के अनेक अंशावतार भी हुए

शिव के अंश ऋषि दुर्वासा, महेश, वृषभ, पिप्पलाद, वैश्यानाथ, द्विजेश्वर, हंसरूप, अवधूतेश्वर, भिक्षुवर्य, सुरेश्वर, ब्रह्मचारी, सुनटनर्तक, द्विज, अश्वत्थामा, किरात, नतेश्वर आदि जन्मे. इन अंशावतार का उल्लेख ‘शिव पुराण’ में भी मिलता है.



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अस्वीकरण: कृपया ध्यान दें कि लेख में उल्लिखित टिप्स/सुझाव केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से हैं ताकि आपको उस मुद्दे के बारे में अपडेट रखा जा सके जो आम लोगों से अपेक्षित है. आपसे निवेदन है कि कृपया इन सुझावो को  पेशेवर सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए तथा अगर आपके पास इन विषयों से सम्बंधित कोई विशिष्ट प्रश्न हैं तो हमेशा अपने पेशेवर सुझाव प्रदाता से अवश्य परामर्श करें।

विंबलडन : Facts in Brief



गर्मी के मौसम में आईस क्यूब से कैसे करें त्वचा की देखभाल, जानें मेकअप विशेषज्ञ से

गर्मी और मानसून के मौसम में त्वचा को ठंडक और ताजगी देने के लिए यह जरूरी है कि हम कुछ त्वचा के लिए कुछ अडिश्नल केयर करें। इसके लिए सबसे अच्छा और बेहतरीन उपाय है आइस क्यूब्स जो न सिर्फ त्वचा को तरोताज़ा करता है, बल्कि कई स्किन प्रॉब्लम्स को भी दूर करने में मदद करता है। आइस क्यूब लगाने के लिए सबसे युपयुक्त उपाय है किसी साफ कॉटन कपड़े में लपेटकर हल्के हाथों से चेहरे पर 1–2 मिनट तक रगड़ें और इसे आप  दिन में एक बार सुबह या धूप में बाहर जाने से पहले कर सकते हैं। 

सेलिब्रिटी मेकअप विशेषज्ञ, स्टार सैलून एण्ड एकेडमी, डायरेक्टर आश्मीन मुंजाल लेकर आई त्वचा के लिए बेहद फायदेमंद टिप्स:
  • अक्सर इस मौसम में हमें ओपन पोर्स और टैनिंग की समस्या होता है, अगर ऐसा है तो आलू, खीरा और टमाटर का पेस्ट लेकर आईस ट्रे में जमा कर क्यूब बना लें, ये क्यूब त्वचा के लिए बेहद फायदेमंद हैं.
  • क्यूब्स को अपने चेहरे पर रगड़ें, 20 मिनट के लिए छोड़ दें और इसके बाद पानी से धो लें। दिन में दो बार इसका इस्तेमाल करें, यह त्वचा के लिए बेहतरीन क्लेंज़र और टोनर का काम करता है.अगर आपकी त्वचा ड्राई तो इस में 3 बादाम का पेस्ट भी मिला लें, यह बहुत फायदेमंद होगा.
  • अगर आपकी त्वचा आॅयली है तो इसमें लाईम ज्यूस ओडीकोलन मिलाएं, इससे आपको त्वचा की गंध से छुटकारा मिलेगा। खासतौर पर अगर आपको अंडआम्र्स में बहुत ज़्यादा पसीना आता है तो आप इस पसीने की गंध से भी राहत पा सकते हैं.
  • अगर आपकी त्वचा सनबर्न के कारण पैची हो गई है तो आप एलो वेरा क्यूब का इस्तेमाल करें, इसमें जैसमीन या नीम का तेल मिला लें, यह त्वचा के लिए बेहद फायदेमंद है. एक क्यूब लेकर त्वचा, गर्दन, कोहनी पर रगड़ें, 15-20 मिनट के लिए छोड़ दें। त्वचा से डार्क सैल्स और टैनिंग निकल जाएगी.
  • क्यूब बनाने के लिए आरओ का पानी इस्तेमाल करें जो हार्ड न हों, क्यों हार्ड पानी से त्वचा पर पैच आदि हो सकते हैं.
  • अगर आपकी आंखें पफी हो रही हैं तो दूध और ग्रीन टी से आईस क्यूब पैक बनाएं। ग्रीन टी बनाकर इसे आईस ट्रे में रखें। जब ज़रूरत हो आंखों पेर लगाएं. साफ़ तौलिए से त्वचा को सुखा लें.
  • आईस क्यूब एक्ने पोर्स पर भी बेहद फायदेमंद होते हैंvइनका इस्तेमाल से एक्ने की समस्या के लिए किया जा सकता हैv त्वचा की लालगी और सूजन को दूर करते हैं.आईस क्यूब लगाने से पहले चेहरे को पानी से धोकर अच्छी तरह साफ़ कर लेंvकुछ समय के लिए आईस क्यूब का लगातार इस्तेमाल करें, इसके बाद नियमित रूप से इस्तेमाल करें.
  • महिलाएं वैक्सिंग का इस्तेमाल करती हैं, आजकल पुरूष भी इसका इस्तेमाल करने लगे हैं. यह शरीर से अवांछित बाल हटाने का अच्छा तरीका है.लेकिन वैक्सिंग के साथ त्वचा की देखभाल ज़रूरी है. खासतौर पर अगर आपकी त्वचा बहुत ज़्यादा सेंसिटिव है तो आईस क्यूब बहुत अधिक फायदेमंद हो सकते है.वैक्सिंग के बादे त्वचा पर आईस क्यूब रगड़ें, इससे त्वचा की लालगी कम होगी और आराम मिलेगाv
  • उमस भरे मौसम में मेकअप करने और फाउन्डेशन लगाने से पहले अगर आईस क्यूब का इस्तेमाल किया जाए तो मेकअप लम्बे समय तक टिकता है. अपने त्वचा को साफ करें, रूई से एस्ट्रिजेंट टोनर लगाएं. इसके बाद आईस क्यूब को एक साफ कपड़े में लपेट कर कुछ सैकण्ड्स के लिए चेहरे पर लगाएं.
  • आईस क्यूब का इस्तेमाल कभी भी 15 मिनट से ज़्यादा समय के लिए न करें.

विंबलडन 2025: विशेषताएँ, इतिहास और अन्य-Facts in Brief


विंबलडन वास्तव मे एक उपनगर अर्थात शहर है जो लंदन मे स्थित है। इसी के नाम पर टेनिस के सबसे प्रतिष्ठित विंबलडन चैंपियनशिप को जाना जाता है। यह दुनिया का सबसे पुराना टेनिस टूर्नामेंट है जो लंदन के विंबलडन स्थित ऑल इंग्लैंड लॉन टेनिस एंड क्रोकेट क्लब में प्रतिवर्ष आयोजित किया जाता है। पहला विंबलडन चैंपियनशिप 1877 में आयोजित किया गया था। यह चार ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंटों में से एक है, जो इस मामले मे सबसे अलग है कि यह  विशिष्ट रूप से ग्रास कोर्ट पर खेला जाता है जबकि बाकी अन्य टूर्नामेंट जैसे औसट्रेलियन ओपन, फ्रेंच ओपन और यू एस ओपन आर्टफिशल कोर्ट पर खेली जाती है।  

विंबलडन: जानें विशेषताएं 

क्या होती है ग्रास कोर्ट की विशेषताएँ

लॉन टेनिस टूर्नामेंट के ग्रेंड स्लैम मे विंबलडन एकमात्र ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट है जो ग्रास कोर्ट पर खेला जाता है, जिसे क्लासिक टेनिस कोर्ट की सतह माना जाता है।घास के मैदानों पर खेलना काफी थकान वाला होता है क्योंकि आर्टफिशल के अपेक्षा घास के मैंडर पर खेलने मे तेज़ और कम उछाल होता है, जिससे खिलाड़ियों को मज़बूत सर्व, आक्रामक नेट प्ले (सर्व-और-वॉली) और गेंद को नीचे रखने के लिए प्रभावी स्लाइस बैकहैंड का फ़ायदा मिलता है।

यह काफी तेज सतह वाले मैदान होते हैं क्योंकि यहाँ पर घास होने के कारण गेंद काफी कम उछलते हैं और गेंद नीचे की ओर फिसलती है, जिससे खिलाड़ियों को नीचे रहना पड़ता है और अपने शॉट उसी के अनुसार लगाने पड़ते हैं।

ग्रास कोर्ट पर खेलने मे  खिलाड़ियों को काफी मेहनत करना होता है क्योंकि ग्रैस कोर्ट पर खेलने के दौरान सर्व और वॉली पर ज़ोर देना होता होता है। 

विम्बलडन कि अन्य विशेषताओं मे यह भी शामिल है कि यहाँ पर पूरी तरह सफ़ेद ड्रेस कोड मे खिलाड़ियों को खेलना होता है।  यह सफेद ड्रेस कोड विक्टोरियन युग (1870 के दशक) से चली आ रही परंपरा है।

विजेताओं को ट्रॉफियों की प्रतिकृतियाँ प्राप्त होती हैं, जबकि मूल ट्रॉफियाँ ऑल इंग्लैंड क्लब संग्रहालय में प्रदर्शित रहती हैं।

विंबलडन, अपने समृद्ध इतिहास, अनूठी परंपराओं और विशिष्ट खेल शैली के साथ, टेनिस की दुनिया में एक विशेष स्थान रखता है, जो अपनी भव्यता, प्रतिस्पर्धी भावना और क्लासिक अपील के मिश्रण से खिलाड़ियों और प्रशंसकों दोनों को आकर्षित करता है।

  • पहली विंबलडन चैंपियनशिप 1877 में आयोजित की गई थी।
  • महिला चैंपियनशिप 1884 में शुरू की गई थी।
  • मिश्रित युगल और महिला युगल का उद्घाटन 1913 में हुआ था।
  • विंबलडन पहली बार 1968 में पेशेवर खिलाड़ियों के लिए खुला था।
  • 2020 में, COVID-19 महामारी के कारण टूर्नामेंट रद्द कर दिया गया था, जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार रद्द किया गया था।
  • 2022 में, नियमित निर्धारित खेल पहली बार "मध्य रविवार" को हुआ।
  • रूसी और बेलारूसी खिलाड़ियों को बाहर करने के कारण ATP, ITF और WTA ने 2022 टूर्नामेंट के लिए रैंकिंग अंक नहीं दिए।
  • रूसी और बेलारूसी खिलाड़ियों पर से प्रतिबंध 31 मार्च, 2023 को हटा लिया गया।


मानसून में इन चीज़ों का सेवन पड़ सकता है भारी – सेहत के लिए अलर्ट!


बरसात के मौसम में, भले हीं हमें गर्मी से राहत और सुकून दिलाने वाला होता ही क्योंकि झुलसाने वाले गर्मी से हमें यह निजात दिलाती है। लेकिन इसके साथ हीं यह भी सच है कि मानसून के मौसम में हमें अपने स्वास्थ्य के लिए भी खास सावधानी बरतने के अवसर भी होता है क्योंकि हमारी थोड़ी से लापरवाही स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकता है। सच्चाई तो यह ही कि बरसात के समय मे हमारा वातावरण बैक्टीरिया, फंगस और अन्य सूक्ष्म जीवों के लिए खास अवसर होता है क्योंकि ये वातावरण मे ऐक्टिव हो जाती है जो कि हमारे स्वास्थ्य कि परेशानियों का कारण बन सकती है। अगर हम सावधान नहीं हैं तो यह हमारे भोजन या अन्य किसी भी माध्यम  से हमारे शरीर मे प्रवेश कर सकती है और हमारे लिए परेशनियों का कारण बन सकती है। तो आइए हम जानते हैं कि आखिर बरसात के समय मे हमें खाने के लिए किस प्रकार कि सावधानियों को बरतने कि जरूरत है और खासतौर पर  कटे हुए फल, तले हुए स्नैक्स और सड़क किनारे मिलने वाले स्वादिष्ट व्यंजनों को सावधानी से क्यों खाना चाहिए.

पत्तेदार सब्जियां और स्प्राउट्स (अंकुरित अनाज) 

मानसून मे मानसून में पत्तेदार सब्जियां और स्प्राउट्स (अंकुरित अनाज) मे बैक्टीरिया और फंगस का खतरा बढ़ जाता है क्योंकि इस मौसम मे हवा में नमी अधिक होती है, जिससे स्प्राउट्स पर जल्दी बैक्टीरिया और फंगस पनप सकते हैं। इससे फूड पॉइज़निंग की संभावना बढ़ जाती है। इसके अतिरिक्त पत्तेदार सब्जियां और स्प्राउट्स (अंकुरित अनाज) अक्सर कच्चे खाए जाते हैं, जिससे उसमें मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया (जैसे E. coli, Salmonella) शरीर में सीधे प्रवेश कर सकते हैं।

कटे हुए फल

मानसून के समय मे वातावरण मे  बैक्टीरिया, फंगस और अन्य सूक्ष्म जीव खासतौर पर ऐक्टिव हो जाते हैं जो हमारे स्वास्थ्य के लिए खासतौर पर हानिकारक और जानलेवा हैं। मानसून मे खासतौर पर खुले में बेचे जाने वाले पहले से कटे हुए फल अक्सर नम हवा, मक्खियों और गंदी सतहों के संपर्क में आते हैं। हालांकि की सरकारी एजेंसियां और फूड डिपार्ट्मन्ट इन खुले फलों कि बिक्री पर सचेत रहती है और रोक लगाते हैं लेकिन सच यह है कि यह अभी भी खुलेआम बिकती है। यह बैक्टीरिया के लिए एक आदर्श प्रजनन भूमि बनाता है, जिससे पेट में संक्रमण और भोजन विषाक्तता जैसी खाद्य जनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

तले हुए स्ट्रीट फूड

बहलें हीं हम बरसात के समय मे खासतौर पर पकौड़े, समोसे और चाट जैसे स्नैक्स के दीवाने हो जाते हैं और अक्सर इस मौसम मे इनकी बिक्री बढ़ भी जाती है। लेकिन इनके इस्तेमान मे हमें खास तौर पर सचेत रहने कि जरूरत है क्योंकि इनके निर्माण मे दोबारा इस्तेमाल किए गए तेल में तला जा सकता है या घंटों तक बाहर रखा जा सकता है। इसके साथ ही बरसात के मौसम मे नम मानसून की हवा में, तेल जल्दी खराब हो सकता है और इन्हे बनाने वाले सैफ्टी और स्वस्थ टेक्नीक का इस्तेमाल नहीं करते हैं और नतीजा यह होता है कि ये चीजें खराब हो सकती है, जिससे अपच, एसिडिटी या इससे भी बदतर हो सकता है।

खतरनाक स्ट्रीट फूड्स 

स्ट्रीट फूड्स न केवल बच्चों बल्कि बड़ों के लिए खास पसंद बन चुकी है और हकीकत तो यह है कि शाम को बगैर इन दुकानों पर विजिट के बिना हमारी दिन पूरी हीं नहीं होती है। पानी पूरी से लेकर नूडल्स तक, कई स्ट्रीट फूड हमारी दिनचर्या का हिस्सा बन चुके हैं लेकिन मानसून के समय मे इनके इस्तेमाल मे खास सुरक्षा बरतने कि जरूरत है। पानी पूरी से लेकर नूडल्स, स्प्रिग रोल 5 तथा अन्य इसप्रकार कि चीजें  कच्चे या आधे पके हुए पदार्थों और पानी से बनाए जाते हैं जो बिल्कुल सुरक्षित नहीं होते हैं।  मानसून के दौरान, पानी का दूषित होना आम बात है, जिससे ये खाद्य पदार्थ आपके पेट के लिए जोखिम भरे हो सकते हैं।

कमज़ोर पाचन तंत्र

मानसून का मौसम खास तौर पर हमारे शरीर के लिए भी संदेड़नशील होता है जो कि बाहरी के अलावा आंतरिक परिवर्तन भी होते हिन। बरसात का मौसम स्वाभाविक रूप से हमारे पाचन तंत्र को धीमा कर देता है जो खाने पीने मे खास प्रकार कि सावधानी बरतने का संकेत होता है। ऐसे मे इस मौसम मे भारी, तैलीय या कच्चे खाद्य पदार्थों का सेवन हमारे पाचन तंत्र के लिए मुश्किल हो जाता है क्योंकि इन भोजन को पचाना मुश्किल हो जाता है, जिससे हम पेट फूलने, गैस और संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं।

इस दिन पैदा हुए लोगों पर होती है भगवान सूर्य की विशेष कृपा


रविवार को जन्मे लोगों कि सबसे बड़ी खासियत होती है कि वे अत्यंत महत्वाकांक्षी और भीड़ का हिस्सा नहीं बनने वाले होते हैं। Sunday को जन्मे लोगों का यह विश्वास होता है कि वे भगवान ने उन्हे भीड़ का हिस्सा बन कर जीने के लिए पैदा नहीं किया है और ऐसा इसलिए भी होता है क्योंकि रविवार जिसे सप्ताह का पहला दिन माना जाता है, और रविवार के दिन जन्में लोगों का स्वामी अस्ट्रालजी के अनुसार हमेशा भगवान सूर्य को माना जाता है। स्ट्रालजी और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार रविवार को जन्में लोगों पर भगवान सूर्य की कृपा बनी रहती है क्योंकि  भगवान सूर्य को इनका इष्ट देव कहा जाता है। आइये जानते हैं विशेषज्ञ हिमांशु रंजन शेखर (एस्ट्रॉलोजर और मोटिवेटर) द्वारा कि रविवार को जन्म लेने वाले लोगों की क्या होती है खासियत और उनके विशेषताएं-

नेतृत्व क्षमता से पूर्ण 

रविवार के दिन जन्में लोगों का स्वामी अस्ट्रालजी के अनुसार हमेशा भगवान सूर्य को माना जाता है और यही कारण है कि ऐसे जातकों कि जीवन पर भगवान सूर्य का गहरा प्रभाव होता है। सूर्य हमारे सौरमंडल के केंद्र होता है जिसके चारों ओर सभी गृह चक्कर लगते हैं और यही सोच रविवार के दिन जन्मे लोगों कि होती है जिनका मानना होता है कि वे नेतृत्व करने के लिए पैदा हुए हैं और यही सोच उन्हे जीवन में मुश्किलों के बावजूद  वे नेतृत्व के गुणों से संपन्न होते हैं और भीड़ का हिस्सा नहीं बनकर बल्कि उनके नेतृत्वकर्ता और हमेशा आगे रहने वाले होते हैं। 

शुभमन गिल: भारतीय क्रिकेट टीम मे नए विरासत

व्यक्तित्व और आदतें 

रविवार को जन्में लोगों का व्यक्तित्व और आदतें अन्य दिनों में जन्मे लोगों से बिल्कुल अलग होती हैं और ऐसा इसलिए भी होता है क्योंकि आप जानते हैं कि रविवार को सप्ताह का पहला दिन माना जाता है और दूसरा सूर्य, जिनके इर्द-गिर्द हमारे सौरमंडल के सभी ग्रह चक्कर लगाते हैं, वह  रविवार को जन्मे लोगों के स्वामी होता हैं। ऐसे लोगों पर हमेशा भगवान सूर्य की कृपा बनी रहती और इसकी कारण से  ऐसे लोग मेहनती, महत्वाकांक्षी, दृढ़ इच्छाशक्ति वाले और आकर्षक व्यक्तित्व वाले होते हैं। सूर्य कि तरह चमकना इनका स्वभाव होता है और ये हमेशा नेतृत्व करने वाले होते हैं। इसके साथ हीं ऐसे लोगों का मन बहुत साफ होता है और ये बिना किसी शर्त के प्यार करते हैं।

आकर्षक व्यक्तित्व  के मालिक 

सूर्य जो कि सौरमंडल के केंद्र होता है उसी के समान रविवार को जन्में लोगों आकर्षक व्यक्तित्व के स्वामी होते हैं और हमेशा पार्टियों और महफिलों कि जान होते हैं। इनके चेहरे का तेज और चमक हमेशा दूसरों को आकर्षित करता है। आकर्षक कद, लंबा और चौड़ी छाती होने के साथ ये अक्सर सुंदर चेहरे वाले होते हैं। कुल मिलकर कहा जाए तो इनका व्यक्तित्व नेतृत्व करने वाला तो होता हीं है,  ये दूसरों को बहुत शीघ्र अपनी ओर आकर्षित भी कर लेते हैं। 

आत्मसम्मान कि गहरी ललक 

 रविवार को जन्में लोगआत्म सम्मान को हमेशा सर्वोपरि रखते हैं और इसकी खातिर वे बड़ी से बड़ी कुर्बानी देने को तैयार रहते हैं। बोलने मे जल्दबाजी नहीं करने वाले और खासतौर पर रविवार को जन्मे लोग  कम बोलने में विश्वास रखते हैं। बोलने के लिए  शब्दों का चयन और भाषा पर इनकी बहुत पकड़ होती है  और वे जो भी बोलते हैं, सोच-समझकर बोलते हैं। पहले ही कहा जा चुका है कि ऐसे लोग नेतृत्व करने वाले होते हैं और इसलिए इनकी बातों का सामने वाले पर अलग और गहरा असर होता है। 

संवेदनशील लेकिन दृढ़ संकल्प शक्ति वाले 

रविवार जो जन्मे लोगों कि सबसे बड़ी खासियत होती है कि वे बहुत संवेदनशील होते हैं लेकिन इसके साथ हीं मजबूत मनोबल, दृढ़ संकल्प शक्ति और इच्छाशक्ति होते हैं। अगर कोई बात बुरी लग गई तो वे जल्दी उन्हे भुला नहीं पाते लेकिन निर्णय लेने मे कोई जल्दबाजी भी नहीं करते। संदेड़नशीलता के साथ ही ये बहुत रचनात्मक प्रवृति के होते हैं और साथ हीं बहुत महत्वाकांक्षा रखने वाले और मजबूत इरादे वाले होते हैं। 


मिलेट महोत्सव का आयोजन मध्य प्रदेश के मंडला में: जाने मोटा अनाज से सम्बंधित खास तथ्य

Millets Conclave Five facts

मध्य प्रदेश के मंडला में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री श्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने मिलेट महोत्सव का  उद्घाटन किया। संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा वर्ष 2023 को मोटा अनाज के अंतर्राष्ट्रीय वर्ष के रूप में घोषित करने के मद्देनजर, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय मोटा अनाज के खपत और निर्यात क्षमता, पोषण लाभ और मूल्यवर्धन के बारे में जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य से देश के 20 राज्यों और 30 जिलों में मोटा अनाज महोत्सव की मेजबानी कर रहा है। 

 इन जिलों में मंडला (मध्य प्रदेश), विजयनगरम (आंध्र प्रदेश), भोजपुर (बिहार), महबूबनगर (तेलंगाना), धर्मपुरी (तमिलनाडु), आगरा (उत्तर प्रदेश), कार्बी आंगलोंग (असम), विरुधुनगर (तमिलनाडु), डांग (गुजरात), पार्वतीपुरम मान्यम (आंध्र प्रदेश), कोमाराम भीम (तेलंगाना), अल्मोड़ा (उत्तराखंड), नुआपाड़ा (ओडिशा), बठिंडा (पंजाब), पलक्कड़ (केरल), दावणगेरे (कर्नाटक), तापी (गुजरात), बाड़मेर (राजस्थान) ), कुल्लू (हिमाचल प्रदेश), तुमकुर (कर्नाटक), भिंड (मध्य प्रदेश), नंदुरबार (महाराष्ट्र), जोधपुर (राजस्थान), सुकमा (छत्तीसगढ़), महेंद्रगढ़ (हरियाणा), अलीगढ़ (उत्तर प्रदेश), कलिम्पोंग (पश्चिम बंगाल) , खूंटी (झारखंड) और जमुई (बिहार) शामिल हैं।

मंडला कोदो और कुटकी मोटा अनाज के उत्पादन का केंद्र है, जिसे भारत सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय द्वारा शुरू की गई प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम (पीएमएफएमई) योजना के अंतर्गत के तहत वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) के औपचारिककरण के रूप में भी पहचाना गया है।  

Millets Conclave Five facts 

  1. मंत्रालय द्वारा मोटा अनाज महोत्सव के अलावा, 3 से 5 नवंबर 2023 तक नई दिल्ली में एक मेगा-फूड कार्यक्रम भी आयोजित किया जा रहा है, 
  2. मोटा अनाज 130 से अधिक देशों में उगाए जाने के कारण पूरे एशिया और अफ्रीका में आधे अरब से अधिक लोगों के लिए पारंपरिक भोजन माना जाता है। 
  3. वैश्विक उत्पादन में लगभग 41 प्रतिशत की अनुमानित हिस्सेदारी के साथ भारत दुनिया में मोटा अनाज के प्रमुख उत्पादकों में से एक है। 
  4. मोटा अनाज की विशाल क्षमता को पहचानते हुए, जो संयुक्त राष्ट्र के कई सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के साथ भी मेल खाती है, भारत सरकार (जीओआई) ने मोटा अनाज को प्राथमिकता दी है।
  5. माननीय प्रधानमंत्री के नेतृत्व में, भारत सरकार के अंतर्राष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष (आईवाईओएम) 2023 के प्रस्ताव को संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) द्वारा स्वीकार किया गया था। यह घोषणा भारत सरकार के लिए आईवाईओएम को मनाने में सबसे आगे रहने के लिए सहायक रही है।

वेज मोमोज़ रेसिपी-घर पर बनाएं स्ट्रीट फूड जैसा स्वाद: बच्चों के लिए परफेक्ट स्नैक

वेज मोमोज़ रेसिपी-घर पर बनाएं स्ट्रीट फूड जैसा स्वाद


आजकल जब बरसात और मानसून का मौसम है, ऐसे में बाहर का खाना खासकर स्ट्रीटफूड आपके परिवार को बीमार कर सकता है। आप स्ट्रीट फूड लवर्स हैं  तो फिर यह डिश खासतौर पर आपके लिए है। वेज मोमोज़ एक ऐसा स्नैक है जो बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी का फेवरेट होता है। जी हाँ, हम आपको बताएंगे कि वेज मोमोज़  घर पर आसानी से कैसे बनाएं। खास तौर पर सेहत के पॉइंट ऑफ व्यू से जहां बाहर और स्ट्रीट फूड का सेवन जहां सेहत के लिए काफी हानिकारक है, ऐसे में बच्चों को समझाना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में यह अच्छा होगा कि आप बाज़ार जैसा स्वाद वाले मोमोज घर पर बनाएं। जो न केवल बाजार से अच्छा स्वाद भी होगा बल्कि यह  हाइजीन और हेल्थ से भरपूर भी होगा।  तो चलिए सीखते हैं स्टेप बाय स्टेप वेज मोमोज़ बनाना।



वेजिटेबल मोमोज बनाने के लिए सामग्री

सामग्री (Ingredients) स्टफिंग के लिए:

ध्यान  दें कि यहाँ  हमने सामान्य मोमोज मे प्रयोग होने वाले सामग्री को हीं लिया है। आप इसमे अपने टेस्ट के अनुआर चेंज कर सकते हैं और सेहत को लिहाज से इसमें परिवर्तन भी कर सकते हैं। चाहें तो इसमें पनीर, स्वीट कॉर्न या स्प्राउट्स भी मिला सकते हैं। यहाँ यह ध्यान देना जरूरी है कि कृपया सब्ज़ियों को ज़्यादा पकाएं नहीं वरना स्टफिंग नरम हो जाएगी। 

बारीक कटा हुआ पत्ता गोभी – 1 कप

बारीक कटी हुई गाजर – ½ कप

बारीक कटी हुई शिमला मिर्च – ¼ कप

बारीक कटी हुई प्याज – ¼ कप

लहसुन की कली – 3-4 (कद्दूकस की हुई)

अदरक – 1 इंच (कद्दूकस किया हुआ)

सोया सॉस – 1 छोटा चम्मच

सिरका – ½ छोटा चम्मच

काली मिर्च पाउडर – ¼ छोटा चम्मच

नमक – स्वादानुसार

तेल – 1 बड़ा चम्मच

सामग्री (Ingredients) आटा गूंथने के लिए: इसके लिए आप अपने सुविधानुसार परिवर्तन कर सकते हैं। 

मैदा – 1 कप

नमक – 1 चुटकी

तेल – 1 छोटा चम्मच

पानी – आवश्यकतानुसार

 वेजिटेबल मोमोज़ बनाने की वि​धि (Step-by-Step Process):

स्टेप 1: आटा गूंथना 

एक बाउल में मैदा, नमक और तेल डालें।

धीरे-धीरे पानी मिलाकर सख्त आटा गूंथ लें।

आटे को ढककर 15-20 मिनट के लिए रख दें।

स्टेप 2: स्टफिंग तैयार करना: इसके लिए जरूरी है कि आप अपने विवेक के अनुसार और बताए गए नियम के अनुसार सामग्री का प्रयोग करें और नियम का पालन करें। 

एक कढ़ाही में तेल गरम करें।

सबसे पहले अदरक, लहसुन और प्याज को हल्का भूनें।

अब इसमें गोभी, गाजर और शिमला मिर्च डालें और तेज़ आंच पर 2-3 मिनट भूनें।

फिर नमक, काली मिर्च, सोया सॉस और सिरका डालकर अच्छे से मिलाएं।

स्टफिंग को ठंडा होने के लिए रख दें।

 स्टेप 3: मोमोज़ बनाना (शेप देना)

ध्यान दें कि मोमोज का आरार काफी छोटा होता है ताकि यह जल्दी फ्राई हो सके इसके लिए अपक्कों आटे की छोटी-छोटी लोइयां लेना याचा होगा। उसके बाद लोई को सावधानी से  पतली बेलकर  गोल पूड़ियाँ बना लें।

हर पूड़ी में 1 चम्मच स्टफिंग रखें और उसे अच्छा सेप दें। किनारों को उठाकर मोड़ते हुए मोमोज़ को बंद करें। आप चाहें तो गोल, हाफ-मून या ट्विस्ट स्टाइल भी बना सकते हैं।

स्टेप 4: स्टीम करना

स्टीमर में पानी उबालें लेकिन सावधानी के साथ क्योंकि ज्यादा स्टीम होने पर मोमोज हार्ड नहीं रह पाएगा। 

एक थाली या मोमोज़ ट्रे को हल्का सा तेल लगाकर मोमोज़ रखें।

स्टीमर में 10-12 मिनट तक मोमोज़ स्टीम करें जब तक वो पारदर्शी और पक जाएं।

गरमागरम मोमोज़ को रेड चटनी (spicy schezwan) या मयोनीज़ डिप के साथ परोसें। साथ में नींबू का एक टुकड़ा और कुछ हरे धनिया से गार्निश कर सकते हैं। अगर आप चायना स्टाइल लुक देना चाहें तो स्टीम बास्केट में सर्व करें।

Tag: खरबूजा आइसक्रीम   ढाबा स्टाइल राजमा  बंगाल की फेमस संदेश मिठाई 





मैंगो फेस्टिवल: 500 क़िस्मों के आमों का उठायें लुत्फ़,अंगूर से लेकर पपीते के आकार तक-एक झलक

राजधानी दिल्ली में  32वें आम महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है जिस  लोग आम के विभिन्न क़िस्मों से रूबरू होने के साथ-साथ विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों और आम से जुड़ी प्रतियोगिताओं का लुत्फ़ उठा सकेंगे। शुक्रवार को पर्यटन मंत्री आतिशी ने इसका उद्घाटन किया। महोत्सव में 500 क़िस्मों के आमों का प्रदर्शन,अंगूर से लेकर पपीते के आकर के आम, सहित विभिन्न प्रतियोगिताएँ और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे आकर्षन का केंद्र। 

केजरीवाल सरकार के पर्यटन विभाग द्वारा दिल्ली हाट, जनकपुरी में 7 से 9 जुलाई तक आम महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। 



तीन दिवसीय इस महोत्सव में लोग दोपहर 12 बजे से रात 10 बजे तक आम की विभिन्न क़िस्मों  के साथ शानदार सांस्कृतिक कार्यक्रमों का लुत्फ़ उठा सकेंगे। महोत्सव के लिए कोई एंट्री फ़ीस नहीं होगी और लोगों की सुगम आवाजाही के लिए तिलक नगर मेट्रो स्टेशन से फ्री शटल सेवा की भी व्यवस्था की गई है।

बता दें कि आम उत्सव में अंगूर के आकार से लेकर पपीते के आकार तक के आम प्रदर्शित किए जाएँगे।यहाँ विभिन्न दुर्लभ क़िस्म के आम जिसमें- लंगड़ा, चौसा, फ़ज़री, रतौल,रामकेला, हुसैन आरा, केसर, मल्लिका, आम्रपाली आदि शामिल है। केजरीवाल सरकार के इस आम महोत्सव में पारंपरिक आम बागवानों के अतिरिक्त विभिन्न सरकारी और ग़ैर सरकारी संस्थाएँ भी बढ़-चढ़ कर भाग ले रही है।



इस मौक़े पर पर्यटन मंत्री आतिशी ने कहा कि, पर्यटन विभाग द्वारा आयोजित किया जा रहा 'आम महोत्सव' शहर में पर्यटन को बढ़ावा देने, जनसाधारण को आम की विभिन्न क़िस्मों से अवगत करवाने, छोटे-बड़े आम उत्पादकों को अपना व्यापार आगे बढ़ाने के लिए मंच प्रदान करने सहित किसानों को आम की विभिन्न प्रजातिओं के पैदावार के लिए प्रोत्साहित करने की दिशा में केजरीवाल सरकार की अनूठी पहल है। 

उन्होंने कहा कि, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जी के नेतृत्व में दिल्ली सरकार समृद्ध कला-संस्कृति और रोज़गार के अवसरों को बढ़ावा देने के लिए नियमित रूप से ऐसे आयोजन करती है।

पर्यटन मंत्री आतिशी ने कहा कि, "आम महोत्सव, दिल्ली सरकार के पर्यटन विभाग द्वारा आयोजित किये जाने वाले सबसे अनूठे उत्सवों में से एक है| उन्होंने कहा कि, आम हर किसी का पसंदीदा फल है और देश में हर बच्चे और बड़े के दिल में बसता है| ये हमारे बचपन की यादों को ताजा करता है जब हर बच्चा आम खाने का कम्पटीशन जरुर करता था| उन्होंने कहा कि  हमने अपने समय मे आम के बगीचों को देखा है लेकिन दिल्ली जैसे महानगरीय शहरों में बड़े हो रहे बच्चे शायद इन अनुभवों को मिस करते हैं। हालांकि, दिल्ली सरकार की यह अनूठी पहल उन्हें आमों के बागों से लेकर थाली तक के सफर का अनुभव करने और फलों के राजाओं के बारे में और अधिक जानने का अवसर प्रदान करेगी।" उन्होंने दिल्ली के सभी लोगों से उत्सव में आने और देश भर के आमों का आनंद लेने का आग्रह किया।













आम महोत्सव मुख्य आकर्षण

  • -विभिन्न क़िस्मों और आकारों के आम का प्रदर्शन 
  • -आम व आम से बने उत्पादों की बिक्री
  • -आम खाओ प्रतियोगिता
  • -बच्चों के लिए आम पर आधारित विभिन्न प्रतियोगिताएँ
  • -हस्तशिल्प व हथकरघा उत्पादों की बिक्री
  • -सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन