Republic Day Parade : जब काशी विश्वनाथ धाम पर आधारित उत्तर प्रदेश की झांकी को किया गया सर्वश्रेष्ठ घोषित, जाने खासियत

Republic Day Parade 2022 : Uttar Pradesh Tableau Best in State Category
गणतंत्र दिवस परेड में भाग लेने वाले राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और अन्य संगठनों की झांकियो का मार्च हर साल होता है। गुणवत्ता और प्रस्तुति के आधार पर सर्वश्रेष्ठ झांकी को पुरस्कृत भी किया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि किस वर्ष में काशी विश्वनाथ धाम पर आधारित उत्तर प्रदेश की झांकी को सर्वश्रेष्ठ झांकी का अवॉर्ड दिया गया था। 
Republic Day Parade 2022 में सर्वश्रेष्ठ राज्य की झांकी के रूप में उत्तर प्रदेश का चयन, लोकप्रिय पसंद की श्रेणी में महाराष्ट्र की जीत घोषित की गई है. गणतंत्र दिवस परेड 2022 की सर्वश्रेष्ठ झांकी और सर्वश्रेष्ठ मार्चिंग टुकड़ियों के परिणाम घोषित किए गए हैं। 

 26 जनवरी, 2022 को गणतंत्र दिवस परेड में भाग लेने वाले 12 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में उत्तर प्रदेश की झांकी को सर्वश्रेष्ठ झांकी के रूप में चुना गया है। उत्तर प्रदेश की झांकी 'एक जिला एक उत्पाद और काशी विश्वनाथ धाम' विषय पर आधारित थी।

सेना के तीनों अंगों, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल ( सीएपीएफ)/अन्य सहायक बलों की मार्चिंग टुकड़ियों का प्रदर्शन, विभिन्न राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों (यूटी) केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों से झांकियों के प्रदर्शन का आकलन करने के लिए जजों के तीन पैनलों की नियुक्ति की गई थी।

दूसरा स्थान कर्नाटक को 'पारंपरिक हस्तकला का पालना' पर आधारित झांकी के लिए मिला। 'मेघालय राज्य के 50 साल पूरे और महिलाओं के नेतृत्व वाली सहकारी समितियों और स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को श्रद्धांजलि' पर झांकी निकालने के लिए मेघालय को तीसरा स्थान मिला।


भारत का अंटार्कटिका साइंटिफिक एक्सपीडिशन: जानें दक्षिण गंगोत्री, मैत्री और भारती स्टेशन के बारे में

India launches the 41st Scientific Expedition to Antarctica
अंटार्कटिक अर्थात दक्षिणी श्वेत महाद्वीप ने हमेशा से वैज्ञानिकों को आकर्षित किया है। भारतीय वैज्ञानिकों ने भी अपने पास उपलब्ध संसाधनों के सहारे अंटार्कटिक पर अपने दल को खोज के लिए भेजा है। दक्षिणी श्वेत महाद्वीप 1981 में शुरू हुए भारतीय अंटार्कटिक कार्यक्रम ने 40 वैज्ञानिक एक्सपीडिशन पूरे कर लिए हैं, और अंटार्कटिका में तीन स्थायी अनुसंधान बेस स्टेशन बनाए हैं जिनका नाम दक्षिण गंगोत्री (1983), मैत्री (1988) और भारती (2012) है। 

भारत ने दक्षिणी श्वेत महाद्वीप में अपने दल के पहले बैच के आगमन के साथ अंटार्कटिका के लिए 41वें साइंटिफिक एक्सपीडिशन की सफलतापूर्वक शुरुआत किया। 23 वैज्ञानिकों और सहायक कर्मचारियों का पहला जत्था भारतीय अंटार्कटिक स्टेशन मैत्री पहुंचा। चार अन्य बैच जनवरी 2022 के मध्य तक ड्रोमलान फैसिलिटी और चार्टर्ड आइस-क्लास पोत एमवी वैसिलिय-गोलोवनिन का उपयोग करके हवाई मार्ग से अंटार्कटिका में उतरेंगे।

1981 में शुरू हुए भारतीय अंटार्कटिक कार्यक्रम ने 40 वैज्ञानिक एक्सपीडिशन पूरे कर लिए हैं, और अंटार्कटिका में तीन स्थायी अनुसंधान बेस स्टेशन बनाए हैं जिनका नाम दक्षिण गंगोत्री (1983), मैत्री (1988) और भारती (2012) है। वर्तमान में मैत्री और भारती पूरी तरह से चालू हैं। गोवा में स्थित नेशनल सेंटर फॉर पोलर एंड ओशन रिसर्च (एनसीपीओआर), पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त संस्थान है जो पूरे भारतीय अंटार्कटिक कार्यक्रम का प्रबंधन करता है।

इस 41वें एक्सपीडिशन के दो प्रमुख कार्यक्रम हैं। पहले कार्यक्रम में भारती स्टेशन पर अमेरी आइस शेल्फ का भूवैज्ञानिक अन्वेषण शामिल है। इससे अतीत में भारत और अंटार्कटिका के बीच की कड़ी का पता लगाने में मदद मिलेगी। दूसरे कार्यक्रम में टोही सर्वेक्षण और मैत्री के पास 500 मीटर आइस कोर की ड्रिलिंग के लिए प्रारंभिक कार्य शामिल है। यह पिछले 10,000 वर्षों से एक ही जलवायु संग्रह से अंटार्कटिक जलवायु, पश्चिमी हवाओं, समुद्री-बर्फ और ग्रीनहाउस गैसों की समझ में सुधार करने में मदद करेगा। आइस कोर ड्रिलिंग ब्रिटिश अंटार्कटिक सर्वे और नॉर्वेजियन पोलर इंस्टीट्यूट के सहयोग से की जाएगी। वैज्ञानिक कार्यक्रमों को पूरा करने के अलावा, यह मैत्री और भारती में जीवन समर्थन प्रणालियों के संचालन और रखरखाव के लिए भोजन, ईंधन, प्रावधानों और पुर्जों की वार्षिक आपूर्ति की भरपाई करेगा।

1981 में शुरू हुए भारतीय अंटार्कटिक कार्यक्रम ने 40 वैज्ञानिक एक्सपीडिशन पूरे कर लिए हैं, और अंटार्कटिका में तीन स्थायी अनुसंधान बेस स्टेशन बनाए हैं जिनका नाम दक्षिण गंगोत्री (1983), मैत्री (1988) और भारती (2012) है। वर्तमान में मैत्री और भारती पूरी तरह से चालू हैं। गोवा में स्थित नेशनल सेंटर फॉर पोलर एंड ओशन रिसर्च (एनसीपीओआर), पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त संस्थान है जो पूरे भारतीय अंटार्कटिक कार्यक्रम का प्रबंधन करता है।

भारत अंटार्कटिका महाद्वीप को कोविड-19 महामारी से मुक्त और सुरक्षा के उच्चतम मानकों को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है इसलिए भारतीय दल अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली में एक सख्त चिकित्सा परीक्षा के बाद अंटार्कटिका पहुंच गया है। इसके अलावा इस दल ने पर्वतारोहण और स्कीइंग संस्थान, आईटीबीपी औली, उत्तराखंड में बर्फ के अनुकूलन और अस्तित्व के लिए प्रशिक्षण प्राप्त किया है और दक्षिण अफ्रीका के केप टाउन में 14 दिनों के क्वारेनटीन सहित एक कड़े स्वच्छता प्रोटोकॉल का पालन किया है।

सर्दियों में 48 सदस्यों की टीम को छोड़कर, इस दल की मार्च के आखिर में या अप्रैल की शुरुआत में केप टाउन लौटने की उम्मीद है। यह पिछले 40वें अभियान की ओवर विंटर टीम को भी वापस लाएगा। 41वें अभियान का नेतृत्व डॉ. शैलेंद्र सैनी, वैज्ञानिक राष्ट्रीय ध्रुवीय और महासागर अनुसंधान केंद्र (वॉयेज लीडर), श्री हुइड्रोम नागेश्वर सिंह, मेट्रोलॉजिस्ट, इंडिया मेट्रोलॉजिकल डिपार्टमेंट (लीडर, मैत्री स्टेशन) और श्री अनूप कलायिल सोमन, वैज्ञानिक भारतीय भू-चुंबकत्व संस्थान (नेता, भारती स्टेशन) द्वारा किया जा रहा है।


गणतंत्र दिवस परेड परेड: 75वें वर्ष में भारत ने दुनिया को दिखाया विशेष प्रदर्शन

Republic Day 2022: Whats is Special for 75th Year of Independence
गणतंत्र दिवस परेड :  इस बार गणतंत्र दिवस स्वतंत्रता के 75वें वर्ष में संपन्न हो रहा है और इसे पूरे देश में 'आजादी का अमृत महोत्सव' के रूप में मनाया गया

 ग्रैंड फिनाले और परेड का सबसे उत्सुकता से प्रतीक्षित हिस्सा, फ्लाई पास्ट, पहली बार भारतीय वायु सेना के 75 विमानों / हेलीकॉप्टरों को 'आजादी का अमृत महोत्सव' के हिस्से के रूप में प्रदर्शित करेगा। राफेल, सुखोई, जगुआर, एमआई-17, सारंग, अपाचे और डकोटा जैसे पुराने और वर्तमान आधुनिक विमान/हेलीकॉप्टर राहत, मेघना, एकलव्य, त्रिशूल, तिरंगा, विजय और अमृत सहित विभिन्न संरचनाओं को प्रदर्शित करेंगे।

राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद 26 जनवरी, 2022 को 73वां गणतंत्र दिवस समारोह के आयोजन में राष्ट्र का नेतृत्व करेंगे। इस वर्ष के समारोह विशेष हैं, क्योंकि इस बार गणतंत्र दिवस स्वतंत्रता के 75वें वर्ष में संपन्न हो रहा है और इसे पूरे देश में 'आजादी का अमृत महोत्सव' के रूप में मनाया जा रहा है। इस अवसर को यादगार बनाने के लिए, रक्षा मंत्रालय ने 26 जनवरी को राजपथ पर मुख्य परेड और 29 जनवरी को विजय चौक पर 'बीटिंग द रिट्रीट' समारोह के दौरान नए कार्यक्रमों की एक श्रृंखला की अवधारणा तैयार की है

रक्षा मंत्रालय  द्वारा जारी सुचना के अनुसार मुख्य परेड के दौरान पहली बार आयोजित होने वाले कई कार्यक्रमों में राष्ट्रीय कैडेट कोर द्वारा 'शहीदों को शत शत नमन' कार्यक्रम का शुभारंभ, भारतीय वायु सेना के 75 विमानों/हेलीकॉप्टरों द्वारा भव्य फ्लाईपास्ट, राष्ट्रव्यापी वंदे भारतम नृत्य प्रतियोगिता के माध्यम से चुने गए 480 नर्तकियों द्वारा सांस्कृतिक प्रदर्शन, 'कला कुंभ' कार्यक्रम के दौरान तैयार किए गए प्रत्येक 75 मीटर के दस स्क्रॉल का प्रदर्शन और दर्शकों की बेहतर सुविधा के लिए 10 बड़ी एलईडी स्क्रीन की स्थापना करना शामिल है। प्रोजेक्शन मैपिंग के साथ-साथ 'बीटिंग द रिट्रीट' समारोह के लिए अपने देश में विकसित 1,000 ड्रोन द्वारा एक ड्रोन शो की योजना बनाई गई है।

अतीत से वर्तमान तक: सैनिकों की वर्दी और हथियार क्रमिक विकास को प्रदर्शित करेंगे

मार्चिंग दस्तों का मूल विषय पिछले 75 वर्षों में भारतीय सेना की वर्दी और कार्मिकों के हथियारों के क्रमिक विकास का प्रदर्शन होगा। राजपूत रेजीमेंट की टुकड़ी 1947 की भारतीय सेना की वर्दी पहने हुए होगी और उसके पास .303 राइफल होगी। असम रेजिमेंट 1962 की अवधि के दौरान पहनी गई वर्दी में होगी और उनके पास .303 राइफलें होंगी। जम्मू-कश्मीर लाइट रेजिमेंट 1971 के दौरान पहनी जाने वाली वर्दी में होगी और 7.62 मिमी सेल्फ लोडिंग राइफल के साथ होगी। सिख लाइट रेजिमेंट और सेना आयुध कोर की टुकड़ी वर्तमान में 5.56 एमएम इंसास राइफल के साथ वर्दी में होगी। पैराशूट रेजिमेंट की टुकड़ी भारतीय सेना की नई कॉम्बैट यूनिफॉर्म पहनेगी, जिसका अनावरण 15 जनवरी, 2022 को किया गया और इसमें 5.56 एमएम x 45 एमएम टैवोर राइफल होगी। (PIB)

Republic Day 2026 जानें गणतंत्र दिवस परेड में आने वाले प्रमुख अतिथियों की लिस्ट-1950 से अबतक

26 जनवरी 2024: जानें  गणतंत्र दिवस परेड  में आने वाले प्रमुख अतिथियों की लिस्ट(1950-2024)

भारत सरकार हर साल एक विदेशी नेता को गणतंत्र दिवस परेड के लिए आमंत्रित करती है। भारत एक स्वतंत्र, संप्रभु और लोकतांत्रिक देश है जिसने 26 जनवरी 1950 को अपना संविधान लागू किया था. भारत के एक गणराज्य बनने की खुशी में हर साल 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप मनाया जाता है.यह आमंत्रण भारत और उस देश के बीच संबंधों को मजबूत करने के लिए किया जाता है।  भारत में गणतंत्र दिवस समारोह के लिए 1950 से प्रत्येक वर्ष एक विदेशी गणमान्य व्यक्ति को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जाता है। 

पिछले वर्ष, 26 जनवरी 2025 को, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबिआंतो मुख्य अतिथि होंगे।  भारत और इंडोनेशिया के बीच मधुर और मैत्रीपूर्ण संबंध सदियों से कायम हैं। इंडोनेशिया एक व्यापक रणनीतिक साझेदार के रूप में, भारत की ऐक्ट ईस्ट नीति और भारत-प्रशांत इलाके के भारत के विज़न का महत्वपूर्ण स्तंभ है।उल्लेखनीय है कि सुबियांतो भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में हिस्सा लेने वाले चौथे इंडोनेशियाई राष्ट्रपति होंगे। गणतंत्र दिवस के अवसर पर अतिथियों को बुलाने की परंपरा का आरंभ 1950 मे हुआ था और तब  इंडोनेशिया के पहले राष्ट्रपति सुकर्णो 1950 में भारत के पहले गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि थे। 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निमंत्रण पर, इंडोनेशिया गणराज्य के राष्ट्रपति महामहिम प्रबोवो सुबियांटो 25-26 जनवरी 2025 को भारत के राजकीय दौरे पर आएंगे। राष्ट्रपति प्रबोवो भारत के 76वें गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि होंगे। उलेखनिय है कि अक्टूबर 2024 में राष्ट्रपति का पदभार ग्रहण करने के बाद, राष्ट्रपति प्रबोवो का यह पहला भारत दौरा होगा।

इसके पहले 75वें गणतंत्र दिवस के मौके पर  फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन मेहमान रहे थे  यह छठी बार था जब कोई फ्रांसीसी नेता गणतंत्र दिवस समारोह में मुथ्य अतिथि रहे थे। इमैनुएल मैक्रों छठे फ्रांसीसी नेता रहे  जो 2024 गणतंत्र दिवस परेड में मुख्य अतिथि रहे . फ्रांस के पूर्व प्रधानमंत्री जैक्स शिराक ने 1976 और 1998 में दो बार इस कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई.


वर्ष-    अतिथि का नाम-देश

  • 1950-राष्ट्रपति सुकर्णो-इंडोनेशिया
  • 1951-राजा त्रिभुवन बीर बिक्रम शाह-नेपाल
  • 1952-कोई निमंत्रण नहीं
  • 1953-कोई निमंत्रण नहीं
  • 1954-राजा जिग्मे दोरजी वांगचुक-भूटान
  • 1955-गवर्नर-जनरल मलिक गुलाम मुहम्मद-पाकिस्तान
  • 1956-राजकोष के चांसलर आरए बटलर
  • मुख्य न्यायाधीश कोटारो तनाका-यूनाइटेड किंगडमजापान
  • 1957-रक्षा मंत्री जॉर्जी ज़ुकोव-सोवियत संघ
  • 1958-मार्शल ये जियानिंग-चीन
  • 1959-एडिनबर्ग के ड्यूक प्रिंस फिलिप-यूनाइटेड किंगडम
  • 1960-राष्ट्रपति क्लिमेंट वोरोशिलो-सोवियत संघ
  • 1961-क्वीन एलिजाबेथ II-यूनाइटेड किंगडम
  • 1962-प्रधान मंत्री विगो काम्पमैन-डेनमार्क
  • 1963-राजा नोरोडोम सिहानोक-कंबोडिया
  • 1964-चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ लॉर्ड लुईस माउंटबेटन-यूनाइटेड किंगडम
  • 1965-खाद्य एवं कृषि मंत्री राणा अब्दुल हामिद-पाकिस्तान
  • 1966-कोई निमंत्रण नहीं-
  • 1967-राजा मोहम्मद ज़हीर शाह-अफ़ग़ानिस्तान
  • 1968-प्रधान मंत्री एलेक्सी कोसिगिन-सोवियत संघ
  • राष्ट्रपति जोसिप ब्रोज़ टीटो एसएफआर यूगोस्लाविया
  • 1969-बुल्गारिया के प्रधान मंत्री टोडर ज़िवकोव बुल्गारिया
  • 1970-बेल्जियम के राजा बाउडौइन-बेल्जियम
  • 1971-राष्ट्रपति जूलियस न्येरेरे तंजानिया
  • 1972-प्रधान मंत्री शिवसागर रामगुलाम-मॉरीशस
  • 1973-राष्ट्रपति मोबुतु सेसे सेको-ज़ैरे
  • 1974-राष्ट्रपति जोसिप ब्रोज़ टीटो-एसएफआर यूगोस्लाविया
  • प्रधान मंत्री सिरिमावो रतवाटे डायस भंडारनायके-श्रीलंका
  • 1975-राष्ट्रपति केनेथ कौंडा-जाम्बिया
  • 1976-प्रधान मंत्री जैक्स शिराक-फ्रांस
  • 1977-प्रथम सचिव एडवर्ड गिरेक-पोलैंड
  • 1978-राष्ट्रपति पैट्रिक हिलेरी-आयरलैंड
  • 1979-प्रधान मंत्री मैल्कम फ़्रेज़र-ऑस्ट्रेलिया
  • 1980-राष्ट्रपति वैलेरी गिस्कार्ड डी’एस्टाइंग-फ्रांस
  • 1981-राष्ट्रपति जोस लोपेज़ पोर्टिलो-मेक्सिको
  • 1982-राजा जुआन कार्लोस प्रथम-स्पेन
  • 1983-राष्ट्रपति शेहु शगारी-नाइजीरिया
  • 1984-राजा जिग्मे सिंग्ये वांगचुक-भूटान
  • 1985-राष्ट्रपति राउल अल्फोन्सिन-अर्जेंटीना
  • 1986-प्रधान मंत्री एंड्रियास पापंड्रेउ-यूनान
  • 1987-राष्ट्रपति एलन गार्सिया-पेरू
  • 1988-राष्ट्रपति जुनियस जयवर्धने-श्रीलंका
  • 1989-महासचिव गुयेन वान लिन्ह-वियतनाम
  • 1990-प्रधान मंत्री अनिरुद्ध जुगनुथ-मॉरीशस
  • 1991-राष्ट्रपति मौमून अब्दुल गयूम-मालदीव
  • 1992-राष्ट्रपति मारियो सोरेस-पुर्तगाल
  • 1993-प्रधान मंत्री जॉन मेजर-यूनाइटेड किंगडम
  • 1994-प्रधान मंत्री गोह चोक टोंग-सिंगापुर
  • 1995-राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला-दक्षिण अफ्रीका
  • 1996-राष्ट्रपति डॉ. फर्नांडो हेनरिक कार्डोसो-ब्राज़िल
  • 1997-प्रधान मंत्री बासदेव पांडे-त्रिनिदाद और टोबैगो
  • 1998-राष्ट्रपति जैक्स शिराक-फ्रांस
  • 1999-राजा बीरेंद्र बीर बिक्रम शाह देव-नेपाल
  • 2000-राष्ट्रपति ओलुसेगुन ओबासंजो-नाइजीरिया
  • 2001-राष्ट्रपति अब्देलअज़ीज़ बुउटफ्लिका-एलजीरिया
  • 2002-राष्ट्रपति कसाम उतीम-मॉरीशस
  • 2003-राष्ट्रपति मोहम्मद खातमी-ईरान
  • 2004-राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा-ब्राज़िल
  • 2005-राजा जिग्मे सिंग्ये वांगचुक-भूटान
  • 2006-किंग अब्दुल्ला बिन अब्दुलअज़ीज़ अल-सऊद[ सऊदी अरब
  • 2007-राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन-रूस
  • 2008-राष्ट्रपति निकोलस सरकोजी-फ्रांस
  • 2009-राष्ट्रपति नूरसुल्तान नज़रबायेव-कजाखस्तान
  • 2010-राष्ट्रपति ली म्युंग बाक-कोरियान गणतन्त्र
  • 2011-राष्ट्रपति सुसीलो बंबांग युधोयोनो-इंडोनेशिया
  • 2012-प्रधान मंत्री यिंगलक शिनावात्रा-थाईलैंड
  • 2013-भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक-भूटान
  • 2014-प्रधान मंत्री शिंजो आबे-जापान
  • 2015-राष्ट्रपति बराक ओबामा-संयुक्त राज्य अमेरिका
  • 2016-राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद-फ्रांस
  • 2017-क्राउन प्रिंस शेख मोहम्मद बिन जायद-संयुक्त अरब अमीरात
  • 2018-सभी दस आसियान देशों के प्रमुख
  • 2019-राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा-दक्षिण अफ्रीका
  • 2020-राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो-ब्राज़िल
  • 2021-प्रधान मंत्री बोरिस जॉनसन ( यात्रा रद्द)-यूनाइटेड किंगडम
  • 2022=
  • 2023-राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी-मिस्र
  • 2024-इमैनुएल मैक्रों -फ्रांस के राष्ट्रपति 

महात्मा गांधी पर सबसे दुर्लभ डाक टिकट संग्रह, जिन्हे आपने पहले कहीं नहीं देखा होगा

भारतीय इतिहास के सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों में से एक महात्मा गांधी 1915 में दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे, जो न केवल उनके जीवन के लिए बल्कि भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के लिए भी एक महत्वपूर्ण क्षण था। गांधी की वापसी उनकी सक्रियता में एक नए चरण की शुरुआत थी, जो अंततः 1947 में ब्रिटिश शासन से भारत की स्वतंत्रता का कारण बनी।

फिलेटली प्लैनेट को गांधी जी से संबंधित डाक टिकट प्रदर्शित करने पर गर्व है, जो एक साधारण जीवन जीने वाले और नैतिक उपदेशक थे, जिन्होंने अपने नेतृत्व के माध्यम से देश को एक नई दिशा दी।

अहिंसा और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का विश्व प्रशंसित दर्शन वर्तमान समय में अधिक प्रासंगिक है। चरखा, चरखा और खादी के प्रतीकों के माध्यम से, उन्होंने आत्मनिर्भरता और श्रम की गरिमा के संदेश पर जोर दिया। महात्मा गांधी ने स्वच्छता को तीन आयामों के रूप में देखा- स्वच्छ मन, स्वच्छ शरीर और स्वच्छ परिवेश। उनका जीवन सार्वजनिक स्वच्छता, व्यक्तिगत स्वच्छता और पर्यावरणीय स्वच्छता का प्रतीक है।

मोहनदास करमचंद गांधी, जिन्हें बापू के नाम से जाना जाता है और जिन्हें आमतौर पर ‘राष्ट्रपिता’ के नाम से जाना जाता है, धरती पर एक अद्वितीय व्यक्तित्व हैं, जो अपनी सादगी और बेहतरीन विचारों के लिए जाने जाते हैं।

अहिंसा और स्वतंत्रता के पर्यायवाची और कई लोगों के प्रिय महात्मा गांधी, फिलेटली प्लैनेट उन पर जारी किए गए दुर्लभ डाक टिकटों को प्रस्तुत करके उन्हें श्रद्धांजलि देता है।

भारत सरकार ने स्वच्छ भारत मिशन के लक्ष्यों को तेजी से हासिल करना शुरू कर दिया है, जो गांधीजी की जयंती पर उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि और सम्मान की अभिव्यक्ति होगी।

पृष्ठभूमि: दक्षिण अफ्रीका में गांधी

गांधी 1893 में एक युवा वकील के रूप में दक्षिण अफ्रीका गए थे। वहां अपने 21 वर्षों के दौरान, उन्होंने अपने राजनीतिक और नैतिक विचारों, विशेष रूप से सत्याग्रह या अहिंसक प्रतिरोध की अवधारणा को विकसित किया। नस्लीय भेदभाव के साथ उनके अनुभव और दक्षिण अफ्रीका में भारतीयों के अधिकारों के लिए लड़ने के उनके प्रयासों ने उनकी रणनीतियों और दर्शन को आकार दिया।

भारत वापसी

गाँधी 9 जनवरी, 1915 को 45 वर्ष की आयु में भारत लौटे। उनके आगमन का स्वागत काफ़ी उत्सुकता और उत्साह के साथ किया गया। दक्षिण अफ़्रीका में बिताए वर्षों ने उन्हें एक प्रसिद्ध व्यक्ति बना दिया था, और भारत में कई लोग यह देखने के लिए उत्सुक थे कि उनके तरीकों और विचारों को ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष में कैसे लागू किया जा सकता है।


उन्होंने कई प्रमुख गतिविधियों और आंदोलनों में भाग लिया, जो भारतीय राजनीति में उनकी भूमिका को परिभाषित करेंगे:

चंपारण और खेड़ा आंदोलन (1917-1918):

गाँधी ने चंपारण (बिहार) और खेड़ा (गुजरात) में किसानों की शिकायतों को दूर करने के लिए सफल अभियान चलाए, जिनका अंग्रेजों द्वारा शोषण किया जा रहा था।

ये आंदोलन महत्वपूर्ण थे क्योंकि वे भारत में सत्याग्रह के पहले प्रमुख अनुप्रयोगों में से थे।

असहयोग आंदोलन (1920-1922):

जलियांवाला बाग हत्याकांड और दमनकारी रौलेट अधिनियम के जवाब में, गांधी ने असहयोग आंदोलन शुरू किया, जिसमें भारतीयों से ब्रिटिश संस्थानों से हटने, विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार करने और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने का आग्रह किया गया।

इस आंदोलन ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में एक महत्वपूर्ण वृद्धि को चिह्नित किया और गांधी के तरीकों के लिए व्यापक समर्थन प्रदर्शित किया।

नमक मार्च (1930):

गांधी का दांडी तक 240 मील का नमक मार्च नमक पर ब्रिटिश एकाधिकार के खिलाफ एक सीधा अभियान था।

सविनय अवज्ञा के इस कृत्य ने अंतर्राष्ट्रीय ध्यान आकर्षित किया और स्वतंत्रता आंदोलन के नेता के रूप में गांधी की भूमिका को और मजबूत किया।

सविनय अवज्ञा आंदोलन:

यह आंदोलन, ब्रिटिश सरकार के कुछ कानूनों, मांगों और आदेशों का पालन करने से इनकार करने की विशेषता रखता है, स्वतंत्रता के संघर्ष में एक और महत्वपूर्ण चरण था। गांधी का अहिंसक प्रतिरोध पर जोर इन प्रयासों की आधारशिला बना रहा।

नजरिया जीने का: सेल्फ डिसिप्लिन के महत्व और इसे विकसित करने के टिप्स को जानें

Point Of View : सेल्फ डिसिप्लिन के महत्त्व को समझे, विकसित करने के टिप्स, महत्वपूर्ण कोट्स 
नज़रिया जीने का: आज की तेज़ रफ़्तार और भागदौड़ वाली दुनिया में जहां जीवन की जद्दोजहद में लोगों का अधिकांश समय बीतता है, यह जरूरी है कि हम  आत्म-अनुशासन के महत्व को समझें और खुद पर अनुशासन को लागू करें। आत्म-अनुशासन या स्व-अनुशासन ही वह शक्ति है जो हमें अपनेआप पर को नियंत्रित करने और गलतियों को चेक करने के लिए बाध्य करता है। स्व-अनुशासन हीं वह पद्धति और उपाय है जो हमें अपने सपनों को पूरा करने में सक्षम बनाती है.

आत्म-अनुशासन एक ऐसी व्यवस्था है जहां आप खुद के लिए नियम बनाते भी हैं, उसे इम्प्लमेन्ट भी करते हैं और आपको उसे मोनिटरिंग भी करना होता है। निश्चित हीं, यह आसान नहीं हैं लेकिन विश्वास करें, यह इतना मुश्किल भी नहीं है। वास्तव मे आत्म-अनुशासन हीं वह चीज है जो ऐसी दिनचर्या बनाता है जो समय और संसाधनों का कुशलतापूर्वक प्रबंधन करती है और आपकी व्यस्त जीवनशैली में आराम करने के लिए खाली समय और कुछ अच्छा करने के लिए आपको तैयार भी करती है। 

सेल्फ डिसिप्लिन लाइफ या स्व-अनुशासन एक शक्तिशाली कौशल है जो आपको अपने जीवन में न केवल महत्वपूर्ण लक्ष्य  हासिल करने आपको मदद करता है बल्कि यह आपके जीवनशैली को एक परफेक्ट लाइफस्टाइल में बदल देता है. सेल्फ डिसिप्लिन लाइफ या स्व-अनुशासन ठीक वैसे ही हैं जैसे हम खुद के लिए नियमों को बनाने वाले होते हैं और उसे पालन करने में खुद को मजबूर भी करते हैं. आप कह सकते हैं यह अपने आप में ठीक वैसे ही है जैसे आप नियम निर्माता भी हैं, पालन करने वाले भी हैं और उन्हें मॉनिटरिंग करने वाले भी खुद है. यह आपको सिखाती है कि अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए कैसे अपनी इच्छाओं को नियंत्रित करने और अपने सपनों को पूरा करने में सक्षम बनाता है. यदि आप स्व-अनुशासन विकसित करना चाहते हैं, तो भले हीं  शुरू में आपक्को कुछ परेशानी हो लेकिन यह असंभव भी नहीं है. आप इन टिप्स की मदद से इसे लागु कर सकते हैं.

सेल्फ डिसिप्लिन लाइफ या स्व-अनुशासन हमारे जीवन में इतना महत्वपूर्ण है जिसके माध्यम से हम बिना किसी अतिरिक्त मोटिवेशनल डोज़ लिए हम अपने जीवन की सार्थकता को साबित कर सकते हैं. सेल्फ डिसिप्लिन लाइफ या स्व-अनुशासन का महत्त्व हमारे जीवन में ठीक ऐसा ही है जैसे कि हमारे शरीर के लिए हवा की जरुरत होती है वैसे ही हमें इस अपने जीवन का अभिन्न अंग की तरह बनाकर अपने साथ रखना होगा. 

आत्म-अनुशासन जीवन का अभ्यास आपको वह करने की क्षमता प्रदान करता है जो आपके जीवन की सार्थकता और सम्पूर्णता को प्राप्त करने में सहायता करती है. क्योंकि आप जानते हैं कि आप अपने मन में किसी भी सपने को प्राप्त करना सीख सकते हैं ... इसलिए जीवन में आत्म अनुशासन के लिए जरुरी पांच स्तंभों को हमेशा याद रखें जो आपको जीवन के किसी भी लक्ष्य को प्राप्त करने और जीवन की सम्पूर्णता की और ले जाती है -स्वीकृति, इच्छाशक्ति, कठोर परिश्रम, मेहनती और दृढ़ता।

स्व-अनुशासन को  विकसित करने के टिप्स 

  • अपने लक्ष्यों को निर्धारित करें और उन्हें प्राप्त करने के लिए एक योजना बनाएं.
  • अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए दृढ़ संकल्प और समर्पण रखें.
  • अपने आप को नियमित रूप से प्रेरित करें और प्रोत्साहित करें.
  • अपने आप को छोटी-छोटी उपलब्धियों के लिए पुरस्कृत करें.
  • स्व-अनुशासन एक जीवन भर की यात्रा है, लेकिन यह एक यात्रा है जो आपको अपने जीवन में बहुत कुछ हासिल करने में मदद कर सकती है. इसलिए, आज ही स्व-अनुशासन विकसित करना शुरू करें और अपने सपनों को पूरा करें.


सेल्फ डिसिप्लिन लाइफ या स्व-अनुशासन: महत्वपूर्ण कोट्स 
  • "सफलता का रहस्य स्व-अनुशासन है." - एलेन वार्क
  • "स्व-अनुशासन ही वह शक्ति है जो आपको अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में सक्षम बनाती है." - लाओ त्ज़ू
  • "स्व-अनुशासन ही वह कौशल है जो आपको अपनी इच्छाओं को नियंत्रित करने और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में सक्षम बनाता है." - ब्रूस ली
  • "स्व-अनुशासन ही वह शक्ति है जो आपको अपने जीवन को नियंत्रित करने और अपने सपनों को पूरा करने में सक्षम बनाती है." - नेपोलियन हिल
  • "स्व-अनुशासन ही वह नींव है जिस पर आप अपने जीवन का निर्माण कर सकते हैं." - विलियम जेम्स

आत्म-अनुशासन आपके जीवन के हर प्रयास में बनने वाला अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण कारक है..जो न केवल आपके जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण है..बल्कि यह भ्रम की स्थिति में भी आपके जीवन को हमेशा सही रास्ते पर लाता है और यह हमारे जीवन में क्या करना है और क्या नहीं करना है के बीच की रेखा का सीमांकन करता है।

 दैनिक जीवन में आत्म-अनुशासन वह फैक्टर  है जो आपको अपने आवेगों, भावनाओं, प्रतिक्रियाओं और व्यवहारों को नियंत्रित करने के लिए बाध्य  करता है। अपने जीवन में आत्म-अनुशासन के महत्व को नियंत्रित करें और समझें. यह आपको अल्पकालिक संतुष्टि के बदले दीर्घकालिक संतुष्टि और लाभ के बारे में सोचने के लिए परिपूर्ण बनाएगा।




सोमनाथ मंदिर का इतिहास: आस्था, संघर्ष और पुनर्निर्माण की अमर गाथा

 


सोमनाथ मंदिर भारत के गुजरात राज्य के गिर सोमनाथ जिले में अरब सागर के तट पर स्थित है जिसे भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम माना जाता है। सोमनाथ मंदिर की विशालता और महत्व इसी से समझा जा सकता है कि इस मंदिर का उल्लेख ऋग्वेद, स्कंद पुराण, शिव पुराण और महाभारत में मिलता है। सोमनाथ मंदिर सिर्फ एक  धार्मिक स्थल है, बल्कि यह भारत की अटूट सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक भी है। 

 ऐतिहासिक दृष्टिकोण से देखी जाए तो अपनी खूबियों और विशालता के कारण यह मंदिर कई बार विदेशी आक्रमणों में नष्ट किया गया और आक्रांताओं ने इसे नष्ट करने में कोई कसर नहीं छोड़ा। 1026 ई. में महमूद ग़ज़नवी ने इस मंदिर पर आक्रमण कर इसे ध्वस्त किया। इसके बाद यह मंदिर कुल लगभग 17 बार तोड़ा और फिर से बनाया गया। लेकिन हर बार भारतीय श्रद्धालुओं ने इसे पुनः खड़ा किया।

पौराणिक मान्यता के अनुसार यह कहा जाता है कि चंद्रदेव (सोम) ने अपने क्षय रोग से मुक्ति पाने के लिए भगवान शिव की आराधना की थी। शिव की कृपा से चंद्रदेव रोगमुक्त हुए और कृतज्ञता स्वरूप इस मंदिर की स्थापना की। 

सोमनाथ मंदिर से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य (Important Facts)

  • स्थान – गिर सोमनाथ, गुजरात
  • देवता – भगवान शिव (सोमनाथ ज्योतिर्लिंग)
  • ज्योतिर्लिंग संख्या – पहला
  • स्थिति – अरब सागर के तट पर
  • कितनी बार टूटा – लगभग 17 बार
  • वास्तुकला शैली – चालुक्य (सोलंकी) शैली
  • बाण स्तंभ – मंदिर के सामने स्तंभ, जिस दिशा में कोई भूमि नहीं


नजरिया जीने का : मेरा जीवन मेरा सबसे बड़ा शिक्षक-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

Point of View: मेरा जीवन मेरा सबसे बड़ा शिक्षक-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

नजरिया जीने का : प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी का जीवन चुनौतियों से भरा रहा है और निसंदेह उन्होंने काफी संघर्षपूर्ण जीवन जिया है. गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर प्रधान मंत्री बनने का सफर अपने आप में मोटिवेशनल और आदर्श से भरा है है. अपने संघर्ष और सफलताओं के संदर्भ में नरेंद्र मोदी के अनुसार चुनौतीपूर्ण बचपन "विपत्तियों का विश्वविद्यालय" रहा है और साथ ही उनका कहना है कि , "मेरा जीवन मेरा सबसे बड़ा शिक्षक है।"

ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म जेरोधा (Zerodha) के को-फाउंडर निखिल कामथ के पॉडकास्ट में जब श्री मोदी से पूछा गया कि परिस्थितियों ने किस तरह से जीवन को आकार दिया है, तो उन्होंने अपने चुनौतीपूर्ण बचपन को "विपत्तियों का विश्वविद्यालय" बताया और कहा, "मेरा जीवन मेरा सबसे बड़ा शिक्षक है।"


उन्होंने कहा कि अपने राज्य की महिलाओं के संघर्ष को देखकर, जो पानी लाने के लिए कई किलोमीटर पैदल चलती थीं, उन्हें स्वतंत्रता के बाद पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने की अपनी प्रतिबद्धता से प्रेरणा मिली। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि हालांकि वे योजनाओं का स्वामित्व नहीं लेते हैं, लेकिन वे राष्ट्र को लाभ पहुंचाने वाले सपनों को साकार करने के लिए खुद को समर्पित कर देते हैं।



 उन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के मार्गदर्शक सिद्धांतों को साझा किया: अथक परिश्रम करना, व्यक्तिगत लाभ की इच्छा नहीं करना और जानबूझकर गलत काम करने से बचना। उन्होंने स्वीकार किया कि गलतियाँ मानवीय हैं, लेकिन उन्होंने अच्छे इरादों के साथ काम करने की अपनी प्रतिबद्धता पर जोर दिया। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में अपने भाषण को याद करते हुए, श्री मोदी ने कहा कि वे कड़ी मेहनत से पीछे नहीं हटेंगे, वे अपने निजी स्वार्थ के लिए कुछ नहीं करेंगे और वे गलत नीयत से कोई गलती नहीं करेंगे। वे इन तीन नियमों को अपने जीवन का मंत्र मानते हैं।



आदर्शवाद और विचारधारा के महत्व के बारे में बात करते हुए, प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि "राष्ट्र प्रथम" ही हमेशा उनका मार्गदर्शक सिद्धांत रहा है। उन्होंने कहा कि यह विचारधारा पारंपरिक और वैचारिक सीमाओं से परे है, जिससे उन्हें नए विचारों को अपनाने और पुराने विचारों को त्यागने की अनुमति मिलती है, यदि वे राष्ट्र के हित में हों। उन्होंने कहा कि उनका अटल मानक "राष्ट्र प्रथम" है। 

प्रधानमंत्री ने प्रभावशाली राजनीति में विचारधारा की तुलना में आदर्शवाद के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विचारधारा आवश्यक है, लेकिन सार्थक राजनीतिक प्रभाव के लिए आदर्शवाद महत्वपूर्ण है। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन का उदाहरण दिया, जहां विभिन्न विचारधाराएं स्वतंत्रता के सामान्य लक्ष्य के लिए आपस में समाहित हो गयीं। (स्रोत-PIB )

नजरिया जीने का : सोशल मीडिया के भंवरजाल में नहीं डुबोएं अपनी रिश्तों की नाव

Point of View : सोशल मीडिया के दौर मे दुनिया जुड़ें, लेकिन अपनी जड़ों से कटकर नहीं
नजरिया जीने का: आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया के बगैर हमारे रोज के जिंदगी कि कल्पना भी मुश्किल हो चुकी है। सच तो यह है कि आज सोशल मीडिया हमारी ज़िंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है, यह बात और है कि सकारात्मक प्रभाव के तुलना मे नकारात्मक दुष्प्रभावों से हमें दो चार होना मजबूरी हो चुका है। आज भले हीं हम सोशल मीडिया के माध्यम से खुद को कान्टैक्ट मे रखने और रहने मे हम खुद को सफल मानने की खुशफहमी पाल बैठे हों, लेकिन सच यह है कि हम इसके दुष्प्रभाव जैसे मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव, नींद में व्यवधान,ध्यान की कमी और पढ़ाई में बाधा के साथ सामाजिक अलगाव और शारीरिक गतिविधियों में कमी जैसे परेशानियों ने हमारी रोज के जीवन को नरक जैसा बना रहा है। 

कहने की जरूरत नहीं है कि आज के समय मे सोशल मीडिया कई मायनों में एक शक्तिशाली उपकरण है और इसके बगैर हमारी दुनिया की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। सोशल मीडिया ने दुनिया को नया आयाम दिया है और सच्चाई तो यह है कि  ऐसी दुनिया की कल्पना करना भी कठिन है जहाँ इंस्टाग्राम, फेसबुक और ट्विटर मौजूद न हों और हमारे फैन और फालोअर की संख्या पर भी हमारी प्रसिद्धि और स्टैटस जानी जाती है। 


याद रखें कि सोशल मीडिया सिर्फ मनोरंजन और लाइफस्टाइल ब्लॉगर्स को दिखाने और दोस्तों से जुड़ने के लिए ही नहीं है बल्कि आज हमारी युवा पीढ़ी का पूरा करियर भी इन सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर आधारित है और और अपडेट रखने का माध्यम भी। 

सच्चाई तो यह है कि सोशल मीडिया के इस युग मे हम चाहे दुनिया से भले हीं कनेक्ट हो गए हैं, लेकिन अपने माता-पिता और भाई बहन से काफी दूर हो गए हैं जो की प्रसन्नता और खुशी के लिए सबसे प्रभावी  और सस्ता श्रोत हैं। 
आज के दौड़ मे जहां लोगों को अपने जीवन मे भागदौड़ और जीने की जद्दोजहद मे तनाव और मानसिक थकान आम बात हो चुकी है, खुशी और प्रसन्नता को निश्चय ही व्यापक और विश्व स्तर पर मनाए जाने की जरूरत है। यह दिन जीवन में खुशी के महत्व को पहचानने और दुनिया भर के लोगों के कल्याण को बढ़ावा देने का एक अवसर है जिसका इस्तेमाल हमें अपने बीते हुए कल से अच्छा और आने वाले कल को बेहतर मनाने का मौका जरूर मिलता है। 

देखें विडिओ: सोशल मीडिया का सकारात्मक तरीके से उपयोग कैसे करें

हालाँकि, हाल ही में लोगों ने सोशल मीडिया और मानसिक स्वास्थ्य के बीच संबंध भी स्थापित किए हैं, खासकर युवा लोगों में। ऐसे समय में, जब स्क्रीन और  सोशल मीडिया पर हमारी निर्भरता बढ़ती जा रही है और व्यतीत किया हुआ समय बढ़ रहा है,  यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि हम सोशल मीडिया का उपयोग सकारात्मक और जिम्मेदारी से करें और अपनों से कटकर नहीं रहने क्योंकि उनके बगैर हमारी आज  और कल की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। 

दुनिया  से जुड़े पर अपनों से दूर 

आज के दौर मे जहां हम सोशल मीडिया और मोबाईल फोन जैसे अत्याधुनिक संसाधनों के साथ रहते हुए भी खुशी और अपने लोगों के प्रेम को भूल चुके हैं, अंतर्राष्ट्रीय प्रसन्नता दिवस हमें याद दिलाता है कि खुशी हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और हमें हर दिन खुशी के क्षणों को खोजने और उन्हें संजोने का प्रयास करना चाहिए। सच्चाई तो यह है कि सोशल मीडिया के इस युग मे हम चाहे दुनिया से भले हीं कनेक्ट हो गए हैं, लेकिन अपने माता-पिता और भाई बहन से काफी दूर हो गए हैं जो की प्रसन्नता और खुशी के लिए सबसे प्रभावी  और सस्ता श्रोत हैं। 

हेनरी डेविड थोरो ने जीवन के लिए खुशी को लेकर  व्याख्या करते हुए क्या खूब कहा है कि  "खुशी एक तितली की तरह है, जिसे आप जितना अधिक पीछा करते हैं, वह उतनी ही दूर रहेगी, लेकिन अगर आप अपना ध्यान दूसरी चीजों पर केंद्रित करते हैं, तो यह आएगी और धीरे से आपके कंधे पर बैठ जाएगी।" 

अक्सर हम कहते हैं की "संतोषम परम सुखम" लेकिन खुद पर जब इसका प्रयोग करना होता है तो हम भूल सा जाते हैं।  इस संदर्भ मे अज्ञात के इस कथन को हमेशा याद रखें-"खुशी का रहस्य यह नहीं है कि हमेशा अधिक पाने की कोशिश करें, बल्कि जो आपके पास है उसका आनंद लेना है।" 

नकारात्मक पहलुओं ने हमेशा से लोगों के खुशी को उनसे छीना है और इसके लिए यह जरूरी था की लोगों के बीच सकरात्मकता फैलाई जाए। यह दिन सकारात्मकता और आशावाद को बढ़ावा देता है, जो व्यक्तियों और समुदायों के लिए फायदेमंद हो सकता है।

वैश्विक कल्याण को बढ़ावा देना भी प्रमुख उदेश्य है ताकि इसके माध्यम से दुनिया भर के लोगों के कल्याण को बढ़ावा देने के महत्व पर प्रकाश डालकर उनके जीवन में अच्छाई और उजाले को शामिल किया जाए। 

खुशी के संदर्भ मे राल्फ वाल्डो इमर्सन की उस उक्ति को अवश्य याद रखें जिसमें उन्होंने कहा है कि -"खुशी कोई मंजिल नहीं है, यह एक यात्रा है।" जीवन मे प्रसन्नता और खुशी को लेकर महात्मा  गांधी का यह कथन लाजवाब और सटीक है कि -"खुशी वह है जब आप जो सोचते हैं, जो कहते हैं और जो करते हैं, वह सामंजस्य में होता है" 

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नजरिया जीने का: बुद्ध पूर्णिमा-सिर्फ धार्मिक त्योहार नहीं है, यह मानवता के लिए एक प्रेरणा का स्रोत भी है


नजरिया जीने का : बुद्ध पूर्णिमा, जिसे वेसाक या बुद्ध जयंती के नाम से भी जाना जाता है,  खासतौर पर बौद्ध धर्म के संस्थापक गौतम बुद्ध के जन्म, ज्ञान प्राप्ति और मृत्यु (या परिनिर्वाण) का दिन है और इस कारण से इस महत्वपूर्ण दिवस का खास पहचान है। हिन्दू पंचांग के अनुसार पूर्णिमा जो प्रत्येक माह मे मनाई जाती है, इसका खास महत्व है।  यह भारतीय और बौद्ध कैलेंडर के अनुसार वैशाख महीने की पूर्णिमा को आता है, जो आमतौर पर अप्रैल या मई के महीने में पड़ता है। 



किसी कवि ने गौतम बुद्ध के बारे मे क्या खूब लिखा है-
"गौतम के दूसरा गौतम नहीं हुआ,
निकले  तो बेशुमार हैं घरबार  छोड़कर "

बुद्ध पूर्णिमा  केवल एक धार्मिक त्योहार नहीं है, बल्कि यह मानवता के लिए एक प्रेरणा का स्रोत भी है। यह हमें सिखाता है कि हम कैसे अच्छे जीवन जी सकते हैं और दुनिया को एक बेहतर जगह बना सकते हैं। 
भगवान बुद्ध का जन्म, ज्ञान प्राप्ति (बुद्धत्व या संबोधि) और महापरिनिर्वाण ये तीनों वैशाख पूर्णिमा के दिन ही हुए थे। इसी दिन भगवान बुद्ध को बुद्धत्व की प्राप्ति भी हुई थी। 

बुद्ध पूर्णिमा के दिन ही गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था और  इसी दिन उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई थी और इसी दिन उनका महानिर्वाण भी हुआ था।

बोधिवृक्ष के नीचे उन्हें बुद्धत्व ज्ञान की प्राप्ति

 बिहार स्थित बोधगया नामक स्थान हिन्दू व बौद्ध धर्मावलंबियों के पवित्र तीर्थ स्थान हैं। गृहत्याग के पश्चात सिद्धार्थ सत्य की खोज के लिए सात वर्षों तक वन में भटकते रहे। यहाँ उन्होंने कठोर तप किया और अंततः वैशाख पूर्णिमा के दिन बोधगया में बोधिवृक्ष के नीचे उन्हें बुद्धत्व ज्ञान की प्राप्ति हुई।

गौतम बुद्ध का जन्म:

गौतम बुद्ध का जन, 563 ई.पू. बैसाख मास की पूर्णिमा को  नेपाल के लुंबिनी, शाक्य राज्य  में हुआ था। इस पूर्णिमा के दिन ही 483 ई. पू. में 80 वर्ष की आयु में 'कुशनारा' में में उनका महापरिनिर्वाण हुआ था। वर्तमान समय का कुशीनगर ही उस समय 'कुशनारा' था। 

बुद्ध पूर्णिमा के दिन ही सिद्धार्थ गौतम का जन्म हुआ था, जो आगे चलकर गौतम बुद्ध के नाम से जाने गए। उनके जन्म को एक दिव्य घटना के रूप में माना जाता है। कहते हैं कि उनके जन्म के समय उनके शरीर पर 32 शुभ लक्षण थे, जो उन्हें एक महान व्यक्ति के रूप में दर्शाते थे।

ज्ञान प्राप्ति: 

बुद्ध पूर्णिमा के दिन ही बोध गया में बोधि वृक्ष के नीचे बैठकर उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ था।बुद्ध पूर्णिमा का महत्व इसलिए भी है क्योंकि इसी दिन गौतम बुद्ध को बोधगया में पीपल के वृक्ष के नीचे ध्यान करते हुए ज्ञान प्राप्त हुआ था। यह घटना उन्हें 'बुद्ध' (जाग्रत) बना देती है, और इसके बाद उन्होंने अपने ज्ञान को लोगों के साथ साझा किया।

महापरिनिर्वाण:

बुद्ध पूर्णिमा का महत्व तीसरे कारण से भी है। बुद्ध पूर्णिमा के दिन ही कुशीनगर में गौतम बुद्ध का महापरिनिर्वाण हुआ था। कहा जाता है कि इसी दिन भगवान बुद्ध ने 80 वर्ष की आयु में कुशीनगर (वर्तमान में उत्तर प्रदेश, भारत) में महापरिनिर्वाण प्राप्त किया था, जो उनके जीवन के अंतिम क्षणों को दर्शाता है।

नजरिया जीने का : युवाओं की तकदीर बदल सकते हैं स्वामी विवेकानंद के ये अनमोल विचार


नजरिया जीने का :  स्वामी विवेकानंद, महान भारतीय भिक्षु, विद्वान और विख्यात आध्यात्मिक नेता, जिनके विचारों और शब्दों का विशेष महत्व है।  स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 में बंगाल के कोलकाता शहर में हुआ था. उन्होंने राष्ट्र के प्रति समर्पण और स्वाभिमान भाव का संकल्प लिया और इसके लिए उन्हे न केवल भारत बल्कि आज दुनिया मे उनके  दर्शन और शिक्षा लोगों को विशेष रूप से युवाओं को प्रेरित करने के लिए आज भी पढ़ी जाती  है।

उनके द्वारा कही बातें जैसे- ‘यह संसार कायरों के लिए नहीं है’, ‘आप का संघर्ष जितना बड़ा होगा जीत भी उतनी बड़ी होगी’, ‘जिस दिन आपके मार्ग में कोई समस्या ना आए, समझ लेना आप गलत मार्ग पर चल रहे हो’ जैसे स्वामी विवेकानंद द्वारा कई परिवर्तित उत्प्रेरक मंत्र को युवा जागरण का प्रतीक माना जाता है. उन्होंने सेवा, शिक्षा और आध्यात्मिक उत्थान के अपने आदर्शों का प्रचार करने के लिए रामकृष्ण मठ और मिशन की स्थापना की। विवेकानंद का दर्शन और शिक्षा लोगों को विशेष रूप से युवाओं को प्रेरित करने के लिए पर्याप्त है।

स्वामी विवेकानन्द का जन्म कलकत्ता के एक बंगाली कायस्थ परिवार में 12 जनवरी, 1863 को हुआ था। इनका वास्तविक नाम नरेन्द्रनाथ दत्त था। इनके पिता श्री विश्वनाथ दत्त कलकत्ते के उच्च न्यायालय में एटर्नी (वकील) थे। वे बड़े बुद्धिमान, ज्ञानी, उदारमना, परोपकारी एवं गरीबों की रक्षा करने वाले थे। ' स्वामी विवेकानंद भारत के उन महापुरुषों में अग्रणी हैं, जो युवाओं में सर्वाधिक लोकप्रिय हैं. वे भारतीय युवा प्रेरणा के प्रतीक पुरुष या यूथ आइकन हैं. उनका तेजस्वी शरीर और संपूर्ण व्यक्तित्व इतना आकर्षक, प्रभावी, भव्य और उदात्त है कि बरबस ही वह युवाओं को अपनी ओर आकर्षित कर लेता है.

यह स्वामी विवेकानंद और उनकी शिक्षाएँ ही थीं, जिन्होंने भारत के बारे में दुनिया की धारणा को बदलने में मदद की...वह व्यक्ति जिसने न केवल युवाओं को प्रेरित किया, बल्कि अपने प्रेरक शब्दों से मानवता को नई ऊँचाईयाँ दीं।उन्होंने युवाओं को प्रोत्साहित करने के लिए जो बातें कहीं वह आज भी याद की जाती है. यही कारण है कि हर साल स्वामी विवेकानंद की जयंती को राष्ट्रीय युवा दिवस के के रूप में मनाया जाता है.

स्वामी विवेकानन्द नाम का अर्थ 

अपने संरक्षक, मित्र और शिष्य खेतड़ी के राजा अजीत सिंह के सुझाव पर उन्होंने अपना नाम "विवेकानंद" रखा - जो संस्कृत शब्दों विवेक और आनंद का मिश्रण है, जिसका अर्थ है " विवेकपूर्ण ज्ञान का आनंद "।

स्वामी विवेकानंद क्यों प्रसिद्ध थे?

स्वामी विवेकानंद पश्चिमी दर्शन सहित विभिन्न विषयों के ज्ञाता होने के साथ-साथ एक बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। वह भारत के पहले हिंदू सन्यासी थे, जिन्होंने हिंदू धर्म और सनातन धर्म का संदेश विश्व भर में फैलाया। उन्होंने विश्व में सनातन मूल्यों, हिन्दू धर्म और भारतीय संस्कृति की सर्वाेच्चता स्थापित की।

नाम “विवेकानंद”

उल्लेखनीय है कि विवेकानंद नाम का प्रस्ताव खेतड़ी (राजस्थान का एक शहर) के राजा अजीत सिंह ने दिया था, जो भिक्षु के अनुयायियों और शुभचिंतकों में से एक थे, इससे पहले कि भिक्षु शिकागो में 1893 के विश्व धर्म संसद के लिए रवाना हुए। यह नाम दो संस्कृत शब्दों, विवेक ("विवेक") और आनंद ("खुशी") का एक संयोजन है।

शिकागो में विश्व धर्म संसद में भाग लेना: टर्निंग पॉइंट 

शिकागो में विश्व धर्म संसद में भाग लेना स्वामी विवेकानंद के जीवन का टर्निंग पॉइंट रहा। विश्व धर्म संसद शिकागो मे  विभिन्न धर्मों और दुनिया के विभिन्न हिस्सों के प्रतिनिधियों के लिए एक मंच था जहां 1893 में हिंदू धर्म के प्रतिनिधि के रूप में इस आयोजन में शामिल हुए । बताता जाता है कि इस धर्म सभा मे वह एक आकर्षक वक्ता थेऔर वहाँ  उन्हे ईश्वरीय एक वक्ता और "धर्म संसद में सबसे महान व्यक्ति" के रूप में वर्णित किया। इसके बाद विवेकानंद ने दुनिया के मंच पर भारतीय दर्शन को वह ऊंचाई दिया जो आज तक दुनिया मे विराजमान है।

 विवेकानंद के महत्वपूर्ण कोटेशन 

  1. एक विचार लो, उस एक विचार को अपना जीवन बना लो, उसके बारे में सोचो, उसके सपने देखो, अपने मस्तिष्क, मांसपेशियों, नसों, अपने शरीर के हर हिस्से को उस विचार से भर दो, और हर दूसरे विचार को अकेला छोड़ दो। यही सफलता का मार्ग है।
  2. अपने आप पर विश्वास करें और दुनिया आपके चरणों में होगी।
  3. किसी दिन, जब आपके सामने कोई समस्या न आए  तो आप सुनिश्चित हो सकते हैं कि आप गलत रास्ते पर यात्रा कर रहे हैं।
  4. एक समय में एक काम करो, और ऐसा करते समय अपनी पूरी आत्मा को उसमें डाल दो, बाकी सब कुछ छोड़कर।
  5. उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए।
  6. दिन में एक बार अपने आप से बात करें, नहीं तो आप इस दुनिया के एक बेहतरीन इंसान से मिलने से चूक सकते हैं।
  7. एक आदमी एक रुपये के बिना गरीब नहीं है, लेकिन एक आदमी सपने और महत्वाकांक्षा के बिना वास्तव में गरीब है।
  8. मस्तिष्क और मांसपेशियों को एक साथ विकसित होना चाहिए। लोहे की नसें एक बुद्धिमान मस्तिष्क के साथ - और पूरी दुनिया आपके चरणों में है।
  9. हमेशा खुद को खुश दिखाने की कोशिश करें। शुरू में यह आपका रूप बन जाता है, धीरे-धीरे यह आपकी आदत बन जाता है और अंत में यह आपका व्यक्तित्व बन जाता है.
  10. "ब्रह्मांड की सभी शक्तियां हमारे अंदर हैं। बस हमें उनका उपयोग करना सीखना है।"
  11. "स्वयं को कमजोर समझना सबसे बड़ा पाप है।"
  12. "ज्ञान और कर्म दोनों के बिना जीवन अधूरा है।"
  13. "सपने देखना और उन सपनों को पूरा करने के लिए प्रयास करना ही जीवन का उद्देश्य है।"

नज़रिया जीने का : Sardar Vallabhbhai Patel-जानें लौह पुरुष प्रमुख कोट्स


नज़रिया जीने का : सरदार वल्लभभाई पटेल (Sardar Vallabhbhai Patel) जिन्हे लौह पुरुष के नाम से जाना जाता है वह भारत के पहले उप-प्रधानमंत्री थे. सरदार वल्लभभाई पटेल (Sardar Vallabhbhai Patel) पेशे से एक वकील थे और उनका जिनका जन्म 31 अक्टूबर को हुआ था। सरदार पटेल ने अपने कुशलता और अपने सामर्थ्य के बल पर लगभग हर रियासत को भारत में विलय के लिए राजी कर लिया था । पटेल का अहिंसा के वारे में कहना था कि -"जिनके पास शस्त्र चलाने का हुनर हैं लेकिन फिर भी वे उसे अपनी म्यान में रखते हैं असल में वे अहिंसा के पुजारी हैं. कायर अगर अहिंसा की बात करे तो वह व्यर्थ हैं"

सरदार पटेल कहा करते थे कि " भले ही हम हजारों की संपत्ति खो दें, और हमारा जीवन बलिदान हो जाए, हमें मुस्कुराते रहना चाहिए और ईश्वर और सत्य में अपना विश्वास बनाए रखना चाहिए।"

देश प्रेम की भावना से ओतप्रोत रहा है पटेल का जीवन और उनके जीवन का इतिहास और लिए गए ऐतिहासिक निर्णय यह साबित करते हैं।।
भारतीयता और देश को एक सूत्र में पिरोने के अपने सिद्धांतो को प्राथमिकता देते हुए सरदार पटेल कहा करते थे कि "हर भारतीय को अब भूल जाना चाहिए कि वह राजपूत, एक सिख या जाट है। उन्हें याद रखना चाहिए कि वह एक भारतीय है और उसके पास अपने देश में हर अधिकार है लेकिन कुछ कर्तव्यों के साथ।"

सरदार वल्लभभाई पटेल (Sardar Vallabhbhai Patel): प्रमुख कोट्स 
  1. आम प्रयास से हम देश को एक नई महानता तक ले जा सकते हैं, जबकि एकता की कमी हमें नयी आपदाओं में डाल देगी।
  2. जो तलवार चलाना जानते हुए भी अपनी तलवार को म्यान में रखता है उसी को सच्ची अहिंसा कहते है।
  3. अविश्वास भय का प्रमुख कारण होता है।
  4. इस मिट्टी में कुछ खास बात है, जो कई बाधाओं के बावजूद हमेशा महान आत्माओं का निवास बना रहा है।
  5. "शक्ति के अभाव में विश्वास व्यर्थ है. विश्वास और शक्ति, दोनों किसी महान काम को करने के लिए आवश्यक हैं।"
  6. मान-सम्मान किसी के देने से नहीं मिलते, अपनी योग्यतानुसार मिलते हैं।
  7. हर भारतीय को अब भूल जाना चाहिए कि वह राजपूत, एक सिख या जाट है। उन्हें याद रखना चाहिए कि वह एक भारतीय है और उसके पास अपने देश में हर अधिकार है लेकिन कुछ कर्तव्यों के साथ।
  8. कठिन समय में कायर बहाना ढूंढते हैं तो वहीं, बहादुर व्यक्ति रास्ता खोजते है।
  9. अहिंसा को विचार, शब्द और कर्म में देखा जाना चाहिए। हमारी अहिंसा का स्तर हमारी सफलता का मापक होगा।
  10. बोलने में मर्यादा मत छोड़ना, गालियाँ देना तो कायरों का काम है।


नजरिया जीने का: जानें प्रधानमंत्री ने वृक्षारोपण के चिरस्थायी लाभों खातिर किस संस्कृत श्लोक का उद्धरण दिया

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने भारतीय विचार के कालातीत ज्ञान को दर्शाने वाले एक संस्कृत सुभाषितम साझा किया है। उन्होंने  वृक्षारोपण के चिरस्थायी लाभों का उल्‍लेख करते हुए संस्कृत सुभाषितम को साझा किया जिसका  अर्थ है कि जिस प्रकार फल और फूल वाले वृक्ष निकट रहने पर मनुष्य को संतुष्टि प्रदान करते हैं, उसी प्रकार वृक्ष दूर रहने पर भी उसे लगाने वाले को सभी प्रकार के लाभ प्रदान करते हैं।

"पुष्पिताः फलवन्तश्च तर्पयन्तिह मानवान।

वृक्षदं पुत्रवत् वृक्षास्तारायन्ति पात्र च॥"

फलों और फूलों वाले वृक्ष हमारे जीवन के लिए कितना आवश्यक है यह हमसे छिपा नहीं है. जाने अनजाने में हम  अपने निहित स्वार्थ के खातिर पर्यावरण और प्रकृति के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं. ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सुभाषितम का यह श्लोक  पूर्णत: सारगर्भित है और हमारे लिए वृक्ष की जरुरत को समझाने की सटीक कोशिश भी है.  

 श्लोक का अर्थ स्पष्ट है कि जिस प्रकार फल और फूल वाले वृक्ष निकट रहने पर मनुष्य को संतुष्टि प्रदान करते हैं, उसी प्रकार वृक्ष दूर रहने पर भी उसे लगाने वाले को सभी प्रकार के लाभ प्रदान करते हैं।

नजरिया जीने का: जानें वृक्ष के चिरस्थायी लाभों को समर्पित प्रधानमंत्री का सुन्दर श्लोक 

वैसे वृक्ष के परमार्थ और दूसरों को सबकुछ देने की प्रवृति के बारे में कहने की जरुरत भी नहीं हैं क्योंकि  उसे समझने के लिए निम्न श्लोक से समझा जा सकता हैं-

पुत्रपुष्यफलच्छाया मूलवल्कलदारुभिः।

गन्धनिर्यासभस्मास्थितौस्मैः कामान वितन्वते॥

नजरिया जीने का: प्रधानमंत्री का  क्रोध को त्‍यागने वाला श्लोक जो हर जुबान पर है

वास्तव में अगर आप देखें तो वृक्ष हमारी जरूरतों को अच्छी तरह से पूरा करते हैं और वो हमें पत्र, पुष्प, फल, छाया, मूल, बल्कल, इमारती और जलाऊ लकड़ी, सुगंध, राख, गुठली और अंकुर प्रदान करके हमारी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।