चार धाम यात्रा: क्या हैं इसके पीछे के रहस्य और क्यों है यह जीवन की सबसे महत्वपूर्ण यात्रा?


चार दिशाओं में हैं चार धाम: उत्तर में बद्रीनाथ, पूर्व में जगन्नाथ पुरी, दक्षिण में रामेश्वरम और पश्चिम में  द्वारका- पाएं विस्तृत जानकारी

भारत के चार धाम चार प्रमुख हिंदू तीर्थस्थल हैं जो देश के चार दिशाओं में स्थित हैं। ये चार धाम जिन्हे प्रमुख तौर पर जाना जाता है-बद्रीनाथ (उत्तर दिशा), द्वारका (पश्चिम दिशा), पुरी (पूर्व दिशा) तथा रामेश्वरम (दक्षिण दिशा) का हिंदू धर्म में विशेष महत्त्व है और इन्हें जीवन में एक बार अवश्य दर्शन करने योग्य माना जाता है। ये चार धाम तीर्थस्थल न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि इनके ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्त्व भी अत्यधिक हैं। यहां की यात्रा आत्मिक शांति और आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करती है। आइए, इन चार धामों के बारे में विस्तार से जानते हैं:

 हिन्दू धर्मग्रंथों के अनुसार बद्रीनाथ (उत्तराखंड),द्वारका (गुजरात), जगन्नाथ पुरी (उड़ीसा) और रामेश्वरम (तमिलनाडू) चार धाम है जो विभिन्न देवी-देवताओं और धार्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध हैं.आश्चर्यजनक रूप से ये चरों धार भारत के चारों दिशाओं में स्थित है. आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा परिभाषित ये चार वैष्णव तीर्थ हैं जहाँ हर हिंदू को अपने जीवन काल मे अवश्य जाना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि इन तीर्थ स्थलों पर जाने से हिंदुओं को मोक्ष प्राप्त करने में मदद मिलती है । इसमें उत्तर दिशा मे बद्रीनाथ, पश्चिम की ओर द्वारका, पूर्व दिशा मे जगन्नाथ पुरी और दक्षिण मे रामेश्वरम धाम है। आइये जानते हैं इन प्रमुख चार धामों के बारे में विस्तृत जानकारी. 

भारत के चार धाम और सम्बंधित राज्य निम्न हैं. 


बद्रीनाथ (Badrinath)

यह धाम उत्तराखंड राज्य के चमोली जिले में स्थित एक प्रसिद्ध हिंदू तीर्थस्थल है  यहां बद्रीनाथ मंदिर है, जिसमें विष्णु के बद्रीनाथ रूप की मूर्ति प्रतिष्ठित है। यह मंदिर चार धामों में से एक है और चार धाम यात्रा का पूर्वी धाम है। बद्रीनाथ भारत के उत्तराखंड राज्य में स्थित एक प्रसिद्ध हिंदू तीर्थस्थल है. यह अलकनंदा नदी के तट पर स्थित है और चार धाम यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है.



बद्रीनाथ मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है और यह भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है. मंदिर के गर्भगृह में भगवान विष्णु की एक चरणपादुका (पैर की छाप) स्थापित है. बद्रीनाथ मंदिर को 8वीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य ने बनवाया था. मंदिर परिसर में कई अन्य मंदिर और धार्मिक स्थल भी हैं, जिनमें से कुछ हैं:

तप्त कुंड: यह एक गर्म पानी का कुंड है, जिसका पानी पवित्र माना जाता है.

नारद कुंड: यह एक पवित्र कुंड है, जिसका पानी भगवान नारद को समर्पित है.

ब्रह्म कुंड: यह एक पवित्र कुंड है, जिसका पानी भगवान ब्रह्मा को समर्पित है.

गरुड़ चट्टान: यह एक चट्टान है, जिस पर भगवान गरुड़ का पदचिह्न है.

वेद व्यास गुफा: यह एक गुफा है, जहां वेद व्यास ने महाभारत की रचना की थी.

बद्रीनाथ एक अत्यंत लोकप्रिय तीर्थस्थल है और हर साल लाखों श्रद्धालु यहां आते हैं. मंदिर परिसर को चारों ओर से हिमालय की बर्फ से ढकी चोटियों से घेरा हुआ है, जो इसकी सुंदरता को और बढ़ा देता है. बद्रीनाथ एक शांतिपूर्ण और आध्यात्मिक स्थान है, जहां लोग आकर आराम और शांति पा सकते हैं.

जगन्नाथ पुरी (Jagannath Puri): 

जगन्नाथ पुरी भारत के ओडिशा राज्य में स्थित एक प्रसिद्ध हिंदू तीर्थस्थल है. यह भगवान जगन्नाथ को समर्पित एक विशाल मंदिर के लिए जाना जाता है. मंदिर को 12वीं शताब्दी में ओडिशा के राजा अनंतवर्मन ने बनवाया था. मंदिर का निर्माण लाल और सफेद बलुआ पत्थर से किया गया है और यह 135 फीट ऊंचा है. मंदिर के गर्भगृह में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तियां स्थापित हैं. भगवान जगन्नाथ को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है.

जगन्नाथ पुरी एक अत्यंत लोकप्रिय तीर्थस्थल है और हर साल लाखों श्रद्धालु यहां आते हैं. मंदिर परिसर को चारों ओर से दीवारों से घेरा हुआ है और केवल हिंदू ही मंदिर के अंदर प्रवेश कर सकते हैं. मंदिर के परिसर में एक विशाल रथ यात्रा होती है, जिसमें भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तियों को मंदिर से बाहर निकालकर शहर के चारों ओर घुमाया जाता है. रथ यात्रा एक अत्यंत भव्य और रंगीन उत्सव है, जो लाखों लोगों को आकर्षित करती है. यह धाम ओडिशा राज्य के पुरी जिले में स्थित है। जगन्नाथ पुरी मंदिर में भगवान जगन्नाथ, बालभद्र, और सुभद्रा की मूर्तियां प्रतिष्ठित हैं। यह मंदिर चार धामों में से पश्चिमी धाम है।


रामेश्वरम् (Rameswaram):

 यह धाम तमिलनाडु राज्य के रामेश्वरम जिले में स्थित है। रामेश्वरम में श्री रामेश्वर स्वामी मंदिर है, जिसमें शिव के पृथ्वी तत्व को दर्शाने वाली ज्योतिर्लिंग की पूजा की जाती है। यह मंदिर चार धामों में से दक्षिणी धाम है। 

रामेश्वरम भारत के तमिलनाडु राज्य के रामनाथपुरम जिले में स्थित एक द्वीप शहर है. यह शहर हिंदुओं के चार धामों में से एक है और भगवान शिव को समर्पित रामेश्वरम मंदिर के लिए प्रसिद्ध है. रामेश्वरम मंदिर एक प्राचीन मंदिर है, जिसका निर्माण भगवान राम ने लंका पर विजय प्राप्त करने के बाद किया था. मंदिर में भगवान शिव का एक लिंग स्थापित है, जिसे रामलिंगम कहा जाता है. रामेश्वरम मंदिर भारत के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है और हर साल लाखों श्रद्धालु यहां आते हैं.

रामेश्वरम एक धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल है. यह शहर रामायण के कई घटनाओं से जुड़ा हुआ है. रामेश्वरम में रामेश्वरम द्वीप, रामेश्वरम मंदिर, धनुषकोटि, सीतामीनार और रामेश्वरम रेलवे स्टेशन जैसे कई ऐतिहासिक स्थल हैं. रामेश्वरम एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल भी है और यहां हर साल लाखों पर्यटक आते हैं.

रामेश्वरम एक अत्यंत पवित्र और ऐतिहासिक स्थल है. यह शहर हिंदुओं के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है और यह एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल भी है.

द्वारका (Dwarka):

 यह धाम गुजरात राज्य के द्वारका जिले में स्थित है। द्वारका में द्वारकाधीश मंदिर है, जिसमें श्री कृष्ण की मूर्ति प्रतिष्ठित है। यह मंदिर चार धामों में से एक है और चार धाम यात्रा का पश्चिमी धाम है। 

द्वारका भारत के गुजरात राज्य के देवभूमि द्वारका ज़िले में स्थित एक प्राचीन नगर और नगरपालिका है. द्वारका गोमती नदी और अरब सागर के किनारे ओखामंडल प्रायद्वीप के पश्चिमी तट पर बसा हुआ है. यह हिन्दुओं के चारधाम में से एक है और सप्तपुरी (सबसे पवित्र प्राचीन नगर) में से भी एक है. यह श्रीकृष्ण के प्राचीन राज्य द्वारका का स्थल है और गुजरात की सर्वप्रथम राजधानी माना जाता है.



द्वारका का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा हुआ है. कहा जाता है कि भगवान कृष्ण ने मथुरा से निकाले जाने के बाद द्वारका नगरी बसाई थी. द्वारका नगरी सोने और चांदी से बनी थी और यह बहुत ही समृद्ध थी. द्वारका नगरी में भगवान कृष्ण ने अपने सभी भाइयों और परिवार के साथ रहकर अपना राज्य चलाया था.

द्वारका नगरी का वर्णन महाभारत के आठवें स्कंध में मिलता है. महाभारत में कहा गया है कि द्वारका नगरी एक बहुत ही सुंदर नगरी थी. द्वारका नगरी में कई मंदिर और महल थे. द्वारका नगरी में एक बहुत ही विशाल समुद्र तट भी था. द्वारका नगरी में भगवान कृष्ण ने अपने सभी भाइयों और परिवार के साथ रहकर अपना राज्य चलाया था.



द्वारका नगरी आज भी एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है. द्वारका नगरी में भगवान कृष्ण के कई मंदिर हैं. द्वारका नगरी में एक बहुत ही प्रसिद्ध मंदिर है, जिसका नाम द्वारकाधीश मंदिर है. द्वारकाधीश मंदिर भगवान कृष्ण को समर्पित है. द्वारकाधीश मंदिर भारत के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है.


द्वारका नगरी एक बहुत ही पवित्र नगरी है. द्वारका नगरी में भगवान कृष्ण ने अपना राज्य चलाया था और उन्होंने अपने भक्तों को बहुत सारी शिक्षाएं दी थीं. द्वारका नगरी एक बहुत ही ऐतिहासिक नगरी भी है. द्वारका नगरी में कई ऐतिहासिक स्थल हैं, जो आज भी मौजूद हैं.

द्वारका नगरी एक बहुत ही लोकप्रिय पर्यटन स्थल भी है. द्वारका नगरी में हर साल लाखों पर्यटक आते हैं. द्वारका नगरी में भगवान कृष्ण के मंदिरों के अलावा, कई अन्य दर्शनीय स्थल भी हैं. द्वारका नगरी में एक बहुत ही सुंदर समुद्र तट भी है. द्वारका नगरी एक बहुत ही शांतिपूर्ण और आध्यात्मिक स्थान है.


चार धाम यात्रा का क्रम क्या है?

ऐसा माना जाता है कि यमुनोत्री से यात्रा की शुरुआत करने पर बिना किसी बाधा के आपकी चारधाम यात्रा पूर्ण हो जाती है। इसके साथ ही शास्त्रों में वर्णित है कि, यात्रा की शुरुआत पश्चिम से की जाती है और पूर्व में समाप्त होती है इसलिए भी सबसे पहले यमुनोत्री धाम के दर्शन किये जाते हैं। तीर्थयात्रा यमुनोत्री से शुरू होती है, गंगोत्री की ओर बढ़ती है, केदारनाथ पर जाती है और अंत में बद्रीनाथ में समाप्त होती है। यात्रा सड़क या हवाई मार्ग से पूरी की जा सकती है। कुछ भक्त दो धाम यात्रा या दो तीर्थस्थलों - केदारनाथ और बद्रीनाथ की तीर्थयात्रा भी करते हैं।

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अस्वीकरण: कृपया ध्यान दें कि लेख में उल्लिखित टिप्स/सुझाव केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से हैं ताकि आपको उस मुद्दे के बारे में अपडेट रखा जा सके जो आम लोगों से अपेक्षित है. आपसे निवेदन है कि कृपया इन सुझावो को  पेशेवर सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए तथा अगर आपके पास इन विषयों से सम्बंधित कोई विशिष्ट प्रश्न हैं तो हमेशा अपने ज्योतिषी या पेशेवर सुझाव प्रदाता से अवश्य परामर्श करें।


नजरिया जीने का: युवाओं के लिए खास हैं प्रधानमंत्री का वह श्लोक जो अतीत और भविष्य को भूल मुक्त वर्तमान में जीना सिखाती है




हाल के दिनों में जिस प्रकार से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रेरणात्मक उदेश्य के लिए संस्कृत  श्लोक को शेयर करने का सिलसिला शुरू किया था, उसी के अंतर्गत आज उन्होंने अतीत के पछतावे और भविष्य की चिंताओं से मुक्त होकर, वर्तमान क्षण में पूरी तरह से जीने और कर्म करने का संदेश देने वाले एक  संस्कृत सुभाषितम साझा किया। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने एक संस्कृत सुभाषितम साझा किया-

"गते शोको न कर्तव्यो भविष्यं नैव चिन्तयेत्।

वर्तमानेन कालेन वर्तयन्ति विचक्षणाः।"

चाणक्य नीति से लिए गए इस श्लोक का मतलब है कि किसी को अतीत पर शोक नहीं करना चाहिए और न ही भविष्य के बारे में चिंता करनी चाहिए। बुद्धिमान व्यक्ति केवल वर्तमान में ही कार्य करते हैं।

नजरिया जीने का: जानें वृक्ष के चिरस्थायी लाभों को समर्पित प्रधानमंत्री का सुन्दर श्लोक 

गते  शोको  न  कर्तव्यो  भविष्यं  नैव   चिन्तयेत्  |

वर्तमानेन  कालेन  वर्तयन्ति  विचक्षणाः               ||

                                      - चाणक्य नीति  (१३/२/)

श्लोक के माध्यम से प्रधानमंत्री ने लोगों को स्पष्ट सन्देश दिया है कि जो समय बीत गया है उसके बारे में शोक नहीं करना।  इसका मतलब साफ है कि हमें हमेशा वर्तमान के बारे में सोचना चाहिए क्योंकि वही हमारे हाथ में हैं. बुद्धिमान और अनुभवी व्यक्ति  केवल वर्तमान परिस्थिति के अनुसार ही जीवनयापन  करते हैं  |

संस्कृत के इस श्लोक की विवेचना करने  निम्न अर्थ निकलता है-

गते शोको न कर्तव्यो: बीते हुए (अतीत) का शोक (दुःख) नहीं करना चाहिए।

भविष्यं नैव चिन्तयेत्: भविष्य के बारे में बिल्कुल भी चिंता नहीं करनी चाहिए।

वर्तमानेन कालेन: वर्तमान के समय से ही।

वर्तयन्ति विचक्षणाः: बुद्धिमान लोग कार्य करते/जीते हैं (या जीवन यापन करते हैं)। 

यह श्लोक हमें अतीत के पछतावे और भविष्य की चिंताओं से मुक्त होकर, वर्तमान क्षण में पूरी तरह से जीने और कर्म करने का संदेश देता है, क्योंकि यही समझदारी का मार्ग है। 



Amrit Udyan Winter Annuals Edition 2026: राष्ट्रपति भवन का अमृत उद्यान जनता के लिए खुला, जानें कैसे और कहाँ करें टिकट बुकिंग

राष्ट्रपति भवन का अमृत उद्यान 3 फरवरी से खुल चुका है और आप के लिए परिवार के साथ घूमने का सुनहरा अवसर है। ध्यान रहे कि राष्ट्रपति भवन का अमृत उद्यान 31 मार्च, 2026 तक आम जनता के लिए खुला रहेगा। इस साल दर्शक बाल वाटिका - पल्मेरिया गार्डन - बरगद गार्डन - बोन्साई गार्डन - कलकल बहती धारा - केंद्रीय लॉन - लंबा गार्डन - गोलाकार गार्डन का सुन्दर  और आकर्षक नज़ारे का दर्शन कर सकेंगे।

इसके अतिरिक्त इस वर्ष आगंतुक ट्यूलिप और विभिन्न प्रकार के गुलाबों के अलावा, कलकल बहती धारा - झरनों वाली जलधारा और रिफ्लेक्सोलॉजी पथों वाला बरगद उद्यान देख सकेंगे।

लोग सप्ताह में छह दिन सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक (अंतिम प्रवेश शाम 5 बजे) उद्यान का भ्रमण कर सकते हैं। उद्यान सोमवार को बंद रहेगा, क्योंकि यह रखरखाव का दिन है, और होली के कारण 4 मार्च को भी बंद रहेगा।

राष्ट्रपति भवन संग्रहालय: जानें खास बातें 

अमृत ​​उद्यान निम्नलिखित दिनों में विशेष श्रेणियों के लिए खुला रहेगा:

3 मार्च – रक्षा कर्मियों के लिए

5 मार्च – वरिष्ठ नागरिकों के लिए

10 मार्च – महिलाओं और आदिवासी महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए

13 मार्च – दिव्यांगजनों के लिए

जानें कैसे करें टिकट बुकिंग?

उद्यान में प्रवेश और बुकिंग निःशुल्क है। ऑनलाइन बुकिंग https://visit.rashtrapatibhavan.gov.in/ पर की जा सकती है। आगंतुकों के अनुभव को बेहतर बनाने के उद्देश्य से, इस वर्ष मौके पर बुकिंग की सुविधा उपलब्ध नहीं होगी। आगंतुक केवल ऑनलाइन माध्यम से ही टिकट बुक कर सकते हैं। इसलिए, आगंतुकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने स्लॉट पहले से ही ऑनलाइन बुक कर लें। उन्हें टिकट में उल्लिखित समय-सीमा और अन्य निर्देशों का पालन करने की भी सलाह दी जाती है। किसी विशेष दिन के लिए बुकिंग पिछले दिन सुबह 10:00 बजे बंद हो जाएगी।

जानें कैसे और कहाँ  से करें एंट्री?

सभी आगंतुकों के लिए प्रवेश और निकास राष्ट्रपति भवन परिसर के गेट नंबर 35 से होगा, जो नॉर्थ एवेन्यू और राष्ट्रपति भवन के चौराहे के पास स्थित है। आगंतुकों की सुविधा के लिए, केन्‍द्रीय सचिवालय मेट्रो स्टेशन से गेट नंबर 35 तक शटल बस सेवा सुबह 9:30 बजे से शाम 6:00 बजे के बीच हर 30 मिनट पर उपलब्ध रहेगी। केन्‍द्रीय सचिवालय मेट्रो स्टेशन से अंतिम शटल बस सेवा शाम 4:00 बजे होगी।

आगंतुकों के लिए मार्ग बाल वाटिका - पल्मेरिया गार्डन - बरगद गार्डन - बोन्साई गार्डन - कलकल बहती धारा - केंद्रीय लॉन - लंबा गार्डन - गोलाकार गार्डन होगा।

ट्यूलिप और विभिन्न प्रकार के गुलाबों के अलावा, इस वर्ष आगंतुक कलकल बहती धारा - झरनों वाली एक जलधारा और रिफ्लेक्सोलॉजी पथों वाला बरगद उद्यान देख सकेंगे।

क्या-क्या साथ लें जा सकते हैं दर्शक?

आगंतुक अपने साथ मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक चाबियां, पर्स/हैंडबैग, पानी की बोतलें और शिशुओं के लिए दूध की बोतलें ले जा सकते हैं। सार्वजनिक मार्ग पर विभिन्न स्थानों पर पीने का पानी, शौचालय और प्राथमिक चिकित्सा/चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

अमृत ​​उद्यान के अलावा, लोग सप्ताह में छह दिन (मंगलवार से रविवार) राष्ट्रपति भवन और राष्ट्रपति भवन का संग्रहालय भी जा सकते हैं। वे प्रत्येक शनिवार को राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में गार्ड परिवर्तन समारोह भी देख सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए https://visit.rashtrapatibhavan.gov.in/ पर जाएं।

English is Easy: जानें Enquiry और Inquiry शब्द के प्रयोग में अंतर और सामान्य गलतियां


Enquiry और lnquiry इंग्लिश में प्रयोग होने वाले बहुत हीं महत्वपूर्ण शब्द हैं यह और बात है कि हम इनको एक हीं शब्द समझने की गलती कर बैठते हैं. अगर आप डिस्टिंक्शन ऑफ वर्ड के पॉइंट ऑफ व्यू से देखेंगे तो आप समझ सकते हैं कि दोनों शब्दों की अपनी है और इससे आप अंग्रेजी के कॉमन एरर पर कमांड कर सकते हैं. तो आइए जानते है Enquiry और lnquiry में क्या है बेसिक डिफरेंस.


इन्क्वायरी (Enquiry) और इनक्वायरी (lnquiry) में अंतर

इन्क्वायरी (Enquiry) एक नाउन है, जिसका मतलब है जानकारी मांगना या ऑफिशियल इन्वेस्टिगेशन करना। यह 'इनक्वायरी (lnquiry) ' वर्ब से जुड़ा है, जिसका मतलब है जानकारी मांगना या किसी की इन्वेस्टिगेशन करना।
मैंने अपने ब्लड टेस्ट के रिज़ल्ट के बारे में पूछने के लिए डॉक्टर को फ़ोन किया।


कांग्रेस ने बड़े बैंकों द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग की इन्वेस्टिगेशन शुरू की।
डिटेक्टिव ने वादा किया कि वह डकैतियों के बारे में कुछ पूछताछ करेगा।

Enquiry" और "Inquiry" शब्द वैसे तो अक्सर एक-दूसरे की जगह इस्तेमाल किए जाते हैं, लेकिन इनके बीच थोड़ा अंतर और उपयोग का फर्क अमेरिकन और ब्रिटिश अंग्रेजी भाषाओं में पाई जाने वाली अंतर के कारण भी पाया जाता है. 


Enquiry का सामान्य मतलब होता है पूछना या कोई जानकारी लेना. आप रेलवे काउंटर पर किसी संस्थान के कस्टमर केयर से कुछ पूछताछ करने के लिए इसका प्रयोग कर सकते हैं. वही Inquiry का तात्पर्य ऑफिशियल जांच से संबंधित होता है.
British English
अगर आप ब्रिटिश इंग्लिश पर गौर करेंगे तो वहां Enquiry का मतलब सामान्य पूछताछ के लिए किया जाता है. वहीं Inquiry का प्रयोग किसी ऑफिशियल एवं आधिकारिक जांच के लिए किया जाता है. 
American English 
वहीं अमेरिकन इंग्लिश पर आप गौर करेंगे तो वहां अधिकांशतः Inquiry ही इस्तेमाल होता है. भले ही वह सामान्य जांच हो या ऑफिसियल, Inquiry शब्द कभीन प्रयोग होता है. दूसरे शब्दों में,  "Enquiry" बहुत कम प्रयोग होता है।

Common Mistakes in Use 
दोनों शब्दों के प्रयोग और Distinction of words की जानकारी के अभाव में हम सामान्यतः रिपोर्ट, कोर्ट केस, या सरकारी दस्तावेज़ में लोग कभी-कभी “Enquiry” लिख देते हैं जबकि ऑफिशियल इन्वेस्टिगेशन में हम Inquiry का प्रयोग करते हैं. 

राष्ट्रपति भवन संग्रहालय: इतिहास को कहानी के रूप में दर्शाने वाला संग्रहालय-जानें खास बातें

President Museum to open from January 05

राष्ट्रपति भवन में अमृत उद्यान (Amrit Udyan Opening Date)  एक बहुत ही अच्छा और खास डेस्टिनेशन हैं जहां आप पूर्ण रूप से एंजॉय कर सकते हैं. अगर आप फूलों को देखने में रोमांस अनुभव करते हैं तो आप यहां पर कई तरह के रंग-बिरंगे फूलों को देख सकते हैं. आपको बता दें कि अमृत उद्यान में ट्यूलिप और गुलाब के फूलों की कई वैरायटी हैं. अमृत उद्यान को पहले मुगल गार्डन (Mughal Garden) के नाम से जाना जाता था. जिसका नाम बदलकर अमृत उद्यान कर दिया गया है. आप भी यहां पर घूमने का प्लान बना सकते हैं. अमृत उद्यान (Amrit Udyan) जाने के लिए ऑनलाइन टिकट बुक कर सकते हैं.


राष्ट्रपति भवन संग्रहालय: खास बातें 

लगभग 10,000 वर्ग मीटर के क्षेत्र में फैला राष्ट्रपति भवन संग्रहालय परिसर (आरबीएमसी)  मुख्य तौर पर राष्ट्रपति भवन के विभिन्न पहलुओं को प्रदर्शित करने के लिए बेहतर तकनीक के साथ तैयार किया गया है जो अद्वितीय है. 


राष्ट्रपति भवन संग्रहालय परिसर (आरबीएमसी) भारतीय स्वतंत्रता, लोकतंत्र और एकता का प्रतीक है।वास्तव में आप  राष्ट्रपति भवन संग्रहालय में उन सभी उपहारों की झलक प्राप्त कर सकते हैं जो  भारत के राष्ट्रपतियों को वर्षों से मिले हैं तथा सभी इस संग्रहालय में संरक्षित है.  इन खूबसूरत  कलाकृतियों के अलावा अन्य भी कई महत्वपूर्ण वस्तुओं को इसमें संभालकर संगृहीत किया गया है जैसे हथियार, फर्नीचर, मूर्तियां, वस्त्र, तस्वीरें, अभिलेखीय सामग्री और भी बहुत कुछ.


मुगल गार्डन भी एक बहुत हीं सुन्दर स्थल है जो पर्यटकों को अपनी खूबसूरती के कारण आकर्षित करता रहा है. 15 एकड़ के विशाल विस्तार में फैले, मुगल गार्डन को अक्सर राष्ट्रपति के महल की आत्मा के रूप में चित्रित किया जाता है. 

मुगल गार्डन अब तक जनता के लिए फरवरी-मार्च के महीनों में आयोजित होने वाले वार्षिक उत्सव उद्यानोत्सव के दौरान ही खोला जाता था, लेकिन मुगल गार्डन, जो राष्ट्रपति भवन के दौरे का तीसरा सर्किट है, अब जनता के लिए खुला रहेगा। राष्ट्रपति भवन संग्रहालय परिसर इतिहास को कहानी के रूप में दर्शाने वाला एक संग्रहालय है जिसमें कला, संस्कृति, विरासत और इतिहास के उत्तम प्रतीकों और अमूल्य कलाकृतियों को प्रदर्शित किया गया है।

प्रत्येक साल फरवरी मार्च में राष्ट्रपति भवन में अमृत उद्यान (Amrit Udyan Opening Date) खुल जाता है. अमृत उद्यान में पर्यटक कई तरह के रंग-बिरंगे फूलों को देख सकते हैं. अमत उद्यान में ट्यूलिप और गुलाब के फूलों की कई वैरायटी हैं. अमृत उद्यान को पहले मुगल गार्डन (Mughal Garden) के नाम से जाना जाता था. जिसका नाम बदलकर अमृत उद्यान कर दिया गया है. आप भी यहां पर घूमने का प्लान बना सकते हैं. अमृत उद्यान (Amrit Udyan) जाने के लिए ऑनलाइन टिकट बुक कर सकते हैं. यह सभी दिन खुला रहेगा (सोमवार और सरकारी अवकाश को छोड़कर)। आगंतुक भ्रमण के लिए वेबसाइट्स- https://presidentofindia.nic.inया https://rashtrapatisachivalaya.gov.in/या https://rbmuseum.gov.in/पर जाकर ऑनलाइन बुकिंग कर सकते हैं।
राष्ट्रपति भवन संग्रहालय परिसर इतिहास को कहानी के रूप में दर्शाने वाला एक संग्रहालय है जिसमें कला, संस्कृति, विरासत और इतिहास के उत्तम प्रतीकों और अमूल्य कलाकृतियों को प्रदर्शित किया गया है।

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Mahashivratri : जानें शिव को प्रिय क्यों है यह महीना और क्यों करते हैं शिवलिंग पर जलाभिषेक?


Mahashivratri Puja Muhurat:  महाशिवरात्रि के अवसर पर भगवान शिव को जलाभिषेक करने का चलन होता है। भक्तगण भगवान शिवलिंग पर जल के साथ बेलपत्र, भांग और धतूरा को समर्पित करते हैं। भक्तजनों का ऐसा विश्वास है कि महाशिवरात्रि के दिन भगवान शंकर का पूजन और जलाभिषेक से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।  तो आइए जानते हैं कि इस सावन मे  पहला सोमवार कब पड़ेगा और जानिए पहले सावन सोमवार का शुभ मुहूर्त क्या है। 

क्यों करते हैं शिवलिंग पर जलाभिषेक?

ऐसी मान्यता है कि इस महीने के दौरान भगवान शिव ने ब्रह्मांड को बचाने के लिए समुद्र मंथन के दौरान निकले घातक हलाहल विष का सेवन किया था। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान समुद्र से कई दिव्य चीज़ें निकली थीं, लेकिन उनमें हलाहल भी शामिल था, जो एक ख़तरनाक ज़हर था। दुनिया को इसके प्रभाव से बचाने के लिए भगवान शिव ने ज़हर पी लिया और इसे अपने गले में रख लिया, जिससे ज़हर नीला हो गया और उन्हें नीलकंठ नाम दिया गया।

ज़हर के प्रभाव को कम करने के लिए देवताओं ने भगवान शिव को गंगा जल अर्पित किया। माना जाता है कि यह दिव्य घटना श्रावण के महीने में हुई थी। इसलिए, यह महीना शिव भक्ति को समर्पित है और सावन के दौरान उनकी पूजा करना विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।कहा जाता है कि विष के प्रभाव को कम करने के लिए देवताओं ने शिव पर गंगा जल डाला और भक्ति का यह कार्य सावन के दौरान विशेष पूजा और उपवास के माध्यम से जारी रहता है। कहा जाता है कि भगवान शंकर ने उस हलाहल विष को अपने कंठ पर हीं रोककर उसके असर को खतम कर दिया था और इसलिए भगवान शंकर को नीलकंठ भी कहा जाता है। 

सावन सोमवार पूजा विधि (पूजा विधि)

हालांकि सावन के इस पवित्र महीने का हर दिन भगवन शंकर के पूजन के लिए उत्तम माना जाता है और भक्तजन अपने सुख और  समृद्धि और शांतिपूर्ण जीवन के लिए भगवान शंकर से आशीर्वाद मांगने का दिन होता है, लेकिन सावन के सोमवार को भगवान शंकर के व्रत (सोमवार व्रत) के लिए विशेष अवसर माना जाता है।

सावन सोमवार पूजा के लिए सबसे जरूरी है कि खुद को पवित्र करें जिसमें शामिल है तन और मन से पवित्र होना। इसके लिए वैसे तो आप विभिन्न पूजा कि पुस्तकों से मदद ले सकते हैं, हालांकि आप निम्न स्टेप्स को अपनाकर सावन सोमवार का व्रत कर सकते हैं। 

  • सुबह जल्दी उठें और सूर्योदय से पहले स्नान करें।
  • अपने घर के मंदिर को साफ करें और शिवलिंग पर गंगाजल मिला हुआ जल या दूध चढ़ाएं।
  • भगवान शिव को बेलपत्र, सफेद फूल, धतूरा, भस्म (पवित्र राख) और फल चढ़ाएं।
  • “ॐ नमः शिवाय” का जाप करें या शिव चालीसा का पाठ करें।
  • पूरे दिन व्रत रखें और शाम को पूजा करने के बाद व्रत तोड़ें।
  • संभव हो तो नज़दीकी शिव मंदिर जाएँ।
 शिव पुराण के अनुसार  सावन के महीने में शिवलिंग पर जल अर्पित करने वाले भक्तजन को विशेष पुण्य मिलता है। इस महीने मे श्रद्धालु पवित्र जल को लेकर पैदल चलकर भगवान शिव को जल अर्पण करते हैं।  शिव पुराण के अनुसार मान्यता है कि ऐसा करने से भगवान शंकर को शीतलता और प्रसन्न करने का माध्यम माना गया है। इसके साथ ही सावन के प्रत्येक सोमवार कि विशेष महता है और ऐसा करने से शिवजी जल्दी प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं।
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अस्वीकरण: कृपया ध्यान दें कि लेख में उल्लिखित टिप्स/सुझाव केवल सामान्य जानकारी है जो विभिन्न सामाजिक और धार्मिक आस्था पर आधारित हैं.ताकि आपको उस मुद्दे के बारे में अपडेट रखा जा सके जो कि आम लोगों से अपेक्षित है. आपसे निवेदन है कि कृपया इन सुझावो को  पेशेवर सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए तथा अगर आपके पास इन विषयों से सम्बंधित कोई विशिष्ट प्रश्न हैं तो हमेशा सम्बंधित एक्सपर्ट से अवश्य परामर्श करें।


Valentine Day Special: दिल को छू लेने वाले ये कोट्स भेजें अपने खास को

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वैलेंटाइन डे प्यार का त्योहार है और इस दिन प्रेमी अपने पार्टनर को प्रेम का अहसास दिलाने के लिए खास तैयारियां करते हैं । यह दिन दुनिया भर के प्रेमी जोड़ों के लिए बेहद खास होता है जहाँ प्रेमी कपल इस दिन का पुरे साल इन्तजार करते हैं। इस दिन प्रेमी जोड़े एक-दूसरे के प्रति अपने प्यार का इजहार करते हैं। वे एक-दूसरे को उपहार देते हैं, रोमांटिक डिनर पर जाते हैं, या एक साथ समय बिताते हैं।

वैलेंटाइन डे हमें यह याद दिलाता है कि हमारे जीवन में प्यार कितना महत्वपूर्ण है। यह हमें अपने साथी के प्रति अपना प्यार व्यक्त करने का मौका देता है।

वैलेंटाइन डे को मनाने के कई तरीके हो सकते हैं और यह खास आपके और आपके पार्टनर की समझ और पसंद पर निर्भर करता है। आखिर आप और आपके पार्टनर को एक दूसरे से अधिक कौन समझ सकता है और इसके लिए आप खुद ही तय करें कि अपने साथी के साथ कैसे यादगार शाम बना सकते हैं. इसके लिए आप एक रोमांटिक डिनर पर जा सकते हैं, एक साथ पार्क में घूम सकते हैं, या एक साथ किसी फिल्म देख सकते हैं। आप अपने साथी को एक उपहार दे सकते हैं, या उसे एक प्यारा सा ग्रीटिंग कार्ड लिख सकते हैं।

अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए आप निम्न पंक्तियों की मदद ले सकते हैं जो आपके पार्टनर को आपके लिए और भी खास बनाने में मदद करेंगी. 

1. तुम 

विश्वास मैं कैसे दूँ, 

जीने की हो प्रेरणा हो तुम 

तेरा कोई विकल्प नहीं, 

कुछ पाने का संकल्प हो तुम 

मेरे इच्छाओं की सीमा हो,

अभिलाषाओं का अंत हो तुम. 


वैलेंटाइन डे स्पेशल 2026: जन्मतिथि से जानें अपने साथी का रोमांटिक नेचर और प्यार का अंदाज़

Valentine day birth day and romantic mood of your partner

वैलेंटाइन डे स्पेशल: वैलेंटाइन वीक शुरू हो चुका है और आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि जन्म के दिन का प्रभाव व्यक्ति के स्वभाव और रोमांटिक मूड पर भी पड़ता है। सप्ताह के प्रत्येक दिन का संबंध एक विशेष ग्रह से होता है, जो व्यक्ति के व्यक्तित्व और प्रेम भावनाओं को प्रभावित करता है। आइए जानते हैं कि किस दिन जन्मे लोग रोमांस के मामले में कैसे होते हैं—

निश्चित रूप से वैलेंटाइन डे 2026  के अवसर पर अपने साथी के प्यार और रिश्ते के रुझान को जानना आपके लिए फायदेमंद और सहायक होगा।

शनिवार (Saturday) – गंभीर लेकिन गहरे प्रेमी

शनिवार को जन्मे लोग अपने पार्टनर के साथ रिलेशनशिप के मामले में बहुत ज़्यादा ध्यान रखते हैं। शनिवार को जन्मे लोग अपने निजी रिश्तों में कभी भी धोखा नहीं देते और प्यार करते हैं और पार्टनर की रुचि और महत्व को समझते हैं। आम तौर पर ऐसे लोग अपने जीवनसाथी या पार्टनर को उच्च घराने से लेते हैं जो आलीशान जीवन जीते हैं और हाई प्रोफाइल समाज और पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखते हैं।

रविवार (Sunday) – आत्मविश्वासी और आकर्षक प्रेमी

रविवार को जन्मे लोग शर्मीले स्वभाव के होते हैं और अपने पार्टनर के सामने अपने प्यार का इज़हार करने की दिशा में पहला कदम नहीं उठा पाते। चूंकि रविवार को जन्मे लोग भगवान सूर्य के अधीन होते हैं और जाहिर है कि ऐसे लोग अपने अहंकार और स्वाभिमान को अपने जीवन में सबसे पहले तरजीह देते हैं। अहंकारी रवैया और स्वाभिमानी स्वभाव उनके पार्टनर के सम्मान को ठेस पहुंचाने का कारक हो सकता है और इसके परिणामस्वरूप आपसी रिश्तों में विश्वास की कमी होती है। रविवार को जन्मे लोग बाहरी तौर पर शांत रहते हैं लेकिन जब कोई मुद्दा उनके सामने आता है तो वे अपना धैर्य खो देते हैं।

सोमवार (Monday) – संवेदनशील और भावुक प्रेमी

सोमवार को जन्मे लोग अपने पार्टनर के साथ खुशनुमा जीवन जीते हैं। अपने साथी के प्रति देखभाल और प्यार से पेश आना और अपने साथी के प्रति देखभाल और ध्यान देना उनके जीवन का पहला आदर्श वाक्य है। वे अपने साथी के प्रति कोमल स्वभाव और यहां तक ​​कि अपनी बातचीत में नरमी दिखाते हैं। हालांकि ऐसे लोग स्वभाव से शांत रहते हैं, वे स्वतंत्र विचारधारा को प्राथमिकता देते हैं जो उनके रिश्ते में कुछ बाधाएं और भ्रम पैदा करता है। यदि वे अपने बीच के मतभेदों का समाधान ढूंढ लेते हैं तो वैवाहिक जीवन सामंजस्यपूर्ण हो सकता है। ये लोग बेहद इमोशनल, केयरिंग और सच्चे प्रेमी होते हैं साथ हीं अपने पार्टनर की भावनाओं को गहराई से समझते हैं और उन्हें प्राथमिकता देते हैं।

रोमांस में ये कोमलता, मिठास और गहराई पसंद करते हैं तथा कभी-कभी जरूरत से ज्यादा इमोशनल हो सकते हैं, जिससे मूड स्विंग्स हो सकते हैं।

मंगलवार (Tuesday) – जुनूनी और जोशीले प्रेमी

मंगलवार को जन्मे लोग स्वभाव से गुस्सैल होते हैं क्योंकि वे मंगल ग्रह द्वारा शासित होते हैं। क्रोध से भरा स्वभाव और व्यवहार उनके रिश्ते को थोड़ा खट्टा कर देता है जब वे अपने मतभेदों का उचित समाधान खुद ही खोज लेते हैं। ऐसे लोगों को जीवन साथी या दोस्ती के लिए सुंदर/स्मार्ट और आकर्षक साथी मिलते हैं जो उन्हें अपने जीवन में शांति प्रदान करते हैं। हालांकि, क्रोधी स्वभाव उनके रिश्ते में परेशानियां और मतभेद पैदा करता है। हालांकि, मतभेदों के बावजूद, वे इन मुद्दों का उचित समाधान ढूंढ लेते हैं और कुल मिलाकर एक खुशहाल और सुखद जीवन जीते हैं

 बुधवार (Wednesday) – चुलबुले और मज़ेदार प्रेमी

बुधवार को जन्मे लोग सुखद व्यक्तित्व के स्वामी होते हैं। इसके कारण, वे अपने जीवन में एक मित्र के रूप में कई व्यक्तियों को प्रभावित करने की शक्ति रखते हैं, लेकिन वे कभी भी अपने सच्चे साथी को धोखा नहीं देते हैं। इस तथ्य के बावजूद कि बुधवार को जन्मे लोगों के जीवन में कई दोस्त होते हैं, वे व्यक्तिगत मोर्चे पर एक खुशहाल और परिपूर्ण जीवन जीते हैं क्योंकि वे अपने साथी के गौरव को प्यार और सम्मान करते हैं। 

 गुरुवार (Thursday) – वफादार और आध्यात्मिक प्रेमी

गुरुवार को जन्मे लोगों के संबंध गुरुवार को जन्मे व्यक्ति के लिए स्थिरता, विश्वसनीयता और देखभाल व्यक्तिगत और रिश्ते के लिए सबसे सही विशेषण हैं। उनके व्यक्तिगत संबंधों के बंधन में उनकी समझ और आपसी सहयोग होता है जो ऐसे व्यक्तित्वों के लिए स्थिर और खुशहाल जीवन की नींव रखता है। 

शुक्रवार (Friday) – रोमांटिक और आकर्षक प्रेमी

शुक्रवार को जन्मे लोगों के संबंध शुक्रवार को जन्मे लोग शुक्र द्वारा शासित और शासित होते हैं और वे अपने व्यक्तित्व में कई अनूठी विशेषताओं के स्वामी होते हैं। अपने व्यक्तित्व के साथ कई विशेष गुणों के कारण, ऐसे लोगों में लोगों को आसानी से अपना मुरीद बनाने की विशेष कला होती है और निश्चित रूप से यह उनके प्रेम संबंधों को भ्रम और विश्वास की कमी का एक सेट बनाता है। हालांकि पूर्णता और उदार मानसिकता के कारण ऐसे लोगों का वैवाहिक जीवन अच्छा रहा, उन्हें विश्वास और विश्वास के साथ अपने रिश्ते की स्थिरता पर ध्यान देने की आवश्यकता है।

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अस्वीकरण: कृपया ध्यान दें कि लेख में बताए गए सुझाव/सुझाव केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से हैं ताकि आपको इस मुद्दे के बारे में अपडेट रखा जा सके जो आम लोगों से अपेक्षित है और इन्हें पेशेवर सलाह के रूप में नहीं समझा जाना चाहिए/पालन नहीं किया जाना चाहिए। हम अनुशंसा करते हैं और आपसे अनुरोध करते हैं कि यदि आपके पास एस्ट्रोलॉजी संबंधित विषय से के बारे मे कोई विशिष्ट प्रश्न हैं, तो हमेशा अपने पेशेवर सेवा प्रदाता से परामर्श करें।

नजरिया जीने का: सफलता पाना है लक्ष्य तो फिर इन 6 दुर्गुणों का करें पूर्ण त्याग


षड् दोषा: पुरुषेणेह हातव्या भूतिमिच्छिता। निद्रा तन्द्रा भयं क्रोध आलस्यं दीर्घसूत्रता।। 

संस्कृत के इस श्लोक का अर्थ  है  कि जीवन में ऐश्वर्य या उन्नति चाहने वाले पुरुषों को छः दुर्गुणों  पर नियंत्रण रखनी चाहिए या उनका पूर्ण त्याग करनी होगी अन्यथा उनके सफलता में सदा संदेह रहती है. उक्त श्लोक  जिन छः दुर्गुणों की चर्चा  की गई है उनमें शामिल हैं-

 नींद (अधिक सोना), तन्द्रा (उंघना/सुस्ती), भय (डर), क्रोध (गुस्सा), आलस्य (सुस्ती), और दीर्घसूत्रता (किसी काम को टालने या देर करने की आदत).

दोस्तों, भारतीय शास्त्र केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे हमें जीवन जीने की कला सिखाते हैं। प्रस्तुत श्लोक आज के समय में भी उतना ही प्रासंगिक है जितना प्राचीन काल में था।

आज मनुष्य कड़ी मेहनत के बावजूद सफल नहीं हो पाता, क्योंकि उसके मार्ग में ये छह आंतरिक शत्रु खड़े होते हैं।

दूसरे शब्दों में कहें तो यह श्लोक हमें आत्ममंथन के लिए प्रेरित करता है और हमें यह  बताता है कि बाहर की दुश्मनों के अपेक्षा हमें  पहलेअपने भीतरी दोषों को पहचानना और समाप्त करना होगा।

छह दोषों पर एक नजर आप देंगे तो पाएंगे कि यह सभी दुर्गुण किसी भी सफलता में सबसे बड़े बाधा हैं- नींद, नखरे, डर, गुस्सा, आलस्य, दीर्घसूत्र। 

मतलब: जो मनुष्य धन या तरक्की चाहते हैं, उन्हें इन दुर्गुणों को  सदा के लिए त्याग कर देनी चाहिए-– नींद, गुस्सा, भय, तन्द्रा, आलस्य और काम को टालने की आदत.

छह दोष (The Six Vices):

निद्रा (Nidra): अधिक सोना, नींद में समय बिताना. अधिक नींद और सुस्ती व्यक्ति की ऊर्जा, समय और अवसर छीन लेती है। समय पर जागना और सजग रहना ही सफलता की पहली सीढ़ी है।

तन्द्रा (Tandra): ऊँघना, सुस्ती, निष्क्रियता.

भयं (Bhayam): डर, भय, जिससे आत्मविश्वास कम होता है. भय हमें प्रयास करने से रोकता है। असफलता का डर, लोगों की राय का डर—ये सब विकास के सबसे बड़े अवरोध हैं।

क्रोधः (Krodhah): गुस्सा, जो स्वभाव और चरित्र पर बुरा असर डालता है. क्रोध बुद्धि का नाश करता है। गुस्से में लिया गया एक निर्णय वर्षों की मेहनत पर पानी फेर सकता है।

आलस्यं (Aalasya): आलस्य, जो लक्ष्य प्राप्ति में सबसे बड़ी कमजोरी है.आलस्य व्यक्ति को सपनों से दूर कर देता है। जो आज टालता है, वह कल पछताता है। 

दीर्घसूत्रता (Deerghasutrata): काम को टालने की आदत, जल्दी होने वाले काम में भी देर लगाना (procrastination). 

यह संक्षेप में हमें बताता है कि:

आलस्य और निद्रा अधिक मात्रा में होने से काम में बाधा आती है।

तन्द्रा से शरीर और मन सुस्त हो जाते हैं।

भय और क्रोध मन को कमजोर और अनियंत्रित बनाते हैं।

अधिक सोच-विचार (दीर्घसूत्रता) से निर्णय लेने में बाधा होती है। आज का काम कल पर छोड़ना, सफलता को हमेशा दूर ही रखता है।

इसलिए, जो व्यक्ति सफल होना चाहता है, उसे इन दोषों को छोड़ना चाहिए।


Born of Saturday: शनिवार को जन्म लेने वालों की खास खूबियाँ – जाने महान लोगों के उदाहरणों से

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Born on Saturday:

जैसा कि आप जानते हैं, हफ़्ते में सात दिन होते हैं और हर दिन का एक रूलिंग प्लैनेट होता है। हिंदू कैलेंडर और एस्ट्रोलॉजी के अनुसार, किसी खास दिन जन्म लेने वाले व्यक्ति पर उस ग्रह के रूलिंग प्लैनेट का असर होता है। 

यहां हम शनिवार को जन्मे लोगों के बारे में बात करेंगे, इस दिन के देवता भगवान शनिदेव हैं। शनि के असर में लोग बहुत मेहनती होते हैं। क्योंकि शनि की स्पीड धीमी होती है, इसलिए वे अपने गोल को पाने में कामयाब होते हैं, भले ही धीरे-धीरे। मोटिवेटर और एस्ट्रोलॉजर हिमांशु रंजन शेखर से शनिवार को जन्मे लोगों की पर्सनैलिटी के दूसरे पहलुओं के बारे में जानें।

अगर हम बात शनिवार को पैदा हुई मशहूर भारतीय हस्तियों के बारे में करें, तो कई ऐसे विख्यात हस्तियां हैं जिनका जन्म शनिवार को हुआ था. इनमें शामिल हैं राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी (2 अक्टूबर, 1869), दिग्गज गायिका लता मंगेशकर, और अक्षय कुमार, इरफान खान, अनिल कुंबले, परिणीति चोपड़ा और मंदिरा बेदी।



शनिवार को जन्मे लोग दृढ़निश्चयी होने के साथ ही साथ वे मेहनती और जीवन के प्रति सख्त दृष्टिकोण अपनाते हैं। अनुशासन प्रिय तथा बुद्धिमान और पेशेवर होते हैं जिनके लिए जीवन का खास महत्व होता है। एस्ट्रोलॉजी और विज्ञान के अनुसार शनि गृह अपने पथ पर काफी धीमी गति से घूमता है और जाहिर है कि शनिवार को जन्म लेने वाले लोगों पर शनि ग्रह का काफी इन्फ्लुएंस रहते है.  

Famous Personalities Born on Saturday

शनिवार को जन्मे लोगों में कुछ खास खूबियां होती हैं जो उन्हें दूसरों से अलग बनाती हैं। अगर आप शनिवार को जन्मे मशहूर हस्तियों की खासियतों को देखें, तो यह बात सामने आती है कि ऐसी हस्तियां मानती हैं कि उनके शब्दों की कीमत किसी भी दूसरी चीज़ से ज़्यादा ज़रूरी है। हालांकि ऐसी हस्तियां स्वभाव से थोड़ी आलसी होती हैं, लेकिन वे कड़ी मेहनत में विश्वास करती हैं और अपनी मेहनती स्वभाव और लगन से जीवन में सफलता हासिल करती हैं।

शनिवार को जन्मे जाने-माने लोग

  • जे.के. रोलिंग: लेखिका
  • लियाम हेम्सवर्थ: अभिनेता
  • अक्षय कुमार: भारतीय अभिनेता
  • इरफ़ान खान: भारतीय अभिनेता
  • परिणीति चोपड़ा: भारतीय अभिनेत्री
  • मंदिरा बेदी: भारतीय अभिनेत्री
  • अनिल कुंबले: भारतीय क्रिकेटर
  • इरफ़ान पठान: भारतीय क्रिकेटर
  • गुलज़ार: भारतीय कवि/गीतकार
  • जॉर्ज हैमिल्टन: अभिनेता

अनुशासनप्रिय होते हैं 

वे धीमे होने के साथ  स्थिर, मेहनती, अनुशासित और दूसरों से अलग होते हैं। शनिवार को जन्मे लोगों की सबसे बड़ी विशेषता यह होती है कि वे  बुद्धिमान और व्यावहारिक होते हैं साथ हीं इनके जीवन में सख्त सीमाएँ  और अनुशासनप्रिय होते हैं शनिवार को जन्मे लोग शनि ग्रह के प्रभाव में पैदा होते हैं और जाहिर  है कि उनका जीवन शनि ग्रह के प्रभाव के अनुसार होता है। उनका संघर्ष निरंतर रहता है जो उन्हें मजबूत बनाता है और हर चीज से उबरने के लिए दृढ़ संकल्पित होना होता है अर्थात  उनके जीवन मे संघर्ष लगा रहता है । वे के साथ ही वे अत्यधिक अनुशासित हैं।

मेहनती और धुन का पक्का

शनि के प्रभाव से व्यक्ति काफी मेहनती और धुन का पक्का होता है. भले ही सफलता मिलने में कुछ देरी हो सकती है लेकिन वह व्यक्ति  धीरे-धीरे ही सही, लेकिन अपने लक्ष्य तक पहुंचने में सफल होते हैं. ये लोग थोड़े गंभीर प्रवृति के होते हैं और खुलने में काफी वक्त ले ले सकते हैं.  लेकिन परिवार के लोगों के साथ इनके संबंधों में कई बार मतभेद देखने को मिलते हैं. शनिवार को जन्मे लोग हमेशा मदद के लिए तैयार रहते हैं. वैसे इनका स्वभाव क्रोधी हो सकता है. 


क्रोधी, धैर्य की काफी कमी 
गुस्से पर काबू पाने में अक्सर ये लोग काफी असफल होते हैं और शायद यही वजह है कि इनके अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से भी काफी काम निभती है. ऐसे जातक अगर अपनी गुस्से पर नियंत्रण करना सीख लें तो जीवन में काफी आगे जा सकते हैं. 






प्यार व्यक्त करने में होते हैं कंजूस
जिन जातकों का जन्म शनिवार को होता है वो सामान्यत:  अंतर्मुखी प्रतिभा के धनी होते है. एकांतप्रिय होने के साथ ही वो अपनी बातों को व्यक्त करने में जल्दीबाजी कभी नहीं करते. यही वजह होता है कि प्रेम के मामलों में भी वो अपने बातों को व्यक्त नहीं कर पाते हैं. अपने प्यार का इजहार करने में काफी विलम्ब करते हैं और चाहते हैं कि  उनका पार्टनर उनके फीलिंग्स को पहचान ले... 

परिस्थितियों के गुलाम नहीं होते 
शनिवार को जन्म लेने वाले व्यक्ति परिस्थितियों के स्वामी होते हैं और कभी भी उन्हें अपने ऊपर हावी नहीं होने देते.... भले ही उनके जीवन में कितने भी संघर्ष वाले दिन या संकट आये, वे उससे निकलने के लिए सही वक्त का इन्तजार करते हैं और हिम्मत नहीं हारते.... 

दृढ निश्चय के मालिक 
शनिवार को जन्म लेने वाले जातक दृढ इच्छा शक्ति के स्वामी होते हैं और अपने कार्यों को हर हाल में पूरा करना चाहते हैं. अपने लक्ष्य को पाने के लिए संसाधनों की कमी हो तो भी ये इन्हे जुटाने की क्षमता रखते हैं.  जिस किसी क्षेत्र में इन्हे कार्य का अवसर प्रदान की जाए, उसमे हीं ये सफलता के नए सोपान प्राप्त करने की क्षमता रखते हैं. 

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अस्वीकरण: कृपया ध्यान दें कि लेख में उल्लिखित टिप्स/सुझाव केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से हैं ताकि आपको उस मुद्दे के बारे में अपडेट रखा जा सके जो आम लोगों से अपेक्षित है. आपसे निवेदन है कि कृपया इन सुझावो को  पेशेवर ज्योतिषीय सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए तथा अगर आपके पास इन विषयों से सम्बंधित कोई विशिष्ट प्रश्न हैं तो हमेशा अपने ज्योतिषी या पेशेवर ज्योतिष/कुंडली सुझाव प्रदाता से अवश्य परामर्श करें।





वायुशक्ति-26: भारतीय वायु सेना के तेजस, राफेल, जगुआर, मिराज-2000, सुखोई होंगे शामिल


भारतीय वायु सेना 27 फरवरी 2026 को जैसलमेर के पोखरण एयर टू ग्राउंड रेंज में वायुशक्ति-26 अभ्यास में अपनी क्षमता प्रदर्शित करेगी।

वायुसेना युद्धाभ्‍यास में तेजस, राफेल, जगुआर, मिराज-2000, सुखोई-30एमकेआई, मिग-29, हॉक, सी-130जे, सी-295, सी-17, चेतक, एएलएच एमके-IV, मि-17 IV, एलसीएच, अपाचे, चिनूक और रिमोटली पायलेटेड एयरक्राफ्ट सहित युद्धक परिवहन और हेलीकॉप्टर सहित वायुसेना के कई विमान शामिल होंगे। 

अभ्यास में शॉर्ट रेंज लॉइटरिंग मुनिशन्स, आकाश, स्पाइडर और काउंटर अनमैन्ड एरियल सिस्टम्स (सीयूएएस) जैसे उन्नत हथियार प्रणालियों का भी प्रदर्शन किया जाएगा, जिनमें दिन, शाम और रात में मिशन संचालित किए जाएंगे।

वायुशक्ति-26 ,ऑपरेशन सिंदूर की सफलता को भी दर्शाएगा, जो हवाई क्षेत्र में प्रभुत्व, लंबी दूरी तक सटीकता से मार करने, बहु-क्षेत्रीय अभियानों और 'आत्मनिर्भर भारत' की परिकल्पना से निर्देशित स्वदेशी प्लेटफार्मों द्वारा निर्णायक प्रभावकारी क्षमता संपन्‍न भारतीय वायु सेना की श्रेष्ठता की पुष्टि करता है।

"अचूक, अभेद्य और सटीक " के मूल मूल्यों से प्रेरित यह अभ्यास, भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा संरचना के एक प्रमुख घटक के रूप में भारतीय वायु सेना की भूमिका की पुष्टि कर राष्ट्र को सुरक्षित रखने के प्रति आश्वस्त कराएगा।


मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना: Facts You Need to Know


वर्तमान में, मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल (एमएएचएसआर) परियोजना (508 किमी) जापान सरकार की तकनीकी और वित्तीय सहायता से क्रियान्वयनाधीन है।

  • मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल (एमएएचएसआर) परियोजना (508 किमी) गुजरात, महाराष्ट्र राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश दादरा और नगर हवेली से होकर गुजर रही है, जिसमें मुंबई, ठाणे, विरार, बोईसर, वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आणंद, अहमदाबाद और साबरमती में 12 स्टेशनों की योजना है।
  • 17 नदी पुलों के निर्माण का कार्य सम्पूर्ण गया है। गुजरात में 4 प्रमुख नदी पुलों (नर्मदा, माही, ताप्ती और साबरमती) के लिए कार्य अग्रिम चरण में है और महाराष्ट्र में 4 नदी पुलों में प्रगति पर है। डिपो (ठाणे, सूरत और साबरमती) पर काम जोरों पर है।
  • कुल 12 स्टेशनों में से 8 स्टेशन (वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, आणंद, वडोदरा, अहमदाबाद और साबरमती) पर नींव का काम पूरा हो चुका है। महाराष्ट्र खंड में, 3 स्टेशनों (ठाणे, विरार, बोईसर) पर नींव का कार्य प्रगति पर है और बीकेसी स्टेशन पर खुदाई का कार्य पूरा होने वाला है और बेस स्लैब की ढलाई का कार्य शुरू हो गया है।
  • समुद्र के नीचे सुरंग (लगभग 21 किमी) का काम शुरू हो गया है, जिसमें से महाराष्ट्र में घनसोली और शिल्पफाटा के बीच 4.8 किमी सुरंग पूरी हो चुकी है।
  • वंदे भारत की सफलता के आधार पर, इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (आईसीएफ) मैसर्स भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (बीईएमएल) के सहयोग से 280 किमी प्रति घंटे की डिजाइन गति के साथ हाई-स्पीड ट्रेन सेट का डिजाइन और निर्माण कर रही है।

Valentine's Week List 2026: कब से शुरू हो रहा है वैलेंटाइन वीक? जानिए किस दिन मनाया जाएगा कौन सा डे


Valentine Week: Rose Day, Chocolate Day, Propose Day, Promise Day, teddy day, Hug Day and Kiss Day
Valentine's Week List 2026:
 अभिव्यक्ति के लिए प्यार और भावनाओं के अपने अलग-अलग पहलू हैं जिन्हें केवल लव बर्ड्स द्वारा ही समझा जा सकता है. Valentine’s Week सिर्फ कपल्स के लिए नहीं, बल्कि उन सभी के लिए है जो किसी से सच्चा प्यार करते हैं। इस पूरे हफ्ते में कुल 8 खास दिन मनाए जाते हैं, जो प्यार की अलग-अलग भावनाओं को दर्शाते हैं। यह सप्ताह हमें सिखाता है कि प्यार जताना, उसे समझना और निभाना कितना ज़रूरी है। फरवरी के महीने की शुरुआत में एक तरह का उत्साह होता है हवा में प्यार की भावना और विशेष रूप से लव बर्ड्स के दिलों में. 
वेलेंटाइन वीक मनाने का यही कारण है और इस प्रकार वेलेंटाइन वीक की पूरी डेट शीट को जानें जिसमें रोज़ डे, चॉकलेट डे, प्रपोज़ डे, प्रॉमिस डे, टेडी डे, हग डे और किस डे जैसे दिन शामिल हैं।

नजरिया जीने का: जाने किस दिन पैदा लोग होते हैं ज्यादा रोमांटिक और केयरिंग
 वेलेंटाइन डे 2025  डेट शीट के अनुसार, ये दिन 7 फरवरी से शुरू होते हैं और प्यार के दिन के साथ समाप्त होते हैं, जिसका बहुप्रतीक्षित. वेलेंटाइन डे 14 फरवरी को है। वेलेंटाइन डे 2026 की शुरुआत रोज डे, प्रपोज डे, चॉकलेट डे, टेडी डे, प्रॉमिस डे, हग डे, किस डे से होती है और अंत में वैलेंटाइन वीक लिस्ट 2026  का समापन अर्थात 14 फरवरी को वैलेंटाइन डे।

वैलेंटाइन डे डेट शीट

  1. रोज डे - 7 फरवरी
  2. प्रपोज डे - 8 फरवरी
  3. चॉकलेट डे - 9 फरवरी
  4. टेडी डे - 10 फरवरी
  5. प्रॉमिस डे - 11 फरवरी
  6. हग डे - 12 फरवरी
  7. किस डे - 13 फरवरी
  8. वेलेंटाइन डे - 14 फरवरी
  • 7 फरवरी 2026 – Rose Day: इस दिन गुलाब देकर अपने प्यार का इज़हार किया जाता है क्योंकि लाल गुलाब प्रेम का, गुलाबी अपनापन और पीला दोस्ती का प्रतीक होता है।
  • 8 फरवरी 2026 – Propose Day:  इस दिन लोग अपने दिल की बात सामने रखते हैं और प्यार का प्रस्ताव रखते हैं।
  • 9 फरवरी 2026 – Chocolate Day: सिर्फ  प्यार हीं काफी नहीं है बल्कि रिश्तो की जीवंतता और उन्हें खास बनाने की जरुरत होती है और इसलिए जरुरी है कि आप चॉकलेट देकर अपने प्यार की मिठास को बनाये रखें। 
  • 10 फरवरी 2026 – Teddy Day: प्यार को बनाएं रखने के लिए अपने पार्टनर को गिफ्ट भी देना जरुरी है क्योंकि आपका प्यार आपके गिफ्ट को देखकर हीं तो आपके अहसास को महसूस कर सकता है. इसके लिए जरुरी है कि आप अपने प्यार को टेडी बियर या कोई अन्य गिफ्ट देकर अपनापन जाता सकते हैं. 
  • 11 फरवरी 2026 – Promise Day: वो कहते हैं ना की विश्वास प्रेम की पहली सीढ़ी होती है,  तो इसलिए हीं तो अपने  प्यार के  इस दिन रिश्तों में भरोसे और वादों को मजबूत किया जाता है।
  • 12 फरवरी 2026 – Hug Day: गले लगकर अपने प्यार और सुरक्षा का एहसास कराया जाता है।
  • 13 फरवरी 2026 – Kiss Day:  प्यार को महसूस कराने का सबसे खूबसूरत दिन।
  • 14 फरवरी 2026 – Valentine’s Day: पूरे वैलेंटाइन वीक का सबसे खास दिन, जो प्यार के नाम होता है।

क्या आप जानते हैं, वैलेंटाइन वीक के हर दिन का अपना महत्व है.हर युवा के जीवन का सबसे रोमांचक और बहुप्रतीक्षित दिन एक दूसरे के प्रति प्यार, भावनाओं, सम्मान और समग्र देखभाल की भावना वैलेंटाइन डे की सबसे बड़ी खासियत है। लेकिन आपको पता होना चाहिए कि वैलेंटाइन डे से पहले पूरा वैलेंटाइन वीक होता है जो हम सभी के लिए बेहद अहम होता है।

वेलेंटाइन वीक की शुरुआत

वेलेंटाइन वीक की शुरुआत संत वेलेंटाइन के सम्मान में भव्य समारोहों के साथ होती है, लेकिन अब इन दिनों उत्सवों ने एक नया अर्थ ले लिया है। यहां वेलेंटाइन वीक के बारे में बताया गया है जिसे रोज, प्रपोज, चॉकलेट, प्रॉमिस, टेडी, हग और किस डे के रूप में मनाया जाता है।

जो लोग प्यार में हैं, उनके पास इस सप्ताह भर चलने वाले उत्सवों को मनाने  कारण है. हाँ, वे विशेष संदेशों और उपहारों के साथ चिह्नित करने के लिए वालवंटाइन सप्ताह के प्रत्येक दिन को मनाते हैं। क्या आपके पास वैलेंटाइन वीक 2019 की तारीखों की सूची है? यदि नहीं, तो चिंता न करें, हम आपके और आपके प्रिय के लिए पूरी तिथि सूची के साथ यहां मौजूद हैं.