प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष सुश्री उर्सुला वॉन डेर लेयेन की ओर से 16वें भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन में इस ऐतिहासिक उपलब्धि की घोषणा के साथ हीं भारत ने दुनिया को दिखा दिया है कि पिछले कुछ सालों से अमल में लाए गए योजनाएं जैसे आत्मनिर्भर भारत, स्टार्टअप की दौड़ आदि महज कागजी घोषणाएं नहीं थी बल्कि दुनिया को भी आकर्षित करने में महती भूमिका निभाई है। आज अगर यूरोपीयन यूनियन को भारत एक बड़े बाजार के रूप में दिख रहा है तो इसके पीछे निश्चित हीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ठोस और दूरगामी नीतियों का योगदान है।
मुक्त व्यापार समझौता एमएसएमई को नए अवसर प्रदान करेगा और महिलाओं, कारीगरों, युवाओं और पेशेवरों के लिए रोजगार का सृजन करेगा जो एक क्रांतिकारी कदम होगा। जानें इस ऐतिहासिक ट्रीटी की खास बातें-
- यूरोपीय संघ भारत का 22वां एफटीए भागीदार बना है।
- सरकार ने 2014 से मॉरीशस, संयुक्त अरब अमीरात, ब्रिटेन, ईएफटीए, ओमान और ऑस्ट्रेलिया के साथ व्यापार सौदों पर हस्ताक्षर किए हैं और न्यूजीलैंड के साथ व्यापार समझौते की घोषणा की है।
- 2025 में भारत ने ओमान और यूके के साथ व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए और न्यूजीलैंड के साथ व्यापार समझौते के समापन की घोषणा की।
- भारत और यूरोपीय संघ चौथी और दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं जो वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद के 25 प्रतिशत के बराबर हैं और वैश्विक व्यापार का एक तिहाई हिस्सा हैं।
- भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता कपड़ा, परिधान, चमड़ा, जूते, समुद्री उत्पाद, रत्न और आभूषण, हस्तशिल्प, इंजीनियरिंग सामान और ऑटोमोबाइल जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को निर्णायक रूप से बढ़ावा देता है।
- यूरोपीय संघ के 144 उप-क्षेत्रों (जिसमें आईटी/आईटीईएस, व्यावसायिक सेवाएं, अन्य व्यावसायिक सेवाएं और शिक्षा सेवाएं शामिल हैं) तक भारत की अनुमानित पहुंच भारतीय सेवा प्रदाताओं को बढ़ावा देगी ।

No comments:
Post a Comment