सोमनाथ मंदिर का इतिहास: आस्था, संघर्ष और पुनर्निर्माण की अमर गाथा

 


सोमनाथ मंदिर भारत के गुजरात राज्य के गिर सोमनाथ जिले में अरब सागर के तट पर स्थित है जिसे भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम माना जाता है। सोमनाथ मंदिर की विशालता और महत्व इसी से समझा जा सकता है कि इस मंदिर का उल्लेख ऋग्वेद, स्कंद पुराण, शिव पुराण और महाभारत में मिलता है। सोमनाथ मंदिर सिर्फ एक  धार्मिक स्थल है, बल्कि यह भारत की अटूट सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक भी है। 

 ऐतिहासिक दृष्टिकोण से देखी जाए तो अपनी खूबियों और विशालता के कारण यह मंदिर कई बार विदेशी आक्रमणों में नष्ट किया गया और आक्रांताओं ने इसे नष्ट करने में कोई कसर नहीं छोड़ा। 1026 ई. में महमूद ग़ज़नवी ने इस मंदिर पर आक्रमण कर इसे ध्वस्त किया। इसके बाद यह मंदिर कुल लगभग 17 बार तोड़ा और फिर से बनाया गया। लेकिन हर बार भारतीय श्रद्धालुओं ने इसे पुनः खड़ा किया।

पौराणिक मान्यता के अनुसार यह कहा जाता है कि चंद्रदेव (सोम) ने अपने क्षय रोग से मुक्ति पाने के लिए भगवान शिव की आराधना की थी। शिव की कृपा से चंद्रदेव रोगमुक्त हुए और कृतज्ञता स्वरूप इस मंदिर की स्थापना की। 

सोमनाथ मंदिर से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य (Important Facts)

  • स्थान – गिर सोमनाथ, गुजरात
  • देवता – भगवान शिव (सोमनाथ ज्योतिर्लिंग)
  • ज्योतिर्लिंग संख्या – पहला
  • स्थिति – अरब सागर के तट पर
  • कितनी बार टूटा – लगभग 17 बार
  • वास्तुकला शैली – चालुक्य (सोलंकी) शैली
  • बाण स्तंभ – मंदिर के सामने स्तंभ, जिस दिशा में कोई भूमि नहीं


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