Point Of View : युवा भगवान राम के जीवन से सीखें -आत्मनिरीक्षण और आत्म-खोज की जरूरत


आत्मनिरीक्षण और आत्म-खोज आज के युवाओं के लिए सबसे जरूरी  है जो न केवल उन्ही सफलता के लिए प्रेरित करती है बल्कि इससे वे इस संबंध मे भगवान राम की शिक्षाओं को अपनाकर, एक ऐसा रास्ता बना सकता है जो न केवल व्यक्तिगत सफलता की ओर ले जाता है बल्कि बड़े पैमाने पर समाज और दुनिया की भलाई की ओर भी ले जाता है।

मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान राम का जीवन और उनका त्याग हमेशा से  लोगों के लिए आदर्श रहा है। जीवन मे तमाम उत्तार चड्डाव और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद भगवान राम ने कभी भी रिश्तों के प्रति श्रद्धा, प्रेम और स्नेह का साथ कभी नहीं छोड़ा। 

भगवान राम: प्रेरणा श्रोत

सच तो यह है कि भगवान राम  का जीवन आज के युवाओं के लिए प्रेरणा श्रोत है जो जीवन मे किसी भी प्रतिकूल परिस्थितियों में लचीलापन, परंपरा और अनुकूलनशीलता के बीच नाजुक संतुलन और आत्मनिरीक्षण की शक्ति  को  प्राप्त करने और उसे खुद पर अनुशासन के रूप के लागू करने के लिए तैयार करती है।

आत्मनिरीक्षण और आत्म-खोज

 भगवान राम का जीवन हमें खासकर आज के युवाओं को यह सिखाता है कि जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए आत्मनिरीक्षण और आत्म-खोज अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। हमें अपने जीवन के उद्देश्य को समझने और आध्यात्मिक चेतना प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए।

आप अगर भगवान राम  के जीवन को गंभीरता से देखेंगे तो पाएंगे कि उन्होंने ने अपने जीवन में अनेक बार आत्मनिरीक्षण और आत्म-खोज की  और अपने जीवन के उद्देश्य और मायने को समझने का प्रयास किया। लोगों  को जीवन और धर्म का उपदेश देते हुए भी मर्यादा पुरुषोतम राम ने वनवास के दौरान उन्होंने ऋषि-मुनियों से ज्ञान प्राप्त करने का कोई मौका नहीं जाने दिए। 

स्वयं की गहन खोज

आत्मनिरीक्षण और आत्म-खोज के लिए भगवान राम की यात्रा केवल एक बाहरी खोज नहीं है, बल्कि स्वयं की गहन खोज है जिसके लिए वह जीवन मे आने वाले हर किसी से कुछ भी सीखने का कोई अवसर नहीं छोड़ते। जीवन मे विभिन्न विपरीत परिस्थितियों  से निबटने के दौरान भी कभी भी वह धैर्य नहीं खोते  हैं साथ ही उनके निर्णय गहन आत्मनिरीक्षण और अपने कर्तव्यों के प्रति गहन जागरूकता द्वारा निर्देशित होते हैं।

 निरंतर विकर्षणों और बाहरी प्रभावों के युग में, रामायण आज के युवाओं को आत्मनिरीक्षण के लिए क्षण निकालने के लिए प्रेरित करती है। स्वयं को, अपनी प्रेरणाओं को, और व्यक्तिगत विकल्पों के प्रभाव को समझना एक परिवर्तनकारी प्रक्रिया बन जाती है जो अधिक उद्देश्यपूर्ण और पूर्ण जीवन की ओर ले जा सकती है।


Point Of View : स्वयं पर विश्वास करना सीखें, आपके भीतर की क्षमता, सामने की समस्या से ज्यादा ताकतवर है

Point Of View :  प्रकृति ने हम सभी को अपने आप में बहुत ज्यादा ताकत, सूझबूझ और अपार संभावनाएं दी हैं। विश्वास करें, प्रत्येक व्यक्ति के अंदर ऊर्जा का भण्डार छुपा है और हमें सिर्फ इस पर विश्वास करना है कि  हमारे अंदर की क्षमता और शक्ति के सामने समस्या और बाधा कुछ भी नहीं है। Point Of View  एक ऐसा हीं मंच है जो आपके अंदर की आग को जलाने की कोशिश करती है जो क्योंकि आपके अंदर की आग सबसे बड़ी चीज है। 

एक बार अगर हम खुद पर और अपनी अंदर छुपे सामर्थ्य पर विश्वास करना अगर सीख लें तो फिर हम सब कुछ कर सकते हैं। इस लेख के माध्यम से आप सीखेंगे कि कैसे अपनी क्षमता और ऊर्जा पर विश्वास किया जाए ताकि हम जीवन के रास्ते में आने वाली बाधाओं को दूर कर सकें।

अपनी क्षमता पर विश्वास करना स्वयं से बात करने की प्रक्रिया है जो आत्म संदेह को दूर करने और आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए आवश्यक शर्त है।

 हम पड़ाव को समझे मंज़िल

 लक्ष्य हुआ आंखों से ओझल

 वतर्मान के मोहजाल में-

आने वाला कल न भुलाएँ।

 आओ फिर से दिया जलाएँ।

-अटल बिहारी वाजपेयी


हम समस्याओं और बाधाओं को और  भी विकराल बनाकर देखने लगते है जो  खुद को कम  आंकने की प्रक्रिआ का आरम्भ हो जाता है, जबकि जरुरी यह है कि उसके बदले में, अपने भीतर छिपी संभावनाओं और संभावनाओं को देखने की पूरी कोशिश करनी चाहिए  जो इन बाधाओं को कुचलने में  आपका व्यापक हथियार हैं।

Inspiring  Thoughts: आपकी प्रसन्ता में छिपा  है जीवन की सफलता का रहस्य.... 

इस संदर्भ में रॉय टी. बेनेट के सुंदर उद्धरण को याद रखें "अपने आप पर विश्वास करें। आप जितना सोचते हैं उससे कहीं अधिक बहादुर हैं, आप जितना जानते हैं उससे कहीं अधिक प्रतिभाशाली हैं, और आप जितना सोचते हैं उससे कहीं अधिक सक्षम हैं। ”

धैर्य और आत्मविश्वास का नहीं छोड़े दामन.... मिलेगी विपरीत परिस्थितियों में भी सफलता

कहने की जरूरत नहीं है कि मनुष्य इस अजीब सच से पीड़ित है कि वह जानता तो सही है लेकिन करता गलत है.... आप खुद पर और अपने  आस  पास के लोगों पर नजर डालें तो शायद यही पाएंगे....  और इसलिए हम बाधाओं से पहले अपनी क्षमता को अनदेखा कर देते हैं।

हमें अनंत क्षमता प्रदान करने में प्रकृति ने हमारे बीच कोई पक्षपात नहीं किया है। हम सभी के पास ऊर्जा और संभावनाओं के साथ महान क्षमता है और यह केवल हम ही हैं जो हमारी क्षमता और ऊर्जा की सीमा निर्धारित करते हैं। हां, बाधाओं और कठिनाइयों का महिमामंडन करना और कुछ नहीं बल्कि हमारी क्षमता की सीमा तय करना है।

मुसीबतों को देख कर क्यों डरता है,

तू लड़ने से क्यों पीछे हटता है।

किसने तुमको रोका है,

तुम्ही ने तुम को रोका है।

भर साहस और दम, बढ़ा कदम,

अब इससे अच्छा कोई न मौका है।

-नरेंद्र वर्मा


Inspiring Thoughts: साहस को अपनाएँ... सफलता की कहानी खुद लिखें...


इस तथ्य पर विश्वास करें कि जैसे ही आप अपने मन में यह तथ्य पैदा करते हैं कि आपके पास किसी समस्या का समाधान है या आप किसी भी कठिन परिस्थिति को संभाल सकते हैं, न केवल आपका दिमाग बल्कि पर्यावरण और प्रकृति भी आपके समाधान के तरीके प्रदान करना शुरू कर देती है। बस आपको किसी समस्या के समाधान के बारे में सोचना है, आपको समस्या का समाधान अपने संसाधनों के भीतर और निश्चित समय सीमा के साथ मिल जाएगा।

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Point Of View : बेहतर कल के लिए नहीं छोड़िए आशावाद का दामन

Inspiring Thoughts: बेहतर कल के लिए नहीं छोड़िए आशावाद का दामन

नजरिया जीने का: आशावाद एक शक्तिशाली शक्ति है. यह हमें मुश्किल समय में आगे बढ़ने और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद कर सकता है. जब हम आशावाद रखते हैं, तो हम मुश्किलों को स्वीकार करने और उनसे निपटने के लिए अधिक तैयार होते हैं. हम अधिक रचनात्मक होते हैं और नए समाधान खोजने में सक्षम होते हैं. हम अधिक दृढ़ होते हैं और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अधिक प्रयास करते हैं. नजरिया जीने का एक ऐसा हीं मंच है जो आपके अंदर की आग को जलाने की कोशिश करती है जो क्योंकि आपके अंदर की आग सबसे बड़ी चीज है। 


आशावाद एक चमत्कार नहीं है. यह एक दृष्टिकोण है. यह एक विश्वास है कि चीजें बेहतर होंगी. यह एक विश्वास है कि हम अपने सपनों को प्राप्त कर सकते हैं. जब हम आशावाद रखते हैं, तो हम अपने जीवन को बेहतर बनाते हैं. हम अपने जीवन को अधिक सार्थक बनाते हैं. हम अपने जीवन को अधिक आनंददायक बनाते हैं.

तो, आइए हम बेहतर कल के लिए आशावाद का दामन न छोड़ें. आइए हम अपने सपनों के लिए लड़ें और कभी भी हार न मानें. आइए हम अपने जीवन को बेहतर बनाएं.

मुसीबतों को देख कर क्यों डरता है,
तू लड़ने से क्यों पीछे हटता है।
किसने तुमको रोका है,
तुम्ही ने तुम को रोका है।
भर साहस और दम, बढ़ा कदम,
अब इससे अच्छा कोई न मौका है।
-नरेंद्र वर्मा


जाहिर है, अगर जीवन है तो बाधाओं का आना स्वाभाविक है और इससे हम इनकार नहीं कर सकते।लेकिन क्या इन बाधाओं और परेशानियों से घबराकर हमें अपनी हार स्वीकार लेनी चाहिए।हाफिज नहीं। सच तो यह है कि जिंधिवमें कितनी भी विषम परिस्थितियों से हमें सामना करना पड़े, हमें आशा और उम्मीद कभी नहीबखिनी चाहिए।

विश्वास कीजिए, आशावादी होना मानव का सबसे अनुपम और प्रभावी लक्षण है जो न केवल आपके परिस्थितियों से लड़ने के लिए शक्ति प्रदान करता है बल्कि एक अपेक्षाकृत अच्छे सुबह किबुम्मिद भी जगाती है।

आप इतिहास को पलट कर देख लीजिए, विपरीत और विषम परिस्थितियों से किसका सामना नहीं हुआ है। लेकिन इतिहास के पन्नों में स्थान उन्हें ही मिली है जिन्होंने अपने कर्मठता से उन परिस्थितियों से भी निकलने का रास्ता बनाया है।

किसी कवि ने क्या खूब कहा है।।
" जो कहे नही करता भी हो 
विश्वास उसी का होता है
जो युग को कर्मठता से मोडे
इतिहास उसी का होता है।"

कहने का आशय यह है कि आशावादी बने रहने में वर्तमान की परिस्थितियों से निकलने की एक उम्मीद तो जिंदा रहती है। लेकिन अगर हम निराशावाद का दामन थाम भी लेते हैं तोवक्या इससे हम स्थिति से निकल जायेंगे।।हरगिज नही।

निराशा मन में आते हीं आपकी शरीर के तमाम अंगों पर पड़ने वाले प्रभाव का कभी अध्ययन किया है। आंखों के आगे अंधेरा छाना, मस्तिष्क में अनावश्यक दर्द, अंदरूनी अंगों के कार्य पद्धति पर अनावश्यक दबाव।।।ऐसी स्थिति में जब बाहर की परिस्थितियों का सामना करने केलिए हमें अंदर से स्ट्रॉन्ग रहने की जरूरत है, हम अंदर के फ्रंट पर ही अगर खुद को निराशावादी बनाकर कमजोर हो जायेंगे तो फिर उस स्थिति से कैसे निकल पाएंगे इसका अंदाजा सहज ही लगाई जा सकती है।।

वही अगर उसी प्रकार की विषम परिस्थितियों के सामने खुद को आशावादी रखते हुए उनका सामना करने की कोशिश करो, आप खुद ही बदलाव को महसूस कर सकते हैं.

बाधाएँ आती हैं आएँ
घिरें प्रलय की घोर घटाएँ,
पावों के नीचे अंगारे,
सिर पर बरसें यदि ज्वालाएँ,
निज हाथों में हँसते-हँसते,
आग लगाकर जलना होगा।
क़दम मिलाकर चलना होगा।
-अटल बिहारी वाजपेयी


सच तो यह है कि आशावादी बने रहने पर हमारी मस्तिष्क भी व्यवहारिक और प्रभावी उपाय सुझाती है साथ ही स्थितियों से निकलने के लिए स्ट्रेटजी और उनके कार्यानयन में भी हमारी मदद करती है।



Daily GK Current Affairs Sep 14 2024: भारतीय लाइट टैंक ज़ोरावर, स्पेक्ट्रम, मिशन मौसम


डीआरडीओ ने भारतीय लाइट टैंक ‘ज़ोरावर’ के सफल फील्ड फायरिंग परीक्षण किए

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने भारतीय लाइट टैंक ज़ोरावर के सफल प्रारंभिक ऑटोमोटिव परीक्षण किए। यह ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तैनाती में सक्षम अत्यधिक बहुउपयोगी  प्लेटफ़ॉर्म है।

ज़ोरावर: Facts in Brief 

  • डीआरडीओ की इकाई सीवीआरडीई द्वारा लार्सन एंड टुब्रो लिमिटेड के सहयोग से सफलतापूर्वक विकसित किया गया है। 
  • यह एंफिबियस है. यानी जमीन पर चल सकता है, साथ ही नदियों में तैर सकता है. किसी भी तरह के जलस्रोत को पार कर सकता है. 
  • इसका वजन मात्र 25 टन है. इसमें 105 मिलिमीटर की एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (ATGM) भी लगा सकते हैं. 
  • इस टैंक का नाम जनरल ज़ोरावर सिंह कहलूरिया के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने 1841 में चीन-सिख युद्ध के समय कैलाश-मानसरोवर पर मिलिट्री एक्सपेडिशन किया था. 


ब्रिक्स साहित्य फोरम 2024 का आरंभ 11 सितंबर 2024 बुधवार को रूस के कजान में हुआ।

  • साहित्यिक ब्रिक्स के 2024 संस्करण का थीम "नए यथार्थ में विश्व साहित्य, परंपराओं, राष्ट्रीय मूल्यों और संस्कृतियों का संवाद" है।
  •  भारत का प्रतिनिधित्व साहित्य अकादमी के अध्यक्ष श्री माधव कौशिक और साहित्य अकादमी के सचिव डॉ. के. श्रीनिवासराव  ने किया।


बेस रिपेयर डिपो नजफगढ़, नई दिल्ली ने 13 सितंबर 24 को ईडब्ल्यू सम्मेलन “स्पेक्ट्रम” का सफल आयोजन किया। 


मिशन मौसम का अनावरण : वर्ष 2026 तक भारत के मौसम और जलवायु पूर्वानुमान को उन्नत करने के लिए दो हजार करोड़ की पहल

मिशन का लक्ष्य ...

  • 50 डॉप्लर मौसम रडार(डीडब्ल्यूआर),
  •  60 रेडियो सोंडे/रेडियो विंड(आरएस आरडब्ल्यू) स्टेशन, 
  • 100 डिस्ड्रोमीटर,10 विंड प्रोफाईलर, 
  • एक शहरी टेस्ट बेड, 
  • एक प्रक्रिया टेस्ट बेड, 
  • एक महासागर अनुसंधान स्टेशन और ऊपरी वायु निगरानी के साथ 
  • 10 समुद्रीय स्वचालित मौसम स्टेशन स्थापित करना है।


ज़ोरावर: भारतीय लाइट टैंक का सफल परीक्षण, जाने खास बातें


रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने भारतीय लाइट टैंक ज़ोरावर के सफल प्रारंभिक ऑटोमोटिव परीक्षण किए। यह ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तैनाती में सक्षम अत्यधिक बहुउपयोगी  प्लेटफ़ॉर्म है। रेगिस्तानी इलाकों में किए गए फील्ड परीक्षणों के दौरान, लाइट टैंक ने असाधारण प्रदर्शन करते हुए  सभी इच्छित उद्देश्यों को कुशलतापूर्वक पूरा किया। प्रारंभिक चरण में, टैंक के फायरिंग प्रदर्शन का कड़ाई से मूल्यांकन किया गया और इसने निर्दिष्ट लक्ष्यों पर आवश्यक सटीकता हासिल की।

ज़ोरावर: Facts in Brief 

  • डीआरडीओ की इकाई सीवीआरडीई द्वारा लार्सन एंड टुब्रो लिमिटेड के सहयोग से सफलतापूर्वक विकसित किया गया है। 
  • यह एंफिबियस है. यानी जमीन पर चल सकता है, साथ ही नदियों में तैर सकता है. किसी भी तरह के जलस्रोत को पार कर सकता है. 
  • इसका वजन मात्र 25 टन है. इसमें 105 मिलिमीटर की एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (ATGM) भी लगा सकते हैं. 
  • इस टैंक का नाम जनरल ज़ोरावर सिंह कहलूरिया के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने 1841 में चीन-सिख युद्ध के समय कैलाश-मानसरोवर पर मिलिट्री एक्सपेडिशन किया था. 

ज़ोरावर को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की इकाई, लड़ाकू वाहन अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (सीवीआरडीई) द्वारा लार्सन एंड टुब्रो लिमिटेड के सहयोग से सफलतापूर्वक विकसित किया गया है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) सहित अनेक भारतीय उद्योगों ने विभिन्न उप-प्रणालियों के विकास में योगदान देते हुए देश के भीतर स्वदेशी रक्षा विनिर्माण क्षमताओं के सामर्थ्यब को प्रदर्शित किया।

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने भारतीय लाइट टैंक के सफल परीक्षणों के लिए डीआरडीओ, भारतीय सेना और सभी संबद्ध उद्योग भागीदारों की सराहना की। उन्होंने इस उपलब्धि को महत्वपूर्ण रक्षा प्रणालियों और प्रौद्योगिकियों में भारत के आत्मनिर्भरता के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर करार दिया है। 

योग गठिया के रोगियों को पीड़ा से राहत पहुंचा सकता है योग: एम्स अध्ययन

Yoga effective for Rheumatoid Arthritis patients AIIMS

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली के एक नए अध्ययन से पता चलता है कि योगाभ्यास से गठिया (रूमेटाइड अर्थराइटिस-आरए) के रोगियों के स्वास्थ्य में काफी सुधार आ सकता है। अध्ययन ने गठिया के रोगियों में सेलुलर और मोलेक्यूलर स्तर पर योग के प्रभावों की खोज की है। इससे पता चला है कि कैसे योग पीड़ा से राहत देकर गठिया के मरीजों को लाभ पहुंचा सकता है।

आरए एक पुरानी ऑटोइम्यून बीमारी है जो जोड़ों में सूजन का कारण बनती है। यह जोड़ों को नुकसान पहुंचाती है और इस रोग में दर्द होता है। इसके कारण फेफड़े, हृदय और मस्तिष्क जैसे अन्य अंग प्रणालियां भी प्रभावित हो सकती हैं। परंपरागत रूप से, योग शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य लाभों के लिए जाना जाता है।

डीएसटी द्वारा समर्थित, मोलेक्यूलर री-प्रोडक्शन एंड जेनेटिक्स प्रयोगशाला, एनाटॉमी विभाग और रुमेटोलॉजी विभाग एम्स, नई दिल्ली द्वारा एक सहयोगी अध्ययन ने गठिया के रोगियों में सेलुलर और मोलेक्यूलर स्तर पर योग के प्रभावों की खोज की है। इससे पता चला है कि कैसे योग पीड़ा से राहत देकर गठिया के मरीजों को लाभ पहुंचा सकता है।

पता चला है कि योग सेलुलर क्षति और ऑक्सीडेटिव तनाव (ओएस) को नियंत्रित करके सूजन को कम करता है। यह प्रो- और एंटी-इंफ्लेमेटरी साइटोकिन्स को संतुलित करता है, एंडोर्फिन के स्तर को बढ़ाता है, कोर्टिसोल और सीआरपी के स्तर को कम करता है तथा मेलाटोनिन के स्तर को बनाए रखता है। इसके जरिये सूजन और अतिसक्रिय प्रतिरक्षा प्रणाली चक्र का विघटन रुक जाता है।

मोलेक्यूलर स्तर पर, टेलोमेरेज़ एंजाइम और डीएनए में सुधार तथा कोशिका चक्र विनियमन में शामिल जीन की गतिविधि को बढ़ाकर, यह कोशिकाओं की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा कर देता है। इसके अतिरिक्त, योग माइटोकॉन्ड्रियल फ़ंक्शन को बेहतर बनाता है, जो ऊर्जा चयापचय को बढ़ाकर और ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करके टेलोमेर एट्रिशन व डीएनए क्षति से बचाता है।

डीएसटी द्वारा समर्थित, एम्स के एनाटॉमी विभाग के मोलेक्यूलर री-प्रोडक्शन एंड जेनेटिक्स प्रयोगशाला में डॉ. रीमा दादा और उनकी टीम द्वारा किए गए एक अध्ययन में दर्द में कमी, जोड़ों की गतिशीलता में सुधार, चलने-फिरने की कठिनाई में कमी और योग करने वाले रोगियों के लिए जीवन की समग्र गुणवत्ता में वृद्धि दर्ज की गई। ये समस्त लाभ योग की प्रतिरक्षात्मक सहनशीलता और मोलेक्यूलर रेमिशन स्थापित करने की क्षमता में निहित हैं।

साइंटिफिक रिपोर्ट्स, 2023 में प्रकाशित अध्ययन  से पता चलता है कि योग तनाव को कम करने में मदद कर सकता है, जो गठिया  के लक्षणों के लिए एक ज्ञात कारण है। कोर्टिसोल जैसे तनाव हार्मोन को कम करके, योग अप्रत्यक्ष रूप से सूजन को कम कर सकता है, माइटोकॉन्ड्रियल फ़ंक्शन में सुधार कर सकता है, जो ऊर्जा उत्पादन और सेलुलर स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है और 𝛽-एंडोर्फिन, मस्तिष्क-व्युत्पन्न न्यूरोट्रॉफ़िक कारक (बीडीएनएफ), डीहाइड्रोएपियनड्रोस्टेरोन (डीएचईए), मेलाटोनिन और सिरटुइन-1 (एसआईआरटी-1) के बढ़े हुए स्तरों से को-मॉर्बिड डिप्रेशन की गंभीरता को कम कर सकता है। योग न्यूरोप्लास्टिसिटी को बढ़ावा देता है और इस प्रकार रोग निवारण रणनीतियों में सहायता करता है तथा को-मॉर्बिड डिप्रेशन की गंभीरता को कम करता है।

इस शोध से गठिया रोगियों के लिए पूरक चिकित्सा के रूप में योग की क्षमता का प्रमाण मिलता है। योग न केवल दर्द और जकड़न जैसे लक्षणों को कम कर सकता है, बल्कि रोग नियंत्रण और जीवन की बेहतर गुणवत्ता में भी योगदान दे सकता है। दवाओं के विपरीत, योग के कोई दुष्प्रभाव नहीं हैं और यह गंभीर ऑटोइम्यून स्थितियों के प्रबंधन के लिए एक सस्ता व प्रभावी तथा स्वाभाविक विकल्प प्रदान करता है। (श्रोत: PIB)

Point Of View @पैरेंटिंग टिप्स: प्रशंसा करें, यह आपके बच्चों के आत्मविश्वास और आत्म-बोध को बढ़ाती है

Parent tips Najariya jine ka Praise increases Confidence

पैरेंटिंग टिप्स
: आप अपने बच्चों के लिए सबसे अच्छे पेरन्ट बनना चाहते हैं तो उनके साथ फ़्रेंडली होने के साथ हीं उनके एफर्ट और गुड वर्क को प्रोत्साहन और प्रशंसा करना सीखें, याद रखें, आपके प्रोत्साहन और प्रशंसा के शब्दों मे वह ताकत हैं जिनकी मदद से आपके बच्चे सामने आने वाली चुनौतियों का सामना करने कि कोशिश करते रहने के साथ आशावादी होने की अधिक संभावना रखते हैं।

आत्मविश्वास को बढ़ाने में सहायक 
बच्चों की परवरिश में प्रशंसा का बहुत बड़ा महत्व है। बच्चों को सच्ची और ईमानदार प्रशंसा की ज़रूरत होती है। जब वे कुछ अच्छा करें या कुछ नया सीखें, तभी उनकी प्रशंसा करें। इससे वे जान पाएंगे कि उनकी मेहनत और प्रयास की सराहना हो रही है।एक ऐसा वातावरण बनाएँ जहाँ बच्चा सुरक्षित और खुश महसूस करे। यह उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने में मदद करेगा।

कुछ बच्चों, खासकर जो दूसरों की तुलना में कम आत्मविश्वासी होते हैं, उन्हें दूसरों की तुलना में ज़्यादा प्रोत्साहन की ज़रूरत होती है। जब प्रशंसा प्रयास पर केंद्रित होती है, तो बच्चे कड़ी मेहनत को अपने आप में अच्छा मानते हैं। 

सकारात्मक तरीके से करें प्रयास   

विश्वास करें, प्रशंसा आपके बच्चे के आत्मविश्वास और आत्म-बोध को बढ़ाती है। प्रशंसा का उपयोग करके, आप अपने बच्चे को दिखा रहे हैं कि खुद के बारे में सकारात्मक तरीके से कैसे सोचना और बात करना है। आप अपने बच्चे को यह सीखने में मदद कर रहे हैं कि जब वे अच्छा करते हैं तो उन्हें कैसे पहचानना है और खुद पर गर्व महसूस करना है।

तुलना से बचे

बच्चों के अंदर मानसिक रूप से क्या चल रहा है इसकी समझ भी पैरेंट को पता होना जरूरी है खासकर तब जब बच्चे किसी कुंठा या किसी दूसरे अपने सहपाठी से किए गए तुलना से परेशान होते हैं। याद रखें, बच्चों कि किसी अन्य बच्चे के साथ कि गई अनावश्यक तुलना उनको मानसिक रूप से अधिक परेशान कर सकती है।

फ़्रेंडली बनकर उसे प्रोत्साहित करें 

इसके लिए जरूरी है कि आप फ़्रेंडली बनकर उसे प्रोत्साहित करें कि नेक्स्ट टाइम वह अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करेगा। यह बात और है कि वह प्रदर्शन हम पैरेंट कि ही जिम्मेदारी है लेकिन उसमें आप चुनौतीपूर्ण और सकारात्मक व्यवहार को प्रोत्साहित करने के लिए प्रशंसा और प्रोत्साहन का उपयोग कर सकते हैं।

परिवर्तनों को नजरंदाज नहीं करें

बच्चे के अंदर चल रहे छोटे बदलावों और परिवर्तनों को नजरंदाज नहीं करें और हमेशा उन पर ध्यान दें। उसके द्वारा किए गए किसी भी प्रयास या सुधार की प्रशंसा करें भले हीं वह छोटी से सफलता हो या लघु उपलब्धि हो, बजाय इसके कि जब तक आपका बच्चा कुछ बढ़िया न कर ले, तब तक प्रतीक्षा करें।

खूबियों की प्रशंसा करें

अपने बच्चे की खूबियों की प्रशंसा करें और अपने बच्चे को उसकी खुद की रुचियों के बारे में उत्साहित महसूस करने के लिए प्रोत्साहित करें। इससे आपके बच्चे में गर्व और आत्मविश्वास की भावना विकसित करने में मदद मिलेगी।

स्वतंत्रता दें

 बच्चों को अपने निर्णय खुद लेने का मौका दें इससे उनके अंदर निर्णय लेने कि भावना विकसित होगी। इसके साथ ही उनमें  जिम्मेदारी और परिणाम पर विचार करने का स्कोप मिलेगा। एक पैरेंट होने के नाते यह जरूरी है कि उनके फैसलों की इज्जत करें और उसका विश्लेषण कर उसे उनसे प्रभाव को बताएं क्योंकि इससे उनका आत्म-बोध बढ़ेगा और वे आत्मनिर्भर बनेंगे।



Point Of View : जानें जन्माष्टमी कि तिथि , पूजा विधि, ‘माखन चोर’ की लीलाएं और उनकी शिक्षाएं


 

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Point Of View: जन्माष्टमी भगवान कृष्ण के जन्म की याद में मनाई जाती है, जो पृथ्वी पर भगवान विष्णु के आठवें अवतार हैं। इस दिन भक्तगण भगवान कृष्ण की पूजा-अर्चना करते हैं और उनकी लीलाओं का स्मरण करते हैं। भगवान कृष्ण का जन्म बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। कृष्ण जन्माष्टमी के दिन, भगवान कृष्ण के भक्त प्रार्थना करते हैं, और पूरे देश में बाल कृष्ण के जीवन से प्रेरित विभिन्न अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं। यह पवित्र दिन भारत के विभिन्न हिस्सों में विभिन्न प्रकार की स्थानीय परंपराओं और अनुष्ठानों के अनुसार मनाया जाता है। भगवान कृष्ण का जन्म 5,000 साल पहले मथुरा शहर में राजा वासुदेव और रानी देवकी के घर हुआ था।  कृष्ण का जन्म एक महत्वपूर्ण घटना है क्योंकि यह बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। वे दुष्ट राजा कंस का नाश करने के लिए इस दुनिया में आए थे।

 भगवान कृष्ण का बचपन अद्भुत कहानियों से भरा पड़ा है जो हमें महत्वपूर्ण सबक सिखाती हैं। वह एक शरारती बच्चा था, जिसे अक्सर मक्खन के प्रति अपने प्रेम के लिए जाना जाता था, जिसके कारण उसे "माखन चोर" उपनाम मिला। लेकिन इस चंचल स्वभाव के पीछे एक दिव्य प्राणी था जिसने कई चमत्कार किए और एक बच्चे के रूप में भी असाधारण ज्ञान दिखाया।

इस वर्ष अर्थात 2024 में जन्माष्टमी अगस्त 26 को मनाई जाएगी। आप यहाँ देख सकते हैं आने वाले 2030 तक जन्माष्टमी को मनाई जाने वाली तिथियाँ-

 2024 सोमवार, 26 अगस्त

2025 शुक्रवार, 15 अगस्त

2026 शुक्रवार, 4 सितंबर

2027 बुधवार, 25 अगस्त

2028 रविवार, 13 अगस्त

2029 शनिवार, 1 सितंबर

2030 बुधवार, 21 अगस्त

 देश भर में जो लोग श्री कृष्ण जयंती मनाते हैं, वे इस दिन भगवान कृष्ण के जन्म के समय आधी रात तक उपवास रखते हैं। उनके जन्म के प्रतीक के रूप में, देवता की मूर्ति को एक छोटे से पालने में रखा जाता है और प्रार्थना की जाती है। इस दिन भजन और भगवद गीता का पाठ किया जाता है।

'जन्म' का अर्थ है जन्म और 'अष्टमी' का अर्थ है आठवां। भगवान कृष्ण भगवान विष्णु के आठवें अवतार थे, जिसमें उनका जन्म आठवीं तिथि को वासुदेव और यशोदा के आठवें पुत्र के रूप में हुआ था।

 पौराणिक कथाओं के अनुसार, कृष्ण राजकुमारी देवकी और उनके पति वासुदेव की आठवीं संतान थे, जो मथुरा के यादव वंश से संबंधित थे। देवकी के भाई कंस, जो उस समय मथुरा के राजा थे, ने देवकी द्वारा जन्म दिए गए सभी बच्चों को मार डाला, ताकि वह उस भविष्यवाणी से बच सकें जिसमें कहा गया था कि कंस की मृत्यु देवकी के आठवें पुत्र द्वारा की जाएगी। जब कृष्ण का जन्म हुआ, तो वासुदेव शिशु कृष्ण को मथुरा के एक जिले गोकुल में अपने मित्र के घर ले गए। इसके बाद, कृष्ण का पालन-पोषण गोकुल में नंद और उनकी पत्नी यशोदा ने किया।

 जन्माष्टमी की पूजा विधि:

प्रातःकाल स्नान: भक्तगण प्रातःकाल स्नान करके पवित्र होते हैं और व्रत का संकल्प लेते हैं।

मंदिर की सजावट: भगवान कृष्ण के मंदिर या पूजा स्थल को फूलों, रंगोली और दीपों से सजाया जाता है। भगवान कृष्ण की मूर्ति को नए वस्त्र, आभूषण और माला पहनाई जाती है।

पूजन सामग्री: पूजन के लिए विशेष सामग्री जैसे पंचामृत, फल, फूल, तुलसी दल, मक्खन और मिश्री आदि तैयार किए जाते हैं।

कलश स्थापना: पूजा स्थल पर कलश की स्थापना की जाती है और उसमें आम के पत्ते और नारियल रखकर उसका पूजन किया जाता है।

भगवान कृष्ण का अभिषेक: भगवान कृष्ण की मूर्ति का दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक किया जाता है।

कथा और भजन: भगवान कृष्ण की जन्मकथा सुनाई जाती है और उनके भजन-कीर्तन गाए जाते हैं।

मध्यरात्रि पूजा: चूंकि भगवान कृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में हुआ था, इसलिए रात 12 बजे विशेष पूजा और आरती की जाती है।

प्रसाद वितरण: पूजा के बाद भक्तों के बीच प्रसाद बांटा जाता है। मक्खन और मिश्री को भगवान कृष्ण के प्रिय भोजन के रूप में प्रसाद में वितरित किया जाता है।

व्रत का पारण: अगले दिन भक्तगण व्रत का पारण करते हैं और सामूहिक भोज का आयोजन करते हैं।

 भगवान कृष्ण की लीलाएं:

बाल लीलाएं: भगवान कृष्ण की बाल्यावस्था में की गई लीलाएं, जैसे कि माखन चुराना, गोपियों के साथ रासलीला, कालिया नाग का वध, गोवर्धन पर्वत उठाना आदि, अत्यंत प्रसिद्ध हैं।

रासलीला: भगवान कृष्ण की गोपियों के साथ की गई रासलीला उनकी प्रेम और भक्ति की भावना को प्रदर्शित करती है। यह लीला भगवान के प्रेममय स्वरूप का प्रतीक है।

कृष्ण-अर्जुन संवाद: महाभारत में अर्जुन को श्रीकृष्ण द्वारा दिया गया ज्ञान, जो भगवद्गीताके रूप में संकलित है, अत्यंत महत्वपूर्ण लीला है। इसमें जीवन के मूलभूत सिद्धांतों और धर्म के मार्ग का उपदेश दिया गया है।

 भगवान कृष्ण की शिक्षाएं:

कर्मयोग: भगवान कृष्ण ने गीता में कर्मयोग का उपदेश दिया, जिसमें बिना किसी फल की इच्छा के अपने कर्तव्यों का पालन करने की बात कही गई है।

भक्ति योग: कृष्ण भक्ति को सर्वोच्च मानते हैं और प्रेम के माध्यम से भगवान से जुड़ने का मार्ग बताते हैं।

धर्म और अधर्म का ज्ञान: श्रीकृष्ण ने धर्म और अधर्म के बीच के भेद को स्पष्ट किया और सदा धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।

सर्वधर्म समभाव: कृष्ण ने सभी धर्मों को समान रूप से मान्यता देने की बात कही और कहा कि सभी मार्ग अंततः एक ही ईश्वर तक पहुंचते हैं।

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अस्वीकरण: कृपया ध्यान दें कि लेख में उल्लिखित टिप्स/सुझाव केवल सामान्य जानकारी है जो विभिन्न सामाजिक और धार्मिक आस्था पर आधारित हैं.ताकि आपको उस मुद्दे के बारे में अपडेट रखा जा सके जो कि आम लोगों से अपेक्षित है. आपसे निवेदन है कि कृपया इन सुझावो को  पेशेवर सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए तथा अगर आपके पास इन विषयों से सम्बंधित कोई विशिष्ट प्रश्न हैं तो हमेशा सम्बंधित एक्सपर्ट से अवश्य परामर्श करें।

 

श्री एस्ट्रोलॉजी: जन्म वाले दिन से जानें रोमांटिक मूड और पार्टनर के प्रति केयरिंग होने का राज

Birth Date And Personal Life Love Live Romance Mood

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जन्म का दिन और समय कभी भी अनायास नहीं होता और यह खास वक्त आपके जीवन में घटने वाले घटनाओं के स्वरुप को तय करता है। जन्मदिन सिर्फ़ एक कारण से ही ख़ास नहीं होते। ज्योतिषीय दृष्टि से कहें तो जिस दिन आप जन्म लेते हैं, वह दिन के साथ आपके दिव्य संबंध और आपके व्यक्तित्व लक्षणों को परिभाषित करता है। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि जिस दिन आपके साथी का जन्म होता है वह प्यार और जुनून की डिग्री तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।  हम देखते हैं कि सप्ताह के दिनों का नाम ग्रहों के नाम पर रखा गया है और ग्रहों को बदले में देवी-देवताओं के नामों से दर्शाया गया है। इन देवी-देवताओं का अपना अलग व्यक्तित्व होता है जो सप्ताह के दिनों के अनुरूप होता है, और एक निश्चित दिन पर जन्म लेने वालों में भी समान व्यक्तित्व लक्षण हो सकते हैं। किसी खास वक्त और दिन में जन्म लेने वाले व्यक्तियों के आचरण, व्यक्तित्व, रोजगार, स्वस्थ्य और अनेक चीजे कुंडली शास्त्र/ज्योतिष शास्त्र के अनुसार तय होती है और ऐसे में आपके पार्टनर के मूड, रोमांस और वैवाहिक जीवन के बारे में भी इसकी जानकारी प्राप्त की जा सकती है. खास तौर पर जब आप प्यार में होते हैं और अपने पार्टनर की लिए उपहार या शब्दों के माध्यम से अपने प्यार का इजहार करना तथा साथी से बहुत उम्मीद और देखभाल महसूस करने का उम्मीद का होना भी एक महत्वपूर्ण फैक्टर होता है जो हम अपने पार्टनर से चाहते हैं. आइये जानते हैं विख्यात एस्ट्रोलॉजर/कुंडली  एक्सपर्ट और मोटिवेटर हिमांशु रंजन शेखर द्वारा कि सप्ताह के सातों दिन अर्थात शनिवार, रविवार, सोमवार, मंगलवार, बुधवार, गुरु वार और शुक्रवार को जन्म लेने वाले व्यक्तियों की क्या होती है खासियत  खास तौर पर प्यार, केयरिंग, रोमांस और पर्सनल लाइफ के सन्दर्भ में।



 शनिवार को जन्मे लोगों का निजी जीवन

शनिवार को जन्मे जातक रिश्तों के मोर्चे पर अपने पार्टनर का बहुत ख्याल रखते हैं। शनिवार को जन्म लेने वाले व्यक्ति अपने व्यक्तिगत संबंधों और प्रेम में कभी भी धोखेबाज़ नहीं होते हैं और साथी के हित और मूल्य का सम्मान करते हैं। आम तौर पर ऐसे लोग अपने जीवनसाथी या साथी को उच्च घर से प्राप्त करते हैं जो भव्य जीवन शैली जीते हैं और उच्च प्रोफ़ाइल समाज और पृष्ठभूमि से संबंधित होते हैं।

रविवार को जन्मे लोगों का निजी जीवन

 रविवार को जन्मे लोग शर्मीले स्वभाव के होते हैं और हो सकता है कि अपने साथी से अपने प्यार का इजहार करने की दिशा में पहला कदम न उठाएं। जैसा कि रविवार को जन्मे लोग भगवान सूर्य द्वारा शासित होते हैं और जाहिर है ऐसे व्यक्तित्व अपने जीवन में पहले अहंकार और आत्म सम्मान को प्राथमिकता देते हैं। अहंकारी रवैया और स्वाभिमान का स्वभाव अपने साथी के सम्मान को ठेस पहुँचाने का कारक हो सकता है और इसका परिणाम आपसी संबंधों में विश्वास पैदा करने में कमी के रूप में सामने आता है। रविवार को जन्में लोग बाहरी रूप से शांत रहते हैं लेकिन जब उनके सामने कोई मुद्दा आता है तो वे अपना धैर्य खो देते हैं।

सोमवार को जन्मे लोगों का निजी जीवन

 सोमवार को जन्म लेने वाले लोग काफी केयरिंग और अपने पार्टनर को प्यार से काफी खुश रखते हैं। अपने साथी के लिए देखभाल करना और ध्यान रखना उनके जीवन का पहला आदर्श होता  है। वे कोमल स्वभाव का प्रदर्शन करते हैं और यहां तक कि अपने साथी के प्रति अपनी वाणी में भी मृदुभाषी होते हैं। हालांकि ऐसे लोग स्वभाव से शांत रहते हैं, वे स्वतंत्र विचारधारा को तरजीह देते हैं जो उनके रिश्ते में कुछ बाधाएँ और भ्रम पैदा करती है। यदि वे अपने बीच के मतभेदों का समाधान ढूंढ लें तो दांपत्य जीवन सामंजस्यपूर्ण हो सकता है।

मंगलवार को जन्मे लोगों का निजी जीवन

  मंगल के द्वारा शासित और शासित होने के कारण मंगलवार को जन्मे लोग स्वभाव से क्रोधी रहते हैं। क्रोध से भरा स्वभाव और व्यवहार अपने रिश्ते को थोड़ा सा खट्टा बनाने के लिए इस्तेमाल करते हैं। ऐसे लोगों को दोस्ती के लिए जीवन साथी या साथी सुंदर / स्मार्ट और आकर्षक मिलता है जो उन्हें अपने जीवन में शांति प्रदान करता है। हालाँकि, क्रोधी स्वभाव उनके रिश्ते में परेशानी और मतभेद पैदा करता है। हालाँकि, मतभेदों के बावजूद, वे इन मुद्दों का उचित समाधान प्राप्त करते हैं और समग्र रूप से सुखी और सुखद जीवन जीने के लिए उपयोग करते हैं

बुधवार को जन्मे लोगों का निजी जीवन

 बुधवार को जन्मे लोग सुखद व्यक्तित्व के स्वामी रहते हैं। इसके कारण ये अपने जीवन में मित्र के रूप में कई व्यक्तियों को प्रभावित करने की शक्ति रखते हैं, लेकिन ये अपने सच्चे साथी को कभी धोखा नहीं देते हैं। इस तथ्य के बावजूद कि बुधवार को जन्मे लोगों के जीवन में कई दोस्त होते हैं, वे व्यक्तिगत रूप से एक खुशहाल और परिपूर्ण जीवन जीते हैं क्योंकि वे अपने साथी के गौरव को प्यार और सम्मान करते हैं।

गुरुवार को जन्मे लोगों का रिश्ता

गुरुवार को जन्मे व्यक्ति के लिए स्थिरता, विश्वसनीयता और देखभाल व्यक्तिगत और रिश्ते के लिए सबसे उत्तम विशेषण हैं। उनके व्यक्तिगत संबंधों के बंधन में समझ और आपसी सहयोग है जो ऐसे व्यक्तित्वों के लिए स्थिर और सुखी जीवन की नींव रखता है।

शुक्रवार को जन्मे लोगों का रिश्ता

 शुक्रवार को जन्म लेने वाले जातक शुक्र ग्रह द्वारा शासित और शासित होते हैं और वे अपने व्यक्तित्व में कई विशिष्ट विशेषताओं के स्वामी बन जाते हैं। अपने व्यक्तित्व के कई विशेष गुण होने के कारण ऐसे लोगों में लोगों को आसानी से अपना प्रशंसक बनाने की विशेष कला होती है और निश्चित रूप से यह उनके प्रेम संबंधों को भ्रम और विश्वास की कमी का एक सेट बना देता है। हालाँकि पूर्णता और उदार मानसिकता के कारण ऐसे लोगों का वैवाहिक जीवन अच्छा रहता है, उन्हें अपने रिश्ते की स्थिरता पर विश्वास और परस्पर विश्वास के साथ ध्यान देने की आवश्यकता है।

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नोट: कृपया ध्यान दें कि लेख में उल्लिखित टिप्स/सुझाव केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से हैं ताकि आपको उस मुद्दे के बारे में अपडेट रखा जा सके जो आम लोगों से अपेक्षित है और इन्हें पेशेवर ज्योतिषीय सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। हम अनुशंसा/अनुरोध करते हैं कि यदि आपके पास विषय के संबंध में या इस तरह के मामले से सम्बंधित कोई विशिष्ट प्रश्न हैं तो हमेशा अपने ज्योतिषी या पेशेवर ज्योतिष/कुंडली सुझाव प्रदाता से परामर्श करें।

बंगाल की फेमस संदेश मिठाई से कराएं सभी का मुंह मीठा

Raksha Bandhan Spceial: इस राखी में बंगाली मिठाई संदेश से कराएं सभी का मुंह मीठा

चाहें शादी हो या कोई त्यौहार या फिर बस यूं ही खाने का मन हो, मिठाई  केवल स्वाद के लिए नहीं बल्कि इनके पीछे सांस्कृतिक और पारंपरिक महत्व भी है। सच्चाई तो यह है कि  विभिन्न रीति-रिवाजों और सभ्यताओं वाला भारत अपने समृद्ध इतिहास के अलावा विविध और लजीज खानपान का धनी देश भी है। अगर आप इस रक्षा बंधन पर कुछ नया और खास करना चाहते हैं, तो बंगाली मिठाई "संदेश" से सभी का मुंह मीठा कराएं। संदेश बंगाल की एक पारंपरिक और बेहद स्वादिष्ट मिठाई है।

संदेश मिठाई किस चीज से बनती है?

संदेश मिठाई  को बंगाली मिठाइयों की रानी कहा जाता है जो मैदा, पाउडर चीनी और पनीर से बनाया जाता है।  दूध से बनी मिठाई होने के कारण इसे छेना या पनीर से बनाया जाता है और इसे बनाने के लिए मुट्ठी भर सामग्री की आवश्यकता होती है। 

संदेश की खासियत

संदेश एक हल्की, कम मीठी मिठाई है, जो ताजे छेने (पनीर) से बनाई जाती है। इसमें चीनी या गुड़ का उपयोग कर मिठास दी जाती है और यह विभिन्न स्वादों और आकारों में बनाई जाती है। इसे बनाने के लिए निम्नलिखित सामग्री और विधि का पालन किया जा सकता है।

 सामग्री:

  • ताजा पनीर (छेना) - 250 ग्राम
  • पिसी चीनी - 50 ग्राम (स्वाद अनुसार बढ़ा या घटा सकते हैं)
  • इलायची पाउडर - 1/2 चम्मच
  • केसर (वैकल्पिक) - कुछ धागे
  • पिस्ता, बादाम या कोई अन्य सूखे मेवे सजाने के लिए

विधि:

सबसे पहले छेना तैयार करें और इसके लिए पहले ताजे पनीर (छेना) को अच्छी तरह से मैश करें ताकि उसमें कोई दानेदार हिस्सा न रह जाए। इसे मुलायम और चिकना बनाना आवश्यक है।

फिर इसके बाद मिश्रण को तैयार करें और मैश किए हुए छेने में पिसी चीनी और इलायची पाउडर डालें। इसे अच्छी तरह मिलाएं ताकि चीनी पूरी तरह घुल जाए और मिश्रण एकसार हो जाए।

इसके बाद इस मिश्रण को गरम करेंऔर अब इस मिश्रण को एक नॉन-स्टिक पैन में धीमी आंच पर 5-7 मिनट तक पकाएं। ध्यान रहे कि इसे बहुत अधिक न पकाएं, वरना यह सख्त हो जाएगा। मिश्रण तब तैयार होगा जब यह पैन छोड़ने लगे और थोड़ा सूखा महसूस हो।

आकार दें:

मिठाई का सही आकार देना भी एक कला है और इसके लिए थोड़ी धैर्य और हथेली का सही प्रयोग जरूरी होता है। इसके लिए जरूरी है कि  मिश्रण को ठंडा होने दें, फिर अपने हाथों की मदद से इसे मनचाहे आकार में ढालें। आप इसे गोल, चौकोर या किसी अन्य आकार में बना सकते हैं।

सजावट:

तैयार मिठाई अर्थात को संदेश को सही तरीके से सजाकर तब अतिथियों के सामने परोसना जरूरी है। इसके आप तैयार संदेश के ऊपर पिस्ता, बादाम या कोई अन्य सूखे मेवे से सजाएं। अगर आप चाहें तो केसर के धागे भी डाल सकते हैं।

परोसें:

आपका स्वादिष्ट बंगाली संदेश तैयार है। इसे ठंडा करके परोसें और रक्षा बंधन के इस पावन अवसर पर सभी का मुंह मीठा कराएं।

देश मे इन 7 जगहों पर होगी पीएम मित्र पार्कों की स्थापना : जानें खास बातें


केंद्रीय वस्‍त्र राज्य मंत्री श्री पबित्रा मार्गेरिटा  द्वारा  राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी गई जानकारी के मुतबिक  सरकार ने 2027-28 तक के सात वर्षों की अवधि के दौरान 4,445 करोड़ रुपये के परिव्यय से प्लग एंड प्ले सुविधा सहित विश्वस्तरीय अवसंरचना वाली ग्रीनफील्ड/ब्राउनफील्ड साइटों  पर 7 पीएम मेगा एकीकृत वस्त्र क्षेत्र और परिधान (पीएम मित्र) पार्क स्थापित करने को मंजूरी दी है। सरकार ने पीएम मित्र पार्कों की स्थापना के लिए तमिलनाडु (विरुद्धनगर), तेलंगाना (वारंगल), गुजरात (नवसारी), कर्नाटक (कलबुर्गी), मध्य प्रदेश (धार), उत्तर प्रदेश (लखनऊ), महाराष्ट्र (अमरावती) जैसे 7 साइटों (स्थलों) को अंतिम रूप दिया है।

  • तमिलनाडु (विरुद्धनगर), 
  • तेलंगाना (वारंगल), 
  • गुजरात (नवसारी), 
  • कर्नाटक (कलबुर्गी), 
  • मध्य प्रदेश (धार), 
  • उत्तर प्रदेश (लखनऊ),
  •  महाराष्ट्र (अमरावती) 

इनके पूरा हो जाने पर यह परिकल्पना की गई है कि प्रत्येक पार्क से लगभग 10,000 करोड़ रुपये का निवेश (विदेशी और घरेलू दोनों) होगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और वस्त्र परिवेश लाभान्वित होगा।

सभी 5 ग्रीनफील्ड साइटों अर्थात गुजरात, तमिलनाडु, कर्नाटक, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के संबंध में विशेष कंपनियों (एसपीवी) का गठन कर लिया गया है। महाराष्ट्र और तेलंगाना जैसे ब्राउनफील्ड साइटों के संबंध में मौजूदा कार्यान्वयन व्यवस्था को तय दिशानिर्देशों के अनुसार जारी रखने की अनुमति दी गई है।

पीएम मित्र पार्क योजना के तहत ग्रीनफील्ड पीएम मित्र और ब्राउनफील्ड पीएम पार्क के विकास के लिए भारत सरकार की ओर से ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड पीएम मित्र के लिए क्रमशः 500 करोड़ रुपये और 200 करोड़ रुपये प्रति पार्क की अधिकतम सहायता के साथ परियोजना लागत के 30 प्रतिशत की दर से कोर अवसंरचना के निर्माण के लिए विकास पूंजी सहायता (डीसीएस) देने का प्रावधान है।

 इसके अतिरिक्त, पीएम मित्र पार्कों में शीघ्र स्थापना के लिए विनिर्माण इकाइयों को प्रोत्साहित करने के लिए पीएम-मित्र के अंतर्गत अलग-अलग इकाइयों को प्रति पार्क अधिकतम 300 करोड़ रुपये की प्रतिस्पर्धी प्रोत्साहन सहायता (सीआईएस) और योजना के दिशा-निर्देशों के तहत भी सहायता प्रदान की जाती है।  (Source PIB)

फ्रेंडशिप डे 2024: अपने दोस्तों को भेजें ये दिल को छु लेने वाले मैसेज, महत्वपूर्ण कोट्स और भी बहुत कुछ


हैप्पी फ्रेंडशिप डे 2024: फ्रेंडशिप डे, मानवीय संबंधों की नींव रखने के साथ ही दोस्तों के प्रति एक खास अटैच्मन्ट है जिसे याद करने का सुनहरा अवसर है।  यह एक खास ओकेजन है  जो सीमाओं, देशों और पृष्ठभूमियों से परे प्यार के बंधन, साथ रहने की खुशी और समर्थन और साथ के लिए आभार का जश्न मनाने के लिए आता है। आपसी सम्मान, विश्वास, समर्थन और साझा अनुभव इस संबंध की आधारशिला हैं। हर साल, यह खास दिन दोस्तों के बीच साझा किए जाने वाले खूबसूरत प्यार और स्नेह का जश्न मनाने के लिए मनाया जाता है, जो हमारे जीवन को बेहतर बनाता है। वैसे तो पूरी दुनिया फ्रेंडशिप डे मनाती है, लेकिन हर देश में इसकी तारीख अलग-अलग हो सकती है। यह दिन दोस्तों के महत्व और हमारे जीवन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को भी सम्मान और मान्यता देता है। 

 इस दिन, लोग आम तौर पर उपहारों का आदान-प्रदान करते हैं, संदेश भेजते हैं और एक साथ समय बिताते हैं, ये सभी मजबूत और सहायक दोस्ती के महत्व को मजबूत करने में मदद करते हैं।

फ्रेंडशिप डे 2024: Date

मीडिया रेपोर्ट्स के अनुसार भारत में, फ्रेंडशिप डे अगस्त के पहले रविवार को मनाया जाता है और इस साल अर्थात 2024 को साल का पहला रविवार 4 अगस्त को पड़ता है इसलिए फ्रेंडशिप डे 04 अगस्त को मनायाजाएगा।

मित्रता दिवस मित्रता और अपने मित्रों के साथ हमारे संबंधों का जश्न मनाने के लिए समर्पित एक विशेष दिन है। यह विभिन्न देशों में अलग-अलग तिथियों पर मनाया जाता है, लेकिन सबसे व्यापक रूप से मान्यता प्राप्त तिथि अगस्त का पहला रविवार है।

फ्रेंडशिप डे 2024 महत्व

मित्रता का उत्सव: यह उन मित्रों का सम्मान और सराहना करने का दिन है जो हमारे जीवन में खुशी और अर्थ जोड़ते हैं।

बंधनों को मजबूत करना: मित्रता दिवस कृतज्ञता और स्नेह व्यक्त करके मौजूदा मित्रता को मजबूत करने का अवसर प्रदान करता है।

सांस्कृतिक आदान-प्रदान: विभिन्न संस्कृतियाँ मित्रता दिवस को अनूठी परंपराओं के साथ मनाती हैं, जिससे वैश्विक समुदाय और समझ की भावना को बढ़ावा मिलता है।

मानसिक स्वास्थ्य: मित्रता को पहचानना और उसका जश्न मनाना सामाजिक समर्थन नेटवर्क को मजबूत करके मानसिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

फ्रेंडशिप डे 2024  महत्वपूर्ण Quotes

  • अरस्तू: "दोस्त क्या है? दो शरीरों में रहने वाली एक आत्मा।"
  • राल्फ वाल्डो इमर्सन: "दोस्त होने का एकमात्र तरीका एक होना है।"
  • अल्बर्ट कैमस: "मेरे आगे मत चलो... हो सकता है मैं पीछे न चलूँ। मेरे पीछे मत चलो... हो सकता है मैं नेतृत्व न करूँ। मेरे साथ चलो... बस मेरे दोस्त बनो।"
  • हेलेन केलर: "मैं अकेले उजाले में चलने की बजाय अंधेरे में दोस्त के साथ चलना पसंद करूँगी।"
  • ऑस्कर वाइल्ड: "आखिरकार, सभी संगति का बंधन, चाहे वह विवाह में हो या दोस्ती में, बातचीत ही है।"
  • एलबर्ट हबर्ड: "एक दोस्त वह होता है जो आपके बारे में सब कुछ जानता है और फिर भी आपसे प्यार करता है।"
  • सी.एस. लुईस: "दोस्ती उस पल पैदा होती है जब एक व्यक्ति दूसरे से कहता है, 'क्या! तुम भी? मुझे लगा कि मैं अकेला हूँ।'"
  • महात्मा गांधी: "खुद को खोजने का सबसे अच्छा तरीका है दूसरों की सेवा में खुद को खो देना।"
  • मार्क ट्वेन: "अच्छे दोस्त, अच्छी किताबें और एक सुप्त विवेक: यही आदर्श जीवन है।"
  •  हेनरी डेविड थोरो: "दोस्ती की भाषा शब्द नहीं बल्कि अर्थ है।" 
  • यहाँ कुछ हार्ट-टचिंग फ्रेंडशिप डे कोट्स दिए गए हैं जो आप अपने दोस्तों के साथ साझा कर सकते हैं:

    "दोस्ती वह नहीं है जो जीवन के समय में होती है, बल्कि वह है जो जीवन भर साथ रहती है।"

    "सच्ची दोस्ती आत्मा की असीम ऊंचाइयों तक पहुँचाती है, जहां शब्द और भावनाएँ बेमानी हो जाती हैं।"

    "एक सच्चा दोस्त वह होता है जो आपके अतीत को समझता है, आपके भविष्य में विश्वास करता है, और आपको उसी तरह स्वीकार करता है जैसे आप हैं।"

    "दोस्ती जीवन का सबसे प्यारा हिस्सा है, क्योंकि यह हमें उन क्षणों में हंसने का मौका देती है जब हम रोने के लिए तैयार होते हैं।"

    "सच्ची दोस्ती अनमोल है, और इसे दुनिया के किसी भी खजाने से तुलना नहीं की जा सकती।"

    "दोस्ती का मतलब यह नहीं है कि आप हमेशा साथ रहें, बल्कि यह है कि आप हमेशा दिल में रहें।"

    "दोस्त वे होते हैं जो आपकी आत्मा की धुन को जानते हैं और आपको वापस गाते हैं जब आप इसे भूल जाते हैं।"

    "दोस्त वे लोग हैं जो आपकी हँसी में शामिल होते हैं, आपके आँसू पोंछते हैं, और आपको जीवन के हर उतार-चढ़ाव में सहारा देते हैं।"

    "सच्ची दोस्ती समय, दूरी, और परिस्थितियों से परे होती है। यह दिल से दिल की कनेक्शन होती है।"


डेयरी क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर भारत’: Facts in Brief


भारत दूध उत्पादन में प्रथम स्थान पर है जो वैश्विक दूध उत्पादन में 25 प्रतिशत का व्‍यापक योगदान देता है। पिछले 9 वर्षों से दूध उत्पादन लगभग 6% की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ रहा है, प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता 459 ग्राम प्रतिदिन है और यह घरेलू मांग को पूरा करने में आत्मनिर्भर है।

सरकार ने इस दिशा में विभिन्न कदम उठाए हैं जिनमें से एक अहम कदम है पशुपालन अवसंरचना विकास कोष (एएचआईडीएफ) - यह पशुपालन और डेयरी विभाग की प्रमुख योजनाओं में से एक है जिसका शुभारंभ 24.06.2020 को प्रधानमंत्री के ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान प्रोत्साहन पैकेज’ के तहत किया गया था और इसे डेयरी प्रसंस्करण अवसंरचना विकास कोष (डीआईडीएफ) के विलय के साथ नए सिरे से व्‍यवस्थित किया गया है और इसे 29110.25 करोड़ रुपये के फंड आकार के साथ अगले तीन वर्षों के लिए बढ़ा दिया गया है।

पशुपालन एवं डेयरी विभाग (डीएएचडी) देश के डेयरी उद्योग की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए निम्नलिखित योजनाओं को कार्यान्वित कर रहा है और इसके साथ ही इसने देश की जीडीपी में डेयरी क्षेत्र का योगदान बढ़ाने में मदद की है:

प्रमुख योजनाएं 

  • राष्ट्रीय गोकुल मिशन: - इसका उद्देश्य स्‍वदेशी गोजातीय नस्लों का विकास एवं संरक्षण करना, गोजातीय आबादी का आनुवंशिक उन्नयन करना, और गोजातीय पशुओं का दूध उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाना है।
  • डेयरी विकास के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम: दूध और दूध उत्पादों की गुणवत्ता बढ़ाना  और संगठित दूध खरीद की हिस्सेदारी बढ़ाना इसका उद्देश्य है।  
  • पशुपालन अवसंरचना विकास कोष: यह दूध प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन संबंधी अवसंरचना के निर्माण/आधुनिकीकरण, इत्‍यादि के लिए है।
  • डेयरी सहकारी समितियों और डेयरी गतिविधियों में लगे किसान उत्पादक संगठनों को सहायता प्रदान करना: कार्यशील पूंजी ऋण पर ब्याज सब्सिडी के रूप में सहायता प्रदान करना।

इसके अलावा, सरकार ने पशुपालन और डेयरी किसानों की कार्यशील पूंजी आवश्यकताओं के लिए उन्‍हें किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) की सुविधा भी प्रदान की है। (केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ​​ललन सिंह द्वारा राज्य सभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी गई जानकारी पर आधारित) (Source PIB)

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