आज प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया है जिसमें कठिन परिस्थितियों में धैर्य रखकर और बुद्धि से विचार करने के महत्व पर प्रकाश डाला गया है।
श्लोक का अर्थ स्पष्ट है कि जब मनुष्य कठिनाई (दुर्भाग्य), आर्थिक संकट, भय या जीवन के अंतिम समय में भी अपनी बुद्धि से सोच-विचार करता है, तो धैर्यवान व्यक्ति कभी निराश नहीं होता।
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के युवा जो भी ठान लेते हैं, उसे हासिल कर लेते हैं। श्री मोदी ने कहा कि हमारी युवा शक्ति ही देश को तीव्र विकास के पथ पर अग्रसर कर रही है।
प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पर लिखा:
"देश के युवा जो ठान लेते हैं, उसे करके दिखाते हैं। यह हमारी युवाशक्ति का ही सामर्थ्य है कि हमारा राष्ट्र आज तेज गति से विकास के पथ पर अग्रसर है।
व्यसने वाऽर्थकृच्छ्रे वा भये वा जीवनान्तके।
विमृशन् वै स्वया बुद्ध्या धृतिमान् नावसीदति॥"
विपत्ति, आर्थिक संकट या प्राणों के संकट के समय, शांत रहने और समझदारी से सोचने वाला व्यक्ति कभी विचलित नहीं होता। कठिन परिस्थितियों में, शांत और सोच-समझकर लिए गए निर्णय उसे दुख और हानि से बचाते हैं।
देश के युवा जो ठान लेते हैं, उसे करके दिखाते हैं। यह हमारी युवाशक्ति का ही सामर्थ्य है कि हमारा राष्ट्र आज तेज गति से विकास के पथ पर अग्रसर है।
— Narendra Modi (@narendramodi) April 10, 2026
व्यसने वाऽर्थकृच्छ्रे वा भये वा जीवनान्तके।
विमृशन् वै स्वया बुद्ध्या धृतिमान् नावसीदति॥ pic.twitter.com/0l87CoFHHz
प्रधानमंत्री के श्लोक को अगर आप गहराई में देखेंगे तो पाएंगे कि आज के जीवन में इसका व्यापक प्रभाव प्रभाव है खासकर इन स्थितियों में
परीक्षा का तनाव हो → शांत दिमाग से सोचें
पैसे की परेशानी हो → योजना बनाएं
डर लगे → वास्तविकता को समझें
जीवन में कठिन समय हो → धैर्य बनाए रखें


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