सोमनाथ मंदिर का इतिहास: आस्था, संघर्ष और पुनर्निर्माण की अमर गाथा

 


सोमनाथ मंदिर भारत के गुजरात राज्य के गिर सोमनाथ जिले में अरब सागर के तट पर स्थित है जिसे भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम माना जाता है। सोमनाथ मंदिर की विशालता और महत्व इसी से समझा जा सकता है कि इस मंदिर का उल्लेख ऋग्वेद, स्कंद पुराण, शिव पुराण और महाभारत में मिलता है। सोमनाथ मंदिर सिर्फ एक  धार्मिक स्थल है, बल्कि यह भारत की अटूट सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक भी है। 

 ऐतिहासिक दृष्टिकोण से देखी जाए तो अपनी खूबियों और विशालता के कारण यह मंदिर कई बार विदेशी आक्रमणों में नष्ट किया गया और आक्रांताओं ने इसे नष्ट करने में कोई कसर नहीं छोड़ा। 1026 ई. में महमूद ग़ज़नवी ने इस मंदिर पर आक्रमण कर इसे ध्वस्त किया। इसके बाद यह मंदिर कुल लगभग 17 बार तोड़ा और फिर से बनाया गया। लेकिन हर बार भारतीय श्रद्धालुओं ने इसे पुनः खड़ा किया।

पौराणिक मान्यता के अनुसार यह कहा जाता है कि चंद्रदेव (सोम) ने अपने क्षय रोग से मुक्ति पाने के लिए भगवान शिव की आराधना की थी। शिव की कृपा से चंद्रदेव रोगमुक्त हुए और कृतज्ञता स्वरूप इस मंदिर की स्थापना की। 

सोमनाथ मंदिर से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य (Important Facts)

  • स्थान – गिर सोमनाथ, गुजरात
  • देवता – भगवान शिव (सोमनाथ ज्योतिर्लिंग)
  • ज्योतिर्लिंग संख्या – पहला
  • स्थिति – अरब सागर के तट पर
  • कितनी बार टूटा – लगभग 17 बार
  • वास्तुकला शैली – चालुक्य (सोलंकी) शैली
  • बाण स्तंभ – मंदिर के सामने स्तंभ, जिस दिशा में कोई भूमि नहीं


नजरिया जीने का: भगवन राम की चरित्र की पांच विशेषताएं जो मर्यादा पुरुषोत्तम बनाती है

Najariya jine ka Qualities of Lord Ram

नजरिया जीने का:  यदि आप जीवन में सफलता प्राप्त करना चाहते हैं और इस जीवन में कुछ नया और अच्छा करना चाहते हैं तो हम आपके लिए लाए हैं भगवान राम के जीवन से कुछ ऐसा टिप्स जिसके माध्यम से आपके जीवन में सकारत्मक और फलदाई परिवर्तन हो सके। तो आइए जानते हैं कि भगवान राम के जीवन की उन विशेषताओं के बारे में जो उन्हे मर्यादा पुरुषोतम बनाती है और जिन्हें अपनाकर हम अपना जीवन संवार सकते हैं। 

भगवान राम के चरित्र की ये पांच महिमाएं हमें जीवन में सत्य, धर्म, दया, वीरता और नैतिकता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं। भगवान राम ने विषम परिस्थितियों में भी नीति सम्मत रहेऔर धर्म का मार्ग उन्होंने कभी नहीं छोड़ा । उन्होंने वेदों और मर्यादा का पालन करते हुए सुखी राज्य की स्थापना की तथा अपने निकट आने वाले सभी का कल्याण किया चाहे वह पशु रूप में हो, पक्षी रूप में हो, अमीर  हो गरीब हो । स्वयं की भावना व सुखों से समझौता कर न्याय और सत्य का साथ दिया। बाली का वध करने, रावण का संहार करने या पिता के वचन की रक्षा के लिए वन का मार्ग चुनने जैसे अनेक उदाहरण है जहाँ भगवान् राम ने धर्म और न्याय का मार्ग कभी नहीं छोड़ा. 

भगवान राम के चरित्र की ये  महिमाएं हमें जीवन में सत्य, धर्म, दया, वीरता और नैतिकता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं।

सत्य:

 मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम सत्य के पुजारी थे। उन्होंने अपने जीवन में चाहे परिस्थिति कितनी भी कठिन क्यों न हो, उन्होंने झूठ कभी नहीं बोलै। उन्होंने अपने पिता दशरथ के वचन का पालन करने के लिए 14 साल का वनवास स्वीकार किया लेकिन पुत्र धर्म का त्याग नहीं किया।

धर्म: 

भगवान राम धर्म के पालनकर्ता थे। उन्होंने अपने जीवन में हमेशा धर्म के मार्ग पर चलने का प्रयास किया। भाईयों के लिए त्याग और समर्पण के लिए भी वे हमेशा तैयार रहे. उन्होंने सभी भाइयों के प्रति सगे भाई से बढ़कर त्याग और समर्पण का भाव रखा और स्नेह दिया। धर्म का पालन करना उन्होंने तब भी नहीं छोड़ा और  उन्होंने रावण जैसे अत्याचारी का वध करके धर्म की रक्षा की। 

दया: 

भगवान राम दयालु और करुणावान थे। उन्होंने हमेशा दूसरों की मदद करने की कोशिश की। उन्होंने सुग्रीव और हनुमान जैसे अनेकों लोगों की मदद की।  भगवान राम ने अपनी दयालुता के कारण उनकी सेना में पशु, मानव व दानव सभी थे और उन्होंने सभी को आगे बढ़ने का मौका दिया।

बेहतर प्रबंधक

भगवान राम न केवल कुशल प्रबंधक थे, बल्कि वे अपने सभी स्वजनों और सहकर्मियों को साथ लेकर चलने वाले थे। वे सभी को विकास का अवसर देते थे व उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते थे। सुग्रीव को राज्य, हनुमान, जाम्बवंत व नल-नील को भी उन्होंने समय-समय पर नेतृत्व करने का अधिकार दिया और इसी वजह से लंका जाने के लिए उन्होंने व उनकी सेना ने पत्थरों का सेतु बना लिया था। 

नैतिकता: 

भगवान राम नैतिकता के आदर्श थे। उन्होंने अपने जीवन में हमेशा नैतिकता का पालन किया। उन्होंने रावण के साथ युद्ध करते समय भी उसके साथ नैतिकता का पालन किया।

भगवान श्रीराम के अनमोल वचन 

  • "सत्य ही धर्म है और धर्म ही परम तत्व है।"
  • "मन पर विजय ही सच्ची विजय है।"
  • "जो अपने वचन पर अडिग रहता है, वही सच्चा राजा होता है।"
  • "धन और बल क्षणिक हैं, परंतु धर्म और सत्य शाश्वत हैं।"
  • "जो अपने पिता की आज्ञा का पालन करता है, वही सच्चा पुत्र है।"
  • "दया, क्षमा और नम्रता ही मानव की सबसे बड़ी शक्तियाँ हैं।"
  • "संकट में धैर्य न छोड़ना ही वीरता है।"
  • "अहंकार विनाश का कारण है। विनम्रता ही सच्चा बल है।"
  • "जो धर्म के मार्ग पर चलता है, वही सच्चा विजयी होता है।"
  • "शत्रु पर विजय से पहले अपने भीतर के विकारों पर विजय आवश्यक है।"

नजरिया जीने का : मेरा जीवन मेरा सबसे बड़ा शिक्षक-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

Point of View: मेरा जीवन मेरा सबसे बड़ा शिक्षक-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

नजरिया जीने का : प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी का जीवन चुनौतियों से भरा रहा है और निसंदेह उन्होंने काफी संघर्षपूर्ण जीवन जिया है. गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर प्रधान मंत्री बनने का सफर अपने आप में मोटिवेशनल और आदर्श से भरा है है. अपने संघर्ष और सफलताओं के संदर्भ में नरेंद्र मोदी के अनुसार चुनौतीपूर्ण बचपन "विपत्तियों का विश्वविद्यालय" रहा है और साथ ही उनका कहना है कि , "मेरा जीवन मेरा सबसे बड़ा शिक्षक है।"

ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म जेरोधा (Zerodha) के को-फाउंडर निखिल कामथ के पॉडकास्ट में जब श्री मोदी से पूछा गया कि परिस्थितियों ने किस तरह से जीवन को आकार दिया है, तो उन्होंने अपने चुनौतीपूर्ण बचपन को "विपत्तियों का विश्वविद्यालय" बताया और कहा, "मेरा जीवन मेरा सबसे बड़ा शिक्षक है।"


उन्होंने कहा कि अपने राज्य की महिलाओं के संघर्ष को देखकर, जो पानी लाने के लिए कई किलोमीटर पैदल चलती थीं, उन्हें स्वतंत्रता के बाद पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने की अपनी प्रतिबद्धता से प्रेरणा मिली। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि हालांकि वे योजनाओं का स्वामित्व नहीं लेते हैं, लेकिन वे राष्ट्र को लाभ पहुंचाने वाले सपनों को साकार करने के लिए खुद को समर्पित कर देते हैं।



 उन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के मार्गदर्शक सिद्धांतों को साझा किया: अथक परिश्रम करना, व्यक्तिगत लाभ की इच्छा नहीं करना और जानबूझकर गलत काम करने से बचना। उन्होंने स्वीकार किया कि गलतियाँ मानवीय हैं, लेकिन उन्होंने अच्छे इरादों के साथ काम करने की अपनी प्रतिबद्धता पर जोर दिया। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में अपने भाषण को याद करते हुए, श्री मोदी ने कहा कि वे कड़ी मेहनत से पीछे नहीं हटेंगे, वे अपने निजी स्वार्थ के लिए कुछ नहीं करेंगे और वे गलत नीयत से कोई गलती नहीं करेंगे। वे इन तीन नियमों को अपने जीवन का मंत्र मानते हैं।



आदर्शवाद और विचारधारा के महत्व के बारे में बात करते हुए, प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि "राष्ट्र प्रथम" ही हमेशा उनका मार्गदर्शक सिद्धांत रहा है। उन्होंने कहा कि यह विचारधारा पारंपरिक और वैचारिक सीमाओं से परे है, जिससे उन्हें नए विचारों को अपनाने और पुराने विचारों को त्यागने की अनुमति मिलती है, यदि वे राष्ट्र के हित में हों। उन्होंने कहा कि उनका अटल मानक "राष्ट्र प्रथम" है। 

प्रधानमंत्री ने प्रभावशाली राजनीति में विचारधारा की तुलना में आदर्शवाद के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विचारधारा आवश्यक है, लेकिन सार्थक राजनीतिक प्रभाव के लिए आदर्शवाद महत्वपूर्ण है। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन का उदाहरण दिया, जहां विभिन्न विचारधाराएं स्वतंत्रता के सामान्य लक्ष्य के लिए आपस में समाहित हो गयीं। (स्रोत-PIB )

नजरिया जीने का : सोशल मीडिया के भंवरजाल में नहीं डुबोएं अपनी रिश्तों की नाव

Point of View : सोशल मीडिया के दौर मे दुनिया जुड़ें, लेकिन अपनी जड़ों से कटकर नहीं
नजरिया जीने का: आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया के बगैर हमारे रोज के जिंदगी कि कल्पना भी मुश्किल हो चुकी है। सच तो यह है कि आज सोशल मीडिया हमारी ज़िंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है, यह बात और है कि सकारात्मक प्रभाव के तुलना मे नकारात्मक दुष्प्रभावों से हमें दो चार होना मजबूरी हो चुका है। आज भले हीं हम सोशल मीडिया के माध्यम से खुद को कान्टैक्ट मे रखने और रहने मे हम खुद को सफल मानने की खुशफहमी पाल बैठे हों, लेकिन सच यह है कि हम इसके दुष्प्रभाव जैसे मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव, नींद में व्यवधान,ध्यान की कमी और पढ़ाई में बाधा के साथ सामाजिक अलगाव और शारीरिक गतिविधियों में कमी जैसे परेशानियों ने हमारी रोज के जीवन को नरक जैसा बना रहा है। 

कहने की जरूरत नहीं है कि आज के समय मे सोशल मीडिया कई मायनों में एक शक्तिशाली उपकरण है और इसके बगैर हमारी दुनिया की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। सोशल मीडिया ने दुनिया को नया आयाम दिया है और सच्चाई तो यह है कि  ऐसी दुनिया की कल्पना करना भी कठिन है जहाँ इंस्टाग्राम, फेसबुक और ट्विटर मौजूद न हों और हमारे फैन और फालोअर की संख्या पर भी हमारी प्रसिद्धि और स्टैटस जानी जाती है। 


याद रखें कि सोशल मीडिया सिर्फ मनोरंजन और लाइफस्टाइल ब्लॉगर्स को दिखाने और दोस्तों से जुड़ने के लिए ही नहीं है बल्कि आज हमारी युवा पीढ़ी का पूरा करियर भी इन सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर आधारित है और और अपडेट रखने का माध्यम भी। 

सच्चाई तो यह है कि सोशल मीडिया के इस युग मे हम चाहे दुनिया से भले हीं कनेक्ट हो गए हैं, लेकिन अपने माता-पिता और भाई बहन से काफी दूर हो गए हैं जो की प्रसन्नता और खुशी के लिए सबसे प्रभावी  और सस्ता श्रोत हैं। 
आज के दौड़ मे जहां लोगों को अपने जीवन मे भागदौड़ और जीने की जद्दोजहद मे तनाव और मानसिक थकान आम बात हो चुकी है, खुशी और प्रसन्नता को निश्चय ही व्यापक और विश्व स्तर पर मनाए जाने की जरूरत है। यह दिन जीवन में खुशी के महत्व को पहचानने और दुनिया भर के लोगों के कल्याण को बढ़ावा देने का एक अवसर है जिसका इस्तेमाल हमें अपने बीते हुए कल से अच्छा और आने वाले कल को बेहतर मनाने का मौका जरूर मिलता है। 

देखें विडिओ: सोशल मीडिया का सकारात्मक तरीके से उपयोग कैसे करें

हालाँकि, हाल ही में लोगों ने सोशल मीडिया और मानसिक स्वास्थ्य के बीच संबंध भी स्थापित किए हैं, खासकर युवा लोगों में। ऐसे समय में, जब स्क्रीन और  सोशल मीडिया पर हमारी निर्भरता बढ़ती जा रही है और व्यतीत किया हुआ समय बढ़ रहा है,  यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि हम सोशल मीडिया का उपयोग सकारात्मक और जिम्मेदारी से करें और अपनों से कटकर नहीं रहने क्योंकि उनके बगैर हमारी आज  और कल की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। 

दुनिया  से जुड़े पर अपनों से दूर 

आज के दौर मे जहां हम सोशल मीडिया और मोबाईल फोन जैसे अत्याधुनिक संसाधनों के साथ रहते हुए भी खुशी और अपने लोगों के प्रेम को भूल चुके हैं, अंतर्राष्ट्रीय प्रसन्नता दिवस हमें याद दिलाता है कि खुशी हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और हमें हर दिन खुशी के क्षणों को खोजने और उन्हें संजोने का प्रयास करना चाहिए। सच्चाई तो यह है कि सोशल मीडिया के इस युग मे हम चाहे दुनिया से भले हीं कनेक्ट हो गए हैं, लेकिन अपने माता-पिता और भाई बहन से काफी दूर हो गए हैं जो की प्रसन्नता और खुशी के लिए सबसे प्रभावी  और सस्ता श्रोत हैं। 

हेनरी डेविड थोरो ने जीवन के लिए खुशी को लेकर  व्याख्या करते हुए क्या खूब कहा है कि  "खुशी एक तितली की तरह है, जिसे आप जितना अधिक पीछा करते हैं, वह उतनी ही दूर रहेगी, लेकिन अगर आप अपना ध्यान दूसरी चीजों पर केंद्रित करते हैं, तो यह आएगी और धीरे से आपके कंधे पर बैठ जाएगी।" 

अक्सर हम कहते हैं की "संतोषम परम सुखम" लेकिन खुद पर जब इसका प्रयोग करना होता है तो हम भूल सा जाते हैं।  इस संदर्भ मे अज्ञात के इस कथन को हमेशा याद रखें-"खुशी का रहस्य यह नहीं है कि हमेशा अधिक पाने की कोशिश करें, बल्कि जो आपके पास है उसका आनंद लेना है।" 

नकारात्मक पहलुओं ने हमेशा से लोगों के खुशी को उनसे छीना है और इसके लिए यह जरूरी था की लोगों के बीच सकरात्मकता फैलाई जाए। यह दिन सकारात्मकता और आशावाद को बढ़ावा देता है, जो व्यक्तियों और समुदायों के लिए फायदेमंद हो सकता है।

वैश्विक कल्याण को बढ़ावा देना भी प्रमुख उदेश्य है ताकि इसके माध्यम से दुनिया भर के लोगों के कल्याण को बढ़ावा देने के महत्व पर प्रकाश डालकर उनके जीवन में अच्छाई और उजाले को शामिल किया जाए। 

खुशी के संदर्भ मे राल्फ वाल्डो इमर्सन की उस उक्ति को अवश्य याद रखें जिसमें उन्होंने कहा है कि -"खुशी कोई मंजिल नहीं है, यह एक यात्रा है।" जीवन मे प्रसन्नता और खुशी को लेकर महात्मा  गांधी का यह कथन लाजवाब और सटीक है कि -"खुशी वह है जब आप जो सोचते हैं, जो कहते हैं और जो करते हैं, वह सामंजस्य में होता है" 

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नजरिया जीने का: बुद्ध पूर्णिमा-सिर्फ धार्मिक त्योहार नहीं है, यह मानवता के लिए एक प्रेरणा का स्रोत भी है


नजरिया जीने का : बुद्ध पूर्णिमा, जिसे वेसाक या बुद्ध जयंती के नाम से भी जाना जाता है,  खासतौर पर बौद्ध धर्म के संस्थापक गौतम बुद्ध के जन्म, ज्ञान प्राप्ति और मृत्यु (या परिनिर्वाण) का दिन है और इस कारण से इस महत्वपूर्ण दिवस का खास पहचान है। हिन्दू पंचांग के अनुसार पूर्णिमा जो प्रत्येक माह मे मनाई जाती है, इसका खास महत्व है।  यह भारतीय और बौद्ध कैलेंडर के अनुसार वैशाख महीने की पूर्णिमा को आता है, जो आमतौर पर अप्रैल या मई के महीने में पड़ता है। 



किसी कवि ने गौतम बुद्ध के बारे मे क्या खूब लिखा है-
"गौतम के दूसरा गौतम नहीं हुआ,
निकले  तो बेशुमार हैं घरबार  छोड़कर "

बुद्ध पूर्णिमा  केवल एक धार्मिक त्योहार नहीं है, बल्कि यह मानवता के लिए एक प्रेरणा का स्रोत भी है। यह हमें सिखाता है कि हम कैसे अच्छे जीवन जी सकते हैं और दुनिया को एक बेहतर जगह बना सकते हैं। 
भगवान बुद्ध का जन्म, ज्ञान प्राप्ति (बुद्धत्व या संबोधि) और महापरिनिर्वाण ये तीनों वैशाख पूर्णिमा के दिन ही हुए थे। इसी दिन भगवान बुद्ध को बुद्धत्व की प्राप्ति भी हुई थी। 

बुद्ध पूर्णिमा के दिन ही गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था और  इसी दिन उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई थी और इसी दिन उनका महानिर्वाण भी हुआ था।

बोधिवृक्ष के नीचे उन्हें बुद्धत्व ज्ञान की प्राप्ति

 बिहार स्थित बोधगया नामक स्थान हिन्दू व बौद्ध धर्मावलंबियों के पवित्र तीर्थ स्थान हैं। गृहत्याग के पश्चात सिद्धार्थ सत्य की खोज के लिए सात वर्षों तक वन में भटकते रहे। यहाँ उन्होंने कठोर तप किया और अंततः वैशाख पूर्णिमा के दिन बोधगया में बोधिवृक्ष के नीचे उन्हें बुद्धत्व ज्ञान की प्राप्ति हुई।

गौतम बुद्ध का जन्म:

गौतम बुद्ध का जन, 563 ई.पू. बैसाख मास की पूर्णिमा को  नेपाल के लुंबिनी, शाक्य राज्य  में हुआ था। इस पूर्णिमा के दिन ही 483 ई. पू. में 80 वर्ष की आयु में 'कुशनारा' में में उनका महापरिनिर्वाण हुआ था। वर्तमान समय का कुशीनगर ही उस समय 'कुशनारा' था। 

बुद्ध पूर्णिमा के दिन ही सिद्धार्थ गौतम का जन्म हुआ था, जो आगे चलकर गौतम बुद्ध के नाम से जाने गए। उनके जन्म को एक दिव्य घटना के रूप में माना जाता है। कहते हैं कि उनके जन्म के समय उनके शरीर पर 32 शुभ लक्षण थे, जो उन्हें एक महान व्यक्ति के रूप में दर्शाते थे।

ज्ञान प्राप्ति: 

बुद्ध पूर्णिमा के दिन ही बोध गया में बोधि वृक्ष के नीचे बैठकर उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ था।बुद्ध पूर्णिमा का महत्व इसलिए भी है क्योंकि इसी दिन गौतम बुद्ध को बोधगया में पीपल के वृक्ष के नीचे ध्यान करते हुए ज्ञान प्राप्त हुआ था। यह घटना उन्हें 'बुद्ध' (जाग्रत) बना देती है, और इसके बाद उन्होंने अपने ज्ञान को लोगों के साथ साझा किया।

महापरिनिर्वाण:

बुद्ध पूर्णिमा का महत्व तीसरे कारण से भी है। बुद्ध पूर्णिमा के दिन ही कुशीनगर में गौतम बुद्ध का महापरिनिर्वाण हुआ था। कहा जाता है कि इसी दिन भगवान बुद्ध ने 80 वर्ष की आयु में कुशीनगर (वर्तमान में उत्तर प्रदेश, भारत) में महापरिनिर्वाण प्राप्त किया था, जो उनके जीवन के अंतिम क्षणों को दर्शाता है।

नजरिया जीने का : युवाओं की तकदीर बदल सकते हैं स्वामी विवेकानंद के ये अनमोल विचार


नजरिया जीने का :  स्वामी विवेकानंद, महान भारतीय भिक्षु, विद्वान और विख्यात आध्यात्मिक नेता, जिनके विचारों और शब्दों का विशेष महत्व है।  स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 में बंगाल के कोलकाता शहर में हुआ था. उन्होंने राष्ट्र के प्रति समर्पण और स्वाभिमान भाव का संकल्प लिया और इसके लिए उन्हे न केवल भारत बल्कि आज दुनिया मे उनके  दर्शन और शिक्षा लोगों को विशेष रूप से युवाओं को प्रेरित करने के लिए आज भी पढ़ी जाती  है।

उनके द्वारा कही बातें जैसे- ‘यह संसार कायरों के लिए नहीं है’, ‘आप का संघर्ष जितना बड़ा होगा जीत भी उतनी बड़ी होगी’, ‘जिस दिन आपके मार्ग में कोई समस्या ना आए, समझ लेना आप गलत मार्ग पर चल रहे हो’ जैसे स्वामी विवेकानंद द्वारा कई परिवर्तित उत्प्रेरक मंत्र को युवा जागरण का प्रतीक माना जाता है. उन्होंने सेवा, शिक्षा और आध्यात्मिक उत्थान के अपने आदर्शों का प्रचार करने के लिए रामकृष्ण मठ और मिशन की स्थापना की। विवेकानंद का दर्शन और शिक्षा लोगों को विशेष रूप से युवाओं को प्रेरित करने के लिए पर्याप्त है।

स्वामी विवेकानन्द का जन्म कलकत्ता के एक बंगाली कायस्थ परिवार में 12 जनवरी, 1863 को हुआ था। इनका वास्तविक नाम नरेन्द्रनाथ दत्त था। इनके पिता श्री विश्वनाथ दत्त कलकत्ते के उच्च न्यायालय में एटर्नी (वकील) थे। वे बड़े बुद्धिमान, ज्ञानी, उदारमना, परोपकारी एवं गरीबों की रक्षा करने वाले थे। ' स्वामी विवेकानंद भारत के उन महापुरुषों में अग्रणी हैं, जो युवाओं में सर्वाधिक लोकप्रिय हैं. वे भारतीय युवा प्रेरणा के प्रतीक पुरुष या यूथ आइकन हैं. उनका तेजस्वी शरीर और संपूर्ण व्यक्तित्व इतना आकर्षक, प्रभावी, भव्य और उदात्त है कि बरबस ही वह युवाओं को अपनी ओर आकर्षित कर लेता है.

यह स्वामी विवेकानंद और उनकी शिक्षाएँ ही थीं, जिन्होंने भारत के बारे में दुनिया की धारणा को बदलने में मदद की...वह व्यक्ति जिसने न केवल युवाओं को प्रेरित किया, बल्कि अपने प्रेरक शब्दों से मानवता को नई ऊँचाईयाँ दीं।उन्होंने युवाओं को प्रोत्साहित करने के लिए जो बातें कहीं वह आज भी याद की जाती है. यही कारण है कि हर साल स्वामी विवेकानंद की जयंती को राष्ट्रीय युवा दिवस के के रूप में मनाया जाता है.

स्वामी विवेकानन्द नाम का अर्थ 

अपने संरक्षक, मित्र और शिष्य खेतड़ी के राजा अजीत सिंह के सुझाव पर उन्होंने अपना नाम "विवेकानंद" रखा - जो संस्कृत शब्दों विवेक और आनंद का मिश्रण है, जिसका अर्थ है " विवेकपूर्ण ज्ञान का आनंद "।

स्वामी विवेकानंद क्यों प्रसिद्ध थे?

स्वामी विवेकानंद पश्चिमी दर्शन सहित विभिन्न विषयों के ज्ञाता होने के साथ-साथ एक बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। वह भारत के पहले हिंदू सन्यासी थे, जिन्होंने हिंदू धर्म और सनातन धर्म का संदेश विश्व भर में फैलाया। उन्होंने विश्व में सनातन मूल्यों, हिन्दू धर्म और भारतीय संस्कृति की सर्वाेच्चता स्थापित की।

नाम “विवेकानंद”

उल्लेखनीय है कि विवेकानंद नाम का प्रस्ताव खेतड़ी (राजस्थान का एक शहर) के राजा अजीत सिंह ने दिया था, जो भिक्षु के अनुयायियों और शुभचिंतकों में से एक थे, इससे पहले कि भिक्षु शिकागो में 1893 के विश्व धर्म संसद के लिए रवाना हुए। यह नाम दो संस्कृत शब्दों, विवेक ("विवेक") और आनंद ("खुशी") का एक संयोजन है।

शिकागो में विश्व धर्म संसद में भाग लेना: टर्निंग पॉइंट 

शिकागो में विश्व धर्म संसद में भाग लेना स्वामी विवेकानंद के जीवन का टर्निंग पॉइंट रहा। विश्व धर्म संसद शिकागो मे  विभिन्न धर्मों और दुनिया के विभिन्न हिस्सों के प्रतिनिधियों के लिए एक मंच था जहां 1893 में हिंदू धर्म के प्रतिनिधि के रूप में इस आयोजन में शामिल हुए । बताता जाता है कि इस धर्म सभा मे वह एक आकर्षक वक्ता थेऔर वहाँ  उन्हे ईश्वरीय एक वक्ता और "धर्म संसद में सबसे महान व्यक्ति" के रूप में वर्णित किया। इसके बाद विवेकानंद ने दुनिया के मंच पर भारतीय दर्शन को वह ऊंचाई दिया जो आज तक दुनिया मे विराजमान है।

 विवेकानंद के महत्वपूर्ण कोटेशन 

  1. एक विचार लो, उस एक विचार को अपना जीवन बना लो, उसके बारे में सोचो, उसके सपने देखो, अपने मस्तिष्क, मांसपेशियों, नसों, अपने शरीर के हर हिस्से को उस विचार से भर दो, और हर दूसरे विचार को अकेला छोड़ दो। यही सफलता का मार्ग है।
  2. अपने आप पर विश्वास करें और दुनिया आपके चरणों में होगी।
  3. किसी दिन, जब आपके सामने कोई समस्या न आए  तो आप सुनिश्चित हो सकते हैं कि आप गलत रास्ते पर यात्रा कर रहे हैं।
  4. एक समय में एक काम करो, और ऐसा करते समय अपनी पूरी आत्मा को उसमें डाल दो, बाकी सब कुछ छोड़कर।
  5. उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए।
  6. दिन में एक बार अपने आप से बात करें, नहीं तो आप इस दुनिया के एक बेहतरीन इंसान से मिलने से चूक सकते हैं।
  7. एक आदमी एक रुपये के बिना गरीब नहीं है, लेकिन एक आदमी सपने और महत्वाकांक्षा के बिना वास्तव में गरीब है।
  8. मस्तिष्क और मांसपेशियों को एक साथ विकसित होना चाहिए। लोहे की नसें एक बुद्धिमान मस्तिष्क के साथ - और पूरी दुनिया आपके चरणों में है।
  9. हमेशा खुद को खुश दिखाने की कोशिश करें। शुरू में यह आपका रूप बन जाता है, धीरे-धीरे यह आपकी आदत बन जाता है और अंत में यह आपका व्यक्तित्व बन जाता है.
  10. "ब्रह्मांड की सभी शक्तियां हमारे अंदर हैं। बस हमें उनका उपयोग करना सीखना है।"
  11. "स्वयं को कमजोर समझना सबसे बड़ा पाप है।"
  12. "ज्ञान और कर्म दोनों के बिना जीवन अधूरा है।"
  13. "सपने देखना और उन सपनों को पूरा करने के लिए प्रयास करना ही जीवन का उद्देश्य है।"

नज़रिया जीने का : Sardar Vallabhbhai Patel-जानें लौह पुरुष प्रमुख कोट्स


नज़रिया जीने का : सरदार वल्लभभाई पटेल (Sardar Vallabhbhai Patel) जिन्हे लौह पुरुष के नाम से जाना जाता है वह भारत के पहले उप-प्रधानमंत्री थे. सरदार वल्लभभाई पटेल (Sardar Vallabhbhai Patel) पेशे से एक वकील थे और उनका जिनका जन्म 31 अक्टूबर को हुआ था। सरदार पटेल ने अपने कुशलता और अपने सामर्थ्य के बल पर लगभग हर रियासत को भारत में विलय के लिए राजी कर लिया था । पटेल का अहिंसा के वारे में कहना था कि -"जिनके पास शस्त्र चलाने का हुनर हैं लेकिन फिर भी वे उसे अपनी म्यान में रखते हैं असल में वे अहिंसा के पुजारी हैं. कायर अगर अहिंसा की बात करे तो वह व्यर्थ हैं"

सरदार पटेल कहा करते थे कि " भले ही हम हजारों की संपत्ति खो दें, और हमारा जीवन बलिदान हो जाए, हमें मुस्कुराते रहना चाहिए और ईश्वर और सत्य में अपना विश्वास बनाए रखना चाहिए।"

देश प्रेम की भावना से ओतप्रोत रहा है पटेल का जीवन और उनके जीवन का इतिहास और लिए गए ऐतिहासिक निर्णय यह साबित करते हैं।।
भारतीयता और देश को एक सूत्र में पिरोने के अपने सिद्धांतो को प्राथमिकता देते हुए सरदार पटेल कहा करते थे कि "हर भारतीय को अब भूल जाना चाहिए कि वह राजपूत, एक सिख या जाट है। उन्हें याद रखना चाहिए कि वह एक भारतीय है और उसके पास अपने देश में हर अधिकार है लेकिन कुछ कर्तव्यों के साथ।"

सरदार वल्लभभाई पटेल (Sardar Vallabhbhai Patel): प्रमुख कोट्स 
  1. आम प्रयास से हम देश को एक नई महानता तक ले जा सकते हैं, जबकि एकता की कमी हमें नयी आपदाओं में डाल देगी।
  2. जो तलवार चलाना जानते हुए भी अपनी तलवार को म्यान में रखता है उसी को सच्ची अहिंसा कहते है।
  3. अविश्वास भय का प्रमुख कारण होता है।
  4. इस मिट्टी में कुछ खास बात है, जो कई बाधाओं के बावजूद हमेशा महान आत्माओं का निवास बना रहा है।
  5. "शक्ति के अभाव में विश्वास व्यर्थ है. विश्वास और शक्ति, दोनों किसी महान काम को करने के लिए आवश्यक हैं।"
  6. मान-सम्मान किसी के देने से नहीं मिलते, अपनी योग्यतानुसार मिलते हैं।
  7. हर भारतीय को अब भूल जाना चाहिए कि वह राजपूत, एक सिख या जाट है। उन्हें याद रखना चाहिए कि वह एक भारतीय है और उसके पास अपने देश में हर अधिकार है लेकिन कुछ कर्तव्यों के साथ।
  8. कठिन समय में कायर बहाना ढूंढते हैं तो वहीं, बहादुर व्यक्ति रास्ता खोजते है।
  9. अहिंसा को विचार, शब्द और कर्म में देखा जाना चाहिए। हमारी अहिंसा का स्तर हमारी सफलता का मापक होगा।
  10. बोलने में मर्यादा मत छोड़ना, गालियाँ देना तो कायरों का काम है।


नजरिया जीने का: जानें प्रधानमंत्री ने वृक्षारोपण के चिरस्थायी लाभों खातिर किस संस्कृत श्लोक का उद्धरण दिया

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने भारतीय विचार के कालातीत ज्ञान को दर्शाने वाले एक संस्कृत सुभाषितम साझा किया है। उन्होंने  वृक्षारोपण के चिरस्थायी लाभों का उल्‍लेख करते हुए संस्कृत सुभाषितम को साझा किया जिसका  अर्थ है कि जिस प्रकार फल और फूल वाले वृक्ष निकट रहने पर मनुष्य को संतुष्टि प्रदान करते हैं, उसी प्रकार वृक्ष दूर रहने पर भी उसे लगाने वाले को सभी प्रकार के लाभ प्रदान करते हैं।

"पुष्पिताः फलवन्तश्च तर्पयन्तिह मानवान।

वृक्षदं पुत्रवत् वृक्षास्तारायन्ति पात्र च॥"

फलों और फूलों वाले वृक्ष हमारे जीवन के लिए कितना आवश्यक है यह हमसे छिपा नहीं है. जाने अनजाने में हम  अपने निहित स्वार्थ के खातिर पर्यावरण और प्रकृति के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं. ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सुभाषितम का यह श्लोक  पूर्णत: सारगर्भित है और हमारे लिए वृक्ष की जरुरत को समझाने की सटीक कोशिश भी है.  

 श्लोक का अर्थ स्पष्ट है कि जिस प्रकार फल और फूल वाले वृक्ष निकट रहने पर मनुष्य को संतुष्टि प्रदान करते हैं, उसी प्रकार वृक्ष दूर रहने पर भी उसे लगाने वाले को सभी प्रकार के लाभ प्रदान करते हैं।

नजरिया जीने का: जानें वृक्ष के चिरस्थायी लाभों को समर्पित प्रधानमंत्री का सुन्दर श्लोक 

वैसे वृक्ष के परमार्थ और दूसरों को सबकुछ देने की प्रवृति के बारे में कहने की जरुरत भी नहीं हैं क्योंकि  उसे समझने के लिए निम्न श्लोक से समझा जा सकता हैं-

पुत्रपुष्यफलच्छाया मूलवल्कलदारुभिः।

गन्धनिर्यासभस्मास्थितौस्मैः कामान वितन्वते॥

नजरिया जीने का: प्रधानमंत्री का  क्रोध को त्‍यागने वाला श्लोक जो हर जुबान पर है

वास्तव में अगर आप देखें तो वृक्ष हमारी जरूरतों को अच्छी तरह से पूरा करते हैं और वो हमें पत्र, पुष्प, फल, छाया, मूल, बल्कल, इमारती और जलाऊ लकड़ी, सुगंध, राख, गुठली और अंकुर प्रदान करके हमारी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।

Video: जीवन में सुख को ढूंढना शुरू करें, न कि कभी भी खोने का ख़याल करें

najariya jine ka happiness is essential for success in life

Point Of View: अल्बर्ट आइंस्टीन  ने कहा था कि-"जीवन के सुख को ढूंढना शुरू करें, न कि कभी भी खोने का ख़याल करें"  और निश्चित ही जीवन में प्रसन्नता पाने के लिए महत्वपूर्ण उक्तियों में से यह सर्वाधिक पूर्ण और योग्य है. प्रसन्नता एक ऐसा भाव है जो हमारे जीवन में सकारात्मकता लाता है। यह हमें ऊर्जावान, सकारात्मक और उत्पादक बनाता है। प्रसन्नता के कई लाभ हैं, जिनमें शामिल हैं:सफलता प्राप्त करने के लिए, हमें इन लाभों को प्राप्त करने की आवश्यकता है। उचित तो यह होगा कि जीवन में प्रसन्नता वाले पलों की एक डायरी बना कर आप हमेशा अपने पास रखें. प्रसन्न रह कर किया जाने वाले काम हमें थकने नहीं देता और जीवन में सफलता के एकमात्र यही सत्य है. 


हम प्रसन्न होते हैं, तो हम चुनौतियों का सामना करने के लिए अधिक तैयार होते हैं और हम अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अधिक दृढ़ संकल्पित होते हैं। बेहतर स्वास्थ्य, मजबूत संबंध, अधिक रचनात्मकता और अधिक सहनशीलता मानवीय विशेषताएं है जिनसे आप प्रसन्न रहना सीख सकते हैं.  प्रसन्नता एक ऐसी चीज है जो आपके नियंत्रण में है। अपने जीवन में प्रसन्नता लाने के लिए प्रयास करें और आप देखेंगे कि यह आपकी सफलता के लिए एक शक्तिशाली शक्ति हो सकती है। प्रसन्न रहना सीखना एक महत्वपूर्ण कौशल है जो हमें सफल होने में मदद कर सकता है। यहां कुछ सुझाव दिए गए हैं कि आप कैसे प्रसन्न रहना सीख सकते हैं:

1. अपने जीवन में सकारात्मक चीजों पर ध्यान दें-

अपने जीवन में सकारात्मक चीजों पर ध्यान दें। जब आप सकारात्मक चीजों पर ध्यान देते हैं, तो आपके पास नकारात्मक चीजों पर ध्यान देने की संभावना कम होती है। जब हम सकारात्मक चीजों पर ध्यान देते हैं, तो हमके पास नकारात्मक चीजों पर ध्यान देने की संभावना कम होती है। अपने जीवन में सकारात्मक चीजों को नोटिस करने के लिए समय निकालें, भले ही वे छोटी चीजें हों। उदाहरण के लिए, आप अपने परिवार और दोस्तों की सराहना कर सकते हैं, प्रकृति की सुंदरता का आनंद ले सकते हैं, या अपने लक्ष्यों की प्रगति पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।

"मुस्कान कभी भी भले ही छोटी हो, पर इसका प्रभाव बहुत बड़ा होता है।" - Unknown

2. कृतज्ञता का अभ्यास करें-

कृतज्ञता का अभ्यास करें। रोजाना कुछ चीजों के लिए कृतज्ञ होने की कोशिश करें, भले ही वे छोटी चीजें हों। कृतज्ञता का अभ्यास करना प्रसन्नता के स्तर को बढ़ाने का एक शक्तिशाली तरीका है। रोजाना कुछ चीजों के लिए कृतज्ञ होने की कोशिश करें, भले ही वे छोटी चीजें हों। आप एक कृतज्ञता जर्नल रख सकते हैं, अपने दोस्तों और परिवार के साथ कृतज्ञता की बातचीत कर सकते हैं, या कृतज्ञता के अभ्यास के लिए एक ऐप का उपयोग कर सकते हैं।

3. अपने जीवन में खुशी लाने के लिए चीजें करें-

जिन चीजों में आपको आनंद आता है, उन्हें करने के लिए समय निकालें। अपने शौक का पालन करें, नए अनुभवों का अन्वेषण करें, या अपने दोस्तों और परिवार के साथ समय बिताएं। अपने जीवन में खुशी लाने के लिए आप जो भी कर सकते हैं, वह करें।

4. अपने आप को दूसरों की मदद करने के लिए समर्पित करें-

दूसरों की मदद करने से आपको अच्छा महसूस होता है और यह आपके जीवन में अधिक अर्थ जोड़ता है। अपने स्थानीय समुदाय में स्वयंसेवा करें, एक कारण के लिए दान करें, या किसी जरूरतमंद व्यक्ति की मदद करें। दूसरों की मदद करना एक सरल तरीका है जो आपकी खुशी को बढ़ा सकता है।

5. अपने विचारों और भावनाओं को नियंत्रित करने का प्रयास करें-

जब आप नकारात्मक विचारों या भावनाओं का अनुभव करते हैं, तो उन्हें बदलने का प्रयास करें। अपने विचारों को अधिक सकारात्मक दिशा में निर्देशित करें और अपने भावनाओं को स्वस्थ तरीके से व्यक्त करें। नकारात्मक विचारों और भावनाओं को दबाने से बचें, क्योंकि इससे वे और भी बदतर हो सकते हैं।

6. स्वस्थ जीवन शैली अपनाएं-

स्वस्थ जीवन शैली अपनाएं। स्वस्थ आहार खाएं, नियमित रूप से व्यायाम करें और पर्याप्त नींद लें।स्वस्थ जीवन शैली जीने से आपको शारीरिक और मानसिक रूप से बेहतर महसूस करने में मदद मिल सकती है, जिससे आपको खुशी महसूस करने की संभावना अधिक हो सकती है।

7. अपने आसपास के लोगों के साथ सकारात्मक संबंध बनाए रखें-

अपने विचारों और भावनाओं को नियंत्रित करने का प्रयास करें। जब आप नकारात्मक विचारों या भावनाओं को महसूस करते हैं, तो उन्हें बदलने का प्रयास करें। सकारात्मक लोगों के साथ समय बिताने से आपको खुश रहने में मदद मिल सकती है। ऐसे लोगों के साथ जुड़ें जो आपको उत्साहित करते हैं और आपको अच्छा महसूस कराते हैं। नकारात्मक लोगों से दूर रहें जो आपकी खुशी को कम कर सकते हैं।

महत्वपूर्ण कोट्स-

  • "जीवन के सुख को ढूंढना शुरू करें, न कि कभी भी खोने का ख़याल करें।" - Albert Einstein
  • "मुस्कान दुनिया को सुंदर बना देती है।" - Unknown
  • "आपके चेहरे पर मुस्कान रखने से आप खुद को भी अच्छा महसूस करते हैं और दूसरों को भी अच्छा महसूस करवा सकते हैं।" - Les Brown
  • "जीवन में कभी-कभी आपको अपनी मुस्कान का कारण बनना पड़ता है।" - Thich Nhat Hanh
  • "मुस्कान कभी भी भले ही छोटी हो, पर इसका प्रभाव बहुत बड़ा होता है।" - Unknown
  • "खुश रहने का एक तरीका यह है कि आप अपने सुररेखा पर केंद्रित हों, न कि अपनी समस्याओं पर।" - David DeNotaris
  • "मुस्कान एक भयंकर सामरिक हथियार है, जिससे आप दूसरों को जीत सकते हैं।" - Dale Carnegie
  • "मुस्कान से हम दुनिया को हंसी और प्रेम की ओर बढ़ाने में मदद करते हैं।" - Sri Sri Ravi Shankar
  • "मुस्कान से आपका दिल भी खुश रहता है और दूसरों को भी खुशी मिलती है।" - Unknown
  • "जीवन में हर पल को मुस्कान के साथ जियें, क्योंकि यह हमें और भी खूबसूरत बना देता है।" - Dolly Parton

नज़रिया जीने का : जानें भगवान राम के चरित्र के कौन-कौन से हैं 16 गुण


नज़रिया जीने का : भगवान राम के जीवन में मर्यादा का विशेष महत्व रहा है और शायद प्रभु राम एकमात्र देव हैं जिनके साथ मर्यादा पुरुषोत्तम विशेषण जुड़ा हुआ है। भगवान राम ने मर्यादा को अपने से कभी अलग नहीं होने दिया भले हीं चाहे वह पारिवारिक संबंध की बात हो, सहकर्मियों की बात हो या दुश्मनों की बात हो। सच्चाई तो यह है कि प्रभु राम के मर्यादा और विशेष गुणों को लेकर जो छवि प्रत्येक हिंदुओं में बसी है वह किसी लेखनी की मोहताज नहीं है।

हिन्दू पंचांग के अनुसार भगवान राम  को भगवान विष्णु का 7वां अवतार माना जाता है जिन्होंने अपना पूरा जीवन एक मर्यादा में रहकर व्यतीत किया. "मर्यादा पुरुषोत्तम" श्रीराम भगवान हिन्दू धर्म में एक महत्वपूर्ण धार्मिक और ऐतिहासिक व्यक्तित्व हैं, जो "रामायण" के मुख्य पात्र में प्रस्तुत होते हैं। "मर्यादा पुरुषोत्तम" का अर्थ होता है "मर्यादा में सर्वोत्तम पुरुष" या "मर्यादा के परम आदमी"।

"मर्यादा पुरुषोत्तम" का उपनाम भगवान राम के श्रद्धायुक्त और न्यायप्रिय व्यक्तित्व को संकेत करता है, जो उन्हें भक्तों के लिए एक आदर्श पुरुष बनाता है।

 भगवान राम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है क्योंकि उन्होंने अपने जीवन में मर्यादाओं का हमेशा पालन किया। वे एक आदर्श पुत्र, आदर्श भाई, आदर्श पति, आदर्श राजा और आदर्श मित्र थे। उन्होंने अपने जीवन में कभी भी इन मर्यादाओं का उल्लंघन नहीं किया.

सच तो यह है कि इस उपनाम के माध्यम से भगवान राम की विशेषता और उनके जीवन में अनुसरण करने लायक आदर्शों को दर्शाने का प्रयास किया जाता है।  भगवान राम को मर्यादा पुरुषोत्तम उनकी महानता के लिए दिया गया उपाधि है जिसमे पारिवारिक संबंधो की मर्यादा के साथ ही राजकीय और दोस्तों और यहाँ तक कि दुश्मनों के साथ भी मर्यादा के निर्वाह के लिए दिया जाता है. और यही वजह है कि भगवन राम को मर्यादा पुरुषोत्तम के नाम से पुकारा जाता है.

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम, जिनका सभी सम्बन्धो के लिए अनुकरणीय व्यक्तित्व

भगवान राम को "मर्यादा पुरुषोत्तम" कहा जाता है क्योंकि उन्होंने अपने जीवन में धर्म, नैतिकता, और श्रेष्ठता की मर्यादा बनाए रखी। उन्होंने अपने पिता की आज्ञा का पालन किया, अपनी पतिव्रता पत्नी सीता के प्रति वफादारी दिखाई, और अपने भक्तों के प्रति सत्य, न्याय, और करुणा का प्रदर्शन किया।  

भगवान राम को आदर्श पुत्र क्यों कहते हैं

अगर आप रामायण और रामचरित मानस का अध्ययन करेंगे तो पाएंगे कि भगवन राम ने अपने पिता दशरथ के आदेश का पालन करने के लिए 14 वर्ष का वनवास सहर्ष स्वीकार किया। वे जानते थे कि पिता का आदेश सदैव मानना चाहिए, चाहे वह कितना भी कठिन क्यों न हो। इस प्रकार की मिसाल शायद हीं कहीं और मिलती है. 

भगवान राम की चरित्र की पांच विशेषताएं जो मर्यादा पुरुषोत्तम बनाती है

भगवान राम को आदर्श भाई क्यों कहते हैं?

भारत मिलाप और अपने भाइयों के प्रति प्रेम और अनुराग भगवन राम की अलग विशेषता है जो उन्हें सबसे अलग रखता है. भगवन राम ने अपने भाई भरत के प्रति कभी भी ईर्ष्या या घृणा का भाव नहीं रखा। वे भरत को अपना सच्चा भाई मानते थे और उनका हमेशा सम्मान करते थे। 

भगवान राम को आदर्श पति क्यों कहते हैं?

मनुष्य के जीवन में आने वाली सभी संबंधों को पूर्ण एवं उत्तम रूप से निभाने की शिक्षा देने वाला प्रभु रामचंद्र के चरित्र के समान दूसरा कोई चरित्र नहीं है।  और जहाँ तक आदर्श पति का सवाल है, राम ने अपनी पत्नी सीता के प्रति हमेशा प्रेम और सम्मान का भाव रखा। वे सीता के लिए अपना सब कुछ न्यौछावर करने के लिए तैयार थे।

भगवान राम को आदर्श राजा क्यों कहते हैं?

राम के राज्य में राजनीति स्वार्थ से प्रेरित ना होकर प्रजा की भलाई के लिए थी। इसमें अधिनायकवाद की छाया मात्र भी नहीं थी। राम ने अपने राज्य में हमेशा न्याय और धर्म का पालन किया। वे प्रजा के कल्याण के लिए हमेशा तत्पर रहते थे। 

 भगवान राम आदर्श मित्र कैसे हैं?

श्री रामचंद्र जी निष्काम और अनासक्त भाव से राज्य करते थे। उनमें कर्तव्य परायणता थी और वे मर्यादा के अनुरूप आचरण करते थे।  राम ने अपने दोस्तों सुग्रीव, हनुमान, विभीषण आदि के प्रति हमेशा निष्ठा और समर्पण का भाव रखा। उन्होंने अपने दोस्तों की हर समय मदद की। 

भगवान राम की विशेषता हैं ये खास 16 गुण

भगवान राम के मर्यादा और उनके विशेष गुणों को लेकर जो छवि प्रत्येक हिंदुओं में बसी है वह किसी लेखनी की मोहताज नहीं है। हिन्दू पंचांग के अनुसार भगवान राम  को भगवान विष्णु का 7वां अवतार माना जाता है जिन्होंने अपना पूरा जीवन एक मर्यादा में रहकर व्यतीत किया. 

भगवान राम जी के चरित्र की कई ऐसी विशेषताएं हैं जो उन्हें लोगों का आदर्श बनाती हैं.  हिन्दू पंचांग के अनुसार प्रभु राम 16 गुणों से युक्त थे जो उनको मर्यादा पुरुषोतम बनाते हैं और हम सभी उनके इन गुणों को अपनाकर अपना जीवन बना सकते हैं-

जानते हैं भगवान राम के चरित्र मे कौन-कौन से 16 गुण हैं जो हमें अपनानी चाहिए .

  • गुणवान (योग्य और कुशल)
  • किसी की निंदा न करने वाला (प्रशंसक, सकारात्मक)
  • धर्मज्ञ (धर्म का ज्ञान रखने वाला)
  • कृतज्ञ (आभारी या आभार जताने वाला विनम्रता)
  • सत्य (सत्य बोलने वाला और सच्चा)
  • दृढ़प्रतिज्ञ (प्रतिज्ञा पर अटल रहने वाला, दृढ़ निश्‍चयी )
  • सदाचारी (धर्मात्मा, पुण्यात्मा और अच्छे आचरण वाला, आदर्श चरित्र)
  • सभी प्राणियों का रक्षक (सहयोगी)
  • विद्वान (बुद्धिमान और विवेक शील)
  •  सामर्थशाली (सभी का विश्वास और समर्थन पाने वाला समर्थवान)
  • प्रियदर्शन (सुंदर मुख वाला)
  • मन पर अधिकार रखने वाला (जितेंद्रीय)
  • क्रोध जीतने वाला (शांत और सहज)
  • कांतिमान (चमकदार शरीर वाला और अच्छा व्यक्तित्व)
  • वीर्यवान (स्वस्थ्य, संयमी और हष्ट-पुष्ट)
  • युद्ध में जिसके क्रोधित होने पर देवता भी डरें : (वीर, साहसी, धनुर्धारि, असत्य का विरोधी)


नजरिया जीने का : सपने सभी देखते हैं, लेकिन धैर्य रखने वाले ही सपनों को हकीकत में बदलते हैं


नजरिया जीने का : मुश्किल और विपरीत परिस्थितियों मे अधीर हो जाना और धैर्य खोना एक सामान्य स्वभाव है और इससे हम अलग नहीं है। लेकिन यह भी एक साथ है कि धैर्य से अधिक मजबूत और कोई ताकत नहीं है और इसकी विशालता का अंदाज इससे हीं लगाया जा सकता है कि  यह हर तूफान को शांत कर सकता है।
धैर्य का जीवन में एक गहरा महत्व है और जीवन मे  सफलता के लिए यह सबसे जरूरी शर्त भी है। विश्वास करें, धैर्य हीं वह कुंजी है जिसके माध्यम से हम  असंभव के किसी भी दरवाजों को खोलने का मार्ग प्रशस्त करती है। यह हमें कठिन परिस्थितियों में स्थिर रहने और सफलता की ओर अग्रसर रहने में सहायता करता है। 

जीवन मे सफलता प्राप्त करने के लिए कठिन परिश्रम के अलावा भी हमें धैर्य और आत्मविश्वास का होना बहुत जरूरी है। आपका इस तथ्य को समझना होगा कि आजकल के कठिन और कम्पेटिटिव माहौल मे जहां सफलता आसान नहीं रहा गया है, हमें धैर्य और आत्मविश्वास को अपनाने कि नितांत जरूरत हैं। विंस्टन चर्चिल के उस कथन को आप हमेशा याद रखें जिसमें उन्होंने कहता था कि-"हार मत मानो। हारने वाले ही हारते हैं।"

धैर्य वह है जो हमें चुनौतियों का सामना करने और लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रेरित करता है, भले ही परिणाम तुरंत न मिलें। यह हमें हार न मानने और प्रयास करते रहने की शक्ति प्रदान करता है। वहीं आत्मविश्वास हमें अपनी क्षमताओं पर विश्वास करने और अपनी पूरी क्षमता का उपयोग करने में मदद करता है। यह हमें जोखिम लेने और नए अवसरों का पता लगाने के लिए प्रोत्साहित करता है।



 याद रखें तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद हम अपने लाइफ में सफल हो सकते हैं और इसके लिए सबसे जरुरी फैक्टर हैं  आपके अंदर आत्मविश्वास और धैर्य का होना.

धैर्य का अर्थ हीं है अपने संघर्ष और लड़ाई मे हर परिस्थिति को स्वीकार करना और सही समय का इंतजार करना। क्योंकि किसी भी विपत्ति और असामान्य परिस्थिति मे हमारी व्यग्रता और उतावलापन हमारे द्वारा होने वाली गलतियों की संभावना को बढ़ायेगा जोकि हमारी लंबे लड़ाई को और भी कमजोर करती है। 

आप विश्वास कीजिए जिनके पास आत्मविश्वास है वह इन विपरीत परिस्थितियों में भी अपने सफलता का मार्ग लेते हैं और इसके लिए सबसे जरूरी है  सकारात्मक और पॉजिटिविटी का होना.

दोस्तों विपरीत परिस्थितियों में सफलता प्राप्त करने के लिए धैर्य  का होना बहुत जरूरी है पर यह याद रखें यह आपको अपने अंदर ही विकसित करनी होगी.  

किसी कवि की ये पंक्तियाँ आप को विपरीत परिस्थितियों में लड़ने में सार्थंक हो सकती है. 
वह पथ क्या पथिक परीक्षा क्या
जिस पथ में बिखरे शूल ना हो
नाविक की धैर्य परीक्षा क्या 
यदि धाराएं प्रतिकूल ना हो. 


आप इतिहास के तमाम महापुरुषों की जीवन वृतांत को देखें तो यह साबित हो जाएगा की रातों-रात सफलता किसी को नहीं मिलती और यह भी उतना ही बड़ा सच है कि जिसने जितनी बड़ी सफलता हासिल किया है उसके मार्ग पर प्रकृति ने उतने ही कांटे और फूल बिछा कर रखे थे ऐसा नहीं है कि वे महापुरुषों और उन बाधाओं को देख अपने कदम वापस खींच लिए. 




तू रुख हवाओं का मोड़ दे,
हिम्मत की अपनी कलम उठा,
लोगों के भरम को तोड़ दे।
-नरेंद्र वर्मा

किसी भी कार्य को करने के बहुत सारे तरीके हो सकते हैं. और आपको भी अपने लिए तरीकों को चुनने की पूरी आजादी है. लेकिन यह याद रहें दोस्तों . अपने चुने गए तरीकों को जस्टिफाई करना भी आपको ही होगा. हाँ इसके लिए आप सफल महापुरुषों के अनुभवो और बताये गए रास्तों को आधार बना सकते हैं. 

विख्यात कवि/ साहित्यकार की उस कथन को याद करों दोस्तों..."महाशक्तियों के वेग में रोड़े अटकाने से उनके वेग कम नहीं होता बल्कि वो दुगुने वेग से आगे बढ़ती है." दोस्तों अब फैसला आपको करना है कि आप खुद का तुलना किसी मामूली शक्ति करते हैं या किसी महाशक्ति. अगर उत्तर महाशक्ति में है तो फिर याद रखें.आप इन बाधाओं को पार करने और निकलने के लिए दुगुने वेग से प्रयास करने वालों में से हैं. 
अक्सर ऐसा होता है कि अपनी राहों में मिलने वाले थोड़ी से चुनौतियों को हम बाधा का नाम देकर उससे परेशान हो जाते हैं कि हम खुद को परिस्थति के आगे विवश और लाचार समझने लगते हैं. पता नहीं हमें ऐसा क्यों लगता है कि परिस्थितियों का हमेशा हमारे पक्ष में हीं होनी चाहिए.

लेकिन क्या यह सच नहीं है दोस्तों कि परिस्थितियों हमेशा हमारे अनुकूल रहे हैं ऐसा नहीं करना चाहिए आखिर यह संसार सिर्फ हमारे लिए हीं तो नहीं बनी है. 

दोस्तों आपको आश्चर्य होगा के हम जिन बाधाओं और परिस्थितियों को अपनी सफलता के मार्ग का सबसे बाड़ा बाधा बताते हैं. सच्चाई तो यह है कि हम अपनी सफलता के मार्ग का बाधा खुद होते हैं. 

हमारी नेगेटिव सोच और खुद का अंदर पैदा किया गया नकारात्मक माइंडसेट प्रमुख बाधा होती है हमारी असफलता के पीछे….लेकिन हम दोष देते हैं उन परिस्थितियों और बाधाओं को. 
प्रमुख कोट्स:
  • "धैर्य ही शक्ति है। शांत रहकर आप किसी भी परिस्थिति का सामना कर सकते हैं।" - महात्मा गांधी
  • "आत्मविश्वास सफलता की पहली कुंजी है।" - स्वामी विवेकानंद
  • "अगर आप खुद पर विश्वास करते हैं, तो आप कुछ भी कर सकते हैं।" - अननोद मॉरिल
  • "धैर्यवान व्यक्ति ही विजेता होता है।" - विलियम आर्थर वॉर्ड
  • "हार मत मानो। हारने वाले ही हारते हैं।" - विनस्टन चर्चिल
  • "धैर्य वह कुंजी है जो असंभव दरवाजों को भी खोल सकती है।"
  • "हर बड़ी उपलब्धि के पीछे धैर्य और निरंतर प्रयास छिपे होते हैं।"
  • "धैर्य रखने वालों को उनके सपने जरूर मिलते हैं, बस सही समय पर।"
  • "धैर्य का अर्थ है परिस्थिति को स्वीकार करना और सही समय का इंतजार करना।"
  • "जल्दी में सब कुछ खो सकता है, लेकिन धैर्य से हर चीज जीती जा सकती है।"
  • "धैर्य से अधिक मजबूत और कोई ताकत नहीं है। यह हर तूफान को शांत कर सकता है।"
  • "कठिन समय में धैर्यवान रहना, सच्ची ताकत का प्रतीक है।"
  • "एक बूँद की तरह गिरते रहो, समय आने पर पत्थर भी कट जाएगा।"
  • "धैर्य वह जड़ है, जिससे सफलता का वृक्ष फलता-फूलता है।"
  • "सपने देखने वाले कई होते हैं, लेकिन धैर्य रखने वाले ही अपने सपनों को हकीकत में बदलते हैं।"

नजरिया जीने का : खुद को वश में करना सीखें, फिर आपकी जीत को देवता भी हार में नहीं बदल सकते

नजरिया जीने का खुद को वश में करना एक स्वाभाविक और आत्मिक प्रक्रिया है जिसके अंतर्गत आप अपनी भावनाओं, विचारों, और क्रियाओं को नियंत्रित करने का प्रयास करते हैं। 
बिहार बोर्ड के परीक्षा में एक सब्जी बेचने वाले के लड़के द्वारा राज्य में टॉपर बनने की कहानी को आप क्या कहेंगे. गौतम बुद्ध के उस कथन को  सन्दर्भ में उल्लेख करना अत्यधिक उपयुक्त होगी-"जिसने अपने को वश में कर लिया है, उसकी जीत को देवता भी हार में नहीं बदल सकते "
 विपरीत परिस्थितियों का जीवन में आना और जाना तो प्रकृति का नियम है जिसे बदलना हमारे वश में नहीं है. कहा भी गया है "परिस्थितियां हमेशा तुम्हारे अनुकूल रहे ऐसी आशा न करो आखिर संसार सिर्फ तुम्हारे लिए थोड़े ही बना है?" लेकिन इन विपरीत परिस्थितियों से निकलना आपके हाथ में हैं और ऐसा करने के लिए सबसे पहले आपको खुद के अंदर आत्मविश्वास पैदा करना सीखना होगा. संसार का कोई भी मोटिवेटर कुछ नहीं कर सकता जबतक आप खुद के अंदर सकारात्मक सोच डेवलप नहीं करेंगे. अपने सकारात्मक सोच और खुद में विश्वास पैदा कर जरूर हीं हम इन आपदाओं से निकलने का मार्ग प्रशस्त कर सकते है. आपने सुनी होगी. "
 सफल होने के लिए सफलता की इच्छा,  असफलता के भय से अधिक होनी चाहिए " भगवान् भी आपके लिए कुछ नहीं कर सकते जबतक कि  आप खुद पर विश्वास करना नहीं सीख  लेते.जी हाँ, आप किसी और यहाँ तक कि  भगवान् पर भरोसा करने से पहले खुद पर  यकीन करने सीख  लें, भगवान खुद भी आपके प्रयासों के आगे नतमस्तक हो जायेंगे। यहां कुछ टिप्स हैं जो आपको खुद को वश में करने में मदद कर सकते हैं:

अपनी भावनाओं को पहचानें: 
सबसे पहले, अपनी भावनाओं को पहचानना सीखें क्योंकि खुद की भावनाओं को सबसे अधिक आप पहचान सकते हैं । जब आप गुस्सा, चिंता, या निराशा महसूस करते हैं, तो इसे स्वीकार करें और इसे दबाने की कोशिश न करें बल्कि खुद हीं इनपर नियंत्रण करने सीखे ।
 अपनी भावनाओं को समझें और स्वीकार करें:
 अपनी भावनाओं को समझने की कोशिश करें। वे क्यों उत्पन्न हो रही हैं? क्या कोई विशेष कारण है? साथ ही अपनी भावनाओं को स्वीकार करें, चाहे वे सकारात्मक हों या नकारात्मक। उन्हें दबाने या नकारने की कोशिश न करें।

अपने विचारों को नियंत्रित करें:
 अपने विचारों को नियंत्रित करना सीखना बहुत जरुरी है क्योंकि हमारे अंदर आने वाले विचार ही हमारे कार्यों को नियंत्रित करते हैं. नकारात्मक विचारों को अपने दिमाग में प्रवेश न करने दें क्योंकि यह आपके मानसिक स्थिति को कमजोर  करेगा और फिर आप खुद को नकारात्मक विचारों के अधीन पा सकते हैं ।

अपनी इच्छाशक्ति को मजबूत करें:
 अपनी इच्छाशक्ति को मजबूत करें क्योंकि आपकी मजबूत इच्छाशक्ति हीं आपके ठोस विचारों को गाइड करता है । जब आप किसी लक्ष्य को प्राप्त करने का प्रयास करते हैं, तो हार न मानें और मजबूत इच्छाशक्ति से उन्हें हासिल करने का प्रयास करें. ।

 धैर्य रखें: 
धैर्य रखें क्योंकि आज की दौड़ में जहाँ चारो तरफ कठोर प्रतिस्पर्धा है वहां धैर्य का होना बहुत जरुरी है। खुद को वश में करना एक सतत प्रक्रिया है। हार न मानें।

अनुशासन में रहें: 
अनुशासन को अपना सर्वस्व माने क्योंकि यही वह शक्ति है जो आपको खुद पर नियंत्रण करने में आपकी मदद करता है. खुद के लिए आप नियम बनाएं लेकिन उनके पालन करने में आप खुद हीं मॉनिटरिंग भी करें. नियमित रूप से अभ्यास करें और अपनी दिनचर्या में अनुशासन बनाए रखें।


सच्चाई तो यह है कि जीवन में मिलने वाली सफलता और असफलता के बीच जो सबसे बड़ा फैक्टर- इंटेलीजेंस और मिलने वाले सीमित  संसाधन कभी नहीं होते क्योंकि अगर सिर्फ इंटेलीजेंस और संसाधन हीं जीवन में सफलता की गारंटी होते  तो फिर औसत दर्जे और सीमित  संसाधनों वाले छात्र जीवन में सफलता प्राप्त कर हीं नहीं  पाते.




अगर खुद पर यकींन काफी नहीं होता तो फिर उस 13 वर्षीय लड़की ज्योति के बारे में आप क्यां कहेंगे जिसने अपने घायल और लाचार पिता को गुड़गांव(दिल्ली ) से बिहार के दरभंगा तक के हजारों किलोमीटर की दूरी को साइकिल से तय कर मुश्किल से लक्ष्य को हकीकत में बदल डाला. क्या वह खुद में भरोसा और यकीन  की जीत  नहीं है? 

असफलता के भय को समाप्त करने के लिए करें खुद के अंदर साहस का संचार 
याद रखें... अपने शक्तियो पर भरोसा करने वाला कभी असफल नही होता... 

 इसमें कोई संदेह नहीं है संसार में ऐसा कोई सफल व्यक्ति नहीं है जो किसी दूसरे की मदद से सफलता प्राप्त किया और इतिहास में अपना नाम दर्ज करवाया हो... सफल होने के लिए सबसे जरूरी यह है- पॉजिटिव माइंड सेट के साथ अपने भविष्य के लिए बनाये गए आपके पास एक पॉजिटिव इमेज का होना ....  

दोस्तों खुद में यकीन करना इतना कठिन नहीं है, पर  इतना आसान भी नहीं है. आप इसके बगैर दुनिया की तमाम संसाध्नों और मोटिवेशल बातों से भी कुछ हासिल नहीं कर सकते, जबतक   कि  आप खुद पर यकीन  करना नहीं सीख  लेते.

याद रखें,अपने ऊपर विजय प्राप्त करना, सबसे बड़ी विजय है और एक बार आपने खुद के ऊपर विजय प्राप्त करना सीख लिया,संसार में आप को कोई ताकत लक्ष्य हासिल करने से रोक नहीं सकती.

खुद को वश में करना कैसे सीखें - कुछ प्रेरणादायक उद्धरण:
1. "अपने विचारों पर नियंत्रण रखो, वरना तुम्हारे विचार तुम्हें नियंत्रित करेंगे।"
2. "क्रोध एक क्षणिक पागलपन है। यदि तुम उस क्षण में खुद को नियंत्रित नहीं कर सकते, तो तुम पछताओगे।" -
3. "मन एक जंगली घोड़े की तरह है। इसे वश में करना आसान नहीं है, लेकिन असंभव भी नहीं।" -
4. "इच्छाक्ति ही वह शक्ति है जो तुम्हें अपने लक्ष्य तक पहुंचा सकती है।" -
5. "धैर्य एक गुण है। जो धैर्य रख सकता है, वह जीत सकता है।" -
6. "अपनी कमजोरियों को पहचानो और उन पर काम करो।" -
7. "अपनी गलतियों से सीखो और आगे बढ़ो।" -
8. "नकारात्मक विचारों को अपने दिमाग में प्रवेश न करने दो।" -




नज़रिया जीने का: सीखने का सबसे अच्छा तरीका अपनी गलतियों से सीखना है, पढ़ें स्टेप्स


विख्यात विद्वान और महान दार्शनिक डॉ एस राधाकृष्णन की एक फेमस कथन है जिसमें वह कहते हैं कि "हम भारतीयों के साथ सबसे बड़ी विडम्बना यह है कि हम जानते तो सही हैं लेकिन करते गलत हैं." आपको विश्वास नहीं होगा कि आज पूरी मानव जाति की यही हकीकत बन कर रह गईं है। हमें खूब अच्छी तरह सही और ग़लत के बीच का फर्क पता होता है, लेकिन हम इस कदर खुद से अनभिज्ञ हो चुके हैं कि गलत को करने के लिए तैयार हो जाते हैं। 

महान विद्वान चाणक्य ने क्या खूब कहा है कि दूसरों की गलतियों से सीखों क्योंकि खुद  की गलतियों से सबक सीखने में यह उम्र हीं छोटी पद जाएगी।पद जाएगी। अब आप समझ सकते हैं कि गलतियों से सीखना हमारे जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिये कितना  जरूरी है। यह ठीक है कि गलतियों का होना एक सामान्य बात है और यह भी यथार्थ है कि गलतियां वही करता जो काम करता है क्योंकि जो काम हीं नहीं करेगा भला वह क्या गलती करेगा। लेकिन गलतियों का दुहराया जाना भीं सही नहीं कहा जा सकता क्योंकि इससे आपके सुधार की गुंजाइश खत्म हो जाती है। 


महान वैज्ञानिक थॉमस एडिसन ने कहा भी है कि "सीखने का सबसे अच्छा तरीका अपनी गलतियों से सीखना है।" 

अपनी गलती को स्वीकार करें क्योंकि इससे आपके अंदर खुद को मजबूत  और अधिक स्ट्रांग बनाने में मदद मिलेगी। जीवन में कभी भी खुद की गलतियों को सही ठहराने की कोशिश  उसे नकारने की कोशिश न करें।

हाँ, यह याद रखें कि अपने से हुई सभी गलतियों पर गौर करें भले हीं तत्काल नहीं  लेकिन  बाद में हीं सही. गलती के कारणों का विश्लेषण करें उसका आत्मचिंतन करें कि आखिर किन परिस्थितियों में आपसे यह गलती हुई है और साथ हीं क्या यह वाकई में अनजाने में हुई गलती थी या किसी लापरवाही के कारन हुई थी। 

याद रखें अपनी गलतियों का मूल्याङ्कन करते समय कोशिश करें कि यह  ईमानदारी से आपके द्वारा किया गया प्रयास हो जो यह सुनिश्चित भी करें कि आगे  ऐसी गलती न हो।

अपनी गलतियों से सबक सीखना नहीं भूले साथ ही उसकी पुनरावृति भविष्य में नहीं हो, इसपर भी ध्यान दिया जाना चाहिए क्योंकि  बिल गेट्स ने कहा है-"गलती करना और उससे सीखना जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

गलतियों को करने से ज्यादा जरुरी है कि हम उससे सबक लें और खुद को मजबूत बजाएं. विश्व प्रसिद्ध लेखिका - जे.के. राउलिंग की उस कथन को हमेशा याद रखें-"गलतियाँ हमें सिखाती हैं कि हम कैसे मजबूत बन सकते हैं।" 

अपने द्वारा हुई गलतियों से सबक लेकर उसे दूर करना और उस पर विजय प्राप्त करना सबसे जरुरी है और परफेक्ट होने का लक्षण भी है.  प्रसिद्ध वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने गलतियों के सन्दर्भ में कहना बिल्कुल सटीक था कि "अपनी गलतियों से सीखना ही सबसे बड़ा शिक्षक है।"