जानिए अक्टूबर में जन्मे लोगों का स्वभाव – तर्कशक्ति, संवेदनशीलता और रचनात्मकता का संगम


अक्टूबर में जन्मे लोग: अक्टूबर महीने में जन्मे लोग कई अनोखे गुणों से युक्त होते हैं जो उन्हें दूसरों से अलग बनाते हैं। अक्टूबर में जन्मे लोगों की सबसे बड़ी विशेषता यह होती है कि  इन्हें किसी भी प्रकार की कला, संगीत, चित्रकला, अभिनय, नृत्य आदि से बहुत लगाव होता है। अक्टूबर महीने में जन्मे लोग विविधताओं से भरे होते हैं और ऐसे लोग जीवन में संवेदनशील होते हैं, ये जीवन को बहुत व्यवस्थित और अनुशासन के साथ जीना पसंद करते हैं। 

अगर आप अक्टूबर में जन्मे लोगों की जीवनशैली का अध्ययन करें, तो आप पाएंगे कि ये भाषा के प्रति बहुत गंभीर होने के साथ-साथ तर्क-शक्ति से भी परिपूर्ण होते हैं। अक्टूबर में जन्मे लोगों को कला से विशेष प्रेम होता है और साथ ही ये अपने जीवन में नैतिक सिद्धांतों और आदर्शवाद में दृढ़ विश्वास रखते हैं। धन-संपत्ति के मामले में ये चीजें इनके लिए ज़्यादा मायने नहीं रखतीं। आइए देखें कि प्रसिद्ध ज्योतिषी, अंकशास्त्री और राशिफल विशेषज्ञ हिमांशु रंजन शेखर द्वारा बताई गई इन लोगों की विशेषताएँ, गुण और भविष्यवाणी क्या हैं।

कला के दीवाने

अक्टूबर महीने में जन्मे लोग कला यात्राओं के प्रति बहुत गंभीर होते हैं और इन्हें किसी भी प्रकार की कला या कलात्मक चीज़ों का बहुत शौक होता है। चाहे वह संगीत हो, चित्रकला हो या शिल्पकला, जीवन में सभी प्रकार की कलात्मक चीज़ों को बहुत महत्व दिया जाता है। ऐसे लोग स्वयं भी किसी न किसी प्रकार की कला को अपने शौक के रूप में अपनाते हैं। वे अपने जीवन में कला को हर तरह से, चाहे वह पर्यावरण हो, परिवार हो या आसपास का वातावरण, बहुत महत्व देते हैं।

रहस्यमय विषयों में रुचि

अक्टूबर महीने में जन्मे लोग अध्यात्म/दार्शनिक/ज्योतिष/आदि सहित रहस्यमय विषयों के शौकीन होते हैं। ऐसे लोग रहस्यमय और गूढ़ विषयों का अध्ययन करते हैं और अक्सर इन रहस्यमय विषयों का अनुसरण करते हैं और उन्हें अपने जीवन में अपनाते हैं।

शांत स्वभाव

अक्टूबर महीने में जन्मे लोगों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे अपने जीवन में बहुत गंभीर होते हैं। आमतौर पर वे जीवन में आने वाली परेशानियों या उपद्रवी स्थितियों से बचना चाहते हैं या खुद को उनसे अप्रभावित रखना चाहते हैं। उन्हें लगता है कि जीवन में प्रगति के लिए शांति ही एकमात्र सही रास्ता है और वे आमतौर पर आंतरिक और बाहरी परिस्थितियों का सामना शांति और गंभीरता से करते हैं या ऐसी किसी भी चीज़ से बचते हैं जो उन्हें असंतुलित करती है या प्रभावित करती है।

संवेदनशील और गंभीर स्वभाव

अक्टूबर माह में जन्मे लोग आमतौर पर बहुत संवेदनशील और गंभीर स्वभाव के होते हैं जो इन्हे जीवन में खास और अलग बनाती है. ऐसे लोगों के लिए संवेदनशीलता या गंभीरता उनकी कमज़ोरी नहीं बल्कि जीवन में आगे बढ़ने का हथियार है। ऐसा नहीं है कि वे अपने, अपने परिवार या खुद के आस-पास की उथल-पुथल या प्रतिकूल परिस्थितियों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं, बल्कि सच तो यह है कि वे गंभीरता से इन परिस्थितियों से बाहर निकलने का विकल्प और रास्ता ढूँढ़ते हैं और मिस्टर कूल की तरह सोचते हैं।

मज़बूत तर्कशक्ति

अक्टूबर माह में जन्मे लोगों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उनमें मज़बूत तर्कशक्ति और समझाने की शक्ति होती है। वे आसानी से दूसरे विचारों या विचारधारा से प्रभावित नहीं होते और वे किसी भी विचारधारा को जल्दबाज़ी में आसानी से नहीं अपनाते। उनके सामने आने वाले किसी भी सिद्धांत या विचारधारा को वे अपनी तार्किकता के तराजू पर तौलते हैं और संतुष्ट होने के बाद ही उसे अपने जीवन में अपनाते हैं। लेकिन सच यह भी है कि एक बार वह किसी सिद्धांत या विचारधारा से प्रभावित हो जाए तो उसके लिए सब कुछ छोड़ देता है।

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अस्वीकरण: कृपया ध्यान दें कि लेख में बताए गए सुझाव/सुझाव केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से हैं ताकि आपको इस मुद्दे के बारे में अपडेट रखा जा सके जो आम लोगों से अपेक्षित है और इन्हें पेशेवर सलाह के रूप में नहीं समझा जाना चाहिए/पालन नहीं किया जाना चाहिए। हम अनुशंसा करते हैं और आपसे अनुरोध करते हैं कि यदि आपके पास एस्ट्रोलॉजी संबंधित विषय से के बारे मे कोई विशिष्ट प्रश्न हैं, तो हमेशा अपने पेशेवर सेवा प्रदाता से परामर्श करें।



Karwa Chauth Sargi: क्या होता है सरगी, इसे कौन देता है, क्या और कब खाना चाहिए- जानें सब कुछ

Importance of sargi in Karwa chauth

Karwa Chauth Sargi: वैदिक पंचांग के अनुसार, करवा चौथ का व्रत हर वर्ष कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को रखा जाता है.करवा चौथ का व्रत त्योहार सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास होता है, जिसके लिए वे खास तैयारी करती है और इसके इन्तजार भी करती हैं. पति को दीर्घायु, स्वास्थ्य और खुशहाली रखने के लिए सभी सुहागिन महिलाएं इस दिन  को निर्जला व्रत रखती हैं और रात में चांद के दर्शन के बाद व्रत का पारण करती हैं. धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत से  मिलती है और वैवाहिक जीवन गहराई और प्रेम बना रहता है.

क्या होता है सरगी? 

इस व्रत का एक प्रमुख पड़ाव होता है जिसे सरगी के नाम से जाना जाता है. क्योंकि करवाचौथ वाले दिन एक स्त्री पूरा दिन निर्जला व्रत रखना पड़ता है इसलिए सरगी से व्रत का आरम्भ होता है. 

सरगी (सरगी थाली) सास की तरफ से अपनी बहू के लिए प्यार और आशीर्वाद का प्रतीक है। करवा चौथ की सरगी व्रत से पहले सुबह का विशेष भोजन शुरू हो जाता है। यह थाली सास द्वारा तैयार की जाती है और बहू को दी जाती है.  यह थाली सास द्वारा तैयार की जाती है और बहू को दी जाती है ताकि दोनों साथ मिलकर इसे खा सकें और व्रत की शुरुआत खुशी और प्यार के साथ कर सकें।

सरगी (सरगी थाली) सास की तरफ से अपनी बहू के लिए प्यार और आशीर्वाद का प्रतीक है। करवा चौथ की सरगी व्रत से पहले सुबह का विशेष भोजन शुरू हो जाता है।

सरगी क्या चीज होती है, करवा चौथ की सरगी कौन देता है, सरगी खाने के बाद क्या करना चाहिए, और करवा चौथ के दिन सरगी में क्या क्या खाना चाहिए आदि सभी सवालों के जवाब आप यहाँ प्राप्त कर सकते हैं.

सामान्यत: ऐसा माना जाता है की सरगी सास के द्वारा दी जाती है. लेकिन कई परिवारों में जब सास न हो तो घर की दूसरी बड़ी महिलाएं जैसे बड़ी ननद या जेठानी भी सरगी देती है.क्योकि करवा चौथ  दिन महिलाएं निर्जला व्रत करती है इसलिए सरगी लेने का सही समय करवा चौथ के दिन सूरज निकलने से पहले सुबह तीन से चार बजे के आस-पास महिलाएं सरगी लेती हैं.

करवा चौथ के व्रत में सरगी का विशेष महत्व होता है। सरगी एक प्रकार की रस्म होती है जिसमें सास अपनी बहू को सुहाग का सामान, फल, ड्राय फ्रूट्स और मिठाई देखकर सुखी वैवाहिक जीवन जीने का आशीर्वाद प्रदान करती हैं। परंपरा के अनुसार, सरगी में रखे व्यंजनों को ग्रहण करके ही इस व्रत का शुभारंभ किया जाता है। यदि किसी महिला की सास ना हो तो यह रसम उसकी जेठानी या फिर बहन भी कर सकती है।

सरगी का महत्व निम्नलिखित है:

  • यह व्रत की शुरुआत का संकेत है। सरगी खाने के बाद ही महिलाएं व्रत शुरू करती हैं।
  • यह व्रत के लिए ऊर्जा प्रदान करती है। सरगी में पौष्टिक और आसानी से पचने वाले व्यंजन होते हैं जो व्रतियों को पूरे दिन ऊर्जावान बनाए रखते हैं।
  • यह सुहाग का प्रतीक है। सरगी में सुहाग का सामान होता है जो व्रतियों को सुखी वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद देता है।

करवा चौथ की सरगी में आमतौर पर निम्नलिखित चीजें शामिल होती हैं:

  • फल और सब्जियां: आम, केला, जामुन, अंगूर, सेब, गाजर, मूली, खीरा, आदि।
  • ड्रायफ्रूट्स: बादाम, काजू, किशमिश, अंजीर, आदि।
  • मिठाइयां: गुलाब जामुन, लड्डू, मिठाई, आदि।
  • सुहाग का सामान: चूड़ी, बिंदी, मेहंदी, सिंदूर, इत्र, आदि।

करवा चौथ की सरगी को सूर्योदय से पहले ग्रहण करना चाहिए। इसे ग्रहण करने के लिए महिलाएं हाथों में पानी लेकर सरगी की थाली को अपने सिर पर रखती हैं और सास से आशीर्वाद लेती हैं। फिर, वे थाली में रखे व्यंजनों को ग्रहण करती हैं।

FAQs

करवा चौथ की सरगी कौन देता है?

सामान्यत: ऐसा माना जाता है की सरगी सास के द्वारा दी जाती है. लेकिन कई परिवारों में जब सास न हो तो घर की दूसरी बड़ी महिलाएं जैसे बड़ी ननद या जेठानी भी सरगी देती है

सरगी क्या चीज होती है?

यह व्रत की शुरुआत का संकेत है। सरगी खाने के बाद ही महिलाएं व्रत शुरू करती हैं।

करवा चौथ के दिन सरगी में क्या क्या खाना चाहिए?

आप इन चीजों का सरगी के रूप में ले सकते हैं जैसे फल और सब्जियां-आम, केला, जामुन, अंगूर, सेब, गाजर, मूली, खीरा, बादाम, काजू, किशमिश, अंजीर, गुलाब जामुन, लड्डू, मिठाई, आदि।


75 वेटलैंड बर्ड्स सैंक्चुअरी : रामसर स्‍थलों की सूची में 11 और आर्द्रभूमि जुड़ीं, पाएं विस्तृत जानकारी


Wetlands Birds Sanctuaries Ramsar List

एक और जहाँ देश स्वतंत्रता के 75वें वर्ष  मना रहा है ऐसे में भारत के लिए  और  उपलब्धि हासिल हुई है जहाँ 75 रामसर स्थलों को बनाने के लिए रामसर स्‍थलों की सूची में 11 और आर्द्रभूमि शामिल हो गई हैं। 11 नए स्‍थलों में तमिलनाडु में चार (4), ओडिशा में तीन (3), जम्मू और कश्मीर में दो (2) और मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र प्रत्‍येक में एक (1) शामिल हैं।

भारत में स्वतंत्रता के 75वें वर्ष में देश में 13,26,677 हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करते हुए कुल 75 रामसर स्थलों को बनाने के लिए रामसर स्‍थलों की सूची में 11 और आर्द्रभूमि शामिल हो गई हैं।



11 नए स्‍थलों में तमिलनाडु में चार (4), ओडिशा में तीन (3), जम्मू और कश्मीर में दो (2) और मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र प्रत्‍येक में एक (1) शामिल हैं। इन स्थलों को नामित करने से इन आर्द्रभूमियों के संरक्षण और प्रबंधन तथा इनके संसाधनों के कौशलपूर्ण रूप से उपयोग करने में सहायता मिलेगी।
1971 में ईरान के रामसर में रामसर संधि पत्र पर हस्ताक्षर के अनुबंध करने वाले पक्षों में से भारत एक है। भारत ने 1 फरवरी, 1982 को इस पर हस्ताक्षर किए। 1982 से 2013 के दौरान, रामसर स्‍थलों की सूची में कुल 26 स्‍थलों को जोड़ा गया, हालांकि, इस दौरान 2014 से 2022 तक, देश ने रामसर स्थलों की सूची में 49 नई आर्द्रभूमि जोड़ी हैं।
 वर्ष (2022) के दौरान ही कुल 28 स्थलों को रामसर स्थल घोषित किया गया है। रामसर प्रमाण पत्र में अंकित स्‍थल की तिथि के आधार पर इस वर्ष (2022) के लिए 19 स्‍थल और पिछले वर्ष (2021) के लिए 14 स्‍थल हैं।

तमिलनाडु में अधिकतम संख्या है। रामसर स्थलों की संख्या (14), इसके पश्‍चात उत्‍तर प्रदेश में रामसर के 10 स्थल हैं। 
रामसर स्थलों के रूप में नामित 11 आर्द्रभूमियों का संक्षिप्त विवरण
आद्रभूमि का नाम-राज्‍य
  1. तंपारा झील-ओडिशा
  2. हीराकुंड जलाशय-ओडिशा
  3. अंशुपा झील-ओडिशा
  4. यशवंत सागर-मध्‍य प्रदेश
  5. चित्रांगुडी पक्षी अभ्यारण्य-तमिलनाडु
  6. सुचिन्द्रम थेरूर वेटलैंड कॉम्प्लेक्स-तमिलनाडु
  7. वडुवूर पक्षी अभयारण्य-तमिलनाडु
  8. कांजीरकुलम पक्षी अभयारण्य-तमिलनाडु
  9. ठाणे क्रीक-महाराष्‍ट्र
  10. हाइगम वेटलैंड कंजर्वेशन रिजर्व-जम्‍मू और कश्‍मीर
  11. शालबुग वेटलैंड कंजर्वेशन रिजर्व-जम्‍मू और कश्‍मीर

 

Point Of View करवा चौथ: जाने कैसे बनाएं पत्नी के करवाचौथ को रोमांटिक और यादगार




Point Of View :करवा चौथ उन जोड़ों के लिए एक खास दिन है, खासकर उन विवाहित महिलाओं के लिए जो अपने पति की लंबी उम्र और समृद्धि के लिए व्रत रखती हैं। इस त्योहार से जुड़ी रस्में और परंपराएँ प्रेम, भक्ति और प्रतिबद्धता से ओतप्रोत हैं।   करवा चौथ सुहगिनो का एक प्रमुख त्यौहार है और इसके लिए प्रत्येक सुहागन कई दिनों के पहले से ही इंतजार करती है। न केवल इस त्यौहार को मनाने के लिए बल्कि पत्नियों के लिए इस पर्व का प्रत्येक मोमेंट खास होता है चाहे वह पूजा हो या फिर  सजने सवरने की तैयारी तक, सब कुछ बहुत खास होता है ।  

करवा चौथ एक हिंदू त्योहार है जो विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए मनाती हैं। करवाचौथ वाले दिन एक स्त्री पूरा दिन निर्जला व्रत करके अपने पति की लंबी आयु व उसके बेहतर स्वास्थ्य की कामना करती है। वैसे तो हर स्त्री के लियें ये व्रत महत्वपूर्ण है लेकिन लेकिन अगर शादी के बाद पहला करवा चौथ हो तो फिर बात ही कुछ और है। जब एक नई दुल्हन पूरा शृंगार करके तैयार होती है और पति के लिए सजती संवारती है वो उसके लियें बहुत खास होता है ।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अपने पत्नी को बताएं कि आप उसे कितना प्यार करते हैं और उसकी कितनी परवाह करते हैं। करवा चौथ एक ऐसा दिन है जब आप अपने प्यार को व्यक्त कर सकते हैं और अपने रिश्ते को मजबूत कर सकते हैं।

करवा चौथ को यादगार बनाने के लिए कुछ सुझाव इस प्रकार हैं:

प्रेम और सम्मान दिखाएं: करवा चौथ एक प्रेम और सम्मान का त्योहार है। अपने पत्नी को बताएं कि आप उसे कितना प्यार करते हैं और उसकी कितनी परवाह करते हैं। उसे एक उपहार दें, उसे एक प्यारा सा संदेश लिखें, या उसके लिए कुछ खास करें।

व्रत को आसान बनाएं: करवा चौथ एक कठिन व्रत हो सकता है, खासकर अगर आप पहली बार मना रही हों। अपने पत्नी को व्रत रखने में मदद करने के लिए कुछ कदम उठाएं। उदाहरण के लिए, आप उसे सुबह नाश्ता बना सकते हैं, उसके लिए पानी का ध्यान रख सकते हैं, या शाम को उसे व्रत तोड़ने में मदद कर सकते हैं।

एक रोमांटिक रात बनाएं: करवा चौथ एक विशेष दिन है, इसलिए इसे एक रोमांटिक रात के साथ समाप्त करें। एक साथ डिनर करें, एक फिल्म देखें, या बस बात करें और एक-दूसरे के साथ समय बिताएं।

यहां कुछ विशिष्ट विचार दिए गए हैं जो आप अपने पत्नी के करवा चौथ को यादगार बनाने के लिए कर सकते हैं:

  • उसके लिए एक खूबसूरत साड़ी या लहंगा खरीदें।
  • उसे एक खूबसूरत सा हार या झुमके दें।
  • उसके लिए एक प्रेम पत्र लिखें।
  • उसके लिए एक रोमांटिक डिनर का प्लान बनाएं।
  • उसके लिए एक कैंडल लाइट डिनर का आयोजन करें।
  • उसके लिए एक सरप्राइज पार्टी का आयोजन करें।


करवा चौथ 2025 टिप्स : उपवास के दौरान भी जाने कैसे बहाल रखें अपने चेहरे की चमक


करवा चौथ 2025:
कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 09 अक्टूबर की रात 10:54 बजे से शुरू होगी और 10 अक्टूबर की शाम 7:38 बजे इसका समापन होगा करवा चौथ का त्योहार सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास होता है, जिसमें महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और अच्छी सेहत के लिए निर्जला व्रत रखती हैं.  हिन्दू पंचांग के अनुसार करवा चौथ  कार्तिक मास की चतुर्थी को मनाया जाता है।  इस दिन विवाहित महिलाएं अपने जीवन साथी अर्थात सुहाग के लम्बी उम्र और सभी प्रकार की सलामती के लिए व्रत रखती हैं।  हालांकि इस दिन का धार्मिक और भावनात्मक महत्व बहुत गहरा है और जाहिर  है कि प्रत्येक  पति और पत्नी के लिए  दिन बेहद खास होता है. लेकिन पत्नी द्वारा किये जाने वाले उपवास और थकान के कारण उनकी चेहरे की चमक का फीकी पड़ना आम बात है।और आपको यह पता होना चाहिए कि करवा चौथ के अवसर पर आपके खूबसूरत चेहरे पर चमक और खुशी लाने के लिए जरुरी है कि उपवास से होने वाले परेशानियों जैसे  एसिडिटी, जी मिचलाना, लो ब्लड प्रेशर और लो एनर्जी आदि को कैसे दूर रखी जाए ।

करवा चौथ को मनाने के लिए, विवाहित महिलाएं पूरे दिन बिना पानी या भोजन के गुजारती हैं.वे अपने साथी को जीवन में खुशहाली, सफलता और खुशी की कामना करने के लिए इस तरह के अनुष्ठान करती हैं। कहने की जरूरत नहीं है कि विवाहित महिलाएं शाम को चांद दिखने के बाद ही अपना व्रत खोलती हैं।

वास्तव में यह आपका आहार है जो आपके चेहरे की चमक और अन्य महत्वपूर्ण चीजों को नियंत्रित करता है, इसलिए यहां आपको चाहिए कि आहार विशेषज्ञ की सलाहों का अनुसरण करें. 

 डाइटिशियन एक्सपर्ट के मुताबिक इस दिन को और आरामदायक बनाने के लिए  कुछ टिप्स आप अपना सकती हैं जो आपको करवाचौथ पर स्वस्थ रखने में मदद करेंगे।

इसके लिए आप चाहें तो सूर्योदय से पहले सुबह- अपने दिन की शुरुआत अनार या केला जैसे सूखे मेवों जैसे बादाम, अखरोट, खजूर या अंजीर से करें। 

उपवास के दौरान अक्सर लोगों को एसिडिटी और गैस की समस्या हो जाती है इसके लिए यह सुनिश्चित करें कि आपका भोजन कम वसा वाला हो और पेट पर बहुत भारी न हो। एक हल्की शक्कर वाली मिठाई डालें क्योंकि इससे दिन में बाद में भूख नहीं लगेगी और बाकी दिन के लिए ऊर्जा मिलेगी।

सादे पानी के बजाय नारियल पानी या नींबू का रस मिलाने से आवश्यक इलेक्ट्रोलाइट्स जुड़ जाएंगे।  इस दिन स्वास्थय के लिए जरुरी है कि  आप ज्यादा चाय या कॉफी के सेवन से बचें। व्रत से पहले यानी सरगी के समय, पानी या नारियल पानी जरूर पिएं। यह शरीर में नमी बनाए रखता है, जिससे स्किन ड्राई नहीं होती।

उपवास के बाद- कुछ प्रोटीन युक्त भोजन शामिल करना एक अच्छा विचार होगा।

व्रत के तुरंत बाद ज्यादा मीठा और तला हुआ खाना खाने से बचें। अपनी शाम का आनंद लेने के लिए कुछ जश्न के भोजन के साथ एक संतुलित भोजन लेना सबसे अच्छा तरीका है।

एक संपूर्ण भोजन में आदर्श रूप से सब्जियां, दही, चपाती के रूप में साबुत अनाज, दाल के साथ कुछ चावल और कुछ मीठे शामिल होंगे। 

याद रखें , करवा चौथ का व्रत सिर्फ श्रद्धा नहीं बल्कि आत्मसंयम और प्रेम का प्रतीक है जो किसी भी पति और पत्नी के लिए बेहद खास होता है. इसके लिए यह याद रखें कि थोड़ी सी सेल्फ-केयर और प्राकृतिक नुस्खों के साथ आप न सिर्फ व्रत को सफल बना सकती हैं, बल्कि पूरे दिन अपनी चमकती मुस्कान और ग्लोइंग स्किन से दिन को यादगार भी।आशा है कि यह करवाचौथ को चेहरे पर चमक और खुशी लाने में आपकी मदद करेगा।


जानें क्या है Point Nemo और भारत की बेटियां Lieutenant Commander दिलना और रूपा


मन की बात रेडियो कार्यक्रम के 126वीं कड़ी में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने Point Nemo और Lieutenant Commander दिलना और रूपा का चर्चा किया है. आइयें जानते हैं कि क्या है प्वाइंट निमो और Lieutenant Commander दिलना और रूपा किसलिए चर्चा में हैं. 

क्या है प्वाइंट निमो

प्वाइंट निमो, जिसे दुर्गमता का महासागरीय ध्रुव भी कहा जाता है, महासागर में किसी भी भूभाग से सबसे दूर स्थित बिंदु है। यह दक्षिण प्रशांत महासागर में 48°52.6′S 123°23.6′W निर्देशांक पर स्थित है। इस प्रकार यह निकटतम भूमि से लगभग 2,688 किलोमीटर (1,670 मील) दूर है। "प्वाइंट निमो" नाम जूल्स वर्ने के "कैप्टन निमो" से आया है, जो "20,000 लीग्स अंडर द सी" का नायक है। लैटिन में, "निमो" का अर्थ "कोई नहीं" होता है।

प्वाइंट निमो की पहचान सबसे पहले 1992 में क्रोएशियाई-कनाडाई सर्वेक्षण इंजीनियर हर्वोज लुकाटेला ने विशेष कंप्यूटर सॉफ्टवेयर का उपयोग करके की थी।

Point Nemo

दुनिया की सबसे remotest  location है. वहाँ से सबसे पास कोई इंसान है तो वो International Space Station में है. वहाँ पर एक sail boat में पहुँचने वाला पहला भारतीय और पहला Asian और दुनिया के पहला इंसान होने का गौरव पाने वाले दो भारत की बेटियां हैं-

 भारत की झंडा Point Nemo पर लहराया  जहाँ से  सबसे पास कोई इंसान है तो वो International Space Station में है और वहाँ पर एक sail boat में पहुँचने वाला पहला भारतीय और पहला Asian और दुनिया के पहला इंसान बनने वाले ये दोनों बेटियां भारत से हैं.  

Lieutenant Commander दिलना और रूपा:  इंडियन नेवी में Lieutenant Commander के पद पर हैं और दोनों ने Sail Boat से ये दुनिया का circumnavigation जो किया है 

सागर परिक्रमा

  • 47500 kilometre
  • 2nd October 2024 को गोवा से यात्रा शरू और 
  •  29th May 2025 को वापस पहुंचा 
  • Expedition हमें complete करने के लिए 238 दिन लगे. 
  • भारत की झंडा Point Nemo पर लहराया

Google 27th Birthday: जानें अबतक का सफर, जन्म, इतिहास, क्या होता डूडल


Google की स्थापना 1998 में हुई थी जिसका उद्देश्य दुनिया भर में जानकारी और नवीनतम अपडेट को लोगों तक पहुंचाना था, एक ऐसा मंच बनाना जो दुनिया भर के हर हिस्से के लोगों की उंगलियों और जापान पर रहा। और आज स्थापना के 27 वें वर्ष में ऐसा लगता है कि Google ने अधिकांश लक्ष्य प्राप्त कर लिया है। जी हाँ, इसकी स्थापना लैरी पेज और सर्जी ब्रायन ने की थी, जो स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में मिले थे और उन्होंने वर्ल्ड वाइड वेब को और अधिक आसान बनाने के लिए एक दृष्टिकोण साझा किया था।

भले ही उनका लक्ष्य एक अनुसंधान और अनुसंधान के रूप में शुरुआत थी, लेकिन समय के साथ वह एक वैश्विक दिग्गज में बदल गए। 4 सितंबर 1998 को Google की शुरुआत हुई और 27 सितंबर 1998 को Google Inc. की आधिकारिक शुरुआत हुई। कंपनी का पहला 7 साल तक जन्मदिन 4 सितंबर को मनाया जाता था, जिसके बाद 27 सितंबर को जन्मदिन मनाया गया।

डूडल क्या हैं

27 वे जन्मदिवस के अवसर पर गूगल ने अपने पुराने डूडल को डिस्प्ले किया है जो इस बात का प्रतिक है की अपने पुराने डूडल को याद कर सम्मान प्रदान करें। 

गूगल डूडल, होमपेज पर दिखाई देने वाले मूल लोगो का एक अस्थायी कलात्मक संशोधन होता है। गूगल हमेशा किसी खास अवसर पर अपने डूडल  के माध्यम से सम्मान देने की कोशिश करता है जिसका मतलब साफ कि गूगल दुनिया के सभी लोगों के दिलों में उतर कर उनके साथ खुशियां शेयर करने का माध्यम तलाशता है.  त्योहारों, छुट्टियों, प्रसिद्ध हस्तियों या वर्षगाँठ जैसे सांस्कृतिक महत्व के आयोजनों का जश्न मनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। 

गूगल के अनुसार, पहला डूडल एक तरह के 'आउट ऑफ ऑफिस' संदेश के रूप में तब लॉन्च किया गया था जब संस्थापक लैरी और सर्गेई छुट्टी पर गए थे। पहला डूडल 1998 में लोगों को यह बताने के लिए प्रकाशित किया गया था कि वे छुट्टी पर जा रहे हैं। पहला अंतर्राष्ट्रीय डूडल 2000 में फ्रांस में बैस्टिल दिवस मनाने के लिए लॉन्च किया गया था।

Daily Current Affairs Complete GK Dose One Linear Sep 23, 2025

Daily Current Affairs Complete GK Dose One Linear Sep 23, 2025

Persons/Places in News: Sep 23, 2025

अभिनेता मोहनलाल 

  • अभिनेता मोहनलाल को मिला दादासाहेब फाल्के लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड
  • मलयालम सिनेमा का प्रतिनिधित्व करते हैं.

कलमीकिया, रूस  

  • बुद्ध के पवित्र अवशेष पहली बार रूस के कलमीकिया गणराज्य में प्रदर्शित किए जाएँगे।
  • ये अवशेष 24 से 28 सितंबर, 2025 तक एलिस्टा में आयोजित होने वाले तीसरे अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध मंच के दौरान स्थापित किए जाएँगे।

टोयोआके नगरपालिका, जापान

  • जापान के आइची प्रान्त की शहर टोयोआकेमें सभी निवासियों से स्मार्टफोन के उपयोग को सीमित करने के लिए कहा है। 
  • यह अध्यादेश मुख्यत शहर के निवासियों के स्वास्थ्य संबंधी उपायों को देखते हुए किया गया है। 

त्रिपुरा सुंदरी मंदिर, त्रिपुरा

  • प्रधानमंत्री मोदी ने पुनर्विकसित 524 साल पुराने त्रिपुरा सुंदरी मंदिर का उद्घाटन किया।
  • यह  त्रिपुरा के गोमती जिले के उदयपुर में स्थित है. 
  • 51 शक्तिपीठों में से एक, इस मंदिर का निर्माण तीर्थयात्रा पुनरुद्धार और आध्यात्मिक विरासत संवर्धन अभियान (प्रशाद) योजना के तहत पूरा हुआ है।

वर्ल्ड फूड इंडिया, नई दिल्ली

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 सितंबर को नई दिल्ली में वर्ल्ड फूड इंडिया के चौथे संस्करण का उद्घाटन करेंगे.
  • इस बार न्यूजीलैंड और सऊदी अरब साझेदार देश होंगे.
  • जापान, रूस, यूएई और वियतनाम फोकस देश रहेंगे।

अर्शदीप सिंह 

  • अर्शदीप सिंह 100 टी20I विकेट लेने वाले पहले भारतीय गेंदबाज़ बन गए हैं।
  • अर्शदीप सिंह 2025 एशिया कप में ओमान के विनायक शुक्ला को आउट करके 100 टी20I विकेट तक पहुँचने वाले पहले भारतीय पुरुष गेंदबाज़ बन गए हैं।
  • वह 100 से ज़्यादा विकेट लेने वाले क्लब में शामिल होने वाले 25वें गेंदबाज़ बन गए।



जानें क्या होता है H-1B वीजा: किन देशों को मिलती है लाभ, आवेदन प्रक्रिया आदि

 


h1b visa meaning: H-1B वीज़ा वास्तव में अमेरिका (U.S.) का एक वर्क वीज़ा है जो वहाँ की कंपनियों को यह अनुमति देता है कि वे विदेशी (non-US) देशों के पेशेवर लोगों को अपने यहाँ विशेषज्ञता वाले काम (Specialty Occupation) के लिए नियुक्त कर सकें। दूसरे   शब्दों में  आप कह सकते  कि H-1B वीज़ा एक अमेरिकी जॉब पासपोर्ट है, जिसमें अच्छे अवसर और उच्च वेतन तो हैं, लेकिन साथ में प्रतियोगिता, अनिश्चितता और नियोक्ता पर निर्भरता का जोखिम भी है।

जानें किन देशों को किन क्षेत्रों में मिलती  है H-1B वीज़ा

H-1B वीज़ा उन नौकरियों के लिए होता है जिनमें टेक्निकल, आईटी, इंजीनियरिंग, मेडिकल, रिसर्च, साइंस और मैनेजमेंट जैसे क्षेत्र शामिल होते हैं। आंकड़ों के अनुसार अमेरिका लगभग 70% से अधिक H-1B वीज़ा भारतीय IT और टेक्नोलॉजी प्रोफेशनल्स को देता है जबकि हेल्थकेयर और टेक्निकल क्षेत्रों के लिए  फिलीपींस, दक्षिण कोरिया, कनाडा को प्राप्त होता है इसके साथ ही रिसर्च, इंजीनियरिंग और साइंस क्षेत्रों में चीन को यह वीजा अमेरिका की और से दिया जाता है.  

trump h1b visa: H-1B वीज़ा का प्रयोग 

अपने ग्रोथ के लिए कम्पनियाँ इनोवेटिव माइंड को हायर करना चाहती है और जाहिर है की अमेरिकी कंपनियाँ भी विदेशी प्रोफेशनल्स को हायर करती हैं जब उन्हें skilled लोग अमेरिका में आसानी से नहीं मिलते।

इसका सबसे ज़्यादा उपयोग आईटी और टेक्नोलॉजी कंपनियाँ करती हैं। इसके अंतर्गत इस वीजा के तहत कर्मचारी अमेरिका में रहकर उस कंपनी के लिए काम करता है जिसने वीज़ा sponsor किया है।

H-1B वीज़ा के लाभ 

  • नौकरी का अवसर-khasभारत, चीन, फिलीपींस जैसे देशों के लाखों युवाओं को अमेरिका में काम का अवसर मिलता है।
  • नौकरी का अवसर-कई ऐसे देश हैं जिनमे रोजगार की कमी है और खासकर उन देशों में जहाँ बेरोजगारी एक प्रमुख समस्या है. रोजगार के सिमित संसाधन और बेरोजगारों की संख्या को देखते हुए भारत, चीन, फिलीपींस जैसे देशों के लाखों युवाओं को अमेरिका में काम का अवसर मिलता है।
  • अच्छा वेतन – कई सारे देशों में  काम की कमी के  अलावा अच्छे कंपनियों का आभाव होने के कारण अच्छा वेतन मिलना मुश्किल होता है. खासतौर पर जहाँ काम की कमी है वैसे में अच्छे वेतन की उम्मीद कैसे की जा सकती है.  जबकि अमेरिका में  भारत की तुलना में कई गुना ज़्यादा वेतन युवाओं को प्राप्त होता है।
  • ग्रीन कार्ड का रास्ता – H-1B को “dual intent” वीज़ा माना जाता है यानी अमेरिका में स्थायी निवास (Green Card) के लिए आवेदन किया जा सकता है।
  • करियर ग्रोथ – युवाओं को अमेरिका में काम करने से ग्लोबल एक्सपीरियंस और exposure मिलता हैजिसका लाभ उनके  भविष्य के करियर ग्रोथ में मिलता है ।

हालांकि H-1B वीज़ा के कई फायदे हैं जिनका लाभ सम्बंधित देशों  के साथ उन अमेरिकन कंपनियों को भी प्राप्त होती है. इसके साथ ही  H-1B वीज़ा के कई जोखिम भी हैं जिसका ध्यान रखना जरुरी है. 

आवेदन करने की क्या है आवशयकताएँ?:

आवेदन करने के लिए आपके पास  जरुरी दस्तावेज और फॉर्मेलिटी पूरा करना होता है और इसके लिए यह जरुरी है कि आप इन आवश्यकताएं को पूरा करते हैं-

विशेषज्ञता वाला व्यवसाय: नौकरी के लिए विशिष्ट ज्ञान का सैद्धांतिक और व्यावहारिक अनुप्रयोग आवश्यक है, आमतौर पर इसके लिए कम से कम स्नातक की डिग्री आवश्यक है।

नियोक्ता प्रायोजन: एक अमेरिकी नियोक्ता को विदेशी कर्मचारी को प्रायोजित करना होगा और अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (USCIS) के पास एक याचिका दायर करनी होगी।

श्रम स्थिति आवेदन: नियोक्ता को श्रम विभाग के पास एक LCA दायर करना होगा, जिसमें यह प्रमाणित किया जाएगा कि H-1B कर्मचारी को प्रचलित वेतन या समान अनुभव और योग्यता वाले अन्य कर्मचारियों को दिए जाने वाले वास्तविक वेतन का भुगतान किया जाएगा।

जानें क्या होता है आवेदन प्रक्रिया:

पंजीकरण: नियोक्ता मार्च में H-1B लॉटरी के लिए पंजीकरण करते हैं, और यदि पंजीकरणों की संख्या वार्षिक सीमा से अधिक हो जाती है, तो USCIS एक यादृच्छिक चयन प्रक्रिया आयोजित करता है।

याचिका दाखिल करना: चयनित नियोक्ता USCIS के पास फॉर्म I-129 दाखिल करते हैं, जिसमें पात्रता का प्रमाण दिया जाता है।

USCIS अनुमोदन: USCIS याचिका की समीक्षा करता है और इसे स्वीकृत या अस्वीकृत करने से पहले अतिरिक्त साक्ष्य का अनुरोध कर सकता है।

वीज़ा आवेदन: यदि स्वीकृति मिल जाती है, तो विदेशी कर्मचारी अमेरिकी दूतावास या वाणिज्य दूतावास में एच-1बी वीज़ा के लिए आवेदन करता है।

Shardiya Navratri 2025: जानें माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा तिथि, महत्व और अन्य जानकारी

Navratri Manifestation  of 9 Goddess form of Dugra
Shardiya Navratri 2025: इस साल शारदीय नवरात्र (Shardiya Navratri 2025)  10 दिनों का होगा। खास बात कि 9 साल बाद बन रहा एक अद्भुत संयोग है. मान्यता है कि ऐसा संजोग अच्छा और आम लोगों के के लिए शुभ माना जाता है. इसके अतिरिक्त  इस साल मां दुर्गा का वाहन हाथी है. ऐसी मान्यता है कि हाथी पर मां दुर्गा का आना सुख-समृद्धि और वैभव का प्रतीक माना जाता है, जो कि मंगलकारी होता है. शारदीय  नवरात्र का पावन अवसर है जब  देवी दुर्गा और उनके नौ स्वरूपों की पूजा कि जाती है जो आम तौर पर नवरात्र शैलपुत्री या प्रतिपदा, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री सहित नौ देवी की पूजा की  जाती है। 
यह एक नौ दिवसीय त्योहार है जो हिंदू धर्म में देवी दुर्गा की पूजा के लिए मनाया जाता है. नवरात्रि का पहला दिन प्रतिपदा और नौवां दिन दशमी के रूप में जाना जाता है. 

क्या होता है चैत्र और शारदीय नवरात्र दोनों मे विशेष अंतर?

चैत्र और शारदीय नवरात्रि दोनों ही  नवरात्रि का अलग-अलग रूप है जो हिंदू धर्म का महत्वपूर्ण त्योहार हैं। लेकिन इन दोनों में कुछ अंतर होते हैं। चैत्र नवरात्रि सामान्यत: हिंदू कैलेंडर के अनुसार हिन्दी के चैत्र मास में मनाई जाती है। वहीं शारदीय नवरात्रि सामान्यत: आश्विन मास के अश्विनी पक्ष में मनाया जाता है, जो सितंबर या अक्टूबर में होता है।

चैत्र नवरात्रि खासतौर पर ज्यादातर उत्तर भारतीय राज्यों में धूमधाम से मनाया जाता है। वहीं शारदीय नवरात्री  उत्सव भारत भर में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है, खासकर पश्चिमी भारत में। नवरात्री के इन दिनों में, लोग धार्मिक परंपराओं, रस्मों, और उत्सवों में भाग लेते हैं, जिनमें दंगल, रास लीला, गरबा, दंडिया रास, और दुर्गा पूजन शामिल हैं।

उल्लेखनीय है कि शारदीय नवरात्री का त्योहार हिंदुओं के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है. नवरात्रि के दौरान, लोग देवी दुर्गा की पूजा करते हैं और व्रत रखते हैं. वे देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा करते हैं: शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री.

शैलपुत्री : 

पहला रूप शैलपुत्री है, जो शैल (पर्वत) की पुत्री कहलाती हैं। इस रूप में माता का ध्यान शुद्धता और त्याग में होता है। वह एक कमंडलु और लोटा धारण करती हैं। देवी शैल पुत्री देवी दुर्गा के नौ रूपों में से एक हैं जिन्हें भगवान शिव की पत्नी देवी पार्वती के रूप में जाना जाता है। शैलपुत्री को पर्वतराज हिमालय की पुत्री माना गया है जिसका उल्लेख पुराण में किया गया है। ऐसा कहा गया है कि देवी दुर्गा के सभी नौ स्वरूपों में शैपुत्री प्रथम हैं। जैसा कि हिंदू पौराणिक कथाओं में उल्लेख किया गया है, शैलपुत्री को सती का पुनर्जन्म माना जाता है और वह दक्ष शैलपुत्री की बेटी थीं।

ब्रह्मचारिणी:

दूसरे रूप में माता ब्रह्मचारिणी हैं, जो तपस्या, ध्यान, और संतान की कल्याण की प्रतीक्षा करती हैं। ब्रह्मचारिणी देवी का नाम नवदुर्गा माता के नौ रूपों में से एक है। इस रूप में माँ दुर्गा को तपस्या, ध्यान, और संतान की कल्याण की प्रतीक्षा का दर्शाया जाता है। 

चंद्रघंटा: 

तीसरे रूप में माता चंद्रघंटा हैं, जो चंद्र के आकार की स्थापना करती हैं और वे  चाँद से प्रकाशित होती हैं और उनके मुख पर एक विशालकाय चंद्रमा की प्रतिमा होती है। चंद्रघंटा माँ के चेहरे की दृष्टि शांतिप्रद होती है, लेकिन उनका रूप विक्रमी और महान होता है। वे अपने दो हाथों में वीणा धारण करती हैं और अपने चेहरे पर चंद्रमा के रूप का चंद्रकोटि धारण करती हैं। चंद्रघंटा माँ के चंद्रकोटि के बीच एक तिरंगा होता है, जो अभिनवता और शक्ति का प्रतीक होता है। 

कुष्माण्डा देवी:

नवदुर्गा माता के चौथे रूप में से एक हैं। इस रूप में माँ दुर्गा को जीवन की उत्पत्ति को बनाए रखने वाली देवी के रूप में दर्शाया जाता है। कुष्माण्डा माँ का स्वरूप बहुत ही भयंकर और प्रभावशाली होता है। उनकी आंखों का रंग लाल होता है और उनके मुख पर एक उग्र मुस्कान होती है। उनके मुख के एक स्वरूप में उनके आंतरिक शक्तियों को दर्शाता है। कुष्माण्डा माँ के चार हाथ होते हैं, जिनमें एक हाथ में छड़ी और दूसरे हाथ में कमंडलु होती है।

स्कंदमाता: 

पांचवे रूप में माता स्कंदमाता हैं, जो स्कंद (कार्तिकेय) की माँ हैं। स्कंदमाता, नवदुर्गा माता के पांचवे रूप में से एक हैं। इस रूप में माँ दुर्गा को स्कंद (कार्तिकेय) की माँ के रूप में पूजा जाता है। स्कंदमाता का स्वरूप अत्यंत प्रसन्न और सुंदर होता है। वह एक बालक को अपने गोद में ले कर बैठती हैं, जो कार्तिकेय (स्कंद) को प्रतिनिधित करता है। 

कात्यायनी: 

छठे रूप में माता कात्यायनी हैं, जो महिषासुर के वध के लिए उत्तर कुमार की पूजा करती हैं। कात्यायनी देवी का स्वरूप अत्यंत महान और उदार होता है।  कात्यायनी देवी का वाहन सिंह होता है, जो उनकी शक्ति और वीरता को प्रतिनिधित करता है। कात्यायनी माँ की पूजा से भक्त अपने जीवन में स्थिरता, समृद्धि, और सफलता की प्राप्ति के लिए आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। उनकी पूजा से माँ उनके सभी कार्यों में सफलता के लिए संयम और निर्णय देती हैं। 

कालरात्रि: 

सातवें रूप में माता कालरात्रि हैं, जो कालरात्रि की उत्पत्ति को बनाए रखने वाली देवी हैं।कालरात्रि देवी का स्वरूप अत्यधिक उग्र और भयंकर होता है। वह काली के रूप में प्रतिष्ठित होती हैं, जिनका चेहरा उग्रता और अद्भुतता से भरा होता है। कालरात्रि देवी के चार हाथ होते हैं, जिनमें एक हाथ में खड़ा त्रिशूल होता है और दूसरे हाथ में काले रंग का घड़ा होता है। उनकी तीसरी हाथ में दमरू होता है, और चौथे हाथ में वरदान का मुद्रा होता है, जो उनकी शक्ति को प्रतिनिधित करते हैं। कालरात्रि देवी का वाहन भालू होता है, जो उनकी शक्ति और संरक्षण को प्रतिनिधित करता है। 

महागौरी देवी

 नवदुर्गा माता के आठवें रूप में से एक हैं। इस रूप में माँ दुर्गा को शुभ और पवित्र स्वरूप में पूजा जाता है। इस रूप में माँ दुर्गा को उनकी विशेषता और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। महागौरी देवी का स्वरूप शानदार और दिव्य होता है। उनका चेहरा प्रकाशमय होता है और वे अत्यंत पवित्र दिखाई देती हैं। वे श्वेत वस्त्र पहनती हैं, जो उनकी निर्मलता और पवित्रता को दर्शाता है। महागौरी देवी के दो हाथ होते हैं, जिनमें एक हाथ में त्रिशूल होता है और दूसरे हाथ में वरदान का मुद्रा होता है। 

सिद्धिदात्री:

 नौवें रूप में माता सिद्धिदात्री हैं, जो सभी सिद्धियों की देवी हैं। वह अपने दोनों हाथों में वरदान और वाहन को धारण करती हैं। ये नौ रूप माता दुर्गा के अद्वितीय और प्रतिष्ठित रूप हैं, जो नवरात्रि के नौ दिनों में पूजे जाते हैं। सिद्धिदात्री देवी का स्वरूप अत्यधिक प्रसन्न और उदार होता है। उनका चेहरा प्रकाशमय होता है और उनकी आंखों में अनंत दया और स्नेह की भावना होती है। सिद्धिदात्री देवी के दो हाथ होते हैं, जिनमें एक हाथ में खड़ा त्रिशूल होता है और दूसरे हाथ में वरदान का मुद्रा होता है। उनके हाथों में उज्जवल और शुभता की भावना होती है। सिद्धिदात्री देवी का वाहन गदा होता है, जो उनकी सामर्थ्य और शक्ति को प्रतिनिधित करता है।

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अस्वीकरण: कृपया ध्यान दें कि लेख में उल्लिखित टिप्स/सुझाव केवल सामान्य जानकारी है जो विभिन्न सामाजिक और धार्मिक आस्था पर आधारित हैं.ताकि आपको उस मुद्दे के बारे में अपडेट रखा जा सके जो कि आम लोगों से अपेक्षित है. आपसे निवेदन है कि कृपया इन सुझावो को  पेशेवर सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए तथा अगर आपके पास इन विषयों से सम्बंधित कोई विशिष्ट प्रश्न हैं तो हमेशा सम्बंधित एक्सपर्ट से अवश्य परामर्श करें।

Shardiya Navratri 2025 Date: जानें माँ दुर्गा के 9 रूपों के बारे में, महत्व और पूजन विधि

Navratri Maa Dugra ke 9 rup aur significance

Shardiya Navratri 2025 Date: इस साल शारदीय नवरात्र (Shardiya Navratri 2025) की शुरुआत 22 सितंबर से हो चुकी है. इस साल मां दुर्गा का वाहन हाथी है. ऐसी मान्यता है कि हाथी पर मां दुर्गा का आना सुख-समृद्धि और वैभव का प्रतीक माना जाता है, जो कि मंगलकारी होता है.इसके अतिरिक्त, इस वर्ष अर्थात 2025 में नवरात्री में विशेष संयोग है क्योंकि  इस वर्ष शरद नवरात्र 10 दिनों का होगा। खास बात कि  9 साल बाद बन रहा एक अद्भुत संयोग है. मान्यता है कि ऐसा संजोग अच्छा और आम लोगों के के लिए शुभ माना जाता है. इसके अतिरिक्त  
  हिंदू धर्म में नवरात्रि के पर्व का विशेष महत्व होता है। साल भर में चैत्र और शारदीय नवरात्रि का खास महत्व होता है जब हम माता दुर्गा के सभी रूपों का पूजन करते हैं। नवरात्रि में देवी दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-आराधना करने का विधान होता है। 

शारदीय नवरात्रि के नौ दिनों में, देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है. ये रूप हैं:
  1. शैलपुत्री
  2. ब्रह्मचारिणी
  3. चंद्रघंटा
  4. कुष्मांडा
  5. स्कंदमाता
  6. कात्यायनी
  7. कालरात्रि
  8. महागौरी
  9. सिद्धिदात्री

प्रथम दुर्गा मां शैलपुत्री 

  • नवरात्रि के प्रथम दिन मां शैलपुत्री का पूजन किया जाता है।
  • ऐसी मान्यता है कि पर्वतराज हिमालय के घर देवी ने पुत्री के रूप में जन्म लिया और इसी कारण इनका नाम शैलपुत्री पड़ा। 
  • मां ब्रह्मचारिणी दाएं हाथ में माला और बाएं हाथ में कमण्डल लिए हुई हैं।
  • मां शैलपुत्री को प्रकृति का प्रतीक माना जाता है तथा भक्त यह मानते हैं कि माता शैलपुत्री जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सफलता का सर्वोच्च शिखर प्रदान करती हैं। 
  • माता शैलपुत्री के दाएं हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का फूल रहता है तथा इनका वाहन वृषभ (बैल) है।
  •  मां शैलपुत्री का पूजन घर के सभी सदस्य के रोगों को दूर करता है एवं घर से दरिद्रता को मिटा संपन्नता को लाता है। 

द्वितीय दुर्गा मां ब्रह्मचारिणी

  • नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी देवी की पूजा की जाती है.
  • ऐसी मान्यता है कि  शिवजी को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी और उन्हें ब्रह्म ज्ञान प्राप्त हुआ था, इसीलिए इनका नाम ब्रह्मचारिणी पड़ा। 
  •  मां ब्रह्मचारिणी के एक हाथ में कमंडल और दूसरे हाथ में जप की माला रहती है। 
  •  देवी दुर्गा का यह स्वरूप हमें  संघर्ष से विचलित हुए बिना सन्मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
  • कहा जाता है कि  मां ब्रह्मचारिणी को प्रसन्न करने और उनका कृपा प्राप्त करने के लिए कमल और गुड़हल के पुष्प अर्पित करने चाहिए।

तृतीय दुर्गा चंद्रघण्टा

  • नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा का पूजन किया जाता है.
  • मां चंद्रघंटा के मस्तक पर घंटे के आकार का अर्ध चंद्रमा विराजमान है, जिस वजह से मां का नाम चंद्रघंटा पड़ा।
  • मां चंद्रघंटा के दस हाथ हैं जिनमें कमल का फूल, कमंडल, त्रिशूल, गदा, तलवार, धनुष और बाण है।
  • माता का एक हाथ जहाँ आशीर्वाद देने की मुद्रा में रहता है वही  दूसरा हाथ सदैव भक्तों के लिए अभय मुद्रा में रहता है, जबकि शेष बचा एक हाथ वे अपने हृदय पर रखती हैं।
  • मां चंद्रघंटा का वाहन बाघ है। 
  • ऐसी मान्यता है कि  माँ चंद्रघंटा की कृपा से भक्तों को सांसारिक कष्टों से मुक्ति मिलती है तथा इनकी कृपा से भक्तों को अपने  मन को नियंत्रित करने में सहायता मिलती है।

चतुर्थ दुर्गा कूष्मांडा

  • देवी दुर्गा के चौथे स्वरुप के अंतर्गत माँ  कूष्मांडा की पूजा की जाती है 
  • ऐसी मान्यता है कि मां कूष्मांडा की आठ भुजाएं हैं और मां सिंह की सवारी करती हैं जिनमें से 7 भुजाओं में वे कमंडल, धनुष, बाण, कमल का फूल, अमृत कलश, चक्र और गदा धारण करती हैं.
  • माँ कूष्मांडा काआठवां हस्त सर्व सिद्धि और सर्व निधि प्रदान करने वाली जपमाला से सुशोभित रहती हैं। 

पंचम दुर्गा मां स्कंदमाता 

  • नवरात्रि के पांचवे दिन देवी स्कंदमाता का पूजन किया जाता है।
  •  ऐसी मान्यता है कि स्कंदमाता का वर्ण पूर्णत: श्वेत है
  •  मां की चार भुजाएं हैं और मां ने अपनी दाएं तरफ की ऊपर वाली भुजा से भगवान कार्तिकेय को पकड़ा हुआ है और ऊपर वाली बाई भुजा से आशीर्वाद देती हैं। 
  • मां  स्कंदमाता का वाहन सिंह हैऔर इस रूप को पद्मासना के नाम से भी जाना जाता है। 
  • ऐसा कहा जाता है कि मां स्कंदमाता वात्सल्य विग्रह होने के कारण इनकी हाथों में कोई शस्त्र नहीं होता। 
  • मां स्कंदमाता के स्वरुप के पूजन और प्रसन्नता से भक्तगण को ज्ञान की प्राप्ति होती है क्यंकि माँ स्कन्द माता को  को ज्ञान का प्रतीक माना जाता है।

षष्ठी दुर्गा मां कात्यायनी 

  • नवरात्री के छठे दिन मां कात्यायनी स्वरुप का पूजा किया जाता है. 
  • ऐसी मान्यता है कि ऋषि के गोत्र में जन्म लेने के कारण इन देवी का नाम कात्यायनी पड़ा।
  • मां का रंग स्वर्ण की भांति अन्यन्त चमकीला है और इनकी चार भुजाएं हैं। 
  • मां कात्यायनी देवी को अति गुप्त रहस्य एवं शुद्धता का प्रतीक माना जाता है. 
  • ऐसी मान्यता है कि मां कात्यायनी के पूजन से मनुष्य के आंतरिक सूक्ष्म जगत से नकारात्मकता होता है तथा वहां सकारात्मक  ऊर्जा प्राप्त होती है.  
  • देवी कात्यायनी का वाहन खूंखार सिंह है जिसकी मुद्रा तुरंत झपट पड़ने वाली होती है। 

सप्तम दुर्गा मां कालरात्रि 

  • देवी कालरात्रि की पूजा हम नवरात्रि के सातवें दिन करते हैं।
  • मां कालरात्रि के बारे में कहा जाता है कि इनकी पूजा मात्र से हीं मनुष्यों को भय से मुक्ति प्राप्त हो जाती है. 
  •  माता कालरात्रि तमाम आसुरिक शक्तियों का विनाश करने वाली हैं। 
  • मां के चार हाथ और तीन नेत्र हैं। 
  • मां  कालरात्रि की पूजन से अनिष्ट ग्रहों द्वारा उत्पन्न दुष्प्रभाव और बाधाएं भी नष्ट हो जाती हैं.
  • माता कालरात्रि का यह रूप उग्र एवं भयावह है जिनके बारे में मान्यता है की वह काल पर भी विजय प्राप्त करने वाली हैं। 
  • इनका वाहन गर्दभ (गधा) होता है। 

अष्टम दुर्गा मां महागौरी

  • नवरात्रि के आठवें दिन माँ महागौरी का पूजन किया जाता है.
  • ऐसी मान्यता है कि जब माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तप किया था. \
  • ऐसी मान्यता है कि प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अर्धांगिनी रूप में स्वीकार किया तथा भगवन की कृपा से पवित्र गंगा की जलधारा जब माता पर अर्पित की तो उनका रंग गौर हो गया। 
  • माता महागौरी का वाहन वृषभ है। 

नवम दुर्गा माँ सिद्धिदात्री

  • नवरात्रि के अंतिम दिन देवी सिद्धिदात्री की पूजा होती है.
  •  जैसा कि नाम से ही प्रतीत होती है, देवी का यह स्वरुप सभी सिद्धियों को प्रदान करने वाली हैं.
  • सिद्धिदात्री माता के कारण ही अर्धनारीश्वर का जन्म हुआ है जिनका वाहन सिंह है। 
  • माँ सिद्धिदात्री के दाएं और के ऊपर वाले हाथ में गदा और नीचे वाले हाथ में चक्र रहता है.
  • नवमी के दिन माँ सिद्धिदात्री की पूजा के उपरांत कन्या पूजन करना चाहिए जिससे देवी सबसे अधिक प्रसन्न होती हैं.
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अस्वीकरण: कृपया ध्यान दें कि लेख में उल्लिखित टिप्स/सुझाव केवल सामान्य जानकारी है जो विभिन्न सामाजिक और धार्मिक आस्था पर आधारित हैं.ताकि आपको उस मुद्दे के बारे में अपडेट रखा जा सके जो कि आम लोगों से अपेक्षित है. आपसे निवेदन है कि कृपया इन सुझावो को  पेशेवर सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए तथा अगर आपके पास इन विषयों से सम्बंधित कोई विशिष्ट प्रश्न हैं तो हमेशा सम्बंधित एक्सपर्ट से अवश्य परामर्श करें।

71st National Film Awards List: मोहनलाल को मिला Dadasaheb Phalke Award


मलयाली एक्टर मोहनलाल को फिल्म जगत में उनके योगदान के लिए हिंदी सिनेमा के सबसे गौरवपूर्ण दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें शॉल पहनाई और गोल्डन लोटस अवॉर्ड दिया।

 भारतीय सिनेमा का सर्वोच्च सम्मान दादा साहब फाल्के अवॉर्ड है। इसे वर्ष 1969 से दिया जा रहा है। यह अवॉर्ड भारतीय फिल्म जगत में आजीवन योगदान के लिए दिया जाता है।

दादा साहब फाल्के अवॉर्ड विजेताओं की सूची (1969-2025)

  • 1969 देविका रानी हिन्दी 
  • 1970 बिरेन्द्रनाथ सरकार बंगाली 
  • 1971 पृथ्वीराज कपूर हिन्दी 
  • 1972 पंकज मुल्लिक बंगाली / हिन्दी 
  • 1973 रूबी मायर्स (सुलोचाना) हिन्दी 
  • 1974 बोंममिरेड्डी नारसिंहा रेड्डी तेलुगू 
  • 1975 धिरेन्द्र नाथ गांगुली बंगाली 
  • 1976 कानन देवी बंगाली 
  • 1977 नितिन बोस बंगाली / हिन्दी 
  • 1978 रायचंद बोरेल बंगाली / हिन्दी 
  • 1979 सोहराब मोदी हिन्दी 
  • 1980 पैदी जैराज तेलुगू / हिन्दी 
  • 1981 नौशाद हिन्दी 
  • 1982 एल. वी. प्रसाद हिन्दी, तमिल, तेलुगू 
  • 1983 दुर्गा खोटे मराठी / हिन्दी 
  • 1984 सत्यजीत रे बंगाली 
  • 1985 वी. शांताराम हिन्दी / मराठी 
  • 1986 बी. नागी रेड्डी तेलुगू 
  • 1987 राज कपूर हिन्दी 
  • 1988 अशोक कुमार हिन्दी 
  • 1989 लाता मंगेशकर हिन्दी / मराठी 
  • 1990 अक्किेनेनी नागेश्वरा राव तेलुगू 
  • 1991 भलजी पेंडारकर मराठी 
  • 1992 भूपेन हजारिका असमिया 
  • 1993 मज़रूह सुल्तानपुरी हिन्दी 
  • 1994 दिलीप कुमार हिन्दी 
  • 1995 राजकुमार कन्नड़ 
  • 1996 शिवाजी गणेशन तमिल 
  • 1997 कवि प्रदीप हिन्दी 
  • 1998 बी. आर. चोपड़ा हिन्दी 
  • 1999 हृषिकेश मुखर्जी हिन्दी 
  • 2000 आषा भोसल हिन्दी / मराठी 
  • 2001 यश चोपड़ा हिन्दी 
  • 2002 देव आनंद हिन्दी 
  • 2003 मृणाल सेन हिन्दी / बंगाली 
  • 2004 आदूर गोपालकृष्णन मलयालम 
  • 2005 श्याम बेनेगल हिन्दी 
  • 2006 तपन सिन्हा हिन्दी / बंगाली 
  • 2007 मन्ना डे हिन्दी / बंगाली 
  • 2008 वी.के. मूरथी हिन्दी 
  • 2009 डी. रामानायडू तेलुगू 
  • 2010 के. बालाचंदर तमिल / तेलुगू 
  • 2011 सौमित्रा चॅत्तर्जी बंगाली 
  • 2012 प्राण हिन्दी 
  • 2013 गुलज़ार हिन्दी 
  • 2014 शशी कपूर हिन्दी 
  • 2015 मनोज़ कुमार हिन्दी 
  • 2016 कसिनाथुनि विश्वनाथ तेलुगू 
  • 2017 विनोद खन्ना हिन्दी 
  • 2018 अमिताभ बच्चन हिन्दी 
  • 2019 रजनीकांत तमिल 
  • 2020 आषा पारेख हिन्दी 
  • 2021 मोहन्लाल मलयालम 
  • 2022 आषा पारेख हिन्दी 
  • 2023 रेखा हिन्दी 
  • 2024 मिथुन चक्रवर्ती हिन्दी 
  • 2025 मोहन्लाल मलयालम 


जानें क्या होता है एच-1बी, एच-1बी1 और ई-3 वीजा: किन देशों के लिए कौन सा वीजा है?



एच-1बी, एच-1बी1 और ई-3 वीजा वास्तव में अमेरिका (U.S.) का एक वर्क वीज़ा है जो वहाँ की कंपनियों को यह अनुमति देता है कि वे विदेशी (non-US) देशों के पेशेवर लोगों को अपने यहाँ विशेषज्ञता वाले काम (Specialty Occupation) के लिए नियुक्त कर सकें।  हालाँकि अलग-अलग देशों के लिए क्षेत्रों के अनुसार अमेरिका विभिन्न वीजा  को जारी करती हैऔर इस प्रकार से अलग अलग कैटगरी के अनुसार उन देश  के लोगों  सम्बंधित वीजा कैटगरी के लिए आवेदन करना होता है. 

एच-1बी

एच-1बी कार्यक्रम नियोक्ताओं को अमेरिका में गैर-आप्रवासी आधार पर विशिष्ट व्यवसायों में या विशिष्ट योग्यता और क्षमता वाले फैशन मॉडल के रूप में विदेशी कर्मचारियों को अस्थायी रूप से नियुक्त करने की अनुमति देता है। किसी विशिष्ट व्यवसाय के लिए विशिष्ट ज्ञान के सैद्धांतिक और व्यावहारिक अनुप्रयोग और विशिष्ट विशेषज्ञता (जैसे, विज्ञान, चिकित्सा, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, जैव प्रौद्योगिकी और व्यावसायिक विशेषज्ञता, आदि) में स्नातक की डिग्री या समकक्ष की आवश्यकता होती है।

वर्तमान कानून उन योग्य विदेशी कर्मचारियों की वार्षिक संख्या को सीमित करते हैं जिन्हें वीज़ा जारी किया जा सकता है या अन्यथा एच-1बी दर्जा प्रदान किया जा सकता है, जिसमें एच-1बी उन्नत डिग्री छूट के तहत अतिरिक्त 20,000 शामिल हैं। एच-1बी सीमा, सीमा योग्यता और एच-1बी याचिकाओं के बारे में अधिक जानकारी के लिए, अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा (यूएससीआईएस) की वेबसाइट देखें ।

 एच-1बी1

H-1B1 कार्यक्रम नियोक्ताओं को विशिष्ट व्यवसायों में गैर-आप्रवासी आधार पर चिली और सिंगापुर के विदेशी कर्मचारियों को अमेरिका में अस्थायी रूप से नियुक्त करने की अनुमति देता है। वर्तमान कानून H-1B1 वीज़ा जारी किए जा सकने वाले योग्य विदेशी कर्मचारियों की वार्षिक संख्या को 6,800 तक सीमित करते हैं, जिनमें से 1,400 चिली से और 5,400 सिंगापुर से हैं। H-1B1 सीमा, H-1B1 सीमा योग्यताओं और H-1B1 याचिकाओं के बारे में जानकारी के लिए, USCIS वेबसाइट या चिली और/या सिंगापुर के लिए विदेश विभाग की वेबसाइट के कांसुलर अनुभाग देखें।

ई-3

ई-3 कार्यक्रम नियोक्ताओं को विशिष्ट व्यवसायों में गैर-आप्रवासी आधार पर ऑस्ट्रेलिया के विदेशी कर्मचारियों को अमेरिका में अस्थायी रूप से नियुक्त करने की अनुमति देता है। वर्तमान कानून विशिष्ट व्यवसायों में अस्थायी कार्य चाहने वाले योग्य विदेशी कर्मचारियों की वार्षिक संख्या को 10,500 ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों तक सीमित करता है जिन्हें ई-3 वीज़ा जारी किया जा सकता है। ई-3 सीमा, ई-3 सीमा योग्यता और ई-3 याचिकाओं के बारे में जानकारी के लिए, यूएससीआईएस वेबसाइट या ऑस्ट्रेलिया के विदेश विभाग की वेबसाइट के कांसुलर अनुभाग देखें।