पंबन ब्रिज: जानें भारत के पहले वर्टिकल लिफ्ट सी ब्रिज के बारे में, खूबियां और निर्माण की चुनौतियों के बारे में


नया पंबन ब्रिज भारत की इंजीनियरिंग क्षमता और दूरदर्शी बुनियादी ढांचे के विकास का एक प्रमाण है। इतिहास में निहित, इसकी कहानी 1914 की याद दिलाती है जब ब्रिटिश इंजीनियरों ने मूल पंबन ब्रिज का निर्माण किया था, जो रामेश्वरम द्वीप को भारत की मुख्य भूमि से जोड़ने के लिए शेरजर रोलिंग लिफ्ट के साथ एक कैंटिलीवर (धातु या लकड़ी का एक लंबा टुकड़ा जो पुल के अंतिम छोर को सहारा देने के लिए दीवार से फैला होता है) संरचना है। 

नया पंबन ब्रिज भारत की परंपरा और नवाचार को एक साथ लाने की क्षमता का प्रतीक है। पर्यावरण, रसद और तकनीकी चुनौतियों को पार करते हुए, यह अत्याधुनिक वर्टिकल लिफ्ट रेलवे ब्रिज देश की बढ़ती बुनियादी ढांचा क्षमताओं का एक गौरवान्वित करने वाला प्रमाण है। जब ट्रेनें और जहाज बिना किसी परेशानी के ऊपर से गुजरने के लिए तैयार होते हैं, तो यह पुल हमें याद दिलाता है कि जब लक्ष्य और दृढ़ संकल्प एक साथ मिल जाते हैं, तो क्या हासिल किया जा सकता है।

एक सदी से भी ज्यादा समय तक यह तीर्थयात्रियों, पर्यटकों और व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण जीवनरेखा के रूप में काम करता रहा है। हालांकि, मुश्किल समुद्री वातावरण और बढ़ती परिवहन मांगों के कारण आधुनिक समाधान की ज़रूरत थी। 2019 में, भारत सरकार ने तकनीकी रूप से उन्नत, भविष्य के लिए तैयार पुल के निर्माण को मंजूरी दी।

इसके परिणामस्वरूप एक चमत्कार के रूप में, तमिलनाडु में पाक जलडमरूमध्य पर फैला 2.07 किलोमीटर लंबा भारत का पहला वर्टिकल लिफ्ट रेलवे सी ब्रिज सामने आया है। विरासत को नवाचार के साथ मिलाते हुए, नया पंबन ब्रिज न केवल क्षेत्र के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व को संरक्षित करता है, बल्कि डिजाइन, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय विकास में एक महत्वपूर्ण छलांग भी दर्शाता है।

नया पंबन ब्रिज रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) द्वारा बनाया गया था, जो रेल मंत्रालय के तहत एक नवरत्न पीएसयू है।

निर्माण में चुनौतियां: बाधाओं पर काबू पाना

नए पंबन ब्रिज के निर्माण में पर्यावरणीय बाधाओं से लेकर रसद संबंधी जटिलताओं तक कई चुनौतियां सामने आईं। पाक जलडमरूमध्य के अशांत जल, तेज हवाएं और अप्रत्याशित मौसम पैटर्न ने निर्माण प्रक्रिया में कठिनाइयां पैदा कीं। इसके अतिरिक्त, चक्रवातों और भूकंपीय गतिविधि के प्रति क्षेत्र की संवेदनशीलता ने सावधानीपूर्वक योजना बनाने और मजबूत डिजाइन की आवश्यकता जताई।

नए पंबन ब्रिज की मुख्य विशेषताएं क्या है? 

  • 72.5 मीटर लंबे पुल को 17 मीटर तक ऊपर उठाया जा सकता है, जिससे बड़े जहाज़ इसके नीचे से गुजर सकते हैं।
  • नया पुल मौजूदा पुल से 3 मीटर ऊंचा है, जिससे समुद्री संपर्क में सुधार हुआ है।
  • इस सबस्ट्रक्चर को दो ट्रैक के लिए डिजाइन किया गया है, जिसमें सुपरस्ट्रक्चर में शुरू में एक ही लाइन होगी।
  • आधुनिक सामग्रियों और इंजीनियरिंग तकनीकों के इस्तेमाल से पुल की लंबी उम्र सुनिश्चित होगी।
  • पुल का निर्माण स्टेनलेस स्टील की ताकत, उच्च श्रेणी के सुरक्षात्मक पेंट और पूरी तरह से वेल्डेड जोड़ों के साथ किया गया है।
  • विशेष पॉलीसिलोक्सेन कोटिंग इसे जंग से बचाती है, जिससे मुश्किल समुद्री वातावरण में भी इसकी लंबी उम्र सुनिश्चित होती है।

नया पंबन ब्रिज सुनिश्चित करेगा:

बेहतर परिवहन: भारी रेल यातायात और तेज ट्रेनों को समायोजित करना।

समुद्री एकीकरण: बड़े जहाजों को बिना किसी व्यवधान के गुजरने की अनुमति देना।

स्थायित्व: न्यूनतम रखरखाव के साथ 100 से अधिक वर्षों का जीवनकाल सुनिश्चित करना।

भारत वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रहा है

जहां नया पंबन ब्रिज भारत का पहला वर्टिकल लिफ्ट सी ब्रिज है, वहीं, यह अपनी तकनीकी प्रगति और अद्वितीय डिजाइन के लिए जाने जाने वाले अन्य विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त पुलों के जैसा नजर आता है। इनमें संयुक्त राज्य अमेरिका में गोल्डन गेट ब्रिज, लंदन में टॉवर ब्रिज और डेनमार्क-स्वीडन में ओरेसंड ब्रिज शामिल हैं। इनमें से प्रत्येक प्रतिष्ठित संरचना, भले ही डिजाइन और कार्यक्षमता में भिन्न है, लेकिन इंजीनियरिंग उत्कृष्टता के शिखर का प्रतिनिधित्व करती है। अब, नया पंबन ब्रिज भारत की तटीय और भूकंपीय स्थितियों द्वारा उत्पन्न चुनौतियों के साथ अत्याधुनिक तकनीक को जोड़ते हुए, गर्व से खड़ा है।

(Source PIB)

GK Quiz: पृथ्वी से चंद्रमा के हमेशा एक ही भाग के दिखाई देने का कारण क्या है?


पृथ्वी  और चन्द्रमा हमारे सौर्यमंडल के सबसे यूनिक और  कुतूहल  ग्रह और उपग्रह है जहाँ  जीवन है और चन्द्रमा पृथ्वी के एकमात्र उपग्रह है. हम बचपन  से  पृथ्वी और चन्द्रमा के बारे में बहुत कुछ पढ़ते आये हैं लेकिन हम आपको पृथ्वी और चन्द्रमा से जुड़े सामान्य ज्ञान और क्विज के लिए कुछ खास सवाल जवाब लाएं हैं. 

प्रश्न 1: पृथ्वी–चंद्रमा प्रणाली का द्रव्यमान केंद्र (Barycenter) कहाँ स्थित होता है?

उत्तर: पृथ्वी के अंदर, उसकी सतह से लगभग 1700 किमी नीचे।

प्रश्न 2 : पृथ्वी के ध्रुवीय क्षेत्रों में चंद्रमा का गुरुत्वीय प्रभाव अपेक्षाकृत कम क्यों होता है?

उत्तर: चंद्रमा का गुरुत्वीय प्रभाव भूमध्यरेखीय उभार (Equatorial Bulge) पर अधिक केंद्रित होता है।

प्रश्न 3 : चंद्रमा की कक्षा का पृथ्वी की कक्षा (Ecliptic) से झुकाव कितना है?

उत्तर: लगभग 5° (5.145°)।

प्रश्न 4  : पृथ्वी को ‘नीला ग्रह’ क्यों कहा जाता है?

उत्तर: क्योंकि पृथ्वी का लगभग 71% भाग जल से ढका है।

प्रश्न 5  : पृथ्वी से चंद्रमा के हमेशा एक ही भाग के दिखाई देने का कारण क्या है?

उत्तर: चंद्रमा का घूर्णन काल और परिक्रमण काल समान होना (Synchronous Rotation)।

प्रश्न 6 : चंद्रमा पर पाए जाने वाले गहरे मैदानों (Maria) का निर्माण किससे हुआ है?

उत्तर: प्राचीन ज्वालामुखीय लावा प्रवाह से।

प्रश्न 7  : चंद्रमा पर जाने वाला पहला मानव मिशन कौन-सा था?

उत्तर: अपोलो-11 (1969)।

प्रश्न 8  : पृथ्वी का कौन-सा स्तर चंद्रमा के निर्माण सिद्धांत से जुड़ा माना जाता है?

उत्तर: मेंटल (Giant Impact Theory के अनुसार)।

प्रश्न 9  : चंद्रमा पर गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी की तुलना में कितना होता है?

उत्तर: लगभग 1/6 भाग।

प्रश्न 10  : पृथ्वी पर दिन-रात की अवधि में दीर्घकालिक परिवर्तन का मुख्य कारण क्या है?

उत्तर: चंद्रमा के ज्वारीय प्रभाव से पृथ्वी की घूर्णन गति का धीमा होना।



एनसीवीईटी-फ्लिपकार्ट समझौता: गुणवत्तापूर्ण नौकरियों और दीर्घकालिक कैरियर का मार्ग होगी प्रशस्त


राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीवीईटी) ने भारत के व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास तंत्र को  मजबूत करने के लिए फ्लिपकार्ट के साथ एक समझौता किया है। इस सहयोग का उद्देश्य कौशल भारत मिशन के अनुरूप, भारत के तेजी से बढ़ते ई-कॉमर्स और लॉजिस्टिक्स कार्यबल के लिए राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त, उद्योग-आधारित कौशल विकास कार्यक्रम तैयार करना है।

एनसीवीईटी भारत के व्यावसायिक शिक्षा, प्रशिक्षण और कौशल विकास तंत्र में गुणवत्ता को विनियमित करने और सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय स्तर पर मानक स्थापित करना है जो कार्यबल की रोजगार क्षमता को मजबूत करे और सतत आर्थिक विकास में योगदान दे।

प्रशिक्षार्थियों के लिए यह पहल मानकीकृत कार्यक्रम संचालन, कठोर मूल्यांकन प्रक्रियाएं और राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत बाजार मान्यता प्राप्त प्रतिष्ठित प्रमाणपत्र प्रदान करेगी। इन प्रमाणपत्रों को डिजिलॉकर पर सुरक्षित रूप से संग्रहीत किया जा सकता है और अकादमिक क्रेडिट को अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (एबीसी) के माध्यम से सत्यापित किया जा सकता है। जिससे करियर में प्रगति और दीर्घकालिक रोजगार क्षमता को और मजबूती मिलेगी।

इस सहयोग के अंतर्गत, एनसीवीईटी  फ्लिपकार्ट को प्रशिक्षण, मूल्यांकन और प्रमाणन के लिए एक मान्यता  प्रदान करने वाली संस्था (द्वि) बनने की दिशा में क्षमता विकसित करने में मदद करेगा। इससे उद्योग द्वारा तैयार किए गए कौशल विकास कार्यक्रमों को औपचारिक रूप से मानकीकृत, पोर्टेबल और राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त करने में सहायता मिलेगी।

यह उपलब्धि फ्लिपकार्ट को राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क (एनएसक्यूएफ) के अनुरूप प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार करने और प्रदान करने में सक्षम बनाएगी, जिससे गुणवत्ता और उद्योग के लिए प्रासंगिकता में निरंतरता सुनिश्चित होगी।

 रोजगार क्षमता को बढ़ाएंगे यह साझेदारी

 यह साझेदारी फ्लिपकार्ट को मानकीकृत, उच्च-गुणवत्ता वाले प्रशिक्षण और प्रमाणन कार्यक्रम विकसित करने में भी मदद करेगी जो विशेष रूप से वंचित पृष्ठभूमि के व्यक्तियों के लिए रोजगार क्षमता को बढ़ाएंगे।

एमएसडीई की सचिव और एनसीवीईटी की अध्यक्ष सुश्री देबाश्री मुखर्जी ने बताया कि  “फ्लिपकार्ट के साथ एनसीवीईटी की साझेदारी भारत के कौशल विकास ढांचे को उद्योग-अनुकूल, विश्वसनीय और परिणाम  देने वाले  हमारे निरंतर प्रयासों को सुदृढ़ करती है। प्रशिक्षण और प्रमाणन को वास्तविक परिचालन आवश्यकताओं के साथ जोड़कर हम गुणवत्तापूर्ण नौकरियों, गतिशीलता और दीर्घकालिक कैरियर विकास के लिए मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं।”

गुणवत्तापूर्ण नौकरियों और दीर्घकालिक कैरियर का मार्ग होगी प्रशस्त 

फ्लिपकार्ट ग्रुप के मुख्य कॉर्पोरेट मामलों के अधिकारी श्री रजनीश कुमार ने कहा कि “फ्लिपकार्ट में, कौशल विकास कोई गौण प्रयास नहीं है, बल्कि यह भारत के डिजिटल वाणिज्य बुनियादी ढांचे के निर्माण में हमारा मूल योगदान है। देश के सबसे बड़े नियोक्ताओं और ई-कॉमर्स और लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम में सहायक संस्थाओं में से एक होने के नाते  हम इसे अपना दायित्व मानते हैं कि हम मानकीकृत, राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त कौशल विकास के ऐसे मार्ग तैयार करने में मदद करें जो उद्योग-आधारित और परिणाम-उन्मुख हों।”

रोजगार के लिए तैयार प्रतिभाओं का एक बड़ा समूह तैयार करना

एनसीवीईटी के साथ यह सहयोग हमें कारखाने के वास्तविक परिचालन संबंधी जानकारियों को औपचारिक प्रशिक्षण, मूल्यांकन और प्रमाणन ढाँचों में शामिल करने की अनुमति देता है। हमारा उद्देश्य रोजगार के लिए तैयार प्रतिभाओं का एक बड़ा समूह तैयार करना है जो भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था के साथ विकसित हो सके, साथ ही स्किल इंडिया मिशन को सार्थक और दीर्घकालिक तरीके से समर्थन दे सके।

गुरु नानक जयंती: जानें क्यों मनाते हैं प्रकाश पर्व , गुरु नानक देव जी के अनमोल विचार


गुरु नानक देव जी: सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी का जन्म पारंपरिक रूप से कार्तिक पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है, जिसे गुरु नानक जयंती के नाम से जाना जाता है। यह सिख धर्म के संस्थापक और पहले गुरु, गुरु नानक देव जी के जन्मदिन का उत्सव है। 

क्या होता है गुरुपर्व

गुरुपर्व (पंजाबी: ਗੁਰਪੁਰਬ (गुरुमुखी)), जिसे वैकल्पिक रूप से गुरुपर्व या गुरुपरुब के रूप में जाना जाता है, सिख परंपरा में एक गुरु के जन्म की सालगिरह का उत्सव है जिसे एक त्योहार के आयोजन द्वारा चिह्नित किया जाता है।

गुरु नानक देव जी का जन्म 15 अप्रैल, 1469 को पंजाब के तलवंडी नामक गांव में हुआ था। उन्होंने अपने जीवन में सभी धर्मों के लोगों को एकता और प्रेम का संदेश दिया। उन्होंने सामाजिक सुधारों के लिए भी काम किया और जाति व्यवस्था को समाप्त करने का प्रयास किया।

गुरु नानक का जन्मदिन कैसे मनाते हैं? 

गुरु नानक देव जी की जयंती को सिख धर्म में एक महत्वपूर्ण त्योहार माना जाता है। इस दिन सिख लोग गुरुद्वारों में जाकर गुरुग्रंथ साहिब का पाठ करते हैं। इसके अलावा, भजन-कीर्तन, लंगर और प्रभात फेरी जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। 

सिख लोग इस दिन का वर्षों से इन्तजार करते हैं और इस दिन को काफी उत्साह के साथ मनाते हैं. इस दिन को लोग हर साल लोग सड़कों पर आतिशबाजी और जुलूस के साथ गुरु नानक का जन्म मनाते हैं। सिख मंदिरों - गुरुद्वारों में - सिखों की पवित्र पुस्तक, गुरु ग्रंथ साहिब, को पूरा पढ़ा जाता है। मोमबत्तियाँ घरों और सार्वजनिक स्थानों जैसे कार्यालयों और दुकानों में जलाई जाती हैं। 

 गुरु नानक देव जी के अनमोल विचार

1 अहंकार, ईर्ष्या, लालच, लोभ मनुष्य को मनुष्य नहीं रहने देते हैं। ऐसे में इनसे दूर रहना चाहिए।"

2. हमें अपनी कमाई का दसवां हिस्सा परोपकार के लिए और अपने समय का दसवां हिस्सा प्रभु सिमरन या ईश्वर की भक्ति में लगाना चाहिए। 

3.ईश्वर एक है और हर जगह मौजूद है। सदैव एक ही ईश्वर की उपासना करो।  ईश्वर सब जगह उपस्थित हैं। ईश्वर की भक्ति करने वालों को किसी बात का भय नहीं रहता है।

4. लोगों को प्रेम, एकता, समानता, भाईचारा और आध्यात्मिक ज्योति का संदेश देना चाहिए।

5. सत्य को जानना हर एक चीज से बड़ा है और उससे भी बड़ा है सच्चाई से जीना। 




प्रधानमंत्री आज करेंगे पश्चिम बंगाल का दौरा: Facts in Brief


प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज अर्थात 20 दिसंबर को पश्चिम बंगाल की यात्रा पर जहाँ लगभग 3200 करोड़ रुपये की दो राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे और उनकी आधारशिला रखेंगे। इसके अतिरिक्त  राष्ट्रीय राजमार्ग-34 के बाराजागुली-कृष्णनगर मार्ग पर 66.7 किलोमीटर लंबे 4-लेन का उद्घाटन एवं बारासात-बराजागुली मार्ग पर 17.6 किलोमीटर लंबे 4-लेन की आधारशिला भी रखेंगे। ये परियोजनाएं कोलकाता और सिलीगुड़ी के बीच महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग के रूप में काम करेंगी।

 प्रधानमंत्री सुबह लगभग 11 बजकर 15 मिनट पर प्रधानमंत्री पश्चिम बंगाल के नदिया जिले के राणाघाट में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे और उनका उद्घाटन करेंगे। श्री मोदी इस अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित भी करेंगे।

प्रधानमंत्री लगभग 3,200 करोड़ रुपये की दो राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे और उनकी आधारशिला रखेंगे।

Facts in Brief 

  • बाराजागुली-कृष्णनगर मार्ग पर 66.7 किलोमीटर लंबे 4-लेन का उद्घाटन
  • बारासात-बराजागुली मार्ग पर 17.6 किलोमीटर लंबे 4-लेन की आधारशिला 
  • ये परियोजनाएं कोलकाता और सिलीगुड़ी के बीच महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग के रूप में काम करेंगी
  • क्षेत्र में पर्यटन के विकास को प्रोत्साहन

प्रधानमंत्री पश्चिम बंगाल के नदिया जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग-34 के बाराजागुली-कृष्णनगर मार्ग पर 66.7 किलोमीटर लंबे 4-लेन का उद्घाटन करेंगे। श्री मोदी पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग-34 के बारासात-बराजागुली मार्ग पर 17.6 किलोमीटर लंबे 4-लेन की आधारशिला भी रखेंगे।

ये परियोजनाएं कोलकाता और सिलीगुड़ी के बीच महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग के रूप में काम करेंगी। इन परियोजनाओं से यात्रा के समय में लगभग 2 घंटे की बचत होगी, निर्बाध यातायात के लिए वाहनों की तेज और सुगम आवाजाही सुनिश्चित होगी, वाहन संचालन लागत में कमी आएगी, और कोलकाता तथा पश्चिम बंगाल के अन्य पड़ोसी जिलों के साथ-साथ पड़ोसी देशों के साथ कनेक्टिविटी में सुधार होगा। इन परियोजनाओं से क्षेत्र में आर्थिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा और पूरे क्षेत्र में पर्यटन के विकास को प्रोत्साहन मिलेगा।

स्वामी विवेकानंद: प्रेरणादायक जीवन, शिक्षाएं और महान उपलब्धियां

 


स्वामी विवेकानंद एक महान हिन्दू संत और नेता थे जिन्होंने रामकृष्ण मिशन की स्थापना की, जिससे आज विश्व के अनेकों लोग ज्ञान की प्राप्ति कर रहे हैं। स्वामी विवेकानंद के विचार हमेशा युवाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते रहते हैं।  उन्होंने भारतीय और पश्चिमी दर्शन का अध्ययन किया, लेकिन रामकृष्ण से मिलने तक उन्हें मानसिक शांति नहीं मिली। उनका जन्म 12 जनवरी 1863 कोलकाता मे हुआ था।  सन्यास से पहले उनका नाम “नरेन्द्र नाथ दत्त” था। ऐसा कहा जाता है कि उनकी माताजी उन्हें बचपन में “बिलेह” कहकर बुलाती थी।  स्वामी विवेकनंद का जन्म  वीरेश्वर महादेव की बहुत पूजा-पाठ के बाद पुत्र प्राप्त हुआ था इसलिए वे इसे वीरेश्वर महादेव की कृपा ही मानती थी।


युवाओं के प्रेरणास्त्रोत माने जाते हैं, इसलिए भारत में 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस (National Youth Day) के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने साहित्य, दर्शन और धर्म का भी अध्ययन किया, और इस क्षेत्र में माता-पिता तथा शिक्षकों से सहायता मिली। विवेकानंद (1863-1902) विवेकानंद का चरित्र उनके गुरु से बिलकुल अलग था।हालाँकि, वे केवल आध्यात्मिकता से संतुष्ट नहीं थे। जिस सवाल ने उन्हें लगातार परेशान किया, वह था उनकी मातृभूमि की पतित स्थिति। अखिल भारतीय दौरे के बाद उन्होंने पाया कि "गरीबी, गंदगी, मानसिक शक्ति की कमी और भविष्य के लिए कोई उम्मीद नहीं थी। 



अपनी जिज्ञासा को शांत करने के लिए ब्रह्म समाज और साधु संतों के पास भटकने के बाद, नरेन्द्रनाथ रामकृष्ण परमहंस के शरण में पहुंचे। उनके व्यक्तित्व से प्रभावित होकर 1881 में उन्होंने रामकृष्ण को गुरु माना और संन्यास जीवन की शुरुआत की। 

उनका उद्देश्य था भारतीय संस्कृति, वेदांत और योग के संदेश को पूरी दुनिया में फैलाना।आत्मनिर्भरता, आत्मबल और मानव सेवा के वे प्रबल समर्थक थे और इसलिए उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा, "हम ही अपने सभी दुखों और अपने सभी पतन के लिए जिम्मेदार हैं"।



 उन्होंने अपने देशवासियों से अपने उद्धार के लिए काम करने का आग्रह किया। इसलिए उन्होंने अपने देशवासियों को जगाने और उनकी कमजोरियों को याद दिलाने का काम अपने ऊपर ले लिया। उन्होंने उन्हें "गरीबों के लिए सहानुभूति, उनके भूखे मुँह को रोटी और बड़े पैमाने पर लोगों को ज्ञान देने के लिए जीवन और मृत्यु तक संघर्ष करने के लिए प्रेरित किया।" 



1893 में विवेकानंद ने अमेरिका के शिकागो में अखिल विश्व धर्म सम्मेलन (धर्म संसद) में भाग लिया। वहाँ उनके भाषण ने अन्य देशों के लोगों पर गहरी छाप छोड़ी और इस तरह दुनिया की नज़र में भारतीय संस्कृति की प्रतिष्ठा बढ़ाने में मदद की।



 रामकृष्ण परमहंस और विवेकानंद के दर्शन धर्मों के सामंजस्य के इर्द-गिर्द घूमते थे। और यह सामंजस्य व्यक्ति की ईश्वर चेतना को गहन करने से इसकी अनुभूति होती है।

स्वामी विवेकानंद का शिक्षा में योगदान

स्वामी विवेकानंद का शिक्षा में योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक रहा है। उन्होंने शिक्षा को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न मानकर, व्यक्तित्व विकास, नैतिक मूल्यों और समाज सेवा से जोड़ने का प्रयास किया। उनका मानना था कि शिक्षा का उद्देश्य "व्यक्ति में पहले से निहित पूर्णता को अभिव्यक्त करना" होना चाहिए।स्वामी विवेकानंद की नजरों में  शिक्षा का मुख्य उद्देश्य चरित्र निर्माण होना चाहिए क्योंकि उनका मानना था कि चरित्र निर्माण के मजबूती के बगैर जीवन व्यर्थ है. 


स्वामी विवेकानंद शिक्षा को केवल मानसिक रूप से मजबूती नहीं नहीं बल्कि युवाओं के लिए शारीरिक रूप से स्ट्रांग होने भी उनके लिए काफी जरुरी था. उन्होंने कहा था की युवाओं को गीता पढ़ने से अच्छा है कि वो जाकर फूटबाल खेलें क्योंकि उनका मानना था की मजबूत  कन्धों और भुजाओं से वो गीता कीशिक्षा को अच्छे से ग्रहण कर सकेंगे. 

 दूसरों पर निर्भर रहने को वो हमेशा गलत मानते थे क्योंकि उनका मानना था कि इंसान  स्वावलम्बी होना चाहिए. 


बटेश्वर रेलवे स्टेशन 'बी' श्रेणी के स्टेशन में परिवर्तित: जानें किस पूर्व प्रधानमंत्री की है जन्मस्थली

Bateshwar Station know why famous Atal Behari

बटेश्वर रेलवे स्टेशन जो आगरा डिवीजन में स्थित है  यह पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की जन्मस्थली है. इसके अतिरिक्त बटेश्वर अपनी प्राचीन विरासत के लिए भी प्रसिद्ध है, जिसमें यमुना नदी के किनारे स्थित प्रमुख और ऐतिहासिक शिव मंदिर शामिल हैं। बटेश्वर के  सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और राष्ट्रीय महत्व को देखते हुए एक प्रमुख फैसला करते हुए आगरा  डिवीजन ने बटेश्वर (बीएएसआर) रेलवे स्टेशन  को 'डी' श्रेणी के हॉल्ट स्टेशन से 'बी' श्रेणी के क्रॉसिंग स्टेशन में परिवर्तित करने का प्रस्ताव दिया है। वर्तमान में, बटेश्वर (बीएएसआर) भंडाई-उदीमोर खंड में बाह (एचएबी) और फतेहाबाद (एफएबी) स्टेशनों के बीच स्थित एक 'डी' श्रेणी का हॉल्ट स्टेशन है। 

उल्लेखनीय है कि बटेश्वर का सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और राष्ट्रीय महत्व बहुत अधिक है। यह पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की जन्मस्थली है , जो इस स्थान के महत्व को और भी बढ़ा देती है। बटेश्वर अपनी प्राचीन विरासत के लिए भी प्रसिद्ध है, जिसमें यमुना नदी के किनारे स्थित प्रमुख और ऐतिहासिक शिव मंदिर शामिल हैं।

यह क्षेत्र अपने धार्मिक महत्व के अलावा प्रसिद्ध बटेश्वर पशु मेले की मेजबानी के लिए भी जाना जाता है, जो हर साल पूरे क्षेत्र से बड़ी संख्या में आगंतुकों को आकर्षित करता है।

जानें खास बातें 

प्रस्तावित रूपांतरण में निम्नलिखित कार्य शामिल हैं:

1. 750 मीटर लंबाई की दो लूप लाइनें

2. स्टेशन भवन, जिसमें एल भवन भी शामिल है

3. उच्च-स्तरीय प्लेटफ़ॉर्म की संख्या 01

4. परिसंचरण क्षेत्र का विकास

5. जल टैंक, बोरवेल और पंप हाउस

6. दिव्यांगजनों के लिए सुविधाएं और अन्य न्यूनतम आवश्यक सुविधाओं का निर्माण कार्य

7. सिग्नलिंग और दूरसंचार उपकरण और इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग

8. लूप लाइनों की 02 संख्याओं के लिए ओएचई संशोधन

दलाई लामा के जीवन का सार हैं ये Quotes; आपके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा भर देंगे


दलाई लामा अपने शांति और आध्यात्मिक विचारों के कारण पूरी दुनिया में एक विलक्षण हस्ती बन चुके हैं। तिब्बत से निवासित होने के बावजूद दलाई लामा में अपने विचारों और दर्शन से शांति के पूजारीनके रूप में दुनिया में पूजे जाते हैं . आपको यह जानकार आश्चर्य होगा कि वास्तव में दलाई लामा एक पदवी है जो मंगोलियाई खिताब के नाम से जानी जातियां। अगर शाब्दिक अर्थ निकाली जाए तो दलाई लामा का मतलब होता है ज्ञान का महासागर। ऐसा माना जाता है कि वे भगवान अवलोकेतेश्वर के बुद्ध के गुणों के साक्षात रूप होते हैं।

दलाई लामा:Facts In Brief
दलाई लामा का जा 6 जुलाई, 1935 को हुआ था।
दलाई लामा जोकि एक पदवी है, ये 14वें और वर्तमान दलाई लामा हैं जिनका नाम  तेनजिंग ज्ञात्सो है।
दलाई लामा ने 31 मार्च 1959 को तिब्बत से भारत में क़दम रखा था।
दुनिया में अपने शांति के प्रतीक और मसीहा वाली छवि प्राप्त होने के कारण 1989 में दलाई लामा को शांति का नोबेल सम्मान मिला

दलाई लामा: महत्वपूर्ण कोट्स
कहने की जरूरत नहीं है कि चीन की ज्यादतियों के कारण वे अपने भूमि तिब्बत को छोड़कर भारत में शरणार्थी और निर्वासित जीवन जी रहे हैं फिर भी वो करुणा के सागर हैं। वे अपने दुश्मनों के लिए दयाभाव रखते हैं और यही उनके व्यक्तित्व की वास्तविक पहचान है जिसके कारण उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार भी दिया गया।
प्रस्तुत है उनके प्रमुख कोट्स
1. एक छोटे से विवाद से किसी रिश्ते को टूटने मत देना।
2.आप आकर्षण से ही दुसरे के दिमाग को बदल सकते हो गुस्से से नही।

इसरो के प्रमुख अंतरिक्ष मिशन: जानें Facts in Brief


भारत ने वर्तमान में संचालित पीएसएलवी, जीएसएलवी और एलवीएम-3 प्रक्षेपण यानों के माध्यम से निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO) में 10 टन तक तथा भू-समकालिक ट्रांसफर कक्षा (GTO) में 4.2 टन तक के उपग्रह प्रक्षेपित करने की क्षमता के साथ अंतरिक्ष परिवहन प्रणालियों में आत्मनिर्भरता हासिल कर ली है। 

ISRO: जानें Facts in Brief

  • पिछले 5 वर्षों  में अर्थात दिसंबर 2020 से दिसंबर 2025  के दौरान इसरो द्वारा कुल 22 उपग्रह प्रक्षेपित किए गए हैं। इनमें से 7 पृथ्वी अवलोकन, 4 संचार, 2 नेविगेशन, 3 अंतरिक्ष विज्ञान तथा 6 प्रौद्योगिकी प्रदर्शन मिशन से संबंधित हैं।
  • विस्तारित अंतरिक्ष दृष्टि को पूरा करने हेतु प्रक्षेपण यान क्षमताओं को और सशक्त बनाने के लिए सरकार ने नेक्स्ट जेनरेशन लॉन्च व्हीकल (NGLV) के विकास को मंजूरी दी है, जो निम्न पृथ्वी कक्षा में 30 टन तक की अधिकतम पेलोड क्षमता प्रदान करेगा।
  • अंतरिक्ष तक कम लागत में पहुँच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पुन: प्रयोज्य प्रक्षेपण यान प्रौद्योगिकियों का भी विकास किया जा रहा है, जिसमें आंशिक रूप से पुन: प्रयोज्य NGLV शामिल है, जिसकी LEO में 14 टन पेलोड क्षमता होगी। 
  • सरकार की स्पेस विज़न 2047 के अंतर्गत वर्ष 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन की स्थापना तथा वर्ष 2040 तक एक भारतीय को चंद्रमा पर उतारने का लक्ष्य रखा गया है। 
  •  स्पेस विज़न को साकार करने के लिए जमीनी अवसंरचना के विस्तार के तहत सरकार ने दो नए लॉन्च पैड को भी मंजूरी दी है—एक तमिलनाडु के कुलसेकरपट्टिनम में तथा दूसरा अगली पीढ़ी के प्रक्षेपण यानों के लिए तीसरा लॉन्च पैड।

(Source PIB)


सुचिन्द्रम थेरूर वेटलैंड कॉम्प्लेक्स: Facts In Brief

Suchindram Theroor Wetland Facts In Brief

Suchindram Theroor Wetland: सुचिन्द्रम थेरूर वेटलैंड कॉम्प्लेक्स, सुचिन्द्रम-थेरूर मनाकुडी कंजर्वेशन रिजर्व का हिस्सा है। इसे एक महत्वपूर्ण पक्षी क्षेत्र घोषित किया गया है और यह प्रवासी पक्षियों के मध्य एशियाई फ्लाईवे के दक्षिणी सिरे पर स्थित है।

इसे पक्षियों के घोंसले के लिए बनाया गया था और यह हर साल हजारों पक्षियों को आकर्षित करता है। थेरूर पर निर्भर कुल जनसंख्या लगभग 10,500 है और इस जनसंख्या की 75 प्रतिशत आजीविका कृषि पर टिकी है जो बदले में थेरूर जलाशय से निकलने वाले पानी पर निर्भर है।

पक्षियों की लगभग 250 प्रजातियाँ दर्ज की गई हैं, जिनमें से 53 प्रवासी हैं, 12 स्थानिक हैं, और चार खतरे में हैं। कम से कम 183 पौधों और जानवरों की प्रजातियों की उपस्थिति जलाशयों को पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण मंच और चारागाह प्रदान करने में सक्षम बनाती है

सुंदरबन आर्द्रभूमि

यह एक मानव निर्मित, अंतर्देशीय जलाशय है और बारहमासी है। 9वीं शताब्दी के तांबे की प्लेट के शिलालेखों में पसुमकुलम, वेंचिकुलम, नेदुमर्थुकुलम, पेरुमकुलम, एलेमचिकुलम और कोनाडुनकुलम का उल्लेख है। 

इस क्षेत्र में पक्षियों की लगभग 250 प्रजातियां दर्ज की गई हैं, जिनमें से 53 प्रवासी, 12 स्थानिक और 4 विलुप्‍त होने की कगार पर हैं.

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प्रजातियों की गणना

जिला वन अधिकारी एवं वन्यजीव वार्डन, कन्याकुमारी जिला के वेबसाइट के अनुसार सुचिन्द्रम थेरूर वेटलैंड कॉम्प्लेक्स में  प्रजातियों की गणना इस प्रकार से है-

क्रम संख्याश्रेणीसंख्या
1पक्षी की संख्या135
2मछलियों का वर्ग16
3पौधे112
4स्तनधारी की संख्या10
5सरीसृप और उभयचर30
6ऑर्थ्रोपोड75

तंपारा झील-ओडिशा

मुख्य विशेषताएँ

चारों ओर फैली कृषि भूमि जैसे धान के खेत, नारियल के बाग, केले के पेड़ आदि, सिंचाई के लिए आर्द्रभूमि परिसर पर निर्भर हैं। यह संकटग्रस्त प्रजातियों के लिए घोंसले के शिकार आवास प्रदान करता है। यह बर्ड लाइफ इंटरनेशनल के साथ अंतर्राष्ट्रीय पक्षी एवं जैव विविधता क्षेत्र के रूप में सूचीबद्ध है और मध्य एशियाई पक्षी प्रवासी मार्ग का हिस्सा है।

  • स्थान: तमिलनाडु, कन्याकुमारी जिला 
  • क्षेत्रफल: 94.229 हेक्टेयर 
  • संरक्षण: सुचिन्द्रम-थेरूर मनाकुडी संरक्षण रिजर्व का हिस्सा, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत संरक्षित 
  • महत्व: महत्वपूर्ण पक्षी क्षेत्र, मध्य एशियाई फ्लाईवे का दक्षिणी छोर, भूजल पुनर्भरण का स्रोत, बाढ़ नियंत्रण 
  • विशेषताएँ: दो मानव निर्मित जलाशय, थेरूर और सुचिन्द्रम, पक्षियों की 250 से अधिक प्रजातियां

नजरिया जीने का: पतझड़ से सीखें कैसे हर अंत में छिपी होती है नई शुरुआत

नजरिया जीने का: पतझड़ भले हीं खराब मौसम या जीवन में नीरसता का पर्याय बन चुका है, लेकिन इसका मतलब यह तो कदापि नहीं हैं कि जीवन में पतझड़ का आना दुखों के आरंभ से है। पतझड़ में हम उसके इस संकेत को समझने को तैयार नहीं होते हैं कि हर अंत में छिपी होती है नई शुरुआत और हमें आने वाले सुनहरे भविष्य का संकेत छिपा होता है। 

जरूरत इस बात की है कि जब जीवन में आए पतझड़, तब उम्मीदों के बीज बोने के लिए आप उत्साह के साथ तैयार हो जाएं।

याद रखें पतझड़ का मौसम हमें यह सिखाता है कि बहार के मौसम को छोड़ना भी ज़रूरी है क्योंकि जीवन का रीत भीं यहीं है। सुख और दुख, धूप और छांव हीं तो जीवन तो फिर बहार के बाद पतझड़ को इतना बदनाम क्यों करना। 

पतझड़ तो हमें आता हैं यह सिखाने के लिएकि गिरना भी जीवन का हिस्सा है, पर फिर से खिलना हमारी ताकत है और   इसके लिए हमें तैयार रहना है। 
याद रखें, पतझड़ के मौसम में हर गिरा हुआ पत्ता याद दिलाता है कि नया मौसम आने वाला है और इसके साथ हीं यह संदेश भी छिपा है कि ज़िंदगी के पतझड़ में भी उम्मीद बची है क्योंकि अब बसंत दूर नहीं और उसके लिए आप तैयार हों जाएं।

किसी कवि ने कहा भी है
"दुख जाने के बाद सुख का
मूल्य और कुछ बढ़ जाता है
रोने वाला हीं गाता है।"

जीवन का दस्तूर भी यही है कि पेड़ अगर पत्ते छोड़ सकता है, तो हम भी दर्द छोड़ सकते हैं और आने वाले बेहतर कल के लिए आज के अंधियारे से डरना मूर्खता और अधीरता है। याद रखें, हर पतझड़ के बाद हरियाली लौटती है, बस थोड़ा धैर्य रखना होता है। 

गिरना कभी भी जीवन में हार नहीं, बल्कि बदलाव की शुरुआत है और जिसे हम जीवन का बंजर समझ रहे हैं, यह बसंत से पहले का पतझड़ है। याद रखें, जीवन में हर मौसम कुछ सिखाने आता है हां हमें उसे समझने को तैयार रहना होगा।

Born On Tuesday: होते हैं साहसी, जुझारू और जल्दी हार नही मानने वाले@ बिस्मिल्लाह खान, ध्यानचंद, यश चोपड़ा


Born on Tuesday: ज्योतिष और कुंडली शास्त्र के अनुसार मंगलवार का सम्बन्ध प्लेनेट मंगल से होता है और हम सभी जानते हैं की मंगल को लाल प्लेनेट भी कहा जाता है. और यही वजह है की मंगल को जन्म लेने वाले लोग अक्सर साहसी, ऊर्जावान और दृढ़निश्चयी माने जाते हैं, और ऐसे लोग अपने प्रयासों में जल्दी हाँ स्वीकार नहीं करते हैं. मंगल के दिन जन्म लेने वाले जातकों का स्वामी मंगल ग्रह के प्रभाव के कारण उनमें नेतृत्व करने की स्वाभाविक प्रवृत्ति और प्रतिस्पर्धी भावना होती है। आमतौर पर उत्साही और भावुक होने के साथ हीं  उन्हें कभी-कभी अपनी निराशा को शांत करना और अपनी ऊर्जा को रचनात्मक रूप से निर्देशित का गुण अपनाना भी जरुरी  होता है. आइये जानते हैं  मंगलवार को जन्म लेने वाले लोगों के व्यक्तित्व से जुड़े अन्य पहलुओं के बारे में मोटिवेटर और एस्ट्रोलॉजर हिमांशु रंजन शेखर से.

Born on Tuesday Famout Personalities 

मंगलवार को जन्मे लेने वाले व्यक्तियों की सबसे बड़ी विशेषता यह होती है कि वे दृढ इच्छाशक्ति के मालिक होते हैं और अपने सपनों को वास्तविकता के धरातल पर उतारने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं. ऐसे लोग सफलता के लिए तब तक प्रयास करते रहते हैं जब तक कि वे उसे प्राप्त नहीं कर लेते। अच्छे दिनों में, मंगलवार को जन्मे लोग बुद्धिमान, प्रेरित और निडर होते हैं, लेकिन बुरे दिनों में, वे जिद्दी और असुरक्षित हो सकते हैं। हॉकी खिलाड़ी ध्यानचंद, संगीतकार उस्ताद बिस्मिल्लाह खान, फिल्म अभिनेत्री रानी मुखर्जी, फिल्म निर्देशक यश चोपड़ा, फिल्म अभिनेत्री करिश्मा कपूर, फिल्म अभिनेता रणबीर कपूर. 


आसानी से नहीं मानते हार: 
मंगल गृह के स्वाभाव के अनुसार मंगलवार के दिन जन्मे लोग स्वभाव से गुस्सैल और बहादुर होते हैं और वे किसी भी खराब परिस्थिति में आसानी से हार नहीं मानते हैं.  ऐसे व्यक्तियों में रिस्क लेने और साहस करने की क्षमता कूट कूट कर भरी होती है और ऐसे लोग अपने वचन के पक्के होते हैं.  ये लोग कोई भी गलत बात स्वीकार नहीं कर पाते हैं. स्वभाव से ये लोग बहुत खर्चीले होते हैं. गुस्सैल स्वभाव के होने की वजह से यह लोग छोटी-छोटी बातों पर भी बहुत गुस्सा करते हैं.इन लोगों के आसानी से दोस्त नहीं बनते हैं लेकिन अगर एक बार दोस्ती हो गई तो ये लोग दिल से निभाते हैं.

स्वाभाविक नेतृत्व क्षमता: 

मंगल को मंगलवार के साथ जोड़ा जाता है, और इसलिए इस दिन जन्मे लोग नेतृत्व की क्षमता और अग्रसरता रखते हैं। इनमें नेतृत्व क्षमता जन्मजात होती है और वे लोगों को प्रेरित करने में माहिर होते हैं। वे समाज में अच्छी गाइडेंस कर सकते हैं और सामरिक परिस्थितियों में नेतृत्व की भूमिका निभा सकते हैं। मंगल ग्रह के प्रभाव से, मंगलवार को जन्मे लोग अक्सर साहसी, ऊर्जावान और शक्तिशाली होते हैं।

उच्च ऊर्जा स्तर:

 मंगल का प्रतीक्षित ज्वालामुखी तत्व होने के कारण, जो उच्च ऊर्जा स्तर को संकेत करता है, मंगलवार को जन्म लेने वाले लोग उच्च ऊर्जा स्तर वाले हो सकते हैं। वे सक्रिय और उत्साही हो सकते हैं और अपने काम में प्रभावी हो सकते हैं। मंगलवार को जन्मे लोग जीवन के प्रति उत्साही होते हैं और नए अनुभवों के लिए तैयार रहते हैं।

क्रोधप्रवृत्ति: 

मंगलवार को जन्मे लोगों में आत्मविश्वास की कमी नहीं होती और वे अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए दृढ़ संकल्पित होते हैं। मंगल ग्रह आपातकालीन स्थितियों का प्रतीक होता है और इसलिए मंगलवार को जन्म लेने वाले लोगों के पास अधिक क्रोधप्रवृत्ति हो सकती है। वे छोटी बातों पर जल्दी गुस्सा हो सकते हैं और उन्हें अपने क्रोध को नियंत्रित करना सीखना चाहिए। 

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रिस्क और साहस करने की क्षमता

ऐसे व्यक्तियों में रिस्क लेने और साहस करने की क्षमता कूट कूट कर भरी होती है और ऐसे लोग अपने वचन के पक्के होते हैं. ऐसे लोग अपने विरोध बहुत कम ही सहन कर पाते हैं और इसके साथ ही ऐसे लोग शक्ति से भरपूर होते हैं. मंगलवार को जन्म लेने वाले लोगों में मंगल ग्रह का प्रभाव होता है और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मंगल ग्रह को शौर्य, साहस, निर्णायक और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है.ऐसे लोग अपने विरोध बहुत कम ही सहन कर पाते हैं और इसके साथ ही ऐसे लोग शक्ति से भरपूर होते हैं. 

मंगल वार को जन्म लेने वाले व्यक्तियों की यह सामान्य लक्षण हैं जिसे समान्यता: ज्योतिष और कुंडली की जानकारी पर दी गई है. हालाँकि यह भी सत्य है कि हर व्यक्ति अद्वितीय होता है, इसलिए यह सुनिश्चित नहीं है कि सभी मंगलवार को जन्म लेने वाले लोग इन लक्षणों से पूरी तरह से मेल खाते होंगे। 

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नोट: कृपया ध्यान दें कि लेख में उल्लिखित टिप्स/सुझाव केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से हैं ताकि आपको उस मुद्दे के बारे में अपडेट रखा जा सके जो आम लोगों से अपेक्षित है. आपसे निवेदन है कि कृपया इन सुझावो को  पेशेवर ज्योतिषीय सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए तथा अगर आपके पास इन विषयों से सम्बंधित कोई विशिष्ट प्रश्न हैं तो हमेशा अपने ज्योतिषी या पेशेवर ज्योतिष/कुंडली सुझाव प्रदाता से अवश्य परामर्श करें।

प्रभु श्री राम की 77 फुट ऊंची कांस्य प्रतिमा: दुनिया में भगवान राम की सबसे ऊंची प्रतिमा

श्री संस्थान गोकर्ण पर्तगाळी जीवोत्तम मठ में प्रभु श्री राम की ऐतिहासिक, 77 फुट ऊंची कांस्य प्रतिमा का अनावरण हुआ है जो दुनिया में भगवान राम की सबसे ऊंची प्रतिमा है। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्री संस्थान गोकर्ण पर्तगाळी जीवोत्तम मठ, गोवा में स्थित प्रभु श्री राम की कांस्य प्रतिमा का आज अनावरण किया। खास बात यह है कि इस प्रतिमा को डिजाइन, स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' के डिजाइनर मशहूर मूर्तिकार राम सुतार हैं।

जानें प्रभु श्रीराम की प्रतिमा की खासियत क्या है?

  • 77 फीट ऊंची प्रतिमा दुनिया में भगवान राम की सबसे ऊंची प्रतिमा है.
  • 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' की प्रतिमा का डिज़ाइन करने वाले मशहूर मूर्तिकार राम सुतार ने यह भव्य प्रतिमा  बनाई है.
  • रामायण पर आधारित एक थीम पार्क का उद्घाटन भी हुआ है।
  • श्री संस्थान गोकर्ण पर्तगाळी जीवोत्तम मठ अपनी स्थापना की 550वीं वर्षगांठ मना रहा है। 
  •  श्रीमद नारायणतीर्थ स्वामीजी द्वारा इस मठ को  1475 में स्थापित किया गया था. 
  •  संस्थापक आचार्य श्री नारायण तीर्थ ने उत्तर भारत की अपनी यात्राओं के दौरान काशी में भी एक केंद्र स्थापित किया था।