नजरिया जीने का: जानें प्रधानमंत्री द्वारा गणतंत्र दिवस के अवसर पर शेयर किये गए संस्कृत सुभाषितम का महत्त्व


आज जबकि देश 77  वां गणतंत्र दिवस मना रहा है, और इस अवसर पर देश ने शानदार आजादी का जश्न मनाया, इस अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने गणतंत्र दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए एक संस्कृत सुभाषितम साझा किया।

प्रधानमंत्री द्वारा जिस संस्कृत सुभाषितम साझा किया वह इस प्रकार से है-

“पारतन्त्र्याभिभूतस्य देशस्याभ्युदयः कुतः। अतः स्वातन्त्र्यमाप्तव्यमैक्यं स्वातन्त्र्यसाधनम्॥”

>प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा;

“गणतंत्र दिवस हमारी स्वतंत्रता, संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों का सशक्त प्रतीक है। यह पर्व हमें एकजुट होकर राष्ट्र निर्माण के संकल्प के साथ आगे बढ़ने की नई ऊर्जा और प्रेरणा देता है।

पारतन्त्र्याभिभूतस्य देशस्याभ्युदयः कुतः।

अतः स्वातन्त्र्यमाप्तव्यमैक्यं स्वातन्त्र्यसाधनम्॥”

इस श्लोक के माध्यम से प्रधानमंत्री ने कहा कि गणतंत्र दिवस भारत की स्वतंत्रता, संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों का एक शक्तिशाली प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह अवसर राष्ट्र को नई ऊर्जा और प्रेरणा से भर देता है, ताकि हम एक साथ मिलकर राष्ट्र-निर्माण की दिशा में दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ें।

इस उक्ति के माध्यम से हमें आजादी और स्वतंत्रता की कीमत बताई गई है जो  हमें सिखाती है कि राष्ट्रीय एकता ही वह शक्ति है जो किसी भी देश को गुलामी से मुक्त कराकर प्रगति के पथ पर ले जा सकती है। 

 इस सुभाषितानि का अर्थ स्पष्ट है कि पराधीनता (गुलामी) से दबे हुए देश का अभ्युदय (प्रगति या उन्नति) कैसे संभव है? इसलिए, स्वतंत्रता प्राप्त की जानी चाहिए और उस स्वतंत्रता को पाने का साधन 'एकता' है।

सुभाषितम कहता है कि एक राष्ट्र जो निर्भर है या अधिकार से वंचित है, वह प्रगति नहीं कर सकता। इसलिए, केवल स्वतंत्रता और एकता को अपने मार्गदर्शक सिद्धांत के रूप में अपनाकर ही राष्ट्र की प्रगति सुनिश्चित की जा सकती है। 

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