Video: जीवन में सुख को ढूंढना शुरू करें, न कि कभी भी खोने का ख़याल करें

najariya jine ka happiness is essential for success in life

Point Of View: अल्बर्ट आइंस्टीन  ने कहा था कि-"जीवन के सुख को ढूंढना शुरू करें, न कि कभी भी खोने का ख़याल करें"  और निश्चित ही जीवन में प्रसन्नता पाने के लिए महत्वपूर्ण उक्तियों में से यह सर्वाधिक पूर्ण और योग्य है. प्रसन्नता एक ऐसा भाव है जो हमारे जीवन में सकारात्मकता लाता है। यह हमें ऊर्जावान, सकारात्मक और उत्पादक बनाता है। प्रसन्नता के कई लाभ हैं, जिनमें शामिल हैं:सफलता प्राप्त करने के लिए, हमें इन लाभों को प्राप्त करने की आवश्यकता है। उचित तो यह होगा कि जीवन में प्रसन्नता वाले पलों की एक डायरी बना कर आप हमेशा अपने पास रखें. प्रसन्न रह कर किया जाने वाले काम हमें थकने नहीं देता और जीवन में सफलता के एकमात्र यही सत्य है. 


हम प्रसन्न होते हैं, तो हम चुनौतियों का सामना करने के लिए अधिक तैयार होते हैं और हम अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अधिक दृढ़ संकल्पित होते हैं। बेहतर स्वास्थ्य, मजबूत संबंध, अधिक रचनात्मकता और अधिक सहनशीलता मानवीय विशेषताएं है जिनसे आप प्रसन्न रहना सीख सकते हैं.  प्रसन्नता एक ऐसी चीज है जो आपके नियंत्रण में है। अपने जीवन में प्रसन्नता लाने के लिए प्रयास करें और आप देखेंगे कि यह आपकी सफलता के लिए एक शक्तिशाली शक्ति हो सकती है। प्रसन्न रहना सीखना एक महत्वपूर्ण कौशल है जो हमें सफल होने में मदद कर सकता है। यहां कुछ सुझाव दिए गए हैं कि आप कैसे प्रसन्न रहना सीख सकते हैं:

1. अपने जीवन में सकारात्मक चीजों पर ध्यान दें-

अपने जीवन में सकारात्मक चीजों पर ध्यान दें। जब आप सकारात्मक चीजों पर ध्यान देते हैं, तो आपके पास नकारात्मक चीजों पर ध्यान देने की संभावना कम होती है। जब हम सकारात्मक चीजों पर ध्यान देते हैं, तो हमके पास नकारात्मक चीजों पर ध्यान देने की संभावना कम होती है। अपने जीवन में सकारात्मक चीजों को नोटिस करने के लिए समय निकालें, भले ही वे छोटी चीजें हों। उदाहरण के लिए, आप अपने परिवार और दोस्तों की सराहना कर सकते हैं, प्रकृति की सुंदरता का आनंद ले सकते हैं, या अपने लक्ष्यों की प्रगति पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।

"मुस्कान कभी भी भले ही छोटी हो, पर इसका प्रभाव बहुत बड़ा होता है।" - Unknown

2. कृतज्ञता का अभ्यास करें-

कृतज्ञता का अभ्यास करें। रोजाना कुछ चीजों के लिए कृतज्ञ होने की कोशिश करें, भले ही वे छोटी चीजें हों। कृतज्ञता का अभ्यास करना प्रसन्नता के स्तर को बढ़ाने का एक शक्तिशाली तरीका है। रोजाना कुछ चीजों के लिए कृतज्ञ होने की कोशिश करें, भले ही वे छोटी चीजें हों। आप एक कृतज्ञता जर्नल रख सकते हैं, अपने दोस्तों और परिवार के साथ कृतज्ञता की बातचीत कर सकते हैं, या कृतज्ञता के अभ्यास के लिए एक ऐप का उपयोग कर सकते हैं।

3. अपने जीवन में खुशी लाने के लिए चीजें करें-

जिन चीजों में आपको आनंद आता है, उन्हें करने के लिए समय निकालें। अपने शौक का पालन करें, नए अनुभवों का अन्वेषण करें, या अपने दोस्तों और परिवार के साथ समय बिताएं। अपने जीवन में खुशी लाने के लिए आप जो भी कर सकते हैं, वह करें।

4. अपने आप को दूसरों की मदद करने के लिए समर्पित करें-

दूसरों की मदद करने से आपको अच्छा महसूस होता है और यह आपके जीवन में अधिक अर्थ जोड़ता है। अपने स्थानीय समुदाय में स्वयंसेवा करें, एक कारण के लिए दान करें, या किसी जरूरतमंद व्यक्ति की मदद करें। दूसरों की मदद करना एक सरल तरीका है जो आपकी खुशी को बढ़ा सकता है।

5. अपने विचारों और भावनाओं को नियंत्रित करने का प्रयास करें-

जब आप नकारात्मक विचारों या भावनाओं का अनुभव करते हैं, तो उन्हें बदलने का प्रयास करें। अपने विचारों को अधिक सकारात्मक दिशा में निर्देशित करें और अपने भावनाओं को स्वस्थ तरीके से व्यक्त करें। नकारात्मक विचारों और भावनाओं को दबाने से बचें, क्योंकि इससे वे और भी बदतर हो सकते हैं।

6. स्वस्थ जीवन शैली अपनाएं-

स्वस्थ जीवन शैली अपनाएं। स्वस्थ आहार खाएं, नियमित रूप से व्यायाम करें और पर्याप्त नींद लें।स्वस्थ जीवन शैली जीने से आपको शारीरिक और मानसिक रूप से बेहतर महसूस करने में मदद मिल सकती है, जिससे आपको खुशी महसूस करने की संभावना अधिक हो सकती है।

7. अपने आसपास के लोगों के साथ सकारात्मक संबंध बनाए रखें-

अपने विचारों और भावनाओं को नियंत्रित करने का प्रयास करें। जब आप नकारात्मक विचारों या भावनाओं को महसूस करते हैं, तो उन्हें बदलने का प्रयास करें। सकारात्मक लोगों के साथ समय बिताने से आपको खुश रहने में मदद मिल सकती है। ऐसे लोगों के साथ जुड़ें जो आपको उत्साहित करते हैं और आपको अच्छा महसूस कराते हैं। नकारात्मक लोगों से दूर रहें जो आपकी खुशी को कम कर सकते हैं।

महत्वपूर्ण कोट्स-

  • "जीवन के सुख को ढूंढना शुरू करें, न कि कभी भी खोने का ख़याल करें।" - Albert Einstein
  • "मुस्कान दुनिया को सुंदर बना देती है।" - Unknown
  • "आपके चेहरे पर मुस्कान रखने से आप खुद को भी अच्छा महसूस करते हैं और दूसरों को भी अच्छा महसूस करवा सकते हैं।" - Les Brown
  • "जीवन में कभी-कभी आपको अपनी मुस्कान का कारण बनना पड़ता है।" - Thich Nhat Hanh
  • "मुस्कान कभी भी भले ही छोटी हो, पर इसका प्रभाव बहुत बड़ा होता है।" - Unknown
  • "खुश रहने का एक तरीका यह है कि आप अपने सुररेखा पर केंद्रित हों, न कि अपनी समस्याओं पर।" - David DeNotaris
  • "मुस्कान एक भयंकर सामरिक हथियार है, जिससे आप दूसरों को जीत सकते हैं।" - Dale Carnegie
  • "मुस्कान से हम दुनिया को हंसी और प्रेम की ओर बढ़ाने में मदद करते हैं।" - Sri Sri Ravi Shankar
  • "मुस्कान से आपका दिल भी खुश रहता है और दूसरों को भी खुशी मिलती है।" - Unknown
  • "जीवन में हर पल को मुस्कान के साथ जियें, क्योंकि यह हमें और भी खूबसूरत बना देता है।" - Dolly Parton

नज़रिया जीने का : जानें भगवान राम के चरित्र के कौन-कौन से हैं 16 गुण


नज़रिया जीने का : भगवान राम के जीवन में मर्यादा का विशेष महत्व रहा है और शायद प्रभु राम एकमात्र देव हैं जिनके साथ मर्यादा पुरुषोत्तम विशेषण जुड़ा हुआ है। भगवान राम ने मर्यादा को अपने से कभी अलग नहीं होने दिया भले हीं चाहे वह पारिवारिक संबंध की बात हो, सहकर्मियों की बात हो या दुश्मनों की बात हो। सच्चाई तो यह है कि प्रभु राम के मर्यादा और विशेष गुणों को लेकर जो छवि प्रत्येक हिंदुओं में बसी है वह किसी लेखनी की मोहताज नहीं है।

हिन्दू पंचांग के अनुसार भगवान राम  को भगवान विष्णु का 7वां अवतार माना जाता है जिन्होंने अपना पूरा जीवन एक मर्यादा में रहकर व्यतीत किया. "मर्यादा पुरुषोत्तम" श्रीराम भगवान हिन्दू धर्म में एक महत्वपूर्ण धार्मिक और ऐतिहासिक व्यक्तित्व हैं, जो "रामायण" के मुख्य पात्र में प्रस्तुत होते हैं। "मर्यादा पुरुषोत्तम" का अर्थ होता है "मर्यादा में सर्वोत्तम पुरुष" या "मर्यादा के परम आदमी"।

"मर्यादा पुरुषोत्तम" का उपनाम भगवान राम के श्रद्धायुक्त और न्यायप्रिय व्यक्तित्व को संकेत करता है, जो उन्हें भक्तों के लिए एक आदर्श पुरुष बनाता है।

 भगवान राम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है क्योंकि उन्होंने अपने जीवन में मर्यादाओं का हमेशा पालन किया। वे एक आदर्श पुत्र, आदर्श भाई, आदर्श पति, आदर्श राजा और आदर्श मित्र थे। उन्होंने अपने जीवन में कभी भी इन मर्यादाओं का उल्लंघन नहीं किया.

सच तो यह है कि इस उपनाम के माध्यम से भगवान राम की विशेषता और उनके जीवन में अनुसरण करने लायक आदर्शों को दर्शाने का प्रयास किया जाता है।  भगवान राम को मर्यादा पुरुषोत्तम उनकी महानता के लिए दिया गया उपाधि है जिसमे पारिवारिक संबंधो की मर्यादा के साथ ही राजकीय और दोस्तों और यहाँ तक कि दुश्मनों के साथ भी मर्यादा के निर्वाह के लिए दिया जाता है. और यही वजह है कि भगवन राम को मर्यादा पुरुषोत्तम के नाम से पुकारा जाता है.

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम, जिनका सभी सम्बन्धो के लिए अनुकरणीय व्यक्तित्व

भगवान राम को "मर्यादा पुरुषोत्तम" कहा जाता है क्योंकि उन्होंने अपने जीवन में धर्म, नैतिकता, और श्रेष्ठता की मर्यादा बनाए रखी। उन्होंने अपने पिता की आज्ञा का पालन किया, अपनी पतिव्रता पत्नी सीता के प्रति वफादारी दिखाई, और अपने भक्तों के प्रति सत्य, न्याय, और करुणा का प्रदर्शन किया।  

भगवान राम को आदर्श पुत्र क्यों कहते हैं

अगर आप रामायण और रामचरित मानस का अध्ययन करेंगे तो पाएंगे कि भगवन राम ने अपने पिता दशरथ के आदेश का पालन करने के लिए 14 वर्ष का वनवास सहर्ष स्वीकार किया। वे जानते थे कि पिता का आदेश सदैव मानना चाहिए, चाहे वह कितना भी कठिन क्यों न हो। इस प्रकार की मिसाल शायद हीं कहीं और मिलती है. 

भगवान राम की चरित्र की पांच विशेषताएं जो मर्यादा पुरुषोत्तम बनाती है

भगवान राम को आदर्श भाई क्यों कहते हैं?

भारत मिलाप और अपने भाइयों के प्रति प्रेम और अनुराग भगवन राम की अलग विशेषता है जो उन्हें सबसे अलग रखता है. भगवन राम ने अपने भाई भरत के प्रति कभी भी ईर्ष्या या घृणा का भाव नहीं रखा। वे भरत को अपना सच्चा भाई मानते थे और उनका हमेशा सम्मान करते थे। 

भगवान राम को आदर्श पति क्यों कहते हैं?

मनुष्य के जीवन में आने वाली सभी संबंधों को पूर्ण एवं उत्तम रूप से निभाने की शिक्षा देने वाला प्रभु रामचंद्र के चरित्र के समान दूसरा कोई चरित्र नहीं है।  और जहाँ तक आदर्श पति का सवाल है, राम ने अपनी पत्नी सीता के प्रति हमेशा प्रेम और सम्मान का भाव रखा। वे सीता के लिए अपना सब कुछ न्यौछावर करने के लिए तैयार थे।

भगवान राम को आदर्श राजा क्यों कहते हैं?

राम के राज्य में राजनीति स्वार्थ से प्रेरित ना होकर प्रजा की भलाई के लिए थी। इसमें अधिनायकवाद की छाया मात्र भी नहीं थी। राम ने अपने राज्य में हमेशा न्याय और धर्म का पालन किया। वे प्रजा के कल्याण के लिए हमेशा तत्पर रहते थे। 

 भगवान राम आदर्श मित्र कैसे हैं?

श्री रामचंद्र जी निष्काम और अनासक्त भाव से राज्य करते थे। उनमें कर्तव्य परायणता थी और वे मर्यादा के अनुरूप आचरण करते थे।  राम ने अपने दोस्तों सुग्रीव, हनुमान, विभीषण आदि के प्रति हमेशा निष्ठा और समर्पण का भाव रखा। उन्होंने अपने दोस्तों की हर समय मदद की। 

भगवान राम की विशेषता हैं ये खास 16 गुण

भगवान राम के मर्यादा और उनके विशेष गुणों को लेकर जो छवि प्रत्येक हिंदुओं में बसी है वह किसी लेखनी की मोहताज नहीं है। हिन्दू पंचांग के अनुसार भगवान राम  को भगवान विष्णु का 7वां अवतार माना जाता है जिन्होंने अपना पूरा जीवन एक मर्यादा में रहकर व्यतीत किया. 

भगवान राम जी के चरित्र की कई ऐसी विशेषताएं हैं जो उन्हें लोगों का आदर्श बनाती हैं.  हिन्दू पंचांग के अनुसार प्रभु राम 16 गुणों से युक्त थे जो उनको मर्यादा पुरुषोतम बनाते हैं और हम सभी उनके इन गुणों को अपनाकर अपना जीवन बना सकते हैं-

जानते हैं भगवान राम के चरित्र मे कौन-कौन से 16 गुण हैं जो हमें अपनानी चाहिए .

  • गुणवान (योग्य और कुशल)
  • किसी की निंदा न करने वाला (प्रशंसक, सकारात्मक)
  • धर्मज्ञ (धर्म का ज्ञान रखने वाला)
  • कृतज्ञ (आभारी या आभार जताने वाला विनम्रता)
  • सत्य (सत्य बोलने वाला और सच्चा)
  • दृढ़प्रतिज्ञ (प्रतिज्ञा पर अटल रहने वाला, दृढ़ निश्‍चयी )
  • सदाचारी (धर्मात्मा, पुण्यात्मा और अच्छे आचरण वाला, आदर्श चरित्र)
  • सभी प्राणियों का रक्षक (सहयोगी)
  • विद्वान (बुद्धिमान और विवेक शील)
  •  सामर्थशाली (सभी का विश्वास और समर्थन पाने वाला समर्थवान)
  • प्रियदर्शन (सुंदर मुख वाला)
  • मन पर अधिकार रखने वाला (जितेंद्रीय)
  • क्रोध जीतने वाला (शांत और सहज)
  • कांतिमान (चमकदार शरीर वाला और अच्छा व्यक्तित्व)
  • वीर्यवान (स्वस्थ्य, संयमी और हष्ट-पुष्ट)
  • युद्ध में जिसके क्रोधित होने पर देवता भी डरें : (वीर, साहसी, धनुर्धारि, असत्य का विरोधी)


नजरिया जीने का : सपने सभी देखते हैं, लेकिन धैर्य रखने वाले ही सपनों को हकीकत में बदलते हैं


नजरिया जीने का : मुश्किल और विपरीत परिस्थितियों मे अधीर हो जाना और धैर्य खोना एक सामान्य स्वभाव है और इससे हम अलग नहीं है। लेकिन यह भी एक साथ है कि धैर्य से अधिक मजबूत और कोई ताकत नहीं है और इसकी विशालता का अंदाज इससे हीं लगाया जा सकता है कि  यह हर तूफान को शांत कर सकता है।
धैर्य का जीवन में एक गहरा महत्व है और जीवन मे  सफलता के लिए यह सबसे जरूरी शर्त भी है। विश्वास करें, धैर्य हीं वह कुंजी है जिसके माध्यम से हम  असंभव के किसी भी दरवाजों को खोलने का मार्ग प्रशस्त करती है। यह हमें कठिन परिस्थितियों में स्थिर रहने और सफलता की ओर अग्रसर रहने में सहायता करता है। 

जीवन मे सफलता प्राप्त करने के लिए कठिन परिश्रम के अलावा भी हमें धैर्य और आत्मविश्वास का होना बहुत जरूरी है। आपका इस तथ्य को समझना होगा कि आजकल के कठिन और कम्पेटिटिव माहौल मे जहां सफलता आसान नहीं रहा गया है, हमें धैर्य और आत्मविश्वास को अपनाने कि नितांत जरूरत हैं। विंस्टन चर्चिल के उस कथन को आप हमेशा याद रखें जिसमें उन्होंने कहता था कि-"हार मत मानो। हारने वाले ही हारते हैं।"

धैर्य वह है जो हमें चुनौतियों का सामना करने और लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रेरित करता है, भले ही परिणाम तुरंत न मिलें। यह हमें हार न मानने और प्रयास करते रहने की शक्ति प्रदान करता है। वहीं आत्मविश्वास हमें अपनी क्षमताओं पर विश्वास करने और अपनी पूरी क्षमता का उपयोग करने में मदद करता है। यह हमें जोखिम लेने और नए अवसरों का पता लगाने के लिए प्रोत्साहित करता है।



 याद रखें तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद हम अपने लाइफ में सफल हो सकते हैं और इसके लिए सबसे जरुरी फैक्टर हैं  आपके अंदर आत्मविश्वास और धैर्य का होना.

धैर्य का अर्थ हीं है अपने संघर्ष और लड़ाई मे हर परिस्थिति को स्वीकार करना और सही समय का इंतजार करना। क्योंकि किसी भी विपत्ति और असामान्य परिस्थिति मे हमारी व्यग्रता और उतावलापन हमारे द्वारा होने वाली गलतियों की संभावना को बढ़ायेगा जोकि हमारी लंबे लड़ाई को और भी कमजोर करती है। 

आप विश्वास कीजिए जिनके पास आत्मविश्वास है वह इन विपरीत परिस्थितियों में भी अपने सफलता का मार्ग लेते हैं और इसके लिए सबसे जरूरी है  सकारात्मक और पॉजिटिविटी का होना.

दोस्तों विपरीत परिस्थितियों में सफलता प्राप्त करने के लिए धैर्य  का होना बहुत जरूरी है पर यह याद रखें यह आपको अपने अंदर ही विकसित करनी होगी.  

किसी कवि की ये पंक्तियाँ आप को विपरीत परिस्थितियों में लड़ने में सार्थंक हो सकती है. 
वह पथ क्या पथिक परीक्षा क्या
जिस पथ में बिखरे शूल ना हो
नाविक की धैर्य परीक्षा क्या 
यदि धाराएं प्रतिकूल ना हो. 


आप इतिहास के तमाम महापुरुषों की जीवन वृतांत को देखें तो यह साबित हो जाएगा की रातों-रात सफलता किसी को नहीं मिलती और यह भी उतना ही बड़ा सच है कि जिसने जितनी बड़ी सफलता हासिल किया है उसके मार्ग पर प्रकृति ने उतने ही कांटे और फूल बिछा कर रखे थे ऐसा नहीं है कि वे महापुरुषों और उन बाधाओं को देख अपने कदम वापस खींच लिए. 




तू रुख हवाओं का मोड़ दे,
हिम्मत की अपनी कलम उठा,
लोगों के भरम को तोड़ दे।
-नरेंद्र वर्मा

किसी भी कार्य को करने के बहुत सारे तरीके हो सकते हैं. और आपको भी अपने लिए तरीकों को चुनने की पूरी आजादी है. लेकिन यह याद रहें दोस्तों . अपने चुने गए तरीकों को जस्टिफाई करना भी आपको ही होगा. हाँ इसके लिए आप सफल महापुरुषों के अनुभवो और बताये गए रास्तों को आधार बना सकते हैं. 

विख्यात कवि/ साहित्यकार की उस कथन को याद करों दोस्तों..."महाशक्तियों के वेग में रोड़े अटकाने से उनके वेग कम नहीं होता बल्कि वो दुगुने वेग से आगे बढ़ती है." दोस्तों अब फैसला आपको करना है कि आप खुद का तुलना किसी मामूली शक्ति करते हैं या किसी महाशक्ति. अगर उत्तर महाशक्ति में है तो फिर याद रखें.आप इन बाधाओं को पार करने और निकलने के लिए दुगुने वेग से प्रयास करने वालों में से हैं. 
अक्सर ऐसा होता है कि अपनी राहों में मिलने वाले थोड़ी से चुनौतियों को हम बाधा का नाम देकर उससे परेशान हो जाते हैं कि हम खुद को परिस्थति के आगे विवश और लाचार समझने लगते हैं. पता नहीं हमें ऐसा क्यों लगता है कि परिस्थितियों का हमेशा हमारे पक्ष में हीं होनी चाहिए.

लेकिन क्या यह सच नहीं है दोस्तों कि परिस्थितियों हमेशा हमारे अनुकूल रहे हैं ऐसा नहीं करना चाहिए आखिर यह संसार सिर्फ हमारे लिए हीं तो नहीं बनी है. 

दोस्तों आपको आश्चर्य होगा के हम जिन बाधाओं और परिस्थितियों को अपनी सफलता के मार्ग का सबसे बाड़ा बाधा बताते हैं. सच्चाई तो यह है कि हम अपनी सफलता के मार्ग का बाधा खुद होते हैं. 

हमारी नेगेटिव सोच और खुद का अंदर पैदा किया गया नकारात्मक माइंडसेट प्रमुख बाधा होती है हमारी असफलता के पीछे….लेकिन हम दोष देते हैं उन परिस्थितियों और बाधाओं को. 
प्रमुख कोट्स:
  • "धैर्य ही शक्ति है। शांत रहकर आप किसी भी परिस्थिति का सामना कर सकते हैं।" - महात्मा गांधी
  • "आत्मविश्वास सफलता की पहली कुंजी है।" - स्वामी विवेकानंद
  • "अगर आप खुद पर विश्वास करते हैं, तो आप कुछ भी कर सकते हैं।" - अननोद मॉरिल
  • "धैर्यवान व्यक्ति ही विजेता होता है।" - विलियम आर्थर वॉर्ड
  • "हार मत मानो। हारने वाले ही हारते हैं।" - विनस्टन चर्चिल
  • "धैर्य वह कुंजी है जो असंभव दरवाजों को भी खोल सकती है।"
  • "हर बड़ी उपलब्धि के पीछे धैर्य और निरंतर प्रयास छिपे होते हैं।"
  • "धैर्य रखने वालों को उनके सपने जरूर मिलते हैं, बस सही समय पर।"
  • "धैर्य का अर्थ है परिस्थिति को स्वीकार करना और सही समय का इंतजार करना।"
  • "जल्दी में सब कुछ खो सकता है, लेकिन धैर्य से हर चीज जीती जा सकती है।"
  • "धैर्य से अधिक मजबूत और कोई ताकत नहीं है। यह हर तूफान को शांत कर सकता है।"
  • "कठिन समय में धैर्यवान रहना, सच्ची ताकत का प्रतीक है।"
  • "एक बूँद की तरह गिरते रहो, समय आने पर पत्थर भी कट जाएगा।"
  • "धैर्य वह जड़ है, जिससे सफलता का वृक्ष फलता-फूलता है।"
  • "सपने देखने वाले कई होते हैं, लेकिन धैर्य रखने वाले ही अपने सपनों को हकीकत में बदलते हैं।"

नजरिया जीने का : खुद को वश में करना सीखें, फिर आपकी जीत को देवता भी हार में नहीं बदल सकते

नजरिया जीने का खुद को वश में करना एक स्वाभाविक और आत्मिक प्रक्रिया है जिसके अंतर्गत आप अपनी भावनाओं, विचारों, और क्रियाओं को नियंत्रित करने का प्रयास करते हैं। 
बिहार बोर्ड के परीक्षा में एक सब्जी बेचने वाले के लड़के द्वारा राज्य में टॉपर बनने की कहानी को आप क्या कहेंगे. गौतम बुद्ध के उस कथन को  सन्दर्भ में उल्लेख करना अत्यधिक उपयुक्त होगी-"जिसने अपने को वश में कर लिया है, उसकी जीत को देवता भी हार में नहीं बदल सकते "
 विपरीत परिस्थितियों का जीवन में आना और जाना तो प्रकृति का नियम है जिसे बदलना हमारे वश में नहीं है. कहा भी गया है "परिस्थितियां हमेशा तुम्हारे अनुकूल रहे ऐसी आशा न करो आखिर संसार सिर्फ तुम्हारे लिए थोड़े ही बना है?" लेकिन इन विपरीत परिस्थितियों से निकलना आपके हाथ में हैं और ऐसा करने के लिए सबसे पहले आपको खुद के अंदर आत्मविश्वास पैदा करना सीखना होगा. संसार का कोई भी मोटिवेटर कुछ नहीं कर सकता जबतक आप खुद के अंदर सकारात्मक सोच डेवलप नहीं करेंगे. अपने सकारात्मक सोच और खुद में विश्वास पैदा कर जरूर हीं हम इन आपदाओं से निकलने का मार्ग प्रशस्त कर सकते है. आपने सुनी होगी. "
 सफल होने के लिए सफलता की इच्छा,  असफलता के भय से अधिक होनी चाहिए " भगवान् भी आपके लिए कुछ नहीं कर सकते जबतक कि  आप खुद पर विश्वास करना नहीं सीख  लेते.जी हाँ, आप किसी और यहाँ तक कि  भगवान् पर भरोसा करने से पहले खुद पर  यकीन करने सीख  लें, भगवान खुद भी आपके प्रयासों के आगे नतमस्तक हो जायेंगे। यहां कुछ टिप्स हैं जो आपको खुद को वश में करने में मदद कर सकते हैं:

अपनी भावनाओं को पहचानें: 
सबसे पहले, अपनी भावनाओं को पहचानना सीखें क्योंकि खुद की भावनाओं को सबसे अधिक आप पहचान सकते हैं । जब आप गुस्सा, चिंता, या निराशा महसूस करते हैं, तो इसे स्वीकार करें और इसे दबाने की कोशिश न करें बल्कि खुद हीं इनपर नियंत्रण करने सीखे ।
 अपनी भावनाओं को समझें और स्वीकार करें:
 अपनी भावनाओं को समझने की कोशिश करें। वे क्यों उत्पन्न हो रही हैं? क्या कोई विशेष कारण है? साथ ही अपनी भावनाओं को स्वीकार करें, चाहे वे सकारात्मक हों या नकारात्मक। उन्हें दबाने या नकारने की कोशिश न करें।

अपने विचारों को नियंत्रित करें:
 अपने विचारों को नियंत्रित करना सीखना बहुत जरुरी है क्योंकि हमारे अंदर आने वाले विचार ही हमारे कार्यों को नियंत्रित करते हैं. नकारात्मक विचारों को अपने दिमाग में प्रवेश न करने दें क्योंकि यह आपके मानसिक स्थिति को कमजोर  करेगा और फिर आप खुद को नकारात्मक विचारों के अधीन पा सकते हैं ।

अपनी इच्छाशक्ति को मजबूत करें:
 अपनी इच्छाशक्ति को मजबूत करें क्योंकि आपकी मजबूत इच्छाशक्ति हीं आपके ठोस विचारों को गाइड करता है । जब आप किसी लक्ष्य को प्राप्त करने का प्रयास करते हैं, तो हार न मानें और मजबूत इच्छाशक्ति से उन्हें हासिल करने का प्रयास करें. ।

 धैर्य रखें: 
धैर्य रखें क्योंकि आज की दौड़ में जहाँ चारो तरफ कठोर प्रतिस्पर्धा है वहां धैर्य का होना बहुत जरुरी है। खुद को वश में करना एक सतत प्रक्रिया है। हार न मानें।

अनुशासन में रहें: 
अनुशासन को अपना सर्वस्व माने क्योंकि यही वह शक्ति है जो आपको खुद पर नियंत्रण करने में आपकी मदद करता है. खुद के लिए आप नियम बनाएं लेकिन उनके पालन करने में आप खुद हीं मॉनिटरिंग भी करें. नियमित रूप से अभ्यास करें और अपनी दिनचर्या में अनुशासन बनाए रखें।


सच्चाई तो यह है कि जीवन में मिलने वाली सफलता और असफलता के बीच जो सबसे बड़ा फैक्टर- इंटेलीजेंस और मिलने वाले सीमित  संसाधन कभी नहीं होते क्योंकि अगर सिर्फ इंटेलीजेंस और संसाधन हीं जीवन में सफलता की गारंटी होते  तो फिर औसत दर्जे और सीमित  संसाधनों वाले छात्र जीवन में सफलता प्राप्त कर हीं नहीं  पाते.




अगर खुद पर यकींन काफी नहीं होता तो फिर उस 13 वर्षीय लड़की ज्योति के बारे में आप क्यां कहेंगे जिसने अपने घायल और लाचार पिता को गुड़गांव(दिल्ली ) से बिहार के दरभंगा तक के हजारों किलोमीटर की दूरी को साइकिल से तय कर मुश्किल से लक्ष्य को हकीकत में बदल डाला. क्या वह खुद में भरोसा और यकीन  की जीत  नहीं है? 

असफलता के भय को समाप्त करने के लिए करें खुद के अंदर साहस का संचार 
याद रखें... अपने शक्तियो पर भरोसा करने वाला कभी असफल नही होता... 

 इसमें कोई संदेह नहीं है संसार में ऐसा कोई सफल व्यक्ति नहीं है जो किसी दूसरे की मदद से सफलता प्राप्त किया और इतिहास में अपना नाम दर्ज करवाया हो... सफल होने के लिए सबसे जरूरी यह है- पॉजिटिव माइंड सेट के साथ अपने भविष्य के लिए बनाये गए आपके पास एक पॉजिटिव इमेज का होना ....  

दोस्तों खुद में यकीन करना इतना कठिन नहीं है, पर  इतना आसान भी नहीं है. आप इसके बगैर दुनिया की तमाम संसाध्नों और मोटिवेशल बातों से भी कुछ हासिल नहीं कर सकते, जबतक   कि  आप खुद पर यकीन  करना नहीं सीख  लेते.

याद रखें,अपने ऊपर विजय प्राप्त करना, सबसे बड़ी विजय है और एक बार आपने खुद के ऊपर विजय प्राप्त करना सीख लिया,संसार में आप को कोई ताकत लक्ष्य हासिल करने से रोक नहीं सकती.

खुद को वश में करना कैसे सीखें - कुछ प्रेरणादायक उद्धरण:
1. "अपने विचारों पर नियंत्रण रखो, वरना तुम्हारे विचार तुम्हें नियंत्रित करेंगे।"
2. "क्रोध एक क्षणिक पागलपन है। यदि तुम उस क्षण में खुद को नियंत्रित नहीं कर सकते, तो तुम पछताओगे।" -
3. "मन एक जंगली घोड़े की तरह है। इसे वश में करना आसान नहीं है, लेकिन असंभव भी नहीं।" -
4. "इच्छाक्ति ही वह शक्ति है जो तुम्हें अपने लक्ष्य तक पहुंचा सकती है।" -
5. "धैर्य एक गुण है। जो धैर्य रख सकता है, वह जीत सकता है।" -
6. "अपनी कमजोरियों को पहचानो और उन पर काम करो।" -
7. "अपनी गलतियों से सीखो और आगे बढ़ो।" -
8. "नकारात्मक विचारों को अपने दिमाग में प्रवेश न करने दो।" -




नज़रिया जीने का: सीखने का सबसे अच्छा तरीका अपनी गलतियों से सीखना है, पढ़ें स्टेप्स


विख्यात विद्वान और महान दार्शनिक डॉ एस राधाकृष्णन की एक फेमस कथन है जिसमें वह कहते हैं कि "हम भारतीयों के साथ सबसे बड़ी विडम्बना यह है कि हम जानते तो सही हैं लेकिन करते गलत हैं." आपको विश्वास नहीं होगा कि आज पूरी मानव जाति की यही हकीकत बन कर रह गईं है। हमें खूब अच्छी तरह सही और ग़लत के बीच का फर्क पता होता है, लेकिन हम इस कदर खुद से अनभिज्ञ हो चुके हैं कि गलत को करने के लिए तैयार हो जाते हैं। 

महान विद्वान चाणक्य ने क्या खूब कहा है कि दूसरों की गलतियों से सीखों क्योंकि खुद  की गलतियों से सबक सीखने में यह उम्र हीं छोटी पद जाएगी।पद जाएगी। अब आप समझ सकते हैं कि गलतियों से सीखना हमारे जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिये कितना  जरूरी है। यह ठीक है कि गलतियों का होना एक सामान्य बात है और यह भी यथार्थ है कि गलतियां वही करता जो काम करता है क्योंकि जो काम हीं नहीं करेगा भला वह क्या गलती करेगा। लेकिन गलतियों का दुहराया जाना भीं सही नहीं कहा जा सकता क्योंकि इससे आपके सुधार की गुंजाइश खत्म हो जाती है। 


महान वैज्ञानिक थॉमस एडिसन ने कहा भी है कि "सीखने का सबसे अच्छा तरीका अपनी गलतियों से सीखना है।" 

अपनी गलती को स्वीकार करें क्योंकि इससे आपके अंदर खुद को मजबूत  और अधिक स्ट्रांग बनाने में मदद मिलेगी। जीवन में कभी भी खुद की गलतियों को सही ठहराने की कोशिश  उसे नकारने की कोशिश न करें।

हाँ, यह याद रखें कि अपने से हुई सभी गलतियों पर गौर करें भले हीं तत्काल नहीं  लेकिन  बाद में हीं सही. गलती के कारणों का विश्लेषण करें उसका आत्मचिंतन करें कि आखिर किन परिस्थितियों में आपसे यह गलती हुई है और साथ हीं क्या यह वाकई में अनजाने में हुई गलती थी या किसी लापरवाही के कारन हुई थी। 

याद रखें अपनी गलतियों का मूल्याङ्कन करते समय कोशिश करें कि यह  ईमानदारी से आपके द्वारा किया गया प्रयास हो जो यह सुनिश्चित भी करें कि आगे  ऐसी गलती न हो।

अपनी गलतियों से सबक सीखना नहीं भूले साथ ही उसकी पुनरावृति भविष्य में नहीं हो, इसपर भी ध्यान दिया जाना चाहिए क्योंकि  बिल गेट्स ने कहा है-"गलती करना और उससे सीखना जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

गलतियों को करने से ज्यादा जरुरी है कि हम उससे सबक लें और खुद को मजबूत बजाएं. विश्व प्रसिद्ध लेखिका - जे.के. राउलिंग की उस कथन को हमेशा याद रखें-"गलतियाँ हमें सिखाती हैं कि हम कैसे मजबूत बन सकते हैं।" 

अपने द्वारा हुई गलतियों से सबक लेकर उसे दूर करना और उस पर विजय प्राप्त करना सबसे जरुरी है और परफेक्ट होने का लक्षण भी है.  प्रसिद्ध वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने गलतियों के सन्दर्भ में कहना बिल्कुल सटीक था कि "अपनी गलतियों से सीखना ही सबसे बड़ा शिक्षक है।" 

Swami Vivekananda Jayanti 2025 Quotes : जानें स्वामी विवेकानंद के प्रमुख कोट्स जो आपके सोच को बदल देंगी

Vivekanand Facts important quotes

Point Of View :  आज यानी 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद की 163वीं जन्म जयंती मनाई जा (Swami Vivekananda Jayanti Images) रही है। महान आध्यात्मिक नेता, दार्शनिक और विचारक स्वामी विवेकानंद की स्मृति में प्रत्येक वर्ष राष्ट्रीय युवा दिवस भी प्रत्‍येक वर्ष 12 जनवरी को मनाया जाता है। स्वामी विवेकानंद का युवाओं की क्षमता में अटूट विश्वास देश के युवा नागरिकों के साथ गहराई से जुड़ा हुआ है। स्वामी विवेकानंद धर्म, दर्शन, इतिहास, कला, सामाजिक विज्ञान और साहित्य के (Swami Vivekananda Jayanti Quotes) ज्ञाता थे। उनके दार्शनिक विचार और कथन आज भी युवाओं को आगे बढ़ते रहने के लिए प्रेरित करते हैं साथ ही उनका प्रेरक जीवन और सशक्त संदेश युवाओं से अपने सपनों को संजोने, अपनी ऊर्जा को उजागर करने और उनके कल्पित आदर्शों के अनुरूप भविष्य को आकार देने का आग्रह करता है।


भारत में कई सामाजिक और धार्मिक सुधारों के लिए काम अलख जगाने वाले दार्शनिक, संत और विचारक स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी, 1863 को कलकत्ता के एक कायस्थ परिवार में हुआ था। उनका बचपन का नाम नरेंद्रनाथ दत्त था तथा उनके पिता विश्वनाथ दत्त एक प्रसिद्ध वकील थे और उनकी माता भुवनेश्वरी देवी एक धार्मिक महिला थीं। बचपन से ही अत्यंत बुद्धिमान और जिज्ञासु प्रवृति के स्वामी विवेकानन्द की बचपन से ही धर्म और दर्शन में गहरी रुचि थी।

भारत में राष्ट्रीय युवा महोत्सव का आयोजन स्वामी विवेकानंद जी के जन्म दिवस के अवसर पर किया जाता है. इस अवसर पर कई प्रकार की गतिविधियों का आयोजन किया जाता है जो युवाओं मानसिक तथा उनके सर्वांगीण विकास के लिए जरुरी है. 
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एक महान विचारक होने के साथ हीं वे  रामकृष्ण परमहंस के अनुयायी थे. उल्लेखनीय स्वामी विवेकानंद ने  1897 में रामकृष्ण मिशन की स्थापना की।


यह दिन विशेष रूप से सांस्कृतिक उत्सव और युवाओं के कुछ पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करने के लिए मनाया जाता है। युवाओं को उनकी सांस्कृतिक प्रतिभाओं और आकांक्षाओं की अभिव्यक्ति और पूर्ति के लिए देश भर में कई तरह की गतिविधियों के साथ कई अन्य कार्यक्रमों को कवर करने के साथ यह दिन मनाया जाता है।

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राष्ट्रीय युवा दिवस इतिहास

विवेकानंद का मूल नाम नरेंद्रनाथ दत्त  था जिन्होंने पश्चिमी दुनिया के लिए वेदांत और योग के भारतीय दर्शन की शुरुआत करने वाले प्रमुख व्यक्तियों में से एक थे।

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विवेकानंद के महान विद्वान और दार्शनिक अपने प्रज्वलित विचारों के लिए जाने जाते हैं जिन्होंने मुख्य रूप से इस बात पर ध्यान केंद्रित किया है कि जीवन के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अपने मन को कैसे नियंत्रित किया जाए। उनका दर्शन निश्चित रूप से मन को नियंत्रित करने पर बहुत जोर देता है जो कि अंतिम चीजें हैं जो हमारे व्यक्तिवाद को तय करती हैं।

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सत्यवादिता, निःस्वार्थता और पवित्रता जैसे गुण जीवन के महत्वपूर्ण कारक हैं जिन पर व्यक्ति द्वारा ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए जैसा कि विवेकानंद ने जोर दिया था।

विवेकानंद के अनुसार, ब्रह्मचर्य युवाओं के लिए महत्वपूर्ण कारक है और युवाओं को अपने व्यक्तित्व विकास के लिए इस पर ध्यान देना चाहिए क्योंकि यह सहनशक्ति और मानसिक कल्याण का स्रोत है।

शिकागो में आयोजित विश्व धर्म सम्मेलन 

स्वामी विवेकानंद ने 1893 में अमेरिका के शिकागो में आयोजित विश्व धर्म सम्मेलन में भाग लिया। उन्होंने इस सम्मेलन में अपने भाषण में भारत और सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व किया। उनके भाषण ने पूरी दुनिया को प्रभावित किया। इस भाषण के बाद उन्हें "युवा भारत का प्रेरणास्रोत" और "आधुनिक भारत का पिता" कहा जाने लगा।

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वह अपने विचारों के लिए अद्वितीय थे जिन्होंने युवाओं को पवित्र पुस्तक भगवद् गीता का अध्ययन करने के बजाय फुटबॉल खेलने पर ध्यान केंद्रित किया क्योंकि उनका मानना ​​है कि युवा गीता के अर्थ को अपने मजबूत कंधे और बांह के साथ बेहतर तरीके से समझ सकते हैं जो केवल फुटबॉल द्वारा ही बनाया जा सकता है। 

विवेकानंद का सफलता मंत्र क्या है?

"एक विचार उठाओ। उस एक विचार को अपना जीवन बनाओ; उसका सपना देखो; उसके बारे में सोचो; उस विचार पर जियो। मस्तिष्क, शरीर, मांसपेशियों, नसों और शरीर के हर हिस्से को उस विचार से भर दो, और बाकी हर विचार को अकेला छोड़ दो। यही सफलता का रास्ता है, और इसी तरह महान आध्यात्मिक दिग्गज पैदा होते हैं।"

विवेकानंद के अनुसार सच्चा मनुष्य कौन था?

स्वामी विवेकानंद के अनुसार कोई भी व्यक्ति जो जीवन में सफल होने का सपना देखता है उसके भीतर सबसे पहला गुण आत्मविश्वास का जरूर मौजूद होना चाहिए। विवेकानंद का कहना था कि जिस व्यक्ति में आत्म विश्वास नहीं होता वो बलवान होकर भी कमजोर ही बना रहता है। जबकि आत्म विश्वास से भरा हुआ व्यक्ति कमजोर होकर भी बलवान ही रहता है।

स्वामी विवेकानंद पढ़ाई कैसे करते थे?

ऐसा कहा जाता है कि  विवेकानंद ध्यान साधना करते थे जिसके कारण उनकी एकाग्रता बहुत तीव्र थी। वह बहुत बुद्धिमान भी थे। इसी कारण वे एक ही दिन में 10-10 किताबें पढ़ लेते थे और उन्हें किस लाइन में क्या लिखा है और किस पृष्ठ पर क्या लिखा है यह सभी याद रहता था।

स्वामी विवेकानंद के अनुसार पढ़ने के लिए क्या जरूरी है?

पढ़ने के लिए जरूरी है एकाग्रता, एकाग्रता के लिए जरूरी है ध्यान। ध्यान से ही हम इन्द्रियों पर संयम रखकर एकाग्रता प्राप्त कर सकते हैं।

विवेकानंद के महत्वपूर्ण कोटेशन 

  1. एक विचार लो, उस एक विचार को अपना जीवन बना लो, उसके बारे में सोचो, उसके सपने देखो, अपने मस्तिष्क, मांसपेशियों, नसों, अपने शरीर के हर हिस्से को उस विचार से भर दो, और हर दूसरे विचार को अकेला छोड़ दो। यही सफलता का मार्ग है।
  2. अपने आप पर विश्वास करें और दुनिया आपके चरणों में होगी।
  3. किसी दिन, जब आपके सामने कोई समस्या न आए  तो आप सुनिश्चित हो सकते हैं कि आप गलत रास्ते पर यात्रा कर रहे हैं।
  4. एक समय में एक काम करो, और ऐसा करते समय अपनी पूरी आत्मा को उसमें डाल दो, बाकी सब कुछ छोड़कर।
  5. उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए।
  6. दिन में एक बार अपने आप से बात करें, नहीं तो आप इस दुनिया के एक बेहतरीन इंसान से मिलने से चूक सकते हैं।
  7. एक आदमी एक रुपये के बिना गरीब नहीं है, लेकिन एक आदमी सपने और महत्वाकांक्षा के बिना वास्तव में गरीब है।
  8. मस्तिष्क और मांसपेशियों को एक साथ विकसित होना चाहिए। लोहे की नसें एक बुद्धिमान मस्तिष्क के साथ - और पूरी दुनिया आपके चरणों में है।
  9. हमेशा खुद को खुश दिखाने की कोशिश करें। शुरू में यह आपका रूप बन जाता है, धीरे-धीरे यह आपकी आदत बन जाता है और अंत में यह आपका व्यक्तित्व बन जाता है.
  10. "ब्रह्मांड की सभी शक्तियां हमारे अंदर हैं। बस हमें उनका उपयोग करना सीखना है।"
  11. "स्वयं को कमजोर समझना सबसे बड़ा पाप है।"
  12. "ज्ञान और कर्म दोनों के बिना जीवन अधूरा है।"
  13. "सपने देखना और उन सपनों को पूरा करने के लिए प्रयास करना ही जीवन का उद्देश्य है।"

जनसंघ से भारतीय जनता पार्टी तक का सफर: Facts in Brief

BJP Facts in Brief

जनसंघ से BJP तक का सफर संघर्ष, वैचारिक दृढ़ता और संगठनात्मक मजबूती का उदाहरण है। यह यात्रा भारतीय राजनीति के सबसे महत्वपूर्ण अध्यायों में से एक मानी जाती है। भारतीय जनता पार्टी वर्तमान में भारतीय संसद और अन्यः राज्य विधानसभाओं में प्रतिनिधित्व के आधार पर भारत की सबसे बड़ी पार्टी है. वर्तमान में देश के अधिकांश राज्यों में  भाजपा या उसके गठबंधन की सरकार है. वहीँ पार्टी में बनाये जाने वाले प्राथमिक सदस्यता के आधार पर देखें तो भारतीय जनता पार्टी  दुनिया का सबसे बड़ी पार्टी मानी जाती है.
 जनसंघ से लेकर भारतीय जनता पार्टी तक का सफर आसान नहीं रहा. डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बाद अटल बिहारी वाजपेयी और लाल कृष्ण आडवाणी के नेतृत्व में पार्टी ने काफी संघर्ष किया लेकिन आगे बढ़ने का सफर तमाम कठिनाइयों के बीच में जारी रहा. 

पार्टी ने अपने बेदाग़ नेताओं की छवि और कुशल नेतृत्व के बदौलत आज प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बुलंदी को छू चुकी है, संसद में कभी मात्र 2 सांसदों के पार्टी रही भाजपा आज देश में न केवल गठबंधन सरकारों की युग को ख़त्म कर दिया बल्कि अपनी बदौलत सरकार बनाने के लिए पर्याप्त संख्या भी जुटाने में कामयाब रही.

  • स्थापना वर्ष: 1951
  • संस्थापक: डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी
  • BJP का वैचारिक स्रोत किस संगठन से जुड़ा है-राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS)

  • 1951 डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की अध्यक्षता में अखिल भारतीय जनसंघ की स्थापना 21 अक्टूबर 1951 को  दिल्ली में हुआ.
  • 1952 में संपन्न आम चुनाव में भारतीय जनसंघ ने तीन सीटें जीतीं।
  • 1953 में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की कश्मीर की जेल में मौत हो गई. 
  • 1957 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनसंघ ने 4 सीटें जीती. 
  • 1962 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनसंघ ने 14 सीटें जीतीं। 
  • 1967 लोक सभा चुनाव में जनसंघ को 35 सीटें मिलीं।
  • 1971 के लोकसभा चुनाव भारतीय जनसंघ ने 22 सीटे  जीती..
  • 6 अप्रैल 1980 को भारतीय जनता पार्टी का गठन 
  • 1984 के लोक सभा चुनाव् में जो इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद हुई थी कांग्रेस की प्रचंड लहर थी और भारतीय जनता पार्टी ने 2 सीटें जीती. 
  • 1986-लालकृष्ण आडवाणी पार्टी के अध्यक्ष बने
  • 1989 के लोक सभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने 85 सीटें जीती. 
  • 1991 के लोक सभा चुनाव में पार्टी ने 120 सीटें जीती. मुरली मनोहर जोशी पार्टी के अध्यक्ष बने. 
  • 1996 लोक सभा चुनाव में भाजपा को 161 सीटें मिलीं
  • 1999 में भाजपा ने 183 सीटें जीती. 
  • 2004 में भाजपा ने 138 सीटें जीती. 
  • 2009 में भाजपा को 116 सीटें मिली. 
  • 2014 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्वे में भाजपा ने ऐतिहासिक विजय प्राप्त करते हुए  282 सीटें जीती. 
  • 2014 के  राजग जो भाजपा का व्यापक गठबंधन है  उसने कुल 336  सीटों पर जीत प्राप्त किया. 
  • उल्लेखनीय है कि 1984 के बाद ऐसा पहली बार हुआ जब भारतीय संसद में किसी एक दल को पूर्ण बहुमत मिला था. 
  • 2019 में भाजपा ने 303 सीटें जीती. 
  • भारतीय जनता पार्टी के मुखपत्र का नाम  'कमल सन्देश' है.

संथाली भाषा में भारत का संविधान जारी: जानें ओल चिकी लिपि के बारे में जिसकी हम इस वर्ष शताब्दी मना रहे हैं




सभी संथाली भाषा बोलने वाले लोगों के लिए आज का दिन काफी गर्व और खुशी की बात है कि अब भारत का संविधान अब संथाली भाषा में, ओल चिकी लिपि में उपलब्ध है। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने 25 दिसंबर, 2025 को राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में संथाली भाषा में भारत का संविधान जारी किया। 

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि यह सभी संथाली लोगों के लिए गर्व और खुशी की बात है कि भारत का संविधान अब संथाली भाषा में, ओल चिकी लिपि में उपलब्ध है। इससे वे संविधान को अपनी भाषा में पढ़ और समझ सकेंगे।संथाली भाषा  भारत में जनजातीय भाषा बोलने वाला सबसे बड़ा जनजातीय समूह है।

इस वर्ष हम ओल चिकी लिपि की शताब्दी मना रहे हैं। 

ओल चिकी लिपि: जानें खास बातें 

  • पंडित रघुनाथ मुर्मू ने सनतली भाषा के लिए एक लिपि विकसित की, जिसे ' ओल चिकी लिपि ' के नाम से जाना जाता है। ऐसा मान्यता है कि इस लिपि को  1935-36 में विकसित किया गया था। 
  • ओल चिकी लिपि वर्णमाला में छह स्वर और चौबीस व्यंजन हैं, जिनमें प्रत्येक स्वर के बाद चार व्यंजन आते हैं.
  • लेकिन एक व्यंजन केवल एक स्वर के बाद ही आता है।

संथाली भाषा: Facts in Brief  

  • संथाली भाषा, जिसे 2003 के 92वें संविधान संशोधन अधिनियम के माध्यम से संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया था.
  •  भारत की सबसे प्राचीन जीवित भाषाओं में से एक है।
  •  यह झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और बिहार में बड़ी संख्या में आदिवासी लोगों द्वारा बोली जाती है।

रेलवे का बड़ा फैसला: ट्रेनों के किराया में हुआ परिवर्तन, देखें कहाँ और कितनी हुई बढ़ोतरी



नए साल के अवसर पर रेलवे ने यात्रियों के लिए ट्रेनों के किराए में बदलाव किया है.संशोधित किराया केवल 26 दिसंबर 2025 से बुक किए गए टिकटों पर लागू होगा, हालाँकि पहले से बुक टिकटों पर भविष्य की यात्रा के लिए भी कोई प्रभाव नहीं लागु होगा. हालाँकि छोटे दुरी की यात्रा करने वालों के लिए लिए कोई नहीं लेकिन लंबी दूरी के यात्रियों का किराया थोड़ा महंगा हो गया है. 

हालाँकि परिवर्तित किराया किराया संरचना के अनुसार  उपनगरीय सेवाओं और सीजन टिकटों के किराए में कोई बदलाव नहीं किया गया है. 

रेलवे के अनुसार आरक्षण शुल्क, सुपरफास्ट अधिभार या अन्य सहायक शुल्कों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, ये सभी मौजूदा नियमों के अनुसार ही लागू रहेंगे। 

साधारण नॉन-एसी (गैर-उपनगरीय) सेवाओं के लिए द्वितीय श्रेणी साधारण, स्लीपर श्रेणी साधारण और प्रथम श्रेणी साधारण में किराए को श्रेणीबद्ध तरीके से युक्तिसंगत बनाया गया है।

साधारण द्वितीय श्रेणी में 215 किमी तक की यात्राओं के लिए किराए में कोई वृद्धि नहीं है, जिससे कम दूरी और दैनिक यात्रियों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। 

216 किमी से 750 किमी तक की दूरी के लिए किराया 5 रुपये बढ़ाया गया है।

 इससे अधिक दूरी की यात्राओं के लिए वृद्धि चरणबद्ध तरीके से लागू की गई है- 751 किमी से 1250 किमी के बीच की दूरी के लिए 10 रुपये, 1251 किमी से 1750 किमी के बीच की दूरी के लिए 15 रुपये और 1751 किमी से 2250 किमी के बीच की दूरी के लिए 20 रुपये।

स्लीपर श्रेणी साधारण और प्रथम श्रेणी साधारण में गैर-उपनगरीय यात्राओं के लिए किराए में प्रति किलोमीटर 1 पैसे की दर से एकसमान संशोधन किया गया है, जिससे किराए में क्रमिक और सीमित वृद्धि सुनिश्चित हुई है।

मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों में नॉन-एसी और एसी दोनों श्रेणियों में किराए में 2 पैसे प्रति किलोमीटर की बढ़ोतरी की गई है। 

इसमें स्लीपर क्लास, फर्स्ट क्लास, एसी चेयर कार, एसी थ्री-टियर, एसी टू-टियर और एसी फर्स्ट क्लास शामिल हैं। 

 नॉन-एसी मेल/एक्सप्रेस कोच में 500 किलोमीटर की यात्रा के लिए यात्रियों को लगभग 10 रुपये अतिरिक्त देने होंगे।

आर्डिनरी (गैर-AC) ट्रेनों में बदलाव किया गया है 

  • द्वितीय श्रेणी आर्डिनरी 
  • -215 किमी तक: कोई बढ़ोतरी नहीं
  • -216–750 किमी: ₹5 बढ़ोतरी
  • -751–1250 किमी: ₹10 बढ़ोतरी
  • -1251–1750 किमी: ₹15 बढ़ोतरी
  • -1751–2250 किमी: ₹20 बढ़ोतरी

मेल/एक्सप्रेस (नॉन-एसी)

  • सेकंड क्लास (मेल/एक्सप्रेस) 02 पैसे
  •  स्लीपर क्लास (मेल/एक्सप्रेस) 02 पैसे
  • फर्स्ट क्लास (मेल/एक्सप्रेस) 02 पैसे

AC क्लास

  • AC चेयर कार 02 पैसे
  • AC-3 टियर/3E 02 पैसे
  • AC-2 टियर 02 पैसे
  • AC फर्स्ट क्लास/EC/EA 02 पैसे

इन गाड़ियों के भाड़े में होगी परिवर्तन?

तेजस राजधानी, राजधानी, शताब्दी, दुरंतो, वंदे भारत, हमसफर, अमृत भारत, तेजस, महामाना, गतिमान, अंत्योदय, गरीब रथ, जन शताब्दी, युवा एक्सप्रेस, नमो भारत रैपिड रेल और साधारण गैर-उपनगरीय सेवाओं (जहां लागू हो, एसी एमईएमयू/डीईएमयू को छोड़कर) सहित प्रमुख रेल सेवाओं के मौजूदा मूल किरायों को अनुमोदित श्रेणीवार मूल किराया वृद्धि के अनुरूप संशोधित किया गया है। यह संशोधन सभी श्रेणियों में समान रूप से और एक क्रमबद्ध तरीके से किया गया है।

स्लीपर क्लास 

-1 पैसा प्रति किमी की बढ़ोतरी

फर्स्ट क्लास (आर्डिनरी)

-1 पैसा प्रति किमी की बढ़ोतरी

जीएसटी की प्रयोज्यता अपरिवर्तित रहेगी और किराए को प्रचलित मानदंडों के अनुसार किराय का पूर्णांकन जारी रहेगा।

यात्रियों को इन टिकटों पर नहीं लगेंगे चार्ज 

पहले से जारी किए गए टिकटों के मामले में, संशोधित किराया ऐसे टिकटों पर लागू नहीं होगा। इसलिए, 26.12.2025 को या उसके बाद की यात्रा के लिए ऐसे टिकटों पर किराए का अंतर आरक्षण चार्ट में नहीं दिखाया जाएगा। हालांकि, 26.12.2025 को या उसके बाद ट्रेनों/स्टेशनों पर TTE/टिकट चेकिंग स्टाफ द्वारा बनाए गए किसी भी नए टिकट पर संशोधित दर से शुल्क लिया जाएगा।

संशोधित किराया केवल 26 दिसंबर 2025 को या उसके बाद बुक किए गए टिकटों पर लागू होगा। इस तिथि से पहले बुक किए गए टिकटों पर, चाहे यात्रा प्रभावी तिथि के बाद ही क्यों न हो, कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा।

पंबन ब्रिज: जानें भारत के पहले वर्टिकल लिफ्ट सी ब्रिज के बारे में, खूबियां और निर्माण की चुनौतियों के बारे में


नया पंबन ब्रिज भारत की इंजीनियरिंग क्षमता और दूरदर्शी बुनियादी ढांचे के विकास का एक प्रमाण है। इतिहास में निहित, इसकी कहानी 1914 की याद दिलाती है जब ब्रिटिश इंजीनियरों ने मूल पंबन ब्रिज का निर्माण किया था, जो रामेश्वरम द्वीप को भारत की मुख्य भूमि से जोड़ने के लिए शेरजर रोलिंग लिफ्ट के साथ एक कैंटिलीवर (धातु या लकड़ी का एक लंबा टुकड़ा जो पुल के अंतिम छोर को सहारा देने के लिए दीवार से फैला होता है) संरचना है। 

नया पंबन ब्रिज भारत की परंपरा और नवाचार को एक साथ लाने की क्षमता का प्रतीक है। पर्यावरण, रसद और तकनीकी चुनौतियों को पार करते हुए, यह अत्याधुनिक वर्टिकल लिफ्ट रेलवे ब्रिज देश की बढ़ती बुनियादी ढांचा क्षमताओं का एक गौरवान्वित करने वाला प्रमाण है। जब ट्रेनें और जहाज बिना किसी परेशानी के ऊपर से गुजरने के लिए तैयार होते हैं, तो यह पुल हमें याद दिलाता है कि जब लक्ष्य और दृढ़ संकल्प एक साथ मिल जाते हैं, तो क्या हासिल किया जा सकता है।

एक सदी से भी ज्यादा समय तक यह तीर्थयात्रियों, पर्यटकों और व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण जीवनरेखा के रूप में काम करता रहा है। हालांकि, मुश्किल समुद्री वातावरण और बढ़ती परिवहन मांगों के कारण आधुनिक समाधान की ज़रूरत थी। 2019 में, भारत सरकार ने तकनीकी रूप से उन्नत, भविष्य के लिए तैयार पुल के निर्माण को मंजूरी दी।

इसके परिणामस्वरूप एक चमत्कार के रूप में, तमिलनाडु में पाक जलडमरूमध्य पर फैला 2.07 किलोमीटर लंबा भारत का पहला वर्टिकल लिफ्ट रेलवे सी ब्रिज सामने आया है। विरासत को नवाचार के साथ मिलाते हुए, नया पंबन ब्रिज न केवल क्षेत्र के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व को संरक्षित करता है, बल्कि डिजाइन, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय विकास में एक महत्वपूर्ण छलांग भी दर्शाता है।

नया पंबन ब्रिज रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) द्वारा बनाया गया था, जो रेल मंत्रालय के तहत एक नवरत्न पीएसयू है।

निर्माण में चुनौतियां: बाधाओं पर काबू पाना

नए पंबन ब्रिज के निर्माण में पर्यावरणीय बाधाओं से लेकर रसद संबंधी जटिलताओं तक कई चुनौतियां सामने आईं। पाक जलडमरूमध्य के अशांत जल, तेज हवाएं और अप्रत्याशित मौसम पैटर्न ने निर्माण प्रक्रिया में कठिनाइयां पैदा कीं। इसके अतिरिक्त, चक्रवातों और भूकंपीय गतिविधि के प्रति क्षेत्र की संवेदनशीलता ने सावधानीपूर्वक योजना बनाने और मजबूत डिजाइन की आवश्यकता जताई।

नए पंबन ब्रिज की मुख्य विशेषताएं क्या है? 

  • 72.5 मीटर लंबे पुल को 17 मीटर तक ऊपर उठाया जा सकता है, जिससे बड़े जहाज़ इसके नीचे से गुजर सकते हैं।
  • नया पुल मौजूदा पुल से 3 मीटर ऊंचा है, जिससे समुद्री संपर्क में सुधार हुआ है।
  • इस सबस्ट्रक्चर को दो ट्रैक के लिए डिजाइन किया गया है, जिसमें सुपरस्ट्रक्चर में शुरू में एक ही लाइन होगी।
  • आधुनिक सामग्रियों और इंजीनियरिंग तकनीकों के इस्तेमाल से पुल की लंबी उम्र सुनिश्चित होगी।
  • पुल का निर्माण स्टेनलेस स्टील की ताकत, उच्च श्रेणी के सुरक्षात्मक पेंट और पूरी तरह से वेल्डेड जोड़ों के साथ किया गया है।
  • विशेष पॉलीसिलोक्सेन कोटिंग इसे जंग से बचाती है, जिससे मुश्किल समुद्री वातावरण में भी इसकी लंबी उम्र सुनिश्चित होती है।

नया पंबन ब्रिज सुनिश्चित करेगा:

बेहतर परिवहन: भारी रेल यातायात और तेज ट्रेनों को समायोजित करना।

समुद्री एकीकरण: बड़े जहाजों को बिना किसी व्यवधान के गुजरने की अनुमति देना।

स्थायित्व: न्यूनतम रखरखाव के साथ 100 से अधिक वर्षों का जीवनकाल सुनिश्चित करना।

भारत वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रहा है

जहां नया पंबन ब्रिज भारत का पहला वर्टिकल लिफ्ट सी ब्रिज है, वहीं, यह अपनी तकनीकी प्रगति और अद्वितीय डिजाइन के लिए जाने जाने वाले अन्य विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त पुलों के जैसा नजर आता है। इनमें संयुक्त राज्य अमेरिका में गोल्डन गेट ब्रिज, लंदन में टॉवर ब्रिज और डेनमार्क-स्वीडन में ओरेसंड ब्रिज शामिल हैं। इनमें से प्रत्येक प्रतिष्ठित संरचना, भले ही डिजाइन और कार्यक्षमता में भिन्न है, लेकिन इंजीनियरिंग उत्कृष्टता के शिखर का प्रतिनिधित्व करती है। अब, नया पंबन ब्रिज भारत की तटीय और भूकंपीय स्थितियों द्वारा उत्पन्न चुनौतियों के साथ अत्याधुनिक तकनीक को जोड़ते हुए, गर्व से खड़ा है।

(Source PIB)

GK Quiz: पृथ्वी से चंद्रमा के हमेशा एक ही भाग के दिखाई देने का कारण क्या है?


पृथ्वी  और चन्द्रमा हमारे सौर्यमंडल के सबसे यूनिक और  कुतूहल  ग्रह और उपग्रह है जहाँ  जीवन है और चन्द्रमा पृथ्वी के एकमात्र उपग्रह है. हम बचपन  से  पृथ्वी और चन्द्रमा के बारे में बहुत कुछ पढ़ते आये हैं लेकिन हम आपको पृथ्वी और चन्द्रमा से जुड़े सामान्य ज्ञान और क्विज के लिए कुछ खास सवाल जवाब लाएं हैं. 

प्रश्न 1: पृथ्वी–चंद्रमा प्रणाली का द्रव्यमान केंद्र (Barycenter) कहाँ स्थित होता है?

उत्तर: पृथ्वी के अंदर, उसकी सतह से लगभग 1700 किमी नीचे।

प्रश्न 2 : पृथ्वी के ध्रुवीय क्षेत्रों में चंद्रमा का गुरुत्वीय प्रभाव अपेक्षाकृत कम क्यों होता है?

उत्तर: चंद्रमा का गुरुत्वीय प्रभाव भूमध्यरेखीय उभार (Equatorial Bulge) पर अधिक केंद्रित होता है।

प्रश्न 3 : चंद्रमा की कक्षा का पृथ्वी की कक्षा (Ecliptic) से झुकाव कितना है?

उत्तर: लगभग 5° (5.145°)।

प्रश्न 4  : पृथ्वी को ‘नीला ग्रह’ क्यों कहा जाता है?

उत्तर: क्योंकि पृथ्वी का लगभग 71% भाग जल से ढका है।

प्रश्न 5  : पृथ्वी से चंद्रमा के हमेशा एक ही भाग के दिखाई देने का कारण क्या है?

उत्तर: चंद्रमा का घूर्णन काल और परिक्रमण काल समान होना (Synchronous Rotation)।

प्रश्न 6 : चंद्रमा पर पाए जाने वाले गहरे मैदानों (Maria) का निर्माण किससे हुआ है?

उत्तर: प्राचीन ज्वालामुखीय लावा प्रवाह से।

प्रश्न 7  : चंद्रमा पर जाने वाला पहला मानव मिशन कौन-सा था?

उत्तर: अपोलो-11 (1969)।

प्रश्न 8  : पृथ्वी का कौन-सा स्तर चंद्रमा के निर्माण सिद्धांत से जुड़ा माना जाता है?

उत्तर: मेंटल (Giant Impact Theory के अनुसार)।

प्रश्न 9  : चंद्रमा पर गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी की तुलना में कितना होता है?

उत्तर: लगभग 1/6 भाग।

प्रश्न 10  : पृथ्वी पर दिन-रात की अवधि में दीर्घकालिक परिवर्तन का मुख्य कारण क्या है?

उत्तर: चंद्रमा के ज्वारीय प्रभाव से पृथ्वी की घूर्णन गति का धीमा होना।



एनसीवीईटी-फ्लिपकार्ट समझौता: गुणवत्तापूर्ण नौकरियों और दीर्घकालिक कैरियर का मार्ग होगी प्रशस्त


राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीवीईटी) ने भारत के व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास तंत्र को  मजबूत करने के लिए फ्लिपकार्ट के साथ एक समझौता किया है। इस सहयोग का उद्देश्य कौशल भारत मिशन के अनुरूप, भारत के तेजी से बढ़ते ई-कॉमर्स और लॉजिस्टिक्स कार्यबल के लिए राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त, उद्योग-आधारित कौशल विकास कार्यक्रम तैयार करना है।

एनसीवीईटी भारत के व्यावसायिक शिक्षा, प्रशिक्षण और कौशल विकास तंत्र में गुणवत्ता को विनियमित करने और सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय स्तर पर मानक स्थापित करना है जो कार्यबल की रोजगार क्षमता को मजबूत करे और सतत आर्थिक विकास में योगदान दे।

प्रशिक्षार्थियों के लिए यह पहल मानकीकृत कार्यक्रम संचालन, कठोर मूल्यांकन प्रक्रियाएं और राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत बाजार मान्यता प्राप्त प्रतिष्ठित प्रमाणपत्र प्रदान करेगी। इन प्रमाणपत्रों को डिजिलॉकर पर सुरक्षित रूप से संग्रहीत किया जा सकता है और अकादमिक क्रेडिट को अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (एबीसी) के माध्यम से सत्यापित किया जा सकता है। जिससे करियर में प्रगति और दीर्घकालिक रोजगार क्षमता को और मजबूती मिलेगी।

इस सहयोग के अंतर्गत, एनसीवीईटी  फ्लिपकार्ट को प्रशिक्षण, मूल्यांकन और प्रमाणन के लिए एक मान्यता  प्रदान करने वाली संस्था (द्वि) बनने की दिशा में क्षमता विकसित करने में मदद करेगा। इससे उद्योग द्वारा तैयार किए गए कौशल विकास कार्यक्रमों को औपचारिक रूप से मानकीकृत, पोर्टेबल और राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त करने में सहायता मिलेगी।

यह उपलब्धि फ्लिपकार्ट को राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क (एनएसक्यूएफ) के अनुरूप प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार करने और प्रदान करने में सक्षम बनाएगी, जिससे गुणवत्ता और उद्योग के लिए प्रासंगिकता में निरंतरता सुनिश्चित होगी।

 रोजगार क्षमता को बढ़ाएंगे यह साझेदारी

 यह साझेदारी फ्लिपकार्ट को मानकीकृत, उच्च-गुणवत्ता वाले प्रशिक्षण और प्रमाणन कार्यक्रम विकसित करने में भी मदद करेगी जो विशेष रूप से वंचित पृष्ठभूमि के व्यक्तियों के लिए रोजगार क्षमता को बढ़ाएंगे।

एमएसडीई की सचिव और एनसीवीईटी की अध्यक्ष सुश्री देबाश्री मुखर्जी ने बताया कि  “फ्लिपकार्ट के साथ एनसीवीईटी की साझेदारी भारत के कौशल विकास ढांचे को उद्योग-अनुकूल, विश्वसनीय और परिणाम  देने वाले  हमारे निरंतर प्रयासों को सुदृढ़ करती है। प्रशिक्षण और प्रमाणन को वास्तविक परिचालन आवश्यकताओं के साथ जोड़कर हम गुणवत्तापूर्ण नौकरियों, गतिशीलता और दीर्घकालिक कैरियर विकास के लिए मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं।”

गुणवत्तापूर्ण नौकरियों और दीर्घकालिक कैरियर का मार्ग होगी प्रशस्त 

फ्लिपकार्ट ग्रुप के मुख्य कॉर्पोरेट मामलों के अधिकारी श्री रजनीश कुमार ने कहा कि “फ्लिपकार्ट में, कौशल विकास कोई गौण प्रयास नहीं है, बल्कि यह भारत के डिजिटल वाणिज्य बुनियादी ढांचे के निर्माण में हमारा मूल योगदान है। देश के सबसे बड़े नियोक्ताओं और ई-कॉमर्स और लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम में सहायक संस्थाओं में से एक होने के नाते  हम इसे अपना दायित्व मानते हैं कि हम मानकीकृत, राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त कौशल विकास के ऐसे मार्ग तैयार करने में मदद करें जो उद्योग-आधारित और परिणाम-उन्मुख हों।”

रोजगार के लिए तैयार प्रतिभाओं का एक बड़ा समूह तैयार करना

एनसीवीईटी के साथ यह सहयोग हमें कारखाने के वास्तविक परिचालन संबंधी जानकारियों को औपचारिक प्रशिक्षण, मूल्यांकन और प्रमाणन ढाँचों में शामिल करने की अनुमति देता है। हमारा उद्देश्य रोजगार के लिए तैयार प्रतिभाओं का एक बड़ा समूह तैयार करना है जो भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था के साथ विकसित हो सके, साथ ही स्किल इंडिया मिशन को सार्थक और दीर्घकालिक तरीके से समर्थन दे सके।

गुरु नानक जयंती: जानें क्यों मनाते हैं प्रकाश पर्व , गुरु नानक देव जी के अनमोल विचार


गुरु नानक देव जी: सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी का जन्म पारंपरिक रूप से कार्तिक पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है, जिसे गुरु नानक जयंती के नाम से जाना जाता है। यह सिख धर्म के संस्थापक और पहले गुरु, गुरु नानक देव जी के जन्मदिन का उत्सव है। 

क्या होता है गुरुपर्व

गुरुपर्व (पंजाबी: ਗੁਰਪੁਰਬ (गुरुमुखी)), जिसे वैकल्पिक रूप से गुरुपर्व या गुरुपरुब के रूप में जाना जाता है, सिख परंपरा में एक गुरु के जन्म की सालगिरह का उत्सव है जिसे एक त्योहार के आयोजन द्वारा चिह्नित किया जाता है।

गुरु नानक देव जी का जन्म 15 अप्रैल, 1469 को पंजाब के तलवंडी नामक गांव में हुआ था। उन्होंने अपने जीवन में सभी धर्मों के लोगों को एकता और प्रेम का संदेश दिया। उन्होंने सामाजिक सुधारों के लिए भी काम किया और जाति व्यवस्था को समाप्त करने का प्रयास किया।

गुरु नानक का जन्मदिन कैसे मनाते हैं? 

गुरु नानक देव जी की जयंती को सिख धर्म में एक महत्वपूर्ण त्योहार माना जाता है। इस दिन सिख लोग गुरुद्वारों में जाकर गुरुग्रंथ साहिब का पाठ करते हैं। इसके अलावा, भजन-कीर्तन, लंगर और प्रभात फेरी जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। 

सिख लोग इस दिन का वर्षों से इन्तजार करते हैं और इस दिन को काफी उत्साह के साथ मनाते हैं. इस दिन को लोग हर साल लोग सड़कों पर आतिशबाजी और जुलूस के साथ गुरु नानक का जन्म मनाते हैं। सिख मंदिरों - गुरुद्वारों में - सिखों की पवित्र पुस्तक, गुरु ग्रंथ साहिब, को पूरा पढ़ा जाता है। मोमबत्तियाँ घरों और सार्वजनिक स्थानों जैसे कार्यालयों और दुकानों में जलाई जाती हैं। 

 गुरु नानक देव जी के अनमोल विचार

1 अहंकार, ईर्ष्या, लालच, लोभ मनुष्य को मनुष्य नहीं रहने देते हैं। ऐसे में इनसे दूर रहना चाहिए।"

2. हमें अपनी कमाई का दसवां हिस्सा परोपकार के लिए और अपने समय का दसवां हिस्सा प्रभु सिमरन या ईश्वर की भक्ति में लगाना चाहिए। 

3.ईश्वर एक है और हर जगह मौजूद है। सदैव एक ही ईश्वर की उपासना करो।  ईश्वर सब जगह उपस्थित हैं। ईश्वर की भक्ति करने वालों को किसी बात का भय नहीं रहता है।

4. लोगों को प्रेम, एकता, समानता, भाईचारा और आध्यात्मिक ज्योति का संदेश देना चाहिए।

5. सत्य को जानना हर एक चीज से बड़ा है और उससे भी बड़ा है सच्चाई से जीना।