चाणक्‍य नीति :जानें किन तीन चीजों के पास में होना हीं पुरुषों के स्वर्ग के समान है यह धरती


चाणक्य या कौटिल्य के विचार आज भी उतने हीं प्रासंगिक है जितने चाणक्य के काल में थे. नन्द वंश को समूल नाश करने धरती को वास्तविक राजा देने की शपथ खाने वाले चाणक्य किसी परिचय की मोहताज नहीं है. उन्होंने धरती को वास्तविक राजा देने के लिए काफी खोज किया और चन्द्रगुप्त मौर्य को  राजा बनाकर मौर्य वंश की स्थापना किया। चाणक्य वास्तव में विद्वान थें जिनकी पुस्तक अर्थशास्त्र जिसका आजतक मूल्याङ्कन नहीं  किया जा सका है. 

उन्हीं  लिखित उक्त श्लोक के बारे में हम यहाँ चर्चा कर रहें हैं जो वास्तव में किसी भी पुरुष की सम्पूर्णता के लिए चाणक्य ने बताया  है.

यस्य पुत्रो वशीभूतो भार्या छन्दानुगामिनी ।

विभवे यश्च सन्तुष्टस्तस्य स्वर्ग इहैव हि ॥ 

उक्त  श्लोक के माध्यम से आचार्य चाणक्य ने किसी भी पुरुष  के जीवन में पुत्र, पत्नी और धन के महत्त्व पर प्रकाश डाला  है.  लेकिन चाणक्य ने बताया है कि पुरुष के जीवन में सिर्फ  पुत्र, पत्नी और धन का होना हीं उसके सुखद जीवन की गारंटी बिलकुल नहीं  है.  उनका कहना है कि   बेटा आज्ञाकारी हो तथा पत्नी पति के अनुकूल आचरण करने वाली हो तभी उनके होने की सार्थकता है. इसके साथ हीं पत्नी  पतिव्रता हो एवं जो प्राप्त धन से ही सन्तुष्ट हो, ऐसे व्यक्ति के लिए स्वर्ग यहीं है, यह जानना चाहिए।

आचार्य चाणक्य के अनुसार, किसी भी व्यक्ति को सुखी जीवन के लिए तीन प्रमुख बातों का ध्यान रखना चाहिए या ये तीन चीजें होनी चाहिए:

संस्कारी संतान: यदि पुत्र आज्ञाकारी हो, माता-पिता की बात मानता हो और सही मार्ग पर चलता हो, तो परिवार में कभी क्लेश नहीं होता।

समर्पित पत्नी: यदि पत्नी पति की भावनाओं को समझने वाली, सुख-दुःख में साथ देने वाली और अनुकूल आचरण करने वाली हो, तो गृहस्थ जीवन बेहद आनंदित रहता है।

संतोषी मन: मनुष्य को अपने कर्म से प्राप्त धन (वैभव) पर संतोष करना चाहिए। अत्यधिक लालच और असंतोष ही मनुष्य के दुखों का मुख्य कारण होते हैं।

UNESCO विश्व धरोहर शहर - बुखारा का ऐतिहासिक केंद्र: उज़्बेकिस्तान, जानें खास बातें


पवित्र बुखारा उज़्बेकिस्तान के खास पर्यटन स्थलों में से एक है। इस शहर का ऐतिहासिक केंद्र UNESCO की विश्व धरोहर सूची में शामिल है। यह शहर 2500 साल से भी ज़्यादा पुराना है। सिल्क रूट पर बसा बुखारा शहर 2,000 साल से भी ज़्यादा पुराना है। यह मध्य एशिया में मध्ययुगीन शहर का सबसे बेहतरीन उदाहरण है, जिसका शहरी ढांचा आज भी काफी हद तक वैसा ही है। यहाँ के खास स्मारकों में इस्माइल समानी का मशहूर मक़बरा शामिल है, जो 10वीं सदी की मुस्लिम वास्तुकला का एक शानदार नमूना है। इसके अलावा, यहाँ 17वीं सदी के कई मदरसे भी हैं। वास्तिकता यह है कि  बुखारा वह शहर है जहां सिल्क रोड का इतिहास, इस्लामी संस्कृति और मध्ययुगीन वास्तुकला आज भी एक साथ सांस लेते दिखाई देते हैं।

बुखारा लंबे समय तक मध्य एशिया का एक अहम आर्थिक और सांस्कृतिक केंद्र रहा। यह प्राचीन फ़ारसी शहर कई सदियों तक इस्लामी संस्कृति का मुख्य केंद्र रहा और 8वीं सदी में खिलाफ़त का एक बड़ा सांस्कृतिक केंद्र बन गया।

UNESCO विश्व धरोहर सूची में कब शामिल हुआ?

Historic Centre of Bukhara को वर्ष 1993 में UNESCO की World Heritage List में शामिल किया गया। इसे UNESCO ने सांस्कृतिक विरासत के रूप में मान्यता दी है और इसके लिए Criteria (ii), (iv) और (vi) लागू होते हैं। 2016 में इसकी सीमाओं में एक छोटा संशोधन भी दर्ज किया गया।

1220 में चंगेज़ खान और 1370 में तैमूर के मंगोल आक्रमणों से पहले की कुछ अहम निशानियों को छोड़कर, यह पुराना शहर 16वीं सदी की शुरुआत से उज़्बेक शासन के शैबानी दौर की शहरी बनावट और वास्तुकला की गवाही देता है। 16वीं सदी में फिर से बनाया गया किला, शहर के शुरुआती दिनों से लेकर आज तक शहर का मुख्य केंद्र रहा है।

शुरुआती समय के बचे हुए अहम स्मारकों में इस्माइल समानी का मशहूर मक़बरा शामिल है, जो अपनी सादगी भरी सुंदरता के लिए जाना जाता है और पूरी मुस्लिम दुनिया में 10वीं सदी की वास्तुकला का सबसे बेहतरीन बचा हुआ नमूना है।

बुखारा, उज़्बेकिस्तान: Facts in Brief  

  • देश: उज़्बेकिस्तान
  •  UNESCO श्रेणी: Cultural World Heritage
  •  UNESCO में शामिल: 1993
  •  इतिहास: 2,000 वर्ष से अधिक पुराना
  •  ऐतिहासिक महत्व: सिल्क रोड का प्रमुख केंद्र
  •  विश्व धरोहर क्षेत्र: 216 हेक्टेयर
  • बफर ज़ोन: 339 हेक्टेयर
  •  प्रमुख पहचान: Poi-Kalyan, Ismail Samani Mausoleum, मदरसे और ऐतिहासिक बाजार
  •  विशेष महत्व: मध्य एशिया में इस्लामी शिक्षा, संस्कृति और सूफी परंपरा का ऐतिहासिक केंद्र

बुखारा की खासियत क्या है?

बुखारा की सबसे बड़ी विशेषता केवल इसके अलग-अलग स्मारक नहीं हैं, बल्कि इसका पूरा ऐतिहासिक शहर-परिदृश्य है। यहां गलियां, धार्मिक इमारतें, मदरसे, बाजार, मस्जिदें और पारंपरिक वास्तुकला मिलकर मध्ययुगीन मध्य एशियाई शहर की तस्वीर प्रस्तुत करते हैं। UNESCO इसे मध्य एशिया के सबसे अच्छी तरह संरक्षित इस्लामी शहरों के उदाहरणों में गिनता है।

 सिल्क रोड का महत्वपूर्ण केंद्र

प्राचीन Silk Roads पर स्थित होने के कारण बुखारा सदियों तक व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण केंद्र रहा। यहां से गुजरने वाले व्यापारियों के साथ वस्तुओं के अलावा भाषाएं, विचार, धर्म, कला और स्थापत्य परंपराएं भी एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र तक पहुंचीं।

 इस्लामी शिक्षा और संस्कृति का केंद्र

बुखारा लंबे समय तक इस्लामी संस्कृति और शिक्षा का प्रमुख केंद्र रहा। UNESCO के अनुसार 9वीं से 16वीं शताब्दी के बीच यह निकट-पूर्व में मुस्लिम धर्मशास्त्र, विशेष रूप से सूफी परंपरा, का एक प्रमुख केंद्र था। उस दौर में शहर में 200 से अधिक मस्जिदें और 100 से अधिक मदरसे होने का उल्लेख मिलता है।

इस्माइल सामानी का मकबरा

बुखारा के प्रमुख ऐतिहासिक स्मारकों में Ismail Samani Mausoleum विशेष स्थान रखता है। UNESCO इसे 10वीं शताब्दी की मुस्लिम वास्तुकला की उत्कृष्ट कृति और उस काल की वास्तुकला का महत्वपूर्ण जीवित उदाहरण मानता है। इसकी ईंटों की ज्यामितीय सजावट इसकी विशेष पहचान है।

 पोई-कल्याण परिसर

Poi-Kalyan बुखारा की सबसे प्रसिद्ध ऐतिहासिक पहचान में से एक है। इसका प्रमुख आकर्षण कल्याण मीनार है, जिसे UNESCO 11वीं शताब्दी के कराखानिद काल की उत्कृष्ट ईंट-निर्मित वास्तुकला का उदाहरण बताता है।

प्राचीन मदरसे और बाजार

बुखारा के ऐतिहासिक केंद्र में अनेक मदरसे और पारंपरिक बाजार संरचनाएं हैं। Ulugbek Madrasa, Abdulaziz-Khan Madrasa, Lyabi-Khauz ensemble तथा पारंपरिक गुंबददार बाजारों ने शहर की ऐतिहासिक पहचान को बनाए रखा है।


English Is Easy: 20 Important Vocabularies Common asked in Competitive Exams


20 sets of advanced English words with meanings. They are arranged from moderately difficult to highly challenging. These word meaning are important for forthcoming competitive exams and it will be beneficial for you to score and leading on your opponents in the exams. 

Set Word Meaning
1 Ephemeral Lasting for a very short time
2 Meticulous Very careful and precise
3 Ambiguous Having more than one possible meaning
4 Benevolent Kind and generous
5 Resilient Able to recover quickly from difficulties
6 Pragmatic Dealing with things realistically and practically
7 Ubiquitous Present everywhere
8 Eloquent Fluent and persuasive in speaking or writing
9 Scrutinize To examine very carefully
10 Alleviate To make something less severe
11 Tenacious Determined; not giving up easily
12 Candid Honest and straightforward
13 Conundrum A confusing or difficult problem
14 Fastidious Very attentive to detail; hard to please
15 Ineffable Too great to be expressed in words
16 Magnanimous Generous and forgiving, especially toward rivals
17 Obfuscate To deliberately make something unclear or confusing
18 Perspicacious Having keen insight and good judgment
19 Recalcitrant Stubbornly refusing to obey authority
20 Sagacious Wise and showing sound judgment

Now Check your IQs and reply all these questions given below-

 1. Ephemeral means:

A. Permanent
B. Short-lived
C. Powerful
D. Dangerous
Answer: B

2. Ubiquitous means:
A. Rare
B. Everywhere
C. Invisible
D. Ancient
Answer: B

3. Magnanimous means:
A. Selfish
B. Brave
C. Generous and forgiving
D. Angry
Answer: C

4. Obfuscate means:
A. Simplify
B. Clarify
C. Confuse intentionally
D. Ignore
Answer: C

5. Perspicacious means:
A. Lazy
B. Highly perceptive
C. Nervous
D. Humorous
Answer: B

6. Recalcitrant means:
A. Cooperative
B. Stubbornly disobedient
C. Friendly
D. Excited
Answer: B

7. Ineffable means:
A. Impossible to express in words
B. Easily explained
C. Very loud
D. Extremely common
Answer: A

8. Tenacious means:
A. Weak
B. Persistent
C. Forgetful
D. Curious
Answer: B

9. Fastidious means:
A. Careless
B. Hard to satisfy because of high standards
C. Funny
D. Honest
Answer: B

10. Conundrum means:
A. Celebration
B. Difficult problem
C. Success
D. Adventure
Answer: B

11. Pragmatic means:
A. Imaginative
B. Practical
C. Emotional
D. Wealthy
Answer: B

12. Alleviate means:
A. Increase
B. Reduce or relieve
C. Destroy
D. Build
Answer: B

13. Eloquent means:
A. Silent
B. Fluent and persuasive
C. Shy
D. Confused
Answer: B

14. Benevolent means:
A. Kind
B. Cruel
C. Proud
D. Lazy
Answer: A

15. Meticulous means:
A. Careful and precise
B. Quick
C. Angry
D. Loud
Answer: A

16. Ambiguous means:
A. Clear
B. Having multiple meanings
C. Honest
D. Fast
Answer: B

17. Scrutinize means:
A. Ignore
B. Examine carefully
C. Celebrate
D. Predict
Answer: B

18. Sagacious means:
A. Wise
B. Foolish
C. Timid
D. Confident
Answer: A

19. Candid means:
A. Honest and direct
B. Secretive
C. Confused
D. Arrogant
Answer: A

20. Resilient means:
A. Easily broken
B. Able to recover quickly
C. Slow
D. Quiet
Answer: B

Scoring Guide

  • 18–20: Exceptional Vocabulary IQ
  • 15–17: Excellent
  • 12–14: Very Good
  • 8–11: Good
  • 5–7: Average
  • 0–4: Needs Vocabulary Improvement

शांति के समय अपना भाला बेच देता है, उसे युद्ध के समय लकड़ी की छड़ी से काम चलाना पड़ता है

 अफ्रीका की एक बहुत ही प्रसिद्ध कहावत है —

'जो व्यक्ति शांति के समय अपना भाला बेच देता है, उसे युद्ध के समय लकड़ी की छड़ी से काम चलाना पड़ता है।" 

मतलब स्पष्ट है।।

याद रखें दोस्तों, इस कहावत में जीवन की वह सच्चाई छुपी है जो हमारे जीवन में हर वक्त प्रासंगिक है। कहने का अर्थ  जो व्यक्ति शांति के समय में अपना भाला बेच देता है, उसे युद्ध के समय छड़ी खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। यहीं तो जीवन का एकमात्र सच्चाई है। भविष्य की तैयारी करें। जब आपके पास ताकत और अवसर हों, तो उन्हें बर्बाद न करें, क्योंकि जब मुसीबत आएगी, तो हो सकता है कि आपके पास वो संसाधन (resources) न हों जिनकी आपको ज़रूरत है।

जीवन में सफलता के लिए हम अपने पढ़ाई, स्किल सीखने या वित्तीय सुरक्षा को अहमियत देते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि हम भविष्य के लिए कितने जागरूक और सचेत हैं। 

जब आज आपके पास ताकत है, समय है और मौके हैं, तो उन्हें फालतू चीज़ों में बर्बाद मत कीजिए।

क्योंकि जब मुसीबत आती है, तब पछताने का वक्त नहीं मिलता। अगर आज आपने अपने संसाधनों की कद्र नहीं की, तो कल आपको मजबूरियों से समझौता करना पड़ेगा।

इसलिए आज ही खुद को मजबूत बनाइए!

नजरिया जीने का: प्रेम में समर्पण की मौन भाषा को जानना भी जरूरी है

 

 

स्पर्श की कोमलता को, हम जानते हैं बाद में,
हृदय के गहरे संबंधों को पहले जानना भी जरूरी है।

हाँ, नि: शब्द तो होता है प्रेम, लेकिन
समर्पण की मौन भाषा को जानना भी जरूरी है।

यह विश्वास हीं तो है, जो लाती है करीब हमें,
फिर भी, सहमति की हद भी जानना जरूरी है।

हाँ, सच्चा प्रेम बिल्कुल निःस्वार्थ हीं होता है।
पर अपेक्षा की सीमा का जानना भी जरूरी है।

भावनाओं की गहराई में उतरना तो प्रेम है, पर,
मौन वार्तालाप की संवेदना को जानना भी जरूरी है।







नजरिया जीने का: कठिन समय में अपने उत्साह को बनाये रखना क्यों है जरुरी


प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा करते हुए बताया कि बुद्धिमान और दृढ़निश्चयी लोग विपरीत और कठिन परिस्थितियों के दौरान भी अपना उत्साह नहीं खोते हैं।

प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषितम् को साझा किया है-

 “आपत्काले च कष्टेऽपि नोत्साहस्त्यज्यते बुधैः।

इति प्रबोधितस्तेन कथञ्चिद् दृढबुद्धिना।।”

 

"इस सुभाषितम् का भाव है कि बुद्धिमान और स्थिर मन वाले लोग यह अच्छी तरह जानते हैं कि सच्चे समझदार व्यक्ति कभी भी विपत्ति, संकट या कठिन समय में अपने उत्साह को नहीं त्यागते हैं।


श्री मोदी ने एक्‍स पर एक पोस्ट में कहा;

 “आपत्काले च कष्टेऽपि नोत्साहस्त्यज्यते बुधैः।

इति प्रबोधितस्तेन कथञ्चिद् दृढबुद्धिना।।”

सैन्य अभ्यास कज़िंद-2026: भारत-कजाकिस्तान संयुक्त सैन्य अभ्यास, जानें खास बातें


सैन्य अभ्यास कज़िंद-2026: भारत-कजाकिस्तान संयुक्त सैन्य अभ्यास 'कज़िंद' के नौवें संस्करण का आयोजन कजाकिस्तान में ओस्केमेन में संपन्न होगा। यह युद्धाभ्यास 28 सितंबर से 11 अक्टूबर 2026 तक आयोजित किया जाएगा जिसमें भारतीय सशस्त्र बलों का 60 सदस्यीय दल कजाकिस्तान में ओस्केमेन के लिए रवाना हो गया।  भारतीय दल में मुख्य रूप से गढ़वाल राइफल्स की एक बटालियन के जवान, अन्य सैन्य बलों के जवान और भारतीय वायु सेना के जवान शामिल हैं। कजाकिस्तान सशस्त्र बल भी लगभग उतनी ही संख्या में अपना दल भेजेगा, जिसमें मुख्य रूप से थल सेना के जवान होंगे।

इस युद्धाभ्यास का उद्देश्य अंतर-संचालनीयता को बढ़ाना और संयुक्त राष्ट्र के आदेश के तहत एक उप-पारंपरिक वातावरण में संयुक्त आतंकवाद-विरोधी अभियान चलाने के लिए दोनों बलों की संयुक्त क्षमता को मजबूत करना है।

कज़िंद-2026 का मुख्य उद्देश्य अर्ध-शहरी और पर्वतीय क्षेत्रों में संयुक्त आतंकवाद-विरोधी अभियान चलाना है। इसमें संयुक्त योजना और क्रियान्वयन, हवाई गतिशीलता और मानवरहित हवाई प्रणालियों (यूएएस) तथा आतंकवाद-रोधी क्षमताओं के एकीकृत उपयोग पर विशेष बल दिया जाएगा। भाग लेने वाले दल आतंकवादी गतिविधियों के संयुक्त जवाब, छापे, खोज और विनाश अभियान, घेराबंदी और तलाशी अभियान, हेलीपैड और लैंडिंग स्थलों की सुरक्षा तथा विशेष हेलीकॉप्टर आधारित अभियानों आदि में एक साथ प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे।

इस युद्धाभ्यास में समन्वित योजना और क्रियान्वयन को सुगम बनाने के लिए एक संयुक्त कमान चौकी और एक खुफिया एवं निगरानी केंद्र की स्थापना भी शामिल होगी। प्रशिक्षण का समापन एक व्यापक सत्यापन अभ्यास के साथ होगा, जिसमें दोनों टुकड़ियां एक नकली आतंकवादी खतरे के विरुद्ध पूर्वाभ्यास की गई रणनीति, तकनीक और प्रक्रियाओं को संयुक्त रूप से लागू करेंगी।

युद्धाभ्यास कज़िंद-2026 दोनों पक्षों को एक-दूसरे के परिचालन अनुभव से लाभ उठाने का अवसर प्रदान करेगा, साथ ही पेशेवर संबंधों, आपसी विश्वास और सौहार्द को मजबूत करेगा। यह युद्धाभ्यास भारत और कजाकिस्तान के बीच सैन्य सहयोग को और गहरा करेगा तथा क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और सामूहिक सुरक्षा के प्रति दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करेगा।

पूर्णिमा को जन्म लेने वाले होते हैं सूर्य के समान सितारा: गौतम बुद्ध , महर्षि वेदव्यास, नानक देव और अन्य

न  केवल ज्योतिष और कुंडलीशास्त्र के अनुसार, बल्कि भौगोलिक दृष्टिकोण से अगर देखी जाए तो पूर्णिमा का हमारे जीवन में खास महत्त्व होता है. कई घरों में पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु जिन्हे सत्यनारायण भगवान् के नाम से भी पुकारा जाता है, उनका पूजन किया जाता है.  जाहिर है की एक महीने में पूर्णिमा का दिन अगर इतना महत्व का है तो निश्चित हीं पूर्णिमा के दिन जन्म लेना शुभ माना जाता है.  
ऐसी मान्यता है कि पूर्णिमा का प्रभाव रचनात्मकता और कलात्मक प्रवृत्तियों को बढ़ावा देता है और इस  दिन  को जन्म लेने वाले लोगों की कल्पना शक्ति अक्सर प्रबल होती है और ये कला, लेखन, संगीत या अन्य रचनात्मक गतिविधियों से संबंधित क्षेत्रों में उत्कृष्टता प्राप्त कर सकते हैं। वैसे तो पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है खासकर कार्तिक पूर्णिमा का जिसे कार्तिक स्नान और अन्य महत्व का दिन के लिए भी जाना जाता है। आज हम बात करेंगे विख्यात कुंडलीशास्त्र, नुमेरोलॉजिस्ट और मोटिवेटर हिमांशु  रंजन शेखर से कि  पूर्णिमा तिथि को जन्म लेने वाले जातकों की क्या होती विशेषता। 

आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि महान विभूतियाँ जैसे बुद्ध, वेदव्यास, गुरु नानक, चैतन्य महाप्रभु, कबीर दास आदि का जन्म पूर्णिमा के दिन हुआ था। शास्त्रों में कहा गया है पूर्णिमा पर जन्म लेने वाले सूर्य के समान तेजस्वी और जगत का कल्याण करने वाले होते हैं...

पूर्णिमा के दिन जन्मे बच्चे कैसे होते हैं

वैदिक ज्योतिष के अनुसार भी पूर्णिमा के दिन जन्मे लोगों को भाग्यशाली समझा जाता है और ऐसे व्यक्ति मानसिक रूप से मजबूत, बुद्धिमान, और सफल होता है. ऐसे लोग अक्सर दयालु होते हैं और धनवान भी बनते हैं, हालांकि कुंडली में अन्य ग्रहों की स्थिति और व्यक्तिगत प्रयास भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. 

एस्ट्रोलॉजी के अनुसार अलग-अलग तिथियों को जन्म लेने  वाले व्यक्तियों में खास लक्षण और गुण  पाए जाते हैं और उसमे अगर आप पूर्णिमा की महत्त्व को देखेंगे तो हिन्दू पंचांग के अनुसार इसका अलग स्थान होता है. गुरु पूर्णिमा, बुद्ध पूर्णिमा, शरद पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा, श्रावण पूर्णिमा सहित अन्य पूर्णिमा है जिनके स्थान होता है. स्वाभाविक है कि पूर्णिमा को जन्म लेने वाले लोग भी खास गुणों से परिपूर्ण होते हैं. 


उदार प्रवृति: 

पूर्णिमा के दिन जन्म लेने वाले जातक की सबसे बड़ी विशेषता यह होती है कि  ऐसे लोग अपने जीवन में काफी उदार प्रवृत्ति वाले होते हैं ऐसे लोग दूसरों के मनोभावों को और भावनाओं को काफी अच्छी तरह समझते हैं.  यह लोग अपने संबंधी या आपने आसपास के लोगों को हमेशा सुखी  देखना चाहते हैं और उनके सुख दुख में हमेशा साथ रहते हैं वह कभी भी अपने संबंधियों के वह हमेशा वह हमेशा अपने संबंधियों और अपने दोस्तों की आवश्यकता के समय उपलब्ध रहते हैं. 

जानें किस दिन को जन्म लेने वाले लोग होते हैं रोमांटिक और अपने पार्टनर के प्रति केयरिंग

भगवान में विशेष अनुरक्ति 

 पूर्णिमा के दिन जन्म लेने वाले जातक भगवान में अत्यधिक विश्वास करने वाले होते हैं और उनका ऐसा मान्यता है कि ईश्वर हमेशा उनके लिए उपलब्ध रहते हैं. ईश्वर की  भक्ति और पूजा-पाठ उनके जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा होती है और उनका यह मान्यता है की ईश्वर होता है जो  किसी भी संकट या कष्ट में वह मदद करता है. ऐसे विश्वास का कारण भी होता क्योंकि  ये लोग अपने कार्यो को  अंजाम तक पहुंचाने के दौरान भी ईश्वर को नहीं भूल सकते हैं. 

गुरु/पिता का विशेष स्थान:

पूर्णिमा के दिन जन्म लेने वाले जातकों में अपने  गुरु और पिता के प्रति विशेष अनुरक्ति देखी  जाती है. जीवन में किसी भी उपलब्धि या विशेष अवसरों पर  ऐसे लोग अपने पिता और अपने गुरु को विशेष तौर पर याद करना  हैं और सारा श्रेय उन्हें हीं देना पसंद करते हैं. उनका ऐसा मान्यता है कि जीवन में पिता  और टीचर  के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता और जीवन में वाे इनके  प्रति वे काफी अनुराग दिखाते हैं और अपना पथ प्रदर्शक और मोटीवेटर मानते हैं.

वचन के पक्के: 

पूर्णिमा के दिन जन्म लेने वाले जातकों की सबसे बड़ी विशेषता यह होती है कि वह वचन के काफी  पक्के होते हैं. उनके लिए उनके द्वारा किया गया कोई भी वादा या वचन अपने जीवन से काफी जरूरी है और इसके लिए वह किसी भी हद तक जा सकते हैं. उनके लिए  अपने द्वारा दिया गया कोई भी वचन या किया गया वादा को हर हाल में पूरा किया जाना और  ऐसे लोग ईमानदारी के साथ उसे पूरा करने की कोशिश भी करते हैं. 

यशस्वी और प्रभावशाली:

पूर्णिमा के दिन जन्म लेने वाले जातक काफी यशस्वी और प्रभावशाली होते हैं जो जीवन में काफी प्रभाव छोड़ने में सफल  रहते हैं. ऐसे लोग अपने कर्मों और अपने सोच की वजह से जीवन में काफी आगे बढ़ते हैं साथ ही दुनिया को रोशनी भी दिखाने का काम करते हैं. उन्हें जो भी काम जीवन में मिलती है वे लोग उसे काफी तल्लीनता के साथ करना पसंद करते हैं.

ईमानदारी: 

ईमानदारी पूर्णिमा के दिन जन्म लेने वाले लोगों का सबसे प्रमुख विशेषता होती है जीवन जीने के लिए ऐसे लोग ईमानदारी को काफी तवज्जो देते  हैं और जीवन में आगे बढ़ने का सबसे प्रमुख कारण यही होती है कि वे अपने जीवन के  हर क्षेत्र   में  चाहे वह इनके निजी जीवन  हो या परिवारिक जीवन हो सामाजिक जीवन हो या प्रोफेशनल फ्रंट,  हर जगह वह इमानदारी से अपने काम को अंजाम देते हैं.

पूर्णिमा  के दिन जन्म लेने  वालों में अक्सर समाज और दुनिया के महापुरुषों और धार्मिक  हस्तियों का नाम आता है. पूर्णिमा के दिन जिन महापुरुषों और धार्मिक हस्तियों का जन्म हुआ था उनमे शामिल हैं-

गौतम बुद्ध: बौद्ध धर्म के संस्थापक भगवान बुद्ध का जन्म, ज्ञान प्राप्ति (बुद्धत्व), और महापरिनिर्वाण (मृत्यु) तीनों ही वैशाख पूर्णिमा के दिन हुए थे। इस दिन को बुद्ध पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है।

महर्षि वेदव्यास: जिन्होंने वेदों का संकलन किया और महाभारत की रचना की, उनका जन्म आषाढ़ पूर्णिमा को हुआ था। इस दिन को भारत में गुरु पूर्णिमा या व्यास पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है।

गुरु नानक देव जी: सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी का जन्म पारंपरिक रूप से कार्तिक पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है, जिसे गुरु नानक जयंती के नाम से जाना जाता है।

संत कबीर दास: कई ऐतिहासिक स्रोतों और मान्यताओं के अनुसार, संत कबीर का जन्म ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन हुआ था।

चैतन्य महाप्रभु: गौड़ीय वैष्णव धर्म के एक प्रमुख संत और समाज सुधारक चैतन्य महाप्रभु का जन्मदिन फाल्गुन पूर्णिमा को 'गौरा पूर्णिमा' के रूप में मनाया जाता है।



अपोलो 11: कैसे इंसान ने चंद्रमा तक पहुंचकर इतिहास रचा?

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मानव का चंद्रमा पर पहला कदम – अपोलो 11 इतिहास का पहला मिशन था जिसने इंसानों को चंद्रमा की सतह पर सफलतापूर्वक उतारा। 20 जुलाई 1969 को "ईगल (Eagle)" लूनर मॉड्यूल ने चंद्रमा के Sea of Tranquility (शांति का सागर) क्षेत्र में सफल लैंडिंग की।

वास्तविकता  तो यह है कि अपोलो 11 केवल एक अंतरिक्ष मिशन नहीं था, बल्कि मानव साहस, वैज्ञानिक नवाचार और असंभव को संभव बनाने की मिसाल था। 20 जुलाई 1969 को चंद्रमा पर रखा गया पहला मानव कदम आज भी पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा और उपलब्धि का प्रतीक माना जाता है। आइये जानते हैं अपोलो मिशन  की  खास बातें-

अपोलो 11 का मुख्य मकसद प्रेसिडेंट जॉन एफ. केनेडी का 25 मई, 1961 को किये गए  नेशनल गोल को पूरा करना था जिसका सार थे- क्रू के साथ चांद पर लैंडिंग करना और धरती पर वापस आना।

अपोलो 11 को 16 जुलाई, 1969 को केप केनेडी से लॉन्च किया गया था।

अपोलो 11 को कमांडर नील आर्मस्ट्रांग, कमांड मॉड्यूल पायलट माइकल कॉलिन्स और लूनर मॉड्यूल पायलट एडविन “बज़” एल्ड्रिन 114 गुणा 116 मील के शुरुआती अर्थ-ऑर्बिट में ले गए।


18 जुलाई को, आर्मस्ट्रांग और एल्ड्रिन ने अपने स्पेससूट पहने और कोलंबिया से ईगल तक डॉकिंग टनल से LM को चेक करने और दूसरा TV ट्रांसमिशन करने के लिए चढ़े।

19 जुलाई को, अपोलो 11 के चांद के पीछे से धरती के संपर्क से बाहर निकलने के बाद, इसने पहला लूनर ऑर्बिट इंसर्शन मैनूवर किया।

20 जुलाई, 1969 को नील आर्मस्ट्रांग चांद की सतह पर उतरे और उन्होंने इस घटना के बारे में बताते हुए कहा, “…इंसान के लिए एक छोटा कदम, इंसानियत के लिए एक बड़ी छलांग।”

पहला कदम – Neil Armstrong चंद्रमा पर कदम रखने वाले दुनिया के पहले व्यक्ति बने।

ऐतिहासिक कथन – "यह एक इंसान का छोटा कदम है, लेकिन मानवता के लिए एक विशाल छलांग है।"

दूसरे व्यक्ति – Buzz Aldrin चंद्रमा पर उतरने वाले दूसरे व्यक्ति बने।

चंद्रमा पर समय – दोनों अंतरिक्ष यात्रियों ने लगभग 21 घंटे 36 मिनट चंद्रमा की सतह पर बिताए, जिनमें लगभग 2 घंटे 31 मिनट बाहर चलकर वैज्ञानिक कार्य किए।

चंद्र नमूने – लगभग 21.5 किलोग्राम चंद्रमा की मिट्टी और चट्टानों के नमूने पृथ्वी पर लाए गए।

ईगल साइट 2 में सी ऑफ़ ट्रैंक्विलिटी में 0 डिग्री, 41 मिनट, 15 सेकंड नॉर्थ लैटिट्यूड और 23 डिग्री, 26 मिनट ईस्ट लॉन्गिट्यूड पर उतरा।

क्रू मेंबर 

  • नील आर्मस्ट्रांग, कमांडर
  • एडविन ई. “बज़” एल्ड्रिन जूनियर, लूनर मॉड्यूल पायलट
  • माइकल कॉलिन्स, कमांड मॉड्यूल पायलट


लैंडिंग

  • 24 जुलाई, 1969; दोपहर 12:50 बजे EDT
  • पैसिफिक ओशन
  • रिकवरी शिप: USS हॉर्नेट
(Source-NASA)

रिश्ते काँच की तरह होते हैं: इन्हें संभालकर रखना ही जीवन की सबसे बड़ी समझदारी


आज के तेज़-रफ़्तार और भागदौड़ भरे जीवन में रिश्तों की अहमियत धीरे-धीरे कम होती जा रही है। तकनीक और सोशल मीडिया ने लोगों को एक-दूसरे से जोड़ने का दावा तो किया है, लेकिन विडंबना यह है कि इन्हीं माध्यमों के बीच भावनात्मक दूरियाँ भी बढ़ती जा रही हैं। आज अधिकांश रिश्ते केवल औपचारिकता तक सीमित होकर रह गए हैं।

रिश्ते काँच की तरह नाज़ुक होते हैं। इन्हें जितने प्रेम, विश्वास और संवेदनशीलता से संभाला जाए, उतने ही मजबूत बने रहते हैं। लेकिन यदि एक बार इनमें दरार आ जाए, तो उसे भरने की लाख कोशिशों के बाद भी वह निशान हमेशा बाकी रहता है। इसलिए रिश्तों को टूटने से बचाना ही सबसे बड़ी समझदारी है।

रिश्ते शब्दों से नहीं, समय और अपनापन से चलते हैं

अक्सर लोग सोचते हैं कि अच्छे शब्द बोल देने या आर्थिक मदद कर देने से रिश्ते मजबूत हो जाते हैं। जबकि सच्चाई इससे कहीं अलग है। रिश्तों को जीवित रखने के लिए सबसे अधिक आवश्यकता होती है—समय, अपनापन और सच्चे प्रेम की।

आज लगभग हर व्यक्ति के हाथ में स्मार्टफोन है और हर कोई सोशल मीडिया पर सक्रिय है। फिर भी लोग पहले की तुलना में अधिक अकेले क्यों महसूस कर रहे हैं? इसका कारण यह है कि ऑनलाइन बातचीत वास्तविक संबंधों की जगह नहीं ले सकती। किसी अपने का हाल-चाल पूछना, उसके सुख-दुख में साथ देना और उसके लिए समय निकालना ही रिश्तों की असली पहचान है।

व्यस्त जीवन में भी अपनों के लिए समय निकालें

यह सच है कि आज की प्रतिस्पर्धी दुनिया में मेहनत और भागदौड़ जीवन की आवश्यकता बन चुकी है। बेहतर भविष्य, करियर और आर्थिक सुरक्षा के लिए सभी संघर्ष कर रहे हैं। लेकिन इसी दौड़ में यदि अपने ही पीछे छूट जाएँ, तो सफलता का आनंद भी अधूरा रह जाता है।

जीवन की सबसे अनमोल पूंजी समय है। यदि हम अपने परिवार, माता-पिता, भाई-बहनों और मित्रों के लिए थोड़ा-सा समय भी निकाल लें, तो रिश्तों में मिठास बनी रहती है। सच्चा प्रेम केवल बड़े-बड़े वादों से नहीं, बल्कि छोटी-छोटी परवाहों से झलकता है।

रिश्तों की नींव विश्वास और सम्मान है

हर रिश्ते की मजबूती आपसी विश्वास, सम्मान और समझ पर टिकी होती है। जब दो लोगों के बीच विश्वास कायम रहता है, तो कई बार बिना कुछ कहे भी मन की बात समझी जा सकती है। ऐसे रिश्तों में खामोशी भी बहुत कुछ कह जाती है।

लेकिन जहाँ विश्वास टूटता है, वहाँ रिश्ते भी धीरे-धीरे बिखरने लगते हैं। एक बार टूटे हुए विश्वास को दोबारा कायम करना आसान नहीं होता। इसलिए हमें हमेशा अपने व्यवहार, शब्दों और निर्णयों में ऐसी सावधानी रखनी चाहिए जिससे रिश्तों की गरिमा बनी रहे।

कठिन समय में अपने ही सबसे पहले साथ खड़े होते हैं

जीवन में अच्छे समय में साथ देने वाले बहुत मिल जाते हैं, लेकिन असली रिश्तों की पहचान कठिन परिस्थितियों में होती है। जब जीवन में कोई संकट, बीमारी, आर्थिक परेशानी या मानसिक तनाव आता है, तब हमारे अपने ही सबसे पहले हमारा हाथ थामते हैं।

इसीलिए अपनों को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। उनके साथ बिताया गया समय, उनकी चिंता करना और उनके सुख-दुख में सहभागी बनना ही रिश्तों की सबसे बड़ी ताकत है।

जीवन की असली पूंजी पैसा नहीं, रिश्ते हैं

आज के समय में धन कमाना आवश्यक है। आर्थिक रूप से सक्षम होना हर व्यक्ति की आवश्यकता है। लेकिन यह मान लेना कि केवल पैसा ही जीवन की हर खुशी खरीद सकता है, एक भ्रम है।

पैसा सुविधाएँ दे सकता है, लेकिन अपनापन नहीं। धन से घर खरीदा जा सकता है, परिवार नहीं; महंगे उपहार खरीदे जा सकते हैं, लेकिन सच्चा प्रेम नहीं। यदि जीवन में धन तो बहुत हो, लेकिन अपने लोग साथ न हों, तो वह समृद्धि भी अधूरी रह जाती है।

सोशल मीडिया से अधिक ज़रूरी है वास्तविक संवाद

आज सोशल मीडिया पर हजारों मित्र होना आसान है, लेकिन वास्तविक जीवन में कुछ सच्चे रिश्ते बनाए रखना कठिन होता जा रहा है। डिजिटल दुनिया ने संवाद को तेज़ बनाया है, लेकिन भावनाओं को कमजोर भी किया है।

इसलिए केवल संदेश भेजने तक सीमित न रहें। समय-समय पर अपनों से मिलें, उनसे खुलकर बात करें, उनकी खुशियों और परेशानियों में शामिल हों। रिश्तों की मिठास शब्दों से नहीं, बल्कि सच्चे एहसासों और व्यवहार से बनी रहती है।

संयुक्त परिवार रिश्तों की सबसे मजबूत पाठशाला

आज एकल परिवारों (न्यूक्लियर फैमिली) का चलन बढ़ रहा है। इससे सुविधा और स्वतंत्रता तो मिलती है, लेकिन संयुक्त परिवारों में मिलने वाला अपनापन, सहयोग और भावनात्मक सुरक्षा अलग ही होती है।

संयुक्त परिवार हमें साझा जीवन, त्याग, सहयोग, सम्मान और रिश्तों को निभाने की सीख देता है। यही संस्कार जीवनभर हमारे संबंधों को मजबूत बनाए रखते हैं।

शत्रुच्छिद्रं प्रहरेत्: चाणक्य से जानें अर्थात शत्रु की कमजोरी को कैसे पहचाने और उचित समय पर प्रहार करें


महान आचार्य, कूटनीतिज्ञ और विद्वान चाणक्य का आज तक मूलयांकन नहीं किया जा सका है. चाणक्य ने अपने पुस्तक के माध्यम से परिवार के सदस्यों से लेकर राजा तक के लिए अनुशासन और नियमों क्व संकलन आज से सैकड़ों सालों पहले किया जो आज भी उतना हीं प्रासंगिक है. 

क्या आपने कभी सोचा है कि ताकतवर व्यक्ति भी कभी-कभी कमजोर क्यों पड़ जाता है?

चाणक्य नीति का एक महत्वपूर्ण सूत्र है—

“शत्रुच्छिद्रं प्रहरेत्।”अर्थात्—

शत्रु की कमजोरी को पहचानकर, उचित समय पर रणनीतिक कदम उठाना चाहिए।

अर्थात अपने विरोधी या शत्रु की कमजोरियों और कमियों को पहचानकर, उचित अवसर आने पर रणनीतिक रूप से उसका सामना करना चाहिए।

उपरोक्त वर्णित श्लोक के माध्यम से चाणक्य ने अपने दुश्मनों को पराजित करने के लिए उपायों का  चर्चा किया है. यहाँ  “छिद्र” का अर्थ कमजोरी, कमी या vulnerable point और “प्रहरेत्” का अर्थ प्रहार/कार्रवाई करना है। इसे आधुनिक जीवन में किसी को नुकसान पहुँचाने की सलाह के बजाय समस्या की कमजोरी पहचानकर उसका समाधान करने की रणनीति के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है।

चाणक्य के अनुसार किसी भी संघर्ष में केवल अपनी शक्ति पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है।सफल रणनीति के लिए यह समझना भी जरूरी है कि सामने वाले की ताकत क्या है और उसकी कमजोरी कहाँ है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि किसी की कमजोरी का अनुचित लाभ उठाया जाए।

प्राचीन भारतीय नीति और राजनीति के महान आचार्य चाणक्य ने जीवन, राजनीति, कूटनीति और व्यवहार से जुड़े अनेक ऐसे सिद्धांत बताए हैं, जिनमें परिस्थितियों को समझने और सही समय पर सही निर्णय लेने पर विशेष जोर मिलता है।

शत्रु या विरोधी की कमजोरी को पहचानकर उचित समय पर रणनीतिक कदम उठाना।

यहाँ “छिद्र” का अर्थ किसी व्यक्ति की कमजोरी, कमी या vulnerable point से लिया जा सकता है और “प्रहरेत्” का अर्थ है उस स्थिति के अनुसार कार्रवाई करना।

इस सूत्र को केवल युद्ध या शत्रु के संदर्भ में देखने के बजाय जीवन की कठिन परिस्थितियों में रणनीतिक सोच के रूप में भी समझा जा सकता है।

केवल शक्ति ही पर्याप्त नहीं किसी भी संघर्ष या प्रतियोगिता में केवल अपनी शक्ति को बढ़ाना पर्याप्त नहीं होता।

यदि कोई व्यक्ति अपनी ताकत के साथ-साथ अपनी कमजोरियों और सामने मौजूद चुनौती की प्रकृति को भी समझता है, तो उसके लिए बेहतर रणनीति बनाना आसान हो जाता है।

उदाहरण के लिए, यदि कोई विद्यार्थी लगातार परीक्षा में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पा रहा है, तो उसे केवल पढ़ाई के घंटे बढ़ाने के बजाय अपनी वास्तविक समस्या पहचाननी चाहिए।

हो सकता है कि उसकी कमजोरी—

  • समय प्रबंधन में हो,
  • विषय की बुनियादी समझ में हो,
  • नियमित अभ्यास की कमी में हो,
  • या परीक्षा के दौरान होने वाली गलतियों में हो।

जब वास्तविक कमजोरी सामने आती है, तब सुधार की दिशा भी स्पष्ट हो जाती है।

चाणक्य की रणनीतिक सोच में समय का विशेष महत्व माना जाता है।

कई बार सही कदम भी गलत समय पर उठाया जाए तो अपेक्षित परिणाम नहीं मिलता।

इसलिए किसी चुनौती का सामना करते समय तीन बातों पर ध्यान देना उपयोगी हो सकता है—

स्थिति को समझें → कमजोरी पहचानें → सही समय पर कार्रवाई करें।

यही रणनीतिक सोच किसी कठिन परिस्थिति को अवसर में बदलने में सहायता कर सकती है।

अपनी कमजोरियों को भी पहचानें

इस नीति की एक महत्वपूर्ण आधुनिक व्याख्या यह भी हो सकती है कि हमें केवल दूसरों की कमजोरियों पर ध्यान नहीं देना चाहिए।

हमें अपनी कमजोरियों को भी पहचानना चाहिए।

यदि कोई व्यक्ति अपनी कमियों को स्वीकार करके उन्हें सुधारने का प्रयास करता है, तो वह भविष्य की चुनौतियों के लिए अधिक तैयार हो सकता है।

उदाहरण के लिए—

यदि किसी व्यक्ति को पता है कि वह निर्णय लेने में जल्दबाजी करता है, तो वह महत्वपूर्ण निर्णयों से पहले अधिक जानकारी जुटाने और सोचने की आदत विकसित कर सकता है।

इस तरह कमजोरी की पहचान स्वयं को मजबूत बनाने का माध्यम बन जाती है।

इस नीति का आधुनिक जीवन में संदेश स्पष्ट है कि हमारे जीवन में अनेक प्रकार की चुनौतियाँ होती हैं जैसे असफलता, डर, प्रतिस्पर्धा, समय की कमी, गलत आदतें और कठिन परिस्थितियाँ।

इन चुनौतियों का सामना करने के लिए उनकी प्रकृति और कमजोर बिंदुओं को समझना आवश्यक है।

उदाहरण के लिए, यदि “समय की कमी” हमारी समस्या है, तो हमें अपने समय के उपयोग का विश्लेषण करना होगा।

यदि “असफलता का डर” समस्या है, तो हमें यह समझना होगा कि डर पैदा क्यों हो रहा है।

और यदि “लगातार टालने की आदत” समस्या है, तो उसका समाधान अनुशासन और छोटे-छोटे कार्यों से शुरू किया जा सकता है।

इस प्रकार चाणक्य का यह सूत्र आधुनिक जीवन में समस्या की जड़ पहचानने और रणनीतिक समाधान खोजने की प्रेरणा देता है। अगर आप यह सोच रहे हैं की इसका अर्थ दूसरों को नुकसान पहुँचाना है तो फिर आप गलत है. 

“शत्रुच्छिद्रं प्रहरेत्” को किसी व्यक्ति की कमजोरी का अनुचित फायदा उठाने की सलाह के रूप में नहीं समझना चाहिए।

आधुनिक संदर्भ में इसका सकारात्मक संदेश यह है कि किसी चुनौती को समझे बिना उससे संघर्ष करने के बजाय पहले उसकी प्रकृति और कमजोर बिंदुओं को समझें। याद रखें, रणनीति का उद्देश्य अनावश्यक नुकसान पहुँचाना नहीं, बल्कि कठिन परिस्थिति में विवेकपूर्ण निर्णय लेना होना चाहिए। जीवन में सफलता के लिए केवल ताकत जरूरी नहीं है। यह जानना भी महत्वपूर्ण है कि समस्या कहाँ है, कमजोरी क्या है और किस समय कौन-सा कदम उठाना उचित होगा।

चाणक्य कहते हैं कि “समस्या की कमजोरी पहचानिए, सही अवसर को समझिए और बुद्धिमानी से कदम उठाइए क्योंकि यही रणनीतिक सोच कठिन परिस्थितियों का सामना करने में हमारी सहायता कर सकती है।

नोमैडिक एलिफेंट एक्सरसाइज़: भारत और मंगोलिया का संयुक्त सैन्य अभ्यास, जानें खास बातें



नोमैडिक एलिफेंट जो कि भारत और मंगोलिया के बीच आयोजित होने वाला संयुक्त सैन्य अभ्यास है। संयुक्त सैन्य अभ्यास के 18 वें नोमैडिक एलिफेंट संस्करण का आयोजन उत्तराखंड के पिथौरागढ़ स्थित विदेशी प्रशिक्षण केंद्र में प्रारंभ हुआ।

 यह भारत और मंगोलिया में बारी-बारी से आयोजित होने वाला वार्षिक प्लाटून स्तरीय अभ्यास है, जो 3 अक्टूबर, 2026 तक चलेगा। पिछला अभ्यास मई-जून 2025 में मंगोलिया के उलानबटार में आयोजित किया गया था। भारतीय सेना और मंगोलियाई सशस्त्र बलों की ओर से 45-45 जवान इस अभ्यास में भाग ले रहे हैं।

नोमैडिक एलिफेंट एक्सरसाइज का उद्देश्य क्या है?

इस अभ्यास का उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र के जनादेश के तहत अर्ध-शहरी और पर्वतीय इलाकों में आतंकवाद विरोधी अभियान चलाने के लिए दोनों पक्षों की संयुक्त सैन्य क्षमता को बढ़ाना है।

संयुक्त प्रशिक्षण में सामरिक स्तर के अभियानों, सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान, संचालन अभ्यासों को अत्याधुनिक बनाने और दोनों सेनाओं के बीच अंतर-संचालनीयता को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में घेराबंदी और तलाशी अभियान, कक्ष गतिविधि अभ्यास, विशेष हेलीकॉप्टर अभियान, साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण और ड्रोन तथा ड्रोन-रोधी प्रणालियों का उपयोग आदि गतिविधियां शामिल होंगी।

 इन अभ्यासों से दोनों सेनाओं के सैनिकों को वास्तविक संचालन परिदृश्यों में एक साथ प्रशिक्षण प्राप्त करने और संयुक्त रूप से कार्य करने की उनकी क्षमता को मजबूत करने का अवसर मिलेगा।

एक्सरसाइज नोमैडिक एलिफेंट 2026 भारत और मंगोलिया के बीच रक्षा सहयोग को और बढ़ाएगा और दोनों मित्र राष्ट्रों के बीच दीर्घकालिक मित्रता और आपसी विश्वास के बंधन को मजबूत करेगा।

नजरिया जीने का: चाणक्य नीति से जानें क्यों जमीन छोड़कर तारे पकड़ने की कोशिश गलत है


आज के इस अनिश्चितता के माहौल में जहाँ हम मोबाइल और इंटरनेट के युग में अच्छी पुस्तकों से पूरी तरह से कट चुके हैं,  चाणक्य और उनकी नीति और भी प्रासंगिक हो गई  है. सुभाषितानि जिसे संस्कृत में लिखी गई  प्राचीन  पुस्तक है, आज के जमाने में सबसे अधिक सरगर्भीत और अनुसरण करने लायक  .पुस्तक है. उसी के सन्दर्भ में श्लोक का व्याख्या आप यहाँ पाएंगे 

संस्कृत: यो ध्रुवाणि परित्यज्य अध्रुवं परिषेवते।

ध्रुवाणि तस्य नश्यन्ति चाध्रुवं नष्टमेव हि ॥

जो व्यक्ति अपने हाथ में जो निश्चित (पक्का) है उसे छोड़कर अनिश्चितके पीछे भागता है, उसका निश्चित भी नष्ट हो जाता है और अनिश्चित तो पहले से ही नष्ट है। अर्थ स्पष्ट है कि आप निश्चित को कभी भी अनिश्चित के लिए दावं पर नहीं लगाएं। 

अनिश्चित कभी आपका हो सकता है अर्थात आप जो गेस करते हैं वह सही हो सकता है लेकिन वह भविष्य के गर्भ में हैं और संभावना आधी आधी है उसके सही या गलत होने का. लेकिन उसके  लिए आप निश्चित  दांव पर लगाते हैं तो फिर आप मूर्खता कर रहे  हैं. 

आप इसे ऐसे समझ सकते हैं. 

"क्या आप भी पक्की नौकरी छोड़कर शेयर मार्केट में रातों-रात अमीर बनना चाहते हो? तो चाणक्य की ये बात आपके लिए है!"

"चाणक्य कहते हैं - यो ध्रुवाणि परित्यज्य... जो निश्चित को छोड़ अनिश्चित के पीछे भागता है, उसका सब कुछ नष्ट हो जाता है।"

"जैसे - आपके पास एक अच्छी नौकरी है, 50 हजार महीना आ रहा है। वो निश्चित है। लेकिन आपने Instagram पर देखा कि कोई Crypto से करोड़पति बन गया। आपने नौकरी छोड़ी, सारा पैसा Crypto में लगा दिया। अब क्या हुआ? नौकरी गई, और Crypto भी डूब गया। यही है - ध्रुव भी गया, अध्रुव भी गया।"

"तो करना क्या है? पहले निश्चित  को मजबूत करो। नौकरी को पकड़ो, फिर से अनिश्चित आजमाओ और उसको सार्थक करने का प्रयास करो। जब अनिश्चित आपको लगने लगे की वह निश्चित बन गया है , तब उसे आजमाओ  छोड़ो। चाणक्य नीति यही कहती है - कभी भी जमीन छोड़कर तारे मत पकड़ो।"[