दूरदर्शन का वो सीरियल जिसने हंसी के बहाने परिवार को टीवी के सामने एक साथ बैठाया, जानें खास बातें


दूरदर्शन द्वारा प्रसरित किये गए पुराने सीरियल न केवल उस वक्त जबरदस्त पॉपुलर रहे थें बल्कि आज भी उन्हें खास सम्मान की दृष्टि से याद किया जाता है. उस दौर में टीवी पर बहुत कम चैनल थे और दूरदर्शन का अपना अलग ही जादू था और सबसे बड़ी बात यह थी कि उस दौर में टेलीविजन के लोकप्रिय कार्यक्रमों की पहुंच समाज के बेहद अलग-अलग वर्गों तक थी।  ”जी हैं, उस ऐतिहासिक सीरियल का नाम है "देख भाई देख." आइये जानते हैं कि ऐसी क्या खास बात थी सीरियल में. 

'देख भाई देख': 90 के दशक का दूरदर्शन का एक यादगार क्लासिक शो

'देख भाई देख' 1993 में शुरू हुआ और जल्द ही अपने समय के सबसे यादगार फ़ैमिली कॉमेडी शो में से एक बन गया।

इसकी कहानी दीवान परिवार के इर्द-गिर्द घूमती थी, जो मुंबई के एक पुराने बंगले में एक साथ रहते थे। शो में उन रिश्तों, मतभेदों, गलतफहमियों, रोज़मर्रा की समस्याओं और मज़ेदार स्थितियों को बहुत खूबसूरती से दिखाया गया था, जो तब पैदा होती हैं जब एक ही परिवार की कई पीढ़ियाँ एक ही छत के नीचे रहती हैं।

'देख भाई देख "1993 में शुरू हुआ था जो उस समय दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले कार्क्रमों में काफी लोकप्रिय सीरियल था। सीरियल मुख्य तौर पर मुंबई के एक पुराने बंगले में साथ रहने वाला दीवान परिवार से सम्बंधित था और कहानी पारिवारिक रिश्तों, रोजमर्रा की उलझनों और हास्य के इर्द-गिर्द घूमती थी। सीरियल में नवीन निश्चल, फरीदा जलाल, शेखर सुमन, सुषमा सेठ, भावना बलसावर और कई अन्य कलाकार प्रमुख भूमिकाओं में थे जिनसे दर्शक और परिवार के प्रत्येक सदस्य खुद को भी उस परिवार के सदस्य में पाते थे. 

नवीन निश्चल अर्थात बलराज दीवान परिवार में बतौर मुखिया की भूमिका निभाई और बड़े परदे पर अपनी अभिनय का लोहा मनवा चुकी फरीदा जलाल सीरियल में सुहासिनी दीवान के किरदार में नजर आईं। इसके अतिरिक्त शेखर सुमन ने समीर दीवान की भूमिका निभाकर दर्शकों का खूब मनोरंजन किया था. 

इस सीरियल की खासियत थी इसका सादापन

वैसे तो सीरियल में कई सारे रोजमर्रा के जीवन को हीं हंसी के लिए पंचलाइन के रूप में प्रयोग किया गया और शायद यह वजह है कि पर सीरियल से हर परिवार खुद को जुड़ा पाता था. खास बात यह है सीरियल के शुरुआती एपिसोड ही इस बात का संकेत देते हैं कि सीरियल का हास्य किस तरह रोजमर्रा की जिंदगी से निकाला जाता था और फिर दर्शकों को किस प्रकार से बांधकर रखा जाता था. 

दर्शकों को हंसाने के लिए इसमें कोई उलझी हुई कहानी या अजीबोगरीब हालात नहीं दिखाए गए थे। इसके बजाय, 'देख भाई देख' ने उन चीज़ों में कॉमेडी ढूंढी जिनका सामना लोग अपने घरों में करते थे—जैसे परिवार में बहस, गलतफहमियां, निजी आदतें, घर की परेशानियां और साथ रहने में होने वाली मज़ेदार अफरातफरी।

इसी अपनापन भरे माहौल की वजह से दर्शक किरदारों से मज़बूत भावनात्मक जुड़ाव महसूस कर पाए।

सीरियल के किसी एपिसोड में डायबिटीज की आशंका से परिवार परेशान होता है, तो किसी में पत्नी को पति के किसी दूसरी महिला के साथ संबंध होने का शक को लेकर हीं माथा पच्ची चलती है. कहीं रहस्यमय गुलाबी चिट्ठी परिवार में उत्सुकता पैदा करती है, तो कहीं पानी की कमी जैसी आम समस्या पूरे परिवार के लिए परेशानी बन जाती है।

कहने का मतलब यह है कि कहानी का आधार भले ही हास्य था, लेकिन उसके पीछे परिवार और रिश्तों की वास्तविक दुनिया दिखाई देती थी।

कई सारे लोकप्रिय कहानियों में एक वह काफी लोकप्रिय रही जिसमें परिवार के कुछ शरारती सदस्य एक पुस्तक के आधार पर एपिसोड में हिप्नोटाइज तो कर देते हैं लेकिन बाद में पता चलता है कि हिप्नोटाइज ख़त्म करने वाले पेज हीं उस पुस्तक से गायब है. 

“देख भाई देख” का निर्माण  Saraswati Audio Visuals के बैनर के तहत बनाया गया था। 





No comments:

Post a Comment