- India Divided : Rajendra Prasad
- In the Company of Women : Khushwant Singh
- In Search of Gandhi : Richard Attenborough
- Gita Rahasya : Bal Gangadhar Tilak
- Hungry Stones : Rabindranath Tagore
- Ideology and Social Science : Andre Beteille
- India We Left : Hymphry Trevelyan
- Fury : Salman Rushdie
- I Too Had A Dream : Dr. Verghese Kurien
- Great Tragedy : Z. A. Bhutto
- In Search of Identity : Anwar el-Sadat
- I Follow the Mahatma : K. M. Munshi
- Hind Swaraj : M. K. Gandhi
- If I Am Assassinated : Z. A. Bhutto
- Freedom in Exile : Dalai Lama
- Gitanjali : Rabindranath Tagore
- Frozen Assets : P. G. Wodehouse
- Hamlet : William Shakespeare
- Flight to Parliament : Rajesh Pilot
- Fortynine Days : Amrita Pritam
- Geet Govinda : Jaya Dev
- Heir Apparent : Dr. Karan Singh
- Friends and Foes : Sheikh Mujibur Rehman
- Gathering Storm : Winston Churchill
- Glass Palace : Amitabha Ghosh
- Humour : Ben Johnson
- 100 Best Parliamentary Speeches–1947-97 : Dr. Subhash C. Kashyap
- Husband of a Fanatic : Amitava Kumar
- I Muse; Therefore I Am : V. N. Narayanan
- Indian Home Rule : M. K. Gandhi
- India-Pakistan–History of Unsolved Conflicts : Lars Blinkenberg
- From Rajpath to Lokpath : Vijaya Raje Scindia
- Inside the CBI : Joginder Singh
- Indomitable Spirit : Dr. A.P.J. Abdul Kalam
- Gladiators : Arthur Koestler
- The Sepoy Mutiny and revolt of 1857 - R.C Majumdar
- 1857- The great Rebellion- Ashok Mehta
- Civil Rebellion in the Indian Mutinies – 1857 -59-S.B Chaudhery
- The Indian war of Independence-V.D Sawarkar
SSC, Railway, UPSC, CUET जैसे परीक्षाओं मे पूछे गए पुस्तकों का कलेक्शन
झेलम नदी: महत्व, लंबाई उद्गम स्थल और अन्य रोचक जानकारी
झेलम नदी भारत और पाकिस्तान में बहने वाली एक प्रमुख नदी है जो कि समुद्र तल से लगभग 1,850 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह नदी सिंधु नदी की एक महत्वपूर्ण सहायक नदियों मे से एक है और ऐतिहासिक व सांस्कृतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। अगर आप पूर्व के इतिहास का अध्ययन करेंगे तो पाएंगे कि ऋग्वेद और अन्य प्राचीन ग्रंथों झेलम नदी को 'वितस्ता' (Vitasta) के नाम से उल्लेख मिलती है और ग्रीक में इसे "हाइडस्पेस" कहा जाता था।
झेलम नदी की उत्पत्ति:
झेलम नदी की उत्पत्ति भारत के जम्मू और कश्मीर क्षेत्र में स्थित वेरिनाग (Verinag) से होती है। वेरिनाग एक सुंदर झरना है जो पिर पंजाल पर्वत श्रेणी (Pir Panjal Range) के पास स्थित है।यह जम्मू और कश्मीर में अनंतनाग जिले में स्थित है. यह नदी जम्मू-कश्मीर से बहती हुई पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में प्रवेश करती है और चिनाब नदी में मिल जाती है. इसकी सहायक नदियों मे नीलम नदी, किशनगंगा नदी शामिल है।
यह स्थान समुद्र तल से लगभग 1,850 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है तथा इसकी लंबाई 725 किलोमीटर है। जहां तक प्रवाह का सवाल है, झेलम नदी भारत में लगभग 400 किलोमीटर बहने के बाद यह नदी पाकिस्तान में प्रवेश करती है।मंगला डैम, जो झेलम पर बना है, पाकिस्तान का सबसे बड़ा बांधों में से एक है।
झेलम नदी की गहराई
सिंधु फिर पश्चिम की ओर बहती है और दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम की ओर मुड़कर खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में प्रवेश करती है, इस प्रक्रिया में नंगा पर्वत (26,660 फीट [8,126 मीटर]) के उत्तरी और पश्चिमी किनारों को घेरती हुई घाटियों में जाती है जो 15,000 से 17,000 फीट (4,600 से 5,200 मीटर) की गहराई और 12 से 16 मील (19 से 26 किमी) है। .
झेलम नदी प्रवाह
वेरिनाग से निकलकर झेलम नदी दक्षिण की ओर बहती है तथा श्रीनगर शहर के बीचों-बीच से होकर गुजरती है।यह डल झील और वुलर झील (Wular Lake) से भी होकर गुजरती है।
भारत मे लगभग 400 किलोमीटर बहने के बाद यह नदी पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में प्रवेश करती है। वहाँ से आगे बढ़ते हुए यह मंगला डैम (Mangla Dam) के पास एक विशाल जलाशय बनाती है। फिर आगे चलकर झेलम नदी पंजाब प्रांत में बहती है और अंततः पाकिस्तान में चिनाब नदी से मिल जाती है।
झेलम नदी का ऐतिहासिक महत्व:
अगर आप ऐतिहासिक दृष्टिकोण से देखेंगे तो झेलम नहीं की अपना महत्व और विशेषता है जो इसे इतिहास के पन्नों मे जगह दिलाती है। प्राचीन समय में झेलम के किनारे कई महत्वपूर्ण सभ्यताएँ बसी बसी हुई थी और इतिहास मे इनका उल्लेख भी मिलता है। इसके अतिरिक्त सिकंदर और भारतीय राजा पोरस (Porus) के बीच ऐतिहासिक हाइडेस्पीज का युद्ध (Hydaspes Battle) भी झेलम इसी नदी के किनारे लड़ा गया था।
मंगला बाँध
मंगला बाँध पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में झेलम नदी पर स्थित है। पाकिस्तान के मीरपुर जिले में झेलम नदी पर बना एक बहुउद्देशीय बांध है। यह दुनिया का सातवां सबसे बड़ा बांध है जिसका उपयोग सिंचाई और जलविद्युत उत्पादन के लिए किया जाता है। यह मंगला गाँव के पास स्थित है जिसके कारण इसका नाम मंगला बांध रखा गया है।
सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty): Five Facts You Need To Know
भारत और पाकिस्तान मे बीच बंटवारे मे सबकुछ का बंटवारा हुआ और इसमे नदियां भी अछूती नहीं रही। जी हाँ, 1947 में जब भारत का विभाजन हुआ, तब न सिर्फ ज़मीनें बंटी, बल्कि नदियों का प्रवाह भी दो देशों में बंट गया। आपको पता होनी चाहिए की भारत और पाकिस्तान की बीच उस समय कुल छह प्रमुख नदियाँ रहीं थी जिनमे शामिल है-
- सिंधु,
- झेलम,
- चिनाब,
- रावी,
- व्यास,
- सतलुज।
अगर गौर करें तो इनमें से तीन प्रमुख नदियां पाकिस्तान और तीन भारत मे बहती ही। पाकिस्तान मे बहने वाले नदियां है- सिंधु, झेलम, चिनाब। जबकि भारत से होकर – पाकिस्तान से होकर बहती हैं, और बाकी तीन – रावी, व्यास, सतलुज – भारत के हिस्से में आती हैं।
इस संधि पर करांची में पाकिस्तान के तत्कालीन फिल्ड मार्शल मोहम्मद अयूब खान और भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री जवाहरलाल नेहरू एवं विश्व बैंक के श्री डब्लू, ए. बी. इलिफ द्वारा 19 सितम्बर, 1960 को हस्ताक्षर किया गया ।
समस्या यह थी कि इन सभी नदियों का स्रोत भारत में था, और जाहिर है कि पाकिस्तान डरता था कि भारत कभी भी पानी रोककर उसकी खेती को बर्बाद कर सकता है।
1948 में भारत ने पाकिस्तान को चेतावनी दी और कुछ समय के लिए नदियों का पानी रोक भी दिया।
विश्व बैंक (उस समय इसे "इंटरनेशनल बैंक फॉर रिकंस्ट्रक्शन एंड डेवलपमेंट" कहा जाता था) ने दोनों देशों के बीच मध्यस्थता का प्रस्ताव दिया।
8 साल तक चली बातचीत के बाद, अंततः 19 सितंबर 1960 को कराची में भारत के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब ख़ान ने एक ऐतिहासिक संधि पर हस्ताक्षर किए – यही थी सिंधु जल संधि।
संधि के मुख्य बिंदु
पानी का बंटवारा:
- पूर्वी नदियाँ (रावी, सतलुज, व्यास) – इनका पूरा जल भारत को दिया गया।
- पश्चिमी नदियाँ (सिंधु, झेलम, चिनाब) – इनका 80% से अधिक जल पाकिस्तान को उपयोग करने का अधिकार मिला, लेकिन भारत इन नदियों का सीमित उपयोग (जैसे सिंचाई, जलविद्युत परियोजनाएँ) कर सकता है।
- निगरानी व्यवस्था के अंतर्गत दोनों देशों ने एक स्थायी सिंधु आयोग (Permanent Indus Commission) बनाया, जिसमें दोनों तरफ से एक-एक आयुक्त होता है।
अगर दोनों देशों के बीच किसी प्रकार का कोई विवाद होता है, तो पहले दोनों आयुक्त मिलकर सुलझाते हैं।
समाधान न होने पर विश्व बैंक, मध्यस्थता या अंतरराष्ट्रीय अदालत में मामला जाता है।
इस संधि की विशेषताएँ
- यह अब तक की सबसे स्थायी जल संधियों में से एक है।
- तीन युद्धों के बावजूद (1965, 1971, 1999) यह संधि कभी समाप्त नहीं हुई।
Health Tips: जानें क्या है रोज एक अमरूद खाने के फायदे-Facts in Brief
अमरूद के फल मे उल्लेखनीय पोषक मौजूद होते हैं जो हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभदायक होते हैं। हर दिन अमरूद खाने से इसके समृद्ध पोषक तत्व प्रोफ़ाइल के कारण कई स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं।
यहाँ कुछ प्रमुख लाभ दिए गए हैं:
विटामिन सी से भरपूर:
अमरूद में विटामिन सी की भरपूर मात्रा पाई जाती है और आप जानते हैं कि विटामिन सी शरीर कि रोग प्रतिरक्षा क्षमता को बढ़ाने के लिए जरूरी तत्व है। इसके साथ ही विटामिन सी हमारे शरीर के कार्य, त्वचा के स्वास्थ्य और कोलेजन संश्लेषण का समर्थन करता है। अमरूद खाने से आपके शरीर को बीमारियों से बचाने और त्वचा के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
फाइबर में उच्च:
वैज्ञानिकों के अनुसार अमरूद में आहार फाइबर की मात्रा अधिक होती है, जो अच्छे पाचन को बढ़ावा देता है, कब्ज को रोकने में मदद करता है और स्वस्थ आंत का समर्थन करता है। यह फाइबर स्थिर रक्त शर्करा के स्तर को बनाए रखने में भी सहायता करता है, जिससे यह मधुमेह वाले लोगों के लिए एक बढ़िया विकल्प बन जाता है।
हृदय स्वास्थ्य का समर्थन करता है:
अमरूद में मौजूद पोटेशियम और फाइबर बेहतर हृदय स्वास्थ्य में योगदान करते हैं। पोटेशियम रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद करता है, जबकि फाइबर कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में मदद कर सकता है, जिससे हृदय रोग का खतरा कम होता है।
वजन घटाने में योगदान:
अमरूद में कैलोरी कम होती है और फाइबर भरपूर मात्रा में होता है, जो आपको लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराता है और वजन प्रबंधन में सहायता करता है।
त्वचा के लिए अच्छा:
अमरूद में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट, जैसे कि विटामिन सी और लाइकोपीन, आपकी त्वचा को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाते हैं और उम्र बढ़ने के संकेतों को धीमा कर सकते हैं। पानी की उच्च मात्रा त्वचा को हाइड्रेट भी रखती है।
रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है:
अमरूद में कई पोषक तत्व होते हैं जो प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करते हैं, जिसमें विटामिन ए, फोलेट और विटामिन ई शामिल हैं, जो संक्रमण से लड़ने और समग्र स्वास्थ्य का समर्थन करने में मदद करते हैं।
आँखों के स्वास्थ्य में सुधार करता है:
अमरूद में विटामिन ए होता है, जो आँखों के स्वास्थ्य के लिए एक आवश्यक तत्व है। इसके साथ ही यह मोतियाबिंद और धब्बेदार अध: पतन जैसी स्थितियों के जोखिम को कम कर सकता है।
मासिक धर्म के दर्द को कम करता है:
कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि अमरूद के पत्तों का अर्क मासिक धर्म के दर्द को कम करने में मदद कर सकता है, क्योंकि यह कुछ व्यक्तियों में ऐंठन को कम करने में मदद करता है।
कुल मिलाकर, नियमित रूप से अमरूद खाने से आवश्यक विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट मिलते हैं जो स्वास्थ्य के कई पहलुओं को लाभ पहुँचाते हैं।
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अस्वीकरण : कृपया ध्यान दें कि लेख में बताए गए सुझाव/सुझाव केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से हैं ताकि आपको इस मुद्दे के बारे में अपडेट रखा जा सके जो आम लोगों से अपेक्षित है और इन्हें पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं समझा जाना चाहिए/पालन नहीं किया जाना चाहिए। हम अनुशंसा करते हैं और आपसे अनुरोध करते हैं कि यदि आपके पास विषय से संबंधित किसी भी चिकित्सा मामले के बारे में कोई विशिष्ट प्रश्न हैं, तो हमेशा अपने डॉक्टर या पेशेवर स्वास्थ्य सेवा प्रदाता से परामर्श करें।
Who Is Shaik Rasheed?
गुंटूर, आंध्र प्रदेश के होनहार 20 वर्षीय बल्लेबाज शेख रशीद ने अंडर-19 टी20 विश्व कप 2022 में शानदार प्रदर्शन के बाद पहचान बनाई, जहां उन्होंने भारत की खिताबी जीत में अहम भूमिका निभाई। सीएसके ने दो नए चेहरे पेश किए उनमें से एक हैं शेख रशीद.
चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके) ने लखनऊ सुपर जायंट्स (एलएसजी) के खिलाफ गुंटूर, आंध्र प्रदेश के होनहार 20 वर्षीय बल्लेबाज शेख रशीद को पेश किया। मैच में शेख रशीद का वीडियो देखें "इंच इनसाइड: शेख रशीद ने जितेश को आउट करने के लिए शानदार संतुलन बनाया"
रशीद ने 2022 के दौरान भारत के लिए तीसरे सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी के रूप में उभरे, उन्होंने 4 मैचों में 201 रन बनाए। उनका घरेलू प्रदर्शन लगातार अच्छा रहा है, जिसमें 19 प्रथम श्रेणी खेलों में 46.04 की सराहनीय औसत से 1,204 रन शामिल हैं।
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना: ऐसे करें आवेदन, जाने खास बातें
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक महत्वपूर्ण योजना है, जिसका उद्देश्य छोटे उद्यमियों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है।
यह योजना मुद्रा योजना के नाम से भी जानी जाती है, और इसका मुख्य उद्देश्य देश के छोटे व्यवसायों को बढ़ावा देना है।इस योजना के तहत, छोटे उद्यमियों को वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है, जिससे वे अपने व्यवसाय को आगे बढ़ा सकें।
मुख्य बातें
- प्रधानमंत्री मुद्रा योजना छोटे उद्यमियों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
- यह योजना देश के छोटे व्यवसायों को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई थी।
- मुद्रा योजना के तहत, छोटे उद्यमियों को विभिन्न प्रकार की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
- इस योजना का उद्देश्य देश में रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देना है।
- प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत, छोटे उद्यमियों को आसानी से ऋण प्रदान किया जाता है।
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना का परिचय
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक महत्वपूर्ण योजना है जिसका उद्देश्य छोटे और मध्यम उद्यमियों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है। यह योजना विशेष रूप से उन उद्यमियों के लिए डिज़ाइन की गई है जो अपने व्यवसाय को बढ़ाना चाहते हैं लेकिन वित्तीय संसाधनों की कमी का सामना कर रहे हैं।
मुद्रा योजना के तहत, सरकार ने छोटे व्यवसायों को बढ़ावा देने और उनकी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इस योजना के माध्यम से, छोटे उद्यमी अपने व्यवसाय को विकसित करने और रोजगार के अवसर पैदा करने में सक्षम होते हैं।
मुद्रा योजना का उद्देश्य और महत्व
मुद्रा योजना का मुख्य उद्देश्य छोटे और मध्यम उद्यमियों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है। इस योजना के तहत, उद्यमियों को विभिन्न प्रकार के लोन प्रदान किए जाते हैं जो उनके व्यवसाय को बढ़ाने में मदद करते हैं।
मुद्रा योजना का महत्व इस प्रकार है:
- छोटे उद्यमियों को वित्तीय सहायता प्रदान करना
- रोजगार के अवसर पैदा करना
- व्यवसायों को बढ़ावा देना
- आर्थिक विकास को बढ़ावा देना
माइक्रो यूनिट्स डेवलपमेंट एंड रिफाइनेंस एजेंसी (MUDRA) क्या है?
MUDRA (माइक्रो यूनिट्स डेवलपमेंट एंड रिफाइनेंस एजेंसी) एक वित्तीय संस्थान है जो मुद्रा योजना के तहत लोन प्रदान करने वाले बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों को रिफाइनेंस करता है। MUDRA की भूमिका इस प्रकार है:
| MUDRA की भूमिका | विवरण |
| रिफाइनेंसिंग | MUDRA लोन प्रदान करने वाले बैंकों और वित्तीय संस्थानों को रिफाइनेंस करता है |
| निगरानी और मार्गदर्शन | MUDRA लोन वितरण और उपयोग की निगरानी करता है और आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान करता है |
| नीति निर्माण | MUDRA मुद्रा योजना के तहत नीतियों और दिशानिर्देशों का निर्माण करता है |
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना का इतिहास और पृष्ठभूमि
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना का इतिहास और पृष्ठभूमि क्या है, यह समझने के लिए हमें इसके उद्गम और विकास की प्रक्रिया को देखना होगा। यह योजना भारत सरकार द्वारा छोटे व्यवसायों और उद्यमियों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए शुरू की गई थी।
योजना की शुरुआत और विकास
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना की शुरुआत अप्रैल 2015 में हुई थी, जिसका उद्देश्य गैर-कॉर्पोरेट, गैर-कृषि क्षेत्र की इकाइयों को वित्तीय सहायता प्रदान करना था। इस योजना के तहत, मुद्रा लोन के रूप में छोटे व्यवसायों को ऋण प्रदान किया जाता है।
मुद्रा योजना के तहत तीन प्रकार के लोन प्रदान किए जाते हैं: शिशु, किशोर, और तरुण। इन लोन के माध्यम से, छोटे व्यवसायों को उनकी जरूरतों के अनुसार वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना का भारतीय अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। इस योजना के तहत प्रदान किए गए लोन ने छोटे व्यवसायों को बढ़ावा देने में मदद की है, जिससे रोजगार के अवसरों में वृद्धि हुई है।
| वर्ष | मुद्रा लोन वितरित (रुपये करोड़ में) | लोन वितरित करने वाले खाताधारकों की संख्या |
| 2015-16 | 1,22,188 | 3.37 करोड़ |
| 2016-17 | 1,80,957 | 4.34 करोड़ |
| 2017-18 | 2,40,828 | 5.42 करोड़ |
यह तालिका दर्शाती है कि कैसे प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत लोन वितरण में लगातार वृद्धि हुई है, जिससे छोटे व्यवसायों और उद्यमियों को लाभ पहुंचा है।
मुद्रा योजना के अंतर्गत लोन के प्रकार
मुद्रा योजना के अंतर्गत लोन के प्रकार व्यवसाय की विभिन्न आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। यह लोन उद्यमियों को उनके व्यवसाय को विकसित करने और सफलतापूर्वक चलाने में मदद करते हैं।
शिशु लोन - 50,000 रुपये तक
शिशु लोन उन उद्यमियों के लिए है जो अपने व्यवसाय को शुरू करने या विस्तार करने के लिए छोटी राशि की आवश्यकता होती है। यह लोन 50,000 रुपये तक होता है।
शिशु लोन के लिए पात्रता और दस्तावेज
शिशु लोन के लिए पात्रता मानदंड में शामिल हैं:
- व्यवसाय का वैध प्रमाण
- आयु 18 वर्ष से अधिक होना
- व्यवसाय योजना का प्रस्तुतिकरण
आवश्यक दस्तावेजों में पहचान प्रमाण, पते का प्रमाण, और व्यवसाय संबंधित दस्तावेज शामिल होते हैं।
शिशु लोन के लाभ
शिशु लोन के लाभों में शामिल हैं:
- कम ब्याज दरें
- आसान पुनर्भुगतान शर्तें
- व्यवसाय शुरू करने के लिए आवश्यक पूंजी
किशोर लोन - 50,000 से 5 लाख रुपये तक
किशोर लोन उन उद्यमियों के लिए है जो अपने व्यवसाय को और विस्तार देना चाहते हैं और अधिक पूंजी की आवश्यकता होती है। यह लोन 50,000 रुपये से 5 लाख रुपये तक होता है।
किशोर लोन के लिए पात्रता और दस्तावेज
किशोर लोन के लिए पात्रता मानदंड में शामिल हैं:
- व्यवसाय का सफलतापूर्वक संचालन
- विस्तार की योजना
- आवश्यक दस्तावेजों का प्रस्तुतिकरण
आवश्यक दस्तावेजों में व्यवसाय का ऑडिटेड बैलेंस शीट, आयकर रिटर्न, और व्यवसाय विस्तार योजना शामिल होती है।
किशोर लोन के लाभ
किशोर लोन के लाभों में शामिल हैं:
- व्यवसाय विस्तार के लिए पूंजी
- प्रतिस्पर्धा में बने रहने में मदद
- नौकरियों के अवसर बढ़ाने में सहायता
तरुण लोन - 5 लाख से 10 लाख रुपये तक
तरुण लोन स्थापित उद्यमियों के लिए है जो अपने व्यवसाय को और अधिक विकसित करना चाहते हैं। यह लोन 5 लाख रुपये से 10 लाख रुपये तक होता है।
तरुण लोन के लिए पात्रता और दस्तावेज
तरुण लोन के लिए पात्रता मानदंड में शामिल हैं:
- व्यवसाय का अच्छा ट्रैक रिकॉर्ड
- विस्तार या आधुनिकीकरण की योजना
- विस्तृत व्यवसाय योजना
आवश्यक दस्तावेजों में व्यवसाय का वित्तीय स्टेटमेंट, विस्तार योजना, और अन्य संबंधित दस्तावेज शामिल होते हैं।
तरुण लोन के लाभ
तरुण लोन के लाभों में शामिल हैं:
- व्यवसाय के विकास के लिए पर्याप्त पूंजी
- प्रतिस्पर्धात्मक लाभ प्राप्त करने में मदद
- नए बाजारों में प्रवेश करने में सहायता
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के लिए पात्रता मानदंड
यदि आप प्रधानमंत्री मुद्रा योजना का लाभ उठाना चाहते हैं, तो आपको इसके पात्रता मानदंडों के बारे में जानकारी होनी चाहिए। यह योजना छोटे और मध्यम उद्यमियों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती है, लेकिन इसके लिए कुछ विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा करना होता है।
कौन आवेदन कर सकता है?
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत लोन प्राप्त करने के लिए, आवेदक को कुछ पात्रता मानदंडों को पूरा करना होता है। इनमें शामिल हैं:
- व्यक्तिगत आवेदक के लिए: भारतीय नागरिक होना, 18 वर्ष से अधिक आयु, व्यवसाय या पेशेवर गतिविधियों में शामिल होना।
- व्यावसायिक संस्थाओं के लिए: व्यवसाय का पंजीकरण, न्यूनतम एक वर्ष का व्यवसायिक अनुभव।
आवश्यक दस्तावेज और शर्तें
आवेदन करने के लिए आवश्यक दस्तावेज इस प्रकार हैं:
व्यक्तिगत आवेदकों के लिए दस्तावेज
| दस्तावेज का नाम | विवरण |
| आधार कार्ड | पहचान और पते के प्रमाण के लिए |
| पासपोर्ट साइज फोटो | व्यक्तिगत पहचान के लिए |
| व्यवसाय का प्रमाण | व्यवसाय के प्रकार और अवधि का विवरण |
व्यावसायिक संस्थाओं के लिए दस्तावेज
| दस्तावेज का नाम | विवरण |
| व्यवसाय पंजीकरण प्रमाण पत्र | व्यवसाय के कानूनी अस्तित्व का प्रमाण |
| व्यवसायिक आय का प्रमाण | पिछले वर्षों की आय का विवरण |
| पैन कार्ड | कर पहचान के लिए |
इन दस्तावेजों और शर्तों को पूरा करने वाले आवेदक प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत लोन के लिए पात्र होंगे।
मुद्रा लोन के लिए आवेदन प्रक्रिया
मुद्रा लोन के लिए आवेदन करने की प्रक्रिया को समझने से आपको अपने व्यवसाय को बढ़ाने में मदद मिल सकती है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत लोन प्राप्त करने के लिए आपको कुछ आवश्यक चरणों का पालन करना होगा।
ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया
मुद्रा लोन के लिए ऑनलाइन आवेदन करना एक सरल और सुविधाजनक तरीका है। इसके लिए आपको निम्नलिखित चरणों का पालन करना होगा:
- मुद्रा योजना की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।
- ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भरें और आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें।
- आवेदन शुल्क का भुगतान करें, यदि लागू हो।
- आवेदन जमा करने के बाद, आपको एक रसीद या आवेदन संख्या प्राप्त होगी।
आपको अपने आवेदन की स्थिति को ट्रैक करने के लिए इस संख्या का उपयोग करना होगा।
ऑफलाइन आवेदन प्रक्रिया
यदि आप ऑनलाइन आवेदन नहीं करना चाहते हैं, तो आप ऑफलाइन तरीके से भी लोन के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए:
- निकटतम बैंक या वित्तीय संस्थान की शाखा में जाएं जो मुद्रा योजना के तहत लोन प्रदान करता है।
- आवेदन फॉर्म प्राप्त करें और इसे भरें।
- आवश्यक दस्तावेज संलग्न करें और आवेदन जमा करें।
- बैंक प्रतिनिधि आपको आगे की प्रक्रिया के बारे में सूचित करेगा।
आवेदन में होने वाली सामान्य गलतियां और उनसे बचने के उपाय
मुद्रा लोन के लिए आवेदन करते समय कुछ सामान्य गलतियां होती हैं जिनसे बचा जा सकता है:
| गलती | उपाय |
| अपूर्ण या गलत जानकारी | आवेदन फॉर्म को ध्यान से भरें और सभी जानकारी की जांच करें। |
| आवश्यक दस्तावेजों की कमी | सभी आवश्यक दस्तावेजों की सूची बनाएं और उन्हें संलग्न करें। |
| आवेदन शुल्क का भुगतान न करना | आवेदन शुल्क का भुगतान समय पर करें। |
इन उपायों को अपनाकर, आप अपने आवेदन को सफलतापूर्वक जमा कर सकते हैं और लोन प्राप्त करने की प्रक्रिया को आसान बना सकते हैं।
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के लाभ
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के लाभ विविध और व्यापक हैं। यह योजना न केवल छोटे उद्यमियों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है, बल्कि महिला और युवा उद्यमियों के लिए भी विशेष अवसर प्रदान करती है। इस योजना के तहत, उद्यमी अपने व्यवसाय को बढ़ावा देने और नई ऊँचाइयों तक पहुँचने में सक्षम होते हैं।
छोटे उद्यमियों के लिए लाभ
मुद्रा योजना छोटे उद्यमियों के लिए एक महत्वपूर्ण साधन है। इसके तहत, उन्हें आर्थिक सहायता मिलती है जिससे वे अपने व्यवसाय को स्थापित और विस्तार कर सकते हैं।
- कम ब्याज दरों पर लोन
- सरल और सुविधाजनक ऋण प्रक्रिया
- व्यवसाय विस्तार के अवसर
महिला उद्यमियों के लिए विशेष प्रावधान
महिला उद्यमियों के लिए मुद्रा योजना में विशेष प्रावधान किए गए हैं। यह योजना महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देती है और उन्हें अपने व्यवसाय में सफल होने के लिए प्रोत्साहित करती है।
- महिलाओं के लिए विशेष ऋण योजनाएं
- प्रशिक्षण और मार्गदर्शन
- वित्तीय सहायता और सब्सिडी
युवा उद्यमियों के लिए अवसर
युवा उद्यमियों के लिए मुद्रा योजना नए अवसर प्रदान करती है। यह योजना उन्हें उद्यमिता कौशल विकसित करने और अपने व्यवसाय को सफलतापूर्वक चलाने में मदद करती है।
मुद्रा योजना के तहत वित्तीय संस्थान
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के सफल क्रियान्वयन में विभिन्न वित्तीय संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका है। ये संस्थान छोटे और मध्यम उद्यमियों को वित्तीय सहायता प्रदान करने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक मुद्रा योजना के तहत लोन प्रदान करने में अग्रणी भूमिका निभाते हैं। ये बैंक व्यापक शाखा नेटवर्क और ग्राहकों का विश्वास होने के कारण अधिक लाभार्थियों तक पहुंच सकते हैं।
कुछ प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक:
- स्टेट बैंक ऑफ इंडिया
- बैंक ऑफ बड़ौदा
- पंजाब नेशनल बैंक
निजी क्षेत्र के बैंक
निजी क्षेत्र के बैंक भी मुद्रा योजना में सक्रिय रूप से शामिल हैं। ये बैंक अपनी आधुनिक बैंकिंग सेवाओं और ग्राहक-केंद्रित दृष्टिकोण के साथ उद्यमियों को आकर्षित करते हैं।
| बैंक का नाम | विशेषताएं |
| एचडीएफसी बैंक | आधुनिक बैंकिंग सेवाएं, त्वरित लोन मंजूरी |
| आईसीआईसीआई बैंक | ग्राहक-केंद्रित दृष्टिकोण, ऑनलाइन बैंकिंग सुविधाएं |
क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और अन्य संस्थान
क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और अन्य वित्तीय संस्थान भी मुद्रा योजना के तहत महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। ये संस्थान ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाएं प्रदान करने में मदद करते हैं।
मुद्रा योजना की सफलता की कहानियां
मुद्रा योजना ने कई उद्यमियों को सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। इस योजना के तहत विभिन्न क्षेत्रों में उद्यमियों ने अपनी प्रतिभा और मेहनत से सफलता प्राप्त की है।
लघु उद्योग के क्षेत्र में सफलता
मुद्रा योजना के तहत लघु उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए कई सफलता की कहानियां सामने आई हैं। छोटे व्यवसायों ने इस योजना के तहत ऋण लेकर अपने कारोबार को बढ़ाया और सफलता प्राप्त की। उदाहरण के लिए, एक छोटे से चाय के स्टॉल के मालिक ने मुद्रा लोन लेकर अपने व्यवसाय को एक सफल ब्रांड में बदल दिया।
सेवा क्षेत्र में सफलता
सेवा क्षेत्र में भी मुद्रा योजना ने कई उद्यमियों को सफलता दिलाई है। कई छोटे सेवा प्रदाता जैसे कि ट्यूशन सेंटर, हेल्थकेयर सर्विसेज, और आईटी सर्विसेज ने मुद्रा लोन का लाभ उठाकर अपने व्यवसाय को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।
महिला उद्यमियों की सफलता की कहानियां
महिला उद्यमियों ने भी मुद्रा योजना का भरपूर लाभ उठाया है। कई महिलाओं ने अपने छोटे व्यवसायों को मुद्रा लोन के माध्यम से सफल बनाया है। एक उदाहरण एक महिला है जिसने अपने घरेलू सिलाई व्यवसाय को मुद्रा लोन लेकर एक सफल फैशन ब्रांड में बदल दिया।
| क्षेत्र | उद्यमियों की संख्या | लोन की रकम |
| लघु उद्योग | 50,000+ | 100 करोड़+ |
| सेवा क्षेत्र | 20,000+ | 50 करोड़+ |
| महिला उद्यमी | 30,000+ | 75 करोड़+ |
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के आंकड़े और प्रभाव
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के नवीनतम आंकड़े इसके प्रभाव को दर्शाते हैं। यह योजना न केवल छोटे उद्यमियों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है, बल्कि इसका प्रभाव भी व्यापक रहा है।
वित्तीय वर्ष 2022-23 में इस योजना के तहत कई महत्वपूर्ण आंकड़े सामने आए हैं। इन आंकड़ों से पता चलता है कि योजना कितनी प्रभावी रही है और इसका भविष्य में क्या प्रभाव पड़ सकता है।
वित्तीय वर्ष 2022-23 के आंकड़े
वित्तीय वर्ष 2022-23 में प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत कुल 3.45 करोड़ लोन वितरित किए गए। इनमें से अधिकांश लोन छोटे उद्यमियों और नए व्यवसायों को प्रदान किए गए।
| लोन का प्रकार | लोन की संख्या | कुल लोन राशि (करोड़ रुपये में) |
| शिशु लोन | 2 करोड़ | 10,000 |
| किशोर लोन | 1 करोड़ | 20,000 |
| तरुण लोन | 45 लाख | 15,000 |
रोजगार सृजन पर प्रभाव
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना का एक महत्वपूर्ण प्रभाव रोजगार सृजन पर भी पड़ा है। इस योजना के तहत वितरित लोन ने न केवल उद्यमियों को वित्तीय सहायता प्रदान की, बल्कि नए रोजगार के अवसर भी सृजित किए।
आंकड़ों के अनुसार, इस योजना के तहत लगभग 5 करोड़ नए रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं। यह आंकड़ा इस योजना की सफलता को दर्शाता है और इसके महत्व को रेखांकित करता है।
मुद्रा योजना में डिजिटल पहल
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना ने अपने लाभार्थियों को डिजिटल माध्यम से जोड़ने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इस दिशा में, सरकार ने विभिन्न डिजिटल पहलों को शुरू किया है जो लाभार्थियों को आसानी से लोन और अन्य सुविधाएं प्रदान करती हैं।
मुद्रा ऐप और पोर्टल
मुद्रा योजना के तहत, एक विशेष ऐप और पोर्टल विकसित किया गया है जो लाभार्थियों को लोन के लिए आवेदन करने और अपनी प्रगति को ट्रैक करने में मदद करता है। यह ऐप और पोर्टल उपयोगकर्ता-मित्री है और लाभार्थियों को आवश्यक जानकारी आसानी से प्रदान करता है।
डिजिटल लोन प्रोसेसिंग
मुद्रा योजना में डिजिटल लोन प्रोसेसिंग एक महत्वपूर्ण पहल है। यह लाभार्थियों को ऑनलाइन लोन के लिए आवेदन करने और तेजी से स्वीकृति प्राप्त करने में सक्षम बनाता है। डिजिटल लोन प्रोसेसिंग से न केवल समय की बचत होती है, बल्कि यह पारदर्शिता और दक्षता भी बढ़ाता है।
अन्य सरकारी योजनाओं से तुलना
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना की तुलना अन्य सरकारी योजनाओं से करना महत्वपूर्ण है ताकि हमें इसके अनूठे पहलुओं को समझने में मदद मिल सके। भारत सरकार ने विभिन्न योजनाएं शुरू की हैं जो उद्यमियों को वित्तीय सहायता और अन्य प्रकार की मदद प्रदान करती हैं। इनमें से कुछ प्रमुख योजनाएं हैं स्टैंड-अप इंडिया और पीएम स्वनिधि योजना।
स्टैंड-अप इंडिया से तुलना
स्टैंड-अप इंडिया योजना का उद्देश्य अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और महिलाओं के बीच उद्यमिता को बढ़ावा देना है। यह योजना नौकरी चाहने वालों को नौकरी देने वाले बनाने के लिए डिज़ाइन की गई है। स्टैंड-अप इंडिया और मुद्रा योजना दोनों ही उद्यमियों को वित्तीय सहायता प्रदान करती हैं, लेकिन स्टैंड-अप इंडिया विशेष रूप से हाशिए के समूहों पर केंद्रित है।
स्टैंड-अप इंडिया के तहत, लाभार्थियों को बैंक ऋण के अलावा अन्य सहायता भी प्रदान की जाती है, जैसे कि मार्गदर्शन और समर्थन।
पीएम स्वनिधि योजना से तुलना
पीएम स्वनिधि योजना का उद्देश्य स्ट्रीट वेंडर्स को वित्तीय सहायता प्रदान करना है ताकि वे अपने व्यवसाय को पुनः शुरू कर सकें। यह योजना विशेष रूप से कोविड-19 महामारी के दौरान प्रभावित हुए स्ट्रीट वेंडर्स के लिए शुरू की गई थी।
पीएम स्वनिधि योजना और मुद्रा योजना दोनों ही छोटे उद्यमियों को लोन प्रदान करती हैं, लेकिन पीएम स्वनिधि योजना विशेष रूप से स्ट्रीट वेंडर्स के लिए है, जबकि मुद्रा योजना का दायरा अधिक व्यापक है।
मुद्रा योजना में चुनौतियां और समाधान
मुद्रा योजना के तहत लोन वितरण एक बड़ी सफलता है, लेकिन इसमें कई चुनौतियां भी शामिल हैं जिनका समाधान निकालना आवश्यक है। इस योजना ने छोटे उद्यमियों को वित्तीय सहायता प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, लेकिन इसके क्रियान्वयन में कई बाधाएं भी आई हैं।
लोन वितरण में चुनौतियां
मुद्रा योजना के तहत लोन वितरण में कई चुनौतियां सामने आती हैं। इनमें से एक प्रमुख चुनौती है पात्र लाभार्थियों की पहचान। कई बार, अपात्र व्यक्तियों को लोन मिल जाता है, जबकि पात्र व्यक्तियों को इससे वंचित रहना पड़ता है। इसके अलावा, दस्तावेज़ सत्यापन की प्रक्रिया भी एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि कई आवेदक आवश्यक दस्तावेज़ प्रदान करने में असमर्थ होते हैं।
एक अन्य महत्वपूर्ण चुनौती है लोन की अदायगी। कई लाभार्थी लोन की किस्तें समय पर नहीं चुकाते, जिससे एनपीए (गैर-निष्पादित संपत्ति) में वृद्धि होती है।
एनपीए (गैर-निष्पादित संपत्ति) की समस्या और समाधान
मुद्रा योजना के तहत एनपीए एक बड़ी समस्या है। इसका मुख्य कारण है लोन की अदायगी में चूक। कई लाभार्थी व्यवसाय में असफल होने या अन्य कारणों से लोन वापस नहीं कर पाते। इस समस्या का समाधान करने के लिए, कड़ी निगरानी और पुनर्भुगतान की सुविधाएं प्रदान की जानी चाहिए।
| समस्या | समाधान |
| पात्र लाभार्थियों की पहचान | कड़ी पात्रता मानदंड और सत्यापन प्रक्रिया |
| दस्तावेज़ सत्यापन | डिजिटल दस्तावेज़ सत्यापन प्रणाली |
| लोन की अदायगी | निगरानी और पुनर्भुगतान सुविधाएं |
इन समाधानों को लागू करके, मुद्रा योजना की चुनौतियों का सामना किया जा सकता है और इसके लाभ को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के हालिया अपडेट
कोविड-19 महामारी के दौरान, मुद्रा योजना ने विशेष प्रावधानों के साथ उद्यमियों का समर्थन किया। इस योजना के तहत कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं जो छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए फायदेमंद साबित हो रहे हैं।
कोविड-19 के दौरान विशेष प्रावधान
कोविड-19 महामारी के दौरान, सरकार ने मुद्रा योजना के तहत कई विशेष प्रावधान किए। इनमें लोन की आसान उपलब्धता और चुकौती की आसान शर्तें शामिल थीं। इसका उद्देश्य उद्यमियों को आर्थिक चुनौतियों का सामना करने में मदद करना था।
नोट: आवेदन प्रक्रिया और अन्य जानकारी के लिए कृपया सरकारी विज्ञापन और बैंक के संबंधित दस्तावेजों को अध्ययन करें।
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Ramnavmi 2025: मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम की कथा, महत्व और जीवन से जुड़ी प्रमुख घटनाएँ
भगवान् राम ने जीवन और परिवार में सम्बन्धो के बीच समन्यव स्थापित करते हुए यह बताया है कि निष्ठा, त्याग, बंधुत्व, शालीन स्नेहभाव,उदारता और वत्सलता जैसे जैसे भावों को किस प्रकार से कुशलता से पालन किया जा सकता है. उन्होंने हर सम्बन्धो में उच्च आदर्शों को स्थापित करते हुए किस प्रकार से अपने सभी कर्तव्यों का पालन किया जा सकता हैं इसकी व्यापक झलक भगवान् राम के चरित्र में पाई जा सकती है.
रामनवमी हर साल हिंदी के महीने के अनुसार चैत्र में पड़ता है. चैत्र नवरात्री जिसमे माता दुर्गा के नौ रूपों की पूजा होती है, उसी दौरान नवमी को भगवन राम के जन्म को रामनवमी के रूप में मनाया जाता है.
नवरात्र का जश्न मनाने के लिए भक्तगण माता दुर्गा के विभिन्न रूपों का पूजन और अनुष्ठान करते हैं तथा नवमी जिस दिन हम माँ सिद्धिदात्री पूजा करते हैं जो रामनवमी के दिन मनाई जाती है.
भगवान श्रीराम: जीवन परिचय
मर्यादा पुरुषोतम भगवान श्रीराम के बारे मे कहा जाता है कि उनका जन्म त्रेतायुग में अयोध्या के राजा दशरथ और माता कौशल्या के घर मे हुआ था। वे विष्णु के सातवें अवतार माने जाते हैं जिनका पूरा जीवन सत्य, धर्म और मर्यादा की मिसाल और अनुकरणीय है। अयोध्या में जन्मे राम बचपन से ही शौर्य और पराक्रम के प्रतीक थे जिन्होंने माता कैकेयी के वरदान के कारण 14 वर्षों का वनवास मिला, जिसे उन्होंने धर्म और धैर्य के साथ स्वीकार किया। उन्होंने अपनी प्रजा और परिवार के प्रति अपने कर्तव्यों को सर्वोच्च स्थान दिया और अधर्म के खिलाफ संघर्ष कर समाज में नैतिकता और सदाचार की स्थापना की।
रामनवमी का त्योहार हिंदू धर्म में बहुत महत्व रखता है। रामायण जो हिंदू धर्म का धार्मिक महाकाव्य है जिसके अनुसार त्रेता युग में राजा दशरथ नामक एक सम्राट थे, जो भगवान् राम के पिता थे. हिन्दू धर्म के अनुसार यह मान्यता है कि भगवान विष्णु के सातवें अवतार का जन्म अयोध्या में राजा दशरथ और रानी कौशल्या के घर त्रेता युग में हुआ था।
यह मर्यादा पुरुषोत्तम भगवन राम ही थे जिन्होंने राक्षस राजा रावण को परास्त किया, जिसने उसकी पत्नी सीता का अपहरण किया था।
राम नवमी का महत्व:
राम नवमी का त्यौहार वास्तव में पृथ्वी पर दैवीय शक्ति के आगमन का प्रतीक है क्योंकि हिन्दू धर्म के अनुसार यह मान्यता है कि भगवान विष्णु के सातवें अवतार का जन्म अयोध्या में राजा दशरथ और रानी कौशल्या के घर बड़े पुत्र के रूप में जन्म लिया था।
रामनवमी क्योंकि भगवान राम का जन्म दिन है इसलिये भक्तगन इस दिन को खास त्यौहार के रूप में मनाते हैं. वास्तव में राम नवमी का उत्सव अच्छाई और बुराई के बीच संघर्ष को दर्शाता है।
ऐसी मान्यता है कि सूर्य को भगवान राम का पूर्वज माना जाता है जो सूर्य शक्ति का प्रतीक है. इसलिए रामनवमी के दिन लोग भगवान् राम के साथ ही सूर्य भगवान् की भी उपासना करते हैं. भक्तगण भगवन राम के साथ ही प्रभु हनुमान की पूजा करते हैं साथ ही राम के भक्त भक्ति गीत गाकर, धार्मिक पुस्तकों के पाठ सुनकर और वैदिक भजनों का जाप करके दिन मनाते हैं।
भगवान् राम: जीवन से जुड़ी प्रमुख घटनाएँ
बाल्यकाल – अयोध्या में जन्मे राम बचपन से ही शौर्य और पराक्रम के प्रतीक थे। गुरु वशिष्ठ से उन्होंने शिक्षा प्राप्त की।
सीता स्वयंवर – जनकपुर में धनुष यज्ञ के दौरान भगवान शिव का धनुष तोड़कर राम ने सीता जी का वरण किया।
वनवास – माता कैकेयी के वरदान के कारण राम को 14 वर्षों का वनवास मिला, जिसे उन्होंने धर्म और धैर्य के साथ स्वीकार किया।
लंका विजय – रावण द्वारा सीता हरण के पश्चात श्रीराम ने वानर सेना के साथ मिलकर रावण का वध किया और अधर्म पर धर्म की विजय स्थापित की।
रामराज्य – अयोध्या लौटकर श्रीराम ने एक आदर्श शासन स्थापित किया, जिसे ‘रामराज्य’ के नाम से जाना जाता है।
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अस्वीकरण: कृपया ध्यान दें कि लेख में उल्लिखित टिप्स/सुझाव केवल सामान्य जानकारी है जो विभिन्न सामाजिक और धार्मिक आस्था पर आधारित हैं.ताकि आपको उस मुद्दे के बारे में अपडेट रखा जा सके जो कि आम लोगों से अपेक्षित है. आपसे निवेदन है कि कृपया इन सुझावो को पेशेवर सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए तथा अगर आपके पास इन विषयों से सम्बंधित कोई विशिष्ट प्रश्न हैं तो हमेशा सम्बंधित एक्सपर्ट से अवश्य परामर्श करें।
बोंगोसागर 2025: भारत-बांग्लादेश नौसेना का संयुक्त अभ्यास, जानें खास बातें
भारत-बांग्लादेश नौसैन्य अभ्यास बोंगोसागर 2025 और एक समन्वित गश्त का आयोजन इस सप्ताह बंगाल की खाड़ी में किया गया। इस अभ्यास में भारतीय नौसेना की ओर से आईएनएस रणवीर और बांग्लादेश की नौसेना की तरफ से बीएनएस अबू उबैदा ने भाग लिया।
इस अभ्यास से दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच आपसी सहभागिता व युद्धक क्षमता बढ़ी है और साझा समुद्री सुरक्षा चुनौतियों के लिए सहयोगात्मक प्रतिक्रिया में आवश्यक प्रगति हुई है।
इस अभ्यास की प्रमुख गतिविधियों में सतह पर गोलीबारी, सामरिक युद्धाभ्यास, प्रक्रियागत पुनःपूर्ति कार्रवाई, विजिट-बोर्ड-सर्च-सीजर (वीबीएसएस) क्रॉस बोर्डिंग, संचार अभ्यास, ऑप्स टीम और जूनियर अधिकारियों के लिए व्यावसायिक विषयों तथा स्टीम पास्ट पर प्रश्नोत्तरी सहित कई महत्वपूर्ण ऑपरेशन शामिल थे।
इस अभ्यास ने दोनों देशों की नौसेनाओं को निर्बाध समुद्री संचालन हेतु सामरिक योजना, समन्वय और सूचना साझाकरण में घनिष्ठ संबंध विकसित करने का अवसर प्रदान किया। इस अभ्यास से दोनों नौसेनाओं के बीच समन्वय एवं आत्मविश्वास का विस्तार हुआ है, जिससे साझा नौसैन्य संचालन करने व समुद्र में उभरते खतरों के खिलाफ तेजी से और प्रभावी ढंग से सामना करने की क्षमता में सुधार हुआ है।
दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच नौसैन्य संचालन में बढ़ा हुआ तालमेल, वास्तव में इस क्षेत्र के लिए सुरक्षा और स्थिरता के प्रति वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों का मुकाबला करने की साझा प्रतिबद्धता का प्रमाण है, जो भारत की समुद्र में सभी की सुरक्षा एवं विकास (सागर) पहल को बढ़ावा देता है।
INIOCHOS 25: भारतीय वायु सेना का अभ्यास का आयोजन ग्रीस मे होगा-Facts in Brief
भारतीय वायु सेना (आईएएफ) हेलेनिक वायु सेना द्वारा ग्रीस के एंड्राविडा एयर बेस मे आयोजित होने वाले प्रतिष्ठित बहुराष्ट्रीय वायु अभ्यास इनीयोकॉस-25 मे हिस्सा लेगी। यह अभ्यास 31 मार्च 2025 से 11 अप्रैल 2025 तक ग्रीस के एंड्राविडा एयर बेस पर होगा। भारतीय वायुसेना के दल में एसयू-30 एमकेआई लड़ाकू विमानों के साथ-साथ लड़ाकू क्षमता वाले आईएल-78 और सी-17 विमान शामिल होंगे।
मुख्य उदेश्य
इनीयोकॉस हेलेनिक वायु सेना द्वारा आयोजित एक द्विवार्षिक बहुराष्ट्रीय वायु अभ्यास है। यह वायु सेनाओं के लिए अपने कौशल को निखारने, सामरिक ज्ञान का आदान-प्रदान करने और सैन्य संबंधों को मजबूत करने के लिए एक मंच के रूप में कार्य करता है। एंड्राविडा से संचालित सभी ऑपरेशनों से भारतीय वायुसेना की भागीदारी न केवल इसकी परिचालन क्षमताओं को मजबूत करेगी अपितु भाग लेने वाले देशों के बीच आपसी सीखने और बेहतर समन्वय में भी योगदान देगी।
इस अभ्यास में वास्तविक युद्ध परिदृश्यों के अन्तर्गत पंद्रह देशों की कई वायु और सतही इकाइयां शामिल होंगी। इसे आधुनिक समय की हवाई युद्ध चुनौतियों का अनुकरण करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
सहयोग, तालमेल और अंतर-संचालन की रणनीति का अभ्यास
भारतीय वायुसेना को अभ्यास इनीयोकॉस 25 में भाग लेने की उम्मीद है। यह भाग लेने वाली वायु सेनाओं के बीच अंतर्राष्ट्रीय सहयोग, तालमेल और अंतर-संचालन को बढ़ाने का एक मंच है। यह अभ्यास संयुक्त वायु संचालन की योजना बनाने और उसे क्रियान्वित करने, जटिल वायु युद्ध परिदृश्यों में रणनीति को परिष्कृत करने और परिचालन संबंधी सर्वोत्तम प्रणालियों में अंतर्दृष्टि प्राप्त करने का अवसर प्रदान करेगा। एंड्राविडा से संचालित सभी ऑपरेशनों से भारतीय वायुसेना की भागीदारी न केवल इसकी परिचालन क्षमताओं को मजबूत करेगी अपितु भाग लेने वाले देशों के बीच आपसी सीखने और बेहतर समन्वय में भी योगदान देगी।
इनीयोकॉस-25 में भारतीय वायुसेना की भागीदारी वैश्विक रक्षा सहयोग और परिचालन उत्कृष्टता के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। यह अभ्यास भारत की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेगा-और मित्र देशों के साथ संयुक्त अभियानों में इसकी क्षमताओं को बढ़ाएगा।









