दीपावली 2023 : जानें माँ लक्ष्मी के साथ क्यों करते हैं भगवन गणेश का पूजन

diwali why we worship Lakshmi with Ganesh

दीपावली के अवसर पर हम  धन, समृद्धि और वैभव की देवी मां लक्ष्मी की पूजन करते हैं. अगर पौराणिक कथाओं और हिन्दू पंचांग के मानें तो  लक्ष्मी को धन, समृद्धि और वैभव की देवी माना जाता है, जबकि भगवान गणेश को बुद्धि, ज्ञान और शुभता के देवता माना जाता है। माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश का पूजन हिन्दू धर्म में अद्वितीय देवी-देवता के साथ सम्बंधित है और इसमें विशेष आध्यात्मिक और पौराणिक महत्व है। इन दोनों देवताओं की पूजा एक साथ करने के कई कारण हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:

धन और बुद्धि का समन्वय

 माँ लक्ष्मी को धन, धान्य, और समृद्धि की देवी माना जाता है। उनकी पूजा से व्यापारिक सफलता और धन संबंधित समस्याएं दूर होती हैं। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता (विघ्नों को दूर करने वाला) माना जाता है, और उनकी कृपा से कोई भी कार्य सुरक्षित रूप से संपन्न होता है। माँ लक्ष्मी के बिना धन का कोई उपयोग नहीं है। यदि धन में बुद्धि का अभाव हो, तो वह विपत्ति का कारण बन सकता है। इसलिए, धन और बुद्धि के समन्वय के लिए माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा एक साथ की जाती है। 

दैवीय शक्तियों का संयोजन

साधना में सुरक्षा: भगवान गणेश की पूजा करने से साधना में सुरक्षा और सफलता होती है। गणेश विघ्नों के देवता हैं, इसलिए उनकी कृपा से कोई भी कार्य बिना किसी रुकावट के संपन्न होता है। इसके अतिरिक्त माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश दोनों ही दैवीय शक्तियों के प्रतीक हैं। माँ लक्ष्मी की कृपा से धन-धान्य की प्राप्ति होती है, जबकि भगवान गणेश की कृपा से सभी कार्यों में सफलता प्राप्त होती है। इसलिए, इन दोनों देवताओं की पूजा एक साथ करने से जीवन में सुख-समृद्धि और सफलता प्राप्त होती है।

पौराणिक कथाओं का आधार

माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा एक साथ करने की परंपरा पौराणिक कथाओं पर आधारित है। एक पौराणिक कथा के अनुसार, माता लक्ष्मी को कोई संतान नहीं थी। एक दिन उन्होंने माता पार्वती से अपने मन की व्यथा बताई। माता पार्वती ने उन्हें अपने पुत्र गणेश को अपना दत्तक पुत्र बना लेने का सुझाव दिया। माता लक्ष्मी ने गणेश जी को दत्तक पुत्र के रूप में स्वीकार कर लिया। उस पौराणिक कथा के अनुसार, लक्ष्मी और गणेश का एक विवाह के चरण में हुआ था। इस कथा के आधार पर लोग मानते हैं कि इन दोनों देवताओं का साथी पूजन करना उनकी कृपा को बढ़ाता है। इस प्रकार, माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश एक परिवार बन गए। इसलिए, इन दोनों देवताओं की पूजा एक साथ की जाती है।

सामाजिक कारण और दैहिक, मानसिक और आध्यात्मिक समृद्धि: 

गणेश और लक्ष्मी का संयोजन दैहिक, मानसिक, और आध्यात्मिक समृद्धि के साथ जुड़ा होता है। इस पूजा से भक्तों को नैतिकता, ध्यान, और आत्मिक उन्नति की प्राप्ति होती है। भारतीय समाज में माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश को विशेष महत्व दिया जाता है। इन दोनों देवताओं की पूजा से जीवन में सुख-समृद्धि और सफलता प्राप्त होती है। इसलिए, लोग इन दोनों देवताओं की पूजा एक साथ करते हैं।

इन कारणों से ही माँ लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश की पूजा की जाती है।

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Bed of roses का हिंदी में मतलब आरामदायक जीवन होता है। यह एक मुहावरा है जिसका प्रयोग किसी ऐसे व्यक्ति या स्थिति के लिए किया जाता है जो बहुत ही आसान और सुखद होता है। उदाहरण के लिए, कोई व्यक्ति कह सकता है, "मेरा जीवन एक बेड ऑफ रोज़ेस है।" इसका मतलब यह होगा कि उसके जीवन में कोई परेशानी या कठिनाई नहीं है।

Bed of roses का प्रयोग निम्नलिखित वाक्यों में किया जा सकता है:

मेरे नए नौकरी एक बेड ऑफ रोज़ेस है।

उसका बचपन एक बेड ऑफ रोज़ेस था।

मेरी शादी एक बेड ऑफ रोज़ेस नहीं है, लेकिन मैं खुश हूं।

Bed of roses का प्रयोग अन्य मुहावरों के साथ भी किया जा सकता है, जैसे:

To live on a bed of roses का मतलब है आरामदायक जीवन जीना।

To make someone's life a bed of roses का मतलब है किसी के जीवन को आसान और सुखद बनाना।

Bed of roses एक खूबसूरत मुहावरा है जो किसी व्यक्ति या स्थिति की सुखदता और आरामदायकता को व्यक्त करता है।

काज़िंड-2023: भारत और कजाकिस्तान के बीच होने वाला संयुक्त सैन्य अभ्यास, Facts in Brief

Exercise karzind 2023 Facts in brief

भारत और कजाकिस्तान के बीच होने वाला संयुक्त सैन्य अभ्यास है काज़िंड-2023 जिसका आयोजन 30 अक्टूबर से 11 नवंबर 2023 तक कतर, कजाकिस्तान में किया जाएगा। भारतीय थलसेना और भारतीय वायु सेना की 120 सैन्‍य कर्मियों वाली टुकड़ी संयुक्त सैन्य ‘अभ्‍यास काज़िंड-2023’ के 7वें संस्करण में भाग लेंगी । 

भारतीय सेना के दल में डोगरा रेजिमेंट की एक बटालियन के नेतृत्व में 90 सैन्‍य कर्मी शामिल हैं। कजाकिस्तान के सैन्‍य दल का प्रतिनिधित्व मुख्य रूप से कजाख ग्राउंड फोर्सेज के दक्षिण क्षेत्रीय कमान के सैन्‍य कर्मियों द्वारा किया जाता है। इस सैन्‍य अभ्यास के वर्तमान संस्करण में सेना की टुकड़ियों के साथ दोनों पक्षों से वायु सेना के 30 सैन्‍य कर्मी भी भाग लेंगे।

2016 में शुरू किया गया

भारत और कजाकिस्तान के बीच संयुक्त अभ्यास को वर्ष 2016 में ‘एक्सरसाइज प्रबल दोस्‍तीक’ के रूप में शुरू किया गया था। दूसरे संस्करण के बाद, अभ्यास को कंपनी-स्तरीय अभ्यास में अपग्रेड किया गया और इसका नाम बदलकर ‘एक्सरसाइज काज़िंड’ कर दिया गया। इस वर्ष वायु सेना को शामिल करके अभ्यास को द्वि-सेवा अभ्यास के रूप में अपग्रेड किया गया है। 

अभ्यास के इस संस्करण में, दोनों सैन्‍य पक्ष संयुक्त राष्ट्र के अधिदेश के अंतर्गत उप-औपचारिक वातावरण में आतंकवाद विरोधी अभियानों के संचालन का अभ्यास करेंगे। यह टुकड़ियां संयुक्त रूप से विभिन्न सामरिक अभ्यासों का अभ्यास करेंगी, जिसमें छापेमारी, खोज और विनाश संचालन, छोटी टीम प्रविष्टि और निष्कर्षण संचालन आदि शामिल हैं। अभ्यास के कार्यक्षेत्र में काउंटर मानव रहित हवाई प्रणाली संचालन भी शामिल है।

एक्सरसाइज काज़िंड-2023: Facts

‘एक्सरसाइज काज़िंड-2023’ दोनों सैन्‍य पक्षों को एक-दूसरे की रणनीति, युद्ध अभ्यास और प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी प्राप्‍त करने का अवसर प्रदान करेगा, जो संयुक्त राष्ट्र कार्यक्षेत्र के अंतर्गत कार्य संचालन के लिए जरूरी है। इस संयुक्त प्रशिक्षण से अर्ध-शहरी और शहरी परिस्थितियों में संयुक्त सैन्य अभियान के संचालन के लिए अपेक्षित कौशल, लचीलापन और समन्वय को विकसित करेगा।

दोनों सैन्य पक्षों को युद्ध कौशल के व्यापक स्पेक्ट्रम पर अभ्यास करने और एक-दूसरे से पारस्परिक रूप से सीखने का अवसर प्राप्‍त होगा। यह अभ्यास प्रतिभागियों को विचारों का आदान-प्रदान करने और सर्वश्रेष्‍ठ अभ्‍यासों को साझा करने का अवसर प्रदान करेगा। ‘एक्सरसाइज काज़िंड-2023’ दोनों सेनाओं के बीच संबंधों को और अधिक प्रबल करेगा।

G-20 की मेजबानी के लिए सजी दिल्ली: देखें खूबसूरती की झलकियां

 जी-20 समिट के लिए दिल्ली पूरी तरह से सजकर तैयार है। केजरीवाल सरकार और एमसीडी ने राष्ट्रीय राजधानी में आने वाले विदेशी मेहमानों का दिल जीतने के लिए अपनी तैयारियों में कोई कसर नहीं छोड़ी है।



केजरीवाल सरकार और दिल्ली नगर निगम की तरफ से जी-20 की तैयारियों को अंतिम रूप देने के बाद बुधवार को पीडब्ल्यूडी मंत्री आतिशी और शहरी विकास मंत्री ने दिल्ली सचिवालय में प्रेसवार्ता कर यह जानकारी साझा की।



 दिल्ली को खूबसूरत और आकर्षक बनाने के लिए सरकार ने यूरोपियन स्टैंडर्ड की कई नई सड़कें बनाई है और प्रमुख सड़कों को रीडिजाइन कर उनका सौंदर्यीकरण किया है।



 विभिन्न सड़कों पर आकर्षक विशाल मूर्तियां और फब्बारे लगवाए गए हैं।



 साथ ही, विभिन्न प्रकार के डेढ़ लाख से अधिक खूबसूरत पौधों से सड़कों को सजा दिया है और अब दिल वालों की दिल्ली’ आने वाले अपने विदेशी मेहमानों का स्वागत करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। 





दिल्ली की पीडब्ल्यूडी मंत्री आतिशी ने बताया कि दिल्ली जी-20 के लिए पूरी तरह से तैयार है। दिल्ली सरकार द्वारा जी-20 के डेलीगेट्स को रिसीव करने के लिए सारी तैयारियां कर ली गई हैं। 



दिल्ली और देशवासियों के लिए यह बहुत ही खुशी का मौका है। क्योंकि हमारे देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में दुनिया भर के बड़े-बड़े देशों के प्रतिनिधि आ रहे हैं। 




आज दिल्ली उन सभी का स्वागत करने के लिए तैयार है।  इस बात का पूरा भरोसा है कि दिल्ली जी-20 के सभी डेलीगेट्स का दिल जीत लेगी।


कांग्रेस द्वारा किये गए 15 वर्षों वाले दिल्ली का चहुॅमुखी विकास आज भी प्रगति की मिसाल: अरविन्दर सिंह लवली

Arvinder Singh Lovely on Delhi Politics Congress hope

दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के नवनियुक्त अध्यक्ष श्री अरविन्दर सिंह लवली ने कहा है कि  दिल्ली की कांग्रेस सरकार ने 15 वर्षों के कार्यकाल में जो दिल्ली का चहुॅमुखी विकास किया, वो दिल्ली में प्रगति की मिसाल है और दिल्लीवासी आज भी उसको याद करते है।

अरविन्दर सिंह लवली से मिलने वालों में सामाजिक संस्थाओं,  आर.डब्लू.ए. से जुड़े लोगों के अलावा कांग्रेस कार्यकर्ताओं व आम लोगों ने श्री लवली को आश्वासन जताया कि हम कांग्रेस संगठन के साथ हैं और कहा कि दिल्ली की कांग्रेस सरकार ने 15 वर्षों के कार्यकाल में जो दिल्ली का चहुॅमुखी विकास किया, वो दिल्ली में प्रगति की मिसाल है और दिल्लीवासी आज भी उसको याद करते है।

अरविन्दर सिंह लवली ने कहा कि मुझे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद की जो महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है, उस पर खरा उतरने की कोशिश करूंगा और संगठन को हर स्तर पर मजबूत बनाने के लिए काम करूंगा।

अरविन्दर सिंह लवली से मिलने वालों में पूर्व विधायक श्री भीष्म शर्मा, श्री वीर सिंह धींगान, श्री विपिन शर्मा, जिला अध्यक्ष श्री जुबैर अहमद, जिला अध्यक्ष एडवोकेट दिनेश कुमार और धर्मपाल चंदेला सहित निगम पार्षद व भारी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल थे।


Aditya L1 Mission: सूर्य की स्टडी करने की दिशा में भारत का महत्वपूर्ण छलांग-Facts in Brief

Aditya L1 Mission details facts in brief

चंद्रयान की व्यापक सफलता के बाद इसरो के वैज्ञानिकों ने आज, 02 सितंबर, 2023 को 11.50 बजे, ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी-सी57) ने श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (एसडीएससी) के दूसरे लॉन्च पैड से आदित्य-एल1 अंतरिक्ष यान को सफलतापूर्वक लॉन्च किया।

63 मिनट और 20 सेकंड की उड़ान अवधि के बाद, आदित्य-एल1 अंतरिक्ष यान को पृथ्वी के चारों ओर 235x19500 किमी की अण्डाकार कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित किया गया।

आदित्य-एल1 पहली भारतीय अंतरिक्ष आधारित वेधशाला है जो पहले सूर्य-पृथ्वी लैग्रेंजियन बिंदु (एल1) के चारों ओर एक प्रभामंडल कक्षा से सूर्य का अध्ययन करती है, जो पृथ्वी से लगभग 1.5 मिलियन किमी दूर स्थित है।

आदित्य-एल1 अंतरिक्षयान को लैग्रेंज बिंदु एल1 की ओर स्थानांतरण कक्षा में स्थापित करने से पहले चार पृथ्वी-कक्षीय प्रक्रियाओं से गुजरना होगा। लगभग 127 दिनों के बाद आदित्य-एल1 के एल1 बिंदु पर इच्छित कक्षा में पहुंचने की उम्मीद है।


आदित्य-एल1 इसरो और भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (आईआईए), बेंगलुरु और इंटर यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स (आईयूसीएए), पुणे सहित राष्ट्रीय अनुसंधान प्रयोगशालाओं द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित सात वैज्ञानिक पेलोड ले जाता है।

आदित्य एल1: Facts in Brief 

आदित्य एल1 सूर्य का अध्ययन करने वाला पहला अंतरिक्ष आधारित भारतीय मिशन होगा। अंतरिक्ष यान को सूर्य-पृथ्वी प्रणाली के लाग्रेंज बिंदु 1 (एल1) के चारों ओर एक प्रभामंडल कक्षा में रखा जाएगा, जो पृथ्वी से लगभग 1.5 मिलियन किमी दूर है। एल1 बिंदु के चारों ओर प्रभामंडल कक्षा में रखे गए उपग्रह को सूर्य को बिना किसी आच्छादन/ग्रहण के लगातार देखने का प्रमुख लाभ है। यह वास्तविक समय में सौर गतिविधियों और अंतरिक्ष मौसम पर इसके प्रभाव को देखने का अधिक लाभ प्रदान करेगा। अंतरिक्ष यान वैद्युत-चुम्बकीय और कण और चुंबकीय क्षेत्र संसूचकों का उपयोग करके फोटोस्फीयर, क्रोमोस्फीयर और सूर्य की सबसे बाहरी परतों (कोरोना) का निरीक्षण करने के लिए सात नीतभार ले जाएगा। विशेष सहूलियत बिंदु एल1 का उपयोग करते हुए, चार नीतभार सीधे सूर्य को देखते हैं और शेष तीन नीतभार लाग्रेंज बिंदु एल1 पर कणों और क्षेत्रों का यथावस्थित अध्ययन करते हैं, इस प्रकार अंतर-ग्रहीय माध्यम में सौर गतिकी के प्रसार प्रभाव का महत्वपूर्ण वैज्ञानिक अध्ययन प्रदान करते हैं।

आदित्य एल1 नीतभार के सूट से कोरोनल तापन, कोरोनल मास इजेक्शन, प्री-फ्लेयर और फ्लेयर गतिविधियों और उनकी विशेषताओं, अंतरिक्ष मौसम की गतिशीलता, कण और क्षेत्रों के प्रसार आदि की समस्या को समझने के लिए सबसे महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करने की उम्मीद है।

आदित्य-एल1 मिशन के प्रमुख विज्ञान उद्देश्य

  • सौर ऊपरी वायुमंडलीय (क्रोमोस्फीयर और कोरोना) गतिकी का अध्ययन।
  • क्रोमोस्फेरिक और कोरोनल तापन, आंशिक रूप से आयनित प्लाज्मा की भौतिकी, कोरोनल मास इजेक्शन की शुरुआत, और फ्लेयर्स का अध्ययन
  • सूर्य से कण की गतिशीलता के अध्ययन के लिए डेटा प्रदान करने वाले यथावस्थित कण और प्लाज्मा वातावरण का प्रेक्षण
  • सौर कोरोना की भौतिकी और इसका ताप तंत्र।
  • कोरोनल और कोरोनल लूप प्लाज्मा का निदान: तापमान, वेग और घनत्व।
  • सी.एम.ई. का विकास, गतिशीलता और उत्पत्ति।
  • उन प्रक्रियाओं के क्रम की पहचान करें जो कई परतों (क्रोमोस्फीयर, बेस और विस्तारित कोरोना) में होती हैं जो अंततः सौर विस्फोट की घटनाओं की ओर ले जाती हैं।
  • कोरोना में चुंबकीय क्षेत्र टोपोलॉजी और चुंबकीय क्षेत्र माप।
  • हवा की उत्पत्ति, संरचना और गतिशीलता।


आदित्य-एल1 के उपकरणों को मुख्य रूप से क्रोमोस्फीयर और कोरोना सौर वातावरण का निरीक्षण करने के लिए ट्यून किया गया है। यथावस्थित यंत्र एल1 पर स्थानीय पर्यावरण का निरीक्षण करेंगे। ऑन-बोर्ड कुल सात नीतभार हैं, जिनमें से चार सूर्य की सुदूर संवेदन करने वाले और उनमें से तीन यथावस्थित प्रेक्षण करने वाले नीतभार हैं। (Source ISRO)

चन्द्रमा पर मानव के बढ़ते कदम: जाने चंद्र अभियानों का इतिहास, स्पुतनिक से लेकर चंद्रयान तक का टाइमलाइन-Facts in Brief

Mission Moon History Timeline Facts in Brief

चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव को छूने में रूस के लूना-25 मिशन की दुखद विफलता के बाद, अब भारत का चंद्रयान-3 मिशन जिसके पूरा होने का पूरी दुनिया बेसब्री से इंतजार कर रही है। यदि सब कुछ सुचारू रहा, तो बहुप्रतीक्षित LVM3-M4-चंद्रयान-3 मिशन प्रगति पर है और यह 17:20 बजे सॉफ्ट-लैंडिंग शुरू होने का गवाह बनेगा। IST 23 अगस्त, 2023 को। यहां स्पुतनिक से चंद्रयान तक मनुष्य के चंद्रमा मिशन का पूरा इतिहास है।

चंद्र अभियानों का इतिहास अंतरिक्ष दौड़ के शुरुआती दिनों में खोजा जा सकता है, जब सोवियत संघ और संयुक्त राज्य अमेरिका चंद्रमा पर सबसे पहले पहुंचने के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे थे।

चंद्र अभियानों का इतिहास अंतरिक्ष दौड़ के शुरुआती दिनों में खोजा जा सकता है, जब सोवियत संघ और संयुक्त राज्य अमेरिका चंद्रमा पर सबसे पहले पहुंचने के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे थे। 

पहला सफल चंद्र मिशन सोवियत संघ का लूना 2 था, जो 14 सितंबर, 1959 को चंद्रमा पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। चंद्रमा पर पहली सफल सॉफ्ट लैंडिंग सोवियत संघ के लूना 9 द्वारा 3 फरवरी, 1966 को हासिल की गई थी।

संयुक्त राज्य अमेरिका का पहला सफल चंद्रमा मिशन अपोलो 11 मिशन था, जिसने 20 जुलाई, 1969 को नील आर्मस्ट्रांग और बज़ एल्ड्रिन को चंद्रमा पर उतारा था। तब से, कुल बारह सफल चालक दल चंद्रमा पर उतरे हैं, जिनमें से सभी को चंद्रमा पर उतारा गया था। संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा बाहर.

चालक दल के मिशनों के अलावा, चंद्रमा पर कई रोबोटिक मिशन भी हुए हैं। इन मिशनों का उपयोग चंद्रमा की सतह, संरचना और इतिहास का अध्ययन करने के लिए किया गया है।

 कुछ सबसे उल्लेखनीय रोबोटिक चंद्रमा मिशनों में शामिल हैं:

चंद्रयान-1: चंद्रमा पर भारत का पहला मिशन, 2008 में लॉन्च किया गया। इसने चंद्रमा पर पानी की खोज की।

चांग’3: चीन का पहला चंद्र लैंडर, जो 2013 में चंद्रमा पर उतरा। यह युतु रोवर ले गया, जिसने कई महीनों तक चंद्र सतह का पता लगाया।

GRAIL: नासा और जर्मन एयरोस्पेस सेंटर का एक संयुक्त मिशन, 2011 में लॉन्च किया गया। इसने चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र को अभूतपूर्व विस्तार से मैप किया।

एलआरओ: नासा का चंद्र टोही ऑर्बिटर, जो 2009 से चंद्रमा की परिक्रमा कर रहा है। इसने चंद्रमा की सतह की लाखों छवियां ली हैं और कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक खोजें की हैं।

चंद्रमा की खोज एक सतत प्रक्रिया है और भविष्य में कई और मिशनों की योजना बनाई गई है। ये मिशन हमें चंद्रमा के अतीत, वर्तमान और भविष्य के बारे में और अधिक जानने में मदद करेंगे।

Man Mission To Moon: Time Line 

  • 1959: लूना 2 चंद्रमा पर प्रभाव डालने वाला पहला अंतरिक्ष यान बना।
  • 1966: लूना 9 चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला पहला अंतरिक्ष यान बना।
  • 1969: अपोलो 11 ने नील आर्मस्ट्रांग और बज़ एल्ड्रिन को चंद्रमा पर उतारा।
  • 1972: अपोलो 17 चंद्रमा पर अंतिम मानवयुक्त मिशन था।
  • 1990: क्लेमेंटाइन दृश्य प्रकाश में संपूर्ण चंद्रमा का मानचित्रण करने वाला पहला अंतरिक्ष यान बना।
  • 1994: गैलीलियो चंद्रमा की परिक्रमा करने वाला पहला अंतरिक्ष यान बना।
  • 2008: चंद्रयान-1 चंद्रमा की कक्षा में जाने वाला पहला भारतीय अंतरिक्ष यान बना।
  • 2011: एलआरओ ने चंद्रमा की परिक्रमा शुरू की।
  • 2013: चांग'ई 3 चंद्रमा पर उतरने वाला पहला चीनी अंतरिक्ष यान बना।
  • 2019: चांग'ई 4 चंद्रमा के सुदूर हिस्से पर उतरने वाला पहला अंतरिक्ष यान बना।

चंद्र अभियानों का इतिहास बहुत लंबा और दिलचस्प है। यह मानवीय सरलता और दृढ़ता की कहानी है, और यह एक ऐसी कहानी है जो अभी भी लिखी जा रही है।

नशे की राजधानी बनाने और 8000 करोड़ विज्ञापन पर खर्च करने में देश में नंबर 1 स्थान पर पहुंची दिल्ली: कांग्रेस

Congress blames on AAP for Corruption and Mismanagement

कांग्रेस ने कहा है कि 9 वर्षों में दिल्ली सरकार पर भाष्टाचार के गंभीर मामले सामने आ रहे है दिल्ली सरकार की नाकामयाबी की वजह से देश की राजधानी चाहे बेरोजगारी, दिल्ली में कोविड संक्रमण में सबसे अधिक मौतें होना, प्रदूषण से बीमारियाँ, महिला उत्पीड़न में, दिली को नशे की राजधानी बनाने में, 8000 cr का विज्ञापन पर खर्च करने में देश में नंबर 1 स्थान पर पहुँच गई है ।

AICC के दिल्ली प्रभारी श्री दीपक बाबरिया ने कहा कि 16 अगस्त को नई दिल्ली में कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय कार्यालय में हुई बैठक में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष आदरणीय मल्लीकार्जुन खरगे साहब, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री राहुल गांधी जी और महासचिव संगठन श्री के.सी. वेनूगोपल जी के मार्गदर्शन में हमारी जो बैठक थी उसके मुख्य केंद्र बिंदु आगामी लोकसभा के चुनाव के लिए पार्टी की रन नीति क्‍या होनी चाहिए, दिल्ली राज्य की जानता की क्या क्या प्रमुख समस्‍याएं हैं और किस प्रकार से पार्टी को आगे बढ़ना चाहिए तथा AICC के उदयपुर चिंतन शिविर से संगठन ज़मीनी स्तर पर और विस्तार करने की नीति बनाने पर विचार विमर्श हुआ ।

श्री बाबरिया ने कहा कि मौजूदा हालत में  देश की राजधानी जिसे कांग्रेस की शीला दीक्षित सरकार ने अपने 15 वर्ष के शासन में दिल्ली में अभूतपूर्व विकास कर दिल्ली को विश्वस्तरीय शहर बनाया लेकिन बीते 9 वर्षों में आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार और भाजपा की केंद्र सरकार ने काम न कर  केवल झूठे प्रचार दिल्ली के विकास की गति को रोक दिया है  ।

श्री बाबरिया ने कहा  कि 9 वर्षों में दिल्ली सरकार पर भाष्टाचार के गंभीर मामले सामने आ रहे है दिल्ली सरकार की नाकामयाबी की वजह से देश की राजधानी चाहे बेरोजगारी, दिल्ली में कोविड संक्रमण में सबसे अधिक मौतें होना, प्रदूषण से बीमारियाँ, महिला उत्पीड़न में, दिली को नशे की राजधानी बनाने में, 8000 cr का विज्ञापन पर खर्च करने में देश में नंबर 1 स्थान पर पहुँच गई है ।

उन्होंने कहा कि दिल्ली में क़ानून व्यवस्था जिसकी ज़िम्मेदारी भाजपा की केंद्र सरकार के अधीन दिल्ली पुलिस की है जो की पूरी तरह से विफल साबित हुई है और स्तिथि बद से बदतर हो गई है चाहे महिलाओं के साथ जघन्य बलात्कार व हत्याओं के कांड, सारेआम लूट पाट होना, हत्याएँ, डकैती अब आम बात हो गई है लेकिन जनता में भय का माहोल है ।उन्होंने कहा कि दिल्ली और केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों  का कांग्रेस पार्टी द्वारा पुर ज़ोर तरीके से विरोध कर आंदोलन भी किया जाएगा ।

 श्री बाबरिया ने कहा कि बैठक में AICC के उदयपुर चिंतन शिविर से संघटन को ज़मीनी स्तर पर और विस्तार देने का खाका तैयार हुआ है जिस्म हर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अधीन 2 मंडलम अध्यक्ष और 2 -3 सेक्टर अध्यक्ष बनाने का दिल्ली कांग्रेस ने परिसीमन करने को कमेटियों का गठन कर लिय है और शीघ्र ही इसका स्वरूप भी तैयार हो जाएगा जिससे कांग्रेस कार्यकर्ता जानता से और अधिक नज़दीक होकर कर स्म्पर्क साध उनकी समयसयों से जोड़ सकेगा ।


 


Independence Day 2023: 15 अगस्त को लाल किले से ही क्यों फहराते हैं तिरंगा-जाने तथ्य

यह सवाल अक्सर हमारे मन में उठता है और यह स्वाभाविक भी है कि  आखिर 15 अगस्त को लाल किले से ही क्यों तिरंगा फहराया जाता है? भारत के इतिहास में अनगिनत ऐतिहासिक धरोहर है और  कई तो दिल्ली में ही अवस्थित है. तो फिर आखिर  15 अगस्त को लाल किले से ही क्यों तिरंगा फहराया जाता है.  जैसा कि हम सभी जानते हैं कि  लाल किला भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास का एक महत्वपूर्ण स्थल है. यह किला मुगल सम्राट शाहजहाँ द्वारा 17वीं शताब्दी में बनवाया गया था और यह भारत के मुगल साम्राज्य की राजधानी हुआ करता था.

लाल किला: ऐतिहासिक महत्त्व 

1857 के भारतीय विद्रोह के बाद ब्रिटिश सरकार ने लाल किले पर कब्जा कर लिया और इसे अपना निवास स्थान बना लिया. भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान लाल किले का इस्तेमाल एक महत्वपूर्ण सैन्य छावनी के रूप में किया गया था. 15 अगस्त 1947 को भारत के स्वतंत्रता के बाद लाल किले से पहली बार तिरंगा फहराया गया था. तब से हर साल 15 अगस्त को लाल किले से तिरंगा फहराया जाता है.


लाल किले से तिरंगा फहराने का एक और कारण यह है कि यह किला भारत की राजधानी दिल्ली के केंद्र में स्थित है. दिल्ली भारत के सबसे बड़े और सबसे महत्वपूर्ण शहरों में से एक है. लाल किले से तिरंगा फहराने से यह संदेश जाता है कि भारत एक स्वतंत्र और संप्रभु देश है.

लाल किला: प्रधानमंत्री के भाषण का महत्त्व 

सभी प्रधानमंत्रियों ने अपने भाषण में देश के लोगों को एकजुट होने और देश के विकास के लिए काम करने का आह्वान किया है.प्रधानमंत्री के लाल किले से भाषण देश के लोगों के लिए एक प्रेरणा का स्रोत हैं. ये भाषण देश के लोगों को एकजुट करते हैं और उन्हें देश के लिए काम करने के लिए प्रेरित करते हैं.

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री लाल किले से देश को संबोधित करते हैं और उन्हें देश के लिए अपनी प्रतिबद्धता के बारे में याद दिलाते हैं. प्रधानमंत्री अपने भाषण में देश के सामने आने वाली चुनौतियों और उन चुनौतियों का सामना करने के लिए सरकार की नीतियों के बारे में भी बात करते हैं.

प्रधानमंत्री का लाल किले से भाषण हमेशा देश के लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत होता है. यह उन्हें देश के लिए अपनी प्रतिबद्धता और देश के विकास के लिए अपनी आकांक्षाओं को याद दिलाता है. प्रधानमंत्री का भाषण देश के लोगों को एकजुट करने और उन्हें देश के लिए काम करने के लिए प्रेरित करता है.

प्रधानमंत्री का लाल किले से भाषण एक ऐतिहासिक अवसर है जो देश के लोगों को एकजुट करता है और उन्हें देश के लिए काम करने के लिए प्रेरित करता है. यह एक अवसर है जब प्रधानमंत्री देश के लोगों को बधाई देते हैं और उन्हें देश के लिए अपनी प्रतिबद्धता के बारे में याद दिलाते हैं.

इतिहास 

भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 15 अगस्त 1947 को लाल किले से अपना पहला स्वतंत्रता दिवस का भाषण दिया था.

प्रधानमंत्री नेहरू ने अपने भाषण में कहा था कि "आज हम एक नए युग में प्रवेश कर रहे हैं. आज हम एक स्वतंत्र देश हैं. आज हम अपनी किस्मत के मालिक हैं."

प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने अपने भाषण में देश के लोगों को एकजुट होने और देश के विकास के लिए काम करने का आह्वान किया था.

प्रधानमंत्री नेहरू के बाद लाल किले से भाषण देने वाले अन्य प्रधानमंत्रियों में लाल बहादुर शास्त्री, इन्दिरा गांधी, राजीव गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी, मनमोहन सिंह, नरेंद्र मोदी शामिल हैं.

प्रधानमंत्री के लाल किले से भाषण का  इतिहास: तथ्य

  • भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 15 अगस्त 1947 को लाल किले से अपना पहला स्वतंत्रता दिवस का भाषण दिया था.
  • प्रधानमंत्री नेहरू ने अपने भाषण में कहा था कि "आज हम एक नए युग में प्रवेश कर रहे हैं. आज हम एक स्वतंत्र देश हैं. आज हम अपनी किस्मत के मालिक हैं."
  • प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने अपने भाषण में देश के लोगों को एकजुट होने और देश के विकास के लिए काम करने का आह्वान किया था.
  • प्रधानमंत्री नेहरू के बाद लाल किले से भाषण देने वाले अन्य प्रधानमंत्रियों में लाल बहादुर शास्त्री, इन्दिरा गांधी, राजीव गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी, मनमोहन सिंह, नरेंद्र मोदी शामिल हैं.
  • सभी प्रधानमंत्रियों ने अपने भाषण में देश के लोगों को एकजुट होने और देश के विकास के लिए काम करने का आह्वान किया है.
  • प्रधानमंत्री के लाल किले से भाषण देश के लोगों के लिए एक प्रेरणा का स्रोत हैं. ये भाषण देश के लोगों को एकजुट करते हैं और उन्हें देश के लिए काम करने के लिए प्रेरित करते हैं.




77th Independence Day 2023; प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ऐतिहासिक लाल किले से समारोह का करेंगे नेतृत्व, जाने कहाँ-कहाँ है सेल्फी पॉइंट

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स्वतंत्रता दिवस अर्थात देश की आजादी का ऐतिहासिक दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 15 अगस्त, 2023 को दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले से 77वें स्वतंत्रता दिवस का उत्सव मनाने में देश का नेतृत्व करेंगे। वह राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे और इस ऐतिहासिक स्मारक की प्राचीर से राष्ट्र को पारंपरिक संबोधन देंगे। 
12 स्थानों पर सरकार की विभिन्न योजनाओं और पहलों को समर्पित सेल्फी प्वाइंट स्थापित किए गए हैं।आइये जानते हैं कि इस साल के स्वतंत्रता दिवस की आयोजन की क्या है विशेषताएं, और पूरा कार्यक्रम।

इस वर्ष के स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ समारोह, जिसका शुभारंभ प्रधानमंत्री ने 12 मार्च, 2021 को गुजरात के अहमदाबाद स्थित साबरमती आश्रम से किया था, का समापन होगा और 2047 तक भारत को एक विकसित देश बनाने के श्री नरेन्द्र मोदी के सपने को साकार करने हेतु देश को नए उत्साह के साथ एक बार फिर ‘अमृत काल’ में प्रवेश कराया जाएगा। 77वें स्वतंत्रता दिवस को मनाने के लिए कई नई पहल की गई हैं। पिछले साल की तुलना में इस वर्ष बड़ी संख्या में अतिथियों को आमंत्रित किया गया है।

विशिष्ट अतिथि

विशिष्ट अतिथि के रूप में लाल किले में आयोजित समारोह का हिस्सा बनने के लिए देश भर से विभिन्न व्यवसायों से जुड़े लगभग 1,800 लोगों को उनके जीवनसाथी के साथ आमंत्रित किया गया है। यह पहल सरकार के ‘जनभागीदारी’ दृष्टिकोण के अनुरूप की गई है।

इन विशिष्ट अतिथियों में 660 से अधिक जीवंत गांवों के 400 से अधिक सरपंच; किसान उत्पादक संगठन योजना से जुड़े 250 लोग; प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना और प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के 50-50 प्रतिभागी; नई संसद भवन सहित सेंट्रल विस्टा परियोजना से जुड़े 50 श्रम योगी (निर्माण श्रमिक); 50-50 खादी कार्यकर्ता, सीमा पर स्थित सड़कों के निर्माण, अमृत सरोवर और हर घर जल योजना से जुड़े लोगों के साथ-साथ 50-50 प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक, नर्स और मछुआरे शामिल हैं। इनमें से कुछ विशिष्ट अतिथियों का दिल्ली में अपने प्रवास के दौरान राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का दौरा करने और रक्षा राज्यमंत्री श्री अजय भट्ट से मुलाकात करने का कार्यक्रम है।

प्रत्येक राज्य/केन्द्र-शासित प्रदेश से पचहत्तर (75) जोड़ों को भी उनकी पारंपरिक पोशाक में लाल किले में आयोजित समारोह को देखने के लिए आमंत्रित किया गया है।

सेल्फी प्वाइंट

राष्ट्रीय युद्ध स्मारक, इंडिया गेट, विजय चौक, नई दिल्ली रेलवे स्टेशन, प्रगति मैदान, राजघाट, जामा मस्जिद मेट्रो स्टेशन, राजीव चौक मेट्रो स्टेशन, दिल्ली गेट मेट्रो स्टेशन, आईटीओ मेट्रो गेट, नौबत खाना और शीश गंज गुरुद्वारा सहित 12 स्थानों पर सरकार की विभिन्न योजनाओं और पहलों को समर्पित सेल्फी प्वाइंट स्थापित किए गए हैं।

इन योजनाओं/पहलों में वैश्विक आशा: टीके और योग; उज्ज्वला योजना; अंतरिक्ष शक्ति; डिजिटल इंडिया; कौशल भारत; स्टार्ट-अप इंडिया; स्वच्छ भारत; सशक्त भारत, नया भारत; पॉवरिंग इंडिया; प्रधानमंत्री आवास योजना और जल जीवन मिशन शामिल हैं।

इस समारोह के हिस्से के रूप में, रक्षा मंत्रालय द्वारा 15-20 अगस्त तक मायगव पोर्टल पर एक ऑनलाइन सेल्फी प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। लोगों को इस प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए 12 में से एक या अधिक स्थानों पर सेल्फी लेने और उन्हें मायगव प्लेटफॉर्म पर अपलोड करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। कुल बारह विजेताओं, प्रत्येक स्थान से एक, का चयन ऑनलाइन सेल्फी प्रतियोगिता के आधार पर किया जाएगा। प्रत्येक विजेता को 10,000 रुपये की पुरस्कार राशि दी जाएगी।


समारोह

लाल किला पहुंचने पर, प्रधानमंत्री का स्वागत रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह, रक्षा राज्य मंत्री श्री अजय भट्ट और रक्षा सचिव श्री गिरिधर अरामने करेंगे। रक्षा सचिव, लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ, जनरल ऑफिसर कमांडिंग (जीओसी), दिल्ली क्षेत्र का परिचय प्रधानमंत्री से कराएंगे। इसके बाद जीओसी, दिल्ली क्षेत्र श्री नरेन्द्र मोदी को सलामी स्थल तक ले जायेंगे, जहां एक संयुक्त इंटर-सर्विसेज और दिल्ली पुलिस गार्ड प्रधानमंत्री को सलामी देंगे। इसके बाद प्रधानमंत्री गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण करेंगे।

प्रधानमंत्री के गार्ड ऑफ ऑनर दल में सेना, वायु सेना और दिल्ली पुलिस के एक-एक अधिकारी और 25 कर्मी तथा नौसेना के एक अधिकारी और 24 कर्मी शामिल होंगे। भारतीय सेना इस वर्ष के लिए समन्वय सेवा की भूमिका में है। गार्ड ऑफ ऑनर की कमान मेजर विकास सांगवान के हाथों में होगी। प्रधानमंत्री के गार्ड की कमान मेजर इंद्रजीत सचिन, नौसेना के सैन्यदल की कमान लेफ्टिनेंट कमांडर एमवी राहुल रमन और वायु सेना के सैन्यदल की कमान स्क्वाड्रन लीडर आकाश गांघस के हाथों में होगी। दिल्ली पुलिस के दल की कमान एडिशनल डीसीपी संध्या स्वामी संभालेंगी।

गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण करने के बाद, प्रधानमंत्री लाल किले की प्राचीर की ओर बढ़ेंगे, जहां उनका स्वागत रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह, रक्षा राज्य मंत्री श्री अजय भट्ट, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे, नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार और वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी करेंगे। । दिल्ली क्षेत्र के जीओसी प्रधानमंत्री को राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए प्राचीर पर बने मंच तक ले जाएंगे।

झंडा फहराए जाने के बाद, तिरंगे को 'राष्ट्रीय सलामी' दी जाएगी। सेना का बैंड, जिसमें एक जेसीओ और 20 अन्य सैन्यकर्मी शामिल होंगे, राष्ट्रीय ध्वज फहराने और 'राष्ट्रीय सलामी' प्रस्तुत करने के दौरान राष्ट्रगान बजाएगा। बैंड का संचालन नायब सूबेदार जतिंदर सिंह करेंगे।

मेजर निकिता नायर और मेजर जास्मीन कौर राष्ट्रीय ध्वज फहराने में प्रधानमंत्री की सहायता करेंगी। विशिष्ट 8711 फील्ड बैटरी (औपचारिक) के बहादुर बंदूकधारियों द्वारा 21 तोपों की सलामी के साथ, इस कार्यक्रम का समन्वय किया जाएगा। लेफ्टिनेंट कर्नल विकास कुमार सेरेमोनियल बैटरी की कमान संभालेंगे और नायब सूबेदार (एआईजी) अनूप सिंह गन पोजिशन ऑफिसर होंगे।

राष्ट्रीय ध्वज गार्ड में सेना, नौसेना, वायु सेना और दिल्ली पुलिस के पांच अधिकारी और 128 अन्य कर्मी शामिल होंगे, जो प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराए जाने के समय राष्ट्रीय सलामी देंगे। सेना के मेजर अभिनव देथा इस इंटर-सर्विसेज गार्ड और पुलिस गार्ड की कमान संभालेंगे।

राष्ट्रीय ध्वज गार्ड में सेना के सैन्यदल की कमान मेजर मुकेश कुमार सिंह, नौसेना के सैन्यदल की कमान लेफ्टिनेंट कमांडर हरप्रीत मान और वायु सेना के सैन्यदल की कमान स्क्वाड्रन लीडर श्रेय चौधरी के हाथों में होगी। दिल्ली पुलिस के दल की कमान एडिशनल डीसीपी शशांक जयसवाल संभालेंगे।

जैसे ही प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाएगा, पार्श्व पंक्ति विन्यास में भारतीय वायु सेना के दो उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर मार्क-III ध्रुव द्वारा कार्यक्रम स्थल पर फूलों की वर्षा की जाएगी। हेलीकॉप्टर के कैप्टन, विंग कमांडर अंबर अग्रवाल और स्क्वाड्रन लीडर हिमांशु शर्मा होंगे।

पुष्पवर्षा के बाद, प्रधानमंत्री राष्ट्र को संबोधित करेंगे। प्रधानमंत्री के संबोधन के समापन पर राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) के कैडेट राष्ट्रगान गाएंगे। राष्ट्रीय उत्साह के इस उत्सव में देश भर के विभिन्न स्कूलों के एक हजार एक सौ (1,100) बालक और बालिका एनसीसी कैडेट (सेना, नौसेना और वायु सेना) भाग लेंगे। ज्ञानपथ पर सीटें लगाए गयीं हैं, जिन पर कैडेट आधिकारिक सफेद पोशाक में बैठेंगे।

इसके अलावा, समारोह के भाग के रूप में एनसीसी कैडेटों को वर्दी में ज्ञान पथ पर बैठाया जाएगा। एक अन्य आकर्षण जी-20 प्रतीक चिन्ह होगा, जो लाल किले पर फूलों की सजावट का भाग होगा। (Source PIB)

स्वतंत्रता दिवस 2023: जानें खास बातें

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15 अगस्त 1947 सिर्फ हमारे लिए स्वतत्रता दिवस नहीं है बल्कि यह हमारे हतिहास में इसकी खातिर दिए गए वीरों की कुर्बानी की गाथा भी है.जैसा कि हम सभी जानते हैं कि भारत का स्वतंत्रता दिवस हर साल 15 अगस्त को मनाया जाता है जो कि  यह भारत के लिए एक राष्ट्रीय पर्व भी है.इस दिन का ऐतिहासिक महत्व है और इस दिन को मनाने के अलग-अलग तरीके हैं जिसमें शामिल है  झंडा फहराना, परेड देखना, सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेना और मिठाई बांटना.आदि. 

स्वतंत्रता की प्राप्ति के बाद जवाहर लाल नेहरु भारत के प्रथम प्रधानमंत्री बने जिन्होंने दिल्ली के लाल किले पर भारतीय झंडा फहराने के बाद भारतीयों को संम्बोधित किया। इसी प्रथा को आने वाले दूसरे प्रधानमंत्रीयों ने भी आगे बढ़ाया जहां झंडारोहण, परेड, तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम आदि हर साल इसी दिन आयोजित होते हैं। कई लोग इस पर्व को अपने वस्त्रों पर, घर तथा वाहनों पर झंडा लगा कर मनाते हैं।

स्वतंत्रता दिवस के दिन भारत के प्रधानमंत्री लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हैं. वे अपने भाषण में देश के लोगों को स्वतंत्रता के महत्व के बारे में बताते हैं और उन्हें देश के विकास और समृद्धि के लिए काम करने के लिए प्रेरित करते हैं.

स्वतंत्रता दिवस भारत के लिए एक महत्वपूर्ण दिन है. यह दिन भारत के लोगों को अपने देश के इतिहास और संस्कृति के बारे में याद दिलाता है और उन्हें देश के लिए गर्व और प्रेम की भावना पैदा करता है.

यहां भारत के स्वतंत्रता दिवस के बारे में कुछ खास बातें दी गई हैं:

  • भारत को 15 अगस्त, 1947 को ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता प्राप्त हुई थी.
  • भारत का स्वतंत्रता दिवस भारत के लिए एक राष्ट्रीय पर्व है.
  • स्वतंत्रता दिवस के दिन भारत के सभी नागरिकों को गर्व और उत्साह का अनुभव होता है.
  • स्वतंत्रता दिवस के दिन भारत के प्रधानमंत्री लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हैं.
  • स्वतंत्रता दिवस के दिन भारत में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं.
  • स्वतंत्रता दिवस के दिन भारत के लोग मिठाई बांटते हैं और एक-दूसरे को बधाई देते हैं.

स्वतंत्रता दिवस भारत के लिए एक महत्वपूर्ण दिन है. यह दिन भारत के लोगों को अपने देश के इतिहास और संस्कृति के बारे में याद दिलाता है और उन्हें देश के लिए गर्व और प्रेम की भावना पैदा करता है.

दिल्ली अध्यादेश बिल: केजरीवाल का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पर सीधा हमला

Delhi Service Bll Kejriwal Attaced on Modi amit Shah

दिल्ली अध्यादेश बिल को राज्यसभा में पास होने पर सीएम अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पर सीधा हमला बोलते हुए कहा है कि आज का दिन भारतीय लोकतंत्र के लिए काला दिन रहा।  उन्होंने  कहा कि जब इन लोगों को लगा कि आम आदमी पार्टी को हराना मुश्किल है, तब इन्होंने चोर दरवाजे से अध्यादेश लाकर दिल्ली की सत्ता हथियाने की कोशिश की है। दिल्लीवालों ने 2015 और 2020 में हमारी सरकार बनाई, क्योंकि मैं दिल्ली का बेटा हूं और मोदी जी दिल्ली के नेता बनना चाहते हैं।

दिल्ली के लोगों ने भाजपा को 25 साल से वनवास दिया

सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि जब इन लोगों ने देखा कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी को हराना बहुत मुश्किल है। ये लोग पिछले चार चुनाव हो चुके हैं। दिल्ली में 2013, 2015 और 2020 में विधानसभा चुनाव हारने के बाद एमसीडी का चुनाव भी भाजपा आम आदमी पार्टी से हार गई। पिछले 25 साल से दिल्ली के अंदर भाजपा की सरकार नहीं बनी है। 25 साल से इनको दिल्ली के लोगों ने वनवास दिया हुआ है। 

भाजपा वाले केजरीवाल के काम में कॉम्पिटिशन नहीं कर सकते

सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री दिल्ली में ऐसा इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि पिछले 7-8 साल में बिना किसी पावर के भी हम लोगों ने बहुत शानदार काम किए हैं। दिल्ली में हमने इतने शानदार स्कूल-अस्पताल बनाए, 24 घंटे बिजली कर दी, बिजली फ्री कर दी, घर-घर पानी पहुंचा रहे हैं, सड़कें बनाई। हम लोगों ने इतने सारे काम कर दिए, लेकिन इन लोगों से ये काम नहीं हो रहे हैं। ये लोग आम आदमी पार्टी के जैसे काम नहीं कर सकते, इसीलिए केजरीवाल को काम करने से रोक रहे हैं। 

भाजपा दिल्लीवालों से नफरत करती है

 दिल्ली के लोगों को अपना बेटा पसंद है, दिल्ली के लोगों को मोदी जी जैसे नेता नहीं चाहिए। हम दिल्लीवाले दिल्ली से बहुत प्यार करते हैं और हम जानते हैं कि भाजपा दिल्ली के लोगों से नफ़रत करती है। इस बार दिल्ली के लोग लोकसभा में एक भी सीट नहीं देंगे। इस पूरे संघर्ष में बहुत सारी पार्टियों, बहुत सारे नेताओं ने दिल्ली के लोगों का साथ दिया। उन सब नेताओं को और पार्टियों को मैं तहे दिल से दिल्ली के दो करोड़ लोगों की तरफ से शुक्रिया अदा करता हूं।



दिल्ली सेवा विधेयक 2023: 24 चुनाव के पहले मिली यह हार कांग्रेस और केजरीवाल के लिए बड़ा झटका

I.N.D.I.A Defeated in Delhi Service Bill Kejriwal Lost

दिल्ली सेवा विधेयक पर राज्यसभा में कांग्रेस की हार को एक बड़ा झटका माना जा रहा है. इस हार से कांग्रेस के 2024 के लोकसभा चुनाव में जीत की संभावनाएं कम हो गई हैं. उल्लेखनीय है कि राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) विधेयक 2023 बृहस्पतिवार को लोकसभा से पारित हो गया था।


दिल्ली सेवा विधेयक दिल्ली सरकार को दिल्ली के अधिकारियों की नियुक्ति और स्थानांतरण का अधिकार देता है. यह विधेयक कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण था क्योंकि यह दिल्ली सरकार को अपनी नीतियों को लागू करने में सक्षम बनाता है.

राज्यसभा में कांग्रेस की हार से यह स्पष्ट हो गया है कि कांग्रेस अब भी विपक्ष में है और सरकार को चुनौती देने में सक्षम नहीं है. यह हार कांग्रेस के लिए एक बड़ी राजनीतिक हार है और इसका असर 2024 के लोकसभा चुनाव पर पड़ सकता है.

दिल्ली सेवा विधेयक पर कांग्रेस की हार को कुछ लोगों ने मोदी सरकार की जीत के रूप में भी देखा है. वे मानते हैं कि इस हार से यह स्पष्ट हो गया है कि मोदी सरकार अब भी मजबूत है और कांग्रेस उसे चुनौती देने में सक्षम नहीं है.

दिल्ली सेवा विधेयक पर कांग्रेस की हार को एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है. इसका असर 2024 के लोकसभा चुनाव पर पड़ सकता है.