नजरिया जीने का : जीवन में सफलता के लिए हमेशा अपनाएँ पांच सकारात्मक दृष्टिकोण जिसके बिना आप नकारात्मकता और असफलता के शिकार हो सकते हैं.याद रखें इन पांच सकारात्मक मानसिक दृष्टिकोण की फैक्टर्स को जिनमें शामिल हैं- लचीलापन, साहस,आशावाद, कृतज्ञता और स्वीकृति। सकारात्मक सोच हीं जीवन मे सफलता का एकमात्र मूलमंत्र है और इसमे हमें तनिक भी संदेह नहीं होना चाहिए।
पहले के मुहावरों मे कहा जाता था कि अकेला चना भांड नहीं फोड़ता लेकिन आज अगर आप इतिहास उठा कर देखेंगे तो अकेले लोगों ने अपने बूते न केवल अपने संगठन बल्कि देश और समाज को भी अग्रणी पहुंचाने मे आगे रहे हैं। यह ठीक है कि कारवां का बनना सफलता कि गारंटी को बढ़ा देता है, लेकिन यह भी ध्यान रखें कि उस कारवां के बनने का विचार या आइडिया किसी एक व्यक्ति का हीं होता है। यह याद रखें कि लोगों को अगर अपनी क्षमताओं पर भरोसा होता है, तो उनके सफल होने और सफल होने की संभावना अधिक होती है।
जो लोग जीवन के प्रति अधिक सकारात्मक दृष्टिकोण रखते हैं, वे तनाव से बेहतर तरीके से निपटते हैं, उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है और समय से पहले मृत्यु का जोखिम कम होता है।
इस सच्चाई से भला किसे इनकार हो सकता है कि जीवन में मुश्किलें आती रहती हैं और जीवन कभी भी फूलों का सेज नहीं रहा। आप इतिहास उठाकर देख लें, जिसकों जीवन मे जितना ऊपर जाना होता है, उसके रास्ते मे प्रकृति ने उतने ही बाधाओं एयर काँटों को बिछाकर उनका परीक्षा लेती है। कहते हैं न,
" वही पथ क्या पथिक परीक्षा क्या, जिस पथ मे बिखरे शुल न हो।
नाविक कि धैर्य परीक्षा क्या, यदि धाराएं प्रतिकूल न हो।
सकारात्मक दृष्टिकोण हमें सकारात्मक सोचने में आसान बनाता है और यह हमें चिंताओं और नकारात्मक सोच से बचने की कला भी सिखाता है.
लेकिन याद रखें, जीवन मे इन बाधाओं और परेशानियों से मुक्ति पाने के लिए हमें सकारात्मक सोच रखना बहुत ज़रूरी है। सकारात्मक सोच एक विकल्प है। यह हमेशा आसान नहीं होता है, लेकिन यह अभ्यास के साथ बेहतर होता जाता है। आपको हमेशा इसका ध्यान रखना होगा कि जिन लोगों के साथ आप समय बिताते हैं, उनका आपके मूड पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है इसलिए हमेशा हीं सकारात्मक और उत्साही लोगों के साथ समय बिताने कि कोशिश करें।
जीवन में सफलता के लिए यह जरुरी है कि हम नकारात्मक सोच और ऐसी प्रवृति वाले लोगों से एक खास दुरी बनाकर अपने प्रयासों पर फोकस करें। यह सकारात्मक दृष्टिकोण का अभ्यास हीं है जो आपके जीवन में आशावाद और आशावादी दृष्टिकोण लाता है।
बेशक अगर सकारात्मक और आशा के अनुरूप घटने वाली घटनाओं का हम स्वागत करते हैं लेकिन थोड़ी से कुछ अप्रिय घटनाएं हमारे जीवन में दस्तक देती हैं कि हम अपने जीवन और परिस्थितियों को कोसना आरम्भ कर देते हैं.
लेकिन हमें यह
याद रखना होगा
कि केवल सकारात्मक
दृष्टिकोण ही हमें
जीवन के दैनिक
जटिल और अप्रिय
मामलों से अधिक
आसानी से निपटने
में मदद करता
है।
यह सकारात्मक दृष्टिकोण का
अभ्यास है जो
आपके जीवन में
आशावाद और आशावादी
दृष्टिकोण लाता है।
सकारात्मक दृष्टिकोण हमें सकारात्मक
सोचने में आसान
बनाता है और
यह हमें चिंताओं
और नकारात्मक सोच
से बचने की
कला भी सिखाता
है...
अपने जीवन
में सफल होने
के लिए, यदि
कोई आपके जीवन
में कुछ रचनात्मक
परिवर्तन की उम्मीद
कर रहा है,
तो सकारात्मक दृष्टिकोण
को जीवन के
तरीके के रूप
में अपनाने की
आवश्यकता है।
Attitude भले एक
छोटी से चीज
सही लेकिन सच
यह है कि
जीवन के इसी
बड़े और महत्वपूर्ण
फर्क लाने के
लिए यह बहुत
प्रभावी भूमिका निभाती है.
सकारात्मक और आशावादी
दृष्टिकोण की
मदद से कई
लोगों यहाँ तक
की कई प्रसिद्ध
हस्तियों ने कई
बड़ी बीमारियों या
संघर्षों के साथ
अपनी लड़ाई जीत
ली है. वावजूद
इस तथ्य के
कि जीतना मुश्किल था.
वास्तव में
केवल एटीट्यूड ही
काफी नहीं है..लेकिन जीवन में
हमारी सफलता के
लिए सकारात्मक और
आशावादी दृष्टिकोण की आवश्यकता
है.
मनोवृत्ति
मूल रूप से
वह तरीका है
जिसमें हम किसी
चीज़ के प्रति
व्यवहार करते हैं
या सोचते हैं
या महसूस करते
हैं .आम तौर
पर हम अपनी
सोच, भावनाओं तथा अन्य
पहलुओं के संदर्भ
में अपना दृष्टिकोण
प्रदर्शित करते हैं।
वास्तव में आपकी
सोच गठन के
पीछे मूल कारण
है किसी चीज
के प्रति आपका
नजरिया.
यदि आप सकारात्मक
सोचने के आदि हैं
और किसी भी
घटना का केवल
सकारात्मक पक्ष देखते
हैं तो आप
अपने जीवन के
बारे में सकारात्मक
दृष्टिकोण रखते हैं. आप जिस मुद्दे
से निपट रहे
हैं, उसके बारे
में बात करें और इसके लिए
नेगेटिव विचारों को अपने
मन में घर
नहीं करने दें...
याद रखें, प्रकृति भीआपके
अंदर उत्पन्न विचारों
को हीं सशक्त
करने और उसे
पूरा करने की
लिए बल देती
है, और इसलिए
हैं हमें बचपन
से यह पढ़ाया
जाता है कि
-" हमें अपने मन
में बुरे विचारों
कोलाने
से बचना चाहिए"
आपका
Attitudeआपके
आस-पास हो
रही घटनाओं के
बारे में आपकी
राय बनाने में
आपकी मदद करता
है... सोचने के
तरीके ने आपके
विचारों को तय
किया और निश्चित
रूप से यह
आपके कार्यों में
दिखाई देता है।
जिस वातावरण में
आप रह रहे
हैं, वह भी
आपके दृष्टिकोण के
प्रभावप्रदर्शित
करता है.
दुनिया में ऐसे
लोग भी हैं
जिन्होंने अपनी मामूली
चोटों और जीवन
की कठिनाइयों के
कारण जीवन के
निराशावादी और नकारात्मक
रवैये के कारण
दम तोड़ दिया
है.
अपने जीवन में
हर असफलता के
लिए अपने आस-पास की
परिस्थितियों को दोष
न दें. आपके
जीवन में कठिन
परिस्थितियों से निपटने
के लिए अपनी
मानसिकता और दृष्टिकोण
को बदलने की
आवश्यकता है.।
आपके सकारात्मक और आशावादी
दृष्टिकोण में आपके
जीवन में आपकी
हर सफलता/असफलता
का कारण प्रदान
करने की शक्ति
है और इसलिए
अपने सोचने के
तरीके को नज़रअंदाज़
न करें.निश्चित
रूप से यह
आपके जीवन में
कठिन परिस्थितियों से
निपटने का मूल
तरीका है,
आपको अपने जीवन
में आने वाली
हर घटना के
साथ सकारात्मक दृष्टिकोण
रखना होगा चाहे
वह पेशेवर हो
या व्यक्तिगत।
यह एक भावनात्मक
स्थिति हो सकती
है जिस पर
आपको ध्यान देने
की आवश्यकता है…
सभी घटनाओं से
निपटने के लिए
आपको सकारात्मक और
आशावादी रवैया रखना होगा।
मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक
सहित .
विश्वास करें, आपमें परिस्थितियों
को बदलने के
लिए एटीट्यूड की
शक्ति है क्योंकि
आप अपनी खुद
की परिस्थितियों के
निर्माता हैं अपने
सकारात्मक और आशावादी
दृष्टिकोण के साथ।
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अस्वीकरण: कृपया ध्यान दें कि लेख में उल्लिखित टिप्स/सुझाव केवल सामान्य जानकारी है जो विभिन्न सामाजिक और धार्मिक आस्था पर आधारित हैं.ताकि आपको उस मुद्दे के बारे में अपडेट रखा जा सके जो कि आम लोगों से अपेक्षित है. आपसे निवेदन है कि कृपया इन सुझावो को पेशेवर सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए तथा अगर आपके पास इन विषयों से सम्बंधित कोई विशिष्ट प्रश्न हैं तो हमेशा सम्बंधित एक्सपर्ट से अवश्य परामर्श करें।
Mercury Retrograde क्या है: Mercury (बुध ग्रह) सौरमंडल का सबसे तेज़ ग्रह है। जब पृथ्वी और Mercury अपनी-अपनी कक्षाओं में घूमते हैं, तो एक समय ऐसा आता है जब पृथ्वी, Mercury को पीछे छोड़ देती है। इस दौरान हमें पृथ्वी से ऐसा लगता है कि Mercury उल्टी दिशा में चल रहा है। मर्करी रेट्रोग्रेड एक बार फिर 26 फरवरी, 2026 को शुरू होगा और 20 मार्च, 2026 को खत्म होगा। माना जाता है कि साल के ये समय आपके मूड और कामों पर काफी असर डालते हैं। नीचे 2026 मर्करी रेट्रोग्रेड की तारीखों के बारे में और जानें। जानें कि कम्युनिकेशन, ट्रैवल और टेक्नोलॉजी के लिए मर्करी रेट्रोग्रेड का क्या मतलब है, और यह आपकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर कैसे असर डाल सकता है।
इसी दृश्य भ्रम को Mercury Retrograde कहा जाता है। यह वास्तव में उल्टा चलना नहीं है, बल्कि एक optical illusion (दृश्य भ्रम) है।
Mercury Retrograde कितने समय तक रहता है?
हर बार Mercury Retrograde लगभग 3 सप्ताह (21 से 24 दिन) तक रहता है।
साल में कितनी बार होता है?
Mercury Retrograde आमतौर पर साल में 3 से 4 बार होता है।
हर कुछ महीनों में यह चक्र दोबारा आता है।
Shadow Period क्या होता है?
Retrograde शुरू होने से लगभग 1–2 हफ्ते पहले और खत्म होने के 1–2 हफ्ते बाद भी इसका प्रभाव महसूस किया जाता है।
इसे “Shadow Period” कहा जाता है।
मतलब कुल मिलाकर इसका असर लगभग 6 से 8 हफ्तों तक महसूस हो सकता है।
Mercury Retrograde के दौरान क्या होता है?
अपनी वक्री अवस्था के दौरान, बुध या कोई भी अन्य ग्रह वास्तव में अंतरिक्ष में पीछे की ओर गति नहीं करता या धीमा नहीं होता। बुध की वक्री अवस्था तब होती है जब ग्रह राशिचक्र में अपने सामान्य पथ पर यात्रा कर रहा होता है और फिर, हमारे दृष्टिकोण से, कुछ समय के लिए रुकने से पहले धीमा हो जाता है और फिर अपनी आभासी गति को उलट कर ब्रह्मांड में उस स्थान पर लौट आता है जहाँ वह हाल ही में था। यह राशिचक्र में एक विशिष्ट बिंदु तक पीछे की ओर जाता है और फिर एक बार फिर धीमा हो जाता है, कुछ समय के लिए रुकता है और फिर से आगे की ओर बढ़ता हुआ प्रतीत होता है
प्रतियोगिता परीक्षा (UPSC, SSC, Railway, NDA, State PSC विभिन्न राज्य सेवा आयोगों ) की परीक्षा में पूछे जाते रहे है. आगामी प्रतियोगिता परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए तथा अन्य अवसरों जैसे स्कूल, प्रतियोगी परीक्षा, मंच संचालन, ब्लॉग और क्विज़ प्रतियोगिता के लिए जरुरी ये प्रश्नोत्तर आपके लिए काफी उपयोगी हैं.
प्रश्न 1. भारत का संविधान किस तिथि को लागू हुआ?
उत्तर: 26 जनवरी 1950
परीक्षा: UPSC Prelims
वर्ष: 2016
प्रश्न 2. 26 जनवरी को ही संविधान लागू करने का निर्णय क्यों लिया गया था?
उत्तर: 26 जनवरी 1930 को पूर्ण स्वराज की घोषणा हुई थी
परीक्षा: SSC CGL
वर्ष: 2018
प्रश्न 3. संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष कौन थे?
उत्तर: डॉ. राजेंद्र प्रसाद
परीक्षा: Railway Group D
वर्ष: 2019
प्रश्न 4.भारतीय संविधान की प्रारूप समिति (Drafting Committee) के अध्यक्ष कौन थे?
उत्तर: डॉ. भीमराव अंबेडकर
परीक्षा: SSC CHSL
वर्ष: 2020
प्रश्न 5. भारत का पहला गणतंत्र दिवस परेड कहाँ आयोजित हुआ था?
उत्तर: इरविन स्टेडियम, दिल्ली
परीक्षा: NDA
वर्ष: 2015
प्रश्न 6. भारत के पहले गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि कौन थे?
उत्तर: सुकर्णो (इंडोनेशिया)
परीक्षा: State PSC (UPPSC)
वर्ष: 2017
प्रश्न 7. संविधान को बनने में कुल कितना समय लगा?
उत्तर: 2 वर्ष 11 महीने 18 दिन
परीक्षा: SSC GD
वर्ष: 2021
प्रश्न 8. भारतीय संविधान की मूल भाषा क्या थी?
उत्तर: अंग्रेज़ी
परीक्षा: Railway NTPC
वर्ष: 2020
प्रश्न 9. गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रपति को कितनी तोपों की सलामी दी जाती है?
उत्तर: 21 तोपों की
परीक्षा: CDS
वर्ष: 2016
प्रश्न 10. संविधान सभा की पहली बैठक कब हुई थी?
उत्तर: 9 दिसंबर 1946
परीक्षा: UPSC Prelims
वर्ष: 2014
प्रश्न 11. भारत को “गणराज्य” घोषित करने का क्या अर्थ है?
उत्तर: देश का प्रमुख जनता द्वारा चुना जाता है
परीक्षा: SSC MTS
वर्ष: 2019
प्रश्न 12. गणतंत्र दिवस समारोह का समापन किस देशभक्ति गीत से होता है?
उत्तर: सारे जहाँ से अच्छा
परीक्षा: Railway ALP
वर्ष: 2018
प्रश्न 13. संविधान में मौलिक कर्तव्य किस संशोधन द्वारा जोड़े गए?
उत्तर: 42वां संविधान संशोधन
परीक्षा: UPSC Prelims
वर्ष: 2017
प्रश्न 14. प्रारंभ में भारतीय संविधान में कितनी अनुसूचियाँ थीं?
उत्तर: 8 अनुसूचियाँ
परीक्षा: State PSC (BPSC)
वर्ष: 2016
प्रश्न 15.भारत का संविधान विश्व में किस रूप में जाना जाता है?
उत्तर: विश्व का सबसे लंबा लिखित संविधान
परीक्षा: SSC CPO
वर्ष: 2022
प्रश्न 16.संविधान सभा की पहली बैठक कब हुई थी?
उत्तर: 9 दिसंबर 1946
परीक्षा: UPSC Prelims
वर्ष: 2014
प्रश्न 17.संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष कौन थे?
उत्तर: डॉ. राजेंद्र प्रसाद
परीक्षा: SSC CHSL
वर्ष: 2020
प्रश्न 18. भारतीय संविधान की प्रारूप समिति (Drafting Committee) के अध्यक्ष कौन थे?
उत्तर: डॉ. भीमराव अंबेडकर
परीक्षा: UPSC Prelims
वर्ष: 2017
प्रश्न 19. भारतीय संविधान को बनने में कुल कितना समय लगा?
उत्तर: 2 वर्ष 11 महीने 18 दिन
परीक्षा: SSC GD
वर्ष: 2021
प्रश्न 20.भारत का पहला गणतंत्र दिवस परेड कहाँ आयोजित हुआ था?
उत्तर: इरविन स्टेडियम, दिल्ली
परीक्षा: SSC MTS
वर्ष: 2017
प्रश्न 21.संविधान में मौलिक कर्तव्य किस संविधान संशोधन द्वारा जोड़े गए?
उत्तर: 42वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1976
परीक्षा: UPSC Prelims
वर्ष: 2017
प्रश्न 22.प्रारंभ में भारतीय संविधान में कितनी अनुसूचियाँ थीं?
उत्तर: 8 अनुसूचियाँ
परीक्षा: SSC CHSL
वर्ष: 2016
प्रश्न 23.“गणराज्य” का सही अर्थ क्या है?
उत्तर: राज्य का प्रमुख जनता द्वारा चुना जाता है
परीक्षा: SSC MTS
वर्ष: 2019
प्रश्न 24.गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रपति को कितनी तोपों की सलामी दी जाती है?
उत्तर: 21 तोपों की
परीक्षा: UPSC Prelims
वर्ष: 2013
प्रश्न 25. भारतीय संविधान को किस तिथि को अंगीकृत (Adopt) किया गया?
उत्तर: 26 नवंबर 1949
परीक्षा: UPSC Prelims
वर्ष: 2019
(Based on Memory)
Unique GK Quiz (With Answers)
प्रश्न 1.
भारत का संविधान किस तिथि से लागू हुआ?
उत्तर: 26 जनवरी 1950
प्रश्न 2.
26 जनवरी को ही संविधान लागू करने का मुख्य कारण क्या था?
उत्तर: 26 जनवरी 1930 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज की घोषणा की थी
प्रश्न 3.
भारतीय संविधान को तैयार करने में कुल कितना समय लगा?
उत्तर: 2 वर्ष 11 महीने 18 दिन
प्रश्न 4.
भारतीय संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष कौन थे?
उत्तर: डॉ. राजेंद्र प्रसाद
प्रश्न 5.
भारतीय संविधान की प्रारूप समिति (Drafting Committee) के अध्यक्ष कौन थे?
उत्तर: डॉ. भीमराव अंबेडकर
प्रश्न 6.
गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रपति को 21 तोपों की सलामी क्यों दी जाती है?
उत्तर: यह सर्वोच्च संवैधानिक पद का सम्मान दर्शाने की परंपरा है
प्रश्न 7.
भारत का पहला गणतंत्र दिवस परेड कहाँ आयोजित हुआ था?
उत्तर: इरविन स्टेडियम (वर्तमान में नेशनल स्टेडियम), दिल्ली
प्रश्न 8.
भारतीय संविधान किस देश के संविधान से सबसे अधिक प्रभावित है?
उत्तर: ब्रिटेन
प्रश्न 9.
गणतंत्र दिवस परेड में झांकी का मुख्य उद्देश्य क्या होता है?
उत्तर: भारत की सांस्कृतिक, सामाजिक और विकासात्मक विविधता का प्रदर्शन
प्रश्न 10.
भारत के पहले गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि कौन थे?
उत्तर: सुकर्णो (इंडोनेशिया के राष्ट्रपति)
प्रश्न 11.
संविधान में मौलिक कर्तव्य किस संशोधन द्वारा जोड़े गए?
उत्तर: 42वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1976
प्रश्न 12.
गणतंत्र दिवस समारोह का समापन किस गीत से होता है?
उत्तर: सारे जहाँ से अच्छा
प्रश्न 13.
भारत को “गणराज्य” घोषित करने का अर्थ क्या है?
उत्तर: देश का प्रमुख जनता द्वारा चुना गया हो, न कि राजा
प्रश्न 14.
संविधान सभा की पहली बैठक कब हुई थी?
उत्तर: 9 दिसंबर 1946
प्रश्न 15.
भारतीय संविधान की मूल भाषा कौन-सी थी?
उत्तर: अंग्रेज़ी
प्रश्न 16.
गणतंत्र दिवस परेड में तीनों सेनाओं की संयुक्त टुकड़ी किसका प्रतीक है?
उत्तर: राष्ट्रीय एकता और सैन्य शक्ति
प्रश्न 17.
संविधान में कितनी अनुसूचियाँ प्रारंभ में थीं?
उत्तर: 8 अनुसूचियाँ
प्रश्न 18.
भारत का संविधान विश्व का कैसा संविधान है?
उत्तर: विश्व का सबसे लंबा लिखित संविधान
प्रश्न 19.
26 जनवरी को राष्ट्रपति कौन-सा विशेष सम्मान प्रदान करते हैं?
उत्तर: पद्म पुरस्कार एवं वीरता पुरस्कार
प्रश्न 20.
गणतंत्र दिवस भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: क्योंकि इसी दिन भारत एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य बना
नकारात्मक विचारों का आना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है और आप इसे नकार नहीं सकते है। अगर आप सभी बड़े और सफल व्यक्तित्व वाले लोगों की जीवनी को पढ़ेंगे तो पाएंगे कि उन्हें भी इससे गुजरना पड़ता है. हर इंसान के मन में कभी न कभी नकारात्मक विचार आते हैं लेकिन यह जानना जरुरी है कि इन नकारात्मक विचारों से आप कितना जल्दी निकलते हैं क्योंकि अगर आप इनके इन्फ्लुएंस में आ गए तो फिर आप पॉजिटिव विचारों से दूर हो सकते हैं. याद रखें, नकारात्मक विचारों को खुद से दूर रखना ज्यादा जरुरी है क्योंकि ये आते तो सबके दिमाग में हैं, लेकिन इससे निकलना सभी को नहीं आता क्योंकि हम खुद को मोटिवेट करने के टेक्निक से वाकिफ नहीं होता या नकारात्मक विचारों के गिरफ्त में बुरी तरह से फंस चुके होते हैं.
जब ये विचार बार-बार आने लगें और लंबे समय तक टिके रहें, तो यह एक मानसिक ट्रैप की तरह हमें अपने गिरफ्त में ले लेता है जो न केवल हमारे आत्मविश्वास को कमजोर करता है, बल्कि हमारे व्यवहार, निर्णय और स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है।
नकारात्मक विचारों का दौर हर किसी के जीवन में आता है, लेकिन यह याद रखना जरूरी है कि विचारों को नियंत्रित किया जा सकता है। कभी आपने सोचा है कि अचानक आखिर नकारात्मक विचार क्यों जगह बना लेते हैं. कुछ सवाल ऐसे होते हैं जो सीधे तौर पर नकारात्मक विचार हमारे अंदर हावी करते हैं जैसे कोई असफलता या निराशा का डर खासतौर पर जब चीजें हमारे मन मुताबिक नहीं होतीं या हमें किसी आशा के विपरीत निराशा मिलती है.
जीवन शार्ट नहीं लॉन्ग रेस है
दूसरों से हमें अपनी तुलना की आदत भी काफी बुरा प्रभाव डालती है और हमें आज के प्रतिस्पर्धा वाले दौर में हम किसी से मामूली रूप से भी पिछड़ना नहीं चाहते हैं. हम ये भूल जाते हैं कि जीवन शार्ट रेस नहीं बल्कि लॉन्ग रेस है और मामूली बढ़त या पीछा होना कोई मतलब है है क्योंकि इसे स्ट्रेटेजी कहते हैं और अंतिम राउंड में जीत को फाइनल कहा जाता है.
उम्मीद की एक लौ को जलाना सीखें
हर नकारात्मक विचार को चुनौती दें, क्योंकि वही आपके आत्मबल की परीक्षा है।”सकारात्मक सोच रखने वाले दोस्तों, परिवार या मार्गदर्शकों से जुड़े रहें। इसके साथ ही जब मन उदास हो, तब अपने भीतर झांकिए — वहां उम्मीद की एक लौ हमेशा जलती रहती हैऔर उस लौ को हमेशा जलाये रखिये.
अतीत की जाल से बाहर निकलें
अक्सर हम अपने अतीत या पुरानी गलतियों को बार-बार याद करके अपने वर्तमान को खराब करते हैं. यह तय है कि जो ख़तम हो चूका है या बीत गया है वह लौट नहीं सकता और उससे सिर्फ सबक लेकर हमें आगे की कर देखना हीं हमारे भविष्य का निर्माण करेगा. इसके अतिरिक्त पुराने अतीत के बारे में लगातार सोचने से तनाव, चिंता और अवसाद बढ़ता है जो न केवल हमारे वर्तमान बल्कि भविष्य को भी ख़राब करती है.
खुद को कम आंकने की गलती
जबकि यह सत्य है कि ईश्वर ने हम सभी में विलक्षण प्रतिभा से परिपूर्ण कर भेजा हैं लेकिन अक्सर हम खुद को कम आंकना खास तौर पर दूसरों से अपने को कम आंकने की बीमारी पाल लेते हैं। इसके कारण हमें यह लगने लगता है की समय हमारे साथ नहीं है या मुझमे वह योग्यता नहीं है। ऐसी सोच को किसी भी प्रकार से सही नहीं कहा जा सकता क्योंकि यह सोच हीं हमारी सफलता में सबसे बड़ी बाधा है. इसके अतिरिक्त यह आपके मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाते हैं और यह दीर्घकालिक भी रह सकता है.
आज के दौड़ में जहाँ मोबाइल फ़ोन और सोशल साइट्स ने हमें छदम रूप से पास किया है, सच्चाई यह है कि हम चिठियों वाले युग से भी अपनों से दूर हो चुके है. आजकल के भागदौड़ वाले जीवन में कंफ्लिक्ट्स या विचारों में अंतर का होना भले हीं बात है, लेकिन सच्चाई यह है कि झगड़े से दूरी और प्यार से नजदीकी बनती है लेकिन हम इस वास्तविकता को समझने के लिए तैयार नहीं हैं. रिश्तों की बागडोर को बनाए रखने के लिए हम अपने बीच के मतभेदों की दीवारों को अपने कद से काफी ऊंचा रखने लगे हैं.
हम यह भूल से गए हैं की कुछ रिश्ते माफी मांगने से नहीं, समझने से सुलझते हैं और हमारे अहंकार और ईगो का कद इतना बड़ा हो चूका है कि हमें माफ़ी मांगने में संकोच होने लगा है.
झगड़े इंसान को तोड़ते हैं, समझौता रिश्तों को जोड़ता है
जुबान के तीखे शब्द सबसे बड़े झगड़े की जड़ बन सकते हैं और इसलिए यह जरुरी है कि आप रिश्तों की जीवंतता के लिए जुबान लगाम रखें. याद रखें, झगड़े इंसान को तोड़ते हैं, समझौता रिश्तों को जोड़ता है और इसलिए समझौतों की अहमियत को समझें. लेकिन यह भी सच है कि भावनात्मक रूप से परेशान करने वाला या कठोर नहीं होना चाहिए क्योंकि यह कहा गया है कि "अगर हम हर लड़ाई जीतना चाहें, तो शायद रिश्ते हार जाएंगे।"और आप विश्वास करें कि यही जीवन का एकमात्र सच्चाई है।
लड़ाई जितने के लिए रिश्तों को नहीं हराएँ
आज के इस दौर मे जहां हमें अपने हेक्टिक जीवनशैली और भागती जिंदगी मे रिश्तों को बचाने कि जदोजहद से दो चार होना हमारी लाचारी बन चुकी है, ऐसे मे अगर हम झगड़ों कि कीमत पर सह-अस्तित्व की भावना को तिलांजलि देंगे तो बहाल जीवन का क्या हश्र होगा? जब रिश्तों की बात आती है तो मनमुटाव का होना अपरिहार्य है और इसे अवॉइड करना कुछ हद तक मुश्किल होता है।
अहंकार का कद छोटा होना आवश्यक
क्या यह सच नहीं है कि जहां अहंकार खत्म होता है, वहां झगड़ा भी खत्म हो जाता है और इसके लिए यह जरूरी है कि हम झगड़ों को छोड़कर सह-अस्तित्व की भावना को बढ़ावा दें ताकि हमारा जीवन सँवर सके। जीवन में सह-अस्तित्व का मतलब हीं यही है कि मिल-जुलकर रहना और दूसरों की भावनाओं का सम्मान करना और संघर्षों से ऊपर उठना। हर झगड़े में जीतने से ज्यादा जरूरी है रिश्ते को बचाना और इसके लिए जरुरी है कि जब आप झगड़ों से बचकर एक-दूसरे को समझने और अपनाने का प्रयास करते हैं, तो जीवन में सुख, शांति और संतोष बढ़ता है।
समझौता रिश्तों को जोड़ता है
अगर आप जीवन मे झगड़े और समझौते के महत्व को समझेंगे तो इसमें कोई संदेह नहीं है कि एक तरफ जहां झगड़े इंसान को तोड़ते हैं, समझौता रिश्तों को जोड़ता है। समझौते कि कीमत को समझें और झगड़े कि नकारात्मक प्रभाव को कभी भी जीवन मे तवज्जो नहीं दें।
अक्सर हम जीवन मे खुद के कद से अधिक अपने अहंकार को बना लेते हैं जो एक प्रमुख वजह होता है आपस के रिश्तों को खत्म कर अहंकार के बीजारोपन का। याद रखें, जहां अहंकार खत्म होता है, वहां झगड़ा भी खत्म हो जाता है।
गुजिया (मीठी तली हुई पेस्ट्री) पूरे भारत में होली के त्योहार का एक ज़रूरी हिस्सा है। गुजिया को आमतौर पर "स्वीट डंपलिंग" के नाम से जाना जाता है और भारत में इस त्योहार के लिए इसका अपना ही महत्व है। आप गुजिया के बिना होली के जश्न की कल्पना नहीं कर सकते क्योंकि यह पूरे देश में होली के अलग-अलग रंगों का मुख्य हिस्सा है। गुजिया का एक और नाम भी है जैसे बिहार में पेड़किया जो इसी कॉम्बिनेशन से बनता है। गुजिया पूरे देश में होली के जश्न का एक ज़रूरी हिस्सा है जिसे आपके स्वाद के अनुसार बनाया जाता है।
हम इंग्लिश में गुजिया को क्या कहते हैं?
गुजिया को इंग्लिश में स्वीट फ्राइड डंपलिंग या इंडियन स्वीट एम्पानाडा कहा जा सकता है। इसे आमतौर पर होली के मौके पर बनाया जाता है और सच तो यह है कि मेहमानों और परिवार के सदस्यों को परोसने के लिए गुजिया बनाए बिना होली की कल्पना भी नहीं की जा सकती।
गुजिया, जिसे आम तौर पर बाहर से परतदार और भुरभुरी गुजिया के नाम से जाना जाता है, जिसमें नारियल, काजू और खोया (दूध के ठोस पदार्थ) जैसी कई चीज़ों से नरम और मीठी फिलिंग बनाई जा सकती है।
गुजिया भारत की कई स्वादिष्ट मिठाइयों में से एक अनोखी मीठी डिश है। यह सबसे पॉपुलर डिश है और इसके बिना, पूरे भारत में कई त्योहारों की कल्पना नहीं की जा सकती। गुजिया को आम तौर पर पेड़किया, पुरुकिया और देश के कई हिस्सों में जाना जाता है। इसे देश के कई हिस्सों में करंजी, कज्जिकयालु, सोमस और करजिकायी भी कहा जाता है।
यह हरियाली तीज के त्योहार का भी हिस्सा है जिसे पेड़किया या पुरुकिया के नाम से जाना जाता है और इसकी तैयारी के बिना तीज के त्योहार की कल्पना नहीं की जा सकती। तीज आम तौर पर बिहार, उत्तर प्रदेश और देश के दूसरे हिस्सों में मनाई जाती है जिसमें महिलाएं व्रत रखती हैं और भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा करती हैं।
गुजिया क्या है
गुजिया असल में डीप-फ्राइड, आधे चांद के आकार की पेस्ट्री है जिसे गरम रिफाइंड या घी में फ्राई करके बनाया जाता है। गुजिया बनाने के लिए, आप इसमें मावा (खोया), ड्राई फ्रूट्स, फ्राई सूजी, चॉकलेट और अपने स्वाद के अनुसार कई स्वादिष्ट चीजें भर सकते हैं।
गुजिया का इतिहास
हालांकि गुजिया की शुरुआत के बारे में कोई ऑफिशियल फैक्ट्स नहीं हैं, लेकिन माना जाता है कि इसकी शुरुआत भारत में मिडिल एज में हुई थी। 13वीं-14वीं सदी में मुगलों के आने के बाद, भारतीय मिठाइयों में बदलाव आया, और गुजिया में और वैरायटी आ गई। जैसा कि आप जानते हैं, भारत त्योहारों और कई कल्चरल विरासतों की धरती है, जो कई रीजनल मिठाइयों और तरह-तरह की रीजनल और खास लोकल रेसिपी बनाने का मौका देती है।
जैसा कि कहा गया है, पेड़किया या पुरुकिया जो एक तरह की गुजिया है, आमतौर पर बिहार और उत्तर प्रदेश यानी पूर्वांचल भारत में मशहूर है। गुजिया असल में नॉर्थ इंडिया, खासकर राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार में बनाई जाती थी। इसका ज़िक्र पुराने भारतीय ग्रंथों और शाही किचन में भी मिलता है।
गुजिया के प्रकार
गुजिया कई तरह की होती हैं, जो उनके इंग्रीडिएंट्स और पकाने के तरीके के आधार पर अलग-अलग होती हैं:
मावा (खोया) गुजिया - असल में यह गुजिया का सबसे पारंपरिक रूप है जिसमें हम खोए, जो दूध का प्रोडक्ट है, को सूखे मेवों और नारियल के साथ मिलाकर भरते हैं।
चॉकलेट गुजिया – यह असल में नई पीढ़ी की खास गुजिया है जिसमें अगली पीढ़ी चॉकलेट और नट्स का मिक्सचर भरती है।
काजू गुजिया – काजू के पेस्ट से भरी हुई, जो इसे और भी स्वादिष्ट बनाती है।
गूगल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुंदर पिचाई ने कहा है कि गूगल पांच वर्षों में 15 अरब डॉलर के निवेश से समुद्र के अंदर नए केबलों के माध्यम से भारत को अमरीका से जोड़ेगा।
इस पहल के माध्यम से विशाखापट्टणम में समुद्र के अंदर एक नया अंतरराष्ट्रीय गेटवे स्थापित किया जाएगा।
भारत को सिंगापुर, दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया से जोड़ने के लिए समुद्र के अंदर तीन नए मार्ग और चार रणनीतिक फाइबर-ऑप्टिक मार्ग स्थापित किए जाएंगे।
गूगल, भारत में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान-एम्स के साथ साझेदारी कर रहा है, ताकि मरीज, एआई टूल्स में अपनी स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं दर्ज कर सकें और एआई, डॉक्टरों की सहायता के लिए रिपोर्ट तैयार कर सके।
कानपुर में बनेगा भारत-फ्रांस एयरोनॉटिक्स स्किलिंग सेंटर
प्रस्तावित केंद्र एयरोनॉटिक्स, मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहाल (एमआरओ), एयरपोर्ट संचालन, रक्षा विनिर्माण और संबंधित क्षेत्रों में उन्नत कौशल प्रशिक्षण प्रदान करेगा।
“द सेज हू रीइमैजिन्ड हिंदूइज्म: द लाइफ, लेसन्स एंड लेगेसी ऑफ श्री नारायण गुरु” पुस्तक के लेखक डॉ. शशि थरूर हैं.
पुस्तक का विमोचन उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने किया।
मानव जनित जलवायु परिवर्तन से कॉफी उत्पादन घटा
क्लाइमेट सेंट्रल की रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक स्तर पर कॉफी उत्पादन करने वाले देशों ने औसतन 47 अतिरिक्त दिनों की हानिकारक गर्मी का अनुभव किया।
वैश्विक उत्पादन का 75% हिस्सा रखने वाले पांच सबसे बड़े उत्पादक देश हैं-ब्राजील, वियतनाम, कोलंबिया, इथियोपिया और इंडोनेशिया
यून सुक येओल
दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति यून सुक येओल को 2024 में सैन्य शासन लागू करने के असफल प्रयास के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
वासे शहर, नाइजीरिया
एक सीसा और जस्ता खदान में कार्बन मोनोऑक्साइड रिसाव के कारण कल 33 खनिकों की मौत हो गई।
थर्मोस्फीयर पृथ्वी के वायुमंडल की चौथी परत है। यह लगभग 80 किमी से शुरू होकर 500–600 किमी या उससे अधिक ऊँचाई तक फैली होती है।थर्मोस्फीयर (या ऊपरी वायुमंडल) 85 किलोमीटर (53 मील) से ऊपर की ऊँचाई वाला क्षेत्र है, जबकि ट्रोपोपॉज़ और मेसोपॉज़ के बीच का क्षेत्र मध्य वायुमंडल ( स्ट्रैटोस्फियर और मेसोस्फीयर ) है जहाँ सौर UV विकिरण का अवशोषण 45 किलोमीटर (28 मील) की ऊँचाई के पास अधिकतम तापमान उत्पन्न करता है और ओजोन परत का कारण बनता है।
थर्मोस्फीयर सूर्य के विकिरण को अवशोषित करती है, जिससे यह बहुत गर्म हो जाती है।
मेसोस्फीयर के ऊपर बहुत ही दुर्लभ हवा की परत को थर्मोस्फीयर कहा जाता है। सूर्य से आने वाली उच्च-ऊर्जा एक्स-रे और यूवी विकिरण थर्मोस्फीयर में अवशोषित हो जाते हैं, जिससे इसका तापमान सैकड़ों या कई बार हज़ारों डिग्री तक बढ़ जाता है। हालाँकि, इस परत में हवा इतनी पतली होती है कि यह हमें बर्फीली ठंड लगती है! कई मायनों में, थर्मोस्फीयर वायुमंडल के एक हिस्से की तुलना में बाहरी अंतरिक्ष की तरह अधिक है।
थर्मोस्फीयर पृथ्वी के वायुमंडल की चौथी परत है। यह लगभग 80 किमी से शुरू होकर 500–600 किमी या उससे अधिक ऊँचाई तक फैली होती है।
“थर्मो” शब्द का अर्थ है — ऊष्मा (Heat) और “स्फीयर” का अर्थ है — परत या क्षेत्र।अर्थात, थर्मोस्फीयर वह परत है जहाँ तापमान बहुत अधिक होता है। इस परत में तापमान ऊँचाई के साथ बढ़ता है।
थर्मोस्फीयर की प्रमुख विशेषताएँ
उच्च तापमान – इस परत में तापमान 1500°C या उससे भी अधिक हो सकता है।
हवा बहुत पतली – यहाँ वायु अणु बहुत कम होते हैं।
ऑरोरा की घटना – उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव पर दिखाई देने वाली रंगीन रोशनी (Aurora) इसी परत में बनती है।
अंतरिक्ष स्टेशन का स्थान –
International Space Station इसी परत में पृथ्वी की परिक्रमा करता है।
उपग्रहों की गति – कई कृत्रिम उपग्रह इसी क्षेत्र में घूमते हैं।
क्षोभ मंडल (Troposphere)
यह पृथ्वी के वायुमंडल की सबसे निचली परत है जिसमें बादल, बर्फ, बारिश की घटनाएं होते हैं।
ट्रोपोस्फीयर में वायुमंडल के सभी वायु और जल वाष्प (जो बादलों और वर्षा का निर्माण करते हैं) का लगभग 75% होता है।
क्षोभमंडल समुद्र तल से लगभग 10 किमी (6.2 मील) तक फैला हुआ है।
हमारे वायुमंडल और बाहरी अंतरिक्ष के बीच की अनुमानित सीमा, जिसे कार्मन रेखा के रूप में जाना जाता है, थर्मोस्फीयर में लगभग 100 किमी की ऊँचाई पर है।
कई उपग्रह वास्तव में थर्मोस्फीयर के भीतर पृथ्वी की परिक्रमा करते हैं! सूर्य से आने वाली ऊर्जा की मात्रा में भिन्नता इस परत के शीर्ष की ऊँचाई और इसके भीतर के तापमान दोनों पर एक शक्तिशाली प्रभाव डालती है।
थर्मोस्फीयर का शीर्ष ज़मीन से 500 से 1,000 किमी (311 से 621 मील) ऊपर कहीं भी पाया जा सकता है।
ऊपरी तापमण्डल में तापमान लगभग 500° सेल्सियस (932° फारेनहाइट) से लेकर 2,000° सेल्सियस (3,632° फारेनहाइट) या उससे अधिक तक हो सकता है।
What is the temperature range in the thermosphere?
थर्मोस्फीयर में तापमान की सीमा काफी चरम पर होती है और सौर गतिविधि के आधार पर बदलती रहती है:
सामान्य सीमा: 500°C से 2,000°C (या 932°F से 3,632°F)
उच्च सौर गतिविधि (जैसे सौर फ्लेयर्स) के दौरान: यह 2,500°C (4,532°F) से अधिक हो सकता है.
Thermosphere height
थर्मोस्फीयर पृथ्वी की सतह से लगभग 80 से 700 किलोमीटर (50 से 435 मील) ऊपर तक फैला हुआ है। यह मेसोस्फीयर के ऊपर और एक्सोस्फीयर के नीचे वायुमंडल की परत है।
"हॉट पोटैटो" एक इडियम है, जिसका इस्तेमाल किसी ऐसी चीज़ के लिए किया जाता है, जिसे कोई नहीं चाहता है. यह अक्सर ऐसे मुद्दों या स्थितियों के लिए इस्तेमाल किया जाता है, "हॉट पोटैटो" एक बहुत ही आम इडियम है, जिसका इस्तेमाल कई तरह के संदर्भों में किया जा सकता है. यह एक ऐसा इडियम है, जिसे हर कोई समझता है और इसका इस्तेमाल आसानी से किया जा सकता है.
The phrase' a hot potato' can be understand as a delicate subject which people have different opinions and feel very emotional about.
Example of use: We should never ask about anyone's marital status. it can be a hot potato.
एक मुद्दा या प्रश्न जिसके बारे में लोगों की अलग-अलग राय है और बहुत दृढ़ता से महसूस करते हैं. आप कह सकते हैं कि विवादास्पद या जोखिम भरे होते हैं.एक समस्या या स्थिति जिससे निपटना कठिन है और बहुत अधिक असहमति का कारण बनती है
उदाहरण के लिए, अगर कोई पार्टी में किसी ऐसे व्यक्ति के साथ बातचीत करना नहीं चाहता है, जिससे वह सहज नहीं महसूस करता है, तो वह कह सकता है कि वह "हॉट पोटैटो" से बच रहा है. या, अगर कोई कंपनी किसी ऐसे प्रोजेक्ट को नहीं लेना चाहती है, जो बहुत जोखिम भरा है, तो वह कह सकती है कि वह "हॉट पोटैटो" को नहीं पकड़ना चाहती है.
"हॉट पोटैटो" का इस्तेमाल अक्सर बच्चों के खेल में भी किया जाता है, जिसमें बच्चे एक-दूसरे को एक गर्म आलू पास करते हैं. जो बच्चा आलू पास करने से बचता है, वह खेल से बाहर हो जाता है. यह खेल लोगों को एक-दूसरे के साथ बातचीत करने और सहयोग करने के लिए प्रोत्साहित करता है.
उदाहरण
The issue of controlling to terrorism has become a hot potato in the Pakistan.
आतंकवाद के नियंत्रण का मुद्दा पाकिस्तान में एक अनसुलझा विषय बनकर रह गया है।
The issue of price hike and survival of common people is a hot potato between the two government and opposition.
महंगाई और आम जनता की सर्वाइवल का मुद्दा सरकार और विपक्ष के बीच तकरार मुद्दा बन चूका है
Corruption is always a hot potato during elections.
चुनावों के समय भ्रष्टाचार हमेशा एक बड़ा विवादित मुद्दा होता है।
The abortion issue is a hot potato in American politics.
अबॉर्शन का मुद्दा अमेरिकी पॉलिटिक्स में एक ज्वलंत और विवादित मुद्दा है।
The company is trying to avoid taking on any more hot potatoes.
कंपनी और और किसी विवादित विषय को लेने से बचने की कोशिश कर रही है।
The teacher dropped the hot potato of discipline to the principal.
टीचर ने डिसिप्लिन का अनुशासन का मुद्दा प्रिंसिपल को थमा दिया।
भारत के चार धाम चार प्रमुख हिंदू तीर्थस्थल हैं जो देश के चार दिशाओं में स्थित हैं। ये चार धाम जिन्हे प्रमुख तौर पर जाना जाता है-बद्रीनाथ (उत्तर दिशा), द्वारका (पश्चिम दिशा), पुरी (पूर्व दिशा) तथा रामेश्वरम (दक्षिण दिशा) का हिंदू धर्म में विशेष महत्त्व है और इन्हें जीवन में एक बार अवश्य दर्शन करने योग्य माना जाता है। ये चार धाम तीर्थस्थल न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि इनके ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्त्व भी अत्यधिक हैं। यहां की यात्रा आत्मिक शांति और आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करती है। आइए, इन चार धामों के बारे में विस्तार से जानते हैं:
हिन्दू धर्मग्रंथों के अनुसार बद्रीनाथ (उत्तराखंड),द्वारका (गुजरात), जगन्नाथ पुरी (उड़ीसा) और रामेश्वरम (तमिलनाडू) चार धाम है जो विभिन्न देवी-देवताओं और धार्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध हैं.आश्चर्यजनक रूप से ये चरों धार भारत के चारों दिशाओं में स्थित है. आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा परिभाषित ये चार वैष्णव तीर्थ हैं जहाँ हर हिंदू को अपने जीवन काल मे अवश्य जाना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि इन तीर्थ स्थलों पर जाने से हिंदुओं को मोक्ष प्राप्त करने में मदद मिलती है । इसमें उत्तर दिशा मे बद्रीनाथ, पश्चिम की ओर द्वारका, पूर्व दिशा मे जगन्नाथ पुरी और दक्षिण मे रामेश्वरम धाम है। आइये जानते हैं इन प्रमुख चार धामों के बारे में विस्तृत जानकारी.
यह धाम उत्तराखंड राज्य के चमोली जिले में स्थित एक प्रसिद्ध हिंदू तीर्थस्थल है यहां बद्रीनाथ मंदिर है, जिसमें विष्णु के बद्रीनाथ रूप की मूर्ति प्रतिष्ठित है। यह मंदिर चार धामों में से एक है और चार धाम यात्रा का पूर्वी धाम है। बद्रीनाथ भारत के उत्तराखंड राज्य में स्थित एक प्रसिद्ध हिंदू तीर्थस्थल है. यह अलकनंदा नदी के तट पर स्थित है और चार धाम यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है.
बद्रीनाथ मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है और यह भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है. मंदिर के गर्भगृह में भगवान विष्णु की एक चरणपादुका (पैर की छाप) स्थापित है. बद्रीनाथ मंदिर को 8वीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य ने बनवाया था. मंदिर परिसर में कई अन्य मंदिर और धार्मिक स्थल भी हैं, जिनमें से कुछ हैं:
तप्त कुंड: यह एक गर्म पानी का कुंड है, जिसका पानी पवित्र माना जाता है.
नारद कुंड: यह एक पवित्र कुंड है, जिसका पानी भगवान नारद को समर्पित है.
ब्रह्म कुंड: यह एक पवित्र कुंड है, जिसका पानी भगवान ब्रह्मा को समर्पित है.
गरुड़ चट्टान: यह एक चट्टान है, जिस पर भगवान गरुड़ का पदचिह्न है.
वेद व्यास गुफा: यह एक गुफा है, जहां वेद व्यास ने महाभारत की रचना की थी.
बद्रीनाथ एक अत्यंत लोकप्रिय तीर्थस्थल है और हर साल लाखों श्रद्धालु यहां आते हैं. मंदिर परिसर को चारों ओर से हिमालय की बर्फ से ढकी चोटियों से घेरा हुआ है, जो इसकी सुंदरता को और बढ़ा देता है. बद्रीनाथ एक शांतिपूर्ण और आध्यात्मिक स्थान है, जहां लोग आकर आराम और शांति पा सकते हैं.
जगन्नाथ पुरी (Jagannath Puri):
जगन्नाथ पुरी भारत के ओडिशा राज्य में स्थित एक प्रसिद्ध हिंदू तीर्थस्थल है. यह भगवान जगन्नाथ को समर्पित एक विशाल मंदिर के लिए जाना जाता है. मंदिर को 12वीं शताब्दी में ओडिशा के राजा अनंतवर्मन ने बनवाया था. मंदिर का निर्माण लाल और सफेद बलुआ पत्थर से किया गया है और यह 135 फीट ऊंचा है. मंदिर के गर्भगृह में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तियां स्थापित हैं. भगवान जगन्नाथ को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है.
जगन्नाथ पुरी एक अत्यंत लोकप्रिय तीर्थस्थल है और हर साल लाखों श्रद्धालु यहां आते हैं. मंदिर परिसर को चारों ओर से दीवारों से घेरा हुआ है और केवल हिंदू ही मंदिर के अंदर प्रवेश कर सकते हैं. मंदिर के परिसर में एक विशाल रथ यात्रा होती है, जिसमें भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तियों को मंदिर से बाहर निकालकर शहर के चारों ओर घुमाया जाता है. रथ यात्रा एक अत्यंत भव्य और रंगीन उत्सव है, जो लाखों लोगों को आकर्षित करती है. यह धाम ओडिशा राज्य के पुरी जिले में स्थित है। जगन्नाथ पुरी मंदिर में भगवान जगन्नाथ, बालभद्र, और सुभद्रा की मूर्तियां प्रतिष्ठित हैं। यह मंदिर चार धामों में से पश्चिमी धाम है।
रामेश्वरम् (Rameswaram):
यह धाम तमिलनाडु राज्य के रामेश्वरम जिले में स्थित है। रामेश्वरम में श्री रामेश्वर स्वामी मंदिर है, जिसमें शिव के पृथ्वी तत्व को दर्शाने वाली ज्योतिर्लिंग की पूजा की जाती है। यह मंदिर चार धामों में से दक्षिणी धाम है।
रामेश्वरम भारत के तमिलनाडु राज्य के रामनाथपुरम जिले में स्थित एक द्वीप शहर है. यह शहर हिंदुओं के चार धामों में से एक है और भगवान शिव को समर्पित रामेश्वरम मंदिर के लिए प्रसिद्ध है. रामेश्वरम मंदिर एक प्राचीन मंदिर है, जिसका निर्माण भगवान राम ने लंका पर विजय प्राप्त करने के बाद किया था. मंदिर में भगवान शिव का एक लिंग स्थापित है, जिसे रामलिंगम कहा जाता है. रामेश्वरम मंदिर भारत के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है और हर साल लाखों श्रद्धालु यहां आते हैं.
रामेश्वरम एक धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल है. यह शहर रामायण के कई घटनाओं से जुड़ा हुआ है. रामेश्वरम में रामेश्वरम द्वीप, रामेश्वरम मंदिर, धनुषकोटि, सीतामीनार और रामेश्वरम रेलवे स्टेशन जैसे कई ऐतिहासिक स्थल हैं. रामेश्वरम एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल भी है और यहां हर साल लाखों पर्यटक आते हैं.
रामेश्वरम एक अत्यंत पवित्र और ऐतिहासिक स्थल है. यह शहर हिंदुओं के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है और यह एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल भी है.
यह धाम गुजरात राज्य के द्वारका जिले में स्थित है। द्वारका में द्वारकाधीश मंदिर है, जिसमें श्री कृष्ण की मूर्ति प्रतिष्ठित है। यह मंदिर चार धामों में से एक है और चार धाम यात्रा का पश्चिमी धाम है।
द्वारका भारत के गुजरात राज्य के देवभूमि द्वारका ज़िले में स्थित एक प्राचीन नगर और नगरपालिका है. द्वारका गोमती नदी और अरब सागर के किनारे ओखामंडल प्रायद्वीप के पश्चिमी तट पर बसा हुआ है. यह हिन्दुओं के चारधाम में से एक है और सप्तपुरी (सबसे पवित्र प्राचीन नगर) में से भी एक है. यह श्रीकृष्ण के प्राचीन राज्य द्वारका का स्थल है और गुजरात की सर्वप्रथम राजधानी माना जाता है.
द्वारका का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा हुआ है. कहा जाता है कि भगवान कृष्ण ने मथुरा से निकाले जाने के बाद द्वारका नगरी बसाई थी. द्वारका नगरी सोने और चांदी से बनी थी और यह बहुत ही समृद्ध थी. द्वारका नगरी में भगवान कृष्ण ने अपने सभी भाइयों और परिवार के साथ रहकर अपना राज्य चलाया था.
द्वारका नगरी का वर्णन महाभारत के आठवें स्कंध में मिलता है. महाभारत में कहा गया है कि द्वारका नगरी एक बहुत ही सुंदर नगरी थी. द्वारका नगरी में कई मंदिर और महल थे. द्वारका नगरी में एक बहुत ही विशाल समुद्र तट भी था. द्वारका नगरी में भगवान कृष्ण ने अपने सभी भाइयों और परिवार के साथ रहकर अपना राज्य चलाया था.
द्वारका नगरी आज भी एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है. द्वारका नगरी में भगवान कृष्ण के कई मंदिर हैं. द्वारका नगरी में एक बहुत ही प्रसिद्ध मंदिर है, जिसका नाम द्वारकाधीश मंदिर है. द्वारकाधीश मंदिर भगवान कृष्ण को समर्पित है. द्वारकाधीश मंदिर भारत के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है.
द्वारका नगरी एक बहुत ही पवित्र नगरी है. द्वारका नगरी में भगवान कृष्ण ने अपना राज्य चलाया था और उन्होंने अपने भक्तों को बहुत सारी शिक्षाएं दी थीं. द्वारका नगरी एक बहुत ही ऐतिहासिक नगरी भी है. द्वारका नगरी में कई ऐतिहासिक स्थल हैं, जो आज भी मौजूद हैं.
द्वारका नगरी एक बहुत ही लोकप्रिय पर्यटन स्थल भी है. द्वारका नगरी में हर साल लाखों पर्यटक आते हैं. द्वारका नगरी में भगवान कृष्ण के मंदिरों के अलावा, कई अन्य दर्शनीय स्थल भी हैं. द्वारका नगरी में एक बहुत ही सुंदर समुद्र तट भी है. द्वारका नगरी एक बहुत ही शांतिपूर्ण और आध्यात्मिक स्थान है.
चार धाम यात्रा का क्रम क्या है?
ऐसा माना जाता है कि यमुनोत्री से यात्रा की शुरुआत करने पर बिना किसी बाधा के आपकी चारधाम यात्रा पूर्ण हो जाती है। इसके साथ ही शास्त्रों में वर्णित है कि, यात्रा की शुरुआत पश्चिम से की जाती है और पूर्व में समाप्त होती है इसलिए भी सबसे पहले यमुनोत्री धाम के दर्शन किये जाते हैं। तीर्थयात्रा यमुनोत्री से शुरू होती है, गंगोत्री की ओर बढ़ती है, केदारनाथ पर जाती है और अंत में बद्रीनाथ में समाप्त होती है। यात्रा सड़क या हवाई मार्ग से पूरी की जा सकती है। कुछ भक्त दो धाम यात्रा या दो तीर्थस्थलों - केदारनाथ और बद्रीनाथ की तीर्थयात्रा भी करते हैं।
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अस्वीकरण: कृपया ध्यान दें कि लेख में उल्लिखित टिप्स/सुझाव केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से हैं ताकि आपको उस मुद्दे के बारे में अपडेट रखा जा सके जो आम लोगों से अपेक्षित है. आपसे निवेदन है कि कृपया इन सुझावो को पेशेवर सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए तथा अगर आपके पास इन विषयों से सम्बंधित कोई विशिष्ट प्रश्न हैं तो हमेशा अपने ज्योतिषी या पेशेवर सुझाव प्रदाता से अवश्य परामर्श करें।
हाल के दिनों में जिस प्रकार से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रेरणात्मक उदेश्य के लिए संस्कृत श्लोक को शेयर करने का सिलसिला शुरू किया था, उसी के अंतर्गत आज उन्होंने अतीत के पछतावे और भविष्य की चिंताओं से मुक्त होकर, वर्तमान क्षण में पूरी तरह से जीने और कर्म करने का संदेश देने वाले एक संस्कृत सुभाषितम साझा किया। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने एक संस्कृत सुभाषितम साझा किया-
"गते शोको न कर्तव्यो भविष्यं नैव चिन्तयेत्।
वर्तमानेन कालेन वर्तयन्ति विचक्षणाः।"
चाणक्य नीति से लिए गए इस श्लोक का मतलब है कि किसी को अतीत पर शोक नहीं करना चाहिए और न ही भविष्य के बारे में चिंता करनी चाहिए। बुद्धिमान व्यक्ति केवल वर्तमान में ही कार्य करते हैं।
श्लोक के माध्यम से प्रधानमंत्री ने लोगों को स्पष्ट सन्देश दिया है कि जो समय बीत गया है उसके बारे में शोक नहीं करना। इसका मतलब साफ है कि हमें हमेशा वर्तमान के बारे में सोचना चाहिए क्योंकि वही हमारे हाथ में हैं. बुद्धिमान और अनुभवी व्यक्ति केवल वर्तमान परिस्थिति के अनुसार ही जीवनयापन करते हैं |
संस्कृत के इस श्लोक की विवेचना करने निम्न अर्थ निकलता है-
गते शोको न कर्तव्यो: बीते हुए (अतीत) का शोक (दुःख) नहीं करना चाहिए।
भविष्यं नैव चिन्तयेत्: भविष्य के बारे में बिल्कुल भी चिंता नहीं करनी चाहिए।
वर्तमानेन कालेन: वर्तमान के समय से ही।
वर्तयन्ति विचक्षणाः: बुद्धिमान लोग कार्य करते/जीते हैं (या जीवन यापन करते हैं)।
यह श्लोक हमें अतीत के पछतावे और भविष्य की चिंताओं से मुक्त होकर, वर्तमान क्षण में पूरी तरह से जीने और कर्म करने का संदेश देता है, क्योंकि यही समझदारी का मार्ग है।
राष्ट्रपति भवन का अमृत उद्यान 3 फरवरी से खुल चुका है और आप के लिए परिवार के साथ घूमने का सुनहरा अवसर है। ध्यान रहे कि राष्ट्रपति भवन का अमृत उद्यान 31 मार्च, 2026 तक आम जनता के लिए खुला रहेगा। इस साल दर्शक बाल वाटिका - पल्मेरिया गार्डन - बरगद गार्डन - बोन्साई गार्डन - कलकल बहती धारा - केंद्रीय लॉन - लंबा गार्डन - गोलाकार गार्डन का सुन्दर और आकर्षक नज़ारे का दर्शन कर सकेंगे।
इसके अतिरिक्त इस वर्ष आगंतुक ट्यूलिप और विभिन्न प्रकार के गुलाबों के अलावा, कलकल बहती धारा - झरनों वाली जलधारा और रिफ्लेक्सोलॉजी पथों वाला बरगद उद्यान देख सकेंगे।
लोग सप्ताह में छह दिन सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक (अंतिम प्रवेश शाम 5 बजे) उद्यान का भ्रमण कर सकते हैं। उद्यान सोमवार को बंद रहेगा, क्योंकि यह रखरखाव का दिन है, और होली के कारण 4 मार्च को भी बंद रहेगा।
अमृत उद्यान निम्नलिखित दिनों में विशेष श्रेणियों के लिए खुला रहेगा:
3 मार्च – रक्षा कर्मियों के लिए
5 मार्च – वरिष्ठ नागरिकों के लिए
10 मार्च – महिलाओं और आदिवासी महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए
13 मार्च – दिव्यांगजनों के लिए
जानें कैसे करें टिकट बुकिंग?
उद्यान में प्रवेश और बुकिंग निःशुल्क है। ऑनलाइन बुकिंग https://visit.rashtrapatibhavan.gov.in/ पर की जा सकती है। आगंतुकों के अनुभव को बेहतर बनाने के उद्देश्य से, इस वर्ष मौके पर बुकिंग की सुविधा उपलब्ध नहीं होगी। आगंतुक केवल ऑनलाइन माध्यम से ही टिकट बुक कर सकते हैं। इसलिए, आगंतुकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने स्लॉट पहले से ही ऑनलाइन बुक कर लें। उन्हें टिकट में उल्लिखित समय-सीमा और अन्य निर्देशों का पालन करने की भी सलाह दी जाती है। किसी विशेष दिन के लिए बुकिंग पिछले दिन सुबह 10:00 बजे बंद हो जाएगी।
जानें कैसे और कहाँ से करें एंट्री?
सभी आगंतुकों के लिए प्रवेश और निकास राष्ट्रपति भवन परिसर के गेट नंबर 35 से होगा, जो नॉर्थ एवेन्यू और राष्ट्रपति भवन के चौराहे के पास स्थित है। आगंतुकों की सुविधा के लिए, केन्द्रीय सचिवालय मेट्रो स्टेशन से गेट नंबर 35 तक शटल बस सेवा सुबह 9:30 बजे से शाम 6:00 बजे के बीच हर 30 मिनट पर उपलब्ध रहेगी। केन्द्रीय सचिवालय मेट्रो स्टेशन से अंतिम शटल बस सेवा शाम 4:00 बजे होगी।
आगंतुकों के लिए मार्ग बाल वाटिका - पल्मेरिया गार्डन - बरगद गार्डन - बोन्साई गार्डन - कलकल बहती धारा - केंद्रीय लॉन - लंबा गार्डन - गोलाकार गार्डन होगा।
ट्यूलिप और विभिन्न प्रकार के गुलाबों के अलावा, इस वर्ष आगंतुक कलकल बहती धारा - झरनों वाली एक जलधारा और रिफ्लेक्सोलॉजी पथों वाला बरगद उद्यान देख सकेंगे।
क्या-क्या साथ लें जा सकते हैं दर्शक?
आगंतुक अपने साथ मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक चाबियां, पर्स/हैंडबैग, पानी की बोतलें और शिशुओं के लिए दूध की बोतलें ले जा सकते हैं। सार्वजनिक मार्ग पर विभिन्न स्थानों पर पीने का पानी, शौचालय और प्राथमिक चिकित्सा/चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
अमृत उद्यान के अलावा, लोग सप्ताह में छह दिन (मंगलवार से रविवार) राष्ट्रपति भवन और राष्ट्रपति भवन का संग्रहालय भी जा सकते हैं। वे प्रत्येक शनिवार को राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में गार्ड परिवर्तन समारोह भी देख सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए https://visit.rashtrapatibhavan.gov.in/ पर जाएं।