बुखारा लंबे समय तक मध्य एशिया का एक अहम आर्थिक और सांस्कृतिक केंद्र रहा। यह प्राचीन फ़ारसी शहर कई सदियों तक इस्लामी संस्कृति का मुख्य केंद्र रहा और 8वीं सदी में खिलाफ़त का एक बड़ा सांस्कृतिक केंद्र बन गया।
UNESCO विश्व धरोहर सूची में कब शामिल हुआ?
Historic Centre of Bukhara को वर्ष 1993 में UNESCO की World Heritage List में शामिल किया गया। इसे UNESCO ने सांस्कृतिक विरासत के रूप में मान्यता दी है और इसके लिए Criteria (ii), (iv) और (vi) लागू होते हैं। 2016 में इसकी सीमाओं में एक छोटा संशोधन भी दर्ज किया गया।
1220 में चंगेज़ खान और 1370 में तैमूर के मंगोल आक्रमणों से पहले की कुछ अहम निशानियों को छोड़कर, यह पुराना शहर 16वीं सदी की शुरुआत से उज़्बेक शासन के शैबानी दौर की शहरी बनावट और वास्तुकला की गवाही देता है। 16वीं सदी में फिर से बनाया गया किला, शहर के शुरुआती दिनों से लेकर आज तक शहर का मुख्य केंद्र रहा है।
शुरुआती समय के बचे हुए अहम स्मारकों में इस्माइल समानी का मशहूर मक़बरा शामिल है, जो अपनी सादगी भरी सुंदरता के लिए जाना जाता है और पूरी मुस्लिम दुनिया में 10वीं सदी की वास्तुकला का सबसे बेहतरीन बचा हुआ नमूना है।
बुखारा, उज़्बेकिस्तान: Facts in Brief
- देश: उज़्बेकिस्तान
- UNESCO श्रेणी: Cultural World Heritage
- UNESCO में शामिल: 1993
- इतिहास: 2,000 वर्ष से अधिक पुराना
- ऐतिहासिक महत्व: सिल्क रोड का प्रमुख केंद्र
- विश्व धरोहर क्षेत्र: 216 हेक्टेयर
- बफर ज़ोन: 339 हेक्टेयर
- प्रमुख पहचान: Poi-Kalyan, Ismail Samani Mausoleum, मदरसे और ऐतिहासिक बाजार
- विशेष महत्व: मध्य एशिया में इस्लामी शिक्षा, संस्कृति और सूफी परंपरा का ऐतिहासिक केंद्र
बुखारा की खासियत क्या है?
बुखारा की सबसे बड़ी विशेषता केवल इसके अलग-अलग स्मारक नहीं हैं, बल्कि इसका पूरा ऐतिहासिक शहर-परिदृश्य है। यहां गलियां, धार्मिक इमारतें, मदरसे, बाजार, मस्जिदें और पारंपरिक वास्तुकला मिलकर मध्ययुगीन मध्य एशियाई शहर की तस्वीर प्रस्तुत करते हैं। UNESCO इसे मध्य एशिया के सबसे अच्छी तरह संरक्षित इस्लामी शहरों के उदाहरणों में गिनता है।
सिल्क रोड का महत्वपूर्ण केंद्र
प्राचीन Silk Roads पर स्थित होने के कारण बुखारा सदियों तक व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण केंद्र रहा। यहां से गुजरने वाले व्यापारियों के साथ वस्तुओं के अलावा भाषाएं, विचार, धर्म, कला और स्थापत्य परंपराएं भी एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र तक पहुंचीं।
इस्लामी शिक्षा और संस्कृति का केंद्र
बुखारा लंबे समय तक इस्लामी संस्कृति और शिक्षा का प्रमुख केंद्र रहा। UNESCO के अनुसार 9वीं से 16वीं शताब्दी के बीच यह निकट-पूर्व में मुस्लिम धर्मशास्त्र, विशेष रूप से सूफी परंपरा, का एक प्रमुख केंद्र था। उस दौर में शहर में 200 से अधिक मस्जिदें और 100 से अधिक मदरसे होने का उल्लेख मिलता है।
इस्माइल सामानी का मकबरा
बुखारा के प्रमुख ऐतिहासिक स्मारकों में Ismail Samani Mausoleum विशेष स्थान रखता है। UNESCO इसे 10वीं शताब्दी की मुस्लिम वास्तुकला की उत्कृष्ट कृति और उस काल की वास्तुकला का महत्वपूर्ण जीवित उदाहरण मानता है। इसकी ईंटों की ज्यामितीय सजावट इसकी विशेष पहचान है।
पोई-कल्याण परिसर
Poi-Kalyan बुखारा की सबसे प्रसिद्ध ऐतिहासिक पहचान में से एक है। इसका प्रमुख आकर्षण कल्याण मीनार है, जिसे UNESCO 11वीं शताब्दी के कराखानिद काल की उत्कृष्ट ईंट-निर्मित वास्तुकला का उदाहरण बताता है।
प्राचीन मदरसे और बाजार
बुखारा के ऐतिहासिक केंद्र में अनेक मदरसे और पारंपरिक बाजार संरचनाएं हैं। Ulugbek Madrasa, Abdulaziz-Khan Madrasa, Lyabi-Khauz ensemble तथा पारंपरिक गुंबददार बाजारों ने शहर की ऐतिहासिक पहचान को बनाए रखा है।

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