'देख भाई देख "1993 में शुरू हुआ था जो उस समय दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले कार्क्रमों में काफी लोकप्रिय सीरियल था। सीरियल मुख्य तौर पर मुंबई के एक पुराने बंगले में साथ रहने वाला दीवान परिवार से सम्बंधित था और कहानी पारिवारिक रिश्तों, रोजमर्रा की उलझनों और हास्य के इर्द-गिर्द घूमती थी। सीरियल में नवीन निश्चल, फरीदा जलाल, शेखर सुमन, सुषमा सेठ, भावना बलसावर और कई अन्य कलाकार प्रमुख भूमिकाओं में थे जिनसे दर्शक और परिवार के प्रत्येक सदस्य खुद को भी उस परिवार के सदस्य में पाते थे.
नवीन निश्चल अर्थात बलराज दीवान परिवार में बतौर मुखिया की भूमिका निभाई और बड़े परदे पर अपनी अभिनय का लोहा मनवा चुकी फरीदा जलाल सीरियल में सुहासिनी दीवान के किरदार में नजर आईं। इसके अतिरिक्त शेखर सुमन ने समीर दीवान की भूमिका निभाकर दर्शकों का खूब मनोरंजन किया था.
इस सीरियल की खासियत थी इसका सादापन
दर्शकों को हंसाने के लिए इसमें कोई उलझी हुई कहानी या अजीबोगरीब हालात नहीं दिखाए गए थे। इसके बजाय, 'देख भाई देख' ने उन चीज़ों में कॉमेडी ढूंढी जिनका सामना लोग अपने घरों में करते थे—जैसे परिवार में बहस, गलतफहमियां, निजी आदतें, घर की परेशानियां और साथ रहने में होने वाली मज़ेदार अफरातफरी।
इसी अपनापन भरे माहौल की वजह से दर्शक किरदारों से मज़बूत भावनात्मक जुड़ाव महसूस कर पाए।
सीरियल के किसी एपिसोड में डायबिटीज की आशंका से परिवार परेशान होता है, तो किसी में पत्नी को पति के किसी दूसरी महिला के साथ संबंध होने का शक को लेकर हीं माथा पच्ची चलती है. कहीं रहस्यमय गुलाबी चिट्ठी परिवार में उत्सुकता पैदा करती है, तो कहीं पानी की कमी जैसी आम समस्या पूरे परिवार के लिए परेशानी बन जाती है।
कहने का मतलब यह है कि कहानी का आधार भले ही हास्य था, लेकिन उसके पीछे परिवार और रिश्तों की वास्तविक दुनिया दिखाई देती थी।
कई सारे लोकप्रिय कहानियों में एक वह काफी लोकप्रिय रही जिसमें परिवार के कुछ शरारती सदस्य एक पुस्तक के आधार पर एपिसोड में हिप्नोटाइज तो कर देते हैं लेकिन बाद में पता चलता है कि हिप्नोटाइज ख़त्म करने वाले पेज हीं उस पुस्तक से गायब है.
“देख भाई देख” का निर्माण Saraswati Audio Visuals के बैनर के तहत बनाया गया था।

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